Chapter At A Glance

लेजिसलेटिव ब्रीफ

बांध सुरक्षा बिल, 2019

बिल की मुख्‍य विशेषताएं

  • बिल देश भर में निर्दिष्ट बांधों की चौकसी, निरीक्षण, परिचालन और रखरखाव संबंधी प्रावधान करता है। इन बांधों में 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले, या 10 मीटर से 15 मीटर की ऊंचाई तथा विशिष्ट डिजाइन और स्ट्रक्चर वाले बांध शामिल हैं।
     
  • बिल दो राष्ट्रीय निकायों: राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी की स्थापना करता है। कमिटी के कार्यों में बांध सुरक्षा मानदंडों से संबंधित नीतियां बनाना और रेगुलेटरों को सुझाव देना है। अथॉरिटी के कार्यों में राष्ट्रीय कमिटी की नीतियों को लागू करना, राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) को तकनीकी सहायता प्रदान करना और राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) के बीच, और एसडीएसओ एवं उस राज्य के बांध मालिकों के बीच के विवादों को सुलझाना शामिल है।
     
  • बिल दो राज्य स्तरीय निकायों: राज्य बांध सुरक्षा कमिटी और राज्य बांध सुरक्षा संगठन की स्थापना भी करता है। ये निकाय अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले बांधों की चौकसी, निरीक्षण, और परिचालन की निगरानी एवं रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगे।
     
  • बिल की अनुसूची में राष्ट्रीय निकायों और राज्य बांध सुरक्षा कमिटी के कार्यो का उल्लेख है। इन अनुसूचियों को सरकारी अधिसूचना के जरिए संशोधित किया जा सकता है।
     
  • बिल के अंतर्गत अपराधों के फलस्वरूप दो वर्ष तक की कैद, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

  • बिल देश के सभी निर्दिष्ट बांधों पर लागू होता है। इनमें राज्यों के भीतर बहने वाली और राज्यों के बीच बहने वाली, दोनों प्रकार की नदियों पर बने बांध शामिल हैं। संविधान के अनुसार, राज्य जल जैसे विषय पर कानून बना सकते हैं जिनमें पानी का स्टोरेज और जल शक्ति भी शामिल हैं। फिर भी अगर जनहित में जरूरी माना जाता हो तो संसद भी अंतरराज्यीय नदी घाटियों को रेगुलेट और विकसित कर सकती है। अब प्रश्न यह है कि क्या संसद को पूरी तरह से राज्य के भीतर बहने वाली नदियों पर निर्मित बांधों को रेगुलेट करने का अधिकार है। 
     
  • राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी, राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी और राज्य बांध सुरक्षा कमिटी के कामकाज का उल्लेख बिल की अनुसूची में है। इन अनुसूचियों को सरकारी अधिसूचना के जरिए संशोधित किया जा सकता है। प्रश्न यह है कि क्या अथॉरिटी के मुख्य कामकाज को एक अधिसूचना के जरिए संशोधित किया जा सकता है या क्या इन संशोधनों को संसद द्वारा पारित होना चाहिए।

भाग क : बिल की मुख्य विशेषताएं

संदर्भ

बांध नदियों पर बने कृत्रिम अवरोधक होते हैं जो पानी स्टोर करते हैं और सिंचाई, बिजली उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और जलापूर्ति में मदद करते हैं।[1]  भारत में बड़े बांध उन बांधों को कहते हैं जोकि 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले होते हैं। इसके अतिरिक्त इस श्रेणी में 10 मीटर और 15 मीटर के बीच की ऊंचाई बांध भी आते हैं जोकि डिजाइनिंग की अतिरिक्त शर्तों को पूरा करते हों। जून 2019 तक भारत में 5,745 बड़े बांध थे (इनमें निर्माणाधीन बांध भी शामिल हैं)।[2]  इनमें 5,675 बड़े बांधों को राज्यों, 40 को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, और पांच को निजी एजेंसियों द्वारा परिचालित किया जाता है।2  इन बांधों में 75% से अधिक 20 वर्ष से पुराने हैं और लगभग 220 बांध 100 वर्ष से पुराने हैं।2,[3]  इनमें से अधिकतर बड़े बांध महाराष्ट्र (2394), मध्य प्रदेश (906), और गुजरात (632) में हैं।2

चूंकि बांध के जलाशय में बड़ी मात्रा में पानी स्टोर रहता है, इसलिए बांध के टूटने पर जानो-माल का भारी नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि बांध की सुरक्षा की निगरानी करना अनिवार्य होता है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अंतर्गत केंद्रीय बांध सुरक्षा संगठन बांध मालिकों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है और बांध संबंधी आंकड़ों का रखरखाव करता है। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी सुरक्षा संबंधी नीतियां और रेगुलेशंस बनाती है।[4]  वर्तमान में 18 राज्यों और बांधों के स्वामित्व वाले चार संगठनों के अपने खुद के बांध सुरक्षा संगठन हैं।[5]  सीडब्ल्यूसी इस बात का प्रावधान करता है कि प्रत्येक बांध मालिक हर वर्ष बारिश के मौसम से पहले और उसके बाद बांधों का निरीक्षण करेगा (जिसमें साइट की स्थितियां, बांधों का परिचालन शामिल है)।[6] हालांकि 2008 से 2016 के दौरान बाढ़ के पूर्वानुमान पर कैग की रिपोर्ट में 17 राज्यों पर अध्ययन किया गया। इनमें से सिर्फ दो राज्यों ने ऐसे निरीक्षण किए थे।[7] 

बांध सुरक्षा पर गठित सीडब्ल्यूसी कमिटी (1986) ने सभी बांधों के लिए एक समान सुरक्षा प्रक्रियाओं और विधायी ढांचे का सुझाव दिया था।[8] 2007 में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने प्रस्ताव पारित किए जिसमें संसद से बांध सुरक्षा पर कानून बनाने का अनुरोध किया गया था। परिणामस्वरूप लोकसभा में अनुच्छेद 252 के अंतर्गत बांध सुरक्षा बिल, 2010 पेश किया गया (यह अनुच्छेद संसद को राज्य के विषयों पर कानून बनाने की अनुमति देता है और ये कानून उन्हीं राज्यों पर लागू होते हैं जिन्होंने ऐसे कानूनों के संबंध में प्रस्ताव किए हों)।[9]  15वीं लोकसभा के भंग होने पर 2010 का बिल लैप्स हो गया। इसके बाद बांध सुरक्षा बिल, 2019 को लोकसभा में 29 जुलाई, 2019 को पेश किया गया और 2 अगस्त, 2019 को यह बिल लोकसभा में पारित हो गया।

प्रमुख विशेषताएं

  • बिल देश के सभी निर्दिष्ट बांधों पर लागू होता है। इन बांधों में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले, या (ii) 10 से 15 मीटर के बीच की ऊंचाई वाले बांध जोकि डिजाइनिंग की कुछ अतिरिक्त शर्तों को पूरा करते हों जैसे जिन बांधों की जलाशय क्षमता कम से कम एक मिलियन (दस लाख) क्यूबिक मीटर हो और जिनके ऊपरी हिस्से की लंबाई कम से कम 500 मीटर हो।

बांध मालिकों की बाध्यताएं

  • बांध मालिक बांधों के सुरक्षित निर्माण, परिचालन, ररखरखाव और निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे। उन्हें प्रत्येक बांध में एक सुरक्षा इकाई बनानी होगी। यह इकाई निम्नलिखित स्थितियों में बांधों का निरीक्षण करेगी: (i) बारिश के मौसम से पहले और बाद में, और (ii) हर भूकंप, बाढ़, प्राकृतिक आपदा या संकट की आशंका के दौरान और उसके बाद। बांध मालिकों के कामकाज में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आपातकालीन कार्य योजना तैयार करना, (ii) निर्दिष्ट अंतराल पर नियमित जोखिमों का आकलन करना, और (iii) विशेषज्ञ पैनल के जरिए प्रत्येक बांध का व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन करना।

बांध सुरक्षा अथॉरिटीज़ और डेलिगेटेड लेजिसलेशन (प्रत्यायोजित विधान)

  • बिल बांध सुरक्षा के रेगुलेशन और निगरानी के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर अथॉरिटीज़ की स्थापना का प्रावधान करता है। बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय निकायों और राज्य कमिटियों के कामकाज का उल्लेख बिल की अनुसूचियों में प्रदान किया गया है। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए इन अनुसूचियों में संशोधन कर सकती है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर बिल निम्न की स्थापना करता है (i) राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी, जिसके कार्यों में बांध सुरक्षा संबंधी नीतियां बनाना और रेगुलेशंस का सुझाव देना शामिल है, और (ii) राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी, जिसके कार्यों में राष्ट्रीय कमिटी द्वारा निर्मित नीतियों को लागू करना, और राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) के बीच, तथा एसडीएसओ एवं उस राज्य के किसी बांध मालिक के बीच के विवादों को सुलझाना शामिल है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी के अधिकारियों की क्वालिफिकेशन और कार्यों को अधिसूचित कर सकती है।
  • राज्य स्तर पर बिल निम्न की स्थापना करता है (i) राज्य बांध सुरक्षा संगठन (एसडीएसओज़) जिनके कार्यों में बांधों की निरंतर चौकसी, निगरानी और निरीक्षण करना शामिल है, और (ii) राज्य बांध सुरक्षा कमिटी, जोकि राज्य बांध पुनर्वास कार्यक्रमों की निगरानी, एसडीएसओ के कार्यों की समीक्षा और बांध सुरक्षा के लिए सुझाए गए उपायों की प्रगति की समीक्षा करेगी। राज्य सरकार राष्ट्रीय बांध सुरक्षा संगठनों के अधिकारियों की क्वालिफिकेशन और कार्यों को अधिसूचित कर सकती है। वह गैर निर्दिष्ट बांधों के मालिकों द्वारा किए जाने वाले सुरक्षा उपायों को भी अधिसूचित कर सकती है।

अपराध और सजा

  • अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को बिल के अंतर्गत प्रदत्त कार्य करने से रोकता है या निर्देशों के अनुपालन से इनकार करता है तो उसे एक वर्ष तक की कैद हो सकती है। अगर अपराध के कारण किसी की मृत्यु हो जाती है तो कैद की अवधि दो वर्ष तक हो सकती है।  

भाग ख: प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

क्या संसद को राज्य के भीतर बहने वाली नदियों पर निर्मित बांधों के संबंध में कानून बनाने का अधिकार है

बिल देश में सभी निर्दिष्ट बांधों पर लागू होता है। इनमें (i) 15 मीटर से अधिक ऊंचाई, या (ii) 10 मीटर से 15 मीटर की ऊंचाई वाले बांध शामिल हैं जोकि विशिष्ट डिजाइन और स्ट्रक्चर वाले हों। इनमें अंतरराज्यीय नदियों पर बने बांध और राज्यों के भीतर बहने वाली नदियों पर बने बांध शामिल हैं। प्रश्न यह है कि क्या संसद को राज्यों के भीतर बहने वाली नदियों पर निर्मित बांधों पर कानून बनाने का अधिकार है। 

राज्य सूची की प्रविष्टि 17 के अनुसार, राज्य जलापूर्ति, सिंचाई और नहरों, जल निकासी और तटबंधों, पानी के स्टोरेज और जलशक्ति पर कानून बना सकते हैं जोकि संघ सूची की प्रविष्टि 56 के अधीन होगा। संघ सूची की प्रविष्टि 56 में संसद को इस बात की अनुमति दी गई है कि वह अंतरराज्यीय नदियों और नदी घाटियों के रेगुलेशन पर कानून बना सकती है, अगर ऐसे रेगुलेशन बनाना जनहित में जरूरी हो। बिल के अनुसार, जनहित में संघ के लिए यह जरूरी है कि वह सभी निर्दिष्ट बांधों के लिए एक समान सुरक्षा प्रक्रिया को रेगुलेट करे। हालांकि प्रविष्टि 17 को देखते हुए यह अस्पष्ट है कि संसद को राज्यों के भीतर बहने वाली नदियों और उसकी घाटी में बने बांधों पर कानून बनाने का अधिकार कैसे मिल सकता है।  

उल्लेखनीय है कि बांध सुरक्षा बिल, 2010 को अनुच्छेद 252 के अंतर्गत लोकसभा में पेश किया गया था।9  यह अनुच्छेद संसद को इस बात की अनुमति देता है कि वह राज्य सूची में आने वाले विषयों पर कानून बना सकती है, अगर दो या उससे अधिक राज्यों ने ऐसे कानून बनाने से संबंधित प्रस्ताव पारित किए हों, और यह कानून उन राज्यों पर लागू होता है। दूसरे राज्य प्रस्ताव पारित करके इस कानून को अपना सकते हैं। आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने बांध सुरक्षा पर कानून के लिए प्रस्ताव पारित किए थे।92010 के बिल की प्रस्तावना के अनुसार, संसद के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वह राज्यों के लिए एक समान बांध सुरक्षा प्रक्रियाओं पर कानून बनाए।    

अथॉरिटीज़ के कार्यों को अधिसूचना के जरिए बदला जा सकता है

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी, राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी और राज्य बांध सुरक्षा कमिटी के कार्यों का उल्लेख बिल की अनुसूची में है। इनके कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) के बीच, और एसडीएसओ एवं उस राज्य के किसी बांध मालिक के बीच विवादों को सुलझाना, (ii) बांध के टूटने के संभावित असर का आकलन करना और राहत उपायों पर प्रभावित राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना, और (iii) बांध पुनर्वास कार्यक्रमों की निगरानी करना। इन अनुसूचियों को अधिसूचना के जरिए संशोधित किया जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि संसद द्वारा किसी एक्ट का संशोधन किए बिना अधिसूचना के जरिए इन निकायों के मुख्य कार्यों में बदलाव किए जा सकते हैं। प्रश्न यह है कि बिल में इन निकायों के मुख्य कार्यों में बदलाव करने हेतु क्या संसद द्वारा संशोधन जरूरी होना चाहिए।

आधार एक्ट, 2016, नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 जैसे विभिन्न कानूनों में रेगुलेटरी निकायों के कामकाज को निर्दिष्ट किया गया है और इनमें यह प्रावधान है कि अधिसूचना के जरिए इन कार्यों का विस्तार किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इन एक्ट्स में उल्लिखित कार्यों में कटौती के लिए संसद को संशोधन एक्ट पारित करना होगा। 2010 के बिल में इन अथॉरिटीज़ के कामकाज निर्दिष्ट किए गए थे। 

अनुलग्नक

तालिका 1 में अन्य देशों के बांध सुरक्षा कानूनों और बांध सुरक्षा बिल, 2019 के प्रावधानों की तुलना की गई है।

तालिका 1: अंतरराष्ट्रीय बांध सुरक्षा कानूनों के बीच तुलना

प्रावधान

युनाइटेड स्टेट्स

युनाइटेड किंगडम

ब्राजील

दक्षिण अफ्रीका

भारत (प्रस्तावित बिल 2019)

केंद्र और राज्यों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा

·    राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कार्यक्रम जोकि मॉडल राज्य कार्यक्रम प्रदान करता है। प्रत्येक राज्य का अपना सुरक्षा कार्यक्रम, कर्मचारी और बजट हैं।

·    संघीय कानून और राष्ट्रीय प्रवर्तन अथॉरिटी।

·    संघीय कानून राष्ट्रीय बांध सुरक्षा नीति और सूचना प्रणाली स्थापित करता है। राज्य कानून निगरानी और सजा जैसे विवरण देते हैं।

·    संघीय कानून और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कार्यालय।

·    संघीय कानून तथा केंद्र एवं राज्य स्तर पर रेगुलेटरी निकाय।

संघीय कानून का कवरेज

·    7.6 मीटर से अधिक क ऊंचाई या 61,674 मीटर3 से अधिक की क्षमता वाले जलाशय।

·    10,000 मीटर3 से अधिक की क्षमता वाले जलाशय।

·     (i) 115 मीटर से अधिक ऊंचाई या 3 मिलियन मीटर3 से अधिक क्षमता वाले, (ii) खतरनाक कचरे, हानि की आशंका वाले जलाशय।

·     (i) 50,000 मीटर3 से अधिक की क्षमता वाले, या (ii) सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले बांध।

·     (i) 15 मीटर से अधिक की ऊंचाई वाले, या (ii) विशिष्ट डिजाइन और स्ट्रक्चर वाले 10 मीटर से 15 मीटर के बीच की ऊंचाई वाले बांध।

संघीय कानून के अंतर्गत संघीय सार्वजनिक प्राधिकरण के कार्य

 

·    बांध सुरक्षा कार्यक्रम के लिए लक्ष्य और तिथियां निर्धारित करना।

·    सरकारी एजेंसियों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना।

·    बांध सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करना और तकनीकी उपाय विकसित करने के लिए शोध करना।

·    जलाशयों के जुड़े आंकड़े रखना और उच्च जोखिम वाले जलाशयों को चिन्हित करना।

·    यह सुनिश्चित करते हुए प्रवर्तन एजेंसी के तौर पर कार्य करना कि बांध मालिक द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाता है।

·    अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले बांधों का रजिस्टर रखना।

·    वार्षिक बांध सुरक्षा रिपोर्ट जारी करना।

·    यह देखना कि बांध मालिक निरीक्षण संबंधी सुझावों का अनुपालन कर रहे हैं अथवा नहीं।

·    निरीक्षणों का रिकॉर्ड रखना और रिपोर्ट्स का संकलन।

·    मूल्यांकन करना कि बांध के सुरक्षा संबंधी मानदंड स्वीकृत इंजीनियरिंग प्रैक्टिस को पूरा करते हैं।

·    बांध सुरक्षा से जुड़ी नीतियां और मानक बनाना और उन्हें लागू करना।

·    राज्य की अथॉरिटीज़ और बांध मालिकों के बीच समस्याएं सुलझाना।

·    देश के सभी बांधों के डेटाबेस का रखरखाव करना।

बांध मालिकों की जिम्मेदारियां

·    प्रत्येक राज्य का अपना बांध सुरक्षा कार्यक्रम है जोकि बांध मालिकों के लिए निरीक्षण, आपातकालीन कार्य योजना, तथा निरीक्षण और समीक्षा को अनिवार्य करता है।

·    निर्माण, सुरक्षा और रखरखाव से संबंधित रेगुलेशन्स का पालन।

·    नियमित निरीक्षण के लिए योग्य इंजीनियरों की नियुक्ति।

·    बाढ़ को रोकने, उसके असर को कम करने हेतु योजना बनाना।

·    नियमित निरीक्षण, सुरक्षा समीक्षा और सुरक्षा योजनाओं के जरिए बांध सुरक्षा की गारंटी।

·    जरूरी होने पर आपात कार्य योजना बनाना।

·    विशेषज्ञ सुरक्षा सेवा तैयार रखना।

·    बांध सुरक्षा का नियमित मूल्यांकन और निरीक्षण।

·    स्वीकृत व्यक्तियों द्वारा बांध सुरक्षा पर रिपोर्ट सौंपना।

·    जरूरी होने पर बांध की मरम्मत और बदलाव।

·    नियमित निरीक्षण के लिए प्रत्येक बांध में सुरक्षा इकाई बनाना।

·    आपातकालीन कार्य योजना तैयार करना और नियमित जोखिम आकलन करना।

·    व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन करना।

अपराध और सजा

·    सभी राज्यों में अलग, जैसा कि राज्यों के बांध सुरक्षा कानूनों में निर्दिष्ट।

·    £400 तक का जुर्माना, अगर मालिक निम्न का पालन नहीं करता (i) नियम और रेगुलेशन, (ii) इंजीनियर के सुझाव नहीं मानता।

·    बाढ़ की योजना न बनाने पर दो वर्ष तक की कैद और/£400 तक का जुर्माना।

·    सभी राज्यों में अलग, जैसा कि संबंधित राज्य कानूनों में निर्दिष्ट।

·    कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने या पालन न करने पर जुर्माना या पांच वर्ष तक की कैद।

·    एक वर्ष तक की कैद और/या जुर्माना, अगर (i) किसी दूसरे व्यक्ति को बिल के अंतर्गत प्रदत्त कार्य करने से रोका जाए, और (ii) निर्देशों के अनुपालन से इनकार करता है।

·    अगर अपराध के कारण किसी की मृत्यु हो जाती है तो कैद की अवधि दो वर्ष तक हो सकती है।

SourcesUnited StatesWater Resources Development Act, 1996; Dam Safety and Security Act, 2002; National Dam Safety Program, FEMA; United Kingdom:  Reservoirs Act, 1975; Brazil:  Law No. 12,334, National Policy on Dam Safety law, 2010; South Africa:  National Water Act, 1998; IndiaDam Safety Bill, 2019; PRS.

 

[1]Report no. 7 on the Dam Safety Bill, 2010, Standing Committee on Water Resources, August 17, 2011, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/SCR%20Dam%20Safety.pdf.

[2].  National Register of Large Dams, 2019, Central Dam Safety Organisation, June, 2019, http://cwc.gov.in/sites/default/files/nrld06042019.pdf.

[3].  Lok Sabha Unstarred Question no. 2218, Ministry of Jal Shakti. July 4, 2019.

[4].  Presentation on dam safety in India, Dam Rehabilitation and Improvement Project, Central Water Commission, https://www.damsafety.in/ecm-includes/PDFs/DRIP_II_Presentation/Dam%20Safety%20in%20India.pdf.

[5].  State Dam Safety Organisations, Central Water Commission, last accessed on October 25, 2019, http://cwc.gov.in/damsafety/sdso.

[6]Guidelines for safety inspections of dams, Central Dam Safety Organisation, Central Water Commission, June 2017, http://cwc.gov.in/sites/default/files/guidelines-for-safety-inspection-of-dams-june-2017.pdf.

[7]Report no. 10 of Comptroller and Auditor General of India on schemes for flood control and flood forecasting, Ministry of Water resources, River Development and Ganga Rejuvenation, July 21, 2017.

[8]Report on dam safety procedures, Dam Safety Organisation, Central Water Commission, Ministry of Water Resources, July 10, 1986, http://cwc.gov.in/sites/default/files/admin/report-on-ds-procedures.pdf.

[9]. The Dam Safety Bill, 2010, Ministry of Water Resources, August 30, 2010, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/dam%20safety%20(To%20be).pdf.

 

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