दिसंबर 2019

इस अंक की झलकियां

संसद का शीतकालीन सत्र 2019 समाप्त हुआ, संसद ने 14 बिल पारित किए

दोनों सदनों द्वारा नागरिकता (संशोधन) बिल, टैक्सेशन कानून (संशोधन) बिल, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध बिल और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) बिल पारित किए गए। 

शीतकालीन सत्र में 17 बिल पेश किए गए

इनमें श्रम सुधारों पर दो संहिताएंसामाजिक संरक्षण संहिता, 2019 और औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 शामिल हैं। व्यक्तियों के पर्सनल डेटा को रेगुलेट करने वाला पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 भी पेश किया गया।

संसद में नागरिकता (संशोधन) बिल, 2019 पेश और पारित

इस सत्र में संसद में नागरिकता (संशोधन) बिल, 2019 पेश और पारित कर दिया गया। बिल कुछ विशेष देशों के विशेष धर्म के अवैध प्रवासियों को नागरिकता देता है। 

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश जारी

अध्यादेश कहता है कि अगर रेज़ोल्यूशन प्लान के परिणामस्वरूप नियंत्रण का हस्तांतरण होता है, तो रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले के अपराधों पर कॉरपोरेट देनदार को इम्युनिटी दी जाएगी। 

सात बिल्स संसदीय कमिटियों को भेजे गए

पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 को ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को भेजा गया। सेरोगेसी (रेगुलेशन) बिल, 2019 को राज्यसभा की सिलेक्ट कमिटी को भेजा गया। पांच अन्य बिल्स स्टैंडिंग कमिटियों को भेजे गए। 

कैबिनेट ने जनगणना करने और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने को मंजूरी दी

जनगणना का कार्य और एनपीआर का अपडेशन 2020 और 2021 के बीच किया जाएगा। एनपीआर एक क्षेत्र में रहने वाले सामान्य निवासियों का रजिस्टर है (यानी जो छह महीने या उससे अधिक समय से किसी स्थानीय क्षेत्र में रह रहे हैं या रहने के इच्छुक हैं)। 

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय रेलवे के संगठनात्मक पुनर्गठन को मंजूरी दी

रेलवे की आठ ग्रुप ए सेवाओं को एक सिंगल सेवा- भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा में एकीकृत किया गया है। रेलवे बोर्ड को उसकी फंक्शनल लाइन्स के आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा।

कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए पार्शियल क्रेडिट गारंटी स्कीम को मंजूरी दी

योजना पीएसबीज़ को वित्तीय रूप से मजबूत एनबीएफसीज़ और हाउसिंग फाइनांस कंपनियों से उच्च स्तरीय रेटिंग वाले पूल्ड एसेट्स को खरीदने की अनुमति देती है। सरकार एक निश्चित अधिकतम राशि के नुकसान को कवर करेगी। 

कैबिनेट ने चीफ ऑफ डिफेंस के पद के सृजन को मंजूरी दी

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी का स्थायी चेयरमैन होगा। वह तीनों सैन्य सेवाओं को एडमिनिस्टर करेगा और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत नवगठित सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख होगा।

एनआईएफटीईएम बिल और खेलो इंडिया योजना पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

एनआईएफटीईएम बिल के सुझावों में खाद्य विज्ञान में तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए फीस की सीमा तय करना शामिल है। खेलो इंडिया रिपोर्ट में फंड के उपयोग और प्रतिभाओं की पहचान में सुधार करने और कोचिंग रिक्तियों को भरने का सुझाव दिया गया है। 

खनन के पर्यावरणीय प्रभावों और उज्ज्वला योजना पर कैग की रिपोर्ट्स

सीआईएल द्वारा खनन के पर्यावरणीय प्रभावों पर केंद्रित रिपोर्ट में कहा गया है कि कई खदानें पर्यावरणीय मानदंडों का अनुपालन नहीं कर रहीं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर केंद्रित रिपोर्ट कहती है कि लाभार्थियों के डेटा में विसंगतियां हैं। 

इनर लाइन परमिट के क्षेत्रों में परिवर्तन अधिसूचित

आईएलपी अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड के कुछ क्षेत्रों में यात्राओं को रेगुलेट करता है। अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड के अधिसूचित क्षेत्रों को शामिल करने के लिए इन क्षेत्रों को बढ़ाया गया है। 

 

संसद

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

संसद का शीतकालीन सत्र 2019 समाप्त हुआ

संसद का शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर, 2019 को समाप्त हुआ। [1]  सत्र के दौरान संसद ने 14 बिल्स पारित किए (विनियोग विधेयक को छोड़कर)। इनमें नागरिकता (संशोधन) बिल, 2019, टैक्सेशन कानून (संशोधन) बिल, 2019, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स पर प्रतिबंध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन) बिल, 2019 और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) बिल, 2019 शामिल हैं। संसद ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को 10 वर्ष तक बढ़ाने (जनवरी 2030 तक) के लिए संविधान में संशोधन करने वाला बिल भी पारित किया। 

सत्र के दौरान 17 बिल्स पेश किए गए (विनियोग विधेयक को छोड़कर)। इनमें पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 और इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (दूसरा संशोधन) बिल, 2019 शामिल हैं।

सात बिल्स को विस्तृत समीक्षा के लिए कमिटियों को भेजा गया। पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 को ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी और सेरोगेसी (रेगुलेशन) बिल, 2019 को राज्यसभा की सिलेक्ट कमिटी के पास भेजा गया। निम्नलिखित बिल्स को स्टैंडिंग कमिटियों के पास भेजा गया: (iऔद्योगिक संबंध संहिता, 2019, (iiसामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019, (iiiइनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (दूसरा संशोधन) बिल, 2019, (ivएंटी-मैरीटाइम पायरेसी बिल, 2019 (v) माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) बिल, 2019।

2019-20 के लिए पहली अनुपूरक अनुदान मांगों को संसद द्वारा पारित किया गया। हालांकि अनुपूरक बजट के जरिए सरकार ने लगभग 19,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त व्यय के लिए संसद में मंजूरी मांगी। [2]

शीतकालीन सत्र 2019 के दौरान लेजिसलेटिव बिजनेस पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें। सत्र के दौरान संसद के कामकाज पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें

गृह मामले

नागरिकता (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

नागरिकता (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [3]  नागरिकता एक्ट, 1955 उन विभिन्न तरीकों को स्पष्ट करता है जिनके आधार पर नागरिकता हासिल की जा सकती है। इसमें जन्मवंशपंजीकरणदेशीयकरण (नैचुरलाइजेशन) और भारत में किसी परिक्षेत्र के समावेश द्वारा नागरिकता मिलने की बात कही गई है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अवैध प्रवासियों की परिभाषा: एक्ट अवैध प्रवासियों द्वारा भारतीय नागरिकता हासिल करने को प्रतिबंधित करता है। अवैध प्रवासी वे विदेशी हैं जिनके पास वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज नहीं। बिल एक्ट में संशोधन करता है और कहता है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों, जोकि 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आए हैं, के साथ अवैध प्रवासियों की तरह व्यवहार नहीं किया जाएगा। 
  • देशीकरण द्वारा नागरिकताएक्ट कहता है कि अगर कोई व्यक्ति भारत में रहता है या नागरिकता के लिए आवेदन करने से पहले उसने केंद्र सरकार के साथ कम से कम 11 वर्ष नौकरी की है तो वह देशीयकरण के जरिए नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बिल निवास की शर्त को 11 वर्ष से पांच वर्ष करता है।
  • अवैध प्रवासियों के लिए नागरिकता के प्रावधान संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असममेघालयमिजोरम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं होंगे। इन आदिवासी क्षेत्रों में कर्बी आंगलोंग (असम)गारो हिल्स (मेघालय)चकमा जिला (मिजोरम) और त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र जिला शामिल हैं। इसके अतिरिक्त यह बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन1873 के अंतर्गत अधिसूचित ‘इनर लाइन’ में आने वाले क्षेत्रों में भी लागू नहीं होगा। इन क्षेत्रों में भारतीयों की यात्रा को इस परमिट प्रणाली से रेगुलेट किया जाता है। यह परमिट प्रणाली अरुणाचल प्रदेशमिजोरम और नागालैंड में लागू है। 
  • ओवरसीज़ सिटिजन्स ऑफ इंडिया (ओसीआईज़) को कुछ लाभ हासिल हैं जैसे भारत में मल्टीपल इंट्री, मल्टी पर्पज़ लाइफलॉग वीज़ा। एक्ट कहता है कि केंद्र सरकार कुछ आधार पर ओसीआई के पंजीकरण को रद्द कर सकती है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अगर ओसीआई ने धोखाधड़ी से पंजीकरण कराया हैया (ii) पंजीकरण से पांच वर्ष के दौरान उसे दो वर्ष या उससे अधिक समय के लिए कारावास की सजा सुनाई गई हो। बिल पंजीकरण को रद्द करने का एक और आधार प्रदान करता है। वह यह कि अगर ओसीआई ने एक्ट के किसी प्रावधान या सरकार द्वारा अधिसूचित किसी दूसरे कानून का उल्लंघन किया हो। 

बिल पर अधिक विवरण और हमारे विश्लेषण के लिए कृपया  देखें

इनर लाइन परमिट द्वारा रेगुलेटेड क्षेत्रों में परिवर्तन अधिसूचित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

वर्तमान में बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश, मिजोरमऔर नागालैंड के कुछ क्षेत्रों को इनर लाइन क्षेत्रों के रूप में अधिसूचित किया गया है। [4]  इन क्षेत्रों में किसी व्यक्ति का प्रवेश और निकासी इनर लाइन परमिट द्वारा रेगुलेट होता है।  

गृह मामलों के मंत्रालय ने इन क्षेत्रों को बदलने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। इनर लाइन परमिट में अब निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) अरुणाचल प्रदेश, (ii) मणिपुर, (iii) मिजोरम, और (iv) नागालैंड के अधिसूचित क्षेत्र। [5]  नागालैंड के गृह विभाग ने राज्य के बाकी क्षेत्रों के अतिरिक्त दीमापुर को इनर लाइन के अंतर्गत अधिसूचित किया है। [6]  

आर्म्स (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित

Rohin Garg (rohin@prsindia.org)

आर्म्स (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [7]  बिल आर्म्स एक्ट, 1959 में संशोधन करने का प्रयास करता है। कोई व्यक्ति कितनी लाइसेंसशुदा बंदूकें रख सकता है, बिल उस संख्या को कम करता है, साथ ही एक्ट के अंतर्गत कुछ अपराधों की सजा बढ़ाता है। बिल में अपराधों की नई श्रेणियों को भी प्रस्तावित किया गया है। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बंदूक खरीदने के लिए लाइसेंस: बिल अनुमत बंदूकों की संख्या को तीन से दो करता है। इसमें उत्तराधिकार या विरासत के आधार पर मिलने वाला लाइसेंस भी शामिल है। बिल एक साल की समय सीमा प्रदान करता है जिस दौरान अतिरिक्त बंदूकों को जमा करना होगा। बिल बंदूकों के लिए लाइसेंस की समय अवधि को तीन वर्ष से पांच वर्ष करता है। 
  • सजा में बढ़ोतरी: बिल अनेक अपराधों से संबंधित सजा में संशोधन करता है। एक्ट में निम्नलिखित के संबंध में सजा निर्दिष्ट है: (iगैर लाइसेंसशुदा हथियार की मैन्यूफैक्चरिंग, खरीद, बिक्री, ट्रांसफर, परिवर्तन सहित अन्य क्रियाकलाप, (ii) लाइसेंस के बिना बंदूकों को छोटा करना या उनमें परिवर्तन, और (iiiप्रतिबंधित बंदूकों का आयात या निर्यात। इन अपराधों के लिए तीन से सात वर्ष की सजा है, साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ता है। बिल इसके लिए सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान करता है जिसके साथ जुर्माना भी भरना पड़ेगा।
  • नए अपराध: बिल नए अपराधों को जोड़ता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iपुलिस या सशस्त्र बलों से जबरन हथियार लेने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा, साथ ही जुर्माना, (iiसेलिब्रेशन में गोलीबारी करने, जिससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ती है, पर दो साल तक की सजा होगी, या एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा, या दोनों सजाएं भुगतनी पड़ेंगी। 
  • बिल संगठित आपराधिक सिंडिकेट्स के अपराधों और गैरकानूनी तस्करी को भी स्पष्ट करता है। एक्ट का उल्लंघन करते हुए सिंडिकेट के सदस्यों द्वारा बंदूक या एम्यूनिशन रखने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। यह सजा उन लोगों पर भी लागू होगी, जोकि सिंडिकेट की ओर से गैर लाइसेंसशुदा बंदूक से डील करते हैं (इसमें मैन्यूफैक्चरिंग या बिक्री भी शामिल है), लाइसेंस के बिना बंदूकों में बदलाव करते हैं, या लाइसेंस के बिना बंदूकों का आयात या निर्यात करते हैं। गैरकानूनी तस्करी करने पर 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भरना पड़ सकता है।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें

विशेष संरक्षण समूह (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

विशेष संरक्षण समूह (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [8]  बिल विशेष संरक्षण समूह एक्ट, 1988 में संशोधन करता है। यह एक्ट प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार के करीबी सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करने हेतु विशेष संरक्षण समूह (एसपीजी) के गठन और रेगुलेशन का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • एक्ट के अंतर्गत एसपीजी प्रधानमंत्री और उनके परिवार के करीबी सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करती है। पद छोड़ने की तिथि के एक साल बाद तक पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार के करीबी सदस्यों को भी एसपीजी सुरक्षा प्रदान की जाती है। इस अवधि के बाद खतरे के स्तर को देखते हुए एसपीजी सुरक्षा दी जाती है। खतरे के स्तर का निर्धारण केंद्र सरकार करती है। यह खतरा निम्नलिखित प्रकार का होना चाहिए: (i) अगर वह सैन्य या आतंकवादी संगठन द्वारा उत्पन्न हो रहा हो, और (ii) वह गंभीर और निरंतर जारी रहने वाला हो।
  • बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और कहता है कि एसपीजी प्रधानमंत्री और उनके साथ उनके सरकारी आवास में रहने वाले परिवार के करीबी सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करेगी। वह पूर्व प्रधानमंत्रियों और उन्हें आबंटित आवास में उनके साथ रहने वाले परिवार के करीबी सदस्यों को भी सुरक्षा प्रदान करेगी। यह पद छोड़ने की तिथि के पांच साल बाद तक उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगी। 
  • एक्ट में प्रावधान है कि अगर किसी पूर्व प्रधानमंत्री से एसपीजी सुरक्षा हटाई जाती है, तो उसके परिवार के करीबी सदस्यों से भी यह हटा ली जाएगी, बशर्ते परिवार के करीबी सदस्यों पर खतरे का स्तर ऐसी सुरक्षा को न्यायसंगत ठहराता हो। बिल इस शर्त को हटाता है और कहता है कि अगर किसी पूर्व प्रधानमंत्री से एसपीजी सुरक्षा हटाई जाती है तो उसके परिवार के करीबी सदस्यों से भी सुरक्षा हटा दी जाएगी।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें।

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (केंद्र शासित प्रदेशों का विलय) बिल, 2019 संसद में पारित

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (केंद्र शासित प्रदेशों का विलय) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [9]  बिल दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेशों (यूटीज़) का एक केंद्र शासित प्रदेश में विलय करने का प्रावधान करता है। नतीजतन बिल कुछ संशोधन करता है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं- लोकसभा के प्रतिनिधित्व को बरकरार रखना, मुंबई उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार और दोनों यूटी के सभी अधिकारियों को एक यूटी में अस्थायी रूप से आबंटित करना।

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कैबिनेट ने जनगणना 2021 और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के अपडेशन को मंजूरी दी

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने निम्नलिखित प्रस्तावों को मंजूरी दे दी: (iदेश में जनगणना, 2021 का संचालन करना, और (iiअसम राज्य को छोड़कर देश के सभी हिस्सों में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करना। [10] 

जनगणना दो चरणों में की जाएगी: (iअप्रैल 2020 से फरवरी 2021 के दौरान प्रत्येक घर की सूची और उस घर में रहने वालों की संख्या, और (iiफरवरी 2021 में जनसंख्या की गणना की जाएगी। एनपीआर को घरों की सूची और उसमें रहने वालों की संख्या के साथ अपडेट किया जाएगा (असम को छोड़कर)। एनपीआर देश में सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। सामान्य निवासी उन लोगों को कहते हैंजो पिछले छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहते हैंया अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक उस क्षेत्र में निवास करने का इरादा रखते हैं। [11], [12]       

नागालैंड को आफ्स्पा के अंतर्गत अशांत क्षेत्र घोषित किया गया 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

गृह मंत्रालय ने पूरे नागालैंड राज्य को सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) एक्ट, 1958 के अंतर्गत 30 दिसंबर, 2019 से छह महीने की अवधि हेतु अशांत क्षेत्र घोषित किया है। [13] आफ्स्पा राज्य के गवर्नर, या केंद्र सरकार को राज्य के किसी भी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित करने की शक्ति देता है। अशांत क्षेत्र में सशस्त्र बलों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। इनमें उन कानूनों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों पर गोली चलाने का अधिकार शामिल है, जो निम्नलिखित प्रतिबंधित करते हैं(iपांच और उससे अधिक लोगों का एक जगह पर जमा होना, या (iiहथियार होना। 

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

पॉलिसी रेपो रेट 5.15% पर अपरिवर्तनीय, रिवर्स रेपो रेट 4.9पर

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने 2019-20 का पांचवां द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया। [14] पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) 5.15% पर अपरिवर्तनीय रही। एमपीसी के अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) 4.9% पर अपरिवर्तनीय रहा। 
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 5.4% पर अपरिवर्तनीय रहा। 
  • एमपीसी ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

2019-20 की दूसरी तिमाही में मौजूदा खाता घाटा जीडीपी के 0.9पर

2018-19 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) की तुलना में 2019-20 में इसी अवधि में भारत का मौजूदा खाता घाटा (सीएडी) 19 बिलियन USD (जीडीपी का 2.9%) से गिरकर 6.3 बिलियन USD (जीडीपी का 0.9%) हो गया। [15] पिछली तिमाही, यानी 2018-19 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सीएडी 14.3 बिलियन USD था, जोकि जीडीपी का 2% था।

सीएडी में वर्ष दर वर्ष गिरावट मुख्य रूप से 2019-20 की दूसरी तिमाही में 38.1 बिलियन USD के निम्न स्तरीय व्यापार घाटे (देश के आयात और निर्यात के बीच के अंतर) के कारण हुई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में ये घाटा 50 बिलियन USD था। 2019-20 की दूसरी तिमाही में विदेशी मुद्रा कोष 5.1 बिलियन USD बढ़ गया जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1.9 बिलियन USD का ह्रास हुआ था। तालिका 1 में 2019-20 की दूसरी तिमाही में भुगतान संतुलन प्रदर्शित है।

तालिका 1: 2019-20 की दूसरी तिमाही, भुगतान संतुलन (बिलियन USD) 

 

ति 2

2018-19

ति 1

2019-20

ति 2

2019-20

मौजूदा खाता

-19.0

-14.3

-6.3

पूंजी खाता

16.6

27.9

12.0

भूल चूक- लेनी देनी

-0.6

-0.4

0.7

कोष में परिवर्तन

-1.9

14

5.1

SourcesReserve Bank of India; PRS

 

वित्त

टैक्सेशन कानून (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

टैक्सेशन कानून (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [16] यह बिल सितंबर 2019 में जारी अध्यादेश का स्थान लेता है। बिल इनकम टैक्स एक्ट, 1961 (आईटी एक्ट) और फाइनांस (संख्या 2) एक्ट, 2019 में संशोधन करता है। बिल में प्रावधान है कि कुछ कटौतियों का दावा न करने वाली घरेलू कंपनियों के पास निचली दर पर टैक्स चुकाने का विकल्प है। यह कैपिटल गेन्स पर सरचार्ज की वसूली से संबंधित कुछ प्रावधानों में भी संशोधन करता है। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • घरेलू कंपनियों के लिए 22की टैक्स दर: वर्तमान में 400 करोड़ रुपए तक के वार्षिक टर्नओवर वाली घरेलू कंपनियां 25% की दर से इनकम टैक्स चुकाती हैं। दूसरी घरेलू कंपनियों के लिए यह दर 30% है। बिल में प्रावधान है कि अगर घरेलू कंपनियां इनकम टैक्स एक्ट के अंतर्गत कुछ कटौतियों का दावा नहीं करतीं तो उनके पास 22% की दर से इनकम टैक्स चुकाने का विकल्प है। इनमें निम्नलिखित के लिए प्रदत्त कटौतियां शामिल हैं: (iस्पेशल इकोनॉमिक जोन्स के अंतर्गत स्थापित नई यूनिट्स, (ii) अधिसूचित पिछड़े क्षेत्रों में नए संयंत्र या मशीनरी में निवेश करना, (iii) वैज्ञानिक अनुसंधान, कृषि विस्तारीकरण और कौशल विकास के प्रॉजेक्ट्स पर व्यय, (iv) नए संयंत्र या मशीनरी का ह्रास (कुछ मामलों में), और (v) इनकम टैक्स एक्ट में विभिन्न प्रावधान (अध्याय VI-ए के अंतर्गत)।
  • नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 15% की टैक्स दर: अगर नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां एक्ट के अंतर्गत उपरिलिखित के अनुसार कुछ कटौतियों का दावा नहीं करतीं, तो वे 15% की दर से इनकम टैक्स चुकाने का विकल्प चुन सकती हैं। उन्हें 30 सितंबर, 2019 के बाद स्थापित और रजिस्टर होना चाहिए और 1 अप्रैल, 2023 से पहले मैन्यूफैक्चरिंग शुरू कर देना चाहिए। इनमें निम्नलिखित कंपनियां शामिल नहीं होंगी: (iमौजूदा व्यापार के विभाजन या पुनर्निर्माण से बनी कंपनियां, (iiमैन्यूफैक्चरिंग के अलावा दूसरे व्यापार में संलग्न, और (iiiभारत में पहले इस्तेमाल होने वाले संयंत्र या मशीनरी का प्रयोग करने वाली कंपनियां (कुछ विशिष्ट शर्तों को छोड़कर)।
  • टैक्स की नई दरों की एप्लिकेबिलिटी: कंपनियां 2019-20 के वित्तीय वर्ष से नई टैक्स दरों (यानी आकलन वर्ष 2020-21) का विकल्प चुन सकती हैं। एक बार विकल्प चुनने के बाद आगे के वर्षों में यही विकल्प लागू होगा। अगर नए विकल्प चुनने वाली कंपनियां कुछ शर्तों का पालन नहीं करतीं तो वे उस वर्ष और आगे के वर्षों के लिए नए विकल्प का प्रयोग नहीं कर सकतीं। कुछ मामलों में अगर किसी कंपनी के लिए 15% टैक्स दर का विकल्प अवैध हो जाता है तो वह 22टैक्स दर को चुन सकती हैं।

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र अथॉरिटी बिल, 2019 संसद में पारित

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र अथॉरिटी बिल, 2019 संसद में पारित हो गया।  [17]  बिल भारत में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में वित्तीय सेवा बाजार को विकसित और रेगुलेट करने के लिए एक अथॉरिटी की स्थापना का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कवरेज: बिल स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स एक्ट, 2005 के अंतर्गत गठित सभी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससीज़) पर लागू होगा। आईएफएससी ऐसा क्षेत्राधिकार प्रदान करता है जहां निवासियों या अनिवासियों को विदेशी करंसी में वित्तीय उत्पाद और सेवाएं प्रस्तुत की जाती हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र अथॉरिटी की स्थापना: बिल में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र अथॉरिटी की स्थापना का प्रावधान है। इस अथॉरिटी में केंद्र द्वारा नियुक्त नौ सदस्य होंगे (एक चेयरपर्सन सहित)। अथॉरिटी के सदस्यों में आरबीआई, सेबी, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी एवं वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सर्च कमिटी के सुझाव पर अथॉरिटी के दो सदस्यों को नियुक्त किया जाएगा।
  • अथॉरिटी के कार्य: अथॉरिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) किसी आईएफएससी में वित्तीय उत्पादों (जैसे सिक्योरिटीज़ या डिपॉजिट्स), वित्तीय सेवाओं और वित्तीय संस्थानों को रेगुलेट करना, (ii) किसी आईएफएससी में अन्य वित्तीय उत्पादोंवित्तीय सेवाओंया वित्तीय संस्थानों को रेगुलेट करनाजिन्हें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है, और (iii) केंद्र सरकार को किसी भी अन्य वित्तीय सेवाओंउत्पादों या वित्तीय संस्थानों का सुझाव देना, जिन्हें आईएफएससी में अनुमति दी जा सकती है।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र अथॉरिटी फंड: बिल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र अथॉरिटी फंड की स्थापना करता है। अथॉरिटी के अनुदान, फीस और शुल्क तथा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होने वाली राशि को फंड में जमा किया जाएगा।
  • विदेशी करंसी में लेनदेन: बिल के अनुसार, आईएफएससीज़ में वित्तीय सेवाओं के सभी लेनदेन उस करंसी में किए जाएंगे, जिन्हें अथॉरिटी केंद्र सरकार की सलाह से विनिर्दिष्ट करेगी।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें।  

अध्यादेश के जरिए इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता संशोधित, बिल भी प्रस्तावित

Saket Surya (saket@prsindia.org)

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2019 को 28 दिसंबर, 2019 को जारी किया गया। [18]  अध्यादेश इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 में संशोधन करता है। संहिता कंपनियों और व्यक्तियों के बीच इनसॉल्वेंसी को रिज़ॉल्व करने के लिए एक समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करती है। अध्यादेश के अंतर्गत प्रस्तावित संशोधनों में निम्नलिखित शामिल है:

  • रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया को शुरू करने की न्यूनतम सीमा: संहिता के अंतर्गत फाइनांशियल क्रेडिटर (खुद या दूसरे फाइनांशियल क्रेडिटर्स के साथ संयुक्त रूप से) इनसॉल्वेंसी के रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया की शुरुआत करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में आवेदन कर सकता है। अध्यादेश फाइनांशियल क्रेडिटर्स की कुछ विशेष श्रेणियों के लिए न्यूनतम सीमा तय करने के लिए इस प्रावधान में संशोधन करता है। रियल ऐस्टेट प्रॉजेक्ट्स के मामले में रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए किसी प्रॉजेक्ट के कम से कम 100 एलॉटीज़ (जिन व्यक्तियों को प्लॉट, अपार्टमेंट या बिल्डिंग अलॉट हुई है या बेची गई है) या कुल एलॉटीज़ के 10% सदस्यों (इनमें से जो भी कम हो) को संयुक्त रूप से आवेदन करना होगा।
  • पूर्व अपराधों के लिए लायबिलिटी: संहिता के अंतर्गत रेज़ोल्यूशन प्लान के परिणामस्वरूप कॉरपोरेट देनदार के प्रबंधन या नियंत्रण में परिवर्तन हो सकता है। अध्यादेश कहता है कि कॉरपोरेट देनदारों को रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया शुरू करने से पहले किए गए अपराधों पर लायबिल नहीं ठहराया जाएगा। यह लायबिलिटी एनसीएलटी के द्वारा प्लान मंजूर करने की तारीख से समाप्त हो जाएगी।
  • कुछ मामलों में इम्यूनिटीपूर्व अपराधों के लिए किसी व्यक्ति को इम्यूनिटी मिलेगी, अगर वह व्यक्ति (iप्रमोटर नहीं है, या कॉरपोरेट देनदार के प्रबंधन या नियंत्रण में शामिल नहीं है, या ऐसे व्यक्ति से संबंधित पक्ष का नहीं है, (ii) वह व्यक्ति नहीं है जिसके खिलाफ जांच अधिकारियों ने शिकायत सौंपी या दायर नहीं की है, या जिसके बारे में इस बात को मानने के कारण हैं कि उसने अपराध के लिए उकसाया है या षडयंत्र रचा है। 
  • इनसॉल्वेंसी के आधार पर परमिट, लाइसेंस और पंजीकरण रद्द नहीं: अध्यादेश कहता है कि इनसॉल्वेंसी के आधार पर सरकार या स्थानीय प्रशासन का मौजूदा लाइसेंस, परमिट, पंजीकरण, कोटा, छूट या मंजूरी सस्पेंड या रद्द नहीं होगी। हालांकि इसे इस्तेमाल करने या जारी रखने के लिए बकाया देय के भुगतान में कोई डीफॉल्ट नहीं होना चाहिए।
  • महत्वपूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई को रोका नहीं जाएगाअध्यादेश कहता है कि रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल यह आदेश दे सकता है कि उन विशिष्ट वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई स्थगन अवधि के दौरान रोकी नहीं जा सकती, जोकि कॉरपोरेट देनदार के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है। स्थगन अवधि उस समय अवधि को कहते हैं जब एनसीएलटी लोगों को कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक सकती है, जैसे रिकवरी संबंधी मुकदमा दायर करना। यह प्रावधान तब लागू नहीं होगा, अगर देनदार ने सप्लायर्स का बकाया नहीं चुकाया है, या कुछ निर्दिष्ट स्थितियों में। 

उल्लेखनीय है कि ऐसे संशोधन इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (दूसरा संशोधन) बिल, 2019 में भी प्रस्तावित थे जोकि लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में प्रस्तुत की गई थी। इस बिल को वित्त संबंधी स्टैंडिंग कमिटी को भेजा गया है। 

अध्यादेश पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें  

कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना को मंजूरी दी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना में संशोधन को मंजूरी दी। [19]  केंद्रीय बजट 2019-20 में इस योजना की घोषणा की गई थी और 19 अगस्त, 2019 को इसे जारी किया गया था। [20]  

योजना के अंतर्गत वित्तीय रूप से मजबूत गैर बैंकिंग फाइनांशियल कंपनियों (एनबीएफसीज़) और हाउसिंग फाइनांस कंपनियों (एचएफसीज़) से उच्च स्तरीय रेटिंग वाले पूल्ड एसेट्स को खरीदने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सरकारी गारंटी दी जाती है। सरकार बैंकों द्वारा खरीदे एसेट्स के शुद्ध मूल्य के 10% तक, या 10,000 करोड़ रुपए (इनमें से जो भी कम होगा) के शुरुआत नुकसान को कवर करेगी।  

इस संशोधित योजना में एनबीएफसीज़ और एचएफसीज़ भी शामिल होंगे जोकि 1 अगस्त, 2018 से पहले एक साल की अवधि के दौरान एसएमए-0 उपश्रेणी में आते हों। एसएमए-0 उप-श्रेणी में वे एकाउंट्स शामिल हैं जिन्हें 30 दिनों तक देय प्रिंसिपल या ब्याज भुगतान वाले स्पेशल मेनशंड एकाउंट्स के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। संशोधित योजना के अनुसार, पीएसबी द्वारा खरीदे जा रहे एसेट पूल की न्यूनतम रेटिंग बीबीबी+ होनी चाहिए।

सरकार को उम्मीद है कि इस गारंटी से एनबीएफसीज़ और एचएफसीज़ को अपनी लिक्विडिटी या कैश फ्लो से जुड़ी समस्याएं हल करने में मदद मिलेगी। यह योजना 30 जून2020 तक या ऐसी तारीख तक चालू रहेगी, जब तक पीएसबी एक लाख करोड़ रुपये मूल्य के एसेट्स खरीद लेते हैं (इनमें से जो भी पहले हो)। 

आरबीआई ने प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों में बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (यूसीबीज़) के लिए बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। [21]  दिशानिर्देशों के अनुसार, 100 करोड़ रुपए या उससे अधिक की जमा वाले सभी यूसीबीज़ को बीओएम बनाने होंगे और बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की नियुक्ति के लिए आरबीआई से मंजूरी हासिल करनी होगी। नई शाखा खोलने या अपने कामकाज को विस्तार देने की स्थितियों में इन बैंकों के लिए बीओएम का गठन अनिवार्य है। 

बीओएम में न्यूनतम पांच और अधिकतम 12 सदस्य होंगे जिन्हें विभिन्न क्षेत्रों जैसे एकाउंटेंसी, बैंकिंग और कानून जैसे विभिन्न क्षेत्रों का विशेष ज्ञान होगा। बीओएम बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को रिपोर्ट करेगा। इसके कार्यों में यूसीबीज़ के बैंक संबंधी कार्यों पर नजर रखना और नीति निर्धारण में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मदद शामिल है।  

कैबिनेट ने आईआईएफसीएल को अतिरिक्त कैपिटल और इक्विटी सहायता को मंजूरी दी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनांस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) को अतिरिक्त कैपिटल और इक्विटी सहायता को मंजूरी दे दी है। [22]  आईआईएफसीएल एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी है जोकि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स को दीर्घकालीन वित्त प्रदान करती है।

वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 के लिए अतिरिक्त इक्विटी सहायता क्रमशः 5,300 करोड़ रुपए और 10,000 करोड़ रुपए होगी। यह सहायता बजटीय सहयोग या रीकैपिटलाइजेशन बॉन्ड जारी कर प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त आईआईएफसीएल की अधिकृत पूंजी को भी 6,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है। अधिकृत पूंजी शेयरों की वह अधिकतम संख्या होती है जिसे कंपनी अपने इनकॉरपोरेशन के दस्तावेजों के अनुसार जारी कर सकती है। 

लघु वित्त बैंकों की ऑन टैप लाइसेंसिंग के लिए आरबीआई ने दिशानिर्देश जारी किए 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में लघु वित्त बैंकों की ऑन टैप लाइसेंसिंग के लिए दिशानिर्देश जारी किए। [23] ऑन टैप लाइसेंसिंग का अर्थ है, साल भर के लिए लाइसेंस देने की पद्धति। वर्तमान में लघु वित्त बैंकों के लिए ऑन टैप लाइसेंसिंग विंडो नहीं है। लाइसेंसिंग की वर्तमान प्रक्रिया 2014 आरबीआई के दिशानिर्देशों द्वारा निर्देशित है जोकि निजी क्षेत्र में लघु वित्त बैंकों की लाइसेंसिंग करते हैं। [24]  

लघु वित्त बैंक लघु व्यापार और असंगठित क्षेत्र के संस्थानों को तकनीक और कम लागत वाले ऑपरेशंस के जरिए ऋण सुविधा प्रदान करते हैं। दिशानिर्देश में निम्नलिखित संबंधी प्रावधान हैं: 

  • पात्रता: नॉन बैंकिंग फाइनांशियल कंपनियां, सूक्ष्म वित्त संस्थान और निजी क्षेत्र के स्थानीय बैंक (जोकि निवासियों द्वारा नियंत्रित होते हैं) लघु वित्त बैंक में परिवर्तित होने का विकल्प चुन सकते हैं। उन्हें इस क्षेत्र में कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए। सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान, बड़े औद्योगिक घराने या व्यापारिक समूह, तथा स्वायत्तशासी निकाय लाइसेंसिंग के लिए पात्र नहीं। काम शुरू करने के तुरंत बाद लघु वित्त बैंकों को अनुसूचित बैंक का दर्जा (आरबीआई एक्ट, 1934 में सूचीबद्ध बैंक और आरबीआई से उधारियों के लिए पात्र) दिया जाएगा।
  • गतिविधियों का दायरालघु वित्त बैंक डिपॉजिट कर सकते हैं और लघु व्यापारियों को ऋण दे सकते हैं। वे आरबीआई की पूर्व मंजूरी के साथ म्यूचुअल फंड्स, बीमा उत्पाद और पेंशन उत्पाद जैसी वित्तीय सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। 
  • न्यूनतम पूंजी अहर्तालघु वित्त बैंक के लिए अपेक्षित न्यूनतम इक्विटी कैपिटल 200 करोड़ रुपए होगा (वर्तमान में यह 100 करोड़ रुपए है)। इसके अतिरिक्त लघु वित्त बैंक को 15न्यूनतम कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशो (बैंक के कुल रिस्क वेटेड एसेट के प्रतिशत के रूप में उसकी कुल पूंजी) बरकरार रखना होगा। 

अन्य शर्तें: लघु वित्त बैंकों को अपना 75शुद्ध ऋण उन क्षेत्रों को देना होगा जोकि प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (जैसे कृषिसूक्ष्म और लघु उद्योग) के पात्र हैं। इसके अतिरिक्त इन बैंकों को कम से कम 50ऋणों को निरंतर आधार पर 25 लाख रुपये तक रखा होगा।

आर्थिक संकेतकों के फ्रेमवर्क की समीक्षा के लिए कमिटी गठित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

स्टैटिस्टिक्स और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने औद्योगिक क्षेत्र, सेवा क्षेत्र और श्रम बल सांख्यिकी से संबंधित आर्थिक संकेतकों के फ्रेमवर्क की समीक्षा के लिए आर्थिक सांख्यिकी संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयरप्रोनब सेन) का गठन किया। [25], [26]  इस कमिटी में 28 सदस्य होंगे जोकि संयुक्त राष्ट्र, भारतीय रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और अर्थशास्त्रियों एवं स्टैटिस्टीशियंस का प्रतिनिधित्व करेंगे। उल्लेखनीय है कि कमिटी के गठन संबंधी आदेश की प्रति पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है।

 

सूचना और प्रसारण

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 लोकसभा में पेश

पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया गया। [27]  बिल व्यक्तियों के पर्सनल डेटा के संरक्षण के प्रावधान का प्रयास करता है और इसके लिए डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी की स्थापना करता है। बिल के अनुसार, व्यक्तिगत डेटा वह डेटा होता है जोकि पहचान की विशेषताओं, लक्षणों या गुणों से संबंधित होता है और जिसे किसी व्यक्ति की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • डेटा फिड्यूशरीज़ की बाध्यताएंडेटा फिड्यूशरी वह संस्था या व्यक्ति है जोकि पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग का माध्यम और उद्देश्य तय करता है। यह प्रोसेसिंग कुछ निश्चित उद्देश्यों, कलेक्शन और स्टोरेज की सीमा का विषय होगी। 
  • व्यक्ति के अधिकारबिल व्यक्तियों (या डेटा प्रिंसिपल) के कुछ अधिकारों को निर्धारित करता है। इन अधिकारों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iफिड्यूशरी से इस बात की पुष्टि करने का अधिकार कि उसके पर्सनल डेटा को प्रोसेस किया गया है, (ii) गलत, अधूरे या आउट-ऑफ-डेट पर्सनल डेटा में संशोधन की मांग, (iiiफिड्यूशरी द्वारा उनके पर्सनल डेटा का खुलासा करते रहने पर प्रतिबंध, अगर वह जरूरी नहीं है या सहमति वापस ले ली गई है। इसके अतिरिक्त व्यक्तियों की सहमति मिलने पर फिड्यूशरीज़ को डेटा प्रोसेसिंग की अनुमति दी गई है (सिवाय कुछ मामलों में, जैसे, अगर कानून या अदालत के आदेश द्वारा ऐसा करना अपेक्षित हो)। 
  • डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी: बिल डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी की स्थापना करता है जोकि : (iलोगों के हितों की रक्षा करने के लिए कदम उठा सकती है, (iiपर्सनल डेटा के दुरुपयोग को रोक सकती है, और (iiiबिल का अनुपालन सुनिश्चित कर सकती है। अथॉरिटी में डेटा प्रोटेक्शन और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र के विशेषज्ञों को सदस्य बनाया जाएगा।
  • छूट: कुछ मामलों में बिल के कुछ प्रावधानों के अनुपालन से छूट है। उदाहरण के लिए केंद्र सरकार अपनी कुछ एजेंसियों को देश की सुरक्षा, लोक व्यवस्था, संप्रभुता और एकता तथा विदेशी राज्यों से मित्रवत संबंध के मद्देनजर बिल के कुछ प्रावधानों से छूट दे सकती है। इसके अतिरिक्त बिल प्रावधान करता है कि केंद्र सरकार डेटा फिड्यूशरी को निम्नलिखित देने का निर्देश दे सकती है: (i) सेवाओं के बेहतर लक्ष्यीकरण के लिए नॉन पर्सनल डेटा, और (ii) बेनाम पर्सनल डेटा (जहां व्यक्तिगत रूप से डेटा की पहचान करना संभव नहीं)।  

बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को रेफर किया गया है, जोकि बजट सत्र, 2020 के अंतिम हफ्ते के पहले दिन अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें। मसौदा बिल पर पीआरएस के विश्लेषण के लिए कृपया  देखें

 

श्रम और रोजगार

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 लोकसभा में पेश 

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 लोकसभा में पेश की गई। [28]  यह संहिता सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नौ कानूनों, जैसे कर्मचारी भविष्य निधि एक्ट, 1952, मातृत्व लाभ एक्ट, 1961 और असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा एक्ट, 2008 का स्थान लेती है। संहिता की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: संहिता के अंतर्गत केंद्र सरकार श्रमिकों के लाभ के लिए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अधिसूचित कर सकती है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iकर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना, (iiबीमारी, मातृत्व एवं अन्य लाभ प्रदान करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना, और (iiiगिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स औऱ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को विभिन्न लाभ जैसे जीवन और विकलांगता कवर प्रदान करने के लिए विभिन्न लाभ।
  • गिग वर्कर्स ऐसे श्रमिक होते हैं जोकि परंपरागत नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर होते हैं (जैसे फ्रीलांसर्स)। प्लेटफॉर्म वर्कर्स ऐसे श्रमिक होते हैं जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूसरे संगठनों या व्यक्तियों तक पहुंचते हैं और उन्हें विशिष्ट सेवाएं प्रदान करके धन अर्जित करते हैं। असंगठित श्रमिकों में गृह आधारित (घर पर रहकर काम करने वाले) या स्वरोजगार प्राप्त श्रमिक शामिल होते हैं।  
  • कवरेज और पंजीकरण: संहिता योजनाओं की एप्लिकेबिलिटी के लिए अलग-अलग सीमाएं निर्दिष्ट करती है। जैसे ईपीएफ योजना 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले इस्टैबलिशमेंट्स पर लागू होगी। इन सीमाओं को केंद्र सरकार द्वारा संशोधित किया जा सकता है। इन सीमाओं को केंद्र सरकार द्वारा संशोधित किया जा सकता है। सभी पात्र इस्टैबलिशमेंट्स से यह अपेक्षा की जाती है कि वे संहिता के अंतर्गत पंजीकृत होंगे, जब तक कि वे दूसरे किसी श्रम कानून के अंतर्गत पंजीकृत न हों।
  • योगदान: ईपीएफ, ईपीएस, ईडीएलआई और ईएसआई योजनाओं को नियोक्ता और कर्मचारियों के अंशदान से वित्त पोषित किया जाएगा। ग्रैच्युटी के भुगतान, मातृत्व लाभ, भवन निर्माण श्रमिकों के लिए सेस, और कर्मचारी को मुआवजे का भुगतान नियोक्ता द्वारा वहन किया जाएगा। गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों के लिए योजनाओं को नियोक्ता, कर्मचारी और संबंधित सरकार के अंशदानों से वित्त पोषित किया जा सकता है।
  • सामाजिक सुरक्षा संगठन: संहिता सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए अनेक निकायों को स्थापित कर सकती है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड, (ii) ईएसआई योजना को प्रबंधित करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम, और (iii) असंगठित श्रमिकों से संबंधित योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर सामाजिक सुरक्षा बोर्ड।  

संहिता पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें

 

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण 

संविधान (एक सौ छब्बीसवां संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

संविधान (एक सौ छब्बीसवां संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [29]  बिल अनुसूचित जातियों (एससीज़) और अनुसूचित जनजातियों (एसटीज़) के आरक्षण से संबंधित प्रावधानों में संशोधन करता है।

संविधान लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससीज़ और एसटीज़ के लिए सीटों के आरक्षण और मनोनयन के द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधित्व का प्रावधान करता है। संविधान के लागू होने के बाद 70 वर्ष की अवधि के लिए यह प्रावधान लागू किया गया था और 25 जनवरी, 2020 को यह समाप्त हो जाएगा। बिल एससी और एसटी के लिए आरक्षण को 25 जनवरी, 2030 तक 10 वर्षों के लिए और बढ़ाने का प्रयास करता है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो- इंडियन समुदाय के लिए मनोनयन द्वारा सीटों के प्रावधान को नहीं बढ़ाया गया है।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें।  

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) बिल, 2019 लोकसभा में पेश

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया गया।  [30]  बिल माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण एक्ट, 2007 में संशोधन करता है। [31]  मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • परिभाषा: एक्ट के अंतर्गत बच्चों में बच्चे और नाती-पोते आते हैं, जिनमें नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। बिल इस परिभाषा में निम्नलिखित को शामिल करता है: सौतेले बच्चे, दत्तक (जिन्हें गोद लिया है) बच्चे, बहू-दामाद और नाबालिग बच्चों के लीगल गार्जियन। इसके अतिरिक्त एक्ट के अनुसार संबंधी का अर्थ है, संतानरहित वरिष्ठ नागरिक का लीगल वारिस, जिसके पास उस व्यक्ति की संपत्ति है या उसकी मृत्यु के बाद विरासत में वह संपत्ति मिलेगी। इसमें नाबालिग बच्चे शामिल नहीं हैं। बिल में नाबालिग बच्चों को भी शामिल किया गया है जिनका प्रतिनिधित्व उनके लीगल गार्जियन करेंगे। एक्ट में माता-पिता का अर्थ है, बायोलॉजिकल, गोद लेने वाले और सौतेले माता-पिता। बिल माता-पिता की परिभाषा में सास-ससुर और दादा-दादी, नाना-नानी को शमिल करता है।
  • एक्ट के अंतर्गत भरण-पोषण में भोजन, कपड़ा, आवास, मेडिकल सहायता और उपचार शामिल हैं। कल्याण में भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और वरिष्ठ नागरिकों के लिए जरूरी दूसरी सुविधाएं शामिल हैं। बिल इस परिभाषा को व्यापक बनाता है: (i) भरण-पोषण में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा का प्रावधान शामिल है ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन जी सकें, और (ii) कल्याण में आवास, कपड़े, सुरक्षा और वरिष्ठ नागरिकों या माता-पिता के शारीरिक एवं मानसिक कल्याण के लिए जरूरी अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
  • भरण-पोषण का आदेश: एक्ट के अंतर्गत राज्य सरकारें भरण-पोषण ट्रिब्यूनल्स बनाएंगी ताकि वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता के देय भरण-पोषण पर फैसला किया जा सके। ये ट्रिब्यूनल बच्चों और संबंधियों के निर्देश दे सकती है कि वे माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को 10,000 रुपए का मासिक भरण-पोषण शुल्क चुकाएं। बिल भरण-पोषण के शुल्क की अधिकतम सीमा को हटाता है।
  • अपराध और सजा: बिल वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता को त्यागने पर तीन महीने तक की कैद को बढ़ाकर छह महीने करता है और जुर्माने को 5,000 रुपए से 10,000 रुपए करता है। बिल में यह प्रावधान भी करता है कि अगर बच्चे या संबंधी भरण-पोषण के आदेश का अनुपालन नहीं करते तो एक महीने तक की कैद, या जब तक जुर्माना नहीं चुकाया जाता, तब तक की कैद सकती है।  

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

ई-सिगरेट पर प्रतिबंध बिल, 2019 संसद में पारित

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स पर प्रतिबंध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन) बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [32]  यह बिल सितंबर, 2019 में जारी किए गए अध्यादेश का स्थान लेता है। बिल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स के उत्पादन, व्यापार, स्टोरेज और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है।

  • इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्सबिल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (ई-सिगरेट्स) की व्याख्या एक ऐसे बैटरी चालित उपकरण के रूप में करता है जोकि किसी पदार्थ को गर्म करता है ताकि कश लेने के लिए वाष्प पैदा हो। इन ई-सिगरेट्स में निकोटिन और फ्लेवर हो सकते हैं और इनमें इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम के सभी प्रकार, हीट-नॉट बर्न उत्पाद, ई-हुक्का और ऐसे ही दूसरे उपकरण शामिल हैं।
  • ई-सिगेट्स पर प्रतिबंधबिल भारत में ई-सिगरेट्स के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। इस प्रावधान का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ेगा या एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा या दोनों सजा भुगतनी होगी। एक बार से अधिक बार अपराध करने पर तीन वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ेगा और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।
  • ई-सिगेट्स का स्टोरेज: बिल के अंतर्गत ई-सिगरेट्स के स्टॉक के स्टोरेज के लिए कोई व्यक्ति किसी स्थान का प्रयोग नहीं कर सकता। अगर कोई व्यक्ति ई-सिगरेट्स का स्टॉक रखता है तो उसे छह महीने तक का कारावास भुगतना होगा या 50,000 रुपए तक का जुर्माना भरना होगाया दोनों सजा भुगतनी पड़ेगी।
  • बिल के लागू होने के बाद ई-सिगरेट्स का मौजूदा स्टॉक रखने वालों को इन स्टॉक्स की घोषणा करनी होगी और उन्हें अधिकृत अधिकारी के निकटवर्ती कार्यालय में जमा कराना होगा। यह अधिकृत अधिकारी पुलिस अधिकारी (कम से कम सब इंस्पेक्टर स्तर का) या केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत कोई अन्य अधिकारी हो सकता है।

बिल पर अधिक जानकारी के लिए कृपया  देखें

 

परिवहन

जहाज रीसाइकलिंग बिल, 2019 संसद में पारित 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

जहाज रीसाइकलिंग बिल, 2019 संसद में पारित हो गया। [33] बिल जहाजों में खतरनाक सामग्री के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाता है और जहाजों की रीसाइकलिंग को रेगुलेट करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बिल किन पर लागू होगा: बिल निम्नलिखित पर लागू होगा: (iभारत में पंजीकृत नए और मौजूदा जहाज, (iiभारत में किसी बंदरगाह या टर्मिनल, या भारत के राज्यक्षेत्रीय सागर में प्रवेश करने वाला जहाज, (iii) कोई युद्धपोत, या प्रशासन के स्वामित्व वाला और उसके द्वारा संचालित तथा सरकारी गैर वाणिज्यिक सेवा के लिए इस्तेमाल होने वाला कोई अन्य जहाज, और (iv) भारत में जहाज रीसाइकलिंग केंद्र।  
  • जहाज रीसाइकलिंग: बिल के अनुसार, जहाज रीसाइकलिंग किसी रीसाइकलिंग केंद्र में जहाजों को तोड़ने की प्रक्रिया को कहते हैं ताकि उसके कुछ घटकों और सामग्रियों को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए हासिल किया जा सके और इस दौरान उत्पन्न होने वाली खतरनाक सामग्री का ध्यान रखा जा सके। 
  • जहाजों के लिए जरूरी: जहाज प्रतिबंधित खतरनाक सामग्रियों का इस्तेमाल नहीं करेंगे, जिन्हें अधिसूचित किया जाएगा। केंद्र सरकार इस शर्त से कुछ श्रेणी के जहाजों को छूट दे सकती है। राष्ट्रीय अथॉरिटी निर्धारित शर्तो की पुष्टि के लिए पीरिऑडिक सर्वे करेगी। जहाज रीसाइकलिंग से संबंधित सभी गतिविधियों का प्रशासन, पर्यावेक्षण और निगरानी करने के लिए केंद्र सरकार इस अथॉरिटी को अधिसूचित करेगी।
  • रीसाइकलिंग केंद्र: जहाजों को सिर्फ अधिकृत रीसाइकलिंग केंद्रों में रीसाइकल किया जाएगा। ऐसे किसी केंद्र को अधिकृत करने हेतु आवेदन संबंधित अथॉरिटी को सौंपा जाएगा (जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा)। इस आवेदन के साथ जहाज रीसाइकलिंग केंद्र की प्रबंध योजना और नियत फीस भी सौंपी जाएगी। मौजूदा केंद्रों को एक्ट के लागू होने के 60 दिनों के भीतर प्राधिकृति के लिए आवेदन करना चाहिए। कोई केंद्र तब अधिकृत होगा, जब संबंधित अथॉरिटी इस बात से संतुष्ट हो जाए कि वह केंद्र निर्दिष्ट मानदंडों का पालन करता है। सर्टिफिकेट निर्दिष्ट अवधि के लिए वैध होगा, लेकिन यह अवधि पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर एक वर्ष तक का कारावास भुगतना होगा, या 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा, या दोनों सजा भुगतनी होगी।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें 

राजमार्गों के मुद्रीकरण के लिए टोल ऑपरेट ट्रांसफर मॉडल में संशोधन 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों के मुद्रीकरण के लिए टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल में कुछ परिवर्तनों को मंजूरी दी।  [34]  अगस्त 2016 में केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी (एनएचएआई) को सरकार द्वारा वित्त पोषित कुछ राष्ट्रीय राजमार्ग प्रॉजेक्ट्स के मुद्रीकरण के लिए अधिकृत किया था।  [35]  इस मुद्रीकरण से प्राप्त राजस्व को केंद्र सरकार द्वारा राजमार्गों के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। जिन परिवर्तनों को मंजूर किया गया है, उनमें निम्न शामिल हैं: 

  • पहले प्रॉजेक्ट्स का मुद्रीकरण तभी किया जाता था, जब वे ऑपरेशनल हों और कमर्शियल ऑपरेशंस की तारीख के बाद न्यूनतम दो साल से टोल वसूल रहे हों। इस समय सीमा को एक साल कर दिया गया है।    
  • एनएचएआई प्रॉजेक्ट की विशेषताओं को देखते हुए छूट की अलग-अलग अवधि प्रस्तावित कर सकती है जोकि 15 साल से 30 साल हो सकती है। 
  • एनएचएआई बोर्ड प्रत्येक टीओटी बंडल के लिए विस्तृत प्रस्ताव को मंजूर करेगा। इसमें प्रस्तावित प्रॉजेक्ट की दूरी, अनुमानित छूट की लागत और छूट की प्रस्तावित अवधि का विवरण शामिल होगा। 
  • एनएचएआई एसेट मुद्रीकरण के वैकल्पिक माध्यम के रूप में टोल फी प्लाजा से एकत्रित यूजर फी रसीदों की सिक्योरिटाइजेशन के जरिए बैंकों से दीर्घकालीन वित्त जुटा सकता है।  

क्वाड्रिसाइकिल्स के लिए बीएस-VI के स्तर के उत्सर्जन नियमों की अनिवार्यता से संबंधित संशोधनों का मसौदा प्रकाशित

Saket Surya (saket@prsindia.org)

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधनों का मसौदा प्रकाशित किया है। [36] मसौदे में 1 अप्रैल, 2020 को या उसके बाद मैन्यूफैक्चर होने वाली क्वाड्रिसाइकिल्स के लिए भारत स्टेज VI (बीएस VI) स्तर के उत्सर्जन संबंधी नियम को अनिवार्य किया गया है। क्वाड्रिसाइकिल पैसेंजर कार से छोटे और हल्के चार पहिया वाहन होते है। भारत स्टेज इमिशन स्टैंडर्ड्स (बीएसईएस) केंद्र सरकार द्वारा स्थापित उत्सर्जन मानदंड हैं ताकि मोटर वाहनों से निकलने वाले वायु प्रदूषकों के आउटपुट को रेगुलेट किया जा सके। बीएसईएस अधिक कड़े मानदंडों के साथ प्रगतिशील मानक प्रदान करता है। वर्तमान मेंक्वाड्रिसाइकिल के लिए लागू उत्सर्जन मानदंड भारत स्टेज IV हैं। मसौदे के प्रकाशन की तारीख यानी 13 दिसंबर, 2019 से 30 दिनों के भीतर टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं। 

 

रेलवे                                      

Saket Surya (saket@prsindia.org)

कैबिनेट ने भारतीय रेलवे के संगठनात्मक पुनर्गठन को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय रेलवे के संगठनात्मक पुनर्गठन को मंजूरी दी।  

  • भारतीय रेलवे के ग्रुप ए की कई सेवाओं का एकीकरण: ग्रुप ए की आठ सेवाओं, जैसे भारतीय रेलवे ट्रैफिक सेवा और भारतीय रेलवे एकाउंट्स सेवा को एक सेवा में समाहित किया जाएगा जिसे भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा नाम दिया गया है। [37]  यह रेल सुधारों पर गठित अनेक कमिटियों जैसे प्रकाश टंडन (1994) और बिबेक डेब्रॉय (2015) के सुझावों के अनुरूप है।
  • रेलवे बोर्ड का पुनर्गठनरेलवे बोर्ड को रेलवे की फंक्शनल लाइन्स के आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा। इसके एक चैयरपर्सन होंगे, जोकि चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में काम करेंगे। इसके चार सदस्य होंगे जोकि क्रमशः निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होंगे(i) इंफ्रास्ट्रक्चर, (ii) ऑपरेशंस और व्यवसाय विकास, (iii) रोलिंग स्टॉक, और (iv) वित्त। कुछ स्वतंत्र सदस्य बोर्ड में सलाहकारी भूमिका निभाने के लिए नियुक्त किए जाएंगे। वर्तमान में रेलवे बोर्ड में एक चेयरपर्सन और विभागीय आधार पर सदस्य मौजूद हैं।  

आवासन और शहरी मामले 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनाधिकृत कालोनियों के निवासियों के संपत्ति के अधिकार को मान्यता) बिल, 2019 संसद में पारित

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनाधिकृत कालोनियों के निवासियों के संपत्ति के अधिकार को मान्यता) बिल, 2019 लोकसभा में पारित हो गया। [38]  बिल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में कुछ अनाधिकृत कालोनियों के निवासियों के संपत्ति के अधिकार को मान्यता देने का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • संपत्ति के अधिकार को मान्यता: बिल में प्रावधान है कि केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए कुछ अनाधिकृत कालोनियों के निवासियों की अचल संपत्तियों के लेनदेन को नियमित कर सकती है। लेनदेन को हालिया पावर ऑफ अटॉर्नी, सेल एग्रीमेंट, वसीयत, या पज़ेशन लेटर जैसे दस्तावेजों के आधार पर नियमित किया जा सकता है। अनाधिकृत कालोनी के जिस निवासी के पास ऐसे दस्तावेज होंगे, वह कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप के जरिए स्वामित्व का अधिकार हासिल करने का पात्र होगा।
  • निवासीबिल के अनुसार, निवासी वह व्यक्ति होता है जिसके पास पंजीकृत सेल डीड या कुछ निश्चित दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति का भौतिक कब्जा होता है। इस परिभाषा में निवासियों के वैध वारिस शामिल हैं लेकिन इनमें किरायेदार, लाइसेंसी, या वे लोग शामिल नहीं हैं जिन्हें संपत्ति का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली है।
  • अनाधिकृत कालोनी: अनाधिकृत कालोनी को ऐसी कालोनी या संलग्न क्षेत्र से मिलकर किए जाने वाले विकास के तौर पर व्याख्यायित किया गया है जिसके लिए लेआउट या बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के लिए अनुमति हासिल नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त दिल्ली विकास प्राधिकरण को नियमितीकरण के लिए कालोनी को अधिसूचित करना चाहिए।
  • शुल्क का भुगतान: निवासियों को स्वामित्व हासिल करने के लिए कुछ शुल्क चुकाना होगा। इस शुल्क को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है। कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप में लिखित राशि पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज देना होगा। संपत्ति से संबंधित पहले के किसी लेनदेन पर कोई स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज नहीं चुकाना होगा।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें 

 

शिक्षा

Rohin Garg (rohin@prsindia.org)

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बिल लोकसभा में पारित

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बिल, 2019 लोकसभा में पारित हो गया। [39] बिल संस्कृत के तीन मानद विश्वविद्यालयों को एक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में समाहित करने का प्रयास करता हैं। ये विश्वविद्यालय हैं: (iराष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली, (ii) श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली, और (iii) राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति। 

पीआरएस रिपोर्ट का सारांश कृपया  देखें

 

विदेशी मामले

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

एंटी-मैरीटाइम पायरेसी बिल, 2019 लोकसभा में पेश

एंटी-मैरीटाइम पायरेसी बिल, 2019 लोकसभा में पेश किया गया। [40]  बिल मैरीटाइम पायरेसी रोकने और पायरेसी के अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • बिल की एप्लिकेबिलिटी: बिल भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन की सीमाओं से लगे और उससे परे के सभी समुद्री भागों पर लागू होगा। एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन यानी विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र समुद्र के उस क्षेत्र को कहते हैं जिसमें आर्थिक गतिविधियां करने का भारत को विशिष्ट अधिकार है।
  • पायरेसी: बिल के अनुसार पायरेसी का अर्थ है, किसी निजी जहाज या एयरक्राफ्ट के चालक दल या यात्रियों द्वारा निजी उद्देश्य के लिए किसी जहाज, एयरक्राफ्ट, व्यक्ति या प्रॉपर्टी के खिलाफ हिंसा, बंधक बनाने या नष्ट करने की गैरकानूनी कार्रवाई करना। यह कार्रवाई खुले समुद्र में या भारत के क्षेत्राधिकार से बाहर हो सकती है। किसी को इस कार्रवाई के लिए उकसाना या जानबूझकर इस कार्रवाई को आसान बनाना भी पायरेसी माना जाएगा। इसमें ऐसी कार्रवाई भी शामिल है जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत पायरेसी माना जाता है।
  • पायरेट जहाज या एयरक्राफ्ट के संचालन में स्वैच्छिक रूप से हिस्सा लेना भी पायरेसी में शामिल है। इसमें ऐसे जहाज या एयरक्राफ्ट शामिल हैं (i) जिनका पायरेसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, या (ii) इस्तेमाल किया जा चुका है, साथ ही दोनों स्थितियों में वह जहाज या एयरक्राफ्ट पायरेसी के लिए दोषी व्यक्ति के नियंत्रण में है।
  • अपराध और दंड: पायरेसी पर निम्नलिखित दंड दिए जाएंगे: (i) आजीवन कारावास, या (ii) मृत्यु, अगर पायरेसी में हत्या की कोशिश शामिल है और उसके कारण किसी की मृत्यु हो जाती है। अगर कोई पायरेसी करने की कोशिश करता है, उसमें मदद करता है, उसके लिए किसी को उकसाता है, या उसके लिए कुछ खरीदता है, या किसी दूसरे को पायरेसी में भाग लेने के लिए निर्देश देता है तो उसके लिए 14 साल तक की सजा भुगतनी पड़ेगी और जुर्माना भरना पड़ेगा। 
  • निर्दिष्ट अदालत: केंद्र सरकार संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से सत्र अदालतों को बिल के अंतर्गत निर्दिष्ट अदालत के रूप में अधिसूचित कर सकती है। वह प्रत्येक निर्दिष्ट अदालत के लिए क्षेत्राधिकार को भी अधिसूचित कर सकती है। निर्दिष्ट अदालत निम्नलिखित द्वारा किए गए अपराधों पर विचार करेगी: (iवह व्यक्ति जो भारतीय नौसेना या तटरक्षकों की कस्टडी में है, भले ही वह किसी भी देश का हो, (iiभारत का नागरिक, भारत में रहने वाला विदेशी नागरिक या राष्ट्रविहीन (स्टेटलेस) व्यक्ति। इसके अतिरिक्त अदालत किसी व्यक्ति पर तब भी विचार कर सकती है, जब वह अदालत में शारीरिक रूप से मौजूद न हो।

बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें

कैबिनेट ने भारत और ब्राजील के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने भारत और ब्राजील के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते को मंजूरी दी। [41] समझौते में कहा गया है कि अल्पावधि के लिए ब्राजील में काम करने वाले भारतीय पेशेवर और दक्ष श्रमिकों को किसी भी एक देश में सामाजिक सुरक्षा भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त समझौता उन मामलों में भी पेंशन के भुगतान का प्रावधान करता है जिन मामलों में श्रमिक किसी दूसरे देश में रह रहा हो। [42]

 

स्टैटिस्टिक्स

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

मसौदा नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन बिल, 2019 जारी

स्टैटिस्टिक्स और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने मसौदा नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन बिल, 2019 को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए प्रकाशित किया है। [43] मसौदा बिल देश में सभी मुख्य स्टैटिस्टिकल गतिविधियों के लिए एक नोडल रेगुलेटरी निकाय के रूप में नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन (एनएससी) के गठन का प्रयास करता है। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन का गठन: मसौदा बिल नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन (एनएससी) का गठन करता है। एनएससी में नौ सदस्य होंगे। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iचेयरपर्सन, (iiपांच पूर्णकालिक सदस्य, (iiiडेप्युटी गवर्नर, आरबीआई, (ivभारत के मुख्य स्टैटिस्टीशियन, और (vमुख्य आर्थिक सलाहकार, वित्त मंत्रालय। चेयरपर्सन और पांच पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। ये नियुक्तियां केंद्र सरकार द्वारा गठित सर्च कमिटी के सुझावों के आधार पर की जाएंगी। 
  • नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन के कार्य:  एनएससी केंद्र और राज्य सरकारों, अदालतों और ट्रिब्यनलों को सरकारी स्टैटिस्टिक्स से संबंधित मामलों पर सलाह देगा। इनमें राष्ट्रीय नीतियों, विधायी उपायों तथा स्टैटिस्टिक्स अवधारणाओं और प्रक्रियाओं से संबंधित मामले शामिल हैं। यह सार्वजनिक वितरण के लिए सरकारी स्टैटिस्टिक्स आंकड़ों का रखरखाव भी करेगा।
  • स्टैटिस्टिकल ऑडिटमसौदा बिल एनएससी में एक नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑडिट एंड एसेसमेंट ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना करता है। यह प्रशाखा सरकारी एजेंसियों के स्टैटिस्टिकल सर्वे का पीरिऑडिक स्टैटिस्टिकल ऑडिट करेगी। चीफ स्टैटिस्टिकल ऑडिटर इसके प्रमुख होंगे जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी।
  • नेशनल स्टैटिस्टिकल फंडमसौदा बिल नेशनल स्टैटिस्टिकल फंड की स्थापना करता है। इस फंड में सरकारी अनुदानों, फीस और दूसरे शुल्कों, और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य स्रोत से प्राप्त होने वाली राशि जमा की जाएगी। कमीशन के सदस्यों के वेतन, भत्ते और दूसरे पारिश्रमिक के लिए इस फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • जांच, अपराध और सजाएनएससी के पास निम्नलिखित स्थितियों में सरकारी एजेंसियों को चेतावनी देने या दंडित करने की शक्ति है: (iअगर एजेंसी स्टैटिस्टिकल नैतिकता के मानदंडों का पालन नहीं करती, या (iiअगर सरकारी स्टैटिस्टिक्स में संलग्न कोई व्यक्ति पेशेवर दुर्व्यवहार करता है, गलत या भ्रामक बयान देता है या एनएससी को सूचना देने में कोई चूक करता है। 

मसौदा बिल पर 19 जनवरी, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

रक्षा

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कैबिनेट ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के सृजन को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद के सृजन को मंजूरी दी।  [44] यह पद चार सितारा जनरल के रैंक वाली होगी। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सैन्य विभाग की स्थापना की जाएगी जिसके प्रमुख सीडीएस होंगे। जनरल बिपिन रावत को 31 दिसंबर, 2019 से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया गया है। [45]

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के सृजन का सुझाव सबसे पहले ग्रुफ ऑफ मिनिस्टर्स की रिपोर्ट में दिया गया था। रिफॉर्म द नेशनल सिक्योरिटी सिस्टम (2001) नामक इस रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार को सिंगल-प्वाइंट सैन्य सलाह देने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए। [46]  सरकार को उम्मीद है कि इस सुधार से सशस्त्र बलों को समन्वित रक्षा कार्यक्रमों और प्रक्रियाओं को संचालित करने में मदद मिलेगी।

सीडीएस चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी का स्थायी चैयरमैन होगा। वर्तमान में इस पद पर वरिष्ठतम चीफ ऑफ स्टाफ होते हैं जो रिटायर होने तक अपने पद पर बने रहते हैं, इसीलिए यह पद स्थायी नहीं है। सीडीएस निम्नलिखित कार्य भी करेंगे:

  • तीनों सैन्य संगठनों (भारतीय थलसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना) का प्रबंधन करेंगे और इनसे जुड़े मामलों पर रक्षा मंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार के तौर पर कार्य करेंगे। उल्लेखनीय है कि सीडीएस तीनों सैन्य प्रमुखों को सैन्य आदेश नहीं देंगे। 
  • न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी के सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे (अथॉरिटी भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम के कमांड और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है)।
  • तीन सेनाओं के ऑपरेशंस, लॉजिटिक्स, परिवहन, संचार के बीच समन्वय स्थापित करेगा।
  • रक्षा अधिग्रहण परिषद और रक्षा योजना कमिटी के सदस्य के तौर पर कार्य करेगा। 

सैन्य मामलों का विभाग निम्नलिखित पर कार्य करेगा: (i) रक्षा खरीद, प्रशिक्षण और सैन्य सेनाओं में स्टाफिंग से संबंधित मामले, (iiसंसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए सैन्य कमान का पुनर्गठन करना, और (iiiस्वदेशी उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना।  

 

खाद्य प्रसंस्करण

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

स्टैंडिंग कमिटी ने एनआईएफटीईएम बिल, 2019 पर रिपोर्ट सौंपी

कृषि संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयरपी. सी. गद्दीगौदर) ने नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, इंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट बिल, 2019 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [47]  बिल खाद्य तकनीक, उद्यमिता और प्रबंधन के कुछ संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करता है। ये हैं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, इंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (एनआईएफटीईएम) कुंडली और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी (आईआईएफपीटी) तंजावुर। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्न शामिल हैं:

  • बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का संयोजनबिल में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का प्रावधान है जोकि संस्थान की मुख्य एग्जीक्यूटिव बॉडी होगी। बोर्ड संस्थान के सामान्य निरीक्षण, निर्देशन और मामलों के नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होगा। खाद्य विज्ञान या तकनीक, प्रबंधन या लोक प्रशासन के क्षेत्र का विशिष्ट व्यक्ति इस बोर्ड का चेयरपर्सन होगा। कमिटी ने कहा कि चूंकि खाद्य प्रोसेसिंग क्षेत्र एक विशिष्ट क्षेत्र है, चेयरपर्सन को उद्योग या एकैडमिया का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए। उसने सुझाव दिया कि चेयरपर्सन के रूप में नियुक्त होने वाले लोगों में से लोक प्रशासकों को हटाया जाना चाहिए। कमिटी ने कहा कि इससे संस्थान के कामकाज की नौकरशाह प्रवृत्ति को खत्म करने और उद्योग अनुकूल नीतियों को अपनाने में मदद मिलेगी। कमिटी ने सुझाव दिया कि इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी एक्ट, 1961 की तर्ज पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में भी संसद सदस्य को शामिल किया जाए।
  • टेक्निकल कोर्सेज़ की फीस की अधिकतम सीमा: ऑफ इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के अंतर्गत नेशनल फी कमिटी पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए वसूली जाने वाली अधिकतम ट्यूशन और डेवलपमेंट फी तय करती है। कमिटी ने कहा कि नेशनल फी कमिटी द्वारा सुझाई गई अधिकतम फी की तुलना में एनआईएफटीईएम, कुंडली कुछ पाठ्यक्रमों के लिए अधिक फीस वसूल रहा है। कमिटी ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि एनआईएफटीईएम, कुंडली अब तक किस हद तक अतिरिक्त फी वसूल चुका है, उसका विश्लेषण करने तथा सुधारात्मक उपाय करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया जाए। उसने खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को सुझाव दिया कि वह नेशनल फी कमिटी के सुझावों के अनुसार वर्तमान शैक्षणिक वर्ष से मौजूदा पाठ्यक्रमों की फीस की सीमा तय करे। कमिटी ने यह भी सुझाव दिया कि एनआईएफटीईएमज़ के विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस को उपयुक्त सीमा तक निर्धारित करने के लिए बिल में नया प्रावधान जोड़ा जाए।

पीआरएस रिपोर्ट के सारांश के लिए कृपया  देखें

मसौदा नेशनल फूड प्रोसेसिंग नीति सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने मसौदा नेशनल फूड प्रोसेसिंग नीति, 2019 को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया। [48]  इस मसौदा नीति का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का विकास और उसकी प्रगति को प्रभावित करने वाली कमियों को दूर करना है। इसका एक उद्देश्य यह भी है कि 2035 तक इस क्षेत्र में निवेश को छह गुना बढ़ाया जाए। मसौदा नीति की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • उद्देश्यमुख्य उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iकिसानों के स्तर पर बर्बादी को कम करना, ताकि उनकी आय को बढ़ाया जा सके, (iiखाद्य प्रसंस्करण उद्योग को सहयोग देना ताकि रोजगार के मौके पैदा हो सकें, (iiiक्षेत्र में क्रेडिट की सुविधा सुनिश्चित हो सके, (ivउपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित, सस्ते और उच्च क्वालिटी के खाद्य उत्पादों की उपलब्धता बढ़े, और (vक्षेत्र की मांगों को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और दक्षता निर्माण किया जाए।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: मसौदा नीति खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को बढ़ावा देने का प्रयास करती है। कुछ प्रस्तावित उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iनए कृषि प्रसंस्करण और उत्पादन क्लस्टर्स को चिन्हित, विकसित और प्रोत्साहित करना, और (iiलॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को सहयोग देना, जैसे क्लीनिंग और पैकिंग सुविधाएं। 
  • राहत और सहायता उपाय: मसौदा नीति क्षेत्र के विकास के लिए अनेक राहत उपाय सुझाती है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iनई प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना और मौजूदा यूनिट्स के टेक्नोलॉजिकल अपग्रेडेशन के लिए पूंजी निवेश सबसिडी, (iiवित्तीय राहत देना, जैसे खाद्य उत्पादों और फूड प्रोसेसिंग मशीनरी पर वस्तु एवं सेवा कर की निम्न दर, और (iii) बिजली शुल्क और जमीन पर कुछ रियायतें भी दी जा सकती हैं। 
  • प्रशिक्षण और दक्षता विकासमसौदा नीति रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों का प्रस्ताव रखती है, जैसे (iरोजगार कल्याण को बढ़ावा देना, (iiकिसानों को फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के लिए मदद करना, और (iiiफूड प्रोसेसिंग ट्रेनिंग कम इनक्यूबेशन सेंटर्स को बढ़ावा देना। नीति नए पाठ्यक्रम शुरू करने और फूड टेक्नोलॉजी, इंटरप्रेन्योरशिप और मैनेजमेंट में शोध भी प्रस्तावित करती है। 

मसौदा नीति पर 31 दिसंबर, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित थीं।

 

कृषि

कैबिनेट ने जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लिए बागवानी योजना को जारी रखने को मंजूरी दी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने 2021-22 तक जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में बागवानी विकास के लिए प्रधानमंत्री के विकास पैकेज को जारी रखना मंजूर किया।  [49] इस योजना को 2016 में जम्मू एवं कश्मीर राज्य में नष्ट हुए बागवानी क्षेत्रों सहित बागवानी के विकास के लिए मंजूर किया गया था। योजना जम्मू और कश्मीर को विशेष लाभ प्रदान करती है ताकि सेबों की विशेष किस्मों के पौधों को आयात किया जा सके तथा उत्पादकता बढ़ाने की तकनीक के लिए अतिरिक्त सहायता दी जा सके। इससे पूर्व इस योजना के कार्यान्वयन को 2018-19 तक के लिए मंजूर किया गया था। इसे 2021-22 तक तीन वर्षों के लिए विस्तार दिया गया है और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुमोदन के साथ इसे एक वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। 

योजना के लिए 500 करोड़ रुपए के परिव्यय को मंजूरी दी गई है। इसमें 40 करोड़ रुपए लद्दाख और 460 करोड़ रुपए जम्मू एवं कश्मीर के लिए निर्धारित हैं।

नेशनल फिशरीज़ डेवलपमेंट बोर्ड बिल का मसौदा जारी

Rohin Garg (rohin@prsindia.org)

मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने नेशनल फिशरीज़ डेवलपमेंट बोर्ड (एनएफडीबी) बिल के मसौदे को जारी किया। [50] 2006 में एनएफडीबी को हैदराबाद, तेलंगाना में आंध्र प्रदेश सोसायटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 2001 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया था। यह देश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने और समग्र तरीके से मत्स्य विकास में समन्वय करने का प्रयास करता है। मसौदा बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • एनएफडीबी का पुनर्गठनमसौदा बिल एनएफडीबी को बॉडी कॉरपोरेट के तौर पर गठित करता है और इसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करता है। इसके अतिरिक्त कुछ मौजूदा संस्थानों के एसेट्स, देनदारियों और दूसरे अधिकारों एवं बाध्यताओं को एनडीएफबी में हस्तांतरित करता है। ये संस्थान निम्नलिखित हैं: (iनेशनल फ्रेशवॉटर फिश ब्रूड बैंक, ओड़िशा, (iiनॉर्थ ईस्टर्न रीजनल सेंटर, गुवाहाटी, और (iiiएनएफडीबी का मूलपालेम साइट। ये संस्थान एनएफडीबी के सबसिडियरी यूनिट्स बने रहेंगे।
  • बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्सएनएफडीबी को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स चलाएंगे। बोर्ड में निम्नलिखित शामिल होंगे (iएनएफडीबी के चीफ एग्जीक्यूटिव (बोर्ड का चेयरपर्सन), (ii) ज्वाइंट सेक्रेटरी फिशरीज़ विभाग, (iii) राज्य फिशरीज़ विभागों के सचिवों में से सात डायरेक्टर, और (iv) इस विषय के दो विशेषज्ञ। 
  • एनएफडीबी के कार्यएनएफडीबी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iफिशरीज़ और एक्वाकल्चर के विकास की योजना बनाना और उसे बढ़ावा देना, (iiफिशरीज़ के निरंतर विकास हेतु केंद्र सरकार की मंजूरी से योजनाएं बनाना, (iiiफिशरीज़ के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देना, (ivस्टेकहोल्डर्स के प्रशिक्षण और दक्षता विकास को सहज बनाना, और (vकेंद्र सरकार को रेगुलेटरी उपायों के संबंध में सहायता देना।
  • वित्त: एनएफडीबी एक फंड बनाएगा जिसमें उसके मौजूदा उपक्रमों के ट्रांसफर से प्राप्त होने वाली राशि, उसकी गतिविधियों एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाले शुल्क को जमा किया जाएगा। एनएफडीबी के खातों को भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट किया जाएगा। 

बिल के मसौदे पर 5 जनवरी. 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

पर्यावरण और वन

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

कैग ने पर्यावरण पर खनन के प्रभाव और कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा उसके शमन का आकलन किया

भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने 11 दिसंबर, 2019 को पर्यावरण पर खनन के प्रभाव तथा कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों द्वारा उसके शमन के आकलन पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [51] मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वायु प्रदूषण: कैग ने कहा कि जिन 28 खदानों का अध्ययन किया गया था, उनमें से 12 खदानों में निरंतर एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों का पालन नहीं किया गया था।
  • जल प्रदूषण: कैग ने कहा कि 2013-18 के दौरान जिन 28 खदानों का अध्ययन किया गया, उनमें से आठ में प्रदूषक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स की निर्धारित सीमा से अधिक थे। इसके अतिरिक्त कई खदानें केंद्रीय भूजल अथॉरिटी से नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट हासिल किए बिना अपने कामकाज के लिए भूजल का इस्तेमाल कर रही थीं।
  • पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली: 2006 में राष्ट्रीय पर्यावरण नीति (एनईपी) तैयार की गई थी और इसमें सभी संबंधित केंद्रीय, राज्यीय और स्थानीय निकायों से अपेक्षा की गई थी कि वे एनईपी के अनुकूल पर्यावरणीय संरक्षण कार्य योजनाएं तैयार करें। हालांकि सीआईएल ने अपनी मूल पर्यावरणीय नीति में संशोधन किया और 2012 में व्यापक पर्यावरणीय नीति बनाई। कैग ने कहा कि सीआईएल की सात में से छह कोयला उत्पादक सहायिकाओं में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा मंजूर पर्यावरण नीति लागू नहीं थी, जैसा कि मंत्रालय ने निर्देश दिया था। उसने सुझाव दिया कि कोयला क्षेत्र की सभी कंपनियों को अपने संबंधित बोर्ड्स द्वारा मंजूर पर्यावरण नीति लागू करनी चाहिए।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए रेगुलेशंस का पालन: कैग ने कहा कि अप्रैल 1946 से जुलाई 2009 के बीच बंद होने वाली 35 खदानों के पास सीआईएल अपेक्षित माइन क्लोजर स्टेटस रिपोर्ट नहीं थी। मार्च, 2018 तक 16 इकाइयां वैध पर्यावरणीय दस्तावेज के बिना परिचालित हो रही थीं।
  • अन्य सुझाव: कैग ने कुछ अन्य सुझाव भी दिए जैसे: (i) सहायक कंपनियों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों से संबंधित सभी पूंजीगत कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए, और (ii) पर्यावरणीय लाभों को बढ़ाने के लिए सोलर पावर प्रॉजेक्ट्स के कार्यान्वयन में सुधार करना चाहिए।

पीआरएस रिपोर्ट के सारांश के लिए कृपया  देखें

भारत में वन क्षेत्र की स्थिति, 2019 नामक रिपोर्ट जारी की गई

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारत में वन क्षेत्र की स्थिति, 2019 पर एक रिपोर्ट जारी की। [52] रिपोर्ट में देश में वन और वृक्ष क्षेत्रों का विवरण दिया गया है। रिपोर्ट में निम्न मुख्य निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए हैं:

  • देश में कुल वन क्षेत्र भौगोलिक क्षेत्र का 21.7हैं। कुल वृक्ष क्षेत्र भौगोलिक क्षेत्र का 2.9हैं। 
  • 2017 के पूर्व आकलन की तुलना में वन क्षेत्र में 0.6और वृक्ष क्षेत्र में 1.3की वृद्धि हुई है। पिछले आकलन की तुलना में मैनग्रोव क्षेत्र भी 1.1बढ़ा है।
  • देश में वनों के औसत वार्षिक उत्पादन की तुलना में जंगलों के आस-पास रहने वाले ग्रामीणों द्वारा हर साल लगभग 7% लकड़ियां काटी जाती हैं।  
  • देश के लगभग 21.4वन क्षेत्र में आग लगने की अत्यधिक आशंका है। 

तालिका 2 में 2019 में भारत में वन क्षेत्र को प्रदर्शित किया गया है। 

तालिका 2: भारत में वन क्षेत्र (2019) 

श्रेणी

क्षेत्र (वर्ग किमी)

% क्षेत्र

अत्यधिक घने जंगल

99,278

3.02%

औसत दर्जे के घने जंगल

3,08,472

9.38%

खुले जंगल

3,04,499

9.26%

कुल वन क्षेत्र

7,12,249

21.67%

वृक्ष कवर

95,027

2.89%

गैर वन और झाड़ियां

24,80,193

75.44%

कुल भौगोलिक क्षेत्र 

32,87,469

100.00%

NoteForest area covers Mangrove cover.

SourcesState of Forest Report, 2019; PRS

 

जल शक्ति

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

कैबिनेट ने अटल भूजल योजना को मंजूरी दी 

केंद्रीय कैबिनेट ने अटल भूजल योजना को मंजूरी दी जिसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के जरिए भूजल प्रबंधन में सुधार करना है। [53]  यह योजना सात राज्यों के कुछ चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में लागू होगी। ये राज्य हैं गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश। इसे पांच वर्षों की अवधि (2020-21 से 2024-25) के लिए लागू किया जाएगा। 

केंद्र सरकार योजना के अंतर्गत 6,000 करोड़ रुपए का कुल अनुदान प्रदान करेगी। इसमें से 50विश्व बैंक द्वारा दिया जाएगा, जिसे केंद्र सरकार चुकाएगी। शेष 50नियमित बजटीय सहयोग द्वारा केंद्रीय सहायता के रूप में होगा।

योजना के दो प्रमुख घटक हैं:

  • संस्थागत मजबूतीसतत भूजल प्रबंधन के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसमें मॉनिटरिंग नेटवर्क्स में सुधार, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण जैसे उपायों के जरिए उपलब्ध भूजल का प्रभावी उपयोग और क्षमता निर्माण शामिल हैं।
  • प्रोत्साहन: भूजल प्रबंधन में सुधार करने हेतु राज्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इनमें डेटा वितरण, जल सुरक्षा योजनाओं की तैयारी (विभिन्न मौजूदा/नई योजनाओं के कन्वर्जेंस के जरिए) और प्रबंधन संबंधी कार्यक्रमों को लागू करना शामिल है।  

जल जीवन मिशन के लिए ऑपरेशनल दिशानिर्देश जारी

जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन के लिए ऑपरेशनल दिशानिर्देश जारी किए। [54]  इस मिशन को अगस्त, 2019 में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी ताकि 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर को घर में ही चालू नल का कनेक्शन प्रदान किया जा सके।54  वर्तमान में देश के 17.9 करोड़ ग्रामीण घरों में से लगभग 14.6 करोड़ (82%) घरों में नल का कनेक्शन नहीं है।54  दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • संस्थागत ढांचामिशन में चार स्तरीय संस्थागत ढांचा बनाने के लिए कुछ मौजूदा और नई योजनाओं को समाहित किया गया है(i) केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, (ii) राज्य स्तर पर राज्य जल और सैनिटेशन मिशन, (iii) जिला स्तर पर जिला जल और सैनिटेशन मिशन, और (ivग्रामीण स्तर पर ग्राम पंचायत और/या उसकी उप समितियां। दिशानिर्देश विभिन्न स्तरों पर कार्य करने वाले विभिन्न निकायों को अधिकार, कार्य और उनके संरचना के लिए एक ढांचा प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए ग्राम पंचायत ग्रामीण स्तर की संरचना की योजना, डिजाइन बनाने, उनके कार्यान्वयन और परिचालन एवं रखरखाव में मदद देंगी।
  • फंडिंगमिशन की कुल लागत 3.6 लाख करोड़ रुपए अनुमानित है। इसमें से केंद्र का हिस्सा लगभग 2.1 लाख करोड़ रुपए है। हिमालयी एवं पूर्वोत्त राज्यों के लिए फंड शेयरिंग पैटर्न 90:10 का होगा, दूसरे राज्यों के लिए 50:50 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100होगा। यह प्रस्तावित किया गया है कि जलापूर्ति की संरचना के लिए 10पूंजी योगदान गांव से होना चाहिए। पहाड़ी और वन क्षेत्रों और 50से अधिक वाली एससी/एसटी जनसंख्या वाले गांवों के लिए यह 5होना चाहिए।
  • कार्यान्वयनप्रत्येक गांव को एक ग्राम कार्य योजना बनानी होती है जिसमें निम्नलिखित घटक होंगे(i) जल स्रोत और उसका रखरखाव, (ii) जल आपूर्ति, और (iii) धूसर जल (नहाने और धोने जैसे कार्यों में इस्तेमाल होने वाला पानी) प्रबंधन। इन योजनाओं को जिला और राज्य स्तर पर एकीकृत किया जाएगा। इससे क्षेत्रीय ग्रिड, थोक जलापूर्ति और वितरण योजनाओं जैसे प्रॉजेक्ट्स को समग्र दृष्टिकोण मिलेगा।
  • निरीक्षणमिशन की भौतिक और वित्तीय प्रगति का निरीक्षण एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा किया जाएगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग और स्थानीय समुदाय द्वारा पानी की गुणवत्ता की निगरानी और जांच का प्रस्ताव है।

 

बिजली

Saket Surya (saket@prsindia.org)

विकेंद्रित सोलर पावर प्लांट्स के विकास हेतु दिशानिर्देश जारी

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने विकेंद्रित सोलर पावर प्लांट्स के विकास हेतु दिशानिर्देश जारी किए। [55] ये दिशा-निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत सोलर पावर प्रॉजेक्ट्स से वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा सोलर पावर की खरीद के लिए लागू होंगे। यह सोलर पावर के उपयोग को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते और विश्वसनीय सोलर पावर की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • एप्लीकेबिलिटी: ये दिशानिर्देश उन विकेंद्रित प्लांट्स से डिस्कॉम्स द्वारा सोलर पावर खरीदने पर लागू होंगे: (iजिनकी क्षमता 2 मेगावॉट से ज्यादा है और जो 66/11 किलोवॉट और उससे अधिक की रेटिंग वाले वितरण सब-स्टेशंस से कनेक्टेड हैं, और (iiजिनकी क्षमता 2 मेगावॉट तक है, और जोकि 33/11 किलोवॉट और उससे अधिक की रेटिंग वाले वितरण सब-स्टेशंस से कनेक्टेड हैं। ऐसे प्रॉजेक्ट्स किसी व्यक्ति, सहकारी संघ या कंपनी द्वारा इंस्टॉल किए जा सकते हैं।
  • उत्पादकों के चयन की प्रक्रियाडिस्कॉम्स कुछ कारकों के आधार पर सब-स्टेशनों की सोलर पावर क्षमता को चिन्हित करेंगे, जैसे दिन के समय औसत लोड की जरूरत और तकनीक व्यावहारिकता। वे बिल्ड ओन और ऑपरेट बेसिस पर सोलर पावर प्लांट्स के विकास के लिए एक खुली प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी प्रक्रिया संचालित करेंगे।
  • पावर परचेज एग्रीमेंटडिस्कॉम और सोलर पावर उत्पादक 25 साल की अवधि के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट करेंगे। उत्पादक को समझौते की तारीख से नौ महीने के भीतर प्लांट को चालू करना होगा, जहां डिस्कॉम द्वारा भूमि और कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही हो। अन्य मामलों में समय सीमा 12 महीने है। यदि न्यूनतम उत्पादन में कमी होती है तो उत्पादक को डिस्कॉम को मुआवजा देना होगा, जैसा कि पावर परचेज एग्रीमेंट में सहमति दी गई हो। सभी सोलर पावर प्लांट्स को ग्रिड नियमों का अनुपालन करना होगा।
  • समन्वय एजेंसी: राज्य की नोडल एजेंसी डिस्कॉम्स के साथ समन्वय करेगी और जरूरी मंजूरियां तथा प्रॉजेक्ट के विकास में उत्पादक की मदद करेगी।

शक्ति नीति के अंतर्गत अल्पावधि के कोल लिंकेज की नीलामी की प्रणाली जारी 

ऊर्जा मंत्रालय ने जुलाई 2018 में स्ट्रेस्ड थर्मल पावर एसेट्स से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए एक उच्च स्तरीय एम्पावर्ड कमिटी का गठन किया था। [56] केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2019 में कमिटी के कुछ सुझावों को मंजूरी दी। कमिटी के सुझावों में से एक पावर प्लांट्स को अल्पावधि के कोल लिंकेज प्रदान करना था जिसके पास पावर परचेज़ एग्रीमेंट्स (पीपीए) नहीं हों। ये अल्पावधि के लिंकेज शक्ति नीति के अंतर्गत प्रदान किया जाएगा। शक्ति नीति थर्मल पावर प्लांट्स के बीच कोयले के आबंटन को पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण तरीके से प्रदान करने का प्रयास करती है। मंत्रालय ने इस तरह के अल्पावधि के लिंकेज की नीलामी के लिए कार्यप्रणाली जारी की। [57]  इस कार्यप्रणाली की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पात्रता: कैप्टिव पावर प्लांटों को छोड़कर सभी पावर प्लांट्सजिनकी कम से कम 50% अनटाइड क्षमता (पीपीए के बिना उत्पादन क्षमता) है, अल्पावधि के लिंकेज के लिए नीलामी में भाग लेने के लिए पात्र होंगे।
  • लिंकेज की अवधि: पावर प्लांट तीन महीने की अवधि के लिए कोल लिंकेज का उपभोग कर सकता है। 
  • नीलामी का समय: कोल लिंकेज की नीलामी हर तीन महीने में एक बार की जाएगी। इस संबंध में कोयला कंपनियां एक वार्षिक कैलेंडर छापेंगी।
  • नीलामी की प्रक्रिया: कोयला कंपनी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी प्रक्रिया संचालित करेगी। नीलामी की बोली में कोयले की अधिसूचित कीमत के अतिरिक्त एक प्रीमियम शामिल होगा। 
  • बिजली के उपयोग की शर्तें: इन कोयला लिंकेज से उत्पन्न बिजली को निम्नलिखित में बेचना होगा(iपावर एक्सचेंज के जरिए डे-अहेड बाजार में और (iiडिस्कवरी ऑफ एफीशियंट एनर्जी प्राइज (दीप) पोर्टल पर पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के जरिए अल्पावधि में। दीप पोर्टल वितरण कंपनियों द्वारा बिजली की अल्पावधि की सप्लाई की खरीद के लिए एक ई-बिडिंग और ई-रिवर्स नीलामी पोर्टल है।

 

स्टील                                     

Saket Surya (saket@prsindia.org)

स्टील क्षेत्र में ग्रीनफील्ड निवेश को बढ़ावा देने वाली नीति का मसौदा प्रकाशित 

स्टील मंत्रालय ने नए स्टील प्लांट्स को बढ़ावा देने वाली नीति का मसौदा प्रकाशित किया। [58]  मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि 2424-25 तक घरेलू स्टील की मांग को पूरा करने के लिए प्रति वर्ष स्टील उत्पादन की 25-30 मिलियन टन की अतिरिक्त क्षमता की जरूरत है। इसके लिए 1-1.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश के साथ नए प्लांट्स (ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट) स्थापित करने की आवश्यकता होगी।

मसौदा नीति नए प्रॉजेक्ट्स को स्थापित करने की मुख्य चुनौतियों को हल करने का प्रयास करती हैजैसे: (iभूमि की उपलब्धता(iiप्रतिस्पर्धी मूल्य पर लौह अयस्क की दीर्घकालिक उपलब्धता(iiiसांविधिक मंजूरियां जल्द से जल्द लेना, और (ivबड़े निवेश के लिए प्रोत्साहन। मसौदा नीति की मुख्य विशेषताएं हैं:

ऑपरेटिंग मॉडल: मसौदा नीति नए प्रॉजेक्ट्स के लिए भूमि और लौह अयस्क खदानें प्रदान करने हेतु निम्नलिखित मॉडल प्रदान करती है:

  1. स्टील सीपीएसईज़ से मददस्टील क्षेत्र के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसईज़) के पास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि और इनके अंतर्गत आने वाली खदानों से लौह अयस्क की सप्लाई इस उद्देश्य के लिए की जा सकती है।
  2. राज्य सरकार की मदद: राज्य सरकारें प्रॉजेक्ट के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करने के लिए जिम्मेदार होंगी। खदानों को निम्नलिखित विकल्पों के माध्यम से प्रदान किया जा सकता है: (iकिसी खदान की प्रत्यक्ष नीलामी(iiएक निर्दिष्ट खदान एक सीपीएसई/राज्य पीएसई के लिए रिजर्व हो सकती है और फिर प्रॉजेक्ट हेतु निर्दिष्ट खदान के लिए दीर्घावधि का (15 से अधिक वर्षों के लिए) लिंकेज प्रदान किया जा सकता है, या (iiiएक निर्दिष्ट खदान राज्य सरकार की कंपनी के लिए रिजर्व हो सकती है और प्रॉजेक्ट के ओनर को कंपनी में 26% इक्विटी दी जा सकती है। भूमि और खदानों के स्वामित्व को स्थानांतरित करने के लिए एक संयुक्त नीलामी आयोजित की जाएगी। 

मंत्रालय की भूमिका: नीति के मसौदे पर स्टील मंत्रालय की मुख्य जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • प्रॉजेक्ट्स की समीक्षा करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन और उन्हें अनुमोदन और ढांचागत समर्थन देना,
  • पर्यावरणीय और वन मंजूरी के लिए सिंगल विंडो प्रदान करना,
  • इन प्रॉजेक्ट्स के लिए राज्य की औद्योगिक नीतियों और केंद्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत प्रोत्साहन देना,
  • निर्दिष्ट समयसीमा के भीतर ग्रीनफ़ील्ड प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सेल की स्थापनाऔर
  • रेलवेसड़क और स्लरी पाइपलाइन जैसे लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए प्रॉजेक्ट्स को प्राथमिकता देना।

मसौदा नीति पर 1 जनवरी, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। [59]

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कैग ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का प्रदर्शन ऑडिट सौंपा

भारतीय नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट सौंपी। [60]  पीएमयूवाई योजना को मई 2016 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल) परिवारों की महिलाओं को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) कनेक्शन प्रदान करना है। रिपोर्ट में मई 2016 से दिसंबर 2018 के बीच योजना के कार्यान्वयन को ऑडिट किया गया है। रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

  • लाभार्थियों को चिन्हित करना: योजना के अंतर्गत कनेक्शन लेने के लिए पात्र लाभार्थियों (बीपीएल परिवारों को महिलाओं को) को कुछ दस्तावेज प्रदान करने होते हैं, जैसे आवास के पते का प्रूफ, आधार नंबर, और बैंक खाते का विवरण। कैग ने कहा कि योजना के अंतर्गत कुल कनेक्शंस में से 42% सिर्फ लाभार्थी के आधार नंबर के आधार पर दिए गए हैं। रिपोर्ट में पता चला है कि लाभार्थियों की पहचान के कई बेमेल मामले सामने आए हैं। उसने सुझाव दिया कि एलपीजी वितरकों को डेटा सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी जैसे उपाय करने चाहिए ताकि अपात्र लोगों को कनेक्शन न मिले।
  • एलपीजी का निरंतर उपयोग: कैग ने कहा कि योजना के अंतर्गत 7.2 करोड़ कनेक्शन दिए गए थे, जबकि लक्ष्य मार्च 2020 तक आठ करोड़ का था (90%)। हालांकि लाभार्थियों के लिए औसत वार्षिक रीफिल की खपत कम बनी हुई है (जनवरी 2019 तक 3.18 करोड़ लाभार्थियों पर औसत वार्षिक रीफिल खपत, 3.21 रीफिल प्रति वर्ष है)। 
  • एलपीजी वितरक लाभार्थियों को यह विकल्प देते हैं कि वे कुकिंग स्टोव और पहले रीफिल के खर्च को कवर करने के लिए लोन ले सकती हैं। कैग ने कहा कि रीफिल की कम खपत ने वितरकों के लिए 1,235 करोड़ रुपए मूल्य की लोन रिकवरी को भी बाधित किया है। उसने सुझाव दिया कि चूंकि कनेक्शन देने का लक्ष्य व्यापक रूप से हासिल किया जा चुका है, योजना को अब उसके निरंतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • इंस्टॉलेशन में देरी और सिलिंडरों का डायवर्जन: कैग ने सिलिंडरों के इंस्टॉलेशन में देरी के कई मामलों का पता लगाया। इसके अतिरिक्त ऐसे मामले भी देखे गए जहां वार्षिक उपभोग 12 सिलिंडर से अधिक था। कैग ने कहा कि यह घरेलू सिलिंडरों के कमर्शियल इस्तेमाल की ओर संकेत देता है और यह सुझाव दिया कि अधिक उपभोग के मामलों की निरंतर समीक्षा की जानी चाहिए ताकि डायवर्जन को रोका जा सके। 

रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें

 

संचार

Saket Surya (saket@prsindia.org)

ट्राई ने घरेलू कॉल्स पर टर्मिनेशन चार्ज को समाप्त करने की तारीख बढ़ाई 

टर्मिनेशन चार्ज वह थोक शुल्क होता है जोकि ओरिजिनेटिंग सबस्क्राइबर के सर्विस प्रोवाइडर द्वारा उस सर्विस प्रोवाइडर को प्रदान किया जाता है जिसके नेटवर्क में कॉल टर्मिनेट होती है। मौजूदा रेगुलेशन के हिसाब से वायरलेस से वायरलेस घरेलू कॉल का टर्मिनेशन चार्ज 0.06 रुपए प्रति मिनट है। [61]   इस शुल्क को 1 जनवरी, 2020 से समाप्त होना था।61  ट्राई ने इसे समाप्त करने की अंतिम तिथि एक वर्ष यानी 1 जनवरी, 2021 तक बढ़ा दी है। [62] 

ट्राई ने टेलीकॉम क्षेत्र में टैरिफ संबंधी विषयों पर सुझाव मांगे 

ट्राई ने टेलीकॉम क्षेत्र में टैरिफ से संबंधी विषयों पर एक परामर्श पत्र जारी किया है। [63]  टैरिफ का वर्तमान ढांचा टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को विभिन्न टेलीकॉम सेवाओं के लिए मौजूदा बाजार की स्थितियों के अनुसार शुल्क तय करने की आजादी देता है। ट्राई केवल कुछ टैरिफ्स को निर्दिष्ट करता है जैसे कि नेशनल रोमिंगग्रामीण टेलीफोनी और मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी शुल्क। दूरसंचार क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को देखते हुए कई प्रतिनिधिमंडल भी ट्राई के पास फ्लोर प्राइज को तय करने के संबंध में मिल चुके हैं।  

ट्राई ने कहा कि बाजार की स्थितियों को देखते हुए टैरिफ तय करने की आजादी और लचीलेपन ने क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को सहज बनाया है। [64] हालांकि टेलीकॉम क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सेवा सुनिश्चित करने और तकनीकी परिवर्तनों को अपनाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है, इसीलिए क्षेत्र की अच्छी वित्तीय स्थिति को सुनिश्चित करना भी जरूरी है।64  परामर्श पत्र में  निम्नलिखित मुद्दों पर टिप्पणियां आमंत्रित हैं

  • मौजूदा चरण पर टैरिफ तय करने हेतु रेगुलेटरी हस्तक्षेप की जरूरत, 
  • कई टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा टैरिफ बढ़ाने के बावजूद फ्लोर प्राइज तय करने की जरूरत,
  • मोबाइल डेटा सर्विस और वॉयस कॉल जैसी विभिन्न सेवाओं और रीटेल कस्टमर्स और कॉरपोरेट जैसे विभिन्न ग्राहक सेगमेंट्स के लिए फ्लोर प्राइज तय करने की जरूरत, 
  • फ्लोर प्राइज तय करने की प्रणाली और मानदंड,
  • उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए प्राइज़ सीलिंग की जरूरत (अगर फ्लोर प्राइज पर विचार किया जाता है), और
  • सीलिंग प्राइज तय करने की प्रणाली और मानदंड।

परामर्श पत्र पर 17 जनवरी, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

युवा मामले और खेल

Anya Bharat Ram ( anya@prsindia.org)

स्टैंडिंग कमिटी ने खेलो इंडिया योजना पर रिपोर्ट सौंपी

मानव संसाधन विकास संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयरडॉ. सत्यनारायण जटिया) ने खेलो इंडिया योजना पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [65]  इस योजना का उद्देश्य भारत में खेल की संस्कृति को पुनर्जीवित करना और खेल क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • फंड्स का उपयोगकमिटी ने गौर किया कि 2018-19 और 2019-20 के दौरान खेलो इंडिया योजना का वास्तविक व्यय क्रमशः 324 करोड़ रुपए और 308 करोड़ रुपए था। हालांकि अनुमानित आबंटन क्रमशः 520 करोड़ रुपए और 500 करोड़ रुपए था। खेल विभाग ने योजना के कार्यान्वयन की बाधाओं में अपर्याप्त फंड्स, मानव संसाधन और खेल संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर्स को शामिल किया था। कमिटी ने कहा कि इन बाधाओं को दूर करने के लिए बजट में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। कमिटी ने सुझाव दिया कि विभाग को पहले उसे आबंटित धनराशि को इस्तेमाल करना चाहिए और फिर अन्य संसाधन जुटाने चाहिए। अन्य संसाधनों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं: (i) निजी और कॉरपोरेट क्षेत्र से फंड्स, (iiखेल संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी, और (iii) सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के सदस्यों के साथ योजना की कन्वर्जिंग। इस योजना के जरिए सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकासपरक कार्य कर पाते हैं।
  • कोच की कमीकमिटी ने कहा कि विभिन्न कैडर्स में कोचेज़ के 1,524 पद हैं। इस समय इनमें से 980 पद भरे हुए हैं, जबकि 544 कोचेज़ की कमी है। उसने सुझाव दिया कि कोचेज़ के रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने में मदद के लिए विभाग को निजी खेल अकादमियां चलाने वाले कोचेज़ से सहयोग करना चाहिए।  
  • खेल के इंफ्रास्ट्रक्चरकमिटी ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए विभाग राज्यों को अनुदान देता है। कमिटी ने गौर किया कि केवल 13 राज्यों को अनुदान दिए गए हैं। उसने कहा कि कुछ राज्यों, जैसे बिहार, झारखंड और ओड़िशा को कोई अनुदान नहीं मिला। कमिटी ने सुझाव दिया कि मंत्रालय को इन राज्यों और आदिवासी क्षेत्रों में खेल संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहिए जहां खेल प्रतिभाएं मौजूद हो सकती हैं ताकि सभी राज्यों में एक समान खेल इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित हो।
  • शिक्षाकमिटी ने कहा कि 2018-19 में प्रशिक्षण के लिए चुने गए 1,518 खिलाड़ियों में से केवल 625 ने एक्रेडेटेड अकादमियों में दाखिला लिया और 893 ने ड्रॉप किया। कमिटी ने कहा कि ड्रॉप-आउट्स का मुख्य कारण यह था कि अकादमियों में एकीकृत शिक्षा का अभाव था। उसने सुझाव दिया कि अकादमियों के पास शिक्षण और छात्रावास संबंधी सुविधाएं होनी चाहिए ताकि प्रशिक्षु अपनी बुनियादी शिक्षा पूरी कर सकें। इसके अतिरिक्त मौजूदा स्कूलों, कॉलेजों और छात्रावास वाली अकादमियों में ट्रेनिंग स्पेस को चिन्हित किया जाना चाहिए। इन्हें खेलो इंडिया योजना के साथ संबद्ध किया जा सकता है।

पीआरएस रिपोर्ट के सारांश के लिए कृपया  देखें।

 

[2] The Appropriation (No 3Bill, 2019, Ministry of Finance and Corporate Affairs,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/367_2019_LS_Eng.pdf.

[4] Bengal Eastern Frontier Regulation, 1873

[5] S.O4433(E), Gazette of India, Ministry of Home Affairs, December 11, 2019,  http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/214593.pdf.  

[6] “Extention of Inner Line to cover the entire District of Dimapur, Home DepartmentPolitical Branch, Government of Nagaland, December 9, 2019,  https://www.nagaland.gov.in/Nagaland/NotificationsAndAlerts/ILPDimapur.pdf

[7] The Arms (AmendmentBill, 2019, Lok Sabha website,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/368_LS_Eng_2019.pdf.

[8] The Special Protection Group (AmendmentBill, 2019, as passed by Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, November 27, 2019,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/365-C_2019_LS_Eng.pdf.

[10] “Cabinet approves conduct of Census of India 2021 and updation of National Population Register, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, December 24, 2019.

[11] Citizenship (Registration of Citizenship and Issue of National Identity CardsRules, 2003,  http://censusindia.gov.in/2011-Act&Rules/notifications/citizenship_rules2003.pdf.

[12] “Introduction to NPR, Census of India,  http://censusindia.gov.in/2011-Common/IntroductionToNpr.html

[13] S.O.4700(E), Gazette of India, Ministry of Home Affairs, December 30, 2019,  http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/214967.pdf.

[14] “Fifth Bi-Monthly Monetary Policy Statement 2019-20, Reserve Bank of India, December 6, 2019,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR135049CE0509E92A44F4B7EA2FDC4A9C3340.PDF.

[15] “Developments in Indias Balance of Payments during the Second Quarter (July-Septemberof 2019-20, Reserve Bank of India, December 31, 2019,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR1556C8DD8A3C4F6C422785A57B59BCD555EF.PDF.

[16] The Taxation Laws (AmendmentBill, 2019, Ministry of Finance, December 2, 2019,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/362-C_2019_LS_Eng.pdf.

[17] The International Financial Services Authority Bill, 2019, Ministry of Finance, November 25, 2019,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/363_C_2019_LS_E.pdf.

[18] “The Insolvency and Bankruptcy Code (AmendmentOrdinance, 2019, Ministry of Law and Justice, The Gazette of India, December 28, 2019,  http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/214957.pdf.

[19] ‘Cabinet approves "Partial Credit Guarantee Schemefor purchase of high-rated pooled assets from financially sound NBFCs/HFCs by PSBs, Press Information Bureau, Ministry of Finance, December 11, 2019

[20] ‘Government issues Scheme to provide a one-time partial credit guarantee to PSBs for purchase of pooled assets of financially sound NBFCs, Press Information Bureau, Ministry of Finance, August 13, 2019

[21] Guidelines on constituting Board of Management in Primary (UrbanCooperative Banks, Reserve Bank of India, December 31, 2019,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR156553000914684A448E8ADF26ACEDBDAFFF.PDF

[22] ‘Cabinet approves the proposal for increase in authorised capital and equity support to India Infrastructure Finance Company Limited (IIFCL)’, Press Information Bureau, Ministry of Finance, December 11, 2019.

[23] RBI releases Guidelines for on tap’ Licensing of Small Finance Banks in the Private Sector, Press Releases, Reserve Bank of India, December 5, 2019,  https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=48807.

[24] RBI releases Guidelines for Licensing of Small Finance Banks in the Private Sector, Press Releases, Reserve Bank of India, November 27, 2014,  https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=32614.

[25] Facing fire on quality of data, Govt gets critics on board reform panel, The Indian Express, December 28, 2019 https://indianexpress.com/article/india/facing-fire-on-quality-of-data-govt-gets-critics-on-board-reform-panel-6188244/

[26] “Govt sets up committee to bring consistency among economic indices, Mint, December 28, 2019,   https://www.livemint.com/news/india/govt-sets-up-committee-to-bring-consistency-among-economic-indices-11577521260660.html.

[27] The Personal Data Protection Bill, Ministry of Electronics and Information Technology, December 11, 2019,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/373_2019_LS_Eng.pdf.

[29] The Constitution (One Hundred and Twenty-Sixth AmendmentBill, 2019, Ministry of Law and Justice, December 12, 2019,  http://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/The%20Constitution%20%28One%20Hundred%20and%20Twenty-Sixth%20Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[30] Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens (AmendmentBill, 2019, Ministry of Social Justice and Empowerment, December 11, 2019,  http://prsindia.org/billtrack/maintenance-and-welfare-parents-and-senior-citizens-amendment-bill-2019

[31] Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007,  http://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/1182337322_The_Senior_Citizen_Bill__2007.pdf

[32] The Prohibition of Electronic Cigarettes (Production, Manufacture, Import, Export, Transport, Sale, Distribution, Storage, and AdvertisementOrdinance, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, as passed by Lok Sabha, November 27, 2019,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/342-C_2019_LS_Eng.pdf.

[33] The Recycling of Ships Bill, 2019, as introduced in Lok Sabha,  http://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/THE%20RECYCLING%20OF%20SHIPS%20BILL%2C%202019.pdf

[34] “Amendments and modifications in the Toll-Operate-Transfer (TOTmodel and securitisation of user fee receipts of NH, NoNH-37012/02/2019-H, Ministry of Road Transport and Highways, December 13, 2019,  https://morth.nic.in/sites/default/files/Circular-on-ToT-13-12-2019.pdf

[35] “Cabinet authorized National Highways Authority of India to monetize public funded national highway projects, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, August 3, 2016.  

[36] Draft amendments in the Central Motor Vehicles Rules, 2019, Ministry of Road Transport and Highways, The Gazette of India, December 13, 2019,  http://164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/draft%20GSR%20923(E)%20dated%2013th%20December%20mass%20emission%20standards%20for%20Quadricycle-%20BS%20VI.pdf.

[37] “Cabinet approves transformational Organisational Restructuring of Indian Railways, Union Cabinet, Press Information Bureau, December 24, 2019,  https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1597352.

[38] The National Capital Territory of Delhi (Recognition of Property Rights of Residents in Unauthorised ColoniesBill, 2019,  https://www.prsindia.org/billtrack/national-capital-territory-delhi-recognition-property-rights-residents-unauthorised

[39] The Central Sanskrit Universities Bill, 2019, Ministry of Human Resource Development,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/372_2019_LS_Eng.pdf.

[40] The Anti-Maritime Piracy Bill, 2019, Ministry of External Affairs, December 9, 2019,  http://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/The%20Anti-Maritime%20Piracy%20Bill%2C%202019.pdf

[41] “Cabinet approves Agreement on Social Security between India and Brazil, Press Information Bureau, Ministry of External Affairs, December 11, 2019

[42] “Social Security Agreement between India and Brazil, Ministry of External Affairs, March 16, 2017,  https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/28182/Social_Security_Agreement_between_India_and_Brazil

[43] “Soliciting suggestions/comments/inputs form the stakeholders on the Draft Registration of Press and Periodicals Bill, 2019, Ministry of Information and Broadcasting, November 25, 2019,  https://mib.gov.in/sites/default/files/Public%20Notice%20%20for%20RPP%20Bill%2C%202019.pdf.

[44] ‘Cabinet approves creation of the post of Chief of Defence Staff in the rank of four star General, Press Information Bureau, Ministry of Defence, December 24, 2019.  

[45] “General Bipin Rawat Appointed as Chief of Defence Staff, Press Release, Ministry of Defence, December 30, 2019  https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1598029.

[46] Group of Ministers Report on reforming the National Security System, Press Information Bureau, May 23, 2001,  http://pibarchive.nic.in/archive/releases98/lyr2001/rmay2001/23052001/r2305200110.html.

[47] First Report, Standing Committee on Agriculture: “The National Institutes of Food Technology, Entrepreneurship and Management Bill, 2019, Lok Sabha, December 3, 2019,  http://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/SCR-%20National%20Institutes%20of%20Food%20Technology%2C%20Entrepreneurship%20and%20Management%20Bill%2C%202019.pdf.

[48] Draft National Food Processing Policy, 2019, Ministry of Food Processing Industries, December 24, 2019,  https://mofpi.nic.in/sites/default/files/draft-nfpp.pdf.

[49] Cabinet approves extension by three years and revision of PMs Development Package for Horticulture in UTs of J&K and Ladakh, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, December 11, 2019.

[50] The Draft National Fisheries Development Board Bill, 2019, Department of Fisheries, Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying, December 18, 2019,  http://dof.gov.in/sites/default/filess/Draft_NFDB_Bill_2019.pdf

[51] Report No12, Comptroller and Auditor General of India, Assessment of Environmental Impact due to Mining Activities and its Mitigation in Coal India Limited and its Subsidiaries, December 11, 2019,  https://cag.gov.in/sites/default/files/audit_report_files/Report_No_12_of_2019_Assessment_of_Environmental_Impact_due_to_Mining_Activities_and_its_Mitigation_in_Coal_India_Limited_and_its_Subsidiaries.pdf.

[52] India State of Forest Report, 2019, Forest Survey of India, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, December 30, 2019,  http://www.fsi.nic.in/forest-report-2019.

[53] “Cabinet approves Atal Bhujal Yojana, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, December 24, 2019.

[54] “Prime Minister releases operational guidelines for the implementation of Jal Jeevan Mission (JJM)”, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, December 25, 2019.

[55] “Guidelines for Development of Decentralised Solar Power Plants, Ministry of New and Renewable Energy, December 13, 2019,  https://mnre.gov.in/sites/default/files/webform/notices/Final%20Guidelines%20for%20Development%20of%20Decentralised%20Solar%20Power%20Plants.pdf.

[56] “Report of the High Level Empowered Committee to Address the issues of Stressed Thermal Power Projects, November, 2018,  https://powermin.nic.in/sites/default/files/webform/notices/20 _Nov_R1_Draft_Report_HLEC_Final_20_Nov.pdf.

[57]  “Methodology for allocation of coal as per provisions

as Para B (viii) (acovering Para B (iiiof SHAKTI Policy of Ministry of Coal amended as per Para 2.(aof HLEC Recommendations, Ministry of Power, December 2, 2019,

https://powermin.nic.in/sites/default/files/webform/notices/Methodology_for_allocation_of_coal_as_per_provisions_of_Para_B.pdf.

[58] “Draft Policy Promotion of Greenfield investments in the steel sector, Ministry of Steel, December, 2019,   https://steel.gov.in/sites/default/files/Draft%20Policy%20on%20Promotion%20of%20Greenfield%20investments%20in%20the%20steel%20sector.pdf.

[59] Public Notice, Draft policy on Promotion of Greenfield investments in the steel sector in India, Ministry of Steel, December, 2019,    https://steel.gov.in/sites/default/files/Public%20Notice_1.pdf.

[60] Report of the Comptroller and Auditor General of India on Pradhan Mantri Ujjwala Yojana, Performance Audit, No14 of 2019, Ministry of Petroleum and Natural Gas, December 11, 2019,  https://cag.gov.in/sites/default/files/audit_report_files/Report_No_14_of_2019_Performance_Audit_of_Pradhan_Mantri_Ujjwala_Yojana_Ministry_of_Petroleum_and_Natural_Gas_0.pdf.

[61] “Consultation Paper on Review of Interconnection Usage Charges, Telecom Regulatory Authority of India, September 18, 2019,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_on_IUC_18092019_0.pdf.

[62] TRAI issues regulations on wireless to wireless domestic call termination charges, Telecom Regulatory Authority of India, December 17, 2019,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/PR_No.124of2019.pdf.

[63]  “Consultation paper on tariff issues of the telecom sector, Telecom Regulatory Authority of India, December 17, 2019,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_17122019_0.pdf.

[64] Information Note to the Press (Press Release No125/2019), Telecom Regulatory Authority of India, December 17, 2019,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/PR_No.125of2019.pdf.

[65] Report no311, Standing Committee on Human Resource Development, Khelo India Scheme, Raja Sabha, December 10, 2019,  https://rajyasabha.nic.in/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/16/123/311_2019_12_21.pdf

 

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