सितंबर 2019

इस अंक की झलकियां

टैक्सेशन कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2019 जारी

घरेलू कंपनियां अगर कुछ कटौतियों का दावा नहीं करतीं तो वे 25% या 30% की मौजूदा टैक्स दर की बजाय 22% की दर का विकल्प चुन सकती हैं। नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के पास 15% की टैक्स दर का विकल्प है।

ई-सिगरेट पर प्रतिबंध अध्यादेश, 2019 जारी

अध्यादेश इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर एक वर्ष तक की कैद हो सकती है और एक लाख रुपए का जुर्माना।

2019-20 की पहली तिमाही में मौजूदा खाता घाटा, जीडीपी का 2%

2018-19 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की तुलना में 2019-20 में इसी अवधि के दौरान मौजूदा खाता घाटा 15.8 बिलियन USD (जीडीपी का 2.3%) से गिरकर 14.3 बिलियन USD (जीडीपी का 2%) हो गया।

फाइनांशियल टेक्नोलॉजी संबंधी मुद्दों पर गठित स्टीयरिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

कमिटी ने उन उभरती हुई तकनीकों पर गौर किया जोकि फाइनांशियल टेक्नोलॉजी के एनेबलर के रूप में काम करती हैं जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी, और फाइनांशियल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के उपाय सुझाए।

आरबीआई ने एमएसएमई को फ्लोटिंग रेट लोन्स हेतु एक्सटर्नल बेंचमार्क को अनिवार्य किया

ये एक्सटर्नल बेंचमार्क रेपो रेट, 3 महीने के ट्रेजरी बिल यील्ड, या फाइनांशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित कोई दूसरे बेंचमार्क मार्केट इंटरेस्ट रेट हो सकते हैं।

सामाजिक सुरक्षा पर ड्राफ्ट कोड, 2019 सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी

ड्राफ्ट सामाजिक सुरक्षा कोड में कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड एक्ट, 1952 सहित सामाजिक सुरक्षा संबंधी आठ कानून शामिल हैं। कोड असंगठित श्रमिकों और गिग वर्कर्स सहित सभी श्रमिकों पर लागू है।

स्वास्थ्यकर्मियों से हिंसा को प्रतिबंधित करने वाला ड्राफ्ट बिल जारी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वास्थ्यकर्मियों से हिंसा और क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों से निपटने के लिए ड्राफ्ट बिल जारी किया।

एनसीएसटी ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने का सुझाव दिया

एनसीएसटी ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने का सुझाव दिया जिसमें जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का प्रावधान है।

नॉन पर्सनल डेटा के रेगुलेशन के अध्ययन हेतु कमिटी ऑफ एक्सपर्ट्स की नियुक्ति

कमिटी नॉन पर्सनल डेटा से संबंधित विभिन्न मुद्दों की जांच करेगी और नॉन पर्सनल डेटा के रेगुलेशन पर सुझाव देगी।

एयरक्राफ्ट नियम, 1937 के ड्राफ्ट संशोधन जारी

ड्राफ्ट संशोधन पायलट्स को लाइसेंस जारी करने की कुछ शर्तों (फ्लाइट टाइम के घंटे) में परिवर्तन और विशिष्ट प्रक्रियाओं के आधार पर एयरक्राफ्ट में वाई-फाई के उपयोग की अनुमति का प्रयास करते हैं।  

कंपनी एक्ट, 2013 और एलएलपी एक्ट, 2008 की समीक्षा के लिए कमिटी का गठन

कमिटी कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत अपराधों की समीक्षा और इस कानून एवं लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट, 2008 के कार्यान्वयन से उठने वाले मुद्दों की जांच करेगी।

कृषि ऋण की समीक्षा हेतु गठित आरबीआई के वर्किंग ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

सुझाव निम्नलिखित हैं: (i) निवेश ऋण की मांग को बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा पूंजीगत व्यय बढ़ाया जाए और (ii) कृषि की व्यवहार्यता में सुधार के लिए नीतियों और सबसिडी की समीक्षा की जाए।

 

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

2019-20 की पहली तिमाही में मौजूदा खाता घाटा जीडीपी के 2% पर

2018-19 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की तुलना में 2019-20 में इसी अवधि में भारत का मौजूदा खाता घाटा (सीएडी) 15.8 बिलियन USD (जीडीपी का 2.3%) से गिरकर 14.3 बिलियन USD (जीडीपी का 2%) हो गया।[1]  पिछली तिमाही, यानी 2018-19 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में सीएडी 4.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) था। सीएडी में वर्ष दर वर्ष गिरावट मुख्य रूप से 2019-20 की पहली तिमाही में 31.9 बिलियन USD की अदृश्य प्राप्तियों (सेवाओं से होने वाली आय) के कारण हुई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में ये प्राप्तियां 29.9 बिलियन USD थीं। 2019-20 की पहली तिमाही में विदेशी मुद्रा कोष बढ़कर 14 बिलियन USD हो गया जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह राशि 11.3 बिलियन USD थी। तालिका 1 में 2019-20 की पहली तिमाही में भुगतान संतुलन प्रदर्शित है।

तालिका 1: 2019-20 की पहली तिमाही, भुगतान संतुलन (बिलियन USD)

 

ति 1

2018-19

ति 4

2018-19

ति 1

2019-20

मौजूदा खाता

-15.8

-4.6

-14.3

पूंजी खाता

4.8

19.3

27.9

भूल चूक- लेनी देनी

0.3

0.4

-0.4

कोष में परिवर्तन

-11.3

14.2

14.0

Sources: Reserve Bank of India; PRS.

 

वित्त

टैक्सेशन कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2019 जारी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

टैक्सेशन कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2019 को जारी किया गया।[2] यह अध्यादेश इनकम टैक्स एक्ट, 1961 और फाइनांस (संख्या 2) एक्ट, 2019 में संशोधन करता है। अध्यादेश की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • घरेलू कंपनियों के लिए इनकम टैक्स की दर: वर्तमान में 400 करोड़ रुपए तक के वार्षिक टर्नओवर वाली घरेलू कंपनियां 25% की दर से इनकम टैक्स चुकाती हैं। दूसरी घरेलू कंपनियों के लिए यह दर 30% है। अध्यादेश में प्रावधान है कि अगर घरेलू कंपनियां इनकम टैक्स एक्ट के अंतर्गत कुछ कटौतियों का दावा नहीं करतीं तो उनके पास 22% की दर से इनकम टैक्स चुकाने का विकल्प है। इनमें निम्नलिखित के लिए प्रदत्त कटौतियां शामिल हैं: (i) स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स के अंतर्गत स्थापित नई यूनिट्स, (ii) अधिसूचित पिछड़े क्षेत्रों में नए संयंत्र या मशीनरी में निवेश करना, (iii) वैज्ञानिक अनुसंधान, कृषि विस्तारीकरण और कौशल विकास के प्रॉजेक्ट्स पर व्यय, (iv) नए संयंत्र या मशीनरी का ह्रास (कुछ मामलों में), और (v) इनकम टैक्स एक्ट के विभिन्न प्रावधान (अध्याय VI-ए के अंतर्गत, नए कर्मचारियों के रोजगार के लिए प्रदत्त कटौतियों को छोड़कर)।
  • नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए इनकम टैक्स की दर: अध्यादेश में प्रावधान है कि अगर नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां एक्ट के अंतर्गत (उपलिखित के अनुसार) कुछ कटौतियों का दावा नहीं करतीं, तो वे 15% की दर से इनकम टैक्स चुकाने का विकल्प चुन सकती हैं। नई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों में ऐसी कंपनियां शामिल हैं जोकि 30 सितंबर, 2019 के बाद बनाई और रजिस्टर की जाएंगी और 1 अप्रैल, 2023 से पहले मैन्यूफैक्चरिंग शुरू कर देंगी। इनमें निम्नलिखित कंपनियां शामिल नहीं होंगी: (i) मौजूदा व्यापार के विभाजन या पुनर्निर्माण से बनी कंपनियां, (ii) मैन्यूफैक्चरिंग के अलावा दूसरे व्यापार में संलग्न, और (iii) भारत में पहले इस्तेमाल होने वाले संयंत्र या मशीनरी का प्रयोग करने वाली कंपनियां (कुछ विशिष्ट शर्तों को छोड़कर)।
  • टैक्स की नई दरों की एप्लिकेबिलिटी: कंपनियां 2019-20 के वित्तीय वर्ष से नई टैक्स दरों (यानी आकलन वर्ष 2020-21) का विकल्प चुन सकती हैं। एक बार विकल्प चुनने के बाद आगे के वर्षों में यही विकल्प लागू होगा।
  • टैक्स की नई दरों पर सरचार्ज: वर्तमान में एक से 10 करोड़ रुपए के बीच की आय वाली घरेलू कंपनियों को टैक्स पर 7% सरचार्ज देना होता है। 10 करोड़ रुपए से अधिक की आय वाली कंपनियों को 12% सरचार्ज देना होता है। अध्यादेश में प्रावधान है कि नई टैक्स दरों (15% या 22%, जो भी लागू हो) को चुनने वाली कंपनियों को संबंधित प्रावधान के अंतर्गत 10% सरचार्ज देना होगा।

अध्यादेश के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

फाइनांशियल टेक्नोलॉजी संबंधी मुद्दों पर गठित स्टीयरिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट जारी की

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

फाइनांशियल टेक्नोलॉजी संबंधी मुद्दों पर गठित स्टीयरिंग कमिटी (चेयर: सुभाष चंद्र गर्ग) ने वित्त मंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी। फाइनांशियल टेक्नोलॉजी से संबंधित रेगुलेशनों को अधिक फ्लेक्सिबल बनाने और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए मार्च 2018 में कमिटी का गठन किया गया था। फाइनांशियल टेक्नोलॉजी, तकनीक आधारित उन व्यापारों को कहते हैं जो वित्तीय संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और उनके साथ सहयोग भी। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • फाइनांशियल टेक्नोलॉजी सेवाओं का विस्तारीकरण: कमिटी ने उन उभरती हुई तकनीकों पर गौर किया जोकि फाइनांशियल टेक्नोलॉजी के एनेबलर के रूप में काम करती हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) डेटा-फोकस्ड टेक्नोलॉजी, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बायोमैट्रिक्स, (ii) ऑपरेशनल एक्सिलेंस वाली टेक्नोलॉजी, जैसे डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और चैटबोट्स, (iii) इंफ्रास्ट्रक्चरल एनेबलर्स, जैसे ओपन एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस, और (iv) फ्रंट-एंड इंटरफेस जैसे गैमिफिकेशन या ऑग्मेंटेड और वर्चुअल रियैलिटी।
  • फाइनांशियल टेक्नोलॉजी के दायरे को बढ़ाने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) साइबर सुरक्षा को मजबूती देने, धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग को नियंत्रित करने के लिए फाइनांशियल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, (ii) भारत में वर्चुअल बैंकिंग की उपयुक्तता की जांच, और (iii) फाइनांशियल इंस्ट्रूमेंट्स की डीमैटीरियलाइजिंग (फिजिकल सर्टिफिकेट्स को इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलना)।
  • फाइनांशियल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत कार्रवाइयां: फाइनांशियल सर्विसेज और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विभाग को ऑटोमेटिंग बैक-एंड प्रक्रियाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग की संभावनाओं को तलाशना चाहिए। इसके अतिरिक्त एमएसएमई मंत्रालय को विभाग और आरबीआई के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि एमएसएमई के लिए व्यापारिक वित्त पोषण हेतु ब्लॉकचेन समाधानों को लागू किया जा सके। सरकार को देश में भूमि रिकॉर्ड्स के आधुनिकीकरण और मानकीकरण का काम करना चाहिए जोकि तीन वर्ष की अवधि में पूरा हो जाए।
  • प्रशासनिक उपाय: कमिटी ने सुझाव दिया कि चूंकि फाइनांशियल टेक्नोलॉजी एक उभरता हुआ क्षेत्र है, इसलिए सरकार को जोखिमों और लाभ की साझा जानकारियों के लिए अन्य देशों के साथ सहयोग करना चाहिए। वित्त क्षेत्र से जुड़े सभी रेगुलेटरों को फाइनांशियल टेक्नोलॉजी पर एक सलाहकारी परिषद की स्थापना करनी चाहिए ताकि उद्योग के विशेषज्ञों को साथ लाया जा सके। इसके अतिरिक्त फाइनांशियल टेक्नोलॉजी पर अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया जाना चाहिए। यह समूह फाइनांशियल टेक्नोलॉजी सर्विसेज को एनेबल करने वाली तकनीकों के कार्यान्वयन की संभावनाएं तलाशेगा।
  • कमिटी ने कहा कि फाइनांशियल टेक्नोलॉजी उद्योग के उभरने से निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित ड्राफ्ट डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2018 का फाइनांशियल टेक्नोलॉजी क्षेत्र के विकास पर दीर्घावधि में बहुत हैं। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित ड्राफ्ट डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2018 का फाइनांशियल टेक्नोलॉजी क्षेत्र के विकास पर दीर असर होने वाला है। इस संबंध में कमिटी ने सुझाव दिया कि वित्तीय क्षेत्र में डेटा प्रोटेक्शन पर वित्त मंत्रालय को एक टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए।

रिपोर्ट पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

आरबीआई ने कुछ श्रेणियों के लोन्स के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्किंग को अनिवार्य किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अक्टूबर, 2019 से बैंकों के लिए सभी नए (क) फ्लोटिंग रेट पर्सनल या रीटेल लोन्स (हाउसिंग और ऑटो लोन्स सहित), और (ख) एमएसएमई को फ्लोटिंग रेट लोन्स को एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है।[3] फ्लोटिंग रेट लोन्स वे लोन्स होते हैं जिनके ब्याज की दर परिवर्तनशील होती हैं। वर्तमान में बैंकों की ऋण दरें या तो फंड्स बेस्ट लेंडिंग रेट के बेस रेट या मार्जिनल कॉस्ट पर आधारित होती हैं।

बैंक निम्नलिखित एक्सटर्नल बेंचमार्क्स में से किसी को चुन सकते हैं:(i) आरबीआई रेपो रेट (जिस दर पर कमर्शियल बैंकों से उधार लेता है), (ii) 3 से 6 महीने का ट्रेजरी बिल यील्ड, या कोई दूसरा बेंचमार्क मार्केट इंटरेस्ट रेट जिसे फाइनांशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने प्रकाशित किया हो। बैंकों को बेंचमार्क रेट से कम पर उधार देने की अनुमति नहीं है।

बैंकों को लोन की किसी श्रेणी में यूनिफॉर्म एक्सटर्नल बेंचमार्क को अपनाना होता है। हालांकि उन्हें एक्सटर्नल बेंचमार्क में स्प्रेड तय करने की आजादी है। स्प्रेड बेंचमार्क रेट से ऊपर की ब्याज दर होती है जो रिस्क प्रीमियम से तय होता है। इसके अतिरिक्त बैंकों को दूसरे प्रकार के उधारकर्ताओं को ऐसे एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लोन्स देने की आजादी होती है। बैंकों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार एक्सटर्नल बेंचमार्क के अंतर्गत ब्याज दर पुनर्गठित करनी होती है।

मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन्स वाले उधारकर्ता, जोकि प्री-पेमेंट चार्ज दिए बिना प्रीपे के पात्र होते हैं, शुल्क या फीस (उपयुक्त प्रशासनिक/कानूनी लागत के अतिरिक्त) के बिना एक्सटर्नल बेंचमार्क का प्रयोग कर सकेंगे। इस परिवर्तन के बाद इन उधारकर्ताओं से वसूली जाने वाली दर, ऋण की शुरुआत के समय कुछ विशिष्टताओं (श्रेणी, अवधि, राशि) के साथ नए लोन के लिए ली जाने वाली दर के बराबर होगी।

उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने 2017 में मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट के कामकाज की समीक्षा के लिए इंटरनल स्टडी ग्रुप का गठन किया था।[4]  अपनी रिपोर्ट में ग्रुप ने कहा था कि इंटरनल बेंचमार्क, जैसे बेस रेट और फंड्स- बेस्ड लेंडिंग रेट की मार्जिनल कॉस्ट ने मौद्रिक नीति का कारगर हस्तांतरण नहीं किया। समूह ने समयबद्ध तरीके से एक्सटर्नल बेंचमार्क में परिवर्तन का सुझाव दिया।

हाउसिंग फाइनांस सिक्योरिटाइजेशन के विकास पर गठित कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

हाउसिंग फाइनांस सिक्योरिटाइजेशन के विकास पर गठित कमिटी (चेयर: डॉ. हर्षवर्धन) ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।[5]  मई 2019 में कमिटी का गठन किया गया था।[6] भारत में मॉर्गेज बैक्ड सिक्योरिटाइजेशन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के लिए इसका गठन किया गया था।

कमिटी ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को होम लोन्स देने में हाउसिंग फाइनांस कंपनियां (एचएफसी) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि ऋणदाताओं के लिए होम लोन्स एक तरह से स्ट्रक्चरल एसेट लायबिलिटी मैनेजमेंट चैलेंज होता है क्योंकि होम्स लोन्स की परिपक्वता अवधि (आम तौर पर दीर्घावधि की परिपक्वता) और एचएफसीज़ के फंडिंग स्रोसेज़ की परिपक्वता अवधि (आम तौर पर अल्पावधि की परिपक्वता) के बीच तालमेल नहीं होता। इस समस्या के समाधान के लिए एचएफसीज सिक्योरिटीज़ जारी करके होम लोन्स को पूल करके फंड जुटाती हैं। इसे सिक्योरिटाइजेशन कहा जाता है।

वर्तमान में सिक्योरिटाइजेशन निम्नलिखित के जरिए किया जाता है: (i) डायरेक्ट एसाइनमेंट (डीए) मैथेड या (ii) पास थ्रू सर्टिफिकेट्स (पीटीसी) मैथेड। इन दोनों में लोन्स को पूल किया जाता है और फिर उन्हें थर्ड पार्टी को बेचा जाता है, इस प्रकार क्रेडिट रिस्क को ट्रांसफर कर दिया जाता है। हालांकि पीटीसी के जरिए सिक्योरिटाइजेशन के मामले में पूल किए गए लोन को स्पेशल पर्पज वेहिकल के रूप में गठित इंटरमीडियरी के जरिए बेचा जाता है। कमिटी ने कहा कि सिक्योरिटाइजेशन मार्केट में वृद्धि का मुख्य कारण डीए ट्रांजैक्शन हैं (2019 में कुल लेनदेन में पीटीसी का हिस्सा एक चौथाई ही था)। कमिटी ने कहा कि डीए रूट के जरिए किए जाने वाले सिक्योरिटाइजेशन में कस्टमाइज्ड, द्विपक्षीय लेनदेन होता है जोकि लेनदेन के विवरण (जैसे वैल्यूएशन, पूल परफॉर्मेंस, प्रीपेमेंट) को प्राइवेट डोमेन में रखता है। यह अन्य प्रतिभागियों (जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा और पेंशन फंड) को भाग लेने से रोकता है। इसके अलावा इस लेनदेन में मानकीकरण कम है।

सिक्योरिटाइजेशन से जुड़ी एक और बड़ी चुनौती है, लेनदेन की लागत है जो कानूनी और रेगुलेशन की आवश्यकताओं, टैक्सेशन में अनिश्चितता और एकाउंटिंग स्टैडर्ड्स से उत्पन्न होती है। इन चुनौतियों के मद्देनजर समिति ने निम्नलिखित सुझाव दिए:

  • हाउसिंग फाइनांस सिक्योरिटाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आवास बैंक के माध्यम से एक इंटरमीडियरी स्थापित किया जाना चाहिए। यह बाजार बनाने और मानक सेटिंग के लिए जिम्मेदार होगा।
  • मानकीकरण में सुधार के लिए लोन, लोन सर्विसिंग, लोन डॉक्यूमेंटेशन और सिक्योरिटाइजेशन के लिए पात्र लोन्स हेतु विशिष्ट मानकों की स्थापना की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त डेटा संग्रह और हाउसिंग लोन संबंधी डेटा एकत्रीकरण के लिए मानक प्रारूप स्थापित किए जाने चाहिए।
  • डीए और पीटीसी के लिए रेगुलेटरी उपायों हेतु अलग-अलग दिशानिर्देश होने चाहिए। सिक्योरिटाइजेशन पर दिशानिर्देश केवल पीटीसी लेनदेन पर लागू होने चाहिए। डीए लेनदेन को सिक्योरिटाइजेशन के रूप में नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि इसमें सिक्योरिटीज़ को जारी करना शामिल नहीं है। इसके अतिरिक्त मॉर्गेज बेस्ड सिक्योरिटाइजेशन में जारी किए गए पीटीसी को अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध किया जाना चाहिए, यदि सिक्योरिटाइजेशन पूल 500 करोड़ रुपये से अधिक हो।
  • मॉर्गेज बैक्ड सिक्योरिटाइजेशन और एसेट बैक्ड सिक्योरिटाइजेशन के लिए अलग-अलग रेगुलेटरी उपाय होने चाहिए। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार मार्गेज बेस्ड सिक्योरिटाइजेशन के लेनदेन को स्टाम्प शुल्क से मुक्त कर सकती है। मॉर्गेज लोन्स को पंजीकरण से भी छूट दी जा सकती है क्योंकि वे अंडरलाइंग एसेट्स से इतर चल संपत्ति हैं।

रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें

कॉरपोरेट लोन्स के लिए सेकेंडरी मार्केट के विकास पर गठित टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कॉरपोरेट लोन्स के लिए सेकेंडरी मार्केट के विकास पर गठित टास्क फोर्स (चेयर: टी.एन. मनोहरन) ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।[7]  मई 2019 में इस कमिटी का गठन किया गया था।[8]  कॉरपोरेट लोन्स के लिए सेकेंडरी मार्केट ऐसा मार्केटप्लेस होता है जहां लोन्स को ट्रेड किया जा सकता है। टास्क फोर्स ने कहा कि सक्रिय सेकेंडरी मार्केट से बैंकों और उधारकर्ताओं, दोनों को लाभ होता है और इससे अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त ऋण सृजन होता है। इससे बैंकों को कैपिटल ऑप्टिमाइजेशन, लिक्विडिटी और रिस्क मैनेजमेंट में मदद मिलेगी। इससे उधारकर्ताओं को कम लागत पर पूंजी और अधिक ऋण उपलब्धता का लाभ मिलेगा।

टास्क फोर्स ने कहा कि सिक्योरिटाइजेशन मार्केट (जिसमें पूलिंग सिक्योरिटीज़ और उनकी सेकेंडरी मार्केट में ट्रेडिंग शामिल है) मुख्य रूप से रीटेल सेगमेंट तक सीमित है और कॉरपोरेट लोन मार्केट का बहुत अधिक विकास नहीं हो रहा। उसने कई कारकों की पहचान की, जो सेकेंडरी मार्केट के विकास को बाधित करते हैं, जैसे मानकीकरण की कमी, सक्रिय प्रतिभागियों और रेगुलेटरी प्रतिबंधों की कमी। टास्क फोर्स के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • टास्क फोर्स ने उल्लेख किया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सेल्फ रेगुलेटरी संगठनों ने सेकेंडरी मार्केट के विकास में सहायता की है। इनमें यूएस में लोन सिंडिकेशन एंड ट्रेडिंग एसोसिएशन, यूरोप में लोन मार्केट एसोसिएशन और एशिया प्रशांत क्षेत्र में एशिया पैसिफिक लोन मार्केट एसोसिएशन शामिल हैं। ये लोन डॉक्यूमेंटेशन और प्रैक्टिसेज़ के मानकीकरण में सहायक रहे हैं। टास्क फोर्स ने भारत में ऐसे ही एक सेल्फ रेगुलेटरी निकाय की स्थापना का सुझाव दिया।
  • टास्क फोर्स ने कहा कि वर्तमान में इस संबंध में कोई पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री नहीं है। उसने केंद्रीय लोन कॉन्ट्रैक्ट रजिस्ट्री और सेकेंडरी लोन मार्केट्स के लिए एक ऑनलाइन लोन सेल्स प्लेटफॉर्म को स्थापित करने का सुझाव दिया।
  • टास्क फोर्स ने सुझाव दिया कि गैर-बैंकिंग संस्थाओं जैसे पंजीकृत म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड को भी लिक्विडिटी प्रदान करने के लिए सेकेंडरी मार्केट में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। ऐसा सेबी और भारतीय बीमा और नियामक विकास प्राधिकरण सहित रेगुलेटरों द्वारा जारी किए गए नियमों में उपयुक्त संशोधन लाकर किया जा सकता है।

लिक्विडिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क पर गठित इंटरनल वर्किंग ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

मौजूदा लिक्विडिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क की समीक्षा हेतु गठित आरबीआई के इंटरनल वर्किंग ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।[9] लिक्विडिटी मैनेजमेंट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रणाली में पर्याप्त लिक्विडिटी हो ताकि अर्थव्यवस्था के सभी उत्पादक क्षेत्रों को पर्याप्त ऋण प्रदान किया जा सके। फ्रेमवर्क का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टार्गेट इंटर-बैंक रेट पॉलिसी रेट (यानी रेपो दर) के करीब है। टार्गेट इंटर-बैंक रेट आमतौर पर वह दर होती है, जिस पर बैंकों से ऋण लिया जाता है या उधार दिया जाता है, जिसे कॉल मनी मार्केट रेट भी कहा जाता है। यहां लिक्विडिटी आरबीआई की लिक्विडिटी को संदर्भित करती है जिसे बैंकों को आरबीआई के साथ बरकरार रखना जरूरी होता है।

अपनी रिपोर्ट में वर्किंग ग्रुप ने प्रस्तावित लिक्विडिटी फ्रेमवर्क के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

  • फ्रेमवर्क: लिक्विडिटी फ्रेमवर्क दो प्रकार के होते हैं: कॉरिडोर प्रणाली और फ्लोर प्रणाली। कॉरिडोर प्रणाली केंद्रीय बैंक की उधार (रेपो) दर और जमा (रिवर्स रेपो) दर को लक्षित करती है, जबकि फ्लोर प्रणाली केवल जमा दर को लक्षित करती है। बैंक केंद्रीय बैंक से कम ब्याज दर पर बाजार में पैसा उधार नहीं देंगे और केंद्रीय बैंक के शुल्क से अधिक दर पर पैसा उधार नहीं लेंगे, कॉरिडोर प्रणाली इंटर-बैंक बाजार दर के लिए सीलिंग और फ्लोर दोनों की स्थापना करती है। वर्किंग ग्रुप ने गौर किया कि कॉरिडोर प्रणाली लिक्विडिटी की कमी के साथ-साथ अधिशेष की स्थितियों के प्रबंधन के लिए फ्लेक्सिबिलिटी देती है। इसके अतिरिक्त यह ध्यान दिया कि रेपो दर मौद्रिक नीति समिति द्वारा निर्धारित पॉलिसी रेट है। इन कारणों से उसने कॉरिडोर प्रणाली के आधार पर लिक्विडिटी मैनेजमेंट की वर्तमान प्रणाली को जारी रखने का सुझाव दिया। इसी तरह वेटेड एवरेज कॉल मनी मार्केट रेट को फ्रेमवर्क के अंतर्गत टार्गेट रेट होना चाहिए।
  • कॉरिडोर प्रणाली की सीमाएं: वर्किंग ग्रुप ने कहा कि पॉलिसी रेट के करीब इंटर-बैंक रेट को लक्षित करने के लिए कॉरिडोर प्रणाली को सामान्य रूप से सिस्टम की लिक्विडिटी की आवश्यकता कम होती है (जहां बैंकिंग प्रणाली के पास आवश्यक रिजर्व से कम पैसा होता है और केंद्रीय बैंक से उधार लेने की जरूरत होती है)। ग्रुप ने सुझाव दिया कि अगर वित्तीय स्थिति लिक्विडिटी अधिशेष की स्थिति बताती है तो फ्रेमवर्क को अनुकूल होना चाहिए।
  • वैकल्पिक उपाय: ओपन मार्केट ऑपरेशंस और विदेशी मुद्रा स्वैप के अतिरिक्त वर्किंग ग्रुप ने लिक्विडिटी के लिए बाजार से संबंधित दरों पर लंबी अवधि (1 वर्ष तक) के रेपो ऑपरेशंस का सुझाव दिया।
  • एश्योर्ड लिक्विडिटी: वर्किंग ग्रुप ने सुझाव दिया कि 1% तक की लिक्विडिटी का मौजूदा प्रावधान, जिसे बैंकों को बरकरार रखना है, अब जरूरी नहीं है क्योंकि लिक्विडिटी की जरूरतें लिक्विडिटी फ्रेमवर्क से पूरी हो जाएंगी।

वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट पर 31 अक्टूबर, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।[10]

आरबीआई ने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के अंतर्गत निर्यात ऋण के वर्गीकरण की सीमा बढ़ाई

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के अंतर्गत निर्यात ऋण के वर्गीकरण की सीमा 25 करोड़ रुपये प्रति उधारकर्ता से बढ़ाकर 40 करोड़ रुपये प्रति उधारकर्ता कर दी है।[11]  इसके अतिरिक्त 100 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाली इकाइयों का मौजूदा मानदंड हटा दिया गया है। वर्तमान मानदंडों के अनुसार घरेलू बैंकों द्वारा निर्यात ऋण को केवल 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली इकाइयों के लिए प्रायोरिटी सेक्टर के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के अंतर्गत बैंकों (20 और उससे अधिक शाखाओं वाले घरेलू और विदेशी बैंकों) को कुछ प्रायोरिटी सेक्टरों के लिए 40% बैंक क्रेडिट देना आवश्यक है।[12]  इनमें कृषि, एमएसएमई, निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक बुनियादी ढांचा और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं।

वर्किंग ग्रुप मोटर बीमा प्रीमियम को ट्रैफिक उल्लंघनों से जोड़ने की जांच करेगा

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय बीमा और विनियामक विकास प्राधिकरण ने एक वर्किंग ग्रुप (अध्यक्ष: अनुराग रस्तोगी) का गठन किया है। वर्किंग ग्रुप को इस बात की जांच करनी है कि ड्राइवर के व्यवहार को बदलने और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए, मोटर बीमा प्रीमियम को ट्रैफिक उल्लंघन से जोड़ने की प्रणाली स्थापित की जाए या नहीं।[13] 

वर्किंग ग्रुप के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बीमा प्रीमियम को यातायात उल्लंघन से जोड़ने के लिए कार्यप्रणाली और कार्यान्वयन ढांचे का सुझाव देना, (ii) इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं का अध्ययन करना, (iii) राज्यों द्वारा लागू किए गए यातायात उल्लंघनों की वर्तमान प्रणाली का मूल्यांकन करना तथा मानक बिंदु प्रणाली विकसित करना, और (iv) दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक तत्काल पायलट परियोजना को संचालित करने से संबंधित विवरण देना।

वर्किंग ग्रुप के आठ सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देने की उम्मीद है।

सेबी ने सोशल स्टॉक एक्सचेज पर वर्किंग ग्रुप गठित किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सोशल स्टॉक एक्सचेंजों पर एक वर्किंग ग्रुप (अध्यक्ष: इशात हुसैन) का गठन किया है।[14]  वर्किंग ग्रुप सामाजिक उद्यमों और स्वैच्छिक संगठनों द्वारा धन जुटाने की सुविधा के लिए संभावित संरचनाओं और तंत्रों के संबंध में जांच करेगा और सुझाव देगा।

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने बजट अभिभाषण 2019-20 में सामाजिक उद्यमों और स्वैच्छिक संगठनों को सूचीबद्ध करने के लिए सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज बनाने हेतु कदम उठाने का प्रस्ताव दिया था।[15]

अधिक जानकारी के लिए कृपया सारांश देखें

वित्त मंत्रालय ने राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के लिए टास्क फोर्स का गठन किया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने एक टास्क फोर्स का गठन किया है जोकि 2019-20 से 2024-25 के दौरान प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स की पाइपलाइन तैयार करेगा। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए 100 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले प्रॉजेक्ट्स की योजना है।[16]  अगले पांच वर्षों के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 करोड़ रुपए के निवेश की योजना को लागू करने हेतु इस पाइपलाइन को विकसित किया जाएगा।

टास्क फोर्स के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यावहारिक प्रॉजेक्ट्स को चिन्हित करना जिन्हें 2019-20 में शुरू किया जा सके, (ii) उन प्रॉजेक्ट्स को सूचीबद्ध करना, जिन्हें प्रत्येक शेष वर्षों (2020-21 से 2024-25) के लिए पाइपलाइन में शामिल किया जा सकता है, (iii) वित्त पोषण के उपयुक्त स्रोत को चिन्हित करने में मंत्रालय का मार्गदर्शन करना, और (iv) अनुमानित लागत में प्रॉजेक्ट्स के यथा समय कार्यान्वयन के निरीक्षण हेतु उपाय सुझाना। टास्क फोर्स उन प्रॉजेक्ट्स की मार्केटिंग भी करेगा जिन्हें निजी निवेश की जरूरत होगी।

टास्क फोर्स से यह अपेक्षा की जाती है कि वह 2019-20 की पाइपलाइन के लिए 31 अक्टूबर, 2019 तक और 2020-21 से 2024-25 की सांकेतिक पाइपलाइन के लिए 31 दिसंबर, 2019 तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org

ई-सिगरेट पर प्रतिबंध अध्यादेश, 2019 जारी

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स पर प्रतिबंध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन) अध्यादेश, 2019 को जारी किया गया। [17]  अध्यादेश इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स के उत्पादन, व्यापार, स्टोरेज, परिवहन और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है।

  • इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स: इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (ई-सिगरेट्स) एक बैटरी चालित उपकरण होता है जोकि किसी पदार्थ को गर्म करता है ताकि कश लेने के लिए वाष्प पैदा हो। ई-सिगरेट्स में निकोटिन और फ्लेवर हो सकते हैं और इनमें इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम के सभी प्रकार, हीट-नॉट बर्न उत्पाद, ई-हुक्का और ऐसे ही दूसरे उपकरण शामिल हैं।
  • ई-सिगेट्स पर प्रतिबंध: अध्यादेश भारत में ई-सिगरेट्स के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। इस प्रावधान का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ेगा या एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा या दोनों सजा भुगतनी होगी। एक बार से अधिक बार अपराध करने पर तीन वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ेगा और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।
  • ई-सिगेट्स का स्टोरेज: ई-सिगरेट्स के स्टॉक के स्टोरेज के लिए कोई व्यक्ति किसी स्थान का प्रयोग नहीं कर सकता। अगर कोई व्यक्ति ई-सिगेट्स का स्टॉक रखता है तो उसे छह महीने तक का कारावास भुगतना होगा या 50,000 रुपए तक का जुर्माना भरना होगा, या दोनों सजा भुगतनी पड़ेगी।
  • अध्यादेश के लागू होने के बाद (यानी 18 सितंबर, 2019) ई-सिगरेट का मौजूदा स्टॉक रखने वालों को इन स्टॉक्स की घोषणा करनी होगी और उन्हें अधिकृत अधिकारी के निकटवर्ती कार्यालय में जमा कराना होगा। यह अधिकृत अधिकारी पुलिस अधिकारी (कम से कम सब इंस्पेक्टर स्तर का) या केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत कोई अन्य अधिकारी हो सकता है।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।  अध्यादेश पर अधिक विस्तृत विवरण के लिए हमारा ब्लॉग पढ़ें।

स्वास्थ्यकर्मियों से हिंसा को प्रतिबंधित करने वाला ड्राफ्ट बिल जारी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में स्वास्थ्यकर्मियों से हिंसा और क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों से निपटने के लिए एक मसौदा बिल जारी किया है।[18]  मसौदा बिल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • हिंसा पर प्रतिबंध: मसौदा बिल डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल वर्कर्स, और एंबुलेंस ड्राइवर्स सहित स्वास्थ्यकर्मियों से हिंसा को प्रतिबंधित करता है। यह अस्पतालों, क्लिनिकों और एंबुलेंस को नुकसान पहुंचाने को भी प्रतिबंधित करता है।
  • जुर्माना: ऐसा व्यक्ति जो हिंसा करता है या हिंसा के लिए उकसाता है, उसे छह महीने से लेकर पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। अगर कोई व्यक्ति किसी स्वास्थ्यकमी को गंभीर चोट पहुंचाता है तो उसे तीन वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की सजा भुगतनी होगी और दो लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।
  • मसौदा बिल के अंतर्गत अपराध की सजा के अतिरिक्त अपराधी को प्रभावित पक्षों को मुआवजा भी चुकाना होगा। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) क्षतिग्रस्त संपत्ति के बाजार मूल्य से दोगुनी राशि का भुगतान, (ii) स्वास्थ्यकर्मी को नुकसान पहुंचाने की एवज में एक लाख रुपए, और (iii) स्वास्थ्यकर्मी को गंभीर चोट पहुंचाने की एवज में पांच लाख रुपए।
  • अपराधों का संज्ञान: मसौदा बिल के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय (यानी पुलिस अधिकारी बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है) और गैर जमानती होंगे। पीड़ित स्वास्थ्यकर्मी क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट के पर्सन-इन-चार्ज को लिख सकता है कि वह मसौदा बिल के अंतर्गत किए गए अपराध की सूचना पुलिस को दे। इसके अतिरिक्त मसौदा बिल के अंतर्गत पंजीकृत किसी मामले की जांच डेपुटी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस और उसके उच्च पद के अधिकारी द्वारा ही की जाएगी।

कानून एवं न्याय

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

सामाजिक सुरक्षा पर ड्राफ्ट कोड जारी

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2019 का ड्राफ्ट जारी किया।[19]  ड्राफ्ट पर सार्वजनिक टिप्पणियां 25 अक्टूबर, 2019 तक आमंत्रित हैं

सामाजिक सुरक्षा श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा की सुविधा और आय सुरक्षा के प्रावधान सुनिश्चित करती है। ड्राफ्ट कोड में सामाजिक सुरक्षा से संबंधित आठ कानूनों को शामिल किया गया है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड एक्ट, 1952, (ii) मातृत्व लाभ एक्ट, 1961, और (iii) असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा एक्ट, 2008। ड्राफ्ट कोड की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एप्लिकेशन: ड्राफ्ट कोड उन सभी इस्टैबलिशमेंट्स पर लागू होता है: (i) जहां उद्योग, व्यापार, व्यवसाय, कारोबार या मैन्यूफैक्चरिंग की जाती है, (ii) कुछ अन्य इस्टैबलिशमेंट्स, जिनमें कारखाने, खान, बागान और भवन निर्माण और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) का काम होता है। कोड में गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल हैं। गिग वर्कर्स परंपरागत नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों से इतर श्रमिक होते हैं (जैसे फ्रीलांसर्स)। प्लेटफॉर्म वर्कर्स ऐसे श्रमिक होते हैं जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके दूसरे संगठनों या व्यक्तियों को एसेस करते हैं और उन्हें विशिष्ट सेवाएं प्रदान करके धन अर्जित करते हैं। सभी पात्र इस्टैबलिशमेंट्स को कोड के अंतर्गत रजिस्टर करना होगा।
  • सामाजिक सुरक्षा संगठन: ड्राफ्ट कोड विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए अनेक निकायों की स्थापना करता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड और कर्मचारी पेंशन योजनाओं को प्रबंधित करने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (जिसे केंद्रीय स्तर पर अधिसूचित किया जाएगा), (ii) कर्मचारी राज्य बीमा योजना को प्रबंधित करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (जिसे केंद्रीय स्तर पर अधिसूचित किया जाएगा), (iii) असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रबंधित करने हेतु राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर असंगठित श्रमिक बोर्ड, और (iv) भवन निर्माण और निर्माण श्रमिकों के लिए योजनाओं को प्रबंधित करने हेतु राज्य स्तरीय भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड।
  • अंशदान: सरकार द्वारा अधिसूचित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को सरकार, नियोक्ता एवं कर्मचारी द्वारा उनके वेतन के अनुपात में दिए वाले अंशदानों के जरिए वित्त पोषित किया जाएगा। उदाहरण के लिए कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड के मामले में नियोक्ता और कर्मचारी, प्रत्येक वेतन का 12% अंशदान जमा करेंगे। इसके अतिरिक्त गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा योजना बना सकती है।

पिछले दो वर्षों के दौरान जारी किए गए ड्राफ्ट कोड्स पर अधिक जानकारी के लिए पीआरएस के मार्च 2017 और अप्रैल 2018 के मंथली पॉलिसी रिव्यू देखें।

 

कॉरपोरेट मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कंपनी लॉ कमिटी का गठन

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत अपराधों की समीक्षा करने और 2013 के एक्ट एवं लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट, 2008 के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दों की जांच के लिए कंपनी लॉ कमिटी का गठन किया है।[20]  संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) इस बात का विश्लेषण कि 2013 के एक्ट के अंतर्गत अपराधों को सिविल डीफॉल्ट्स के तौर पर फिर से श्रेणीबद्ध किया जा सकता है, (ii) राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों को कम करने के उपाय सुझाना, और (iii) लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट, 2008 के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दों की जांच करना।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के सचिव इस कमिटी के अध्यक्ष होंगे और इसमें दस सदस्य होंगे जिनमें उद्योग से जुड़े व्यक्ति भी शामिल होंगे। इनका कार्यकाल एक वर्ष होगा।

 

गृह मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

असम में एनआरसी दावा प्रक्रिया में संशोधन जारी

गृह मामलों के मंत्रालय ने विदेशी (ट्रिब्यूनल) आदेश, 1964 में संशोधन जारी किए हैं। [21]  नागरिकता (नागरिकता का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र) आदेश, 2003 के अंतर्गत असम में राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर तैयार किया जा रहा है। [22]  जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हैं या गलत तरीके से शामिल किए गए हैं, वे नागरिक पंजीकरण के स्थानीय रजिस्ट्रार को शिकायत कर सकते हैं। रजिस्ट्रार के फैसले के खिलाफ 120 दिनों के भीतर 1964 के आदेश के अंतर्गत गठित ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है। 1964 के आदेश में एनआरसी दावा प्रक्रिया के संबंध में कुछ संशोधनों को अधिसूचित किया गया है। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अपील दायर करने पर प्रक्रिया: आदेश कहता है कि अगर कोई व्यक्ति ट्रिब्यूनल में अपील दायर करता है तो इसी के साथ जिला मेजिस्ट्रेट ट्रिब्यूनल को यह मामला भेज सकता है कि क्या व्यक्ति विदेशी है (यानी भारत का नागरिक नहीं है)। ट्रिब्यूनल दोनों मामलों पर एक साथ फैसला करेगा। संशोधन इन प्रावधानों को हटाता है और कहता है कि अगर ट्रिब्यूनल इस अपील को रद्द करता है तो उसे यह फैसला भी करना होगा कि क्या व्यक्ति विदेशी एक्ट, 1946 के अंतर्गत विदेशी है।
  • अपील दायर न करने पर प्रक्रिया: आदेश के अनुसार, अगर अपील दायर नहीं की जाती तो इस स्थिति में केंद्र या राज्य सरकार, या जिला मेजिस्ट्रेट ट्रिब्यूनल को यह मामला भेज सकता है कि क्या व्यक्ति विदेशी है। संशोधन इस प्रावधान को हटाता है और कहता है कि अगर व्यक्ति अपील दायर नहीं करता तो उसके विदेशी होने के सवाल को केवल जिला मेजिस्ट्रेट ट्रिब्यूनल के पास भेज सकता है।

एफसीआरए नियमों में संशोधन अधिसूचित

गृह मामलों के मंत्रालय ने विदेशी योगदान (रेगुलेशन) एक्ट, 2017 के अंतर्गत नियमों में संशोधनों को अधिसूचित किया है। [23]  एक्ट कुछ निश्चित व्यक्तियों और संगठनों द्वारा विदेशी योगदान या विदेशी हॉस्पिटैलिटी की प्राप्ति को रेगुलेट करता है। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एक्ट के अंतर्गत विदेशी योगदान की इच्छुक पात्र संस्थाओं (निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम वाली) को सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होता है। अगर यह सर्टिफिकेट नहीं मिलता, तो पात्र संस्थाएं केंद्र सरकार से इस बात की पूर्व अनुमति ले सकती हैं कि उन्हें विशिष्ट स्रोत से और विशिष्ट उद्देश्य के लिए विदेशी योगदान हासिल करना है।
  • नियम सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन या पूर्व अनुमति के लिए आवेदन के प्रकारों को निर्दिष्ट करते हैं। संशोधनों में ऐसी संस्थाओं के मुख्य पदाधिकारियों से यह अतिरिक्त रूप से अपेक्षा की गई है कि वे एक एफिडेविड जमा कराएंगे जिसमें यह पुष्टि की गई होगी कि उन्होंने एक्ट के अंतर्गत सर्टिफिकेट देने से जुड़ी सभी शर्तें पूरी की हैं। इन शर्तों में यह भी शामिल है कि धर्मांतरण कराने या सांप्रदायिक तनाव और विसंगति पैदा करने के लिए उन पर मुकदमा नहीं चलाया गया है या उन्हें उसका दोषी नहीं माना गया है।
  • नियमों के अनुसार, एक्ट के अंतर्गत 25,000 रुपए तक के बाजार मूल्य के व्यक्तिगत उपहारों को ‘विदेशी योगदान’ नहीं माना जाता। संशोधन इस सीमा को 25,000 रुपए से एक लाख रुपए करते हैं।
  • एक्ट कुछ विशिष्ट श्रेणी के व्यक्तियों (जैसे विधायक-सांसद, जज और सरकारी एवं पीएसयू के कर्मचारी) के लिए विदेशी स्रोत (जैसे विदेशी सरकार या निगम) से हॉस्पिटैलिटी लेने को प्रतिबंधित करता है, बशर्ते व्यक्ति ने केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति ली हो। हालांकि अगर व्यक्ति विदेश में एकाएक बीमार हो जाता है तो विदेशी हॉस्पिटैलिटी लेने के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है। ऐसे मामले में व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह हॉस्पिटैलिटी लेने के 60 दिनों के भीतर सरकार को सूचित करेगा। संशोधन इस समयावधि को 60 दिनों से कम करके एक महीने करता है। उल्लेखनीय है कि एक्ट में हॉस्पिटैलिटी हासिल करने के लिए 30 दिन की समयावधि दी गई है।

 

कृषि

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

कृषि ऋण की समीक्षा के लिए गठित आरबीआई वर्किंग ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

कृषि ऋण की समीक्षा के लिए गठित आरबीआई वर्किंग ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।[24]  मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अल्पावधि के फसल ऋणों का हिस्सा बढ़ा: वर्किंग ग्रुप ने कहा कि अल्पकालिक फसल ऋणों के लिए ब्याज सब्वेंशन स्कीम ने कृषि ऋण में ऐसे ऋणों की हिस्सेदारी 2000 में 51% से बढ़ाकर 2018 में 75% कर दी है। इस योजना ने दीर्घकालिक निवेश पर अल्पकालिक उत्पादन ऋण को प्रोत्साहित किया है, जो क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। वर्किंग ग्रुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को अपने पूंजीगत व्यय में वृद्धि करने की आवश्यकता है जो कृषि में निवेश ऋण की मांग को प्रोत्साहित करेगा। यह भी सुझाव दिया गया कि बैंकों को ब्याज सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए केवल किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से योजना के अंतर्गत फसल ऋण प्रदान करना चाहिए।
  • ऋण माफी: वर्किंग ग्रुप ने पाया कि 2014-15 के बाद से, 10 राज्यों ने 2.4 लाख करोड़ रुपये की ऋण माफी की घोषणा की है (2016-17 के सकल घरेलू उत्पाद का 1.4%), वह भी, ज्यादातर चुनावों के आस-पास। यह कहा गया है कि ऋण माफी कृषि संकट के अंतर्निहित कारणों का हल नहीं करती है और ऋण संस्कृति को नष्ट कर देती है, संभवतः मध्यम और दीर्घावधि में किसानों के हित को नुकसान पहुंचाती है। यह भी कहा गया कि ऋण माफी कृषि में उत्पादक निवेश के लिए उपलब्ध फाइनांशियल स्पेस को कम करती है। वर्किंग ग्रुप ने सुझाव दिया कि: (i) ऋण माफी से बचा जाना चाहिए, और (ii) केंद्र और राज्य सरकारों को कृषि की समग्र व्यवहार्यता और स्थिरता में सुधार के लिए कृषि नीतियों और इनपुट सबसिडी की समग्र समीक्षा करनी चाहिए।
  • संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण: वर्किंग ग्रुप ने कहा कि संबद्ध गतिविधियों (मवेशी, वानिकी और मत्स्य) को कुल कृषि ऋणों का सिर्फ 10% प्राप्त होता है जबकि वह कृषि उत्पादन में 40% का योगदान देती हैं। यह कहा गया कि इन गतिविधियों में संलग्न किसानों की उचित परिभाषा न होने के कारण ऐसा हो सकता है, चूंकि जनगणना किसानों को उनकी जोत के आधार पर भी पारिभाषित करती है। परिणामस्वरूप बैंक ऐसे किसानों को ऋण देने के लिए भूमि रिकॉर्ड्स की मांग करते हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों के पास संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण देने हेतु प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग की तरह कोई विशिष्ट निर्देश भी नहीं है। वर्किंग ग्रुप ने सुझाव दिया कि संबद्ध गतिविधियों के लिए अलग से लेंडिंग टार्गेट होने चाहिए और बैंकों को दो लाख रुपए तक के ऋण देने के लिए भूमि रिकॉर्ड्स की मांग नहीं करनी चाहिए।

इस विषय पर पीआरएस की रिपोर्ट का सारांश यहां देखें

एपीएमसी व्यापारियों को एक करोड़ रुपए से अधिक की नकद निकासी पर 2% टैक्स से छूट

वित्त मंत्रालय ने कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) के अंतर्गत काम करने वाले व्यापारियों और कमीशन एजेंटों को एक करोड़ रुपये से अधिक नकद निकासी पर दो प्रतिशत टैक्स वसूली से छूट दी है। [25] इनकम टैक्स एक्ट के अंतर्गत वित्तीय वर्ष में एक करोड़ रुपए से अधिक की नकद निकासी पर बैंक और पोस्ट ऑफिस यह टैक्स काटते हैं। [26]  एक्ट में केंद्र सरकार को यह अनुमति दी गई है कि वह आरबीआई की सलाह से कुछ व्यक्तियों या व्यक्ति समूहों को इस टैक्स से छूट दे सकती है।

एपीएमसी से संबंधित किसी कानून के अंतर्गत पंजीकृत व्यापारी और कमीशन एजेंट इस छूट के लिए पात्र हैं। इसके अतिरिक्त छूट हासिल करने वाले व्यापारी या कमीशन एजेंट से बैंक या पोस्ट ऑफिस में यह सर्टिफाई करने की अपेक्षा की जाती है कि वे कृषि उपज की खरीद हेतु किसानों को भुगतान करने के लिए इस धनराशि की निकासी कर रहे हैं।

खरीफ मौसम 2019-20 के लिए फसलों के उत्पादन के पहले अग्रिम अनुमान जारी

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने खरीफ मौसम 2019-20 के लिए खाद्यान्न और वाणिज्यिक फसलों के उत्पादन के पहले अग्रिम अनुमान जारी किए। [27] तालिका 2 में खरीफ 2018-19 के अनुमानों की तुलना खरीफ 2019-20 के पहले अग्रिम अनुमानों से की गई है। यहां कुछ तथ्य प्रस्तुत हैं:

  • खरीफ 2018-19 की तुलना में खरीफ 2019-20 में खाद्यान्न उत्पादन में 0.8% गिरावट हुई। यह गिरावट मुख्य रूप से चावल के उत्पादन में 1.7% की गिरावट के कारण हुई। मोटे अनाज के उत्पादन में 3.3% की वृद्धि अनुमानित है जबकि दालों में 4.2% की गिरावट का अनुमान है।
  • खरीफ 2018-19 की तुलना में खरीफ 2019-20 में तिलहन के उत्पादन में 5.2% की वृद्धि का अनुमान है। दूसरी ओर मूंगफली के उत्पादन में 17.7% की वृद्धि और सोयाबीन के उत्पादन में 2% की गिरावट अनुमानित है।
  • 2019-20 में कपास के उत्पादन में 12.4% की वृद्धि का अनुमान है। इस वर्ष गन्ने का उत्पादन 5.6% घटकर 378 मिलियन टन रहने का अनुमान है।

तालिका 2: खरीफ 2019-20 में उत्पादन के पहले अग्रिम अनुमान (मिलियन टन)

फसल

चौथे अग्रिम अनुमान खरीफ 2018-19

पहले अग्रिम अनुमान खरीफ 2019-20

2018-19 की तुलना में परिवर्तन का %

खाद्यान्न (+)

141.7

140.6

-0.8%

क. अनाज

133.1

132.4

-0.6%

     चावल

102.1

100.4

-1.7%

मोटे अनाज

31.0

32.0

3.3%

ख. दालें

8.6

8.2

-4.2%

     तूर

3.6

3.5

-1.4%

     उड़द

2.6

2.4

-5.1%

     मूंग

1.8

1.4

-22.8%

 तिलहन

21.3

22.4

5.2%

 सोयाबीन

13.8

13.5

-2.0%

 मूंगफली

5.4

6.3

17.7%

कपास*

28.7

32.3

12.4%

चीनी

400.2

377.8

-5.6%

*million bales of 170 kg each.

SourcesDirectorate of Economics and Statistics, Ministry of Agriculture and Farmers Welfare; PRS.

 

संचार

Saket Surya (saket@prsindia.org)

नॉन पर्सनल डेटा के रेगुलेशन का अध्ययन करने हेतु कमिटी ऑफ एक्सपर्ट्स की नियुक्ति

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नॉन पर्सनल डेटा हेतु डेटा गवर्नेस फ्रेमवर्क पर विचार-विमर्श के लिए कमिटी ऑफ एक्सपर्ट्स (अध्यक्ष: इंफोसिस के सह संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णनन) का गठन किया।[28]  डेटा प्रोटेक्शन पर श्रीकृष्णा कमिटी ने पर्सनल डेटा (जोकि किसी एक व्यक्ति से संबंधित होता है) और कम्युनिटी डेटा (विशिष्ट व्यक्ति नहीं, अनेक व्यक्तियों से एकत्र किया जाता है) के बीच भेद किया था। कम्युनिटी डेटा में ई-कॉमर्स डेटा, एआई ट्रेनिंग डेटा और डेराइव्ड डेटा शामिल हो सकता है। कमिटी ऐसे नॉन पर्सनल डेटा पर फ्रेमवर्क के लिए विचार-विमर्श करेगी।

कमिटी के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) नॉन पर्सनल डेटा से संबंधित मुद्दों का अध्ययन, और (ii) नॉन पर्सनल डेटा के रेगुलेशन पर विशिष्ट सुझाव देना।

ट्राई ने टेलीकॉम लाइसेंसों के विलय और ट्रांसफर हेतु दिशानिर्देशों में सुधारों पर सुझाव आमंत्रित किए

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने टेलीकॉम लाइसेंसों के विलय और ट्रांसफर हेतु दिशानिर्देशों में सुधारों पर सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए।[29]  परामर्श पत्र, दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा जारी किए गए विलय और अधिग्रहण दिशानिर्देश, 2014 में संशोधन का प्रयास करता है। डीओटी उपरोक्त दिशानिर्देशों के अंतर्गत विलय और स्थानांतरण पर कुछ शर्तें रख सकता है। पूर्व में दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय ट्रिब्यूनल ने इनमें से कुछ शर्तों पर स्टे दे दिया है। इससे विलय और हस्तांतरण को अंतिम रूप देने में विलंब हुआ। इस परामर्श का उद्देश्य दूरसंचार लाइसेंस के विलय और हस्तांतरण के लिए अनुमोदन को सरल और तेज़ करना है।

परामर्श पत्र ने दूरसंचार लाइसेंसों में स्थानांतरण संबंधी प्रावधानों में बदलाव पर विचार किया है। पत्र दिशानिर्देशों में मोबाइल वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटरों के लिए अनिवार्य पहुंच का प्रावधान जोड़ना चाहता है। मोबाइल वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटर्स एक ऐसा उद्यम है जिसमें स्पेक्ट्रम का आबंटन नहीं होता है लेकिन वह दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के स्पेक्ट्रम को साझा करके ग्राहकों को वायरलेस सेवाएं प्रदान कर सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि स्पेक्ट्रम लाइसेंस वाली बड़ी इकाइयां प्रतिस्पर्धी-विरोधी व्यवहार में संलग्न न हों। पत्र पर टिप्पणियां 18 अक्टूबर, 2019 तक आमंत्रित हैं।

ट्राई ने इंटरकनेक्शन यूसेज की समीक्षा पर सुझाव आमंत्रित किए

ट्राई ने इंटरकनेक्शन यूसेज चार्ज की समीक्षा पर सुझावों को आमंत्रित किया है [30]  दो पब्लिक टेलीकॉम नेटवर्क्स के बीच इंटरकनेक्शन से एक सर्विस प्रोवाइडर के उपभोक्ता दूसरे सर्विस प्रोवाइडर के उपभोक्ता से संवाद कर सकते हैं। इंटरकनेक्शन यूसेज चार्ज (आईयूसी) वह लागत होती है जो एक मोबाइल ऑपरेटर दूसरे ऑपरेटर को कॉल के लिए चुकाता है। अगर मोबाइल ऑपरेटर ए का उपभोक्ता ऑपरेटर बी के उपभोक्ता को कॉल करता है और कॉल पूरी हो जाती है तो ए उस कॉल को करने की एवज में बी को आईयूसी चार्ज चुकाएगा। वर्तमान में वायरलेस से वायरलेस घरेलू कॉल के लिए आईयूसी चार्ज 0.06 रुपए प्रति मिनट है। वायरलेस से वायरलाइन, वायरलाइन से वायरलाइन और वायरलाइन से वायरलेस घरेलू कॉल का आईयूसी चार्ज शून्य है। 

2017 में ट्राई ने घरेलू कॉल्स के सभी प्रकारों के लिए 1 जनवरी, 2020 से जीरो आईयूसी चार्ज को प्रभावी करना निर्धारित किया था। इस पेपर में जीरो आईयूसी चार्जेज़ के लिए लागू तिथि में संशोधन पर विचार प्राप्त करने का प्रयास किया गया है। टिप्पणियां 18 अक्टूबर, 2019 तक आमंत्रित हैं।

 

आदिवासी मामले

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने का सुझाव दिया

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सुझाव दिया है कि लद्दाख को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। छठी अनुसूची विशिष्ट क्षेत्रों जैसे असम और मिजोरम में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का प्रावधान करती है। 

आयोग ने कहा कि नया गठित लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश एक जनजातीय क्षेत्र है जिसकी कुल जनजातीय आबादी लगभग 97% है। इसके अतिरिक्त यह गौर किया गया कि केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले लद्दाख के लोगों के पास भूमि अधिकार सहित अनेक कृषि अधिकार थे जिसके कारण देश के बाकी लोगों के लद्दाख में जमीन खरीदने पर पाबंदी थी। इसके अतिरिक्त आयोग ने कहा कि लद्दाख में ऐसी अनेक विशिष्ट सांस्कृतिक विरासतें हैं जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

इस संबंध में आयोग ने सुझाव दिया कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाए जिससे निम्नलिखित की अनुमति मिलेगी; (i) शक्ति का लोकतांत्रिक हस्तांतरण, (ii) संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन, (iii) कृषि और भू अधिकारों का संरक्षण, और (iv) लद्दाख के विकास के लिए अधिक धनराशि का हस्तांतरण।[31]

 

विज्ञान और तकनीक

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

मसौदा वैज्ञानिक सामाजिक जिम्मेदारी नीति सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी

विज्ञान और तकनीक मंत्रालय ने सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए मसौदा वैज्ञानिक सामाजिक उत्तरदायित्व (एसएसआर) नीति जारी की। [32]  नीति एसएसआर को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों के नॉलेज वर्कर्स की ऐसी नैतिक बाध्यता के रूप में व्याख्यायित करती है जोकि अपने ज्ञान और संसाधनों को बड़े समुदाय के साथ स्वेच्छा से साझा करें। नीति के अनुसार, मानव, सामाजिक, मेडिकल, गणित, कंप्यूटर/डेटा साइंस या संबद्ध तकनीक के क्षेत्रों से जुड़ा कोई भी व्यक्ति नॉलेज वर्कर हो सकता है। एसएसआर में शिक्षण, मेंटरिंग, दक्षता विकास प्रशिक्षण और कार्यशालाएं, प्रदर्शनी लगाना, स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधानों के प्रदर्शन सहित अन्य गतिविधियां शामिल होंगी।

नीति का उद्देश्य समाज और विज्ञान के बीच की कड़ी को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक समुदाय की स्वैच्छिक क्षमता का उपयोग करना है। नीति केंद्रीय और राज्य सरकार के सभी मंत्रालयों को निर्देश देती है कि वे अपने जनादेश के अनुसार अपने एसएसआर की योजना और रणनीति बनाएं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक नॉलेज वर्कर प्रति वर्ष एसएसआर के कम से कम 10 कार्य दिवसों के लिए उत्तरदायी होगा। प्रत्येक संस्थान में एक एसएसआर मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद होना चाहिए जोकि संस्था के प्रॉजेक्ट्स और व्यक्तिगत गतिविधियों का विश्लेषण करेगा और प्रत्येक नॉलेज संस्थान को एक वार्षिक एसएसआर रिपोर्ट प्रकाशित करनी चाहिए। नीति का उद्देश्य एसएसआर गतिविधियों और प्रॉजेक्ट्स को जरूरी बजटीय सहयोग प्रदान करना चाहिए ताकि उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके।

मसौदा नीति पर टिप्पणियां 8 अक्टूबर, 2019 तक आमंत्रित हैं।

 

नागरिक उड्डयन

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

एयरक्राफ्ट नियम, 1937 का मसौदा संशोधन जारी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ड्राफ्ट नियम जारी किए जोकि एयरक्राफ्ट नियम, 1937 में संशोधन करते हैं। ये नियम पायलटों को लाइसेंस जारी करने की शर्तों में संशोधन करते हैं और एयरक्राफ्ट्स में वाई-फाई के प्रयोग की अनुमति देते हैं।[33],[34]  इन ड्राफ्ट नियमों में निम्नलिखित शामिल हैं:

लाइसेंसिंग की शर्तें: वर्तमान में एयरलाइन पायलट का लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदक को पायलट के रूप में कम से कम 1,500 घंटे का फ्लाइट टाइम पूरा करना चाहिए। इसमें कम से कम 150 घंटे, पिछले 12 महीनों में पूरे होने चाहिए। ड्राफ्ट नियम इस अतिरिक्त शर्त को हटाते हैं।

वर्तमान में नियमों में यह अपेक्षा भी की गई है कि लाइसेंस हासिल करने के लिए कम से कम 500 घंटे का फ्लाइट टाइम पायलट इन कमांड या को-पायलट के रूप में पूरा किया जाना चाहिए। इसमें से कम से कम 200 घंटे क्रॉस कंट्री फ्लाइट टाइम के तौर पर पूरे करने चाहिए। इसके अतिरिक्त आवेदक को कम से कम 1,000 घंटे कुल क्रॉस कंट्री फ्लाइट टाइम पूरे होने चाहिए। ड्राफ्ट नियम इस समयावधि को कम करके 500 घंटे करते हैं।

वाई-फाई का प्रयोग: वर्तमान में एयरक्राफ्ट नियम, 1937 फ्लाइट में एयरक्राफ्ट पर किसी भी पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के ऑपरेशन पर प्रतिबंध लगाते हैं (सिवाय पेसमेकर जैसे अपवादों को छोड़कर)। पायलट-इन-कमांड फ्लाइट के लैंड होने पर यात्रियों को सैलुलर फोन के प्रयोग की अनुमति दे सकता है। ड्राफ्ट नियम कहते हैं कि पायलट विशिष्ट प्रक्रियाओं के अनुसार एयरक्राफ्ट में बोर्ड पर वाई-फाई के जरिए मोबाइल कम्युनिकेशन और इंटरनेट सर्विसेज़ के प्रयोग की अनुमति भी दे सकता है। ऐसे एयरक्राफ्ट को इन सेवाओं के लिए महानिदेशालय से सर्टिफाई होना चाहिए।

 

रेलवे

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

रेलवे ने कुछ यात्री किराये को तर्कसंगत बताया और मालवहन संबंधी प्रोत्साहनों की घोषणा की

मालवहन संबंधी प्रोत्साहन: रेलवे मंत्रालय ने रेलवे में मालवहन सेवा हेतु अनेक उपायों की घोषणा की।[35]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अगली सूचना तक बिजी सीजन चार्ज को हटा दिया गया है।
  • कंटेनर ट्रैफिक पर राउंड ट्रिप चार्ज के लिए आवश्यक न्यूनतम दूरी 50 किमी से बढ़ाकर 100 किमी कर दी गई है। इससे ढुलाई शुल्क में 35% की कमी आने की उम्मीद है।
  • बंदरगाहों को खाली कंटेनरों की आवाजाही को प्रोत्साहित करने के लिए ढुलाई शुल्क में 25% की छूट दी जाएगी।

यात्री किराए: मंत्रालय ने हमसफर ट्रेनों के लिए किराया संरचना और कंपोजिशन को तर्कसंगत बनाने की भी घोषणा की।[36] इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) इन ट्रेनों के लिए परिवर्तनशील किराया प्रणाली को दूर करना, (ii) बेस किराया कम करना, और (iii) तत्काल शुल्क कम करना।

ऊर्जा                                             

Saket Surya (saket@prsindia.org)

ट्रांसमीशन के उपयोग से प्राप्त राजस्व को दूसरे व्यवसायों से साझा करने पर केंद्रित ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी  की। इनमें की अनुमति भी दे सकता है।

केंद्रीय बिजली रेगुलेटरी कमीशन (सीईआरसी) ने ट्रांसमीशन एसेट के उपयोग से प्राप्त राजस्व को दूसरे व्यवसायों से साझा करने पर केंद्रित ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किए।[37]  यह इंटर-स्टेट ट्रांसमीशन लाइसेंसीज़ पर लागू होगा जिनके ट्रांसमीशन शुल्क को सीईआरसी द्वारा निर्धारित किया जाता है। ड्राफ्ट रेगुलेशन पर टिप्पणियां 31 अक्टूबर, 2019 तक आमंत्रित हैं।

अपने एसेट्स के अधिक से अधिक उपयोग के लिए अन्य व्यवसाय करने के इच्छुक ट्रांसमीशन लाइसेंसी को सीईआरसी को पूर्व सूचना देनी होगी। लाइसेंसी को प्रस्तावित व्यवसाय के संबंध में सूचनाएं प्रदान करनी होंगी जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) व्यापार की प्रकृति, (ii) व्यापार में पूंजीगत निवेश, (iii) व्यापार की लागत और राजस्व मॉडल, और (iv) बिजली के इंटर-स्टेट ट्रांसमीशन का असर।

लाइसेंसी को अपने दीर्घावधि के ग्राहकों के साथ इस राजस्व को साझा करना होगा। दीर्घावधि का ग्राहक वह होता है जिसे 12 से 25 वर्षों की अवधि के लिए इंटर-स्टेट ट्रांसमीशन प्रणाली का इस्तेमाल करने का अधिकार होता है।[38]  राजस्व निम्नलिखित प्रकार साझा किया जाएगा:

  • जहां दूसरा व्यवसाय दूरसंचार से संबंधित है, वहां उस व्यवसाय के वार्षिक सकल राजस्व का 10% हिस्सा दीर्घावधि के ग्राहकों के साथ साझा किया जाएगा।
  • बाकी सभी व्यवसायों के लिए राजस्व साझा करने का पैटर्न सीईआरसी द्वारा मामलों को देखकर निर्धारित किया जाएगा।

दीर्घावधि के ग्राहकों द्वारा चुकाए जाने वाले ट्रांसमीशन शुल्क में कटौती करके साझा राजस्व का इस्तेमाल किया जाएगा।

विकेंद्रित सौर ऊर्जा संयंत्र के विकास पर ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने विकेंद्रित सौर ऊर्जा संयंत्रों के विकास पर ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी किए।[39] वितरण कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में विकेंद्रित सौर ऊर्जा संयंत्रों से जो सौर ऊर्जा खरीदती हैं, उस खरीद पर ये दिशानिर्देश लागू होंगे। दिशानिर्देश सौर ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती एवं भरोसेमंद सौर ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर 11 अक्टूबर, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • प्रॉजेक्ट्स की पहचान और चयन: डिस्कॉम्स दिन के समय औसत जरूरत के आधार पर सभी सबस्टेशनों में सौर ऊर्जा क्षमता को चिन्हित करेंगे। इसके बाद कंपनियां बिल्ड, ओन और ऑपरेशन के आधार पर सौर ऊर्जा संयंत्रों के विकास के लिए खुली बोली लगाएंगी।
  • प्रॉजेक्ट का विवरण: डिस्कॉम और सौर ऊर्जा उत्पादक 25 वर्षों की अवधि के लिए पावर परचेस एग्रीमेंट करेंगे। जहां डिस्कॉम प्रॉजेक्ट के लिए जमीन और कनेक्टिविटी देती हैं, वहां संयंत्र को एग्रीमेंट की तारीख से नौ महीनों के भीतर चालू होना चाहिए। दूसरी स्थिति में यह समयावधि 12 महीने है।
  • अगर न्यूनतम उत्पादन की जरूरत में कोई कमी है तो पावर परचेस एग्रीमेंट के आधार पर उत्पादक डिस्कॉम को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार होगा। बाकी सभी सौर ऊर्जा संयंत्रों को ग्रिड रेगुलेशन का अनुपालन करना होगा।
  • कोऑर्डिनेटर बॉडी: राज्य की नोडल एजेंसी इन सौर ऊर्जा प्रॉजेक्ट्स से संबंधित मामलों में डिस्कॉम्स के साथ समन्वय के लिए जिम्मेदार होगी। नोडल एजेंसी जरूरी मंजूरी हासिल करने और प्रॉजेक्ट के विकास में उत्पादकों की सहायता भी करेगी।

 

दक्षता विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

अप्रेंटिसशिप नियम, 1992 में संशोधन अधिसूचित

दक्षता विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने अप्रेंटिसशिप नियम, 1992 में संशोधनों को जारी किया।[40]  इन नियमों को अप्रेंटिसशिप एक्ट, 1961 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया था। एक्ट अप्रेंटिसों के प्रशिक्षण के रेगुलेशन और नियंत्रण का प्रावधान करता है। संशोधनों में मुख्य परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • प्रशिक्षु: संशोधनों में कहा गया है कि किसी इस्टैबलिशमेंट में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाला प्रत्येक अप्रेंटिस एक प्रशिक्षु होगा, कर्मचारी नहीं। इसलिए अप्रेंटिस पर कोई श्रम कानून लागू नहीं होगा।
  • इस्टैबलिशमेंट का आकार: 1992 के नियमों के अंतर्गत छह या उससे अधिक श्रमिकों वाले नियोक्ता अप्रेंटिस रखने के पात्र होंगे। संशोधन इस्टैबलिशेंट के आकार को कम करते हैं और कहते हैं कि छह से चार श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट में अप्रेंटिस रखे जा सकते हैं।
  • इसके अतिरिक्त 40 से कम श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट्स पर अप्रेंटिस रखने की अनिवार्य बाध्यता नहीं है। संशोधन 30 या उससे अधिक श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट में अप्रेंटिस रखना अनिवार्य करते हैं।
  • इस्टैबलिशमेंट में अप्रेंटिस की संख्या:1992 के नियमों के अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक इस्टैबलिशमेंट को अपने कुल कर्मचारियों (ठेके पर रखने जाने वाले कर्मचारियों सहित) में 2.5%-10% अप्रेंटिस रखने होंगे। संशोधन कहते हैं कि प्रत्येक इस्टैबलिशमेंट को अपने कुल कर्मचारियों में 2.5%-15% अप्रेंटिस रखने होंगे। इनमें से 5% फ्रेशर अप्रेंटिस और दक्षता सर्टिफिकेट वाले अप्रेंटिसों के लिए आरक्षित होगा।
  • अप्रेंटिस को स्टाइपेंड का भुगतान: 1992 के नियमों में अधिसूचित न्यूनतम वेतन और प्राप्त प्रशिक्षण के आधार पर अप्रेंटिस को देय स्टाइपेंड की दरें दी गई हैं। संशोधनों में अप्रेंटिस की क्वालिफिकेशन के आधार पर विभिन्न दरें दी गई हैं। इनका विवरण निम्नलिखित है:

तालिका 3:  अप्रेंटिस को दिया जाने वाला स्टाइपेंड

श्रेणी

स्टाइपेंड की न्यूनतम राशि (रुपए प्रति महीने)

स्कूल पास-आउट (कक्षा पांच से नौ)

5,000

स्कूल पास-आउट (कक्षा 10)

6,000

स्कूल पास-आउट (कक्षा 12)

7,000

राष्ट्रीय/राज्य सर्टिफिकेट होल्डर

7,000

वोकेशनल सर्टिफिकेट होल्डर

7,000

टेक्नीशियन

8,000

ग्रैजुएट

9,000

 

सूचना और प्रसारण

Saket Surya (saket@prsindia.org)

बधिरों के लिए टेलीविजन कार्यक्रमों हेतु सुगमता संबंधी मानक जारी

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बधिरों के लिए टेलीविजन कार्यक्रमों हेतु सुगमता संबंधी मानक जारी किए हैं (परंपरागत हार्डवेयर के जरिए या इंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स के जरिए)।[41] यह विकलांग व्यक्तियों के अधिकार एक्ट, 2016 के अनुरूप है। सुगमता संबंधी मानकों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

एसेस के तरीके

  • सर्विस प्रोवाइडर्स से यह अपेक्षा की जाती है कि वे विशिष्ट टेलीविजन कार्यक्रमों को एसेस करने के लिए निम्नलिखित में से कोई एक या अनेक विकल्प प्रदान करें: (i) सब-टाइटिल्स, (ii) ओपन या क्लोज्ड कैपशनिंग, या (iii) संकेत भाषा।
  • चैनल की भाषा या लक्षित दर्शकों और लक्षित क्षेत्र सहित विभिन्न कारकों पर आधारित किसी दूसरी उपयुक्त भाषा में सब-टाइटिल्स या ओपन कैप्शनिंग या क्लोस्ड कैप्शनिंग प्रदान किए जाने चाहिए।
  • अगर संकेत भाषा को प्रस्तुत किया जा रहा है तो सर्विस प्रोवाइडर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साइनर के हाथ और चेहरे के भाव दिखाई दे। साइनर की इमेज स्क्रीन की दाईं तरफ होनी चाहिए और उसे पिक्चर के एक बटे छह हिस्से से छोटी जगह नहीं दी जानी चाहिए।
  • विदेशी भाषा के टेलीविजन कार्यक्रमों में अंग्रेजी या किसी दूसरी भाषा में क्लोस्ड कैप्शन्स होने चाहिए।
  • सर्विस प्रोवाइडर्स को बधिरों के लिए कस्टमर सर्विस की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इसके अतिरिक्त सरकार तथा सर्विस प्रोवाइडर्स को टेलीविजन कार्यक्रमों की सुगमता के संबंध में जागरूकता फैलाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।

छूट

  • जिन टीवी चैनलों का ऑडियंस शेयर साल में 1% से भी कम है, उन्हें इन नियमों से छूट प्राप्त है।
  • मानक कंटेंट के कुछ फॉरमैट्स को इन नियमों से छूट देते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट सहित लाइव और डेफर्ड लाइव कंटेंट या घटनाएं, (ii) लाइव न्यूज़, या अवार्ड शोज़ और लाइव रिएलिटी शोज़ सहित दूसरी घटनाएं, और (iii) विज्ञापन या टेलीशॉपिंग कंटेंट।

इन मानकों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनरल इंटरटेनमेंट, फिल्म आधारित और न्यूज चैनलों का कम से कम 50% कंटेंट 2025 तक सुगम सेवा प्रदान करे। हर दो वर्षों में इन मानकों की समीक्षा की जाएगी।

 

विदेशी मामले

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

राष्ट्रपति का स्लोवेनिया दौरा

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने स्लोवेनिया का दौरा किया। दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) वैज्ञानिक और तकनीकी समन्वय, (ii) संस्कृति, कला, शिक्षा, खेल और मास मीडिया, और (iii) वाणिज्य और उद्योग।[42]

मंगोलिया के राष्ट्रपति का भारत दौरा

मंगोलिया के राष्ट्रपति खल्तमागीन बत्तुल्गा ने भारत का दौरा किया। दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सांस्कृतिक आदान-प्रदान, (ii) आपदा प्रबंधन, (iii) अंतरिक्ष की खोज और (iv) पशु स्वास्थ्य।[43]

प्रधानमंत्री के रूस दौरे के दौरान वाणिज्यिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षऱ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस का दौरा किया। उनके दौरे के दौरान विभिन्न भारतीय और रूसी संस्थाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में 35 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) खनन, (ii) दक्षता विकास, और (iii) फसल सुरक्षा।[44]

प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 74वें सत्र को संबोधित किया।[45] अपने संबोधन में उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को समाप्त करने, प्रत्येक परिवार को पानी प्रदान करने और पांच वर्षों में ट्यूबरक्लॉसिस को समाप्त करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। विश्व स्तर पर उन्होंने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

यूएनजीए में प्रधानमंत्री ने कैरेबियन कम्यूनिटी एंड कॉमन मार्केट (कैरिकॉम) समूह के नेताओं से मुलाकात की।[46]  इस बैठक में बारबाडोस, डोमिनिका और जमैका के नेताओं ने भाग लिया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कैरिकॉम में सामुदायिक विकास प्रॉजेक्ट्स के लिए 14 मिलियन डॉलर का अनुदान और जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रॉजेक्ट्स के लिए 150 मिलियन डॉलर का ऋण देने की घोषणा की।

 

[1]Developments in Indias Balance of Payments during the First Quarter (April-June) of 2019-20, Reserve Bank of India, September 30, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR8229289277C97B54780AA910493FCF7E448.PDF.

[2] The Taxation Laws (Amendment) Ordinance, 2019, No. 15 of 2019, Gazette of India, Ministry of Law and Justice, September 20, 2019, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2019/212631.pdf.

[3]External Benchmark Based Lending, Notifications, Reserve Bank of India, September 4, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NOTI53B238D8EB8CD847E7AE8031090F4DCE00.PDF.

[4]Report of the Internal Study Group to Review the Working of the Marginal Cost of Funds Based Lending Rate System, Reserve Bank of India, September 2017, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs//PublicationReport/Pdfs/MCLRCFF20B31A4A24D0487D8659079CF392B.PDF.

[5]Report of the Committee on the development of Housing Finance Securitisation Market, Reports, Reserve Bank of India, September 9, 2019,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PublicationReport/Pdfs/HOUSINGFINANCESECURITISATION42BEC7A160F34B56A6893ECB71223D65.PDF.

[6]Reserve Bank of India Constitutes Committee on the Development of Housing Finance Securitisation Market, Press Releases, Reserve Bank of India, May 29, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=47156.

[7]Report of the Task Force on the Development of Secondary Market for Corporate Loans, Reports, Reserve Bank of India, September 3, 2019,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PublicationReport/Pdfs/DSMCLOANSBB7C3EDF738D4038B734E909AC054D68.PDF.

[8]Reserve Bank of India Constitutes Task Force on the Development of Secondary Market for Corporate Loans, Press Releases, Reserve Bank of India, May 29, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=47155.

[9]Report of the Internal Working Group to review the Liquidity Management Framework, Reports, Reserve Bank of India, September 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs//PublicationReport/Pdfs/IWGREPORT17135173C7384084ACE10A75E8C35D93.PDF.

[10]RBI releases the Report of the Internal Working Group to Review the Liquidity Management Framework, Press Releases, Reserve Bank of India, September 26, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=48247.

[11]Priority Sector Lending (PSL) – Classification of Exports under priority Sector, Notifications, Reserve Bank of India, September 20, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11692&Mode=0.

[12]Master Direction - Priority Sector Lending Targets and Classification, Master Directions, Reserve Bank of India, December 4, 2018, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_ViewMasDirections.aspx?id=10497.

[13]Working Group to examine and recommend linking of motor insurance premium with traffic violations, Insurance and Regulatory Development Authority of India, IRDAI/NL/ORD/MISC/153/09/2019, September 6, 2019, https://www.irdai.gov.in/ADMINCMS/cms/whatsNew_Layout.aspx?page=PageNo3893&flag=1.

[14]SEBI constitutes working group on Social Stock Exchanges’ (SSE)’, Press Releases, Securities and Exchange Board of India, September 19, 2019, https://www.sebi.gov.in/media/press-releases/sep-2019/sebi-constitutes-working-group-on-social-stock-exchanges-sse-_44311.html.

[15] Budget Speech 2019-20, Union Budget, Ministry of Finance, https://www.indiabudget.gov.in/budgetspeech.php.

[16] Constitution of task force for drawing up National Infrastructure Pipeline of Rs. 100 Lakh Crore from FY 2019-20 to FY 2024-25, Press Information Bureau, Ministry of Finance, September 7, 2019.

[17] The Prohibition of Electronic Cigarettes (Production, Manufacture, Import, Export, Transport, Sale, Distribution, Storage, and Advertisement) Ordinance, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Prohibition%20of%20Electronic%20Cigarettes%20Ordinance%2C%202019.pdf.

[18] "The Healthcare Service Personnel and Clinical Establishments (Prohibition of violence and damage to property) Bill, 2019", Ministry of Health and Family Welfare, September 2, 2019, https://mohfw.gov.in/sites/default/files/Draft%20Bill.pdf.

 

[19] Draft Code on Social Security, https://labour.gov.in/sites/default/files/THE_CODE_ON_SOCIAL_SECURITY%2C2019.pdf.

[20] Constitution of the Company Law Committee, Ministry of Corporate Affairs, September 18, 2019, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/ConstitutionCLC_18092019.pdf.

[21] G.S.R. 623(E), Gazette of India, Ministry of Home Affairs, August 30, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/211944.pdf.  

[22] Citizenship (Registration of Citizenship and National Identity Card) Rules, 2003, http://www.nrcassam.nic.in/images/pdf/citizenship-rules.pdf.

[23] G.S.R. 659(E), Gazette of India, Ministry of Home Affairs, September 16, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/212511.pdf.

[24] Report of the Internal Working Group to Review Agricultural Credit, Reserve Bank of India, September 13, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs//PublicationReport/Pdfs/WGREPORT101A17FBDC144237BD114BF2D01FF9C9.PDF.

[25] S.O. 3427(E), Gazette of India, Ministry of Finance, September 20, 2019, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2019/212673.pdf.

[26] Income Tax Act, 1961, Ministry of Finance, As amended by the Finance (No. 2) Act, 2019, https://www.incometaxindia.gov.in/pages/acts/income-tax-act.aspx.

[27] First Advance Estimates of Production of Foodgrains and Commercial Crops for 2019-20, Directorate of Economics and Statistics, Ministry of Agriculture and FarmersWelfare, September 23, 2019, https://eands.dacnet.nic.in/Advance_Estimate/1st_Adv_Estimates2019-20_Eng.pdf.

[28]Constitution of committee of experts to deliberate on data governance framework, Ministry of Electronics and Information Technology, September 13, 2019, https://meity.gov.in/writereaddata/files/constitution_of_committee_of_experts_to_deliberate_on_data_governance-framework.pdf .

[29]Consultation Paper on Reforming the Guidelines for Transfer/Merger of Telecom Licenses, Telecom Regulatory Authority of India, September 19, 2019, https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_19092019_0.pdf.

[30]Consultation Paper on Review of Interconnection Usage Charges, Telecom Regulatory Authority of India, September 18, 2019, https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_on_IUC_18092019_0.pdf.

[31]NCST Writes to Union Home Minister & Union Tribal Affairs Minister Conveying Its recommendation to Include Union Territory of Ladakh Under 6th Schedule of Constitution Of India, Press Information Bureau, Ministry of Tribal Affairs, September 11, 2019, https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1584746.

[32] Scientific Social Responsibility Policy (Draft), Ministry of Science and Technology, September 9, 2019, https://dst.gov.in/sites/default/files/Final%20SSR%20Policy%20Draft_2019.09.09_0.pdf.

[33] G.S.R. 680(E), Ministry of Civil Aviation, September 17, 2019, http://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Section_M_and_N212696.pdf.

[34] G.S.R. 585(E), Ministry of Civil Aviation, September 16, 2019, http://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/475-29B_compressed_0.pdf.

[35] Indian Railways extends support for giving a boost to economy & announces measures of Freight incentive, Press Information Bureau, Ministry of Railways, September 12, 2019

[36] Big relief to Indian Railways PassengersMinistry of Railways, September 13, 2019

[37] The Draft Central Electricity Regulatory Commission (Sharing of Revenue Derived from Utilization of Transmission Assets for Other business) Regulations, 2019, Central Electricity Regulatory Commission, September 25, 2019, http://www.cercind.gov.in/2019/draft_reg/SOB25092019.pdf

[38] Central Electricity Regulatory Commission (Grant of Connectivity, Long-term Access and Medium-term Open Access in inter-State Transmission and related matters) Regulations, 2009, Central Electricity Regulatory Commission, August 7, 2009, http://www.cercind.gov.in/Regulations/Final-version-of-Long-term-and-Medium-term-Regulations-2009.pdf.

[39]Stakeholders consultation on draft Guidelines for Development of Decentralised Solar Power Plants, Ministry of New and Renewable Energy, September 26, 2019, https://mnre.gov.in/sites/default/files/webform/notices/Notice%20Inviting%20Comments%20on%20DSPP%20Guideliness.doc.

[40] Amendments to the Apprenticeship Rules 1992, Ministry of Skill Development and Entrepreneurship, September 25, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/212757.pdf

[41]Accessibility Standards for persons with disabilities in television programmes, Ministry of Information and Broadcasting, September 11, 2019, https://mib.gov.in/sites/default/files/Accessibility%20Standards%20for%20Persons%20with%20Disabilities%20in%20TV%20Programmes%20.pdf.

[42] List of MoUs/Agreements signed during State Visit of President to Slovenia, Ministry of External Affairs, September 17, 2019, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/31830/List_of_MoUsAgreements_signed_during_State_Visit_of_President_to_Slovenia.

[43]List of MoUs/Documents signed between India and Mongolia during the State Visit of President of Mongolia to India (September 19-23, 2019)”, Ministry of External Affairs, September 20, 2019, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/31842/List_of_MoUsDocuments_signed_between_India_and_Mongolia_during_the_State_Visit_of_President_of_Mongolia_to_India_September_1923_2019.

[44]List of Commercial Documents signed by various Russian and Indian entities on the sidelines of the Prime Minister's visit to Vladivostok, Ministry of External Affairs, September 6, 2019, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/31801/List_of_Commercial_Documents_signed_by_various_Russian_and_Indian_entities_on_the_sidelines_of_the_Prime_Ministers_visit_to_Vladivostok.

[45]Prime Minister addresses the United National General Assembly, Press Information Bureau, Prime Ministers Office, September 27, 2019.

[46]Prime Minister met with the leaders of CARICOM at the UNGA, Press Information Bureau, Prime Ministers Office, September 26, 2019.

 

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