जुलाई 2019

इस अंक की झलकियां

संसद ने केंद्रीय बजट 2019-20 को पारित किया

राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.3% पर लक्षित है जोकि 2018-19 के 3.4% के अनुमान से कम है। 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपए की आय पर आय कर सरचार्ज बढ़ाकर 25% और 5 करोड़ से अधिक की आय पर 37% कर दिया गया है।

फाइनांस बिल का रेगुलेटरी दायरा बढ़ा

फाइनांस बिल ने आरबीआई एक्ट और सीजीएसटी एक्ट जैसे कानूनों में संशोधन करके रेगुलेटरी दायर बढ़ा दिया है। इसने जीएसटी से जुड़ी अपीलीय अथॉरिटी बनाई है और आरबीआई को एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनांस कंपनियों के प्रबंधन के लिए कुछ शक्तियां दी हैं।

संसद ने 14 बिल, लोकसभा ने 7 बिल पारित किए

संसद में आधार (संशोधन) बिल, तथा सूचना का अधिकार (संशोधन) बिल पारित। लोकसभा में गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) संशोधन बिल सहित कई बिल पारित।

लोकसभा में छह बिल पेश

इनमें सेरोगेसी (रेगुलेशन) बिल, ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) बिल, डीएनए टेक्नोलॉजी (प्रयोग और लागू होना) रेगुलेशन बिल और बांध सुरक्षा बिल शामिल हैं।

कैबिनेट ने 15वें वित्त आयोग के संदर्भ की शर्तों में संशोधन किए

मंजूर संशोधन में आयोग से यह जांच करने की अपेक्षा की गई है कि क्या रक्षा और आंतरिक सुरक्षा को वित्त पोषित करने के लिए एक अलग तंत्र की स्थापना की जानी चाहिए और अगर ऐसा है तो इस तंत्र का संचालन कैसे किया जा सकता है।

संसद में दो श्रम संहिताएं पेश

कोड ऑन वेजेज़ को लोकसभा में पारित किया जा चुका है और यह राज्यसभा में लंबित है। व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता लोकसभा में पेश की गई है।

कृषि की कायापलट के उपायों पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्रियों की कमिटी

कमिटी में महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल हैं। इसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री भी शामिल हैं।

कैबिनेट ने 2019-20 में खरीफ फसलों के लिए एमएसपी और गन्ने के लिए एफआरपी को मंजूर किया

धान (सामान्य) के लिए एमएसपी 1,815 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.7% अधिक है। 10% की मूल रिकवरी दर (2018-19 के रूप में) के साथ गन्ने के लिए अनुमोदित एफआरपी 275 रुपए प्रति क्विंटल है।

मसौदा मॉडल टेनेन्सी एक्ट, 2019 को जारी

मसौदा एक्ट रेंटल हाउसिंग से संबंधित मामलों के रेगुलेशन और उनमें शीघ्र निर्णय प्रदान करने का प्रावधान करता है। यह रेंट अथॉरिटी और रेंट ट्रिब्यूनलों की स्थापना का भी प्रावधान करता है।

मसौदा नेशनल रिसोर्स एफिशिएंसी पॉलिसी को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया गया

नीति प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग और अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में अपशिष्ट के पुनर्चक्रण (अपसाइकिलिंग) को बढ़ावा देने के प्रयास करेगी। इसका उद्देश्य 2030 तक संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूर्ण करना है।

अंतर-मंत्रालयी कमिटी ने वर्चुअल करंसियों पर अपनी रिपोर्ट सौंपी

कमिटी ने सरकार द्वारा जारी क्रिप्टोकरंसियों को छोड़कर अन्य सभी निजी क्रिप्टोकरंसियों को प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया है। उसने क्रिप्टोकरंसी को प्रतिबंधित करने तथा भारत में किसी आधिकारिक डिजिटल करंसी को रेगुलेट करने के लिए मसौदा बिल प्रस्तावित किया है।

 

केंद्रीय बजट 2019-20

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय बजट 2019-20 पारित

2019-20 के लिए केंद्रीय बजट को संसद द्वारा पारित किया गया।[1] बजट की मुख्य झलकियों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सरकार ने 2019-20 में 27,86,349 करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव रखा है जोकि 2018-19 के संशोधित अनुमान से 13.4% अधिक है।
  • प्राप्तियों (शुद्ध उधारियों के अतिरिक्त) के 14.2% से बढ़कर 20,82,589 करोड़ रुपए होने की उम्मीद है।
  • 2019-20 में नॉमिनल जीडीपी के 12% की दर से बढ़ने का अनुमान है। राजस्व घाटा जीडीपी के 2.3% पर लक्षित है जोकि 2018-19 के संशोधित अनुमान से 2.2% अधिक है। राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.3% पर लक्षित है जोकि 2018-19 के संशोधित अनुमान से 3.4% कम है।

तालिका 1:  केंद्रीय बजट 2019-20 (करोड़ रुपए में)

मद

2018-19 संशोधित

2019-20 बजटीय

% परिवर्तन

कुल व्यय

24,57,235

27,86,349

13.4%

कुल प्राप्तियां (उधारियों के अतिरिक्त)

18,22,837

20,82,589

14.2%

राजकोषीय घाटा

6,34,398

7,03,760

10.9%

जीडीपी के % के रूप में

3.4%

3.3%

 

राजस्व घाटा

4,10,930

4,85,019

18.0%

जीडीपी के % के रूप में

2.2%

2.3%

 

SourcesUnion Budget 2019-20; PRS.

बजट के मुख्य नीतिगत प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बैंकिंग और वित्त: सरकार की योजना है कि एनबीएफसी को दिए गए धन के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आंशिक रूप से गारंटी (नुकसान के पहले 10% के लिए) प्रदान की जाए। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 70,000 करोड़ रुपए प्रदान किए जाएंगे।
  • उधारियां: वर्तमान में सरकार का सकल ऋण कार्यक्रम पूरी तरह से घरेलू ऋण के माध्यम से वित्त पोषित है। सरकार की योजना है कि वह विदेश में अपनी उधारी का एक हिस्सा विदेशी मुद्रा में जुटाए।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: अगले पांच वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। 2018 से 2030 के दौरान 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश को आकर्षित करने हेतु रेलवे के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी का लाभ उठाया जाएगा।

मुख्य कर परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आयकर पर सरचार्ज: पहले एक करोड़ रुपए से अधिक कमाने वाले व्यक्तियों की आय पर 15% का सरचार्ज लगता था। दो करोड़ रुपए और पांच करोड़ रुपए के बीच की आय वाले व्यक्तियों के लिए आयकर पर सरचार्ज 25% तक बढ़ा दिया गया है और पांच करोड़ रुपए से अधिक आय वाले व्यक्तियों के लिए सरचार्ज 37% तक बढ़ा दिया गया है।
  • निगम कर: वर्तमान में, 250 करोड़ रुपए से कम के वार्षिक कारोबार वाली कंपनियां 25% की दर से निगम आयकर का भुगतान करती हैं। इस सीमा को बढ़ाकर 400 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
  • सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस: पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस में एक रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इन उत्पादों के लिए उत्पाद शुल्क में एक रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कर में छूट: इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए ऋण पर चुकाए गए ब्याज पर 1,50,000 रुपए तक की कर कटौती प्रदान की जाएगी। यह कटौती वित्तीय वर्ष 2019-20 और वित्तीय वर्ष 2022-23 के बीच स्वीकृत ऋण पर लागू होगी।

कर कानूनों में परिवर्तन के अतिरिक्त फाइनांस बिल, 2019 सेबी एक्ट, आरबीआई एक्ट और पेमेंट और सेटेलमेंट सिस्टम्स एक्ट जैसे अनेक अन्य कानूनों में परिवर्तन करता है।[2] इन परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया एक्ट, 1992 (सेबी एक्ट): सेबी के जनरल फंड द्वारा किए जाने वाले खर्चे की सूची में पूंजीगत व्यय को शामिल करने के लिए एक्ट को संशोधित किया गया है। इसके अतिरिक्त बिल एक आरक्षित निधि बनाने के लिए एक्ट में संशोधन करता है जिसे जनरल फंड के वार्षिक अधिशेष के 25% के साथ जमा किया जाएगा। शेष राशि भारत के समेकित कोष में हस्तांतरित हो जाएगी।
  • भारतीय रिजर्व बैंक एक्ट, 1934: आरबीआई को एनबीएफसी के प्रबंधन से संबंधित उपाय करने में सक्षम बनाने के लिए एक्ट में संशोधन किया गया है। इनमें उनकी न्यूनतम शुद्ध मूल्य की शर्त में परिवर्तन, रेज़ोल्यूशन योजनाओं को तैयार करना, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का सुपरसेशन तथा निदेशकों को हटाना शामिल है।
  • पेमेंट और सेटेलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007: इस एक्ट को संशोधित किया गया है ताकि कोई भी बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर अपने ग्राहकों से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भुगतान करने पर शुल्क न वसूल सके।

केंद्रीय बजट और फाइनांस बिल पर अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें। केंद्रीय बजट में दर्ज सरकार की वित्तीय स्थिति और आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के बीच के अंतर को स्पष्ट करने वाले पीआरएस ब्लॉग को पढ़ें।

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

2019-20 की पहली तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 3.1% पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष 2011-12) अप्रैल 2019 में 3% से बढ़कर जून 2019 में 3.2% हो गई। [3]  खाद्य स्फीति जून 2019 में 2.2% थी। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष 2011-12) अप्रैल 2019 में 3.2% से घटकर जून 2019 में 2% हो गई। [4]  रेखाचित्र 1 में 2019-20 की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति प्रदर्शित की गई है।

रेखाचित्र 1: 2019-20 की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियां (वर्ष दर वर्ष)

Sources: Ministry of Commerce and Industry; Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

 

विधि और न्याय

संसद में आधार एवं अन्य कानून (संशोधन) बिल पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

आधार एवं अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2019  संसद में पारित हो गया।[5]  यह बिल 2 मार्च, 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है।[6] बिल आधार (वित्तीय एवं अन्य सबसिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) एक्ट, 2016, भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण एक्ट, 2002 में संशोधन करता है। आधार एक्ट यूनीक आइडेंटिटी नंबर्स, आधार नंबर्स के जरिए भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों को सबसिडी और लाभ के लक्षित वितरण का प्रावधान करता है।

  • ऑफलाइन वैरिफिकेशन: आधार एक्ट के अंतर्गत व्यक्ति की पहचान आधार ‘प्रमाणीकरण’ द्वारा वैरिफाई की जा सकती है। प्रमाणीकरण में व्यक्ति को अपना आधार नंबर और अपनी बायोमीट्रिक एवं डेमोग्राफिक सूचना सेंट्रल आइंडेंटिटीज़ डेटा रेपोज़िटरी को सौंपनी होती है जोकि उस व्यक्ति का वैरिफिकेशन करती है। बिल प्रमाणीकरण के बिना भी व्यक्ति की पहचान के लिए ‘ऑफलाइन वैरिफिकेशन’ की अनुमति देता है। इस संबंध में यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) रेगुलेशंस के जरिए वे तरीके बताएगी जिनसे ऑफलाइन वैरिफिकेशन किया जा सके।
  • स्वैच्छिक प्रयोग: एक्ट में किसी व्यक्ति की पहचान के प्रमाण के रूप में आधार के प्रयोग का प्रावधान है जोकि प्रमाणीकरण के अधीन है। बिल इसे रीप्लेस करता है और कहता है कि व्यक्ति प्रमाणीकरण या ऑफलाइन वैरिफिकेशन के जरिए अपनी पहचान को स्थापित करने के लिए आधार नंबर का स्वेच्छा से उपयोग कर सकता है। बिल में कहा गया है कि किसी सेवा के प्रावधान के लिए आधार के माध्यम से किसी व्यक्ति की पहचान का प्रमाणीकरण केवल संसद के कानून द्वारा अनिवार्य किया जा सकता है।
  • बिल टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण एक्ट, 2002 में संशोधन करता है और कहता है कि टेलीकॉम कंपनियां, बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों की पहचान को निम्नलिखित के जरिए वैरिफाई कर सकते हैं: (i) आधार का प्रमाणीकरण या ऑफलाइन वैरिफिकेशन, (ii) पासपोर्ट, या (iii) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य दस्तावेज। व्यक्ति अपनी पहचान को वैरिफाई करने का कोई भी तरीका चुन सकता है और किसी भी व्यक्ति को आधार नंबर न होने के कारण कोई सेवा प्रदान करने से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • यूआईडीएआई फंड: एक्ट के अंतर्गत यूआईडीएआई द्वारा जमा की गई फीस और राजस्व को भारत के समेकित कोष में जमा कराया जाएगा। बिल इस प्रावधान को हटाता है और यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया फंड की स्थापना करता है। यूआईडीएआई फीस, अनुदान और शुल्क को इस फंड में जमा करेगी। इस फंड को यूआईडीएआई अपने कर्मचारियों को वेतन और भत्ते देने में इस्तेमाल करेगी।

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें।

संसद में सूचना का अधिकार (संशोधन) बिल, 2019 पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

सूचना का अधिकार (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[7]  यह बिल सूचना का अधिकार एक्ट, 2005 में संशोधन करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय आरबिट्रेशन सेंटर (एनडीआईएसी): बिल आरबिट्रेशन, मध्यस्थता और सुलह संबंधी कार्यवाहियों के लिए एनडीआईएसी की स्थापना करता है। बिल एनडीआईएसी को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करता है।
  • सूचना आयुक्त की कार्य अवधि: एक्ट के अंतर्गत एक्ट के प्रावधानों को लागू करने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरों पर मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और सूचना आयुक्तों (आईसीज़) को नियुक्त किया जाएगा। एक्ट के अनुसार, सीआईसी और आईसीज़ (केंद्र और राज्य स्तरों पर नियुक्त) पांच वर्ष के लिए अपने पदों पर आसीन होंगे। बिल इस प्रावधान को हटाता है और कहता है कि केंद्र सरकार सीआईसी और आईसीज़ के कार्यकाल को अधिसूचित करेगी।
  • वेतन का निर्धारण: एक्ट कहता है कि सीआईसी और आईसीज़ (केंद्रीय स्तर पर) का वेतन क्रमशः मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के वेतन के बराबर होगा। इसी प्रकार राज्य स्तर पर सीआईसी और आईसीज़ का वेतन क्रमशः चुनाव आयुक्तों और राज्य सरकार के मुख्य सचिव के बराबर होगा।
  • बिल इन प्रावधानों में संशोधन करता है और कहता है कि केंद्रीय और राज्य स्तर के सीआईसी और आईसीज़ के वेतन, भत्तों और सेवा की अन्य शर्तों एवं नियमों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें बिल पर ब्लॉग के लिए कृपया देखें

संसद में नई दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर बिल, 2019 पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय आरबिट्रेशन सेंटर बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[8] यह बिल भारत में आरबिट्रेशन के बेहतर प्रबंधन के लिए एक स्वायत्त और स्वतंत्र संस्थान स्थापित करने का प्रयास करता है। बिल के प्रावधान 2 मार्च, 2019 से लागू होंगे। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय आरबिट्रेशन सेंटर (एनडीआईएसी): बिल आरबिट्रेशन, मध्यस्थता और सुलह संबंधी कार्यवाहियों के लिए एनडीआईएसी की स्थापना करता है। बिल एनडीआईएसी को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करता है।
  • इंटरनेशनल ऑल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेज़ोल्यूशन सेंटर (आईसीएडीआर): आईसीएडीआर विवादों के वैकल्पिक समाधान के तरीकों (जैसे आरबिट्रेशन और मध्यस्थता) को बढ़ावा देने वाली पंजीकृत सोसायटी है। बिल मौजूदा आईसीएडीआर को केंद्र सरकार को ट्रांसफर करने का प्रयास करता है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद आईसीएडीआर के सभी अधिकार, टाइटिल और हितों को एनडीआईएसी में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
  • संघटन: बिल के अंतर्गत एनडीआईएसी में निम्नलिखित सात सदस्य होंगे: (i) चेयरपर्सन, जोकि सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय का जज हो सकता है या कोई ऐसा प्रतिष्ठित व्यक्ति जिसके पास आरबिट्रेशन करने या उसके प्रशासन से जुड़ी विशेष जानकारी और अनुभव हो, (ii) ऐसे दो प्रतिष्ठित व्यक्ति जिनके पास संस्थागत आरबिट्रेशन की पर्याप्त जानकारी और अनुभव हो, और (iii) तीन पदेन (एक्स ऑफिशियो) सदस्य, जिसमें वित्त मंत्रालय का नॉमिनी और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (जोकि एनडीआईएसी के रोजाना के कामकाज के लिए जिम्मेदार होगा) शामिल हैं
  • एनडीआईएसी के उद्देश्य और कार्य: एनडीआईएसी के मुख्य उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं (i) विवादों के वैकल्पिक समाधान के मामलों से जुड़ी रिसर्च को बढ़ावा देना, प्रशिक्षण देना और कॉन्फ्रेंस एवं सेमिनार आयोजित करना, (ii) आरबिट्रेशन, मध्यस्थता और सुलह की कार्यवाहियों के लिए सुविधाएं और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करना, (iii) आरबिट्रेशन, मध्यस्थता और सुलह की कार्यवाहियों के लिए मान्यता प्राप्त प्रोफेशनलों का पैनल तैयार करना।
  • एनडीआईएसी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पेशेवर और किफायती तरीके से एवं समय रहते आरबिट्रेशन और सुलह का काम करना, और (ii) वैकल्पिक विवाद समाधान के क्षेत्र में अध्ययन को बढ़ावा देना।

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संसद में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल, 2019 पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[9]  यह बिल 21 फरवरी, 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है।[10] बिल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • बिल तलाक कहने को, जिसमें लिखित और इलेक्ट्रॉनिक दोनों रूप शामिल हैं, कानूनी रूप से अमान्य और गैरकानूनी बनाता है। बिल के अनुसार तलाक से अभिप्राय है, तलाक-ए-बिद्दत या किसी भी दूसरी तरह का तलाक, जिसके परिणामस्वरूप मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को इंस्टेंट या इररिवोकेबल (जिसे पलटा न जा सके) तलाक दे देता है। तलाक-ए-बिद्दत मुस्लिम पर्सनल कानूनों के अंतर्गत ऐसी प्रथा है जिसमें मुस्लिम पुरुष द्वारा अपनी पत्नी को एक सिटिंग में तीन बार तलाक कहने से इंस्टेंट या इररिवोकेबल तलाक हो जाता है।
  • अपराध और दंड: बिल तलाक कहने को संज्ञेय अपराध बनाता है जिसके परिणामस्वरूप तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा हो सकता है (एक संज्ञेय अपराध ऐसा अपराध होता है जिसमें पुलिस अधिकारी बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकता है)। अपराध संज्ञेय होगा, अगर अपराध से संबंधित सूचना: (i) विवाहित महिला (जिसे तीन तलाक कहा गया है), या (ii) उससे रक्त या वैवाहिक संबंध से जुड़े किसी व्यक्ति ने दी हो।
  • बिल में प्रावधान है कि मेजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत दे सकता है। महिला (जिसे तीन तलाक कहा गया है) की सुनवाई के बाद या अगर मेजिस्ट्रेट इस बात से संतुष्ट है कि जमानत देने के पर्याप्त आधार हैं, तभी आरोपी को जमानत दी जा सकती है।
  • महिला (जिसे तीन तलाक कहा गया है) के अनुरोध पर मेजिस्ट्रेट द्वारा अपराध को शमनीय माना जा सकता है। शमनीय या कम्पाउंडिंग का अर्थ वह प्रक्रिया है जिसमें दोनों पक्ष कानूनी कार्यवाहियों को रोकने और विवाद को निपटाने के लिए सहमत हो जाते हैं। कम्पाउंडिंग के नियम और शर्तों को मेजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
  • भत्ता: जिस मुस्लिम महिला को तलाक दिया गया है, वह अपने पति से अपने और खुद पर निर्भर बच्चों के लिए गुजारा भत्ता हासिल करने के लिए अधिकृत है। वह अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी हासिल करने के लिए अधिकृत है। भत्ते की राशि और कस्टडी का तरीका मेजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

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राज्यसभा में आर्बिट्रेशन और कंसीलिएशन (संशोधन) बिल, 2019 पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

आर्बिट्रेशन और कंसीलिएशन (संशोधन) बिल, 2019 को राज्यसभा में पारित किया गया।[11] यह बिल आर्बिट्रेशन और कंसीलिएशन एक्ट, 1996 में संशोधन करता है। एक्ट में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन से संबंधित प्रावधान हैं और यह सुलह प्रक्रिया को संचालित करने से संबंधित कानून को स्पष्ट करता है। बिल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भारतीय आर्बिट्रेशन परिषद: बिल आर्बिट्रेशन, मीडिएशन, कंसीलिएशन और विवाद निपटाने के दूसरे तरीकों को बढ़ावा देने के लिए एक स्वतंत्र संस्था भारतीय आर्बिट्रेशन परिषद (एसीआई) की स्थापना करने का प्रयास करता है। परिषद के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आर्बिट्रल संस्थानों की ग्रेडिंग के लिए नीतियां बनाना और आर्बिट्रेटर्स को एक्रेडेट करने संबंधी फैसले लेना, (ii) विवाद निवारण के सभी वैकल्पिक मामलों में एक समान पेशेवर मानदंडों की स्थापना, संचालन और रखरखाव के लिए नीतियां बनाना, और (iii) भारत और विदेशों में आर्बिट्रेशन से संबंधित फैसलों की डिपोसिटरी (भंडार) का रखरखाव करना।
  • आर्बिट्रेटर्स की नियुक्ति: 1996 के एक्ट के अंतर्गत विभिन्न पक्ष आर्बिट्रेटर्स को नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। किसी नियुक्ति पर मतभेद होने पर वे पक्ष सर्वोच्च न्यायालय या संबंधित उच्च न्यायालय, या उस न्यायालय द्वारा नामित व्यक्ति या संस्थान से आर्बिट्रेटर की नियुक्ति का आग्रह कर सकते हैं।
  • बिल के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय आर्बिट्रलर संस्थानों को नामित कर सकते हैं। आर्बिट्रेटर्स की नियुक्ति के लिए विभिन्न पक्ष उनसे संपर्क कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नामित संस्थान नियुक्तियां करेगा। आर्बिट्रेशन के घरेलू मामलों में संबंधित उच्च न्यायालय द्वारा नामित संस्थानों द्वारा नियुक्तियां की जाएंगी। अगर कोई आर्बिट्रेशन संस्थान मौजूद न हों तो संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आर्बिट्रेटर्स का एक पैनल बना सकते हैं जोकि आर्बिट्रेशन संस्थानों का काम करेंगे। आर्बिट्रेटर की नियुक्ति के आवेदन का निपटारा 30 दिनों के अंदर कर दिया जाना चाहिए।
  • समय सीमा में राहत: 1996 के एक्ट के अंतर्गत आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनलों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सभी कार्यवाहियों पर 12 महीने के अंदर फैसला ले लें। बिल ने अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशंस में इस समय सीमा को हटा दिया है। बिल यह भी कहता है कि ट्रिब्यूनलों को अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के मामलों को 12 महीने के भीतर निपटाने का प्रयास करना चाहिए।

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लोकसभा में डीएनए टेक्नोलॉजी (प्रयोग और लागू होना) रेगुलेशन बिल, 2019 पेश

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

डीएनए टेक्नोलॉजी (प्रयोग और लागू होना) रेगुलेशन बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया गया।[12]  इस बिल में कुछ लोगों की पहचान स्थापित करने हेतु डीएनए टेक्नोलॉजी के प्रयोग के रेगुलेशन का प्रावधान है।

  • डीएनए डेटा का प्रयोग: बिल के अंतर्गत डीएनए टेस्टिंग की अनुमति केवल बिल की अनुसूची में उल्लिखित मामलों के लिए दी जाएगी। इसमें भारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत आने वाले अपराध और पेटरनिटी के मुकदमे जैसे दीवानी मामले आते हैं। इसके अतिरिक्त अनुसूची में व्यक्तिगत पहचान की स्थापना से संबंधित मामलों के लिए डीएनए टेस्टिंग भी शामिल है।
  • डीएनए का कलेक्शन: डीएनए प्रोफाइल तैयार करते समय जांच अधिकारियों द्वारा किसी व्यक्ति के शारीरिक पदार्थों को इकट्ठा किया जा सकता है। कुछ स्थितियों में इन पदार्थों को इकट्ठा करने के लिए अधिकारियों को उस व्यक्ति की सहमति लेनी होगी। सात साल तक की सजा पाने वाले गिरफ्तार व्यक्तियों की डीएनए टेस्टिंग के लिए अधिकारियों को उनकी सहमति हासिल करनी होगी। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को सात साल से ज्यादा की सजा दी गई है या फांसी की सजा दी गई है तो अधिकारियों को ऐसे व्यक्तियों की डीएनए टेस्टिंग के लिए उनकी सहमति लेने की जरूरत नहीं है। इसके अतिरिक्त किसी पीड़ित व्यक्ति, या लापता व्यक्ति के संबंधी, या नाबालिग या विकलांग व्यक्ति की डीएनए टेस्टिंग के लिए अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उस पीड़ित व्यक्ति से, संबंधी से, या नाबालिग या विकलांग व्यक्ति के माता-पिता या अभिभावक से सहमति हासिल करें।
  • डीएनए डेटा बैंक: बिल में राष्ट्रीय डीएनए डेटा बैंक और हर राज्य में, या दो या दो से अधिक राज्यों में क्षेत्रीय डीएनए डेटा बैंक की स्थापना का प्रावधान है। डीएनए लेबोरेट्रीज़ से अपेक्षा की जाती है कि वे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय डेटा बैंक से डीएनए डेटा को साझा करेंगी। हर डेटा बैंक से अपेक्षा की जाती है कि वे निम्नलिखित श्रेणियों के डेटा का रखरखाव करेंगे: (i) क्राइम सीन इंडेक्स, (ii) संदिग्ध व्यक्तियों (सस्पेक्ट) या विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल्स) के इंडेक्स, (iii) अपराधियों के इंडेक्स, (iv) लापता व्यक्तियों के इंडेक्स, और (v) अज्ञात मृत व्यक्तियों के इंडेक्स।
  • डीएनए प्रोफाइल्स को हटाना: बिल कहता है कि डीएनए प्रोफाइल की इंट्री, उसे रखने या हटाने के मानदंडों को रेगुलेशन द्वारा निर्दिष्ट किया जाएगा। फिर भी बिल में निम्नलिखित व्यक्तियों के डीएनए डेटा को हटाने के प्रावधान हैं: (i) संदिग्ध व्यक्ति, अगर पुलिस रिपोर्ट फाइल की गई है या अदालत के आदेश दिए गए हैं, (ii) विचाराधीन कैदी, अगर अदालती आदेश दिए गए हैं, (iii) आग्रह करने पर किसी ऐसे व्यक्ति का प्रोफाइल जो संदिग्ध, अपराधी या विचाराधीन नहीं लेकिन क्राइम सीन के इंडेक्स या लापता व्यक्तियों के इंडेक्स में उसका डीएनए प्रोफाइल इंटर हो गया है।
  • डीएनए रेगुलेटरी बोर्ड: बिल में डीएनए रेगुलेटरी बोर्ड की स्थापना का प्रावधान है जोकि डीएनए डेटा बैंक और डीएनए लेबोरेट्रीज़ को सुपरवाइज करेगा। बोर्ड के कार्यों में निम्नलिखित शामिल है: (i) डीएनए लेबोरेट्रीज़ या डेटा बैंक्स की स्थापना से संबंधित सभी विषयों पर सरकारों को सलाह देना और (ii) यह सुनिश्चित करना कि डेटा बैंक, लेबोरेट्रीज़ और अन्य व्यक्तियों के डीएनए प्रोफाइल्स से संबंधित सभी सूचनाओं को गोपनीय रखा जाता है।

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लोकसभा में ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) बिल, 2019 पेश

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) बिल, 2019 लोकसभा में 19 जुलाई, 2019 को पेश किया गया।[13] बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्न शामिल हैं:

  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषाः बिल कहता है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति वह व्यक्ति है जिसका लिंग जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाता। इसमें ट्रांसमेन (परा-पुरुष) और ट्रांस-विमेन (परा-स्त्री), इंटरसेक्स भिन्नताओं और जेंडर क्वीर आते हैं। इसमें सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले व्यक्ति, जैसे किन्नर, हिंजड़ा, भी शामिल हैं। इंटरसेक्स भिन्नताओं वाले व्यक्तियों की परिभाषा में ऐसे लोग शामिल हैं जो जन्म के समय अपनी मुख्य यौन विशेषताओं, बाहरी जननांगों, क्रोमोसम्स या हारमोन्स में पुरुष या महिला शरीर के आदर्श मानकों से भिन्नता का प्रदर्शन करते हैं।
  • भेदभाव पर प्रतिबंध: बिल ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है जिसमें निम्नलिखित के संबंध में सेवा प्रदान करने से इनकार करना या अनुचित व्यवहार करना शामिल हैः (i) शिक्षा, (ii) रोजगार, (iii) स्वास्थ्य सेवा, (iv) सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध उत्पादों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच और उसका उपभोग, (v) कहीं आने-जाने (मूवमेंट) का अधिकार (vi) किसी प्रॉपर्टी में निवास करने, उसे किराये पर लेने, स्वामित्व हासिल करने या अन्यथा उसे कब्जे में लेने का अधिकार, (vii) सार्वजनिक या निजी पद को ग्रहण करने का अवसर, और (viii) किसी सरकारी या निजी प्रतिष्ठान तक पहुंच जिसकी देखभाल या निगरानी किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा की जाती है।
  • स्वास्थ्य सेवा: सरकार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कदम उठाएगी जिसमें अलग एचआईवी सर्विलेंस सेंटर, सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी इत्यादि शामिल है। सरकार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को संबोधित करने के लिए चिकित्सा पाठ्यक्रम की समीक्षा करेगी और उन्हें समग्र चिकित्सा बीमा योजनाएं प्रदान करेगी।
  • आइडेंटिटी से जुड़ा सर्टिफिकेट: एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति जिला मेजिस्ट्रेट को आवेदन कर सकता है कि ट्रांसजेंडर के रूप में उसकी आइडेंटिटी से जुड़ा सर्टिफिकेट जारी किया जाए। संशोधित सर्टिफिकेट तभी हासिल किया जा सकता है, अगर उस व्यक्ति ने पुरुष या महिला के तौर पर अपना लिंग परिवर्तन करने के लिए सर्जरी कराई है।

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लोकसभा में उपभोक्ता संरक्षण बिल, 2019 पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

उपभोक्ता संरक्षण बिल, 2019 लोकसभा में पारित किया गया।[14] बिल उपभोक्ता संरक्षण एक्ट, 1986 का स्थान लेता है। बिल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं :

  • उपभोक्ताओं के अधिकार: बिल में उपभोक्ताओं के छह अधिकारों को स्पष्ट किया गया है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ऐसी वस्तुओं और सेवाओं की मार्केटिंग के खिलाफ सुरक्षा जो जीवन और संपत्ति के लिए जोखिमपरक हैं, (ii) वस्तुओं या सेवाओं की क्वालिटी, मात्रा, शक्ति, शुद्धता, मानक और मूल्य की जानकारी प्राप्त होना, (iii) प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों पर वस्तु और सेवा उपलब्ध होने का आश्वासन प्राप्त होना, और (iv) अनुचित या प्रतिबंधित व्यापार के खिलाफ शिकायत निवारण की मांग करना।
  • केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अथॉरिटी: केंद्र सरकार उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने, उनका संरक्षण करने और उन्हें लागू करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अथॉरिटी (सीसीपीए) का गठन करेगी। यह अथॉरिटी उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार और भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामलों को रेगुलेट करेगी।
  • भ्रामक विज्ञापनों के लिए जुर्माना: सीसीपीए झूठे या भ्रामक विज्ञापन के लिए मैन्यूफैक्चरर या एन्डोर्सर पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगा सकती है। दोबारा अपराध की स्थिति में यह जुर्माना 50 लाख रुपए और पांच साल की सजा हो सकती है।
  • उपभोक्ता विवाद निवारण कमीशन: जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर उपभोक्ता विवाद निवारण कमीशनों (सीडीआरसीज़) का गठन किया जाएगा। एक उपभोक्ता निम्नलिखित के संबंध में आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है: (i) अनुचित और प्रतिबंधित तरीके का व्यापार, (ii) दोषपूर्ण वस्तु या सेवाएं, (iii) अधिक कीमत वसूलना या गलत तरीके से कीमत वसूलना, और (iv) ऐसी वस्तुओं या सेवाओं को बिक्री के लिए पेश करना, जो जीवन और सुरक्षा के लिए जोखिमपरक हो सकती हैं। अनुचित कॉन्ट्रैक्ट के खिलाफ शिकायत केवल राज्य और राष्ट्रीय सीडीआरसीज़ में फाइल की जा सकती हैं। जिला सीडीआरसी के आदेश के खिलाफ राज्य सीडीआरसी में सुनवाई की जाएगी। राज्य सीडीआरसी के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय सीडीआरसी में सुनवाई की जाएगी। अंतिम अपील का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को होगा।
  • उत्पाद की जिम्मेदारी (प्रोडक्ट लायबिलिटी): उत्पाद की जिम्मेदारी का अर्थ है, उत्पाद के मैन्यूफैक्चरर, सर्विस प्रोवाइडर या विक्रेता की जिम्मेदारी। यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह किसी खराब वस्तु या दोषी सेवा के कारण होने वाले नुकसान या चोट के लिए उपभोक्ता को मुआवजा दे। मुआवजे का दावा करने के लिए उपभोक्ता को बिल में स्पष्ट खराबी या दोष से जुड़ी कम से कम एक शर्त को साबित करना होगा।

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लोकसभा में रिपीलिंग और संशोधन बिल, 2019 पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

रिपीलिंग और संशोधन बिल, 2019 लोकसभा में पारित हो गया।[15] बिल 58 एक्ट्स को पूरी तरह से रद्द करता है और दो अन्य कानूनों में संशोधन करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कुछ कानूनों को पूरी तरह से रद्द करना: बिल पहली अनुसूची में सूचीबद्ध 58 कानूनों को रद्द करता है। इनमें 12 मूल एक्ट्स और 46 संशोधन एक्ट्स हैं। रद्द होने वाले मूल एक्ट्स में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बीड़ी श्रमिक कल्याण निधि, 1976, और (ii) म्यूनिसिपल टैक्सेशन एक्ट 1881। उल्लेखनीय है कि संशोधन एक्ट्स की रद्द करने का बहुत अधिक असर नहीं होगा, चूंकि संशोधन एक्ट्स को पहले ही मूल एक्ट्स में शामिल किया जा चुका है।
  • कुछ कानूनों में संशोधन: बिल दो एक्ट्स में मामूली संशोधन करता है। इसमें कुछ शब्दों को बदला गया है। ये एक्ट हैं: (i) इनकम टैक्स एक्ट, 1961, और (ii) इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ मैनेजमेंट एक्ट, 2017।

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कैबिनेट ने मध्यस्थता पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने मध्यस्थता के परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय सेटेलमेंट एग्रीमेंट्स पर संयुक्त राष्ट्र  कन्वेंशन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी।[16]  कन्वेंशन मध्यस्थता पर एक अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क प्रदान करने का प्रयास करता है जिससे यह सुनिश्चित हो कि मध्यस्थता के जरिए किया गया समझौता सभी पक्षों को लिए बाध्यकारी और लागू करने योग्य हो।[17] प्रेस रिलीज के अनुसार, कन्वेंशन के प्रावधान वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली, जैसे आर्बिट्रेशन, कंसीलिएशन और मध्यस्थता को मजबूत करने का प्रयास करते हैं।

कैबिनेट ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 31 से 34 करने को मंजूरी दी

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 31 से 34 करने को मंजूरी दी।[18] उल्लेखनीय है कि प्रेस रिलीज की कॉपी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है।

 

गृह मामले

लोकसभा में गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) संशोधन बिल, 2019 पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) संशोधन बिल, 2019 लोकसभा में पारित हो गया।[19]  यह बिल गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) एक्ट, 1967 में संशोधन करता है। एक्ट आतंकवादी गतिविधियों को काबू में करने के लिए विशेष प्रक्रियाओं का प्रावधान करता है। बिल के मुख्य प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आतंकवाद कौन फैला सकता है: एक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार किसी संगठन को आतंकवादी संगठन निर्दिष्ट कर सकती है, अगर वह: (i) आतंकवादी कार्रवाई करता है या उसमें भाग लेता है, (ii) आतंकवादी घटना को अंजाम देने की तैयारी करता है, (iii) आतंकवाद को बढ़ावा देता है, या (iv) अन्यथा आतंकवादी गतिविधि में शामिल है। बिल सरकार को अधिकार देता है कि वह समान आधार पर व्यक्तियों को भी आतंकवादी निर्दिष्ट कर सकती है।
  • एनआईए द्वारा संपत्ति की जब्ती के लिए मंजूरी: एक्ट के अंतर्गत जांच अधिकारी को उन संपत्तियों को जब्त करने से पहले पुलिस महानिदेशालय से मंजूरी लेनी होती है, जो आतंकवाद से संबंधित हो सकती हैं। बिल के अनुसार, अगर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारी द्वारा जांच की जा रही है तो ऐसी संपत्ति की जब्ती से पहले एनआईए के महानिदेशक से पूर्व मंजूरी लेनी होगी।
  • जांच: एक्ट के अंतर्गत मामलों की जांच पुलिस डेपुटी सुपरिटेंडेंट या असिस्टेंट कमीशनर या उससे ऊंचे पद के अधिकारियों द्वारा की जाएगी। बिल अतिरिक्त रूप से मामलों की जांच के लिए एनआईए के इंस्पेक्टर या उससे ऊंचे पद के अधिकारियों को अधिकृत करता है।
  • संधियों की अनुसूची में प्रविष्टि: एक्ट के अंतर्गत नौ संधियां हैं, जैसे कन्वेंशन फॉर द सप्रेशन ऑफ टेरिरिस्ट बॉम्बिंग्स (1997) और कन्वेंशन अगेंस्ट टेकिंग ऑफ होस्टेजेज़ (1979)। इन संधियों में कुछ गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। बिल के अनुसार, इन गतिविधियों को आतंकवादी गतिविधि माना जाएगा। बिल इस सूची में एक और संधि को शामिल करता है। यह संधि है, द इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर सप्रेशन ऑफ एक्ट्स ऑफ न्यूक्लियर टेरिरिज्म (2005)।

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संसद में जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल, 2019 पारित

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[20]  एक्ट प्रावधान करता है कि कुछ आरक्षित श्रेणियों को सरकारी पदों में नियुक्ति और पदोन्नति में तथा प्रोफेशनल संस्थानों में दाखिले में आरक्षण दिया जाएगा। प्रोफेशनल संस्थानों में सरकारी मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज और पॉलिटेक्नीक्स शामिल हैं। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • नियुक्ति में आरक्षण का दायरा बढ़ा: एक्ट सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों के व्यक्तियों के लिए राज्य सरकार के कुछ पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करता है। एक्ट के अनुसार सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले लोग शामिल हैं। बिल में इसमें संशोधन किया गया है और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी इसमें शामिल किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त एक्ट में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्र में निवास करने के आधार पर नियुक्त किया गया है तो उसे उन क्षेत्रों में कम से कम सात साल तक सेवारत रहना होगा। बिल इस शर्त को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर भी लागू करता है।
  • आरक्षण से बाहर: एक्ट कहता है कि जिस व्यक्ति की वार्षिक आय तीन लाख रुपए या राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट राशि से अधिक है, उसे सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि यह प्रावधान वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर लागू नहीं होगा। बिल कहता है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर भी यह प्रावधान लागू नहीं होगा।

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संसद में मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) बिल पारित

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[21] बिल मानवाधिकार संरक्षण एक्ट, 1993 में संशोधन करता है। यह एक्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी) और मानवाधिकार अदालतों की स्थापना का प्रावधान करता है।

  • एनएचआरसी की संरचना: एक्ट के अंतर्गत एनएचआरसी का चेयरपर्सन वह व्यक्ति होगा जो सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और प्रावधान करता है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहा व्यक्ति या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर रहा व्यक्ति एनएचआरसी का चेयरपर्सन होगा।
  • एक्ट कहता है कि मानवाधिकार की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों को एनएचआरसी के सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाएगा। बिल इसमें संशोधन करते हुए कहता है कि तीन व्यक्तियों को नियुक्त किया जाएगा, जिनमें से एक महिला सदस्य होगी। एक्ट के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के चेयरपर्सन्स एनएचआरसी के सदस्य होंगे। बिल में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरपर्सन्स और राष्ट्रीय विकलांग जन आयोग के चीफ कमीशनर को भी एनएचआरसी का सदस्य बनाने का प्रावधान किया गया है।
  • एसएचआरसी के चेयरपर्सन: एक्ट के अंतर्गत एसएचआरसी का चेयरपर्सन वह व्यक्ति होगा जो उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और प्रावधान करता है कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद या न्यायाधीश के पद पर रहा व्यक्ति एसएचआरसी का चेयरपर्सन होगा।
  • कार्यकाल: एक्ट कहता है कि एनएचआरसी और एसएचआरसी के चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष होगा, या जब तक वे 70 वर्ष के नहीं हो जाते (इनमें से जो भी कम हो)। बिल इस कार्यकाल को तीन वर्ष या 70 वर्ष तक की आयु करता है, जो भी कम हो।
  • सेक्रेटरी जनरल की शक्तियां: एक्ट में एनएचआरसी के सेक्रेटरी जनरल और एसएचआरसी के सेक्रेटरी का प्रावधान है। ये उन शक्तियों का प्रयोग करेंगे जो उन्हें दी जाएंगी। बिल इसमें संशोधन करता है और संबंधित चेयरपर्सन के नियंत्रण के साथ सेक्रेटरी जनरल और सेक्रेटरी को सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों (न्यायिक कार्यों के अतिरिक्त) का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है जोकि संबंधित चेयरपर्सन के नियंत्रण के अधीन होगा।

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संसद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (संशोधन) बिल, 2019 पारित

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[22]  यह बिल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) एक्ट, 2008 में संशोधन करता है। एक्ट अनुसूची में सूचीबद्ध अपराधों (अनुसूचित अपराधों) की जांच और मुकदमेबाजी के लिए राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी का प्रावधान करता है। इसके अतिरिक्त एक्ट अनुसूचित अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत स्थापित करने की अनुमति देता है।

  • अनुसूचित अपराध: एक्ट की अनुसूची उन अपराधों की सूची विनिर्दिष्ट करती है जिनकी एनआईए को जांच करनी है और उन पर मुकदमा चलाना है। इनमें परमाणु ऊर्जा एक्ट, 1962 और गैर कानूनी गतिविधि निवारण एक्ट, 1967 जैसे कानूनों के अंतर्गत आने वाले अपराध शामिल हैं। बिल एनआईए को अनुसूचित में दर्ज अपराधों की जांच की अनुमति देता है, इसके अतिरिक्त (i) मानव तस्करी, (ii) नकली करंसी या बैंक नोट्स से संबंधित अपराध, (iii) प्रतिबंधित हथियारों की मैन्यूफैक्चरिंग या बिक्री, (iv) साइबर आतंकवाद, और (v) विस्फोटक पदार्थ एक्ट, 1908 के अंतर्गत अपराधों की जांच की भी अनुमति देता है।     
  • एनआईए का क्षेत्राधिकार: एक्ट अनुसूची में विनिर्दिष्ट अपराधों की जांच और मुकदमेबाजी के लिए एनआईए की स्थापना का प्रावधान करता है। एनआईए के अधिकारियों के पास पूरे भारत में ऐसे अपराधों की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों के समान शक्तियां होंगी। बिल कहता है कि इसके अतिरिक्त एनआईए के अधिकारियों को भारत के बाहर किए गए अनुसूचित अपराधों की जांच करने की शक्ति होगी, जोकि अंतरराष्ट्रीय संधियों और अन्य देशों के घरेलू कानूनों के अधीन होगा। अगर भारत में अपराध किया गया हो तो केंद्र सरकार एनआईए को ऐसे मामलों की जांच के निर्देश दे सकती है। ऐसे मामले नई दिल्ली स्थित विशेष अदालत के क्षेत्राधिकार में आएंगे।
  • विशेष अदालतें: एक्ट केंद्र सरकार को अनुसूचित अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की अनुमति देता है। बिल इसमें संशोधन करता है और कहता है कि केंद्र और राज्य सरकारें अनुसूचित अपराधों की सुनवाई के लिए सत्र अदालत को विशेष अदालत के रूप में नामित कर सकती है।

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असम समझौते पर कमिटी का गठन

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

असम समझौते की धारा 6 को लागू करने के लिए उच्च स्तरीय कमिटी को नियुक्त किया गया। [23]  उल्लेखनीय है कि इस कमिटी को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूर किया था और जनवरी 2019 में गठित किया था।[24],[25]  15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। 25  समझौते की धारा 6 कहती है कि असमी लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान के संरक्षण के लिए उपयुक्त संवैधानिक, विधायी तथा प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) बिप्लव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में कमिटी में 13 सदस्य होंगे।

कमिटी के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) समझौते की धारा 6 को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों के असर की जांच करना, (ii) असमी लोगों के लिए असम विधानसभा तथा स्थानीय निकायों में सीटों के आरक्षण के उपयुक्त स्तर का विश्लेषण करना, और (iii) असमी और असम की अन्य भाषाओं के संरक्षण के उपाय सुझाना।

कमिटी छह महीने की अवधि में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

कैबिनेट ने जम्मू और कश्मीर आरक्षण (दूसरा संशोधन) बिल, 2019 मंजूर किया

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने जम्मू और कश्मीर आरक्षण (दूसरा संशोधन) बिल, 2019 को मंजूर किया।[26]  बिल शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रयास करता है। बिल की कॉपी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि संविधान (103 संशोधन) एक्ट के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को प्रस्तावित किया गया था।     

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

संसद में इंडियन मेडिकल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 पारित

संसद में इंडियन मेडिकल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित किया गया।[27]  यह बिल इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 में संशोधन करता है और इंडियन मेडिकल काउंसिल (संशोधन) दूसरा अध्यादेश, 2019 का स्थान लेता है। एक्ट मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की स्थापना करता है। यह संस्था मेडिकल शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करती है। बिल के प्रावधान 26 सितंबर, 2018 से प्रभावी होंगे।

  • एमसीआई का सुपरसेशन: 1956 का एक्ट एमसीआई के सुपरसेशन और तीन वर्ष की अवधि में उसके पुनर्गठन का प्रावधान करता है। इस अंतरिम अवधि के दौरान केंद्र सरकार बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन करेगी जोकि एमसीआई की शक्तियों का उपयोग करेगा। बिल एमसीआई के सुपरसेशन की समय अवधि को तीन वर्ष से दो वर्ष करने के लिए एक्ट में संशोधन करता है।
  • एक्ट के अंतर्गत बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में अधिकतम सात सदस्य हो सकते हैं जिनमें मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्ति भी शामिल होंगे। इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और बोर्ड के सदस्यों की संख्या सात से 12 करता है। इसके अतिरिक्त बिल कहता है कि बोर्ड में विशिष्ट एडमिनिस्ट्रेटर्स को भी चुना जाएगा। इसके अतिरिक्त बिल में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त महासचिव बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को एसिस्ट करेगा।

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लोकसभा में राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन बिल, 2019 पारित

राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन बिल, 2019 लोकसभा में पेश और पारित हो गया।[28]  बिल भारतीय मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 को निरस्त करने और ऐसी मेडिकल शिक्षा प्रणाली प्रदान करने का प्रयास करता है, जो निम्नलिखित सुनिश्चित करती हों : (i) पर्याप्त और उच्च क्वालिटी वाले मेडिकल प्रोफेशनल्स की उपलब्धता, (ii) मेडिकल प्रोफेशनल्स द्वारा नवीनतम मेडिकल अनुसंधानों का उपयोग, (iii) मेडिकल संस्थानों का नियत समय पर आकलन और (iv) एक प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन का गठन: बिल राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन (एनएमसी) का गठन करता है। बिल के पारित होने के तीन वर्षों के भीतर राज्य सरकारों को राज्य स्तर पर राज्य मेडिकल काउंसिलों का गठन करना होगा। एनएमसी में 25 सदस्य होंगे जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
  • एनएमसी के सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) चेयरपर्सन, (ii) अंडर-ग्रैजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड, पोस्ट-गैजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड के प्रेज़िडेंट, (iii) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, (iv) भारतीय मेडिकल रिसर्च काउंसिल के महानिदेशक, और (v) पांच सदस्य (पार्ट टाइम), जिन्हें बिल के अंतर्गत निर्धारित क्षेत्रों से पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टीशनर्स द्वारा स्वयं में से दो वर्षों के लिए चुना जाएगा।
  • राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन के कार्य: एनएमसी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) मेडिकल संस्थानों और मेडिकल प्रोफेशनल्स को रेगुलेट करने के लिए नीतियां बनाना, (ii) स्वास्थ्य सेवा से संबंधित मानव संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत का आकलन करना, (iii) यह सुनिश्चित करना कि राज्य मेडिकल काउंसिल बिल में दिए गए रेगुलेशनों का पालन कर रही हैं अथवा नहीं, (iv) बिल के अंतर्गत रेगुलेट होने वाले प्राइवेट मेडिकल संस्थानों और मानद (डीम्ड) विश्वविद्यालयों की अधिकतम 50% सीटों की फीस तय करने के लिए दिशानिर्देश बनाना।
  • स्वायत्त (ऑटोनॉमस) बोर्ड्स: बिल एनएमसी की निगरानी में स्वायत्त बोर्ड्स का गठन करता है। प्रत्येक स्वायत्त बोर्ड में प्रेज़िडेंट और चार सदस्य होंगे, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। ये बोर्ड हैं: (i) अंडर-ग्रैजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड और पोस्ट-गैजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड, (ii) मेडिकल एसेसमेंट और रेटिंग बोर्ड और (iii) एथिक्स और मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड।

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लोकसभा में सेरोगेसी (रेगुलेशन) बिल, 2019 पेश

सेरोगेसी (रेगुलेशन) बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया गया।[29]  बिल सेरोगेसी को ऐसे कार्य के रूप में पारिभाषित करता है जिसमें कोई महिला किसी इच्छुक दंपत्ति के लिए बच्चे को जन्म देती है और जन्म के बाद उस इच्छुक दंपत्ति को बच्चा सौंप देती है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सरोगेसी का रेगुलेशन: बिल कमर्शियल सेरोगेसी को प्रतिबंधित करता है लेकिन निस्वार्थ (एलट्रूइस्टिक) सेरोगेसी की अनुमति देता है। निस्वार्थ सेरोगेसी में सेरोगेट माता को गर्भावस्था के दौरान दिए जाने वाले मेडिकल खर्चे और बीमा कवरेज के अतिरिक्त कोई मौद्रिक मुआवजा शामिल नहीं है। कमर्शियल सेरोगेसी में सेरोगेसी या उससे संबंधित प्रक्रियाओं के लिए बुनियादी मेडिकल खर्चे और बीमा कवरेज की सीमा से अधिक मौद्रिक लाभ या पुरस्कार (नकद या किसी वस्तु के रूप में) लेना शामिल है।
  • इच्छुक दंपत्ति के लिए योग्यता का मानदंड : इच्छुक दंपत्ति के पास समुचित अथॉरिटी द्वारा जारी ‘अनिवार्यता का प्रमाणपत्र’ और ‘योग्यता का प्रमाणपत्र’ होना चाहिए। अनिवार्यता का प्रमाणपत्र निम्नलिखित स्थितियां होने पर ही जारी किया जाएगा (i) अगर इच्छुक दंपत्ति में एक या दोनों सदस्यों की प्रामाणित इनफर्टिलिटी का सर्टिफिकेट जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया गया हो, (ii) मेजिस्ट्रेट की अदालत ने सेरोगेट बच्चे के पेरेंटेज और कस्टडी से संबंधित आदेश जारी किया हो, और (iii) 16 महीने की अवधि के लिए बीमा कवरेज सेरोगेट माता की प्रसव उपरांत की जटिलताओं को कवर करता हो।
  • योग्यता का प्रमाणपत्र इच्छुक दंपत्ति द्वारा निम्नलिखित शर्तें पूरी करने पर ही जारी किया जाएगा : (i) अगर वे भारतीय नागरिक हों और उन्हें विवाह किए हुए कम से कम पांच वर्ष हो गए हों, (ii) अगर उनमें से एक 23 से 50 वर्ष के बीच की महिला (पत्नी) और दूसरा 26 से 55 वर्ष का पुरुष (पति) हो, (iii) उनका कोई जीवित बच्चा (बायोलॉजिकल, गोद लिया हुआ या सेरोगेट) न हो, इसमें ऐसे बच्चे शामिल नहीं हैं जो मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग हैं या जीवन को जोखिम में डालने वाली या प्राणघातक बीमारी से ग्रस्त हैं, और (iv) कोई ऐसी स्थिति जिसे रेगुलेशनों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
  • सेरोगेट माता के लिए योग्यता का मानदंड: समुचित अथॉरिटी से योग्यता का प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए सेरोगेट माता को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना चाहिए: (i) उसे इच्छुक दंपत्ति का निकट संबंधी होना चाहिए, (ii) उसे विवाहित होना चाहिए और उसका अपना बच्चा होना चाहिए, (iii) उसे 25 से 35 वर्ष के बीच होना चाहिए, (iv) उसने पहले सेरोगेसी न की हो, और (v) उसके पास सेरोगेसी करने के लिए मेडिकल और मनोवैज्ञानिक फिटनेस का सर्टिफिकेट हो। इसके अतिरिक्त सेरोगेट माता सेरोगेसी के लिए अपने गैमेट्स नहीं दे सकती।

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संसद में होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 पारित

होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 को संसद में पारित कर दिया गया।[30]  बिल होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल एक्ट, 1973 में संशोधन करता है और होम्योपेथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश, 2019 का स्थान लेता है जिसे 2 मार्च, 2019 को जारी किया गया था। एक्ट के अंतर्गत सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी की स्थापना की गई थी। सेंट्रल काउंसिल होम्योपैथिक शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करती है।

  • सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन की समयावधि: सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन के लिए पिछले वर्ष (2018 में) 1973 के एक्ट में संशोधन किया गया था। सेंट्रल काउंसिल को उसके सुपरसेशन की तारीख के एक वर्ष के भीतर दोबारा गठित किया जाना था। इस बीच केंद्र सरकार ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किया था जो सेंट्रल काउंसिल की शक्तियों का इस्तेमाल करेगा। बिल सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन की समयावधि को एक वर्ष से दो वर्ष करने हेतु एक्ट में संशोधन करता है।

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संसद में डेंटिस्ट (संशोधन) बिल, 2019 पारित

डेंटिस्ट (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित किया गया।[31]  बिल डेंटिस्ट एक्ट, 1948 में संशोधन करता है। एक्ट डेंटिस्ट्री (दंत चिकित्सा) के पेशे को रेगुलेट करता है और निम्नलिखित का गठन करता है: (i) डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया, (ii) स्टेट डेंटल काउंसिल्स, और (iii) ज्वाइंट स्टेट डेंटल काउंसिल्स।  

  • एक्ट के दो भागों- भाग ए और भाग बी के अंतर्गत डेंटिस्ट्स को पंजीकृत किया जाता है। भाग ए में मान्यता प्राप्त डेंटल क्वालिफिकेशन वाले व्यक्तियों को पंजीकृत किया जाता है और जिन लोगों के पास ऐसी क्वालिफिकेशन नहीं है, उन्हें भाग बी में पंजीकृत किया जाता है। भाग बी में पंजीकृत व्यक्ति ऐसे भारतीय नागरिक हैं जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पंजीकरण तिथि से कम से कम पांच वर्ष पहले से डेंटिस्ट्स के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं।  
  • डेंटल काउंसिल्स की संरचना: एक्ट के अंतर्गत डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया, स्टेट डेंटल काउंसिल्स और ज्वाइंट स्टेट डेंटल काउंसिल्स में भाग बी में पंजीकृत डेंटिस्ट्स के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। बिल एक्ट की इस अनिवार्य शर्त को हटाता है कि भाग बी में पंजीकृत डेंटिस्ट्स को इन काउंसिल्स में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

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एलोपैथी और आयुष के क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स के लिए न्यूनतम मानदंड प्रस्तावित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मसौदा क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स (केंद्र सरकार) तीसरे संशोधन नियम, 2019 को जारी किया।[32] इन नियमों को क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट (पंजीकरण और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के अंतर्गत विनिर्दिष्ट किया गया था। एक्ट में क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स के पंजीकरण और रेगुलेशन का प्रावधान है और वह न्यूनतम सुविधाओं और सेवाओं के मानदंडों को विनिर्दिष्ट करता है। क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स का अर्थ है, क्लिनिक्स, मोबाइल क्लिनिक्स, अस्पताल और सुपर स्पेशिलिटी विभाग।

मसौदा नियम एलोपैथी और आयुष उपचार करने वाले क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स की विभिन्न श्रेणियों के लिए न्यूनतम मानदंडों को प्रस्तावित करता है। ये मानदंड विभिन्न प्रकार के हैं, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन, उपकरण, दवाएं और जरूरी सपोर्ट सेवा। मसौदा नियमों के अनुसार, विनिर्दिष्ट मानदंडों का पालन न करने वाले स्वास्थ्य केंद्रों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।

 

वित्त

संसद में अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध बिल, 2019 पारित

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध बिल, 2019 को संसद में पारित कर दिया गया।[33]  बिल अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध लगाने और डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करने का मैकेनिज्म प्रदान करता है। यह बिल भारतीय रिजर्व बैंक एक्ट, 1934, सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) एक्ट, 1992 और मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटीज़ एक्ट, 2002 में संशोधन करने का भी प्रयास करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम: बिल के अनुसार डिपॉजिट उस धनराशि को कहा जाता है जिसे एडवांस, लोन या किसी दूसरे रूप में प्राप्त किया जाता है, साथ ही यह वादा किया जाता है कि उसे ब्याज या बिना ब्याज के लौटा दिया जाएगा। ऐसे डिपॉजिट को नकद या किसी सेवा के तौर पर लौटाया जा सकता है और उसे लौटाने की अवधि निर्दिष्ट हो सकती है या निर्दिष्ट नहीं भी हो सकती है। इसके अतिरिक्त बिल स्पष्ट करता है कि कुछ निश्चित धनराशि को डिपॉजिट की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता, जैसे संबंधियों से मिलने वाले लोन की राशि और किसी पार्टनरशिप फर्म में पार्टनरों द्वारा पूंजी हेतु दिए गए योगदान।
  • बिल आरबीआई और सेबी सहित नौ रेगुलेटरों को सूचीबद्ध करता है जोकि विभिन्न डिपॉजिट स्कीमों की निगरानी और रेगुलशन करते हैं। सभी डिपॉजिट टेकिंग स्कीम्स को संबंधित रेगुलेटर के पास रजिस्टर किया जाता है। एक डिपॉजिट टेकिंग स्कीम अनरेगुलेटेड है कि अगर उसे कारोबार के उद्देश्य के लिए चलाया जा रहा है और वह बिल में लिस्टेड रेगुलेटरों के पास रजिस्टर नहीं है।
  • अपराध और सजा: बिल तीन प्रकार के अपराधों और उनकी सजा को स्पष्ट करता है। इन अपराधों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स को चलाना (विज्ञापन देना, प्रमोट और ऑपरेट करना या उसके लिए धनराशि लेना), (ii) रेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स में धोखे से डीफॉल्ट करना, और (iii) जान-बूझकर झूठे तथ्य देकर अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स में निवेश करने के लिए डिपॉजिटर्स को गलत तरीके से उकसाना। उदाहरण के लिए अनरेगुलेटेड डिपॉजिट प्राप्त करने पर दो से लेकर सात साल तक के कारावास की सजा भुगतनी होगी और तीन से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।

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कैबिनेट ने 15वें वित्त आयोग के संदर्भ की शर्तों में संशोधन किए

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

कैबिनेट कमिटी ने 15वें वित्त आयोग के संदर्भ की शर्तों में संशोधन को मंजूर किया।[34] केंद्र-राज्यों के वित्तीय संबंधों पर सुझाव देने के लिए हर पांच वर्ष में वित्त आयोग का गठन किया जाता है। 2020-21 से 2024-25 की अवधि के लिए निम्नलिखित विषयों पर सुझाव देने के लिए नवंबर 2017 में 15वें वित्त आयोग (चेयर: एन. के. सिंह) का गठन किया गया था: (i) राज्यों के साथ केंद्रीय करों की साझेदारी, (ii) राज्यों के साथ केंद्रीय करों के वितरण को प्रबंधित करने वाले सिद्धांत, और (iii) राज्यों की वित्तीय स्थिति में सुधार करने वाले उपाय, ताकि पंचायतों और नगर निगमों को संसाधनों की पूर्ति की जा सके।

संशोधन में 15वें वित्त आयोग से यह जांच करने की अपेक्षा की गई है कि क्या रक्षा और आंतरिक सुरक्षा को वित्त पोषित करने के लिए अलग से व्यवस्था की जाए और अगर ऐसा है तो इस व्यवस्था को कैसे संचालित किया जाए।

केंद्रीय कैबिनेट ने 15वें वित्त आयोग की अवधि को एक महीने के लिए बढ़ाया है।[35] आयोग से 30 नवंबर, 2019 तक रिपोर्ट सौंपने की अपेक्षा की जाती है।

अंतर-मंत्रालयी कमिटी ने वर्चुअल करंसी पर रिपोर्ट सौंपी और क्रिप्टोकरंसी को प्रतिबंधित करने वाला मसौदा बिल प्रस्तावित किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

वर्चुअल करंसी से जुड़े विषयों को समझने और इस संबंध में उपाय सुझाने के लिए नवंबर 2017 में उच्च स्तरीय अंतर मंत्रालयी कमिटी का गठन किया गया था। [36]  कमिटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। कमिटी को वर्चुअल करंसियों के रेगुलेशन के लिए नीतिगत एवं कानूनी संरचना की जांच करने का कार्य मिला था। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्न हैं:[37]

  • वर्चुअल करंसियां: वर्चुअल करंसी किसी वैल्यू का कारोबार करने योग्य डिजिटल प्रारूप है जिसे एक्सचेंज के माध्यम या स्टोर्ड वैल्यू के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे कानूनी टेंडर का दर्जा नहीं दिया जाता। क्रिप्टोकरंसी एक ऐसे विशिष्ट प्रकार की वर्चुअल करंसी है जिसे क्रिप्टोग्राफिक एन्क्रिप्शन तकनीकों से संरक्षित रखा जाता है।
  • कमिटी ने क्रिप्टोकरंसियों के साथ अनेक प्रकार की समस्याओं को चिन्हित किया, जैसे दामों में उतार-चढ़ाव, केंद्रीयकृत अथॉरिटी का अभाव, अधिक एनर्जी और कंप्यूटेशन की जरूरत, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को वित्त पोषित किए जाने की आशंका। कमिटी ने सुझाव दिया कि राज्य द्वारा जारी की गई क्रिप्टोकरंसी को छोड़कर बाकी सभी निजी क्रिप्टोकरंसी को भारत में प्रतिबंधित किया जाए।
  • आधिकारिक डिजिटल करंसी: कमिटी ने गौर किया कि मौजूदा भुगतान प्रणालियों के मुकाबले आधिकारिक डिजिटल करंसी के कई लाभ है। इनमें सभी लेनदेन की रिकॉर्डिंग, करंसी के वितरण का सुरक्षित तथा सस्ता तरीका, और सीमापारीय भुगतानों के लिए सस्ती भुगतान प्रणाली शामिल हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि भारत में आधिकारिक डिजिटल करंसी को शुरू करने के लिए खुले मस्तिष्क से सोचे जाने की जरूरत है। अगर ऐसी डिजिटल करंसी जारी की जाती है तो आरबीआई उपयुक्त रेगुलेटर होना चाहिए।

क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल करंसी का रेगुलेशन मसौदा बिल, 2019:  अंतर-मंत्रालयी कमिटी ने एक मसौदा बिल प्रस्तावित किया जोकि क्रिप्टोकरंसियों को प्रतिबंधित करता है, भारत में क्रिप्टोकरंसियों से संबंधित गतिविधियों को अपराध घोषित करता है और आधिकारिक डिजिटल करंसी के रेगुलेशन का प्रावधान करता है। बिल देश में क्रिप्टोकरंसी को जनरेट करने, बेचने, ट्रांसफर, जारी, निस्तारण या प्रयोग करने पर प्रतिबंध लगाता है। वह एक्सचेंज के माध्यम, स्टोर वैल्यू या यूनिट ऑफ एकाउंट के तौर पर क्रिप्टोकरंसी के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करता है। बिल में प्रावधान है कि क्रिप्टोकरंसी भारत में लीगल टेंडर या करंसी के तौर पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती। बिल कहता है कि केंद्र सरकार आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की सलाह से लीगल टेंडर के तौर पर करंसी के डिजिटल प्रारूप को मंजूर कर सकती है। 

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कैग ने वर्ष 2017-18 के लिए जीएसटी के अनुपालन ऑडिट पर अपनी रिपोर्ट सौंपी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने वर्ष 2017-18 के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अनुपालन ऑडिट पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[38] जीएसटी 1 जुलाई, 2017 से लागू हुआ था। इसमें अधिकतर वस्तुओं और सेवाओं पर केंद्र तथा राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले विभिन्न अप्रत्यक्ष कर समाहित हैं। कैग के मुख्य निष्कर्ष और सुझावों में निम्न शामिल हैं:

  • इनवॉयस मैचिंग: कैग ने कहा कि रिटर्न की जटिल प्रणाली और तकनीकी खामियों के कारण इनवॉयस मैचिंग प्रणाली, जोकि सप्लायर्स और प्राप्तकर्ताओं के जीएसटी रिटर्न्स को मैच करती है, खत्म कर दिया गया। इनवॉयस मैचिंग प्रणाली को इसलिए तैयार किया गया था ताकि यह वैरिफाई किया जा सके कि टैक्सपेयर जिस इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईटीसी) का दावा करते हैं, उसे उनके सप्लायर में चुका दिया है। ऐसी प्रणाली के अभाव में टैक्सपेयर बिना क्रॉस वैरिफिकेशन के खुद आकलन करके आईटीसी का दावा करता है। कैग ने कहा कि मौजूदा प्रणाली में टैक्सपेयर अनियमित दावे करते हैं जिनकी जांच नहीं की जा सकती और फ्रॉड की आशंका बनती है। इसलिए यह जरूरी है कि एसेसेज़ और टैक्स अधिकारियों के बीच एक फिजिकल इंटरफेस बना रहे। कैग ने सुझाव दिया कि इनवॉयस मैचिंग और सरलीकृत रिटर्न्स को शुरू करके अनुपालन को आसान बनाया जाना चाहिए।
  • आईजीएसटी सेटलमेंट का असर: टैक्सपेयर आईटीसी का इस्तेमाल केंद्रीय जीएसटी, एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) और राज्य जीएसटी जैसे करों के भुगतान के लिए कर सकते हैं। कैग ने कहा कि इनवॉयस मैचिंग प्रणाली के अभाव में टैक्सपेयर्स के अनियमित या त्रुटिपूर्ण दावों से राज्यों के साथ आईजीएसटी के सेटलमेंट की प्रक्रिया पर असर होगा। केंद्र सरकार वस्तुओं और सेवाओं की अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर आईजीएसटी वसूलती है। सेटलमेंट की प्रक्रिया में केंद्र सरकार राज्यों को आईजीएसटी में उनका हिस्सा सौंपती है।
  • आईजीएसटी सेटलमेंट्स में समस्याएं: कैग ने गौर किया कि 2017-18 के अंत में सेटलमेंट प्रक्रिया के बाद आईजीएसटी एकाउंट में 2.1 लाख करोड़ रुपए का अनसेटेल्ड बैलेंस जमा था। कैग ने कहा कि इस जमा राशि का एक कारण यह था कि बहुत से लेनदेन के सेटलमेंट में समस्याएं थीं। यह कहा गया कि जीएसटी पोर्टल के सेटलमेंट एल्गोरिदम में टैक्सपेयर्स के रिटर्न्स के कारण त्रुटियां थीं। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया कि यह एल्गोरिदम अधूरे डेटासेट्स पर चल रही थीं जिनमें डेटा उपलब्ध नहीं था। आयात एवं अपील और इनवॉयस मैचिंग प्रणाली जैसे प्रावधानों के लागू न होने कारण डेटा उपलब्ध नहीं थे। कैग ने सुझाव दिया कि वित्त मंत्रालय को अब तक के जीएसटी सेटलमेंट्स की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए, चूंकि इसका असर केंद्र और राज्य सरकारों के वित्त पर पड़ता है।
  • जीएसटी राजस्व: कैग ने कहा कि 2018-19 में जीएसटी से 5,81,563 करोड़ रुपए के राजस्व की उम्मीद है (महालेखा परीक्षक के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार)। यह वर्ष के 7,43,900 करोड़ रुपए के बजटीय अनुमान से 22% कम है।

आरबीआई ने बाहरी वाणिज्यिक उधारियों के लिए अंतिम प्रयोक्ता नियमों में ढिलाई दी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने केंद्र सरकार की सलाह से पूंजीगत जरूरतों, सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों और रूपी लोन के पुनर्भुगतान के लिए बाहरी वाणिज्यिक उधारियों (ईसीबी) से संबंधित नियमों (एंड यूज प्रतिबंधों) में ढील दे दी है।[39]

ईसीबीज़ ऐसे लोन होते हैं जो मान्यता प्राप्त अनिवासी संस्थाओं द्वारा पात्र निवासी संस्थाओं से लिए जाते हैं। इन उधारियों को उनके अंतिम प्रयोग के कुछ प्रतिबंधों के अनुरूप होना चाहिए। अंतिम उपयोग के प्रतिबंध निम्नलिखित हैं: (i) रियल एस्टेट संबंधी गतिविधियां, (ii) पूंजी बाजार में निवेश, (iii) इक्विटी में निवेश, (iv) कार्यशील पूंजी के लिए, (v) सामान्य कॉरपोरेट के उद्देश्य, (vi) रूपी लोन का पुनर्भुगतान, और (vii) उपरिलिखित के लिए ऑन-लेंडिंग गतिविधियां।[40]

वर्तमान में केवल विदेशी इक्विटी होल्डर कार्यशील पूंजी, सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों या रूपी लोन के पुनर्भुगतान के लिए ईसीबी का लाभ उठा सकते हैं और वह भी पांच वर्षों की न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि के लिए। एक विदेशी इक्विटी धारक 25% प्रत्यक्ष इक्विटी होल्डिंग या 51% अप्रत्यक्ष इक्विटी होल्डिंग या ऐसी ग्रुप कंपनी है जिसके कोई विदेशी पेरेंट कंपनी है। नए नियम ईसीबी के लिए अन्य पात्र उधारदाताओं से उधार लेने की अनुमति देने के लिए इन प्रतिबंधों में ढिलाई देते हैं। नए नियमों के अंतर्गत इन उधारदाताओं के लिए निम्न नियम हैं:

  • कार्यशील पूंजी तथा सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों से पात्र उधारकर्ता 10 वर्ष की न्यूनतम औसत परिपक्तवता अवधि के साथ ईसीबी ले सकते हैं।  
  • पात्र उधारकर्ता पूंजीगत व्यय हेतु घरेलू रुपी ऋण के भुगतान के लिए सात वर्ष की न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि के साथ ईसीबी ले सकते हैं। किसी अन्य उद्देश्य के लिए ईसीबी की न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि 10 वर्ष होनी चाहिए।
  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि पर उपरोक्त शर्तों के अधीन उधार देने के उद्देश्य से ईसीबी जुटा सकती हैं
  • कॉरपोरेट उधारकर्ता मैन्यूफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में पूंजीगत व्यय हेतु लिए गए रुपी ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए ईसीबी का लाभ उठा सकते हैं। इसे उधारदाताओं के साथ किसी भी एक समय निपटान व्यवस्था के अंतर्गत 60 दिनों के लिए बकाया के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ऋणदाता इन ऋणों को पात्र ईसीबी ऋणदाताओं को भी बेच सकते हैं।

आरबीआई ने मुख्य निवेश कंपनियों के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा के लिए वर्किंग ग्रुप बनाया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मुख्य निवेश कंपनियों (सीआईसी) के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा के लिए वर्किंग ग्रुप का गठन किया।[41] 

सीआईसीज़ ऐसी नॉन बैंकिंग वित्तीय कंपनियां होती हैं जो शेयर और सिक्योरिटी के अधिग्रहण का काम करती हैं। इनके निम्नलिखित मापदंड हैं: (i) इनके 90% (या उससे अधिक) शुद्ध एसेट्स ग्रुप कंपनियों के इक्विटी शेयर्स, बॉन्ड्स, डिबेंचर्स, डेट या लोन्स के रूप में होने चाहिए, (ii) इन्हें इन उत्पादों में निवेश करने, ग्रुप कंपनियों को लोन देने या ग्रुप कंपनियों की ओर से गारंटी जारी करने के अतिरिक्त कोई वित्तीय कार्य नहीं करने चाहिए, और (iii) वह अपने निवेशों को ट्रेड नहीं करेगी, सिवाय डाइल्यूशन या विनिवेश के उद्देश्य से ब्लॉक सेल के अतिरिक्त।[42]

वर्किंग ग्रुप को सीआईसीज़ के कॉरपोरेट गवर्नेंस फ्रेमवर्क को मजबूती देने के उद्देश्य से गठित किया गया है। वर्किंग ग्रुप के संदर्भ की शर्तों में  निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सीआईसीज़ के मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की जांच करना और उनमें बदलाव का सुझाव देना, (ii) सीआईसीज़ के पंजीकरण की मौजूदा प्रक्रिया की जांच करना, जिसमें एक ग्रुप में अनेक सीआईसीज़ की अनुमति की पद्धति शामिल है तथा उनमें बदलाव का सुझाव देना, (iii) कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने तथा सीआईसीज़ के जरूरी खुलासे से जुड़े उपाय सुझाना, और (iv) सीआईसीज़ पर आरबीआई की निगरानी बढ़ाने के लिए उपाय सुझाना।

वर्किंग ग्रुप से 31 अक्टूबर, 2019 तक रिपोर्ट सौंपने की अपेक्षा है।

कैबिनेट ने चिट फंड्स (संशोधन) बिल, 2019 को मंजूर किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने चिट फंड्स (संशोधन) बिल, 2019 को मंजूरी दे दी है।[43]  बिल चिट फंड्स (संशोधन) बिल, 2018 के बाद आया है जिसे मार्च 2018 को संसद में पेश किया गया था और 16 वीं लोकसभा के भंग होने के साथ वह बिल लैप्स हो गया था। उल्लेखनीय है कि बिल की कॉपी अभी पब्लिक डोमेन में नहीं है।

वित्त मंत्रालय ने नए कर कानून का मसौदा तैयार करने वाले कार्यबल की अवधि बढ़ाई

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने नए कर कानून का मसौदा तैयार करने वाले कार्यबल की अवधि 16 दिन बढ़ा दी है।[44]  आयकर एक्ट, 1961 की समीक्षा करने के लिए टास्क फोर्स का गठन नवंबर 2017 में किया गया था। इसका लक्ष्य निम्नलिखित के मद्देनजर नए कर कानून का मसौदा तैयार करना था: (i) विभिन्न देशों में लागू प्रत्यक्ष कर प्रणाली, (ii) उत्तम अंतरराष्ट्रीय पद्धतियां, (iii) भारत की आर्थिक जरूरतें और (iv) कोई अन्य संबंधित मामला।

जून 2019 में मंत्रालय ने टास्क फोर्स के संदर्भ की शर्तों को बढ़ाया था ताकि निम्नलिखित को उसमें शामिल किया जा सके: (i) अनाम वैरिफिकेशन और जांच, (ii) मुकदमेबाजी में कमी और अपीलों का जल्द से जल्द निपटान, (iii) प्रक्रियाओं को सरल बनाकर अनुपालन के दबाव को कम करना, (iv) वित्तीय लेनदेन के सिस्टम आधारित क्रॉस वैरिफिकेशन की प्रणाली, और (v) विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं को साझा करना।[45]

टास्क फोर्स को 31 जुलाई, 2019 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। अब इसे 16 अगस्त, 2019 तक बढ़ा दिया गया है।

 

श्रम और रोजगार

लोकसभा में कोड ऑन वेजेज़, 2019 पारित

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

कोड ऑन वेजेज़, 2019 को लोकसभा में पारित कर दिया गया।[46]  यह कोड उन सभी रोजगार में वेतन और बोनस भुगतान को रेगुलेट करता है जहां कोई उद्योग चलाया जाता है, व्यापार किया जाता है या मैन्यूफैक्चरिंग की जाती है। कोड निम्नलिखित चार कानूनों का स्थान लेता है: (i) वेतन का भुगतान एक्ट, 1936, (ii) न्यूनतम वेतन एक्ट, 1948, (iii) बोनस का भुगतान एक्ट, 1965, और (iv) समान पारिश्रमिक एक्ट, 1976।

  • कवरेज: कोड सभी कर्मचारियों पर लागू होता है। केंद्र सरकार रेलवे, खनन और तेल क्षेत्रों इत्यादि से जुड़े रोजगार के वेतन संबंधी फैसले लेगी। राज्य सरकारें अन्य रोजगारों के लिए फैसले लेंगी।
  • फ्लोर वेज: कोड के अनुसार, केंद्र सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए एक फ्लोर वेज नियत करेगी। इसके अतिरिक्त वह विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न फ्लोर वेज तय कर सकती है।
  • मिनिमम वेज का निर्धारण: कोड नियोक्ताओं को मिनिमम वेज से कम वेतन चुकाने से प्रतिबंधित करता है। मिनिमम वेज को केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। यह समय, या उत्पादित होने वाले पीस की संख्या इत्यादि पर आधारित होगा। केंद्र या राज्य सरकारें प्रत्येक पांच वर्षों में मिनिमम वेज की समीक्षा या उसमें संशोधन करेंगी। मिनिमम वेज निर्धारित करने के दौरान केंद्र या राज्य सरकारें निम्नलिखित कारकों पर ध्यान देंगी: (i) श्रमिकों की दक्षता और (ii) कार्य की कठिनाई।
  • सलाहकार बोर्ड: केंद्र और राज्य सरकारें अपने सलाहकार बोर्डों का गठन करेंगी। बोर्ड निम्नलिखित पहलुओं पर संबंधित सरकारों को सलाह देगा: (i) न्यूनतम वेतन का निर्धारण, और (ii) महिलाओं के लिए रोजगार अवसरों को बढ़ाना।

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लोकसभा में व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता, 2019 पेश

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

व्यवसागत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता, 2019 को लोकसभा में पेश किया गया।[47] संहिता न्यूनतम 10 श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट्स, और सभी खानों एवं डॉक्स पर लागू होती है। संहिता 13 श्रम कानूनों का स्थान लेती है जिनमें इनमें कारखाना एक्ट, 1948, खान एक्ट, 1952 और अनुबंध श्रमिक (रेगुलेशन और उन्मूलन) एक्ट, 1970 शामिल हैं। संहिता की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • नियोक्ताओं के कर्तव्य: संहिता नियोक्ताओं के कर्तव्यों को विनिर्दिष्ट करती है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ऐसे कार्यस्थल प्रदान करना, जो चोट या बीमारी की आशंका वाले जोखिमों से मुक्त हों, और (ii) कर्मचारियों को निशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच प्रदान करना।
  • काम के घंटे: इस्टैबलिशमेंट्स और कर्मचारियों के विभिन्न वर्गों के लिए काम के घंटे केंद्र या राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट नियमों के अनुसार प्रदान किए जाएंगे। महिला श्रमिक अपनी मर्जी से शाम सात बजे के बाद और सुबह छह बजे से पहले काम कर सकती हैं, अगर केंद्र या राज्य सरकार द्वारा इसकी मंजूरी हो।
  • अवकाश: कोई कर्मचारी हफ्ते में छह दिन से ज्यादा काम नहीं करेगा। श्रमिकों की वैतनिक वार्षिक छुट्टी का कैलकुलेशन कम से कम हर 20 दिन के काम पर एक छुट्टी का होगा।
  • कार्य स्थितियां और सुविधाएं: नियोक्ता से यह अपेक्षा की जाती है कि वह स्वच्छ कार्य परिवेश प्रदान करेगा जो हवादार, आरामदेह तापमान और आर्द्रता वाला, खुला हुआ हो, वहां पीने के लिए साफ पानी मिले। इन सुविधाओं में पुरुष, महिलाओं और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए अलग-अलग स्नानगार और लॉकर रूम, कैंटीन, प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा और क्रेश शामिल हैं।
  • सलाहकार संस्थाएं: केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर व्यवसायगत सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड्स बनाएंगी। संहिता के अंतर्गत मानदंड, नियम और रेगुलेशन बनाने के लिए ये बोर्ड्स केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देंगे।
  • अपराध और दंड: संहिता के अंतर्गत ऐसे अपराध, जिसमें किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाए, करने पर दो वर्ष तक के कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है या पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है, अथवा दोनों सजा भुगतनी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त अदालत यह निर्देश भी दे सकती है कि पीड़ित के उत्तराधिकारियों को जुर्माने की कम से कम आधी राशि मुआवजे के तौर पर दी जाए। जिन उल्लंघनों में सजा विनिर्दिष्ट नहीं की गई है, उनमें नियोक्ता को दो से तीन लाख रुपए के बीच का जुर्माना भरना पड़ेगा।

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व्यापारियों और दुकानदारों के लिए स्वैच्छिक पेंशन योजना अधिसूचित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मान-धन योजना, 2019 नामक स्वैच्छिक पेंशन योजना को अधिसूचित किया।[48]  इसका उद्देश्य स्व-रोजगार व्यक्तियों को न्यूनतम आश्वस्त पेंशन प्रदान करना है। योजना की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल है:

  • पात्रता: यह योजना 1.5 करोड़ रुपए से कम वार्षिक टर्नओवनर वाले 18-40 वर्ष के दुकानदारों, फुटकर व्यापारियों और दूसरे स्व-रोजगार प्राप्त व्यक्तियों पर लागू होगी। एनरोल करने के लिए सबस्क्राइबर का बैंक खाता और आधार नंबर होना चाहिए। इच्छुक व्यक्ति देश में कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए जीवन बीमा निगम के पेंशन फंड में खुद को एनरोल कर सकते हैं। कॉमन सर्विस सेंटर जरूरी पब्लिक यूटिलिटी सेवाओं की डिलिवरी का एक्सेस प्वाइंट है।
  • न्यूनतम आश्वस्त पेंशन: योजना के अंतर्गत प्रत्येक सबस्क्राइबर को 60 वर्ष की उम्र होने पर 3000 रुपए प्रति माह की न्यूनतम आश्वस्त पेंशन प्राप्त होगी। केंद्र सरकार भी लाभार्थी के अंशदान के बराबर अंशदान देगी। सरकार ने योजना में शामिल होने की उम्र के आधार पर भिन्न-भिन्न मासिक अंशदान की राशि को अधिसूचित किया है। उदाहरण के लिए 29 वर्ष की उम्र में योजना में शामिल होने वाले व्यक्ति से प्रति माह 100 रुपए का अंशदान देने की अपेक्षा की जाएगी।
  • परिवार पेंशन: अगर पेंशन प्राप्त करने के दौरान सबस्क्राइबर की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी परिवार पेंशन के तौर पर आधी पेंशन राशि प्राप्त करने के लिए अधिकृत होगा। अगर पेंशन मिलने से पहले ही उसकी मृत्यु हो जाती है (यानी 60 वर्ष से पूर्व) तो उसका जीवनसाथी अंशदान देते हुए पेंशन योजना जारी रख सकता है या उसे छोड़ भी सकता है। अगर वह पेंशन योजना को छोड़ना चाहे तो उसे लाभार्थी का अंशदान मिल जाएगा और उसमें फंड द्वारा अर्जित ब्याज या बैंक के बचत खाते की ब्याज दर से मिलने वाला ब्याज (इनमें से जो भी अधिक होगा) भी जुड़ा होगा। अगर सबस्क्राइबर और उसके जीवनसाथी, दोनों की मृत्यु हो जाती है तो पूरा कॉरपस फंड में वापस जमा हो जाएगा।
  • अगर लाभार्थी 60 वर्ष का होने से पहले विकलांग हो जाता है तो उसका जीवनसाथी पेंशन योजना जारी रख सकता है या उसे छोड़ भी सकता है। अगर वह पेंशन योजना को छोड़ना चाहे तो उसे लाभार्थी का अंशदान मिल जाएगा और उसमें फंड द्वारा अर्जित ब्याज या बैंक के बचत खाते की ब्याज दर से मिलने वाला ब्याज (इनमें से जो भी अधिक होगा) भी जुड़ा होगा।
  • पेंशन योजना को छोड़ना और वापसी: कोई व्यक्ति निम्नलिखित स्थितियों में योजना को छोड़ सकता है: (i) अगर वह 10 वर्ष के अंदर योजना को छोड़ देता है तो उसके हिस्से के अंशदान को उसे बचत खाते के ब्याज सहित लौटा दिया जाएगा, और (ii) अगर वह 10 वर्ष के बाद लेकिन 60 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले योजना को छोड़ता है तो उसे उसका अंशदान वापस मिल जाएगा और उसमें फंड द्वारा अर्जित ब्याज या बैंक के बचत खाते की ब्याज दर से मिलने वाला ब्याज (इनमें से जो भी अधिक होगा) भी जुड़ा होगा।

 

कॉरपोरेट मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कंपनी (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित

कंपनी (संशोधन) बिल, 2019 को संसद में पारित किया गया।[49]  बिल कंपनी एक्ट, 2013 में संशोधन करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • डीमैटीरियलाइज्ड शेयर जारी करना: एक्ट के अंतर्गत पब्लिक कंपनियों की कुछ श्रेणियों से केवल डीमैटीरियलाइज्ड प्रारूप में शेयर जारी करने की अपेक्षा की जाती है। बिल कहता है कि यह गैर सूचीबद्ध कंपनियों की अन्य श्रेणियों के लिए भी विनिर्दिष्ट किया जा सकता है।
  • कुछ अपराधों का पुनर्वर्गीकरण: 2013 के एक्ट में ऐसे 81 कंपाउंडिंग अपराध दिए गए हैं जिनके लिए जुर्माना या जुर्माना या कैद, या दोनों की सजा है। इन अपराधों की सुनवाई अदालतों द्वारा की जाती है। बिल इनमें से 16 अपराधों को सिविल डीफॉल्ट्स में वर्गीकृत करता है, जिनमें अब एडजुडिकेटिंग ऑफिसर्स (केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त) जुर्माना वसूल सकते हैं। इन अपराधों में निम्न शामिल हैं: (i) डिस्काउंट पर शेयर जारी करना, और (ii) सालाना रिटर्न फाइल न करना। बिल कुछ अन्य अपराधों में दंड में संशोधन करता है।
  • निगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर): एक्ट के अंतर्गत जिन कंपनियों में सीएसआर का प्रावधान है, अगर वे सीआरएस की पूरी धनराशि का उपयोग नहीं करतीं तो उन्हें अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इसका खुलासा करना होगा। बिल के अंतर्गत सीएसआर की हर साल खर्च न होने वाली धनराशि वित्तीय वर्ष के छह महीनों के अंदर एक्ट की अनुसूची 7 के अंतर्गत आने वाली निधियों (जैसे प्रधानमंत्री राहत कोष) में से किसी एक में हस्तांतरित हो जाएगी।
  • हालांकि अगर सीएसआर की धनराशि कुछ चालू परियोजनाओं के लिए हैं, तो खर्च न होने वाली राशि वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के 30 दिनों के अंदर एक अनस्पेंड सीएसआर खाते में हस्तांतरित हो जाएगी जिसे तीन वर्षों में खर्च करना होगा। तीन वर्ष के बाद बची राशि एक्ट की अनुसूची 7 में उल्लिखित निधियों में से किसी एक में हस्तांतरित हो जाएगी। किसी प्रकार का उल्लंघन करने पर 50,000 रुपए से लेकर 25,00,000 रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। उल्लंघन करने वाले प्रत्येक अधिकारी को तीन वर्ष के कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है तथा 50,000 और 25,00,000 के बीच जुर्माना भरना पड़ सकता है या दोनों सजा भुगतनी पड़ सकती है।
  • व्यवसाय शुरू करना: बिल के अनुसार कोई कंपनी तभी अपना व्यवसाय शुरू कर सकती है, (i) जब वह अपने संस्थापन के 180 दिनों के अंदर इस बात की पुष्टि करेगी कि कंपनी के मेमोरेंडम के प्रत्येक सबस्क्राइबर ने अपने उन सभी शेयर्स का मूल्य चुका दिया है, जिन्हें लेने की उन्होंने सहमति जताई है, और (ii) जब वह अपने संस्थापन के 30 दिनों के अंदर कंपनी रजिस्ट्रार में पंजीकृत अपने कार्यालय के पते का वैरिफिकेशन फाइल कर देगी। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती और पाया जाता है कि उसने अपना व्यवसाय शुरू नहीं किया है तो कंपनी का नाम, कंपनी रजिस्ट्रार से हटाया जा सकता है।

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राज्यसभा में इनसॉल्वेंसी और बैंकरस्पी संहिता (संशोधन) बिल, 2019 पारित

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) बिल, 2019 राज्यसभा में पारित किया गया।[50]  बिल इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 में संशोधन करता है। संहिता कंपनियों और व्यक्तियों के बीच इनसॉल्वेंसी को रिज़ॉल्व करने के लिए एक समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करती है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया की शुरुआत: संहिता के अंतर्गत फाइनांशियल क्रेडिटर इनसॉल्वेंसी के रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया की शुरुआत के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में आवेदन कर सकता है। संहिता के अनुसार एनसीएलटी को रेज़ोल्यूशन का आवेदन प्राप्त होने के 14 दिनों के अंदर यह निर्धारित करना होगा कि डीफॉल्ट किया गया था। अपने निष्कर्षों के आधार पर एनसीएलटी आवेदन को मंजूर या नामंजूर कर सकता है। बिल कहता है कि अगर एनसीएलटी को डीफॉल्ट होने का पता नहीं चलता और वह 14 दिनों के अंदर आदेश जारी नहीं करता तो उसे लिखित में इसके कारण बताने होंगे।
  • रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया की समय सीमा: संहिता कहती है कि इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया को 180 दिनों में पूरा होना चाहिए जिसे 90 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। बिल कहता है कि रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया को 330 दिनों में पूरा होना चाहिए। इसमें रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया की बढ़ी हुई अवधि और कानूनी कार्यवाही में लगने वाला समय भी शामिल होगा। बिल के लागू होने पर, अगर कोई मामला 330 दिनों तक लंबित है, तो बिल के अनुसार, उसे 90 दिनों में निपटाया जाना चाहिए।
  • रेज़ोल्यूशन प्लान: संहिता के अनुसार रेज़ोल्यूशन प्लान में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को लिक्विडेशन की स्थिति में प्राप्त होने वाली राशि से अधिक राशि प्राप्त हो। बिल इसमें संशोधन करता है और प्रावधान करता है कि ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को (i) लिक्विडेशन के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि, तथा (ii) रेज़ोल्यूशन प्लान के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि, अगर वह राशि वरीयता क्रम के अनुसार (लिक्विडेशन के समय) वितरित की गई है, के बीच से अधिक राशि चुकाई जाए।
  • फाइनांशियल क्रेडिटर्स के प्रतिनिधि: संहिता विनिर्दिष्ट करती है कि कुछ मामलों में, जैसे जब एक निर्दिष्ट संख्या से अधिक क्रेडिटर्स का ऋण बकाया है तो फाइनांशियल क्रेडिटर्स का अधिकृत प्रतिनिधि कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स में उनका प्रतिनिधित्व करेगा। ये प्रतिनिधि फाइनांशियल क्रेडिटर्स के निर्देशानुसार उनकी ओर से वोट करेंगे। बिल कहता है कि ये प्रतिनिधि लेनदारों के बहुमत से लिए गए निर्णय के आधार पर वोट करेंगे।

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सड़क परिवहन और राजमार्ग

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

राज्यसभा में मोटर वाहन (संशोधन) बिल, 2019 पारित

मोटर वाहन (संशोधन) बिल, 2019 राज्यसभा में पारित किया गया।[51] यह बिल सड़क सुरक्षा प्रदान करने के लिए मोटर वाहन एक्ट, 1988 में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। यह एक्ट मोटर वाहनों से संबंधित लाइसेंस और परमिट देने, मोटर वाहनों के लिए मानक और इन प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए दंड का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा: केंद्र सरकार ‘गोल्डन आवर’ (स्वर्णिम घंटे) के दौरान सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का कैशलेस उपचार करने की एक योजना विकसित करेगी। बिल के अनुसार ‘गोल्डन आवर’ घातक चोट के बाद की एक घंटे की समयावधि होती है जब तुरंत मेडिकल देखभाल से मौत को मात देने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। केंद्र सरकार थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के अंतर्गत मुआवजे का दावा करने वालों को अंतरिम राहत देने के लिए एक योजना भी बना सकती है।
  • अनिवार्य बीमा: बिल में केंद्र सरकार से मोटर वाहन दुर्घटना कोष बनाने की अपेक्षा की गई है। यह कोष भारत में सड़क का प्रयोग करने वाले सभी लोगों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा। इसे निम्नलिखित स्थितियों के लिए उपयोग किया जाएगा: (i) गोल्डन आवर योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का उपचार, (ii) हिट और रन मामलों में मौत का शिकार होने वाले लोगों के प्रतिनिधियों को मुआवजा देना, (iii) हिट और रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को मुआवजा देना, और (iv) केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किए गए व्यक्तियों को मुआवजा देना। इस कोष में निम्नलिखित के माध्यम से धन जमा कराया जाएगा: (i) उस प्रकृति का भुगतान जिसे केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, (ii) केंद्र सरकार द्वारा अनुदान या ऋण, (iii) क्षतिपूर्ति कोष में शेष राशि (हिट और रन मामलों में मुआवजा देने के लिए एक्ट के अंतर्गत गठित मौजूदा कोष), या (iv) केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अन्य कोई स्रोत।
  • सड़क सुरक्षा बोर्ड: बिल में एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का प्रावधान है जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के जरिए बनाया जाएगा। बोर्ड सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के सभी पहलुओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देगा। इनमें निम्नलिखित से संबंधित सलाह शामिल हैं: (i) मोटर वाहनों के स्टैंडर्ड, (ii) वाहनों का रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग, (iii) सड़क सुरक्षा के मानदंड, और (iv) नए वाहनों की प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना।

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सड़क मंत्रालय ने अनेक अधिसूचनाएं जारी कीं

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसी अनेक अधिसूचनाएं जारी की हैं जोकि परिवहन क्षेत्र में नई तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने का प्रयास करती हैं। ये निम्नलिखित हैं:

डिजिटल टोल पेमेंट को बढ़ावा देना:  यह कहा गया है कि आरएफआईडी तकनीक आधारित फास्टैग (FASTag) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान में वृद्धि नहीं हुई है।[52]  डिजिटल भुगतान तथा टोल फी प्लाजा में सीमलेस पैसेज को बढ़ावा देने के लिए 1 दिसंबर 2019 से फी प्लाजाज़ के सभी लेन्स को फास्टैग (FASTag) लेन्स घोषित किया जाए। 51  ओवरसाइज्ड वाहनों पर नजर रखने के लिए एक लेन को हाइब्रिड लेन के तौर पर रखा जाए जोकि टोल फी भुगतान के दूसरे रूपों को भी स्वीकार करेगी।

फास्टैग (FASTag) एक रीलोडेबल टैग है जोकि ऑटोमैटिक तरीके से टोल चार्जेज़ की कटौती करता है। इसमें वाहनों को नकद लेनदेन के लिए टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होती। टैग रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक का इस्तेमाल करता है और टैग एकाउंट के एक्टिव होने के बाद वाहन के विंडस्क्रीन पर चिपकाया जाता है।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन करने वाली अधिसूचनाओं का मसौदा

  • माइक्रोडॉट टेक्नोलॉजी: मोटर वाहन या उनका किसी भी हिस्से, जोकि माइक्रोडॉट टेक्नोलॉजी से जुड़ा हुआ है, को विनिर्दिष्ट विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए। [53]  माइक्रोडॉट टेक्नोलॉजी में वाहन की बॉडी और उसके हिस्सों पर माइक्रोस्कोपिक डॉट्स को स्प्रे किया जाता है जोकि उन्हें अनूठी विशेषताएं देती हैं। [54]  इस तकनीक से वाहनों को चोरी और नकली स्पेयर पार्ट्स की जांच में मदद मिलेगी।
  • फिटनेस सर्टिफिकेट का रीन्यूअल: वर्तमान  में परिवहन वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट का रीन्यूअल हर साल होता है। मसौदा अधिसूचना में प्रावधान है कि परिवहन वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट्स को निम्नलिखित प्रकार से रीन्यू किया जाएगा: (i) आठ साल पुराने वाहनों का हर दो साल में एक बार, (ii) आठ से 15 साल पुराने वाहनों का एक साल में एक बार, (iii) 15 साल से पुराने वाहनों का हर छह महीने में एक बार।[55] 15 साल से पुराने वाहनों के लए फिटनेस सर्टिफिकेट को जारी करने या उसे रीन्यू करने की फीस को बढ़ाया गया है। इसके अतिरिक्त बसों के फिटनेस इंस्पेक्शन में यह भी जांचा जाएगा कि उनमें भिन्न क्षमता वाले यात्रियों या कम मोबिलिटी वाले यात्रियों के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए गए हैं अथवा नहीं।

मसौदा नियमों के प्रकाशन के 30 दिनों के अंदर उन पर टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

महिला एवं बाल विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

राज्यसभा में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) बिल, 2019 पारित

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) बिल, 2019 राज्यसभा में पेश और पारित किया गया।[56] बिल यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण एक्ट, 2012 में संशोधन करता है।  यह एक्ट यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से बच्चों के संरक्षण का प्रयास करता है।

  • पेनेट्रेटिव यौन हमला: एक्ट के अंतर्गत अगर किसी व्यक्ति ने (i) किसी बच्चे के वेजाइना, मुंह, यूरेथ्रा या एनस में अपने पेनिस को डाला (पेनेट्रेट किया) है, या (ii) वह बच्चे से ऐसा करवाता है, या (iii) बच्चे के शरीर में कोई वस्तु डालता है, या (iv) अपना मुंह बच्चे के शरीर के अंगों को लगाता है, तो उसे ‘पेनेट्रेटिव यौन हमला’ कहा जाता है। ऐसे अपराधों के लिए सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा भुगतनी पड़ सकती है और जुर्माना भरना पड़ सकता है। बिल इसमें न्यूनतम सजा को सात से दस वर्ष तक करता है। इसके अतिरिक्त बिल कहता है कि अगर कोई व्यक्ति 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे पर पेनेट्रेटिव यौन हमला करता है तो उसे 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा भुगतनी पड़ सकती है और जुर्माना भरना पड़ सकता है।
  • गंभीर पेनेट्रेटिव यौन हमला: एक्ट कुछ एक्शंस को ‘गंभीर पेनेट्रेटिव यौन हमला’ कहता है। इसमें ऐसे मामले शामिल हैं जब पुलिस अधिकारी, सशस्त्र सेनाओं के सदस्य, या पब्लिक सर्वेंट बच्चे पर पेनेट्रेटिव यौन हमला करें। बिल गंभीर पेनेट्रेटिव यौन हमले की परिभाषा में दो आधार और जोड़ता है। इनमें (i) हमले के कारण बच्चे की मौत, और (ii) प्राकृतिक आपदा के दौरान किया गया हमला या हिंसा की अन्य समान स्थितियां शामिल है।
  • वर्तमान में गंभीर पेनेट्रेटिव यौन हमले की सजा 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना है। बिल न्यूनतम कारवास को 10 वर्ष से 20 वर्ष करता है और अधिकतम सजा मृत्यु दंड है।
  • गंभीर यौन हमला: एक्ट के अंतर्गत ‘यौन हमले’ में वे एक्शंस शामिल हैं, जिनमें कोई व्यक्ति पेनेट्रेशन के बिना किसी बच्चे के वेजाइना, पेनिस, एनस या ब्रेस्ट को छूता है। ‘गंभीर यौन हमले’ में ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें अपराधी बच्चे का संबंधी होता है या जिनमें बच्चे के सेक्सुअल ऑर्गन्स घायल हो जाते हैं, इत्यादि। बिल गंभीर यौन हमले में दो स्थितियों को और शामिल करता है। इनमें (i) प्राकृतिक आपदा के दौरान किया गया हमला, और (ii) जल्दी यौन परिपक्वता लाने के लिए बच्चे को हारमोन या कोई दूसरा रासायनिक पदार्थ देना या दिलवाना शामिल है।

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शिक्षा

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

संसद में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (शिक्षकों के कैडर में आरक्षण) बिल, 2019 पारित

केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (शिक्षकों के कैडर में आरक्षण) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[57]  यह बिल 7 मार्च, 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है। बिल (i) अनुसूचित जातियों, (ii) अनुसूचित जनजातियों, (iii) सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों और (iv) आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों के पदों पर आरक्षण का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं :

  • पदों पर आरक्षण: बिल केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों की सीधी भर्ती वाले पदों पर (कुल स्वीकृत संख्या में से) आरक्षण का प्रावधान करता है। इस आरक्षण के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों को एक यूनिट माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक विभाग के सामान्य पदों (जैसे एसिस्टेंट प्रोफेसर) को एक यूनिट मानकर आरक्षित श्रेणियों के अभ्यार्थियों को पद आबंटित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि मौजूदा दिशानिर्देशों में आरक्षण देने के लिए प्रत्येक विभाग को एक यूनिट माना जाता था।
  • कवरेज और अपवाद: बिल सभी ‘केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों’ पर लागू होगा जिनमें संसदीय कानूनों के अंतर्गत स्थापित विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय माने जाने वाले (डीम्ड) संस्थान, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, और केंद्र सरकार की सहायता प्राप्त संस्थान शामिल हैं।
  • हालांकि बिल में कुछ इंस्टीट्यूट्स ऑफ एक्सिलेंस, शोध संस्थान और राष्ट्रीय एवं कूटनीतिक महत्व के संस्थानों को अपवाद माना गया है और बिल की अनुसूची में उनके संबंध में विनिर्देश दिए गए हैं। बिल में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को अपवाद बताया गया है।

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें। बिल पर ब्लॉग के लिए कृपया देखें

संसद में केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) बिल, 2019 पारित

केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।[58]  यह बिल केंद्रीय विश्वविद्यालय एक्ट, 2009 में संशोधन का प्रयास करता है। 2009 का एक्ट विभिन्न राज्यों में शिक्षण और अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालयों की स्थापना करता है।

बिल आंध्र प्रदेश में दो केंद्रीय विश्वविद्यालयों- आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय और आंध्र प्रदेश केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रावधान करता है। केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय विशेष रूप से देश के जनजातीय लोगों के लिए जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं से संबंधित उच्च शिक्षा और अनुसंधान सुविधाएं प्रदान करने के लिए अतिरिक्त उपाय करेगा।

उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन एक्ट, 2014 के अंतर्गत राज्य में केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना बाध्यकारी है।

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें

 

आवास और शहरी मामले

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

लोकसभा में सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) संशोधन, बिल, 2019 पारित

सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) संशोधन बिल, 2019 लोकसभा में पेश और पारित किया गया।[59]  बिल सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) एक्ट, 1971 में संशोधन करता है। इस एक्ट में कुछ मामलों में सार्वजनिक परिसरों से अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली का प्रावधान है।

  • निवास स्थान: बिल ‘निवास स्थान पर कब्जा’ को इस प्रकार पारिभाषित करता है कि इसका अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक स्थान पर कब्जा किया जाना है जिसे उस कब्जे के लिए अधिकृत किया गया (लाइसेंस दिया गया) हो। यह लाइसेंस किसी निश्चित अवधि के लिए होना चाहिए या उस अवधि के लिए जब तक कि वह व्यक्ति पद पर बना हुआ है। इसके अतिरिक्त केंद्र, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार या किसी संवैधानिक अथॉरिटी (जैसे संसदीय सचिवालय, या केंद्र सरकार की कोई संस्था या राज्य सरकार) द्वारा बनाए गए नियम के तहत इस कब्जे की अनुमति होनी चाहिए।
  • बेदखली का नोटिस: बिल निवास स्थान से बेदखली के लिए एक प्रक्रिया बनाने की बात कहता है। बिल में यह अपेक्षा की गई है कि अगर किसी व्यक्ति ने किसी निवास स्थान पर अनाधिकृत कब्जा किया है तो एस्टेट ऑफिसर (केंद्र सरकार का एक अधिकारी) उसे लिखित नोटिस जारी करेगा। नोटिस में उस व्यक्ति से तीन कार्य दिनों के भीतर कारण बताने की अपेक्षा की जाएगी कि उसे बेदखली का आदेश क्यों न दिया जाए। इस लिखित नोटिस को निवास स्थान के विशिष्ट हिस्से पर लगाया जाना चाहिए।
  • बेदखली का आदेश: कारण बताओ पर विचार करने और दूसरी जांच के बाद एस्टेट ऑफिसर बेदखली का आदेश देगा। अगर कोई व्यक्ति आदेश नहीं मानता तो एस्टेट ऑफिसर उसे निवास स्थान से बेदखल कर सकता है और उस स्थान को अपने कब्जे में ले सकता है। इसके लिए एस्टेट ऑफिसर उतनी ताकत का प्रयोग कर सकता है, जितनी जरूरी हो।
  • नुकसान की भरपाई: अगर निवास स्थान में अनाधिकृत कब्जा करने वाला व्यक्ति अदालत के बेदखली के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे कब्जे की वजह से हर महीने होने वाले नुकसान की भरपाई करनी होगी

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मसौदा मॉडल टेनेन्सी एक्ट, 2019 जारी

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने मसौदा मॉडल टेनेन्सी एक्ट, 2019 जारी किया। [60]  मसौदा एक्ट रेंटल हाउसिंग से संबंधित मामलों के रेगुलेशन और उन पर शीघ्र निर्णय का प्रावधान करता है। यह मौजूदा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (यूटीज़) रेंट कंट्रोल एक्ट्स को रद्द करने का प्रयास भी करता है। अंतिम मसौदा मॉडल टेनेन्सी एक्ट को राज्यों में सर्कुलेट किया जाएगा।[61]  राज्य इस मॉडल एक्ट के प्रावधानों से तालमेल बैठाने के लिए नए टेनेन्सी को लागू कर सकते हैं या मौजूदा कानूनों में संशोधन कर सकते हैं। मसौदा एक्ट की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • टेनेन्सी का एग्रीमेंट: ड्राफ्ट एक्ट में प्रावधान है कि भूस्वामी और किरायेदार (पक्ष) के बीच एग्रीमेंट पर दस्तखत किया जाए। किरायेदारी की अवधि, देय किराये और किराए के संशोधनों पर दोनों पक्षों को सहमत होंगे और एग्रीमेंट में यह विनिर्दिष्ट होगा। इस एग्रीमेंट के बिना किसी परिसर को किराए पर नहीं दिया जा सकता। इसके अतिरिक्त यह एग्रीमेंट एक्ट की अनुसूची में निर्दिष्ट रूप में रेंट अथॉरिटी में रजिस्टर होनी चाहिए। इसमें भूस्वामी तथा किराएदार का नाम, पता, पैन और आधार नंबर जैसे विवरण, परिसर का ब्यौरा और देय किराए का जिक्र होना चाहिए।
  • रेंट अथॉरिटी: राज्य/यूटी सरकार की पूर्व सहमति से जिला कलेक्टर रेंट अथॉरिटी (डेपुटी कलेक्टर के पद का) को नियुक्त करेगा। टेनेन्सी एग्रीमेंट की सूचना प्राप्त होने पर रेंट अथॉरिटी को अपनी वेबसाइट पर उस एग्रीमेंट का विवरण अपलोड करना होगा। अथॉरिटी भूस्वामी या किराएदार के आवेदन पर किराया को तय या संशोधित कर सकती है। वह उस तारीख में भी संशोधन कर सकती है, जब से संशोधित किराया लागू होगा। अथॉरिटी के आदेश के खिलाफ रेंट कोर्ट में अपील की जा सकती है और यह आदेश की तारीख के 30 दिनों के अंदर की जानी चाहिए।
  • रेंट कोर्ट्स: राज्य सरकार जितने जरूरी हों, उतने रेंट कोर्ट्स बना सकती है। किसी क्षेत्र में दो या उससे अधिक अदालतें हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में राज्य/यूटी सरकार मामलों का वितरण कर सकती है। रेंट कोर्ट में राज्य/यूटी सरकार उच्च न्यायालय की सलाह से दो सदस्यों को नियुक्त कर सकती है। रेंट कोर्ट के आदेश के खिलाफ रेंट ट्रिब्यूनल में अपील की जाएगी और उसे आदेश के 30 दिनों के अंदर दायर किया जाना चाहिए।
  • रेंट ट्रिब्यूनल: राज्य सरकार जितने जरूरी हों, उतने रेंट ट्रिब्यूनल बना सकती है। एक क्षेत्र में अनेक ट्रिब्यूनल होने की स्थिति में राज्य/यूटी सरकार उनमें से एक को प्रिंसिपल रेंट ट्रिब्यूनल अधिसूचित कर सकती है। रेंट ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता प्रिंसिपल अपीलीय सदस्य (उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के स्तर के) द्वारा की जाएगी और उसमें दो सदस्य होंगे। रेंट कोर्ट और ट्रिब्यूनल 60 दिनों के अंदर मामले के निपटारे का प्रयास करेंगी।

शहरी जल संरक्षण के लिए दिशानिर्देश जारी

भारत के सामने विश्व के 4% मीठे जल स्रोतों से विश्व की 17% जनसंख्या की प्यास बुझाने की चुनौती है। [62]  वर्तमान में देश के एक बटा 10 हिस्से से भी वार्षिक वर्षाजल को संचित किया जाता है। नीति आयोग के अनुसार भारत की लगभग 50% जनसंख्या पानी की जबरदस्त कमी से जूझ रही है।61 इसके मद्देनजर आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने जल शक्ति अभियान के अंतर्गत शहरी जल संरक्षण के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।61  दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • महत्वपूर्ण क्षेत्र: दिशानिर्देशों में चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रावधान है: (i) वर्षा जल संचयन, (ii) उपचारित अपशिष्ट जल (ट्रीटेड वेस्ट वॉटर) का पुनः उपयोग, (iii) शहरी जल स्रोतों का जीर्णोद्धार, और (iv) पौधरोपण।
  • कवरेज और समय सीमा: जल शक्ति मंत्रालय ने देश में 255 जिलों और 1,597 ब्लॉक्स को वॉटर स्ट्रेस्ड चिन्हित किया है। इनमें 756 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबीज़) को वॉटर स्ट्रेस्ड चिन्हित किया गया है। यूएलबीज़ इन गतिविधियों को दो चरणों में संचालित कर सकती हैं: (i) 1 जुलाई, 2019 से 15 सितंबर, 2019, और (ii) 1 अक्टूबर, 2019 से 30 नवंबर, 2019।
  • फंडिंग: अमृत योजना के अंतर्गत आने वाले शहर इस फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। अमृत के अंतर्गत न आने वाले शहर निम्नलिखित का प्रयोग कर सकते हैं: (i) राज्य फंड्स, (ii) 14वें वित्त आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए अनुदान, या (iii) सीएसआर और भूमि मुद्रीकरण, इत्यादि के जरिए उपलब्ध फंड्स।
  • वर्षा जल संचयन का अर्थ है, छत, सड़क किनारे या खुले इलाकों में वर्षा जल को जमा और स्टोर करना, जिसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके अथवा जल स्रोतों में वृद्धि के लिए भूजल में पुनर्भरण किया जा सके। यूएलबीज़ निम्नलिखित तरीकों से वर्ष जल संचयन को लागू कर सकते हैं: (i) भवन निर्माण के नियमों में ऐसी व्यवस्था को लागू करना, और (ii) वर्षा जल संचयन इकाई को स्थापित करना जोकि शहर में ऐसे संचयन की निगरानी करेगी।
  • उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यूएलबीज़ यह सुनिश्चित करेंगी कि सभी सार्वजनिक और कमर्शियल इमारतों में दोहरी पाइपिंग प्रणाली हो। अगर शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हो तो उस प्लांट के अपशिष्ट जल को खेती और औद्योगिक उद्देश्य, फायर हाइड्रेंट्स और बड़े स्तर के निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • यूएलबी निम्नलिखित प्रकार से शहरी जल स्रोतों का जीर्णोद्धार कर सकती हैं: (i) डी-सिल्टिंग के जरिए जल स्रोतों की सफाई, (ii) जल स्रोतों के किनारों को अतिक्रमण से बचाना, और (iii) जल स्रोत में घरेलू और औद्योगिक सीवेज को बहने से रोकना।

 

नागरिक उड्डयन

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

राज्यसभा में भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2019 पारित

राज्यसभा में भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2019 पेश और पारित किया गया।[63]  यह बिल भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी एक्ट, 2008 में संशोधन करता है। यह एक्ट भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (एयरा) की स्थापना करता है। एयरा उन सिविलियन एयरपोर्ट्स की एयरोनॉटिकल सेवाओं के लिए टैरिफ और दूसरे शुल्क को रेगुलेट करता है जिनका वार्षिक ट्रैफिक 15 लाख यात्रियों से अधिक होता है। यह अथॉरिटी इन एयरपोर्ट्स में सेवाओं के प्रदर्शन मानकों का भी निरीक्षण करती है। 

  • मुख्य एयरपोर्ट्स की परिभाषा: एक्ट के अंतर्गत मुख्य एयरपोर्ट्स में ऐसे एयरपोर्ट्स आते हैं जिनका वार्षिक यात्री ट्रैफिक 15 लाख से अधिक होता है या ऐसे एयरपोर्ट्स जिन्हें केंद्र सरकार ने अधिसूचित किया हो। बिल वार्षिक यात्री ट्रैफिक की सीमा को बढ़ाकर 35 लाख से अधिक करता है।
  • एयरा द्वारा टैरिफ तय करना: एक्ट के अंतर्गत एयरा निम्नलिखित निर्धारित करता है : (i) हर पांच वर्षों में विभिन्न एयरपोर्ट्स की एयरोनॉटिकल सेवाओं का टैरिफ, (ii) मुख्य एयरपोर्ट्स की डेवलपमेंट फीस, और (iii) पैसेंजर्स की सर्विस फीस। अथॉरिटी टैरिफ तय करने और टैरिफ संबंधी दूसरे कार्य करने, जिसमें बीच की अवधि में टैरिफ में संशोधन करना शामिल है, के लिए जरूरी सूचनाओं की मांग भी कर सकती है।
  • बिल कहता है कि एयरा निम्नलिखित निर्धारित नहीं करेगी : (i) टैरिफ, (ii) टैरिफ का स्ट्रक्चर, और (iii) कुछ मामलों में डेवलपमेंट फीस। जैसे जब टैरिफ की राशि बिड डॉक्यूमेंट (बोली लगाने वाले दस्तावेज) का हिस्सा हो जिसके आधार पर एयरपोर्ट ऑपरेशन का काम सौंपा गया हो। इन दस्तावेजों में टैरिफ को शामिल करने से पहले कनसेशनिंग अथॉरिटी को एयरा से सलाह लेनी होगी और उस टैरिफ को अधिसूचित करना होगा।

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पवन हंस में 51% हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश के लिए बोलियां आमंत्रित

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) में सरकार की 51% इक्विटी शेयरहोल्डिंग के रणनीतिक विनिवेश के लिए बोलियों को आमंत्रित किया है। [64][65]  पीएचएल मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। यह ऑफशोर ऑपरेशनों, अंतरद्वीपीय परिवहन, दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, राहत कार्य तथा पर्यटन के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रदान करता है। 

सरकारी हिस्सेदारी के अतिरिक्त ओएनजीसी ने भी पीएचएल में अपनी 49% की शेयरहोल्डिंग को बेचने का फैसला किया है।[66] सरकार 51% की हिस्सेदारी को खरीदने के लिए जिसे चुनेगी, वह कंपनी में ओएनजीसी के 49% हिस्से को भी खरीद सकता है।

 

जल शक्ति

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

लोकसभा में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) बिल, 2019 पारित

अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) बिल, 2019 लोकसभा में पेश और पारित किया गया।[67]  बिल अंतरराज्यीय नदी जल विवाद एक्ट, 1956 में संशोधन करता है। एक्ट राज्यों के बीच नदियों और नदी घाटियों से संबंधित विवादों में अधिनिर्णय का प्रावधान करता है। 

  • एक्ट के अंतर्गत राज्य सरकार केंद्र सरकार से आग्रह कर सकती है कि वह अंतरराज्यीय नदी विवाद को अधिनिर्णय के लिए ट्रिब्यूनल को सौंपे। अगर केंद्र सरकार को ऐसा लगता है कि बातचीत से विवाद का निवारण नहीं हो सकता तो वह शिकायत प्राप्त करने के एक साल के अंदर जल विवाद ट्रिब्यूनल स्थापित कर सकती है। बिल इस व्यवस्था को बदलने का प्रयास करता है।
  • विवाद निवारण कमिटी: बिल के अंतर्गत अगर राज्य किसी जल विवाद के संबंध में अनुरोध करता है तो केंद्र सरकार उस विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने के लिए विवाद निवारण कमिटी (डीआरसी) की स्थापना कर सकती है। डीआरसी में एक अध्यक्ष और विशेषज्ञ होंगे। विशेषज्ञों को संबंधित क्षेत्रों में कम से कम 15 वर्ष का अनुभव प्राप्त होना चाहिए और उन्हें केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा। कमिटी में उन राज्यों के एक-एक सदस्य होगा (संयुक्त सचिव स्तर का) जो विवाद का पक्ष हैं। इन सदस्यों को भी केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा।
  • डीआरसी एक साल के अंदर बातचीत के जरिए विवादों को हल करने का प्रयास करेगी (इस अवधि को छह महीने तक और बढ़ाया जा सकता है) और केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अगर डीआरसी द्वारा विवाद का निपटारा नहीं होता तो केंद्र सरकार इस मामले को अंतरराज्यीय नदी विवाद ट्रिब्यूनल को भेज सकती है। ऐसा डीआरसी की रिपोर्ट के प्राप्त होने के तीन महीने के अंदर होना चाहिए।
  • ट्रिब्यूनल: केंद्र सरकार जल विवादों पर फैसला देने के लिए अंतरराज्यीय नदी विवाद ट्रिब्यूनल की स्थापना करेगी। इस ट्रिब्यूनल की अनेक खंडपीठ हो सकती हैं। सभी मौजूदा ट्रिब्यूनलों को भंग कर दिया जाएगा और उन ट्रिब्यूनलों में निर्णय लेने के लिए जो मामले लंबित पड़े होंगे, उन्हें नए ट्रिब्यूनल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
  • ट्रिब्यूनल की संरचना: ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन न्यायिक सदस्य तथा तीन विशेषज्ञ होंगे। उन्हें सिलेक्शन कमिटी की सलाह से केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा। ट्रिब्यूनल की खंडपीठ में एक अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, एक न्यायिक सदस्य और एक विशेषज्ञ होंगे। केंद्र सरकार सेंट्रल वॉटर इंजीनियरिंग सर्विस में काम करने वाले दो विशेषज्ञों को एसेसर्स के तौर पर नियुक्त कर सकती है जो खंडपीठ की कार्यवाही के संबंध में उसे सलाह दे सकते हैं। यह एसेसर उस राज्य से नहीं होना चाहिए जोकि विवाद का पक्ष है।

लोकसभा में बांध सुरक्षा बिल, 2019 पेश

बांध सुरक्षा बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया गया।[68]  बिल देश भर में निर्दिष्ट बांधों की चौकसी, निरीक्षण, परिचालन और रखरखाव संबंधी प्रावधान करता है। बिल इन बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रणाली का भी प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं।

  • बिल किन बांधों पर लागू होता है: बिल देश के सभी निर्दिष्ट बांधों पर लागू होता है। इन बांधों में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले, या (ii) 10 से 15 मीटर के बीच की ऊंचाई वाले केवल वही बांध जिनके डिजाइन और स्ट्रक्चर बिल में निर्दिष्ट विशेषताओं वाले हों।
  • राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी: बिल राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी की स्थापना का प्रावधान करता है। कमिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बांध सुरक्षा मानदंडों से संबंधित नीतियां एवं रेगुलेशंस बनाना तथा बांधों में टूट को रोकना, और (ii) बड़े बांधों में टूट के कारणों का विश्लेषण करना एवं बांध सुरक्षा प्रणालियों में बदलाव का सुझाव देना।
  • राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी: बिल राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी का प्रावधान करता है। अथॉरिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी द्वारा निर्मित नीतियों को लागू करना, (ii) राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) के बीच, और एसडीएसओ एवं उस राज्य के किसी बांध मालिक के बीच विवादों को सुलझाना।
  • राज्य बांध सुरक्षा संगठन: बिल के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) की स्थापना की जाएगी। राज्य में स्थित सभी विनिर्दिष्ट बांध उस राज्य के एसडीएसओ के क्षेत्राधिकार में आएंगे। हालांकि कुछ मामलों में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी एसडीएसओ के रूप में कार्य करेगी। इन मामलों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अगर बांध पर किसी एक राज्य का स्वामित्व है लेकिन वह दूसरे राज्य में स्थित है, (ii) अनेक राज्यों में फैला हुआ है, या (iii) उस पर केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम का स्वामित्व है। एसडीएसओज़ के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बांधों की निरंतर चौकसी एवं निरीक्षण करना और उनके परिचालन एवं रखरखाव पर निगरानी रखना, (ii) सभी बांधों का डेटाबेस रखना, और (iii) बांध मालिकों को सुरक्षा संबंधी सुझाव देना।
  • राज्य बांध सुरक्षा कमिटी: बिल राज्य सरकारों द्वारा राज्य बांध सुरक्षा कमिटी के गठन का प्रावधान करता है। कमिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एसडीएसओ के कार्यों की समीक्षा करना, (ii) बांध की सुरक्षा जांच के आदेश देना, (iii) बांध सुरक्षा के उपायों पर सुझाव देना एवं उन उपायों के कार्यान्वयन की समीक्षा करना, और (iv) अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, दोनों तरह के बांधों के संभावित प्रभावों का आकलन करना।
  • बांध मालिकों की बाध्यताएं: बिल में बांध मालिकों से यह अपेक्षा की गई है कि वे प्रत्येक बांध के लिए एक सुरक्षा इकाई बनाएंगे। यह इकाई निम्नलिखित स्थितियों में बांधों का निरीक्षण करेगी: (i) बारिश के मौसम से पहले और बाद में, और (ii) हर भूकंप, बाढ़ या दूसरी प्राकृतिक आपदा या संकट की आशंका के दौरान और उसके बाद।

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संस्कृति

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

लोकसभा में जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) बिल, 2019 पेश

जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया गया।[69]  बिल जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक एक्ट, 1951 में संशोधन करता है। 1951 का एक्ट अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गए और घायल लोगों की स्मृति में राष्ट्रीय स्मारक के निर्माण का प्रावधान करता है। इसके अतिरिक्त एक्ट राष्ट्रीय स्मारक के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाता है।

  • ट्रस्टीज़ का संयोजन: 1951 के एक्ट के अंतर्गत स्मारक के ट्रस्टीज़ में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री, (ii) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष, (iii) संस्कृति मंत्री, (iv) लोकसभा में विपक्ष के नेता, (v) पंजाब के गवर्नर, (vi) पंजाब के मुख्यमंत्री, और (vii) केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन प्रख्यात व्यक्ति। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और ट्रस्टी के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष को हटाता है। इसके अतिरिक्त बिल स्पष्ट करता है कि जब लोकसभा में विपक्ष का कोई नेता नहीं होगा, तो लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को ट्रस्टी बनाया जाएगा।
  • एक्ट में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन प्रख्यात व्यक्तियों का कार्यकाल पांच वर्ष होगा और उन्हें दोबारा नामित किया जा सकता है। बिल प्रावधान करता है कि केंद्र सरकार कोई कारण बताए बिना कार्यकाल खत्म होने से पहले नामित ट्रस्टी को हटा सकती है।

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कृषि

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

कृषि का कायापलट और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्रियों की कमिटी बनाई गई

प्रधानमंत्री ने कृषि के कायाकल्प तथा किसानों की आय बढ़ाने के उपाय करने के लिए मुख्यमंत्रियों की हाई पावर्ड कमिटी का गठन किया है।[70] इस कमिटी में निम्नलिखित राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे: (i) महाराष्ट्र (कमिटी के कन्वीनर), (ii) अरुणाचल प्रदेश, (iii) गुजरात, (iv) हरियाणा, (v) कर्नाटक, (vi) मध्य प्रदेश, और (vii) उत्तर प्रदेश। इसमें कृषि एवं किसान कल्याण केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद शामिल हैं।

कमिटी के संदर्भ की शर्तें निम्नलिखित हैं:

  • कृषि के कायाकल्प तथा किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना,
  • कृषि मार्केटिंग और कॉन्ट्रैक्ट खेती से संबंधित केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए मॉडल कानूनों को अपनाने और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए राज्यों को तौर-तरीके सुझाना,
  • आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और व्यापार के नियंत्रण के लिए अनिवार्य वस्तु एक्ट, 1955 के प्रावधानों की जांच करना,
  • कृषि मार्केटिंग और बुनियादी ढांचे में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक्ट में बदलाव का सुझाव देना,
  • राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) और ग्रामीण कृषि बाजार जैसे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के साथ बाजार सुधारों को जोड़ने वाली व्यवस्था का सुझाव देना,
  • निम्नलिखित के लिए नीतिगत उपाय सुझाना: (i) कृषि निर्यात को बढ़ावा देना, (ii) खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की बढ़ती हुई वृद्धि, और (iii) आधुनिक बाजार के बुनियादी ढांचे, मूल्य श्रृंखलाओं और लॉजिस्टिक्स में निवेश को आकर्षित करना, और
  • कृषि-प्रौद्योगिकी को वैश्विक मानकों पर अपग्रेड करने के उपाय सुझाना, और किसानों को कृषि क्षेत्र में उन्नत देशों से अच्छे बीज, पौधे और मशीनरी उपलब्ध कराना।

कमिटी अपनी अधिसूचना (31 अगस्त, 2019) के दो महीनों के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी।

कैबिनेट ने 2019-20 में खरीफ फसलों के लिए एमएसपी और गन्ने के लिए एफआरपी मंजूर की

केंद्रीय कैबिनेट ने 2019-20 में खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दी।[71] धान (सामान्य) का एमएसपी 1,815 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल के एमएसपी (1,750 रुपए प्रति क्विंटल) से 3.7% अधिक है। तालिका 2 में मार्केटिंग सीजन 2019-20 के लिए अधिसूचित एमएसपी और 2018-19 की तुलना में उसमें परिवर्तन को प्रदर्शित किया गया है।

तालिका 2: 2019-20 में खरीफ फसलों के लिए मंजूर एमएसपी (रुपए प्रति क्विंटल)

फसल

2018-19

2019-20

परिवर्तन (%)

धान (सामान्य)

1,750

1,815

3.7%

धान (ग्रेड ए)

1,770

1,835

3.7%

ज्वार (हाइब्रिड)

2,430

2,550

4.9%

ज्वार (मालदांडी)

2,450

2,570

4.9%

बाजरा

1,950

2,000

2.6%

रागी

2,897

3,150

8.7%

मक्का

1,700

1,760

3.5%

अरहर (तूर)

5,675

5,800

2.2%

मूंग

6,975

7,050

1.1%

उड़द

5,600

5,700

1.8%

मूंगफली

4,890

5,090

4.1%

सूरजमुखी के बीज

5,388

5,650

4.9%

सोयाबीन (पीली)

3,399

3,710

9.1%

तिल

6,249

6,485

3.8%

रामतिल

5,877

5,940

1.1%

कपास (मध्यम रेशा)

5,150

5,255

2.0%

कपास (लंबा रेशा)

5,450

5,550

1.8%

SourcesCommission for Agricultural Costs and Prices, Ministry of Agriculture and FarmersWelfare; PRS.

केंद्रीय कैबिनेट ने 2019-20 के गन्ना मौसम (अक्टूबर 2019 से सितंबर 2020) के लिए गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) को भी मंजूरी दी।[72] 2019-20 के लिए एफआरपी पिछले वर्ष से अपरिवर्तित रहता है, अर्थात मूल रिकवरी दर 10% की दर से 275 रुपए प्रति क्विंटल। मूल वसूली दर गन्ने से चीनी की प्राप्ति पर निर्भर करती है और गन्ने में सुक्रोज सामग्री, उत्पादन प्रथाओं और चीनी मिलों की तकनीक और संचालन पर आधारित होती है। 10% से अधिक की वसूली में प्रत्येक 0.1% वृद्धि के लिए 2.75 रुपए प्रति क्विंटल का प्रीमियम स्वीकृत किया गया है।

कैबिनेट ने चीनी का 40 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक बनाने की योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चीनी मिलों के लिए 40 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक बनाने की एक योजना को मंजूरी दी।[73] योजना में यह अपेक्षा की गई है कि चीनी मिलें अगस्त 2019 से शुरू होने वाली एक वर्ष की अवधि के लिए इस बफर स्टॉक को बनाएं। इस योजना में निम्नलिखित प्रयास किए गए हैं: (i) चीनी मिलों की लिक्विडिटी में सुधार और गन्ना किसानों के बकाया चुकाने की कोशिश, (ii) चीनी इन्वेंटरीज़ को कम करना, और (iii) घरेलू बाजार में चीनी की कीमत को स्थिर करना।

इस योजना के अंतर्गत चीनी मिलों को बफर स्टॉक के रखरखाव के लिए उनके कैरिइंग कॉस्ट के बराबर वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। कैरिइंग कॉस्ट वह लागत होती है जो चीनी मिलें चीन को स्टोर करने तथा उसके रखरखाव में खर्च करती हैं। इस योजना की लागत 1,674 करोड़ रुपए अनुमानित है।

चीनी मिलों को देय वित्तीय सहायता त्रैमासिक आधार पर किसानों को सीधे हस्तांतरित की जाएगी, और किसानों को मिलों द्वारा देय राशि के साथ समायोजित किया जाएगा। बाद में शेष राशि, यदि कोई हो, मिलों को दी जाएगी।

बाजार मूल्य और चीनी की उपलब्धता के आधार पर खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग वर्ष के दौरान किसी भी समय योजना को संशोधित या वापस ले सकता है।

उल्लेखनीय है कि चीनी मिलों द्वारा बफर स्टॉक के निर्माण और रखरखाव के लिए ऐसी ही एक योजना को जून 2018 में अधिसूचित किया गया था। इसके अंतर्गत चीनी मिलों को जुलाई 2018 से प्रारंभ होने वाली अवधि से एक वर्ष के लिए 30 लाख मीट्रिक टन चीनी का स्टॉक तैयार करना था।

कैबिनेट ने सल्फर आधारित उर्वरकों के लिए सबसिडी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2019-20 के लिए सल्फर आधारित उर्वरकों के लिए सब्सिडी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी।[74],[75] यह सब्सिडी पोषण आधारित सब्सिडी योजना के अंतर्गत प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत उर्वरक निर्माताओं और आयातकों को फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों की बिक्री के लिए प्रदान किया जाता है जो उनमें मौजूद पोषक तत्वों पर आधारित होते हैं।

सल्फर आधारित उर्वरकों की सब्सिडी दर 2018-19 के लिए 2.72 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2019-20 के लिए 3.56 रुपए प्रति किलोग्राम कर दी गई है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2019-20 के लिए अन्य पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश) के लिए सब्सिडी दरों को भी मंजूरी दी। इन पोषक तत्वों की सब्सिडी दर पिछले वर्ष से अपरिवर्तित बनी हुई है, और निम्नानुसार हैं: (i) नाइट्रोजन के लिए 18.90 रुपए प्रति किलोग्राम, (ii) फॉस्फोरस के लिए 15.22 रुपए प्रति किलोग्राम, और (iii) पोटाश के लिए 11.12 रुपए प्रति किलोग्राम। वर्ष 2019-20 के लिए मंजूर दरें अधिसूचना की तारीख से प्रभावी होंगी।

पीएंडके उर्वरकों पर सब्सिडी प्रदान करने की लागत 2019-20 में 22,876 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

 

वाणिज्य और उद्योग

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

राज्यसभा में राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (संशोधन) बिल, 2019 पेश

राज्यसभा में राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (संशोधन) बिल, 2019 पेश किया गया।[76]  यह बिल राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान एक्ट, 2014 में संशोधन करता है जोकि अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करता है।

  • बिल आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम और हरियाणा में चार अन्य राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करने का प्रयास करता है।
  • वर्तमान में ये चारों संस्थान सोसायटी पंजीकरण एक्ट, 1860 के अंतर्गत सोसायटी के रूप में पंजीकृत हैं और इन्हें डिग्री या डिप्लोमा देने का अधिकार नहीं है। राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित होने के बाद चारों संस्थानों को डिग्री और डिप्लोमा देने की शक्ति मिल जाएगी।

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें

 

पर्यावरण

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

पब्लिक फीडबैक के लिए नेशनल रिसोर्स एफिशिएंसी पॉलिसी जारी की गई

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए मसौदा नेशनल रिसोर्स एफिशिएंसी पॉलिसी जारी की।[77] इस नीति में कहा गया है कि भारत में मैटीरियल उपभोग 1970 में 1.2 बिलियन टन से छह गुना बढ़कर 2015 में 7 बिलियन हो गया। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जनसंख्या और आर्थिक विकास के मद्देनजर 2030 में इसके दोगुने होने की उम्मीद है। इससे संसाधनों के गंभीर रूप से समाप्त होने और पर्यावरणीय दुर्दशा की भी आशंका है। यह नीति प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग और अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में अपशिष्ट के पुनर्चक्रण (अपसाइकिलिंग) को बढ़ावा देने के प्रयास करेगी। इस नीति की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विस्तार क्षेत्र: नीति का उद्देश्य सभी संसाधनों (जैसे वायु, जल) और सामग्रियों का हर चरण जैसे कच्चा माल, निकासी, प्रसंस्करण और उत्पादन पर कारगर उपयोग करना है।
  • मार्गदर्शन सिद्धांत: यह नीति निम्नलिखित सिद्धांतों से निर्देशित है: (i) संसाधनों की खपत में सतत कमी, (ii) रिसोर्स एफिशिएंट दृष्टिकोण से उच्च मूल्य का सृजन, (iii) अपशिष्ट को कम से कम करना, (iv) मैटीरियल सप्लाई की सुरक्षा सुनिश्चित करना, और (v) पर्यावरण के लिए लाभप्रद रोजगार अवसरों और कारोबारी मॉडल का सृजन।
  • अथॉरिटीज़: नीति में नेशनल रिसोर्स एफिशिएंसी अथॉरिटी (एनआरईए) की स्थापना का प्रावधान है जोकि नीति के कार्यान्वयन की निगरानी, प्रबंधन और समीक्षा करेगी। संबंधित राज्य सरकारें और मंत्रालय रिसोर्स एफिशिएंट रणनीतियों के विकास और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होंगी। कार्यान्वयन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी नेशनल रिसोर्स एफिशिएंसी बोर्ड की स्थापना की जाएगी।
  • लक्ष्य और कार्य योजनाएं: नीति का उद्देश्य 2030 तक संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करना है। एसडीजी में 2030 तक एनर्जी एफिशिएंसी में सुधार की विश्वव्यापी दर को दोगुना करने और सतत खाद्य उत्पादन प्रणालियों को सुनिश्चित करने सहित 12 लक्ष्य शामिल हैं।
  • नीति में कहा गया है कि एनआरईए संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और हितधारकों के परामर्श से तीन वर्षीय कार्य योजना तैयार करेगा। रिसोर्स एफीशिएंसी की रणनीतियां विकसित की जाएंगी जो क्षेत्र विशेष के विस्तार क्षेत्र, लक्ष्य, समय और कार्य योजनाएं तैयार करेंगी। एनआरईए इन रणनीतियों के कार्यान्वयन के लिए तीन वर्षीय कार्य योजनाओं में अपनाएगा। पहली कार्य योजना 2019-22 के लिए तैयार की गई है।

 

ऊर्जा

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

नवीकरणीय ऊर्जा प्रॉजेक्स के लिए प्रारंभिक रेगुलेटरी अनुमोदन को मंजूरी मिली

बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री ने राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा मिशन प्रॉजेक्ट्स के लिए चिन्हित ट्रांसमिशन योजनाओं के लिए शुरुआती रेगुलेटरी अनुमोदन प्रस्ताव को मंजूरी दी।[78]  पर्यावरण पर पेरिस समझौते में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के अंतर्गत उल्लिखित प्रतिबद्धता के अनुसार, केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक देश में 175 गिगावॉट अक्षय ऊर्जा (आरई) क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। मई 2019, 80 गिगावॉट की आरई क्षमता कमीशन की गई है।

शेष लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने लगभग 66.5 गिगावॉट आरई उत्पाद के लिए ट्रांसमिशन योजनाओं को चिहित किया है। इन योजनाओं को 'राष्ट्रीय महत्व के प्रॉजेक्ट्स' का दर्जा दिया गया है। इससे इन ट्रांसमिशन प्रॉजेक्ट्स का शुरुआती रेगुलेटरी अनुमोदन संभव होगा। यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि ट्रांसमिशन का काम उस समय तक पूरा हो जाए जब आरई परियोजना बिजली उत्पादन शुरू कर दे।

विंड पावर प्रॉजेक्ट्स के नीलामी संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने विंड पावर प्रॉजेक्ट्स के नीलामी संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन किया।[79],[80]  संशोधित दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विंड पावर प्रॉजेक्ट्स के लिए भूमि अधिग्रहण की समय अवधि को सात महीने से अधिसूचित कमीशनिंग तिथि तक बढ़ा दिया गया है। विंड पावर प्रॉजेक्ट्स का कमीशनिंग शेड्यूल पावर पर्चेज एग्रीमेंट्स (पीपीए) या पावर सप्लाई एग्रीमेंट, जो भी बाद में हो, के कार्यान्वयन की तारीख से 18 महीना का है।
  • विंड पावर प्रॉजेक्ट्स के कैपेसिटी यूटिलाइजेशन फैक्टर (सीयूएफ) में संशोधन के विंडो को एक से तीन वर्ष कर दिया गया है।

न्यूनतम सीयूएफ के अनुरूप ऊर्जा में किसी भी कमी के लिए ऊर्जा उत्पादक खरीदार को जुर्माना देगा। पहले यह पीपीए के अंतर्गत 75% टैरिफ तक सीमित था। अब यह पीपीए के अंतर्गत निर्धारित टैरिफ के 50% पर तय किया गया है।

 

रक्षा

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

मंत्रालय ने रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए योजना की शुरुआत की

रक्षा मंत्रालय ने रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए एक योजना की शुरुआत की।[81]  इस योजना का उद्देश्य देश भर के टियर II और टियर III शहरों के एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र की जरूरतों और और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के प्रयासों के संबंध में शिक्षित करना है। इसके लिए अनेक कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जैसे कनक्लेव और वर्कशॉप्स। इन कार्यक्रमों में रक्षा उत्पादन विभाग तथा उद्योग एवं एमएसएमई के प्रतिनिधि भी मौजूद होंगे। इन कार्यक्रमों के निम्नलिखित उद्देश्य हैं: (i) एमएसएमई को सरकार के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के बारे में प्रासंगिक जानकारी देना, (ii) घरेलू जरूरतों और मैत्रीपूर्ण देशों को निर्यात करने के लिए देश में रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहन देना, और (iii) गैर रक्षा क्षेत्र में सक्रिय एमएसएमई को जानकारी उपलब्ध कराना, ताकि वे रक्षा क्षेत्र में प्रवेश कर सकें।

इस योजना को केंद्र सरकार निम्नलिखित प्रकार से वित्त पोषण करेगी: (i) राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के लिए 2 लाख रुपए प्रति कार्यक्रम की अधिकतम स्पॉन्सरशिप, और (ii) राज्य स्तर के कार्यक्रमों के लिए 1 लाख रुपए प्रति कार्यक्रम की अधिकतम स्पॉन्सरशिप। योजना के अंतर्गत प्रस्तावों की समीक्षा के लिए तीन सदस्यों वाली एक एम्पावर्ड कमिटी बनाई जाएगी।

 

ग्रामीण विकास

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना –III की शुरुआत को मंजूरी दी

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय कमिटी ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण को मंजूरी दी।[82]  योजना का उद्देश्य 2019-20 से 2024-25 के दौरान 1.25 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों को अपग्रेड करना है। योजना की अनुमानित लागत 80,250 करोड़ रुपए है। इन सड़कों का चयन विभिन्न मापदंडों पर आधारित होगा, जैसे कि आबादी, बाजार तक पहुंच और शैक्षिक और चिकित्सा सुविधाएं।

2000 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई थी। इसका लक्ष्य विनिर्दिष्ट जनसंख्या समूह (मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक और उत्तर-पूर्व, पहाड़ी, आदिवासी या रेगिस्तानी क्षेत्रों में 250 से अधिक-2001 की जनगणना) की उन बसाहटों को बारामासी सड़कों से जोड़ना था जो बाकी के क्षेत्रों से जुड़ी हुई नहीं थीं।

 

[1] Union Budget 2019-20, https://www.indiabudget.gov.in.

[2] The Finance (No. 2) Bill, 2019, Ministry of Finance, July 5, 2019, https://www.indiabudget.gov.in/finance_bill.php.

[3]Consumer Price Index Numbers on Base 2012=100 for Rural, Urban and Combined for the month of June 2019, Press Information Bureau, Ministry of Statistics and Programme Implementation, July 12, 2019.

[4]Index Numbers of Wholesale Price in India (Base: 2011- 12=100) Review for the month of June 2019, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, July 15, 2019.

[5] The Aadhaar and Other Laws (Amendment) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Aadhaar%20and%20Other%20Laws%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[6]  The Aadhaar and Other Laws (Amendment) Ordinance, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Aadhaar%20and%20other%20Laws%20%28A%29%20Ordinance%2C%202019.pdf.

[7] The Right to Information (Amendment) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Bill%20Summary%20-%20RTI%20Amendment%20Bill%202019.pdf.

[8] The New Delhi international Arbitration Centre Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/New%20Delhi%20International%20Arbitration%20Centre%20Bill%2C%202019.pdf.

[9] The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Muslim%20women%20%28Protection%20of%20Rights%20on%20Marriage%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[10] The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Ordinance, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Muslim%20Women%20%28Protection%20of%20Rights%20on%20Marriage%29%20Second%20Ordinance%2C%202019.pdf.

[11] The Arbitration and Conciliation (Amendment) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20ARBITRATION%20AND%20CONCILIATION%20%28AMENDMENT%29%20BILL%2C%202019.pdf.

[12] DNA Technology (Use and Application) Regulation Bill, 2019, Ministry of Science and Technology, July 8, 2019, https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Bill%20Summary%20-%20DNA%20Technology%20Bill%2C%202019.pdf.

[13] The Transgender Persons (Protection of Rights) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/The%20Transgender%20Persons%20%28Protection%20of%20Rights%29%20Bill%2C%202019%20Bill%20Text.pdf.

[14] The Consumer Protection Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20CONSUMER%20PROTECTION%20BILL%2C%202019%20Bill%20Text.pdf.

[15] The Repealing and Amending Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/The%20Repealing%20and%20Amending%20Bill%2C%202019.pdf.

[16]Cabinet approves signing of the UN Convention on International Settlement Agreements resulting from mediation by India, Press Information Bureau, Ministry of Law and Justice, July 31, 2019.

[17]General Assembly Adopts the United Nations Convention on international Settlement Agreements Resulting from Mediation, United Nations Commission on International Trade Law,  https://uncitral.un.org/en/news/general-assembly-adopts-united-nations-convention-international-settlement-agreements-resulting.

[18]Cabinet approves increasing strength of Supreme Court judges from 31 to 34, The Hindu, July 31, 2019, https://www.thehindu.com/news/national/cabinet-approves-increasing-strength-of-supreme-court-judges-from-31-to-34/article28773734.ece.

[19] The Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20UNLAWFUL%20ACTIVITIES%20%28PREVENTION%29%20AMENDMENT%20Bill%20TExt.pdf.

[20] The Jammu and Kashmir Reservation (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Home Affairs, June 24, 2019,   https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Jammu%20and%20Kashmir%20Reservation%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf

[21] Protection of Human Rights (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Home Affairs, July 8, 2019, https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20PROTECTION%20OF%20HUMAN%20RIGHTS%20%28AMENDMENT%29%20Bill%20text.pdf

[22] National Investigation Agency (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Home Affairs, July 8, 2019, https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/The%20National%20Investigation%20Agency%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019%20Bill%20text.pdf

[23] No.11012/06/2019-NE.VI., Ministry of Home Affairs, July 15, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/207004.pdf

[24]Government notifies High Level committee for implementation of Clause 6 of Assam Accord, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, January 6, 2019

[25]Cabinet approves high level committee to implement Clause 6 of Assam Accord, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, January 2, 2019.

[26]Union Cabinet approves EWS quota for J&K, The Economic Times, August 1, 2019, https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/union-cabinet-approves-ews-quota-for-jk/articleshow/70474657.cms; 10% increase in number of SC judges; J-K reservation bill approved: Key Cabinet decisions today, Indian Express, August 1, 2019, https://indianexpress.com/article/india/increase-number-sc-judges-jk-reservation-bill-approved-cabinet-decisions-javadekar-5866892/.

[27] The Indian Medical Council (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, Lok Sabha, June 27, 2019, June 28, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/110_2019_English.PDF.

[28]The National Medical Commission Bill, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/NMC%202019%281%29.pdf.

[29] The Surrogacy (Regulation) Bill, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Surrogacy%20%28Regulation%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[30] The Homoeopathy Central Council (Amendment) Bill, 2019, Ministry of AYUSH, Lok Sabha, June 27, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/83C_%202019_LS_Eng.pdf.

[31] The Dentists (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, Lok Sabha, June 27, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/111_2019_Eng.PDFhttp:/164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/83C_%202019_LS_Eng.pdf.

[32] Draft notification on Clinical Establishment (Central Government) Third Amendment Rules 2019 prescribing ' Minimum standards for different categories of clinical establishments of Allopathy and Ayush, Ministry of Health and Family Welfare, July 17, 2019, https://mohfw.gov.in/newshighlights/draft-notification-clinical-establishment-central-government-third-amendment-rules.

[33] The Banning of Unregulated Deposit Schemes Bill 2019, Ministry of Finance, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/The%20Banning%20of%20Unregulated%20Deposit%20Schemes%20Bill%2C%202019%20Text_0.pdf.

[34]S.O. 2691(E), Gazette of India, Ministry of Finance, July 29, 2019, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2019/208809.pdf.

[35] Cabinet approves extension of the term of the Fifteenth Finance Commission up to 30th November, 2019, Press Information Bureau, Cabinet, July 17, 2019.

[36] Press Release on Report of Committee on Virtual Currencies, Department of Economic Affairs, July 22, 2019, https://dea.gov.in/sites/default/files/Approved%20Press%20Release%20on%20the%20Report%20and%20Bill%20of%20the%20IMC%20on%20VCs%2022%20July%202019.pdf.

[37] Report of the Committee to propose specific actions in relation to Virtual Currencies, Department of Economic Affairs, July 22, 2019, https://dea.gov.in/sites/default/files/Approved%20and%20Signed%20Report%20and%20Bill%20of%20IMC%20on%20VCs%2028%20Feb%202019.pdf.

[38] Report No. 11, Comptroller and Auditor General of India, Compliance Audit of GST for the year 2017-18, July 30, 2019, https://cag.gov.in/sites/default/files/audit_report_files/Report_No_11_of_2019_Compliance_Audit_of_Union_Government_Department_of_Revenue_Indirect_Taxes_Goods_and_Services_Tax.pdf.

[39]External Commercial Borrowings (ECB) Policy Rationalisation of End-use Provisions, Notifications, Reserve Bank of India, July 30, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11636.

[40] Master Direction - External Commercial Borrowings, Trade Credits and Structured Obligations, Master Directions, Reserve Bank of India, March 26, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_ViewMasDirections.aspx?id=11510.

[41]Reserve Bank of India Constitutes Working Group to Review Regulatory and Supervisory Framework for Core Investment Companies, Press Release, Reserve Bank of India, July 3, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=47495.

[42] Master Direction - Core Investment Companies (Reserve Bank) Directions, 2016, Reserve Bank of India, November 9, 2017, https://rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=10564.

[43]Cabinet nod for revised Chit Funds Bill, The Hindu, August 1, 2019, https://www.thehindu.com/news/national/cabinet-nod-for-revised-chit-funds-bill/article28776485.ece.

[44] Extension of time of the Task Force for drafting a New Direct Tax Legislation, Press Information Bureau, Ministry of Finance, July 31, 2019.

[45] F. No. 370149/230/2017, Central Board of Direct Taxes, Department of Revenue, Ministry of Finance, June 24, 2019, https://www.incometaxindia.gov.in/Lists/Latest%20News/Attachments/324/task-force-office-order-dated-24-06-2019.pdf.

[46] The Code on Wages 2019, Ministry of Labour and Employment, July 23, 2019, https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Code%20on%20Wages%2C%202019.pdf

[47] The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Occupational%20Safety%2C%20Health%20and%20Working%20Conditions%20Code%2C%202019.pdf.

[48] S.O. 2615(E), Gazette of India,  Ministry of Labour and Employment, July 22, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/207531.pdf.

[49] The Companies (Amendment) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Bill%20summary%20on%20companies%20bill.pdf.

[50] The Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Insolvency%20and%20Bankruptcy%20Code%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019_0.pdf.

[51] The Motor Vehicles (Amendment) Bill, 2019, As introduced in Lok Sabha, July 15, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Motor%20Vehicles%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[52]Subject: Promotion of digital payment through RFID based FASTag-regarding, F.No.H-25016/01/2018-Toll, Ministry of Road Transport and Highways, July 19, 2019, http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=4621.

[53] G.S.R. 521(E)., Notification, Ministry of Road Transport and Highways, July 24, 2019, http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=4624.

[54]Draft Notification Issued Allowing Motor Vehicles and their Parts to be Affixed with Microdots, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, July 29, 2019

[55] G.S.R. 523(E)., Notification, Ministry of Road Transport and Highways, July 24, 2019, http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=4625.

[56] The Protection of Children from Sexual Offences (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Women and Child Development, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Protection%20of%20Children%20from%20Sexual%20Offences%20%28A%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[57] The Central Educational Institutions (Reservation in TeachersCadre) Bill, 2019, Ministry of Human Resource Development, Lok Sabha, July 3, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedBothHouses/Cent%20edu%20teacher-%2010%20of%2019.pdf.

[58] The Central Universities (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Human Resource Development, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20CENTRAL%20UNIVERSITIES%20%28AMENDMENT%29%20BILL%2C%202019%20Bill%20Text.pdf.

[59] The Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Amendment Bill, 2019, As introduced in Lok Sabha, July 8, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20PUBLIC%20PREMISES%20%28EVICTION%20OF%20UNAUTHORISED%20Bill%20Text.pdf.

[60] The Model Tenancy Act, 2019, Ministry of Housing and Urban Affairs, July 10, 2019, http://mohua.gov.in/upload/whatsnew/5d25fb70671ebdraft%20Model%20Tenancy%20Act,%202019.pdf.

[61] Model Tenancy Act to be Circulated Soon to States, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, July 23, 2019

[62] Guidelines for Urban Water Conservation, Jal Shakti Abhiyaan, Ministry of Housing and Urban Affairs, July 3, 2019, http://mohua.gov.in/upload/whatsnew/5d1c7709d059eGuidelines_UWC_JSA03072019.pdf.

[63] The Airports Economic Regulatory Authority of India (Amendment) Bill, 2019, As introduced in Rajya Sabha, July 12, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/The%20Airports%20Economic%20Regulatory%20Authority%20of%20India%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[64]Global Invitation for Expression of Interest for Proposed Strategic Disinvestment of 51% stake in Pawan Hans Limited by Government of India, Ministry of Civil Aviation, July 11, 2019, http://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Advertisement_0.pdf.

[65]Global Invitation for Expression of Interest for Proposed Strategic Disinvestment of 51% stake in Pawan Hans Limited by Government of India, Ministry of Civil Aviation, July 11, 2019, http://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Advertisement_0.pdf.

[66] Preliminary Information Memorandum for Inviting Expression of Interest for Strategic Disinvestment of Pawan Hans Limited (PHL) by Government of India, Ministry of Civil Aviation, July 11, 2019, http://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Pawan_Hans_Ltd_Preliminary_Information_Memorandum.pdf.

[67] The Inter-State River Water Disputes (Amendment) Bill, 2019, As introduced in Lok Sabha, July 25, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Inter-State%20River%20Water%20Disputes%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[68] The Dam Safety Bill, 2019, As introduced in Lok Sabha, July 29, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Dam%20Safety%20Bill%2C%202019.pdf.

[69]The Jallianwala Bagh National Memorial (Amendment) Bill, 2018, Ministry of Culture, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20JALLIANWALA%20BAGH%20NATIONAL%20MEMORIAL%20Bill%20Text.pdf.

[70] High Powered Committee of Chief Ministers constituted for Transformation for Indian Agriculture’”, Press Information Bureau, NITI Aayog, July 1, 2019.

[71] A Government that cares for its Farmers, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, July 3, 2019.

[72] Cabinet approves Determination of Fair and Remunerative Priceof sugarcane payable by sugar mills for 2019-20 sugar season, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, July 24, 2019.

[73] Cabinet approves creation of buffer stock of 40 LMT of sugar for a period of one year from 1st August 2019 to 31st July 2020, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, July 24, 2019.

[74] Cabinet approves Nutrient Based Subsidy (NBS) rates for Phosphatic and Potassic (P&K) fertilizers for the year 2019-20, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, July 31, 2019.

[75] Cabinet approves fixation of Nutrient Based Subsidy rates for Phosphatic and Potassic (P&K) fertilizers for the year 2018-19, Press Information Bureau, Ministry of Chemicals and Fertilisers, March 28, 2018.

[76] The National Institute of Design (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Commerce and Industry, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/NID%20Bill%2C%202019.pdf.

[77] Draft National Resource Efficiency Policy, 2019, Ministry of Environment, Forest & Climate Change, July 23, 2019,  http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2019/07/Draft-National-Resourc.pdf.

[78] Power Minister approves proposal for early regulatory approval of transmission schemes identified for 66.5 GW Renewable Energy projectsPress Information Bureau, Ministry of Power, July 18, 2019

[79]MNRE amends bidding guidelines for wind power projects, Press Information Bureau, Ministry of New and Renewable Energy, July 25, 2019

[80]Amendment to the Guidelines for Tariff Based Competitive Bidding Process for Procurement of Power from Grid Connected Wind Power Projects, No. 23/54/2017-R&R., Ministry of New and Renewable Energy, July 16, 2017, https://mnre.gov.in/sites/default/files/schemes/WBG%20Amendments%20gazette.pdf.

[81]Scheme for Promotion of MSMEs in Defence, Ministry of Defence, July 12, 2019, https://ddpmod.gov.in/sites/default/files/MSME_scheme_Notified_on_12072019%20(1).pdf.  

[82] Boost to Rural Road Connectivity, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, July 10, 2019.

 

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