जून 2019

इस अंक की झलकियां

17वीं लोकसभा का पहला सत्र प्रारंभ

सत्र के दौरान 40 नए बिल्स को प्रस्तावित, विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इनमें अध्यादेशों का स्थान लेने वाले बिल्स भी हैं। इसके अतिरिक्त विचार और पारित करने के लिए दो लंबित बिल्स को सूचीबद्ध किया गया है।

राष्ट्रपति ने नई सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए संसद को संबोधित किया

अभिभाषण में मैक्रो इकोनॉमी, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण, कृषि और शिक्षा जैसे मुख्य क्षेत्रों की उपलब्धियों का उल्लेख था। पांच वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य निर्धारित है।

रेपो रेट घटकर 5.75% और रिवर्स रेपो रेट घटकर 5.5%

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट को 0.25% कम किया। उसने अपनी नीति को तटस्थ से उदार बनाया है और इसी से इन रेट्स में और कटौती की संभावना जताई जा रही है।

2018-19 की चौथी तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 0.7%

2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) की तुलना में 2018-19 की चौथी तिमाही में देश का चालू खाता घाटा (सीएडी) 13 बिलियन USD (जीडीपी का 1.8%) से घटकर 4.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) हो गया।

संसद में स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (संशोधन) बिल, 2019 पारित

बिल उस व्यक्ति की परिभाषा में संशोधन करता है जोकि सेज की स्थापना कर सकता है। मौजूदा श्रेणियों के अतिरिक्त बिल एक ट्रस्ट, या किसी ऐसी संस्था को इस परिभाषा में शामिल करता है जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।

आठ बिल्स लोकसभा में पेश, दो बिल पारित

तीन तलाक बिल और आधार (संशोधन) बिल जैसे बिल पेश। इसके अतिरिक्त जम्मू और कश्मीर आरक्षण एक्ट, और होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल एक्ट को संशोधित करने वाले बिल लोकसभा द्वारा पारित।

भारत में डिजिटल भुगतान पर उच्च स्तरीय कमिटी ने अपनी रिपोर्ट आरबीआई को सौंपी

कमिटी ने प्रति व्यक्ति डिजिटल लेनदेन में दस गुना वृद्धि करने, जीडीपी के अनुपात के रूप मे डिजिटल लेनदेन के मूल्य को दोगुना करने और तीन वर्षों में डिजिटल भुगतान प्रयोक्ताओं को तीन गुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया।

आरबीआई ने स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन के लिए प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क जारी किया

आरबीआई ने स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन से संबंधित सर्कुलर जारी किया। उसने 30 दिनों की समीक्षा अवधि का प्रावधान किया जिस दौरान ऋणदाता रेज़ोल्यूशन प्लान और ऋणदाताओं के बीच इंटर क्रेडिटर एग्रीमेंट का निर्धारण कर सकते हैं।

कैबिनेट ने सार्वजनिक परिसर संशोधन बिल, 2019 को मंजूर किया

बिल एस्टेट ऑफिसर को यह अधिकार देता है कि वह एक विशिष्ट तरीके से सरकारी आवास से एक अनाधिकृत कब्जाधारी को निकाल सके। अधिकारी मुकदमे के दौरान आवास को होने वाले नुकसान पर शुल्क वसूल सकता है।  

जीएसटी काउंसिल ने नेशनल एंटी-प्रोफिटियरिंग अथॉरिटी को दो वर्ष का एक्सटेंशन दिया

नवंबर 2017 में नेशनल एंटी प्रोफिटियरिंग अथॉरिटी की स्थापना की गई थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जीएसटी दरों में कटौती या इनपुट क्रेडिट का लाभ, कीमतों में कमी के जरिए उपभोक्ताओं को मिल सके।

मंत्रालय ने विदेशी ट्रिब्यूनल ऑर्डर में संशोधन जारी किए

संशोधन में निम्नलिखित शामिल है: (i) अथॉरिटीज़, जोकि मामलों को ट्रिब्यूनल को संदर्भित कर सकती हैं, और (ii) असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में नामों को शामिल करने से संबंधित अपीलों से निपटने की प्रक्रिया।     

सरकार ने नए प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करने वाली टास्क फोर्स के संदर्भ की शर्तों को व्यापक बनाया (पेज 6)

अतिरिक्त शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अनाम सत्यापन और जांच, (ii) मुकदमों को कम करना और अपील का शीघ्र निपटान, (iii) प्रक्रियाओं को सरल बनाकर अनुपालन के बोझ को कम करना।

 

संसद

17वीं लोकसभा का पहला सत्र प्रारंभ

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून, 2019 से प्रारंभ हुआ।[1]  लोकसभा की बैठक कुल 30 दिन और राज्यसभा की कुल 27 दिन होगी। दो लंबित बिलों को विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। ये हैं, एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशंस बिल, 2018 और सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) बिल, 2019। इसके अतिरिक्त 40 नए बिल्स को भी प्रस्तावित, विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इनमें अध्यादेशों का स्थान लेने वाले बिल भी शामिल हैं जैसे आधार और अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2019 और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (शिक्षकों के कैडर में आरक्षण) बिल, 2019।

जून के दौरान संसद ने स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (संशोधन) बिल, 2019 को पारित किया जोकि ट्रस्ट्स को सेज स्थापित करने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त लोकसभा ने दो बिल पारित किए। ये हैं, होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 और जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल, 2019।

सत्र के दौरान लेजिसलेटिव एजेंडा के विवरण के लिए देखें

राष्ट्रपति ने संसद के पहले संयुक्त सत्र को संबोधित किया, नई सरकार की कार्यसूची को रेखांकित किया

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 20 जून, 2019 को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया।[2]  उन्होंने अपने अभिभाषण में सरकार की प्रमुख नीतिगत उपलब्धियों को रेखांकित किया। अभिभाषण के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

  • चुनाव: चुनावों की बारंबारता को कम करने के लिए ‘एक राष्ट्र, एक साथ चुनाव’ पर विचार किया जाएगा।
  • अर्थव्यवस्था: 2024 तक सरकार भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में देश की रैंकिंग में सुधार का प्रयास करेगी।
  • वित्त और बैंकिंग: 2014 से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के जरिए 7.3 लाख करोड़ रुपए हस्तांतरित हुए हैं। साथ ही, डीबीटी ने नकद लाभ को गलत हाथों में जाने से रोका है और गलत लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 ने 3.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के बैंक ऋणों के निपटारे में मदद की है।
  • कृषि: देश के सभी किसानों को आय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस पर प्रति वर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए कृषि क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।
  • शिक्षा: सरकार ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार में 10% आरक्षण देने का प्रावधान किया है। उच्च शिक्षा के लिए सरकार ने स्कॉलरशिप की राशि 25% तक बढ़ाई है और 2024 तक सीटों की संख्या को डेढ़ गुना करने का प्रयास कर रही है।
  • रोजगार: उद्यमियों को ऋण आसानी से उपलब्ध कराने के प्रावधान किए जाएंगे। सरकार 2024 तक 50,000 स्टार्टअप्स को स्थापित करने का प्रयास कर रही है। रीटेल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए छोटे रीटेलर्स के लिए पेंशन योजना को मंजूरी दी गई है। व्यापारियों के लिए राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड को गठित किया जाएगा और राष्ट्रीय रीटेल व्यापार नीति का प्रतिपादन किया जाएगा
  • स्वास्थ्य: 50 करोड़ गरीब व्यक्तियों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने के लिए आयुष्मान भारत योजना को लागू किया गया है। सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए 5,300 जन औषधि केंद्रों को खोला गया है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार देश के 112 आकांक्षी जिलों या एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करेगी। राष्ट्रीय राजमार्गों को बनाया और उनमें सुधार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अगले तीन वर्षों के दौरान लगभग दो करोड़ नए मकान बनाए जाएंगे।
  • पर्यावरण: जल संरक्षण के लिए जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 102 शहरों में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम को शुरू किया गया है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण का पीआरएस सारांश पढ़ें

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

रेपो और रिवर्स रेपो रेट में क्रमशः 5.75% और 5.5% की गिरावट

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने 2019-20 के लिए पहला द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य जारी किया।[3]  रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को उधार देता है) को 6.25% से घटाकर 6% किया गया है। एमपीसी के अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) को 6% से घटाकर 5.75% कर दिया गया है।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता या रीडिस्काउंट करता है) को 6.25% से घटाकर 6% किया गया है। इसके अतिरिक्त कमिटी ने मौद्रिक नीति को तटस्थ से उदार कर दिया गया है।

2018-19 की चौथी तिमाही के दौरान चालू खाता घाटा जीडीपी का 0.7%

2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) की तुलना में 2018-19 की चौथी तिमाही में देश का चालू खाता घाटा (सीएडी) 13 बिलियन USD (जीडीपी का 1.8%) से घटकर 4.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) हो गया।[4] इससे पहले 2018-19 की तीसरी तिमाही में सीएडी 17.7 बिलियन USD (जीडीपी का 2.7%) था। सीएडी में वर्ष दर वर्ष गिरावट का कारण यह था कि पिछले वर्ष की चौथी तिमाही में व्यापार घाटा (देश के निर्यात और आयात का अंतर) 41.6 बिलियन USD से गिरकर 2018-19 की चौथी तिमाही में 35.2 बिलियन USD हो गया था। 2017-18 की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 13.2 बिलियन USD की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 2018-19 की चौथी तिमाही में यह वृद्धि 14.2 बिलियन USD की थी।

तालिका 1 में 2018-19 की चौथी तिमाही में भारत का भुगतान संतुलन प्रदर्शित किया गया है।

तालिका 1: 2018-19 की चौथी तिमाही में भुगतान संतुलन (बिलियन USD)

 

Q4

2017-18

Q3

2018-19

Q4

2018-19

चालू खाता

-13.0

-17.7

-4.6

पूंजी खाता

25.0

13.5

19.3

त्रुटियां और चूक

1.3

-0.3

-0.4

भंडार में परिवर्तन

13.2

-4.3

14.2

Sources: Reserve Bank of India; PRS.

2017-18 की तुलना में 2018-19 में सीएडी जीडीपी के 1.8% से बढ़कर 2.1% हो गया। भारत का व्यापार घाटा 2017-18 में 160 बिलियन USD से बढ़कर 180.3 बिलियन USD हो गया। तालिका 2 में 2018-19 में भुगतान संतुलन को प्रदर्शित किया गया है।

 

तालिका 2: 2018-19 में भुगतान संतुलन (बिलियन USD)

 

2017-18

2018-19

चालू खाता

-57.2

-48.7

पूंजी खाता

54.4

91.4

त्रुटियां और चूक

-0.5

0.9

भंडार में परिवर्तन

-3.3

43.6

SourcesReserve Bank of India; PRS.  

 

वित्त

डिजिटल भुगतान को बढ़ाने के लिए उच्च स्तरीय कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

डिजिटल भुगतान को बढ़ाने हेतु गठित उच्च स्तरीय कमिटी (चेयर: नंदन नीलेकणी) ने आरबीआई को अपनी रिपोर्ट सौंपी।[5]  कमिटी के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारत में डिजिटल भुगतान की मौजूदा स्थिति की समीक्षा, (ii) अंतराल को चिन्हित करना और उसे कम करने के उपाय सुझाना, (iii) वित्तीय समावेश में डिजिटल भुगतान के मौजूदा स्तरों का मूल्यांकन, और (iv) डिजिटल भुगतान को बढ़ाने के लिए मध्यावधि की रणनीति का सुझाव देना। कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:[6]

  • लक्ष्य: कमिटी ने 3 वर्षों के लिए निम्नलिखित लक्ष्य निर्धारित किए हैं: (i) प्रति व्यक्ति डिजिटल लेनदेन में दस गुना वृद्धि (मौजूदा 22.4 से 220 प्रति वर्ष) (ii) जीडीपी के अनुपात के रूप में डिजिटल लेनदेन के मूल्य को दोगुना करना (मौजूदा 769% से 1500%), और (iii) डिजिटल भुगतान प्रयोक्ताओं की संख्या को तीन गुना (मौजूदा 10 करोड़ से 30 करोड़) करना।
  • विशिष्ट भुगतान तंत्र: वर्तमान में व्यापारी ग्राहकों से डेबिट (या क्रेडिट) कार्ड के जरिए भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंकों को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) चुकाते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार द्वारा एमडीआर पर सबसिडी देनी चाहिए और कार्ड भुगतान पर इंटरचेंज को 15 बेसिस प्वाइंट तक कम करना चाहिए ताकि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिले। उसने सुझाव दिया कि आरबीआई को एमडीआर की आवर्ती समीक्षा के लिए एक कमिटी का गठन करना चाहिए।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी): सरकार को डीबीटी के लिए कनेक्टिविटी और सत्यापन संबंधी त्रुटियों को प्रोसेस करने के लिए विशेष रूप से क्षेत्रीय भाषाओं में एक समर्पित शिकायत निवारण प्रणाली प्रदान करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त पब्लिक फाइनांशियल मैनेजमेंट सिस्टम और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसी वैलिडेशन सेवाओं को इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि गलत खाते या गलत आधार विवरण के कारण जो लेनदेन नहीं हो पाता, उस तरह के मामलों को कम किया जा सके।
  • सरकारी भुगतान: कमिटी ने सुझाव दिया कि सभी सरकारी विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पेआउट डिजिटल माध्यम से हों, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, वेतन और पेंशन शामिल हैं।
  • वित्तीय समावेश: कमिटी ने सुझाव दिया कि आरबीआई को वित्तीय समावेश से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के बीच तुलना के लिए क्वांटिटेटिव फाइनांशियल इन्क्लूजन इंडेक्स को विकसित करना चाहिए।

रिपोर्ट का पीआरएस सारांश पढ़ें।

आरबीआई ने स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन के लिए प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क जारी किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों द्वारा स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन के लिए प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क जारी किया।[7]

ये फ्रेमवर्क स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन पर आरबीआई के पहले के सर्कुलर (फरवरी 2018 में जारी) में संशोधन करता है। अप्रैल 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 के सर्कुलर को रद्द कर दिया था। न्यायालय ने कहा था कि बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) एक्ट, 2017 के अनुच्छेद 35एए में संशोधन करना आरबीआई के अधिकारों के दायरे में नहीं आता।[8]  प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क में कहा गया है कि ऋणदाताओं को डीफॉल्ट पर तुरंत लोन एकाउंट्स में स्ट्रेस को स्वीकार करना होगा और उन एसेट्स को निम्नलिखित श्रेणियों में स्पेशल मेंशन एकाउंट्स (एसएमए) के रूप में वर्गीकृत करना होगा:

तालिका 3: स्पेशल मेंशन एकाउंट की श्रेणियां

एसएमए की उप श्रेणियां

वर्गीकरण का आधार (बीच की ओवरड्यू राशि

एसएमए-0

1-30 दिन

एसएमए -1

31-60 दिन

एसएमए -2

61-90 दिन

Source: Prudential framework on resolution of stressed assets, Reserve Bank of India; PRS.

संशोधित सर्कुलर ऋणदाताओं को दो एसएमए श्रेणियों में नकद ऋण जैसी क्रेडिट सुविधाओं को वर्गीकृत करने की अनुमति देता है।

प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क डीफॉल्ट की तारीख से 30 दिनों की अवधि में समीक्षा का प्रावधान करता है। इस अवधि के दौरान ऋणदाता रेज़ोल्यूशन प्लान तय कर सकते हैं या इनसॉल्वेंसी या ऋण की रिकवरी के लिए कानूनी कार्यवाही का विकल्प चुन सकते हैं। रेज़ोल्यूशन प्लान उस प्लान को कहते हैं जिसके जरिए किसी संस्था को इनसॉल्वेंसी से बाहर निकाला जाता है।

इसके अतिरिक्त सभी ऋणदाताओं को इस समीक्षा अवधि के दौरान उन सभी मामलों में एक इंटर-क्रेडिटर एग्रीमेंट (आईसीए) करना होता है जिसमें रेज़ोल्यूशन प्लान को लागू किया जाता है। (क) कुल बकाया ऋण के 75% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले ऋणदाताओं, और (ख) 60% ऋणदाताओं की सहमति से आईसीए द्वारा लिया गया निर्णय सभी ऋणदाताओं के लिए बाध्यकारी होता है।

समीक्षा अवधि खत्म होने के 180 दिनों के भीतर रेज़ोल्यूशन प्लान को लागू किया जाना चाहिए। समीक्षा अवधि (i) संदर्भ तिथि के बाद (अगर संदर्भ तिथि पर खाता डीफॉल्ट में है), या (ii) संदर्भ तिथि के पश्चात पहले डीफॉल्ट की तारीख के बाद शुरू नहीं होनी चाहिए। विभिन्न राशियों के लिए संदर्भ तिथि तालिका 4 में दी गई है।

तालिका 4: रेजोल्यूशन प्लान के लिए संदर्भ तिथि

ऋणदाताओं के लिए कुल राशि

संदर्भ तिथि

2000 करोड़ रुपए और इससे अधिक

7 जून, 2019

1500 करोड़-2000 करोड़ रुपए

1 जनवरी, 2020

1500 करोड़ रुपए से कम

शीघ्र घोषणा की जाएगी

Source: Prudential framework on resolution of stressed assets, Reserve Bank of India; PRS.

आरबीआई ने एटीएम इंटरचेंज फी स्ट्रक्चर की समीक्षा के लिए कमिटी का गठन किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक ने एटीएम के चार्ज और फीस की समीक्षा के लिए एक कमिटी का गठन किया ताकि अनबैंक्ड क्षेत्रों में अधिक से अधिक एटीएम लगाए जा सकें।[9]   

कमिटी के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं (क) एटीएम ट्रांजैक्शन की मौजूदा लागत, चार्ज और इंटरचेंज फीस की समीक्षा, (ख) कार्डहोल्डर द्वारा एटीएम के इस्तेमाल के पैटर्न की समीक्षा, (ग) एटीएम इकोसिस्टम के साथ जुड़ी लागत का मूल्यांकन, और (घ) ऑप्टिमल इंटरचेंज फी का सुझाव देना। वी. जी. कन्नन (भारतीय बैंक एसोसिएशन के चीफ एग्जीक्यूटिव) कमिटी के चेयरपर्सन होंगे। 

वित्त मंत्रालय ने नए प्रत्यक्ष कर कानून के मसौदे के लिए गठित टास्क फोर्स के संदर्भ की शर्तो को व्यापक बनाया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

वित्त मंत्री ने नए प्रत्यक्ष कर कानून के मसौदे के लिए गठित टास्क फोर्स के संदर्भ की शर्तों को व्यापक बनाया।[10] नवंबर 2017 में इस टास्क फोर्स का गठन किया गया था ताकि आय कर अधिनियम, 1961 की समीक्षा की जा सके और निम्नलिखित के मद्देनजर नए प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार किया जा सके: (i) विभिन्न देशों की प्रत्यक्ष कर प्रणाली, (ii) अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्कृष्ट पद्धतियां, (iii) भारत की आर्थिक जरूरतें, और (iv) अन्य संबंधित मामले।

मंत्रालय ने टास्क फोर्स के विचारणीय विषयों में निम्नलिखित को शामिल किया: (i) अनाम सत्यापन और जांच, (ii) मुकदमों को कम करना और अपील का शीघ्र निपटान, (iii) प्रक्रियाओं को सरल बनाकर अनुपालन के बोझ को कम करना, (iv) वित्तीय लेनदेन की व्यवस्था आधारित क्रॉस वैरिफिकेशन की प्रणाली, और (v) जीएसटी, कस्टम्स और प्रत्यक्ष कर तथा फाइनांशियल इंटेलिजेंस यूनिट के लिए जिम्मेदार विभागों के बीच सूचनाओं को साझा करना।

टास्क फोर्स 31 जुलाई, 2019 तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

जीएसटी काउंसिल ने नेशनल एंटी प्रोफिटियरिंग अथॉरिटी की अवधि को दो वर्ष बढ़ाया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

जीएसटी काउंसिल ने नेशनल एंटी प्रोफिटियरिंग अथॉरिटी की अवधि को दो वर्ष के लिए बढ़ा दिया है।[11] नवंबर 2017 में इस अथॉरिटी को स्थापित किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जीएसटी दरों में कटौती या इनपुट क्रेडिट का लाभ, वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कमी के जरिए उपभोक्ताओं को मिल सके।[12],[13] अगर अथॉरिटी को पता चलता है कि कोई टैक्सपेयर इस प्रावधान का उल्लंघन कर रहा है तो वह (i) अतिरिक्त राशि के रीफंड का (ii) मूल्य को कम करने का, (iii) जुर्माना लगाने का, या (iv) टैक्सपेयर के जीएसटी रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का आदेश दे सकती है।[14]

केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर नियम 2017 ने यह विनिर्दिष्ट किया था कि चेयरपर्सन के चार्ज लेने की तारीख से दो वर्ष बाद अथॉरिटी खत्म हो जाएगी, पर जीएसटी काउंसिल उसकी अवधि को बढ़ा सकती है। अब इस अथॉरिटी की अवधि को दो वर्षों (नवंबर 2021) तक बढ़ा दिया गया है।

सीबीडीटी ने टैक्स संबंधित अपराधों की कम्पाउंडिंग के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने प्रत्यक्ष कर कानूनों के अंतर्गत अपराधों की कम्पाउंडिंग की प्रक्रिया से संबंधित संशोधित दिशानिर्देश जारी किए।[15] किसी अपराध की कम्पाउंडिंग का अर्थ है, अपराधी द्वारा बकाया करों के भुगतान और दूसरे प्रभार (चार्जेज़) चुकाने के बदले उसके खिलाफ प्रॉसीक्यूशन के मामले को निपटाना। अन्य प्रभारों में जुर्माना, बकाया राशि पर ब्याज और कम्पाउंडिंग की राशि (मामलों के निपटारे के लिए चुकाई जाने वाली राशि) शामिल हैं।

संशोधित दिशानिर्देशों में आयकर एक्ट, 1961 के अंतर्गत कुछ अपराधों (जोकि पहले कम्पाउंडिंग थे) की प्रकृति को नॉन-कम्पाउंडिंग बना दिया गया है, यानी इन अपराधों के अंतर्गत आने वाले प्रॉसीक्यूशन के मामलों को बकाया चुकाने या दूसरे प्रभार चुकाने के बावजूद निपटाया नहीं जा सकता। ये अपराध हैं: (i) अधिकृत अधिकारियों के आदेश के बाद बुक्स ऑफ एकाउंट (या जब्त किए गए दूसरे सबूत) को हटाना या उसे काम में लाना (एक्ट का सेक्शन 275 ए), (ii) अधिकृत अधिकारी को बुक्स ऑफ एकाउंट या दूसरे दस्तावेज, जोकि इलेक्ट्रॉनिक तरीके से स्टोर किए गए हैं, उपलब्ध कराने से इनकार करना (एक्ट का सेक्शन 275 बी), और (iii) टैक्स से बचने के लिए प्रॉपर्टी को हटाना, उसे छुपाना, ट्रांसफर करना या उसकी डिलिवरी करना (एक्ट का सेक्शन 276)।

इसके अतिरिक्त संशोधित दिशानिर्देश निम्नलिखित अपराधों को नॉन कम्पाउंडिंग बनाते हैं (सामान्य तौर से): (i) जो लोग दूसरों को टैक्स चोरी में मदद करते हैं, उनके अपराध, (ii) अघोषित विदेशी बैंक खाते या एसेट्स से संबंधित अपराध, (iii) बेनामी लेनदेन (प्रतिबंध) एक्ट, 1988 से संबंधित अपराध, और (iv) काला धन (अघोषित विदेशी आय और एसेट्स) और कर कानून का अधिरोपण, 2015 से संबंधित अपराध।

संशोधित दिशानिर्देश 17 जून, 2019 से लागू हुए हैं। इस तिथि से पहले किए गए कंपाउंडिंग के आवेदन पिछले दिशानिर्देशों के अनुसार जारी रहेंगे।.

 

कानून और न्याय

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल, 2019 पेश

लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल, 2019 को पेश किया गया।[16]  यह बिल 21 फरवरी, 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है।[17]  बिल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • बिल तलाक कहने को, जिसमें लिखित और इलेक्ट्रॉनिक दोनों रूप शामिल हैं, कानूनी रूप से अमान्य और गैरकानूनी बनाता है। बिल के अनुसार तलाक से अभिप्राय है, तलाक-ए-बिद्दत या किसी भी दूसरी तरह का तलाक, जिसके परिणामस्वरूप मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को इंस्टेंट या इररिवोकेबल (जिसे पलटा न जा सके) तलाक दे देता है। तलाक-ए-बिद्दत मुस्लिम पर्सनल कानूनों के अंतर्गत ऐसी प्रथा है जिसमें मुस्लिम पुरुष द्वारा अपनी पत्नी को एक सिटिंग में तीन बार तलाक कहने से इंस्टेंट या इररिवोकेबल तलाक हो जाता है।
  • अपराध और सजा: बिल तलाक कहने को संज्ञेय अपराध बनाता है जिसके लिए किसी व्यक्ति को तीन वर्ष के कारावास की सजा हो सकती है और उसे जुर्माना भरना पड़ सकता है (एक संज्ञेय अपराध ऐसा अपराध होता है जिसमें पुलिस अधिकारी बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकता है)। यह अपराध तभी संज्ञेय होगा, जब अपराध से संबंधित सूचना: (i) विवाहित महिला (जिसे तीन तलाक कहा गया है), या (ii) उससे रक्त या विवाह से जुड़े किसी व्यक्ति ने दी हो।
  • बिल कहता है कि मेजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत दे सकता है। जमानत महिला (जिसे तीन तलाक कहा गया है) की सुनवाई के बाद दी जा सकती है, या उस स्थिति में, जब मेजिस्ट्रेट इस बात से संतुष्ट हो जाए कि जमानत देने के पर्याप्त आधार हैं।
  • महिला (जिसे तीन तलाक कहा गया है) के अनुरोध पर मेजिस्ट्रेट द्वारा अपराध को शमनीय या कम्पाउंडिंग माना जा सकता है। शमनीय या कम्पाउंडिंग का अर्थ वह प्रक्रिया है जिसमें दोनों पक्ष कानूनी कार्यवाहियों को रोकने और विवाद को निपटाने के लिए सहमत हो जाते हैं। कम्पाउंडिंग के नियम और शर्तों को मेजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
  • भत्ता और कस्टडी: जिस मुस्लिम महिला को तलाक दिया गया है, वह अपने पति से अपने और खुद पर निर्भर बच्चों के लिए गुजारा भत्ता हासिल करने के लिए अधिकृत है। जिस मुस्लिम महिला को इस प्रकार तलाक दिया गया है, वह अपने अवयस्क बच्चों की कस्टडी हासिल करने के लिए अधिकृत है। भत्ते की राशि और कस्टडी के तरीके का निर्धारण मेजिस्ट्रेट द्वारा किया जाएगा।

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लोकसभा में आधार और अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2019 पेश

लोकसभा में आधार और अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2019 पेश किया गया।[18] यह 2 मार्च, 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है।[19]  बिल आधार (वित्तीय एवं अन्य सबसिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) एक्ट, 2016, भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण एक्ट, 2002 में संशोधन करता है। आधार एक्ट यूनीक आइडेंटिटी नंबर्स, आधार नंबर्स के जरिए भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों को सबसिडी और लाभ के लक्षित वितरण का प्रावधान करता है।

  • ऑफलाइन वैरिफिकेशन: आधार एक्ट के अंतर्गत व्यक्ति की पहचान आधार ‘प्रमाणीकरण’ द्वारा वैरिफाई की जा सकती है। प्रमाणीकरण में व्यक्ति को अपना आधार नंबर और अपनी बायोमीट्रिक एवं डेमोग्राफिक सूचना सेंट्रल आइंडेंटिटीज़ डेटा रेपोज़िटरी को सौंपनी होती है जोकि उस व्यक्ति का वैरिफिकेशन करती है। बिल प्रमाणीकरण के बिना भी व्यक्ति की पहचान के लिए ‘ऑफलाइन वैरिफिकेशन’ की अनुमति देता है। इस संबंध में यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) रेगुलेशंस के जरिए वे तरीके बताएगी जिनसे ऑफलाइन वैरिफिकेशन किया जा सके।
  • स्वैच्छिक प्रयोग: एक्ट में किसी व्यक्ति की पहचान के प्रमाण के रूप में आधार के प्रयोग का प्रावधान है जोकि प्रमाणीकरण के अधीन है। बिल इसे रीप्लेस करता है और कहता है कि व्यक्ति प्रमाणीकरण या ऑफलाइन वैरिफिकेशन के जरिए अपनी पहचान को स्थापित करने के लिए आधार नंबर का स्वेच्छा से उपयोग कर सकता है। बिल में कहा गया है कि किसी सेवा के प्रावधान के लिए आधार के माध्यम से किसी व्यक्ति की पहचान का प्रमाणीकरण केवल संसद के कानून द्वारा अनिवार्य किया जा सकता है।
  • बिल टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण एक्ट, 2002 में संशोधन करता है और कहता है कि टेलीकॉम कंपनियां, बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों की पहचान को निम्नलिखित के जरिए वैरिफाई कर सकते हैं (i) आधार का प्रमाणीकरण या ऑफलाइन वैरिफिकेशन, या (ii) पासपोर्ट, या (iii) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य दस्तावेज। व्यक्ति अपनी पहचान को वैरिफाई करने का कोई भी तरीका चुन सकता है और किसी भी व्यक्ति को आधार नंबर न होने के कारण कोई सेवा प्रदान करने से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • यूआईडीएआई फंड: एक्ट के अंतर्गत यूआईडीएआई द्वारा जमा की गई फीस और राजस्व को भारत के समेकित कोष में जमा कराया जाएगा। बिल इस प्रावधान को हटाता है और यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया फंड की स्थापना करता है। यूआईडीएआई फीस, अनुदान और शुल्क को इस फंड में जमा करेगी। इस फंड को यूआईडीएआई अपने कर्मचारियों को वेतन और भत्ते देने में इस्तेमाल करेगी।

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

लोकसभा में इंडियन मेडिकल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 पेश

लोकसभा में इंडियन मेडिकल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 पेश किया गया।[20] बिल इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 में संशोधन करता है और इंडियन मेडिकल काउंसिल (दूसरा संशोधन) अध्यादेश, 2019 का स्थान लेता है जिसे 21 फरवरी, 2019 को जारी किया गया था। एक्ट मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की स्थापना करता है। यह संस्था मेडिकल शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करती है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एमसीआई का सुपरसेशन: 1956 का एक्ट एमसीआई के सुपरसेशन और तीन वर्ष की अवधि में उसके पुनर्गठन का प्रावधान करता है। इस अंतरिम अवधि के दौरान केंद्र सरकार बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन करेगी जोकि एमसीआई की शक्तियों का उपयोग करेगा। बिल एमसीआई के सुपरसेशन की समय अवधि को तीन वर्ष से दो वर्ष करने के लिए एक्ट में संशोधन करता है।
  • एक्ट के अंतर्गत बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में अधिकतम सात सदस्य हो सकते हैं जिनमें मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्ति भी शामिल होंगे। इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और बोर्ड के सदस्यों की संख्या सात से 12 करता है। इसके अतिरिक्त बिल कहता है कि बोर्ड में विशिष्ट एडमिनिस्ट्रेटर्स को भी चुना जाएगा। इसके अतिरिक्त बिल में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त महासचिव बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को एसिस्ट करेगा।

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लोकसभा में होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 पारित

होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) बिल, 2019 को लोकसभा में पेश और पारित किया गया।[21]  बिल होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल एक्ट, 1973 में संशोधन करता है और होम्योपेथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश, 2019 का स्थान लेता है जिसे 2 मार्च, 2019 को जारी किया गया था। एक्ट के अंतर्गत सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी की स्थापना की गई थी। सेंट्रल काउंसिल होम्योपैथिक शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करती है।

  • सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन की समयावधि: सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन के लिए पिछले वर्ष (2018 में) 1973 के एक्ट में संशोधन किया गया था। सेंट्रल काउंसिल को उसके सुपरसेशन की तारीख के एक वर्ष के भीतर दोबारा गठित किया जाना था। इस बीच केंद्र सरकार ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किया था जो सेंट्रल काउंसिल की शक्तियों का इस्तेमाल करेगा। बिल सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन की समयावधि को एक वर्ष से दो वर्ष करने हेतु एक्ट में संशोधन करता है।

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लोकसभा में डेंटिस्ट (संशोधन) बिल, 2019 पेश

लोकसभा में डेंटिस्ट (संशोधन) बिल, 2019 पेश किया गया।[22]  बिल डेंटिस्ट एक्ट, 1948 में संशोधन करता है। एक्ट डेंटिस्ट्री (दंत चिकित्सा) के पेशे को रेगुलेट करता है और निम्नलिखित का गठन करता है: (i) डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया, (ii) स्टेट डेंटल काउंसिल्स, और (iii) ज्वाइंट स्टेट डेंटल काउंसिल्स।

  • एक्ट के दो भागों- भाग ए और भाग बी के अंतर्गत डेंटिस्ट्स को पंजीकृत किया जाता है। भाग ए में मान्यता प्राप्त डेंटल क्वालिफिकेशन वाले व्यक्तियों को पंजीकृत किया जाता है और जिन लोगों के पास ऐसी क्वालिफिकेशन नहीं है, उन्हें भाग बी में पंजीकृत किया जाता है। भाग बी में पंजीकृत व्यक्ति ऐसे भारतीय नागरिक हैं जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पंजीकरण तिथि से कम से कम पांच वर्ष पहले से डेंटिस्ट्स के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
  • डेंटल काउंसिल्स की संरचना: एक्ट के अंतर्गत डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया, स्टेट डेंटल काउंसिल्स और ज्वाइंट स्टेट डेंटल काउंसिल्स में भाग बी में पंजीकृत डेंटिस्ट्स के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। बिल एक्ट की इस अनिवार्य शर्त को हटाता है कि भाग बी में पंजीकृत डेंटिस्ट्स को इन काउंसिल्स में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

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शिक्षा

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

लोकसभा में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (शिक्षकों के कैडर में आरक्षण) बिल, 2019 पेश

लोकसभा में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (शिक्षकों के कैडर में आरक्षण) बिल, 2019 को पेश किया गया।[23]  यह बिल 7 मार्च, 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है। बिल (i) अनुसूचित जातियों, (ii) अनुसूचित जनजातियों, (iii) सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों और (iv) आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों के पदों पर आरक्षण का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में  निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पदों पर आरक्षण: बिल केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों की सीधी भर्ती वाले पदों पर (कुल स्वीकृत संख्या में से) आरक्षण का प्रावधान करता है। इस आरक्षण के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों को एक यूनिट के तौर पर माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक विभाग के सामान्य पदों (जैसे एसिस्टेंट प्रोफेसर) को एक यूनिट मानकर आरक्षित श्रेणियों के अभ्यार्थियों को पद आबंटित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि मौजूदा दिशानिर्देशों में आरक्षण देने के लिए प्रत्येक विभाग को एक यूनिट माना जाता था।
  • कवरेज और अपवाद: बिल सभी ‘केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों’ पर लागू होगा जिनमें संसदीय कानूनों के अंतर्गत स्थापित विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय माने जाने वाले (डीम्ड) संस्थान, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, और केंद्र सरकार की सहायता प्राप्त संस्थान शामिल हैं।
  • हालांकि बिल में कुछ इंस्टीट्यूट्स ऑफ एक्सिलेंस, शोध संस्थान और राष्ट्रीय एवं कूटनीतिक महत्व के संस्थानों को अपवाद माना गया है और बिल की अनुसूची में उनके संबंध में विनिर्देश दिए गए हैं। बिल में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को भी अपवाद बताया गया है।

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गृह मामले

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

लोकसभा में जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल, 2019 पारित

लोकसभा में जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल, 2019 पेश और पारित किया गया।[24]  यह बिल जम्मू और कश्मीर आरक्षण एक्ट, 2004 में संशोधन करता है और 1 मार्च 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है। एक्ट प्रावधान करता है कि कुछ आरक्षित श्रेणियों को सरकारी पदों में नियुक्ति और पदोन्नति में तथा प्रोफेशनल संस्थानों में दाखिले में आरक्षण दिया जाएगा। प्रोफेशनल संस्थानों में सरकारी मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज और पॉलिटेक्नीक्स शामिल हैं। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • नियुक्ति में आरक्षण का दायरा बढ़ा: एक्ट सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों के व्यक्तियों के लिए राज्य सरकार के कुछ पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करता है। एक्ट के अनुसार सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले लोग शामिल हैं। बिल में इसमें संशोधन किया गया है और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी इसमें शामिल किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त एक्ट में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्र में निवास करने के आधार पर नियुक्त किया गया है तो उसे उन क्षेत्रों में कम से कम सात साल तक सेवारत रहना होगा। बिल इस शर्त को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर भी लागू करता है।
  • आरक्षण से बाहर: एक्ट कहता है कि जिस व्यक्ति की वार्षिक आय तीन लाख रुपए या राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट राशि से अधिक है, उसे सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पिछड़े वर्गों में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि यह प्रावधान वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर लागू नहीं होगा। बिल कहता है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर भी यह प्रावधान लागू नहीं होगा।

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मंत्रालय ने विदेशी (ट्रिब्यूनल) आदेश, 1964 में संशोधन जारी किए

गृह मामलों के मंत्रालय ने विदेशी (ट्रिब्यूनल) आदेश, 1964 में संशोधन जारी किए।[25]  इस आदेश में ऐसे ट्रिब्यूनल स्थापित करने का प्रावधान है जोकि यह फैसला देते हैं कि क्या कोई व्यक्ति विदेशी है। विदेशी वह व्यक्ति होता है जो कि भारत का नागरिक नहीं होता। मुख्य संशोधन निम्नलिखित हैं:

  • ट्रिब्यूनल को संदर्भित होने वाले मामले: 1964 के आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ट्रिब्यूनल को ऐसे मामले संदर्भित करती है कि कोई व्यक्ति विदेशी है अथवा नहीं। संशोधन कहता है कि केंद्र सरकार के अतिरिक्त (i) राज्य सरकार, (ii) केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन, या (iii) डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट भी ऐसे मामलों को ट्रिब्यूनल को संदर्भित कर सकते हैं।
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के लिए अपील की प्रक्रिया: अगर किसी व्यक्ति का नाम असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से हटा दिया गया है या गलत तरीके से शामिल किया गया है तो वह नागरिक रजिस्ट्रेशन के स्थानीय रजिस्ट्रार के पास शिकायत दर्ज करा सकता है।[26] रजिस्ट्रार के किसी फैसले के खिलाफ शिकायत आदेश के अंतर्गत स्थापित ट्रिब्यूनल में की जा सकती है, वह भी साठ दिनों के भीतर। संशोधन में ऐसी अपीलों से निपटने के प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है।
  • संशोधन कहता है कि अपील दायर करने वाले व्यक्ति को एनआरसी अथॉरिटी द्वारा दिए गए रिजेक्शन ऑर्डर की कॉपी देनी होगी। इसके बाद ट्रिब्यूनल को डिस्ट्रिक्ट मेजिस्ट्रेट को नोटिस जारी करना होगा कि वह नोटिस के तीस दिनों के भीतर एनआरसी का रिकॉर्ड पेश करे। रिकॉर्ड दिए जाने के 120 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल का अंतिम आदेश आ जाना चाहिए, जोकि तय करेगा कि उस व्यक्ति का नाम एनआरसी में शामिल होगा है अथवा नहीं। अगर कोई व्यक्ति 60 दिनों के भीतर अपील नहीं करता तो केंद्र/राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रशासन, या डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट ट्रिब्यूनल को यह मामला सौंप सकते हैं कि कोई व्यक्ति विदेशी है अथवा नहीं।     

 

कृषि

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

2018-19 के लिए प्रमुख फसलों के उत्पादन का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2018-19 के लिए प्रमुख खाद्यान्नों और कमर्शियल फसलों के उत्पादन का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी किया।[27] तालिका 5 में 2017-18 के उत्पादन के अंतिम अग्रिम अनुमानों की तुलना 2018-19 के उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमानों से की गई है। कुछ झलकियां निम्नलिखित हैं:

  • 2018-19 के खाद्यान्न उत्पादन में पिछले वर्ष (2017-18) के अंतिम अग्रिम अनुमानों की तुलना में 0.6% की गिरावट का अनुमान है। मोटे अनाज के उत्पादन में 7.7% की कमी और दालों के उत्पादन में 8.7% की कमी के कारण यह गिरावट हुई है। अनाज के उत्पादन में 0.2% की मामूली वृद्धि का अनुमान है।
  • 2017-18 के अंतिम अग्रिम अनुमानों की तुलना में 2018-19 में चावल के उत्पादन में 2.5% की वृद्धि का अनुमान है। गेहूं के उत्पादन में 1.3% की वृद्धि अनुमानित है।
  • 2017-18 की तुलना में तिलहन के उत्पादन में 0.1% की मामूली गिरावट अनुमानित है। इस अवधि में मूंगफली के उत्पादन में 29.7% की गिरावट का अनुमान है, सोयाबीन के उत्पादन में 25.7% की वृद्धि अनुमानित है।
  • कपास के उत्पादन में 15.9% की गिरावट अनुमानित है, 2018-19 में गन्ना के उत्पादन में 5.4% की वृद्धि (400.4 मिलियन टन) का अनुमान है।

 

तालिका 5: 2018-19 में उत्पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान (मिलियन टन में)

फसल

2017-18 के अंतिम

2018-19 के तीसरे अग्रिम अनुमान

2017-18 में परिवर्तन का %

खाद्यान्न (+)

285.0

283.4

-0.6%

क. अनाज

259.6

260.2

0.2%

चावल

112.8

115.6

2.5%

गेहूं

99.9

101.2

1.3%

मोटा अनाज

47.0

43.3

-7.7%

ख. दाल

25.4

23.2

-8.7%

तूर

4.3

3.5

-18.4%

चना

11.4

10.1

-11.3%

तिलहन

31.5

31.4

-0.1%

सोयाबीन

10.9

13.7

25.7%

मूंगफली

9.3

6.5

-29.7%

कपास*

32.8

27.6

-15.9%

गन्ना

379.9

400.4

5.4%

*Million bales of 170 kg each.

SourcesDirectorate of Economics and Statistics, Ministry of Agriculture and Farmers Welfare; PRS.

 

वाणिज्य और उद्योग

स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (संशोधन) बिल, 2019 संसद में पारित

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (संशोधन) बिल, 2019 को संसद में पेश और पारित किया गया।[28] यह बिल स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स एक्ट, 2005 में संशोधन करता है और 2 मार्च, 2019 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है। एक्ट निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स की स्थापना, विकास और प्रबंधन का प्रावधान करता है।

  • व्यक्ति की परिभाषा: एक्ट के अंतर्गत व्यक्ति की परिभाषा में व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, कंपनी, कोऑपरेटिव सोसायटी, फर्म या व्यक्तियों का संगठन शामिल है। बिल इस परिभाषा में दो श्रेणियों को और शामिल करता है। ये हैं, ट्रस्ट या कोई ऐसी एंटिटी जिसे केंद्र सरकार अधिसूचित कर सकती है।

बिल का पीआरएस सारांश पढ़ें।

मंत्रालय ने कॉपीराइट नियम, 2013 में संशोधन का मसौदा जारी किया

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने पब्लिक फीडबैक के लिए कॉपीराइट नियम, 2013 में संशोधन का मसौदा जारी किया।[29]  कॉपीराइट नियम, 2013 को कॉपीराइट एक्ट, 1957 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया था। एक्ट ऑथर्स के क्रिएटिव वर्क जैसे किताबें, नाटक, संगीत, फिल्म और कला के अन्य वर्क्स तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के अधिकार को पारिभाषित करता है। संशोधन मसौदे में प्रस्तावित मुख्य परिवर्तन निम्नलिखित हैं:

  • अपीलीय बोर्ड: कॉपीराइट एक्ट, 1957 एक कॉपीराइट बोर्ड की स्थापना करता है जोकि एक्ट के अंतर्गत विवादों पर फैसला सुनाए। ये कॉपीराइट के एसाइनमेंट और उसकी शर्तों से संबंधित विवाद हो सकते हैं। 2017 में कॉपीराइट बोर्ड के कार्यों को बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड में समाहित कर दिया गया जोकि ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 के अंतर्गत स्थापित किया गया था। संशोधन मसौदा यह कहता है कि इस नियम में जहां भी कॉपीराइट बोर्ड का उल्लेख है, उसके स्थान पर अब बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड का प्रयोग किया जाएगा।
  • पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग: कॉपीराइट एक्ट कॉपीराइट के ओनर की सहमति के बिना लिटररी या म्यूजिकल वर्क्स, और साउंड रिकॉर्डिंग के पब्लिक ब्रॉडकास्ट की अनुमति देता है। पब्लिक ब्रॉडकास्ट के मामले में, ब्रॉडकास्टर से निम्नलिखित की अपेक्षा की जाती है: (i) ओनर को इस बात की पूर्व सूचना देना कि वह उसके वर्क के पब्लिक ब्रॉडकास्ट का इरादा रखता है, और (ii) अपीलीय बोर्ड द्वारा निर्धारित रॉयल्टी चुकाना। 2013 के नियम कहते हैं कि रेडियो या टेलीविजन ब्रॉडकास्ट के लिए अलगःअलग नोटिस दिए जाने चाहिए और यह कि अपीलीय बोर्ड को रेडियो और टेलीविजन के लिए अलग-अलग रॉयल्टी निर्धारित करनी चाहिए। संशोधन मसौदा रेडियो और टेलीविजन के संदर्भ को हटाने का प्रयास करता है और कहता है कि अलग नोटिस दिए जाने चाहिए और प्रत्येक प्रकार के ब्रॉडकास्ट के लिए रॉयल्टी निर्धारित की जानी चाहिए।
  • कॉपीराइट सोसायटीज़: कॉपीराइट एक्ट कॉपीराइट सोसायटीज़ का प्रावधान करता है जोकि कॉपीराइट वर्क्स के लिए लाइसेंस जारी करती हैं और लाइसेंस फीस वसूल तथा अथॉर्स के बीच बांटती हैं। संशोधन मसौदा कहता है कि प्रत्येक कॉपीराइट सोसायटी को अपनी वेबसाइट पर वार्षिक ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट पब्लिश करनी होगी। रिपोर्ट में निम्नलिखित से संबधित सूचनाएं शामिल होनी चाहिए: (i) वित्तीय वर्ष की गतिविधियां, और (ii) सोसायटी द्वारा प्रबंधित किए जाने वाले अधिकार की प्रत्येक श्रेणी के लिए राजस्व।   

 

आवासन और शहरी मामले

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

कैबिनेट ने सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) संशोधन बिल, 2019 को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) संशोधन बिल, 2019 को पेश करने को मंजूरी दी।[30] 2019 का बिल सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) संशोधन बिल, 2017 का स्थान लेता है जोकि 16वीं लोकसभा के भंग होने के साथ लैप्स हो गया था।

बिल सरकारी आवास से अनाधिकृत कब्जाधारियों को तुरंत निकालने और ऐसे आवास को सुपात्र व्यक्तियों को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।

बिल एस्टेट ऑफिसर को यह अधिकार देता है कि वह एक विशिष्ट तरीके से सरकारी आवास से एक अनाधिकृत कब्जाधारी को निकाल सके। अधिकारी मुकदमे के दौरान आवास को होने वाले नुकसान पर शुल्क भी वसूल सकता है।

 

ऊर्जा

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

वायु/सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए विवाद निवारण की प्रणाली को मंजूरी

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने सौर/वायु ऊर्जा के उत्पादकों और भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई)/राष्ट्रीय तापीय ऊर्जा निगम (एनटीपीसी) के बीच विवाद निवारण प्रणाली को गठित करने को मंजूरी दी।[31] इस प्रणाली के अंतर्गत तीन सदस्यीय विवाद निवारण कमिटी की स्थापना की जाएगी। कमिटी सदस्य दिल्ली एनसीआर की प्रतिष्ठित शख्सीयतें होंगी। यह व्यवस्था सभी सौर/वायु योजनाओं पर लागू होगी जिन्हें एसईसीआई/एनटीपीसी द्वारा संचालित किया जाता है।

कमिटी निम्नलिखित प्रकार के मामलों पर विचार करेगी: (i) अनुबंध की शर्तों के आधार पर समयावधि बढ़ाने के एसईसीआई के सभी फैसलों के खिलाफ अपील के मामले, और (ii) अनुबंध के शर्तो के दायरे में न आने वाले एक्सटेंशन के मामले।

कमिटी के सुझावों और मंत्रालय के निष्कर्षों को अंतिम फैसले के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के समक्ष पेश किया जाएगा।

इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट ग्रुप बनाया गया

केंद्रीय बिजली रेगुलेटरी कमीशन (सीईआरसी) ने इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड की समीक्षा करने के लिए एक्सपर्ट ग्रुप का गठन किया।[32]  ग्रुप के अध्यक्ष केंद्रीय विद्युत अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष और विद्युत अपीलीय ट्रिब्यूनल के पूर्व सदस्य (टेक) राकेश नाथ कर रहे हैं। कोड पर टिप्पणियां 12 जुलाई, 2019 तक आमंत्रित हैं।[33] 

कोड नियम और मानदंड बनाता है। विभिन्न एजेंसियां और पावर सिस्टम के भागीदार योजना बनाने, उसे विकसित करने, उसके रखरखाव और उसे परिचालित करने के लिए इन नियमों और मानदंडों का अनुपालन करते हैं। बिजली के उत्पादन और आपूर्ति में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रदान करते हुए, सिस्टम को सबसे कुशल, विश्वसनीय, आर्थिक और सुरक्षित तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।

 

सड़क परिवहन और राजमार्ग

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

एयर इंडिया में विनिवेश को मंजूरी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीईए) ने 28 जून, 2017 को एयर इंडिया और उसकी पांच सबसिडियरी में रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी।[34]  इसके बाद सीसीईए ने एयर इंडिया स्पेसिफिक ऑल्टरनेटिव मैकेनिज्म (एआईएसएएम) की स्थापना की।

28 मार्च, 2018 को एआईएसएएम ने फैसला किया कि विनिवेश न किया जाए जिसका कारण कच्चे तेल में कीमतों में अस्थिरता और विदेशी मुद्रा की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव था। इसके बाद से एयर इंडिया के वित्तीय और परिचालनगत प्रदर्शन में सुधार हुआ है। इसलिए केंद्र सरकार ने एआईएसएएम के सुझावों के अनुसार कंपनी के विनिवेश का फैसला किया है।   

सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 का संशोधन मसौदा जारी किया

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 का संशोधन मसौदा जारी किया।[35],[36],[37],[38]नियम ड्राइवरों की लाइसेंसिंग, मोटर वाहनों के निर्माण, रखरखाव और रजिस्ट्रेशन, वाहनों के परमिट और ट्रैफिक के नियंत्रण से संबंधित विवरण प्रदान करते हैं।

बैटरी चालित वाहनों को छूट: पहली मसौदा अधिसूचना बैटरी चालित वाहनों (बिजली चालित वाहनों) को कुछ मामलों में फीस चुकाने से छूट देने के लिए नियमों में संशोधन का प्रयास करती है। इन मामलों में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करना या उसे रीन्यू करना, या नए रजिस्ट्रेशन मार्क (या नंबर) देना शामिल है। 

परिवहन वाहनों के ड्राइवरों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता: वर्तमान में, नियमों के अंतर्गत वाहन चालकों को ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए आठवीं कक्षा पास होना चाहिए। दूसरी मसौदा अधिसूचना इस शर्त क समाप्त करती है। मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत परिवहन वाहन का अर्थ सार्वजनिक सेवा वाहन, गुड्स कैरिएज, शैक्षणिक संस्था की बस, या निजी सेवा वाहन है।

दोनों मसौदों के प्रकाशित होने की तिथि (18 जुलाई, 2019) के बाद 30 दिनों तक इन पर टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

जल शक्ति

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

जल शक्ति अभियान जुलाई 2019 से शुरू होगा

पेयजल और स्वच्छता विभाग जल शक्ति अभियान की शुरुआत करेगा। इस अभियान का उद्देश्य पानी की कमी वाले देश के 225 जिलों में वर्षा जल का संचयन और पानी का संरक्षण करना है।[39] इस अभियान के लिए ऐसे जिलों को वॉटर स्ट्रेस्ड घोषित किया जाएगा जिनमें भूजल का स्तर काफी निम्न है या उसका अति दोहन किया गया है।

भूजल संसाधनों का आकलन यूनिट्स यानी ब्लॉक/ताल्लुका/मंडल/वॉटरशेड में किया जाता है। भूजल विकास के लिए इन यूनिट्स को दो आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है: (क) भूजल विकास का चरण, और (ख) मानसून पूर्व और उपरांत जल स्तर की दीर्घकालीन प्रवृत्ति (आम तौर पर 10 वर्ष की अवधि के लिए)।

100% से अधिक भूजल विकास के चरण वाली यूनिट्स के लिए माना जाता है कि उनका अति दोहन किया गया है। 90% से अधिक और दीर्घकालीन जल स्तर की गिरावट (मानसून पूर्व और उपरांत) वाली यूनिट्स को गंभीर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

इस अभियान को दो चरणों में शुरू किया जाएगा। पहले चरण में देश के सभी राज्य शामिल होंगे और इसे 1 जुलाई से 15 सितंबर, 2019 तक संचालित किया जाएगा। दूसरे चरण में उन राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां मानसून पीछे हट रहा है और यह चरण 1 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2019 तक चलेगा।

 

विदेशी मामले

Vinayak Krishnan (vinayak@prsindia.org)

प्रधानमंत्री ने किर्गीज गणराज्य और मालदीव का दौरा किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गीज गणराज्य और मालदीव का दौरा किया।[40],[41]इन देशों के साथ निम्नलिखित संधियों पर हस्ताक्षर किए गए:

  • मालदीव: भारत और मालदीव के बीच छह संधियों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें निम्नलिखित से संबंधित संधियां थीं: (i) स्वास्थ्य, (ii) हाइड्रोग्राफी (समुद्र और तटीय क्षेत्रों को नापना), और (iii) मालदीव के लोकसेवकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम।[42]   
  • किर्गीज गणराज्य: भारत और किर्गीज गणराज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय से संबंधित 15 संधियों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) व्यापार और निवेश, (ii) स्वास्थ्य, और (iii) सूचना प्रौद्योगिकी।[43]

 

[1] Parliament Session Alert, June 22, 2019, https://prsindia.org/sites/default/files/Parliament%20Session%20Alert%20Budget%20Session%202019%20%2817LS%29.pdf.  

[2] Address by the President of India, Shri Ram Nath Kovind to the Joint Sitting of Two Houses of Parliament, June 20, 2019, https://presidentofindia.nic.in/writereaddata/Portal/Speech/Document/683/1_sp200619.pdf.  

[3]Second Bi-Monthly Policy Statement 2019-20, Press Release, Reserve Bank of India, June 6, 2019, https://rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=47225

[4] Developments in Indias Balance of Payments during the Fourth Quarter (January-March) of 2018-19, Reserve Bank of India, June 28, 2019, https://rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=47438.

[5] Report of the Committee on Deepening of Digital Payments, Press Releases, Reserve Bank of India, May 17, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=47068.

[6] Report of the High Level Committee on Deepening of Digital Payments, Reserve Bank of India, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PublicationReport/Pdfs/CDDP03062019634B0EEF3F7144C3B65360B280E420AC.PDF.

[7] Prudential Framework for Resolution of Stressed Assets, Reserve Bank of India, June 7, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/PRUDENTIALB20DA810F3E148B099C113C2457FBF8C.PDF.

[8] Dharani Sugars and Chemicals Ltd vs Union of India, MANU/SC/0454/2019, https://www.sci.gov.in/supremecourt/2018/42591/42591_2018_Judgement_02-Apr-2019.pdf.

[9] Committee to Review the ATM Interchange Fee Structure, Press Releases, Reserve Bank of India, June 11, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=47270.

[10] F. No. 370149/230/2017, Central Board of Direct Taxes, Department of Revenue, Ministry of Finance, June 24, 2019, https://www.incometaxindia.gov.in/Lists/Latest%20News/Attachments/324/task-force-office-order-dated-24-06-2019.pdf.

[11] FM chairs the 35th GST Council Meeting held today in the national capital;, Press Information Bureau, Ministry of Finance, June 21, 2019.

[12] Cabinet approves the establishment of the National Anti-Profiteering Authority under GST, Press Information Bureau, Cabinet, November 16, 2017.

[13] Government appoints Shri B.N. Sharma (IAS:1985) as Chairman of the National Anti-Profiteering Authority under GST, Press Information Bureau, Ministry of Finance, November 28, 2017.

[14] Anti-Profiteering, Chapter XV, Central Goods and

Services Tax (CGST) Rules, 2017 (as amended up to April 23, 2019), http://www.gstcouncil.gov.in/sites/default/files/Rules-dynamic/23042019_CGST_Rules-2017-Part-A-Rules.pdf.

[15] F. No. 285/08/2014-IT (Inv. V)/147, Central Board of Direct Taxes, Department of Revenue, Ministry of Finance, June 14, 2019, https://www.incometaxindia.gov.in/news/guidelines_compounding_offencesdtl_2019_misccomm_14_6_19.pdf.

[16] The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Muslim%20women%20%28Protection%20of%20Rights%20on%20Marriage%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[17] The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Ordinance, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Muslim%20Women%20%28Protection%20of%20Rights%20on%20Marriage%29%20Second%20Ordinance%2C%202019.pdf.

[18] The Aadhaar and Other Laws (Amendment) Bill, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Aadhaar%20and%20Other%20Laws%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf.

[19]  The Aadhaar and Other Laws (Amendment) Ordinance, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Aadhaar%20and%20other%20Laws%20%28A%29%20Ordinance%2C%202019.pdf.

[20] The Indian Medical Council (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, Lok Sabha, June 27, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/110_2019_English.PDF.

[21] The Homoeopathy Central Council (Amendment) Bill, 2019, Ministry of AYUSH, Lok Sabha, June 27, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/83C_%202019_LS_Eng.pdf.

[22] The Dentists (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, Lok Sabha, June 27, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/111_2019_Eng.PDFhttp:/164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/83C_%202019_LS_Eng.pdf.

[23] The Central Educational Institutions (Reservation in TeachersCadre) Bill, 2019, Ministry of Human Resource Development, Lok Sabha, June 27, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/103_2019_English.PDF.

[24] The Jammu and Kashmir Reservation (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Home Affairs,  https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Jammu%20and%20Kashmir%20Reservation%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202019.pdf.  

[25] G.S.R. 409(E), Ministry of Home Affairs, June 4, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/205117.pdf.  

[26] The Citizenship (Registration of Citizens and Issue of National Identity Cards) Rules, 2003, http://www.nrcassam.nic.in/images/pdf/citizenship-rules.pdf.  

[27] Third Advance Estimates of Production of Foodgrains and Commercial Crops for 2018-19, Directorate of Economics and Statistics, Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, June 3, 2019, https://eands.dacnet.nic.in/Advance_Estimate/3rd_Advance_Estimates2018-19%20Eng.pdf.

[28] The Special Economic Zones (Amendment) Bill, 2019, Ministry of Commerce and Industry, as passed by Parliament, June 27, 2019, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/103_2019_English.PDF.

[29] G.S.R 393(E), Ministry of Commerce and Industry, May 30, 2019, https://dipp.gov.in/sites/default/files/Draft_Copyright_Amendment_Rules_2019.pdf.  

[30]Crackdown on Unauthorised Occupants of Public Premises, Press Information Bureau, Cabinet, June 12, 2019.

[31] No. 283/124/2018-GRID SOLAR, Grid Solar Power Division, Ministry of New and Renewable Energy, June 18, 2019.

[32] No. ENGG/2012/1/2019-CERC, Central Electricity Regulatory Commission, June 10, 2019, http://www.cercind.gov.in/2019/whatsnew/Notice-10-06-19.pdf.

[33] No. ENGG/2012/1/2019-CERC, Central Electricity Regulatory Commission, June 21, 2019, http://www.cercind.gov.in/2019/whatsnew/IEGC_Extention19.pdf.  

[34] Govt to go ahead with Air India Disinvestment, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, June 27, 2018

[35] Notification, G.S.R 430 (E), Ministry of Road Transport and Highways, June 18, 2019, .http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=4588.

[36]Ministry of Road Transport and Highways to remove requirement of minimum educational qualification for transport vehicle drivers, Ministry of Road Transport & Highways, June 18, 2019, http://pib.nic.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1574849.

[37]Ministry of Road Transport and Highways issues Draft Notification to exempt Battery Operated Vehicles from paying registration fees, Ministry of Road Transport & Highways, June 19, 2019.

[38] Notification, G.S.R 431 (E), Ministry of Road Transport and Highways, June 18, 2019, http://morth.nic.in/showfile.asp?lid=4589.

[39]Appointment of Central Prabhari officers in respect of Jal Shakti Abhiyan, Office Memorandum, Ministry of Personnel, Public Grievances & Pensions, June 25, 2019, https://dopt.gov.in/sites/default/files/31-16-2019-EOMM-I.pdf.

[40] Transcript of Media Briefing by Foreign Secretary on upcoming visit of Prime Minister to Maldives and Sri Lanka (June 06, 2019)”, Ministry of External Affairs, June 7, 2019, https://www.mea.gov.in/outoging-visit-detail.htm?31414/Transcript+of+Media+Briefing+by+Foreign+Secretary+on+upcoming+visit+of+Prime+Minister+to+Maldives+and+Sri+Lanka+June+06+2019.  

[41] Transcript of Media Briefing by Secretary (West) on upcoming visit of Prime Minister to Bishkek to attend the SCO Summit (June 10, 2019)”, Ministry of External Affairs, June 11, 2019, https://www.mea.gov.in/outoging-visit-detail.htm?31431/Transcript+of+Media+Briefing+by+Secretary+West+on+upcoming+visit+of+Prime+Minister+to+Bishkek+to+attend+the+SCO+Summit+June+10+2019.   

[42] List of MOUs/Documents signed during the State Visit of Prime Minister to Maldives, Ministry of External Affairs, June 8, 2019, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/31419/List_of_AgreementsMoUs_signed_during_the_State_Visit_of_Prime_Minister_to_Maldives.  

[43] List of documents exchanged during the visit of Prime Minister to Kyrgyz Republic, Ministry of External Affairs, June 14, 2019, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/31445/List_of_documents_exchanged_during_the_visit_of_Prime_Minister_to_Kyrgyz_Republic.  

 

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