भारत में विश्व का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है जिसकी लंबाई 47 लाख किलोमीटर है।[1]  इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), एक्सप्रेसवे, राज्य राजमार्ग (एसएच), जिला सड़कें, पीडब्ल्यूडी सड़कें और प्रॉजेक्ट सड़कें शामिल हैं। भारत में 60% से अधिक वस्तुओं को लाने-जाने के लिए सड़कों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि 85% यात्री परिवहन के लिए भी सड़कों का इस्तेमाल किया जाता है।1

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सड़क परिवहन और परिवहन अनुसंधान संबंधी नीतियों को बनाती और प्रबंधित करती है। मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के निर्माण और रखरखाव में भी शामिल है। वह सड़क परिवहन से जुड़े मामलों, जैसे प्रमुख केंद्रीय कानून, मोटर वाहन एक्ट, 1988 का कार्यान्वयन, के संबंध में भी कार्य करता है।

यह नोट 2018-19 में मंत्रालय के प्रस्तावित व्यय, पिछले कुछ वर्षों के वित्त और उससे जुड़े मुद्दों का विवरण प्रस्तुत करता है।

केंद्रीय बजट 2018-19

व्यय:  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का कुल व्यय 71,000 करोड़ रुपए अनुमानित है।[2]  यह 2017-18 के संशोधित अनुमानों से 16% अधिक है। 

2018-19 में मंत्रालय का राजस्व व्यय 11,560 करोड़ रुपए और पूंजीगत व्यय 59,440 करोड़ रुपए होने की उम्मीद है।2  मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पूंजीगत व्यय में काफी वृद्धि की है। 2018-19 में राजस्व और पूंजीगत व्यय का अनुपात 16:84 है। इसकी तुलना में 2015 में राजस्व और पूंजीगत व्यय 41:59 था।

तालिका 1: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के बजट अनुमान (करोड़ रुपए में)

 

वास्तविक 2016-17

संशोधित 2017-18

बजट 2018-19

बअ 2018-19/ संअ 2017-18

राजस्व

11,039

10,136

11,560

14%

पूंजीगत

41,193

50,864

59,440

17%

कुल

52,232

61,000

71,000

16%

Notes: BE Budget Estimate; RE Revised Estimate.

Sources: Notes on Demands for Grants, 2018-2019, Ministry of Road Transport and Highways; PRS

फंड्स का आबंटन और उपयोग

पिछले कुछ वर्षो के दौरान मंत्रालय का वास्तविक आबंटन, बजट अनुमानों से निरंतर कम रहा है। हालांकि यह देखा गया है कि मंत्रालय ने फंड्स का काफी अधिक उपयोग किया है। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016) ने सुझाव दिया था कि संशोधित अनुमान के चरण में आबंटनों में कटौती से बचा जाना चाहिए।[3] 

रेखाचित्र 1: बजट अनुमान बनाम वास्तविक व्यय

* The number for 2017-18 compares the budget estimates with the revised estimates.

Sources: Ministry of Road Transport and Highways budget documents; PRS

बजट भाषण में नीतिगत प्रस्ताव

अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने सड़क क्षेत्र के लिए निम्नलिखित घोषणाएं कीं:

सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस: मौजूदा सड़क सेस (मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल) को सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस में बदला गया है। पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 2 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाया गया है, जबकि इतनी ही राशि एक्साइज और कस्टम ड्यूटी पर कम की गई है।

भारतमाला परियोजना के अंतर्गत 5,35,000 करोड़ रुपए की लागत से चरण 1 में 35,000 किलोमीटर की सड़क बनाई जाएगी।

मेच्योर रोड एसेट्स के लिए बाजार से इक्विटी जुटाने हेतु एनएचएआई अपनी सड़क परिसंपत्तियों को स्पेशल पर्पज वेहिकल के रूप में संगठित करेगी और अन्य नए मोनेटाइजिंग स्ट्रक्चर्स जैसे टोल, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (टॉट) और इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट फंड्स (इनविट्ज़) का प्रयोग करेगी।

सरकार पे एज़ यू यूज़ पर आधारित टोल सिस्टम को शुरू करने हेतु नीति बनाएगी।

वित्तीय विवरण

केंद्र सरकार के व्यय

2018-19 में सबसे अधिक 58% आबंटन सड़क कार्य के लिए है (40.881 करोड़ रुपए)।2  इसके बाद 42% आबंटन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (29,663 करोड़ रुपए) के लिए किया गया है।2 

तालिका 2: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के व्यय की मुख्य मदें

मुख्य मदें

वास्तविक 2016-17

संशोधित 2017-18

बजट 2018-19

बअ 2018-19/ संअ 2017-18

सड़क कार्य

44,463

36,780

40,881

11%

एनएचएआई

7,500

23,892

29,663

24%

सड़क परिवहन और सुरक्षा

1,127

171

315

84%

अन्य

144

158

141

-11%

कुल

52,232

61,000

71,000

16%

Notes: BE Budget Estimate; RE Revised Estimate.

Sources:  Notes on Demands for Grants, 2018-2019, Ministry of Road Transport and Highways; PRS

सड़क कार्य: सड़क कार्य के अंतर्गत व्यय में राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास, एक्सप्रेजवेज़ से संबंधित प्रॉजेक्ट्स, विभिन्न प्रॉजेक्ट्स के अंतर्गत लेन्स की बढ़ती संख्या और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी का विकास शामिल है। सड़क कार्यों हेतु आबंटन 2017-18 के संशोधित अनुमानों (36,780 करोड़ रुपए) से 11% अधिक है।2हालांकि 2016-17 के वास्तविक खर्च (44,463 करोड़ रुपए) से यह आबंटन 8% कम है। 

एनएचएआई: केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और उनके रखरखाव के लिए जिम्मेदार है और एनएचएआई के जरिए इन कार्यों को करती है। राष्ट्रीय राजमार्ग कुल सड़क नेटवर्क का 2% हैं, लेकिन कुल सड़क यातायात का 40% भार उठाते हैं।[4]  

एनएचएआई के व्यय में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्रॉजेक्ट (एनएचडीपी) के अंतर्गत आने वाले प्रॉजेक्ट्स का वित्त पोषण शामिल है। एनएचडीपी के अंतर्गत आने वाले प्रॉजेक्ट्स में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) स्वर्ण चतुर्भुज (गोल्डन क्वाड्रिलेटरल), (ii) उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर, और (iii) चरण III के अंतर्गत आने वाले 12,109 किलोमीटर राजमार्ग की फोर-लेनिंग।1

2018-19 के लिए एनएचएआई को 29,663 करोड़ रुपए आबंटित किए गए जोकि 2017-18 के संशोधित अनुमानों (23,892 करोड़ रुपए) से 24% अधिक है।2इस राशि में 20,093 करोड़ रुपए (68%) केंद्रीय सड़क फंड (सीआरएफ) को प्रदान किए जाएंगे और शेष 9,570 करोड़ रुपए (35%) परमानेंट ब्रिज फीस फंड (पीबीएफएफ) को दिए जाएंगे।2 

मंत्रालय द्वारा फंड्स का प्रबंधन

मंत्रालय विभिन्न फंड्स के जरिए अपने व्यय का प्रबंधन करता है। इनका विवरण निम्नलिखित है।

तालिका 3: फंड्स के हस्तांतरण का सारांश (करोड़ रु. में)

 

वास्तविक 2016-17

संशोधित 2017-18

बजट 2018-19

बअ 2018-19/ संअ 2017-18

सीआरएफ

34,946

43,663

54,014

24%

पीबीएफएफ

7,572

8,562

9,620

12%

NIF

4,465

5,265

6,210

18%

Notes: BE Budget Estimate; RE Revised Estimate.

Sources: Notes on Demands for Grants, 2018-2019, Ministry of Road Transport and Highways; PRS

केंद्रीय सड़क फंड (सीआरएफ)मंत्रालय के व्यय का एक बड़ा हिस्सा सीआरएफ के हस्तांतरणों से प्रबंधित होता है। मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल से जमा होने वाले सेस का एक हिस्सा राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के विकास के लिए निर्धारित है और इस राशि को नॉन-लैप्सेबल सीआरएफ में हस्तांतरित कर दिया जाता है। अंत में इस राशि को देश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए एनएचएआई और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी कर दिया जाता है।[5]  

2018-19 के लिए सीआरएफ से 54,014 करोड़ रुपए के हस्तांतरण का अनुमान है।1 यह 2017-18 के संशोधित अनुमानों (43,663 करोड़ रुपए) से 24% अधिक है। पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए इन अनुदानों के प्रयोग की उम्मीद है।

परमानेंट ब्रिज फीस फंड (पीबीएफएफ)राज्य सरकार द्वारा निम्नलिखित जरिए से जमा धन को बीएफएफ में हस्तांतरित किया जाता है (i) मोटर वाहनों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने कुछ परमानेंट ब्रिजों के प्रयोग पर वसूली जाने वाली फीस, (ii) राष्ट्रीय राजमार्गों का टोल, और (iii) कुछ पीपीपी प्रॉजेक्ट्स का राजस्व शेयर और उन पर प्राप्त होने वाले नेगेटिव ग्रांट्स। इस फंड को राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए सरकार या उन संस्थाओं द्वारा उपयोग किया जाता है।

2018-19 में पीपीएफएफ को 9,620 करोड़ रुपए के हस्तांतरण का अनुमान है।1यह 2017-18 के संशोधित अनुमानों (8,562 करोड़ रुपए) से 12% अधिक है। 

राष्ट्रीय निवेश फंड (एनआईएफ):  2005 में एनआईएफ की स्थापना की गई थी और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश से प्राप्त होने वाली आय जमा होती है। मंत्रालय एनआईएफ के फंड्स से स्पेशल एसेलरेटेड रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम इन नॉर्थ ईस्ट (एसएआरडीपी-एनई) को वित्त पोषित करता है। 

2018-19 में एनआईएफ को 6,210 करोड़ रुपए के हस्तांतरण का अनुमान है।1  2017-18 के संशोधित अनुमानों (5,265 करोड़ रुपए) से इसमें 18% की वृद्धि है। 

योजनाएं

भारतमाला परियोजनाभारतमाला परियोजना राजमार्ग विकास का एक नया अंब्रेला कार्यक्रम है।[6] इसका उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर की संकटपूर्ण कमियों को कम करते हुए फ्रेट और यात्री गतिविधियों की क्षमता में सुधार करना है। राष्ट्रीय राजमार्गों वाले जिलों की संख्या 300 से 550 करना कार्यक्रम का लक्ष्य है।[7] 

24 अक्टूबर, 2017 को केंद्रीय कैबिनेट ने भारतमाला परियोजना के चरण I को मंजूरी दी जिसके अंतर्गत पांच वर्ष की अवधि में 34,800 किलोमीटर की सड़कों को विकसित किया जाएगा। चरण I में एनएचडीपी के अंतर्गत शेष सड़क कार्य को सम्मिलित किया जाएगा। पांच वर्ष की अवधि के दौरान चरण I की अनुमानित आय 5,35,000 करोड़ रुपए है। तालिका 4 में चरण I के विभिन्न घटकों को प्रस्तुत किया गया है।

तालिका 4: भारतमाला परियोजना के चरण 1 के संघटक (2017-2022)

मदें

लंबाई (किलोमीटर में)

परिव्यय (करोड़ रुपए में)

आर्थिक कॉरिडोर विकास

9,000

1,20,000

अंतर-कॉरिडोर और फीडर सड़कें

6,000

80,000

राष्ट्रीय कॉरिडोर क्षमता सुधार

5,000

100,000

सीमा और अंतराष्ट्रीय कनेक्टिविटी सड़कें

2,000

25,000

तटीय और बंदरगाह कनेक्टिविटी सड़कें

2,000

20,000

एक्सप्रेसवेज़

800

40,000

कुल

24,800

3,85,000

एनएचडीपी के अंतर्गत शेष सड़क निर्माण

10,000

1,50,000

कुल

 

5,35,000

Sources: Ministry of Road Transport and Highways; PRS.

विचारणीय मुद्दे

सड़क क्षेत्र को अनेक अवरोधों का सामना करना पड़ता है, जैसे : (i) राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए जमीन की उपलब्धता, (ii) भूमि अधिग्रहण की लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, (iii) डेवलपर्स के साथ इक्विटी की कमी, (iv) राष्ट्रीय राजमार्गों पर बाधाएं और चेकप्वाइंट्स जिसका जीएसटी के लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, (v) फाइसिंग की बढ़ती कीमत, और (vi) रखरखाव के लिए फंड्स की कमी।[8]  इसके अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र (सड़क और राजमार्ग सहित) में एनपीए की कीमत बढ़ रही है। अगस्त, 2016 तक इसमें लगभग 2.6 लाख करोड़ का एनपीए था।[9]  हम इनमें से कुछ समस्याओं पर निम्नलिखित चर्चा कर रहे हैं।

लक्ष्य बनाम प्रदर्शन

सड़क निर्माण: पिछले तीन वर्षों में निर्माण लक्ष्यों (राष्ट्रीय राजमार्गों) की उपलब्धि 55% से 70% रही है। 2017-18 के लिए सड़क निर्माण का लक्ष्य 15,000 किलोमीटर था जिसमें 4,292 किलोमीटर का निर्माण (33%) 30 नवंबर, 2017 तक कर लिया गया।[10]  इससे 20 किमी प्रति दिन के निर्माण की दर का संकेत मिलता है (देखें तालिका 6)। यह पिछले वर्ष की निर्माण दर, यानी 22 किमी प्रति दिन से कुछ कम है। यह देखते हुए कि वर्ष के पहले आठ महीनों में 33% लक्ष्य पूरा हुआ है, अभी यह देखना बाकी है कि शेष चार महीनों में कितना लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

तालिका 5: सड़क निर्माण के लक्ष्य बनाम उपलब्धियां (राष्ट्रीय राजमार्ग)

वर्ष

लक्ष्य (किमी)

उपलब्धियां (किमी)

उपलब्धि  (% में)

2014-15

6,300

4,410

70%

2015-16

10,950

6,061

55%

2016-17

15,000

8,231

55%

2017-18

15,000

4,942*

33%*

* data as of November 30, 2017

Sources: Rajya Sabha questions; PRS.

कैग ने यह कहा था कि 2009-10 से 2012-13 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की दर 3.06 किमी प्रति दिन से 17.81 किमी प्रति दिन के बीच थी, जबकि लक्ष्य 20 किमी प्रति दिन का था।[11] 

परिवहन संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2017) ने कहा कि फंड्स की कमी के कारण कोई भी योजना या लक्ष्य पूरे नहीं हो सके। प्रॉजेक्ट्स के पूरे न होने के कई कारण हैं, जैसे मंजूरी न मिलना, ठेकेदारों का खराब वित्तीय और तकनीकी प्रदर्शन और कानून एवं व्यवस्था की समस्याएं।  

प्रॉजेक्ट्स में देरी

सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी कमिटी (2017) का कहना है कि 1995 से जुलाई 2016 तक पूरे हुए कुल 388 प्रॉजेक्ट्स में से केवल 55 प्रॉजेक्ट्स समय पर या समय से पहले पूरे हुए।[12]  प्रॉजेक्ट्स पूरे न होने के निम्नलिखित कारण थे : (i) भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय एवं वन मंजूरियों में लगने वाला लंबा समय, (ii) आर्थिक मंदी के कारण कन्सेशनर्स का खराब प्रदर्शन, और (iii) कानून एवं व्यवस्था की समस्याएं।  

कैग ने कहा कि बहुत से सड़क प्रॉजेक्ट्स अदालतों की निषेधाज्ञा के कारण ठप्प पड़ जाते हैं।[13] 31 जुलाई, 2017 तक 11,216 करोड़ रुपए की कुल लागत वाले 30 सड़क प्रॉजेक्ट्स तीन सालों से रुके हुए थे। इससे प्रॉजेक्ट की लागत बढ़ती है और परिणामस्वरूप कुछ प्रॉजेक्ट लाभकारी नहीं रहते।    

तालिका 7 में विभिन्न प्रकार की मंजूरियों में लगे वाले समय को प्रदर्शित किया गया है। 

तालिका 6: मंजूरी लेने में लगने वाला समय

अपेक्षित मंजूरी

वैधानिक अथॉरिटी

समय

पर्यावरणीय

पर्यावरण और वन मंत्रालय

12-15 महीने

वन

पर्यावरण और वन मंत्रालय

1-2 वर्ष

वन्यजीव

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय

3 वर्षों से अधिक

Sources: Outcome Budget 2015-16, Ministry of Road Transport and Highways; PRS

परिवहन संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2015) ने सुझाव दिया था कि केंद्रीय स्तर पर वित्त, पर्यावरण एवं वन और रक्षा मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित करने से मंजूरियों की प्रक्रिया को गति मिल सकती है।16  स्टैंडिंग कमिटी ने यह सुझाव भी दिया था कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को कन्सेशनर्स को किसी प्रॉजेक्ट को देने से पहले इन सभी मंजूरियों को हासिल करना चाहिए। एनएचएआई को निम्नलिखित कार्य करना चाहिए : (i) तकनीकी जांच करना चाहिए, (ii) लागत का अनुमान लगाना चाहिए, और (iii) यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कन्सेशनर्स को कोई प्रॉजेक्ट देने से पहले सभी मंजूरियां मिल गई हैं।

भूमि अधिग्रहण की बढ़ती लागत

1 जनवरी, 2015 से एनएचएआई द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन एक्ट, 2013 द्वारा निर्धारित किया जाता है। सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी कमिटी (2017) का कहना है कि 2013 के एक्ट के अंतर्गत अत्यधिक मुआवजे के कारण भूमि अधिग्रहण पर सड़क परिवहन मंत्रालय का व्यय 2014-15 में 9,097 करोड़ रुपए से बढ़कर 2015-16 में 21,933 करोड़ रुपए हो गया।12 

कमिटी ने यह भी गौर किया कि पुराने कानून के अंतर्गत कम मुआवजे के पात्र किसान बढ़े हुए मुआवजे के लिए अदालतों में जा रहे हैं।12इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित हो रही है और प्रॉजेक्ट्स की लागत बढ़ रही है। 

एनएचएआई का प्रदर्शन

नियंत्रक और महा लेखा परीक्षक (2016) ने एनएचएआई की कई प्रक्रियागत अक्षमताओं पर टिप्पणी की। उदाहरण के लिए मंजूरियों, टोल के कामकाज में देरी और दूसरी प्रक्रियागत खामियों के कारण एनएचएआई को कुछ प्रॉजेक्ट्स में टोल नहीं मिल सकता।[14]  एनएचएआई ने प्रॉजेक्ट वाइस बैलेंस शीट के रखरखाव और कैश फ्लो के संबंध में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया।14टोल जमा करने वाली एजेंसियों को चुनने के लिए उचित बोली प्रक्रिया का इस्तेमाल न करने के कारण भी राजस्व का नुकसान हुआ।14 

सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी कमिटी (2017) ने एनएचएआई के वित्तीय प्रदर्शन में अनेक समस्याओं पर टिप्पणी की, जैसे (i) फंड्स कम होना, (ii) आबंटित और जारी किए गए फंड्स की राशि में अंतर होना, और (iii) फंड्स का पूरा उपयोग न होना।12उदाहरण के लिए वित्तीय वर्ष के अंत में खर्च न होने वाली धनराशि को अगले वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में ओपनिंग बैलेंस के तौर पर दिखाया गया है। 2015-16 और 2016-17 में ओपनिंग बैलेंस क्रमशः 2,672 करोड़ रुपए और 6,740 करोड़ रुपए था।12इससे प्रदर्शित होता है कि एनएचएआई उपलब्ध धनराशि का बेहतर उपयोग करने में सक्षम नहीं रही।

वित्त पोषण से संबंधित मुद्दे

वित्त पोषण में केंद्र सरकार की भूमिकापरिवहन संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016) ने गौर किया कि जबकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सड़कों के निर्माण में निवेश करता है, उसके पास केंद्र सरकार के बजटीय समर्थन के अलावा राजस्व का अपना कोई स्रोत नहीं है।[15] कमिटी ने सुझाव दिया कि आरबीआई और वित्त मंत्रालय ऐसे समर्पित वित्तीय संस्थानों को स्थापित करने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय की मदद कर सकते हैं जो सड़क क्षेत्र के विकास के लिए फंड्स को जनरेट करें। कमिटी ने यह सुझाव भी दिया कि सड़क परिवहन मंत्रालय को टोल कलेक्शन पर निगरानी रखनी चाहिए और अतिरित धन को स्ट्रेस्ड प्रॉजेक्ट्स के लिए चैनलाइज करना चाहिए।  

स्टैंडिंग कमिटी (2016) ने यह भी कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने सड़क क्षेत्र के लिए एक बड़ा बजट आबंटित किया है, फिर भी यह लंबे समय तक कायम नहीं रहेगा।15कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार को सड़क क्षेत्र में निजी निवेश को फिर से शुरू करने के उपाय करने चाहिए और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उपयुक्त वित्तीय संस्थान और मॉडल स्थापित करने चाहिए।

निजी वित्त पोषण और कॉन्ट्रैक्ट: यह गौर किया गया कि सड़क क्षेत्र निजी वित्त पोषण के लिए संघर्ष कर रहा है।4,[16]अनेक पीपीपी प्रॉजेक्ट्स के लिए बोलियां नहीं लगाई गईं।16  देश के प्रमुख हाईवे डेवलपर्स को भी वित्तीय क्षमता से संबंधित अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है।

इन्हीं कारणों से कुछ प्रॉजेक्ट्स निर्माण के चरण में रुक गए हैं और इससे बोली लगाने वाली संभावित कंपनियां निरुत्साहित भी होती हैं।16 

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के पीपीपी मॉडल की समीक्षा और उसे दोबारा मजबूत करने पर गठित कमिटी (चेयर: डॉ. विजय केलकर) ने नवंबर 2015 में भारत में पीपीपी प्रॉजेक्ट्स की समस्याओं पर विचार किया।[17]  कमिटी ने सड़क क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र रेगुलेटर बनाने का सुझाव दिया। यह भी कहा गया कि नागरिकों को सेवा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है और इन जिम्मेदारियों से बचने के लिए पीपीपीज़ को इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

केलकर कमिटी ने कहा था कि जोखिम का अक्षम और समान वितरण उन मुख्य कारकों में से एक हो सकता है जिनकी वजह से पीपीपीज़ असफल होते हैं।17पीपीपी ठेकों में सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच जोखिमों का सही तरीके से वितरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जोखिम वितरण का मुख्य सिद्धांत यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि जो कंपनी जोखिम का वहन करने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है, उसे जोखिम सौंपा जाना चाहिए।

केलकर कमिटी ने यह भी गौर किया कि चूंकि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स 20-30 वर्ष तक चलते हैं, निजी डेवलपर आर्थिक और नीतिगत परिवेश में अप्रत्याशित परिवर्तनों के कारण सौदेबाजी की शक्ति गंवा सकते हैं।17  कमिटी ने सुझाव दिया कि निजी क्षेत्र को इस नुकसान (सौदेबाजी की शक्ति के ह्रास) से संरक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए करार पर दोबारा बातचीत की अनुमति देने के लिए कन्सेशन समझौते की शर्तों में संशोधन किया जा सकता है।

जनवरी 2016 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने निजी क्षेत्र की सहभागिता में राजमार्ग प्रॉजेक्ट्स को लागू करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल को मंजूरी दी।[18] 

इस मॉडल के अंतर्गत सरकार और निजी कंपनी प्रॉजेक्ट की लागत को 40:60 के अनुपात में शेयर करेंगे। इस मॉडल से सरकार के लिए शुरुआती पूंजी प्रवाह कम होने की उम्मीद है, चूंकि बड़ा भुगतान तो एन्युटी भुगतान के जरिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निजी कंपनी को ट्रैफिक और महंगाई जैसे जोखिमों से इन्सुलेट किया जाएगा, चूंकि इन्हें सरकार  स्वयं संभालेगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर लेंडिंगपरिवहन संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016) ने गौर किया कि सड़क क्षेत्र को संवितरित किए गए दीर्घावधि के कई ऋण नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीएज़) में बदल रहे हैं।15  बिना उचित अध्ययन किए प्रॉजेक्ट्स की बोलियां लगाई जाती हैं और प्रॉजेक्ट्स जल्दबाजी में दिए जाते हैं। परिणामस्वरूप प्रॉजेक्ट्स रुक जाते हैं और कन्सेशनर्स प्रॉजेक्ट्स को अधूरा छोड़ देते हैं। कन्सेशनर्स को अधिक राजस्व प्राप्त होने की भी उम्मीद थी लेकिन उन्हें हालिया आर्थिक मंदी के कारण कम कमाई हुई।15 

बैंक और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर लेंडिंग संस्थाएं राजमार्ग क्षेत्र को वित्त पोषित करने की इच्छा भी नहीं रखतीं।15  इससे ऋण चुकाने में दिक्कतें होती हैं, और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे प्रॉजेक्ट की लागत तो बढ़ती ही है, देरी के कारण अतिरिक्त ऋण लेना भी मुश्किल होता है।15

कमिटी ने सुझाव दिया कि कन्सेशनर्स को ऋण देने से पहले बैंकों को उचित परिश्रम करना चाहिए। उसने यह भी कहा कि बैंक एनपीएज़ को सरकारी आबंटनों से मदद दी जा सकती है। इसके अलावा बुरे लोन्स से रिकवर होने के लिए बैंकों को सशक्त बनाया जा सकता है। एनएचएआई के मॉडल कन्सेशन समझौते को नियम और शर्तों को बदलने के लिए पुनर्गठित किया जाना चाहिए जिससे बैंकों में एनपीए इकट्ठा न हो जाए।

सड़कों के रखरखाव हेतु निवेश

2018-19 में मंत्रालय ने सड़कों और राजमार्गो (टोल बिज सहित) के रखरखाव के लिए 3,071 करोड़ रुपए का आबंटन किया। यह 2017-18 के संशोधित अनुमानों से 37 करोड़ रुपए कम है।

मंत्रालय ने अपना 4% बजट राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव के लिए आबंटित किया है। यह 1.15 लाख किलोमीटर की कुल राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए है। इसकी तुलना में 2014-15 में यूएस सरकार ने अपने कुल बजट का 48% (19.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) मौजूदा सड़कों और राजमार्गों के रखरखाव के लिए आबंटित किया था।[19]  यह 10.16 लाख मील (या 16.37 लाख किलोमीटर) लंबे कुल राजमार्ग के लिए था (ऐसे राजमार्ग जिन्हें संघीय सहायता मिलती है।[20] 

राष्ट्रीय परिवहन विकास नीति कमिटी (2014) ने गौर किया था कि सड़कों के निर्माण और अपग्रेडेशन पर खर्च होने वाली राशि की तुलना में मौजूदा सड़कों के रखरखाव पर कम खर्च किया जाता है।[21]  इससे सड़कों पर गड्ढे बनते हैं, पुल कमजोर होते हैं, फुटपाथ खराब होते हैं, इत्यादि। इसके अतिरिक्त सड़कों का रखरखाव तभी किया जाता है, जब यह जरूरी होता है, जबकि यह रोकथामकारी उपाय का एक अंग है।21 

परिवहन संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2017) ने राजमार्गों के रखरखाव के लिए किए गए आबंटन पर चिंता भी जाहिर की। देश में राजमार्गों की जितनी लंबाई है, उनका रखरखाव इतनी राशि से नहीं किया जा सकता। यह सुझाव दिया गया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव का बजट बढ़ाया जाना चाहिए। सड़कों के रखरखाव को पहली वरीयता दी जानी चाहिए क्योंकि इससे सड़कों का जीवन काल बढ़ता है। सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए प्रभावी निरीक्षण तंत्र मौजूद होना चाहिए।16  इसके अतिरिक्त खराब क्वालिटी की मरम्मत, रखरखाव और निर्माण की स्थिति मे ठेकेदारों और इंजीनियरों को सजा दी जानी चाहिए। 

सड़क सुरक्षा में निवेश

2018-19 में मंत्रालय ने सड़क परिवहन और सुरक्षा के लिए 135 करोड़ रुपए का आबंटन किया था। इसके अंतर्गत अनेक कदम शामिल हैं जैसे सड़क सुरक्षा कार्यक्रम, दुर्घटना पीड़ितों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर केंद्रों की स्थापना करना, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन करना, सार्वजनिक परिवहन को मजबूती देना, शोध और विकास, तथा प्रशिक्षण। ्यक्रम, दुर्घटना पीड़ितों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ी लागत तो बढ़ती ही है, दे

यह मंत्रालय के कुल बजट का लगभग 0.4% है। इसकी तुलना में यूएस की संघीय सरकार सड़कों और राजमार्गों की सुरक्षा पर अपने कुल व्यय का 20% (7.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) खर्च करती है।19 

2005 और 2015 के बीच सड़क नेटवर्क में 44% की वृद्धि हुई।[22] इस अवधि के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 14% की बढ़ोतरी हुई और इन दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या 54% बढ़ी।[23]  2016 में भारत में 4,80,652 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.5 लाख लोग मारे गए और पांच लाख लोग घायल हुए।[24]  ब्रासिलिया कन्वेंशन के हस्ताक्षरकर्ता के तौर पर सरकार का इरादा 2020 तक ट्रैफिक संबंधी मौतों को 50% कम करना है।[25]  

अप्रैल 2017 में लोकसभा में पारित मोटर वाहन (संशोधन) बिल, 2016 (वर्तमान में राज्यसभा में लंबित) सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को संबोधित करने के लिए मोटर वाहन एक्ट, 1988 में संशोधन करने का प्रयास करता है। बिल मोटर वाहन दुर्घटना कोष का प्रावधान करता है जिसे घायल लोगों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाएगा। बिल सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार और दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल उपचार देने के लिए गोल्डन आवर (स्वर्णिम घंटा) योजना का प्रावधान भी करता है। यह राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड भी प्रदान करता है। बोर्ड केंद्र और राज्य सरकारों को सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के सभी पहलुओं पर सलाह देगा।

सुदूर क्षेत्रों में कनेक्टिविटी

जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी अच्छी नहीं है, वहां राजमार्गों के विकास के लिए भी धनराशि आबंटित की गई है। इन प्रॉजेक्ट्स में स्पेशल एसेलरेटेड रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम इन नॉर्थ ईस्ट (एसएआरडीपी-एनई), एक्सटरनली एडेड प्रॉजेक्ट्स (ईएपी) और वामपंथी अतिवादी प्रभावित क्षेत्रों (ईडब्ल्यूई) में सड़क प्रॉजेक्ट्स शामिल हैं। 2017 में सरकार ने 2022 तक इन चालू योजनाओं के अंतर्गत 48,877 किलोमीटर प्रॉजेक्ट्स के कार्यान्वयन की घोषणा की। इन प्रॉजेक्ट्स का परिव्यय 1,57,324 करोड़ रुपए होगा।[26]

बजट 2018-19 में एसएआरडीपी-एनई प्रॉजेक्ट के लिए 6,210 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं, जोकि पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से 18% अधिक हैं। जहां तक एलडब्ल्यूई क्षेत्रों के प्रॉजेक्ट्स का सवाल है, परिवहन संबंधी स्टैंडिंग कमिटी का कहना है कि 2016-17 की तुलना में आबंटन में 24% की गिरावट हुई है (बजट अनुमानों की तुलना में संशोधित अनुमान)। इस पर यह चिंता जाहिर की गई कि बजट में ऐसी कटौतियों से बचा जाना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है।

 

[1] Annual Report 2013-14, Ministry of Road Transport and Highways.

[2] Notes on Demands for Grants 2018-19, Demand no 81, Ministry of Road Transport and Highways, http://www.indiabudget.gov.in/ub2018-19/eb/sbe81.pdf.

[3] 234th Report: Demands for Grants (2016-17) of Ministry of Road Transport and Highways, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, May 2016-17, http://164.100.47.5/newcommittee/reports/EnglishCommittees/Committee%20on%20Transport,%20Tourism%20and%20Culture/234.pdf.

[4] Outcome Budget 2015-16, Ministry of Road Transport and Highways.

[5] Notes on Demand for Grants 2014-15, Demand no 83, Ministry of Road Transport and Highways

[6] Bharatmala Pariyojana Phase I, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, October 25, 2017 http://pibphoto.nic.in/documents/rlink/2017/oct/p2017102504.pdf.

[7] Unstarred question no. 1129, Lok Sabha, December 21, 2017,.http://164.100.47.194/Loksabha/Questions/QResult15.aspx?qref=59211&lsno=16.

[8] Chapter 8: Industry and Infrastructure, Economic Survey 2016-17, Volume 2, August 2017, http://www.indiabudget.gov.in/es2016-17/echapter_vol2.pdf.

[9] 246th Report: Demands for Grants (2017-18) of Ministry of Road Transport and Highways, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, March 17, 2017, http://164.100.47.5/newcommittee/reports/EnglishCommittees/Committee%20on%20Transport,%20Tourism%20and%20Culture/246.pdf.

[10] Unstarred Question No 243, Rajya Sabha, Ministry of Road Transport and Highways, Answered on December 18, 2017

[11] Report No 36 of 2014, Performance Audit of Implementation of Public Private Partnership Projects in National Highways Authority of India, Comptroller and Auditor General of India, December 23, 2014, http://www.cag.gov.in/sites/default/files/audit_report_files/Union_Performance_Commercial_PPP_Projects_Ministry_Road_Transport_Highways_36_2014.pdf.

[12] Report No. 19, Committee on Public Undertaking: ‘National Highways Authority of India, Lok Sabha, August 2, 2017, http://164.100.47.193/lsscommittee/Public%20Undertakings/16_Public_Undertakings_19.pdf.

[13] Chapter 9: Ease of Doing BusinessNext Frontier: Timely Justice, Economic Survey 2017-18, http://mofapp.nic.in:8080/economicsurvey/pdf/131-144_Chapter_09_ENGLISH_Vol%2001_2017-18.pdf.

[14] Chapter 12: Ministry of Road Transport and Highways, Report No. 9 of 2017, 2016, Compliance Audit Union Government Commercial, Comptroller and Auditor General of India, April 5, 2017, http://www.cag.gov.in/sites/default/files/audit_report_files/Executive_Summary_report_No_9_%20of_2017_on_compliance_audit_observations_union_government.pdf.

[15] 236th Report: Infrastructure Lending in Road Sector, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, August 10, 2016, http://164.100.47.5/newcommittee/reports/EnglishCommittees/Committee%20on%20Transport,%20Tourism%20and%20Culture/236.pdf.

[16] 220th Report: Demands for Grants (2015-16) of Ministry of Road Transport and Highways, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, April 28, 2015

[17]Report of the Committee on Revisiting and Revitalising Public Private Partnership Model of Infrastructure, Department of Economic Affairs, Ministry of Finance, November 2015

[18]Hybrid annuity model for implementing highway projects, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport & Highways, January 27, 2016.

[19] FHWA FY 2016 Budget, Federal Highway Administration, https://cms.dot.gov/sites/dot.gov/files/docs/FY2016-BudgetEstimate-FHWA.pdf.

[20] Public Road Length 2014, Miles by Ownership and Federal-Aid Highways, Federal Highway Information, US Department of Transportation, October 2015, https://www.fhwa.dot.gov/policyinformation/statistics/2014/pdf/hm16.pdf.

[21]Volume 3, Chapter 2, Roads and Road Transport, India Transport Report: Moving India to 2032, National Transport Development Policy Committee, June 17, 2014, http://planningcommission.nic.in/sectors/NTDPC/volume3_p1/roads_v3_p1.pdf.

[22]Basic Road Statistics 2014-15, Ministry of Road Transport and Highways http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=2445.

[23]Road Accidents in India 2015, Ministry of Road Transport and Highways, May 2015, http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=2143.

[24] Road Accidents in India 2016, Transport Research Wing, Ministry of Road Transport and Highways, http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=2904.

[25] Consultative Committee of the Ministry of Road Transport & Highways discusses functioning of NHIDCL and Road Safety, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, March 22, 2016

[26]Investment on Highways, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport & Highways, February 5, 2018, http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=176197.

 

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