अप्रैल 2019 (हिंदी)

इस अंक की झलकियां

2018-19 की चौथी तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 2.86% पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति मामूली वृद्धि के साथ जनवरी 2019 में 2% से बढ़कर मार्च 2019 में 2.86% हो गई।  खाद्य पदार्थों के मूल्यों में इस तिमाही वृद्धि हुई जोकि जनवरी 2019 में -2.24% से बढ़कर मार्च 2019 में 0.3% हो गए।

रेपो और रिवर्स रेपो रेट क्रमशः 6% और 5.75% पर गिरे

मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 6.25% से 6% और रिवर्स रेपो रेट को 6% से 5.75% कर दिया। आरबीआई ने न्यूट्रल मौद्रिक नीति के स्वरूप को बरकरार रखने का फैसला किया

सर्वोच्च न्यायालय ने बैंकों के स्ट्रेस्ड एसेट्स पर आरबीआई के सर्कुलर को खारिज किया

सर्वोच्च न्यायालय ने आरबीआई के सर्कुलर को उसकी शक्तियों के दायरे से बाहर बताया। सर्कुलर में 2000 करोड़ रुपए से अधिक के स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन प्लान को लागू करने के लिए 180 दिनों की एक समान समय सीमा तय की गई थी।

राष्ट्रीय शहरी योजना फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जारी

ड्राफ्ट फ्रेमवर्क कई सुझाव देता है जैसे योजना की प्रक्रिया को गतिशील और भागीदारीपूर्ण बनाना, यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की स्थापना, और म्यूनिसिपल फाइनांसिंग में सुधार करना।

आरबीआई ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स पर ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया  

रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फिनटेक में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक रेगुलेटरी व्यवस्था प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य रेगुलेटर को इकोसिस्टम में शामिल होने का मौका देना है ताकि वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता सहज हो।

सीबीडीटी ने भारत में गैर निवासियों का मुनाफा निर्धारित करने पर केंद्रित रिपोर्ट जारी की

गैर निवासियों की आय के वस्तुनिष्ठ निर्धारण के लिए थ्री फैक्टर मैथड का सुझाव दिया गया है जिसमें बिक्री, कर्मचारियों और एसेट्स को समान वेटेज दिया जाएगा। चौथे फैक्टर, यूजर्स, को भी कुछ मामलों में प्रस्तावित किया गया है।

आईएमडी ने दक्षिण पश्चिमी मानसून में वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया

मानसून में मौसमी वर्षा (जून-सितंबर 2019 की अवधि) के दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के 96% रहने का अनुमान है जिसमें 5% की कमी-बेशी हो सकती है। एलपीए के 96-104% के बीच होने पर वर्षा को सामान्य माना जाता है।

 

नोट: उल्लेखनीय है कि आदर्श आचार संहिता 10 मार्च, 2019 से लागू है जोकि 17वीं लोकसभा के चुनावों के बाद समाप्त होगी। इस अवधि में सरकार भारतीय निर्वाचन आयोग की पूर्व मंजूरी के बिना कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकती।

 

वृहद आर्थिक विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

2018-19 की चौथी तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 2.86% पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष: 2011-12, वर्ष दर वर्ष) जनवरी 2019 में 2% से बढ़कर मार्च 2019 में 2.86% हो गई।[1]  इस तिमाही में खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जनवरी में 2.24% की अपस्फीति हुई और मार्च में 0.3% की मामूली मुद्रास्फीति हुई।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष: 2011-12, वर्ष दर वर्ष) जनवरी 2019 में 2.76% से बढ़कर मार्च 2019 में 3.18% हो गई।[2]  रेखाचित्र 1 में 2018-19 की चौथी तिमाही के दौरान मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियों को प्रदर्शित किया गया है।

रेखाचित्र 1: 2018-19 की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियां (परिवर्तन का %, वर्ष दर वर्ष)

Sources: Ministry of Statistics and Programme Implementation; Ministry of Commerce and Industry; PRS.

रेपो और रिवर्स रेपो रेट क्रमशः 6% और 5.75% पर गिरे

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 2019-20 के लिए अपना पहला द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य जारी किया।[3]  पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) बैंकों को ऋण देता है) सदस्यों के बहुमत से 6.25% से घटाकर 6% कर दी गई। छह में से दो सदस्यों ने इस दर में परिवर्तन न करने के लिए वोट दिया था। एमपीसी के अन्य फैसलों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिजर्व रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) को 6% से घटाकर 5.75% कर दिया गया।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज खरीदता या रीडिस्काउंट करता है) को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया गया। इसके अतिरिक्त यह फैसला लिया गया कि न्यूट्रल मौद्रिक नीति के स्वरूप को बरकरार रखा जाए।

 

वित्त

सर्वोच्च न्यायालय ने बैंकों के स्ट्रेस्ड एसेट्स पर आरबीआई के सर्कुलर को खारिज किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सर्वोच्च न्यायालय ने आरबीआई द्वारा 12 फरवरी, 2018 को जारी सर्कुलर को खारिज कर दिया।[4]  यह सर्कुलर 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के स्ट्रेस्ड एसेट्स की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए फ्रेमवर्क प्रस्तुत करता था।[5] 

सर्कुलर में रीस्ट्रक्चरिंग के लिए रेज़ोल्यूशन प्लान सौंपने की समय सीमा दी गई थी। यह समय सीमा 180 दिन की थी। मौजूदा डीफॉल्ट्स के लिए 180 दिन की समय सीमा 1 मार्च, 2018 से शुरू होती थी। इसके बाद डीफॉल्ट करने वालों को डीफॉल्ट की तारीख से 180 दिनों के भीतर यह रेज़ोल्यूशन प्लान सौंपना होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि सर्कुलर जारी करने का अधिकार बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) एक्ट, 2017 के अनुच्छेद 35एए के दायरे में नहीं आता।[6]  अदालत ने तर्क दिया कि 2017 के एक्ट में सेक्शन 35एए को इसलिए प्रस्तावित किया गया था ताकि आरबीआई केवल विशिष्ट देनदारों के डीफॉल्ट्स के विशिष्ट मामलों में निर्देश जारी कर सके। अदालत ने कहा कि आरबीआई के सर्कुलर में सामान्य देनदारों के संबंध में निर्देश जारी किया गया था और यह उसके अधिकारों के दायरे में नहीं आता। अदालत ने यह भी फैसला दिया कि इसके परिणामस्वरूप आरबीआई सर्कुलर के अंतर्गत शुरू की गई आईबीसी की सभी कार्यवाहियों को रद्द किया जाता है।

अदालत के आदेश पर पीआरएस ब्लॉग पढ़ें

आरबीआई ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स पर ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

आरबीआई ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स पर लोगों से फीडबैक लेने के लिए एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया।[7] आरबीआई ने 2016 में एक इंटर रेगुलेटरी वर्किंग ग्रुप बनाया था ताकि वित्तीय तकनीकी क्षेत्र के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा की जा सके। उस ग्रुप ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के फ्रेमवर्क का सुझाव दिया था।

सैंडबॉक्स एक ऐसा वातावरण देता है जिसमें बाजार के प्रतिभागियों को ग्राहकों के साथ एक नियंत्रित वातावरण में नए उत्पादों, सेवाओं या बिजनेस मॉडल्स को टेस्ट करने का मौका मिलता है। सैंडबॉक्स का उद्देश्य ऐसे रेगुलेशन्स तैयार करना है जोकि कम लागत के वित्तीय उत्पादों को सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराएं। ड्राफ्ट फ्रेमवर्क की मुख्य बातों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • योग्यता (एलिजिबिलिटी): सैंडबॉक्स निम्नलिखित स्थितियों में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है (क) जहां गवर्निंग रेगुलेशन नहीं हैं, (ख) रेगुलेशन्स में ढिलाई करने से नए प्रयोग करना आसान हो, या (ग) नए प्रयोग से वित्तीय सेवाओं की डिलिवरी सुविधाजनक हो सकती हो।
  • इसके मद्देनजर ड्राफ्ट फ्रेमवर्क ने नए उत्पादों, सेवाओं और तकनीकों की सांकेतिक सूची चिन्हित की जिन्हें सैंडबॉक्स में टेस्ट किया जा सकता है। इनमे रीटेल पेमेंट्स, मनी ट्रांसफर सेवाएं, मोबाइल तकनीक आवेदक, डेटा विश्लेषक, वित्तीय सलाहकार सेवाएं, वित्तीय समावेश और साइबर सुरक्षा उत्पाद शामिल हैं।
  • ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में कहा गया कि सैंडबॉक्स में उसी फिनटेक कंपनी को शामिल किया जाएगा, जोकि भारत में निगमित और पंजीकृत हो और स्टार्टअप के मानदंडों को पूरा करती हो। इसके अतिरिक्त एंटिटी का शुद्ध मूल्य उसकी हालिया ऑडिटेड बैलेंस शीट में कम से कम पचास लाख रुपए हो। उल्लेखनीय है कि एंटिटी को स्टार्टअप माना जाता है, अगर (i) वह अधिकतम सात वर्ष पहले पंजीकृत हुई हो, (ii) किसी वित्तीय वर्ष में उसका टर्नओवर 25 करोड़ से अधिक न हो, और (iii) वह उत्पादों, प्रक्रियाओं या सेवाओं में नए प्रयोग, विकास या सुधार के लिए कार्य कर रही हो।
  • समय-सीमा: सैंडबॉक्स की प्रक्रिया 26 हफ्तों में पूरी होगी और उसके पांच चरण होंगे। इन चरणों में उत्पादों की शुरुआती स्क्रीनिंग, टेस्ट डिजाइन, आवेदन का आकलन, टेस्टिंग और मूल्यांकन शामिल है। इसके कार्यान्वयन पर आरबीआई की फिनटेक यूनिट निगरानी रखेगी।

ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पर 8 मई, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

सीबीडीटी ने गैर निवासियों का मुनाफा निर्धारित करने पर केंद्रित रिपोर्ट जारी की

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय प्रत्यक्ष कराधान बोर्ड (सीबीडीटी) ने भारत में गैर निवासियों के कराधान के लिए मुनाफा निर्धारित करने से संबंधित एक रिपोर्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[8] गैर निवासियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारत में एक वर्ष में 182 से कम दिनों तक रहने वाले व्यक्ति, (ii) कंपनी एक्ट, 1956 में पंजीकृत न होने वाली कंपनियां या ऐसी कंपनियां जिनका मुख्य और व्यावसायिक फैसले लेने वाला मैनेजमेंट भारत से बाहर स्थित है, या (iii) ऐसी फर्म्स या संस्थाएं जिनका मैनेजमेंट पूरी तरह भारत से बाहर स्थित है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के अनुसार, गैर निवासियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे भारत में अपने कामकाज से प्राप्त या अर्जित होने वाली आय पर इनकम टैक्स चुकाएंगे। ऐसे कामकाज के लिए अलग से मेनटेन किए जाने वाले एकाउंट्स, या टर्नओवर के एक निश्चित प्रतिशत, या एसेसिंग ऑफिसर के विवेक के आधार पर इस आय को कैलकुलेट किया जाता है।

सीबीडीटी ने गैर निवासियों के कामकाज में मुनाफे के निर्धारण के लिए एक मैथोडोलॉजी की समीक्षा की। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विवेकाधीन शक्तियां: कमिटी ने गौर किया कि एसेसिंग ऑफिसर को गैर निवासियों की आय के निर्धारण में बहुत अधिक विवेकाधीन शक्तियां प्राप्त हैं। ऑफिसर्स मुनाफे के निर्धारण के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं जिससे अनिश्चितता और कर विवाद पैदा होते हैं। यह सुझाव दिया गया कि इसके लिए एक यूनिफॉर्म नियम या वस्तुनिष्ठ तरीके का इस्तेमाल किया जाए।
  • मुनाफे का निर्धारण: कमिटी ने थ्री फैक्टर मेथड का सुझाव दिया जिसमें मुनाफे के निर्धारण के लिए बिक्री, कर्मचारी और एसेट्स का प्रयोग किया जाए और हर फैक्टर को बराबर का वेटेज दिया जाए। इन्हीं तीन फैक्टर्स का इस्तेमाल करके भारत से प्राप्त मुनाफे का अनुमान लगाकर एक ऑपरेशन का मुनाफा निकाला जाना चाहिए। भारत से प्राप्त होने वाले मुनाफे की गणना राजस्व के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में की जानी चाहिए: (i) विश्वव्यापी ऑपरेशनल प्रॉफिट मार्जिन, या (ii) दो प्रतिशत, इनमें से जो भी अधिक हो, उसी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • यूजर्स: कमिटी ने कहा कि किसी ऑपरेशन के यूजर्स के जरिए भी मुनाफे का आकलन किया जाना चाहिए, खासकर जिन मामलों में यूजर्स मुनाफे में व्यापक योगदान देते हों, जैसे डिजिटल कंपनियां। यूजर्स एसेट्स या कर्मचारियों का विकल्प हो सकते हैं और मुनाफा कमाने में योगदान दे सकते हैं। यह सुझाव दिया गया कि निम्न और मध्यम दर्जे के यूजर इन्टेंसिटी बिजनेस मॉडल में यूजर्स को 10% का वेटेज दिया जाए और बाकी तीन फैक्टर्स को 30% वेटेज दिया जाए। उच्च दर्जे के यूजर इन्टेंसिटी बिजनेस मॉडल में यूजर्स को 20% का वेटेज दिया जाए और बिक्री को 30% और कर्मचारी एवं एसेट्स में से प्रत्येक को 25% का वेटेज दिया जाए।

कमिटी की रिपोर्ट पर 18 मई, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

आरबीआई ने फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स को म्यूनिसिपल बॉन्ड्स में निवेश की अनुमति दी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (एफपीआईज़) अब म्यूनिसिपल बॉन्ड्स में निवेश कर सकेंगे। यह स्टेट डेवलपमेंट लोन्स में एफपीआई निवेश हेतु निर्धारित सीमा के अधीन होगा।[9]  म्यूनिसिपल बॉन्ड्स नगर पंचायत, म्यूनिसिपल काउंसिल या म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन द्वारा जारी डेट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं। स्टेट डेवलपमेंट लोन्स में निवेश की वर्तमान सीमा बकाया स्टॉक सिक्योरिटीज़ का 2% है।[10]

इस पहल का उद्देश्य भारत में डेट इंस्ट्रूमेंट्स तक गैर निवासियों की पहुंच को बढ़ाना है। इससे पूर्व एफपीआईज़ को डेटेड गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़, ट्रेज़री बिल्स और क्रेडिट एनाहान्स्ड बॉन्ड्स जैसी सिक्योरिटीज़ खरीदने की अनुमति थी।

 

आवासीय और शहरी मामले

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

राष्ट्रीय शहरी योजना फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जारी

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय शहरी योजना फ्रेमवर्क (एनयूपीएफ), 2018 का ड्राफ्ट जारी किया।[11]  एनयूपीएफ को दो आधार पर तैयार किया गया है:(i) शहरी योजना के 10 मुख्य फिलॉसोफिकल सिद्धांत, और (ii) फिर इन सिद्धांतों को शहरी स्पेस और मैनेजमेंट के 10 फंक्शनल एरियाज़ में लागू करना। यह फ्रेमवर्क इन फंक्शनल एरियाज़ के संबंध में सुझाव देता है। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • शहरी योजना: मास्टर प्लान्स को गतिशील होना चाहिए और उनके साथ रणनीतिक, कार्रवाई केंद्रित योजना होनी चाहिए। साथ ही उसके साथ उनका बजट संलग्न होना चाहिए। इन योजनाओं को भूमि उपयोग, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर सेवा प्रावधान और आर्थिक विकास से जुड़ी एजेंसियों के साथ समन्वय और चर्चा के बाद तैयार किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त योजना का प्रारूप तैयार करते समय सभी की भागीदारी होनी चाहिए और इसमें अलग-अलग तरह के लोगों के विचार शामिल होने चाहिए जिनमें महिलाएं, युवा और प्रवासी लोग शामिल हैं।
  • शहरों में वित्त: राज्यों को शहरों के लिए मानदंड निर्धारित करने चाहिए ताकि शहर अपने राजस्व से अपनी व्यय संबंधी जरूरतें पूरी कर सकें और पूंजीगत कार्यों के लिए न्यूनतम राशि निर्धारित कर सकें। जहां सेवाओं को मापा जा सकता हो और लाभार्थियों को चिन्हित किया जा सकता हो, वहां यूजर चार्जेज़ का आकलन किया जाना चाहिए और उन्हें जमा किया जाना चाहिए।
  • शहरी शासन: वर्तमान में निगम स्तर पर मेयर, कमीशनर और काउंसिल की भूमिकाएं बिखरी हुई और अस्पष्ट हैं। ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में उन्हें कोडिफाई करने का सुझाव दिया गया है ताकि निगम स्तर पर उनके कार्य तय और स्पष्ट हो जाएं। विभिन्न स्तरों (वॉर्ड कमिटीज़/एरिया सभा, म्यूनिसिपल और क्षेत्रीय स्तर) पर धनराशि के संवितरण, पदाधिकारों और कार्यों के लिए सबसिडियरिटी के सिद्धांत का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • परिवहन: सभी शहरों में यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी बनाई जानी चाहिए जो एक व्यापक दृष्टिकोण से लैस हो। इसके अतिरिक्त एक ऐसी अथॉरिटी भी होनी चाहिए जोकि ट्रैफिक फ्लो प्लानिंग के संबंध में फैसले ले। वर्तमान में यह मामला ट्रैफिक पुलिस के नियंत्रण में है।
  • हाउसिंग: प्रधानमंत्री आवास योजना के दिशानिर्देशों के आधार पर तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से एनयूपीएफ के अंतर्गत राष्ट्रीय हाउसिंग स्टॉक तैयार किया जाना चाहिए। भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रॉपर्टी राइट्स का निम्नलिखित के आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए: (i) मार्केट एक्सचेंज को शुरू करके, (ii) टेन्योर को सुरक्षित करके, और (iii) बाजार के कारण होने वाले विस्थापन से सुरक्षा प्रदान करके। रेंटल हाउसिंग की सुविधा और उसके प्रबंधन के लिए सरकारी नीतियां बनाई जानी चाहिए।

ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पर 31 मई, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

कृषि

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

आईएमडी ने दक्षिण पश्चिमी मानसून में वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 2019 में दक्षिण पश्चिमी मानसून में वर्षा का पहला दीर्घावधि (मौसमी) पूर्वानुमान जारी किया।[12] मानसून में मौसमी वर्षा (जून-सितंबर 2019 की अवधि) के दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के 96% रहने का अनुमान है जिसमें 5% की कमी-बेशी हो सकती है। एलपीए के 96-104% के बीच होने पर वर्षा को सामान्य माना जाता है। 1951 से 2000 की अवधि के दौरान किसी क्षेत्र में औसत वर्षा को एलपीए कहा जाता है जोकि पूरे देश के लिए 89 सेंटीमीटर है।

2018 में दक्षिण पश्चिम मानसून में कुल वर्षा के एलपीए के 97% रहने का अनुमान था, जबकि वास्तविक वर्षा एलपीए का 91% रही थी।[13]

 

गृह मामले

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

मंत्रालय ने नियंत्रण रेखा के जरिए व्यापार को स्थगित किया

गृह मामलों के मंत्रालय ने 19 अप्रैल, 2019 से जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर होने वाले व्यापार को स्थगित करने के आदेश जारी किए।[14]  उल्लेखनीय है कि जम्मू और कश्मीर के बारामुला और पुंछ जिलों में दो ट्रेड फेसिलिटेशन सेंटर्स के जरिए एलओसी के आस-पास के स्थानीय निवासियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाता था। केंद्र सरकार को मिली इन रिपोर्ट्स के आधार पर यह फैसला लिया गया कि गैर कानूनी हथियारों और मादक पदार्थों को लाने के लिए इन व्यापार मार्गों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश के चार थाना क्षेत्रों से आफ्स्पा हटाया गया

गृह मामलों के मंत्रालय ने चार थाना क्षेत्रों के क्षेत्राधिकार से सशस्त्र सेना (विशेष अधिकार) एक्ट, 1958 (आफ्स्पा) हटा लिया है[15],[16]  ये पुलिस स्टेशन हैं: (i) पश्चिम कामेंग जिले के बालेमू और भालुकपोंग, (ii) पूर्वी कामेंग जिले का सेइजोसा, (iii) पापुमपारे जिले का बालीजान। इसके बाद एक्ट अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों और राज्य के चार थाना क्षेत्रों के क्षेत्राधिकार में लागू होगा। 

 

उर्वरक

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

कैबिनेट ने नई यूरिया नीति 2015 की समयावधि बढ़ाने को मंजूरी दी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने नई यूरिया नीति 2015 की समयावधि को 1 अप्रैल, 2019 से अगले आदेश तक बढ़ाने को मंजूरी दे दी।[17] इस नीति को मई 2015 में जारी किया गया था।[18]  नीति देसी यूरिया के उत्पादन को बढ़ाने, उत्पादन में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने और केंद्र सरकार पर सबसिडी का भार कम करने का प्रयास करती है।

 

 

[1]Consumer Price Index Numbers on Base 2012=100 for Rural, Urban and Combined for the month of March 2019, Press Release, Ministry of Statistics and Programme Implementation, April 12, 2019, http://mospi.nic.in/sites/default/files/press_release/Press%20Statement_2.pdf.

[2]Index Numbers of Wholesale Price in India (Base: 2011-12=100): Review for the month of March, 2019, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, April 15, 2019.

[3]First Bi-Monthly Policy Statement 2019-20, Press Release, Reserve Bank of India, April 18, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=46838.

[4] Dharani Sugars and Chemicals Ltd. vs. Union of India (UOI) and Ors, 2019 (5) SCALE629, https://www.sci.gov.in/supremecourt/2018/42591/42591_2018_Judgement_02-Apr-2019.pdf.

[5] Resolution of Stressed Assets Revised Framework, Press Release, Reserve Bank of India, February 12, 2018, https://www.rbi.org.in/scripts/NotificationUser.aspx?Id=11218&Mode=0.

[6] The Banking Regulation (Amendment) Bill, 2017, https://www.prsindia.org/billtrack/banking-regulation-amendment-bill-2017.

[7] Draft Enabling Framework for Regulatory Sandbox, Press Release, Reserve Bank of India, April 18, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PublicationReport/Pdfs/EFRARESADC108A0A98E146479C6D39D36EA5A76A.PDF.

[8] F. No. 500/33/2017-FTD.I, Central Board of Direct Taxes, Department of Revenue, Ministry of Finance, April 18, 2019, https://www.incometaxindia.gov.in/news/public_consultation_notice_18_4_19.pdf.

[9] Investment by Foreign Portfolio Investors (FPI) in Debt Review, Notifications, Reserve Bank of India, April 25, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NOTI17632250E0B16FF499893CB9D2A55359D93.PDF.

[10] Investment by Foreign Portfolio Investors (FPI) in Government Securities

Medium Term Framework, Notifications, Reserve Bank of India, March 27, 2019, http://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT152CA2766B3B4734D7893EF6457A419AF3F.PDF.

[11] Draft National Urban Planning Framework (NUPF), 2018, Ministry of Housing and Urban Affairs, https://smartnet.niua.org/sites/default/files/resources/nupf_final.pdf.

[12]Long Range Forecast of the 2019 Southwest Monsoon Rainfall, Press Release, India Meteorological Department, Ministry of Earth Sciences, April 15, 2019, http://www.imd.gov.in/pages/press_release_view.php?ff=20190415_pr_451.

[13]End of Season Report for the 2018 Southwest Monsoon, Press Release, India Meteorological Department, Ministry of Earth Sciences, November 2, 2018, http://www.imd.gov.in/pages/monsoon_main.php.

[14]Suspension of LoC Trade between J&K and POJK, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, April 18, 2019

[15] S.O. 1494(E)., Ministry of Home Affairs, April 1, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/201394.pdf.

[16] S.O. 5020(E)., Ministry of Home Affairs, October 1, 2018, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2018/190334.pdf.

[17] Cabinet approves extension of duration of New Urea Policy-2015 for existing gas based urea unit, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, April 15, 2019.

[18] Approval to comprehensive New Urea Policy 2015, Press Information Bureau, Cabinet, May 13, 2015.

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।