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एआई के उभार का असर और संबंधित मुद्दे

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. निशिकांत दुबे) ने 30 मार्च, 2026 को ‘एआई के उभार का असर और संबंधित मुद्दे’ विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने वित्त, ऊर्जा, सुरक्षा, रक्षा और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभावों और उपयोग की जांच की। उसने भारत की तैयारियों, पहल और रेगुलेटरी ढांचे का भी आकलन किया। एक महत्वपूर्ण पहल मार्च 2024 में इंडिया एआई मिशन की शुरुआत है। इस मिशन का उद्देश्य कंप्यूटिंग क्षमता, डेटासेट तक पहुंच और कुशल लोगों की संख्या को बढ़ाना है। साथ ही, यह भारत में नए एआई मॉडल और एप्लिकेशंस बनाने को प्रोत्साहित करता है। नवंबर 2025 में एआई गवर्नेंस दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इसके साथ ही हानिकारक कंटेंट के प्रभाव को कम करने के लिए एक समर्पित निवारण केंद्र (डेडिकेटेड मिटिगेशन सेंटर) बनाने पर भी काम चल रहा है। कमिटी के प्रमुख निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • बड़े पैमाने पर एआई को अमल में लाने में रुकावटें: कमिटी ने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर एआई को अमल में लाने में तीन बड़ी रुकावटें हैं, जैसे (i) कंप्यूटिंग की सीमित सुविधाएं, (ii) कौशल की कमी, और (iii) पर्याप्त डेटासेट्स की कमी। कमिटी ने यह भी कहा कि डेटा तक पहुंच और उसकी उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) देश भर में डेटा सेंटर्स और एआई लैब स्थापित करना, (ii) स्कूलों की निचली कक्षाओं से ही एआई में विशेष अध्ययन या पाठ्यक्रम शुरू करना, (iii) कॉलेजों में एआई को लोकप्रिय बनाना, और (iv) सभी विश्वविद्यालयों में एआई में फेलोशिप और रिसर्च शुरू करना। कमिटी ने एआई को अपनाने में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया: (i) थर्ड पार्टी पर बढ़ती निर्भरता और बाजार में कुछ ही  कंपनियों का कब्जा होना, (ii) एआई मॉडल्स की कार्यप्रणाली को समझने में कठिनाई और (iii) डेटा की गुणवत्ता, डेटा प्राइवेसी, साइबर सुरक्षा, जवाबदेही और एआई के खुद अपने आप फैसले लेने से संबंधित चिंताएं।

  • एआई के दुरुपयोग को रोकना: कमिटी ने एआई के खतरों का भी उल्लेख किया जैसे डीफफेक, साइबर खतरे, एआई के जरिए जासूसी और वित्तीय धोखाधड़ी। कमिटी ने कहा कि आईटी नियम, 2021 में ऐसा फ्रेमवर्क मौजूद है जो डीपफेक जैसे गैरकानूनी और हानिकारक कंटेंट की होस्टिंग और ट्रांसमिशन से रोकता है। कमिटी ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने इन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इन ड्राफ्ट संशोधनों का उद्देश्य एआई से जुड़े नियमों को और मजबूत बनाना है। कमिटी का कहना है कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट, 2023 बिना अनुमति के, या जरूरत से ज्यादा डेटा कलेक्शन पर रोक लगाता है। इसके अलावा वह प्रोफाइलिंग और पूर्वाग्रहों के विभिन्न पहलुओं को भी रेगुलेट करता है। इसके अतिरिक्त अभी डिजिटल इंडिया पर काम चल रहा है जिसका उद्देश्य एआई से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए एक नया केंद्रीय कानूनी ढांचा तैयार करना है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) आईटी नियमों में बदलाव को जल्द लागू किया जाए, (ii) एक व्यापक कानून की संभावना को तलाशा जाए ताकि एआई के दुरुपयोग को रोका जा सके, और (iii) कुछ लोगों को एआई के दुरुपयोग से बचाने के लिए उम्र की सीमा तय करने की संभावनाएं तलाशी जाएं।

  • एआई के एकीकरण को बढ़ावा देना: कमिटी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई को एकीकृत करने से महत्वपूर्ण लाभ हो सकते हैं। उसने अवैध आव्रजन को रोकने के लिए एआई के उपयोग का सुझाव दिया। उसने उम्मीद है कि ‘सुरक्षिणी’ पहल जल्द ही शुरू हो जाएगी। गृह मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य हानिकारक कंटेंट का पता लगाना और उसे अपलोड होने से रोकना है। इसके अलावा कमिटी ने यह भी उम्मीद जताई कि टैक्स क्षेत्र में एआई आधारित टूल्स वित्तीय धोखाधड़ी और टैक्स चोरी जैसी समस्याओं के समाधान के रूप में विकसित होंगे।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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