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  • दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण और उसके निवारण हेतु विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदम

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दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण और उसके निवारण हेतु विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदम

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री भुवनेश्वर कलीता) ने 12 दिसंबर, 2025 को 'दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण और उसके निवारण हेतु विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदम' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वायु गुणवत्ता मानकों की कमजोरियां और निगरानी संबंधित कमियां: कमिटी ने कहा कि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूएस) (NAAQS) को आखिरी बार 2009 में संशोधित किया गया था और ये विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों की तुलना में काफी कमजोर हैं, विशेष रूप से PM2.5 के लिए। कमिटी ने NAAQS के संशोधन में तेजी लाने और उन्हें धीरे-धीरे डब्ल्यूएचओ के लक्ष्यों के अनुरूप बनाने का सुझाव दिया। कमिटी ने वायु गुणवत्ता निगरानी में भी कमियां देखीं, जिनमें मैनुअल स्टेशनों का निरंतर संचालन और स्टेशनों के वितरण में भौगोलिक पूर्वाग्रह शामिल हैं। कमिटी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 84 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएएक्यूएमएस) (CAAQMS) और 59 मैनुअल परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन हैं। कमिटी ने सभी मैनुअल स्टेशनों को CAAQMS में अपग्रेड करने और उनकी लोकेशन को सुव्यवस्थित (स्टेशनों को ऐसी जगह शिफ्ट करना जहां लोग ज्यादा रहते हैं या जहां औद्योगिक गतिविधियां अधिक हैं) करने का सुझाव दिया ताकि क्षेत्र के घनी आबादी वाले इलाकों का कवरेज मिल सके।

  • स्रोत विभाजन: कमिटी ने कहा कि दिल्ली के लिए मौजूदा स्रोत विभाजन अध्ययन पुराने हैं और आर्थिक गतिविधियों में बदलाव के बाद प्रदूषण के वर्तमान पैटर्न को नहीं दर्शाते। उसने नए स्रोत विभाजन अध्ययनों को शुरू करने और विशेषज्ञ मूल्यांकन के आधार पर उन्हें समय-समय पर अपडेट करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया। स्रोत विभाजन ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है जिसमें यह समझा जाता है कि किसी क्षेत्र की हवा में प्रदूषण कहां से आ रहा है और विभिन्न स्रोतों का उसमें कितना हिस्सा है।

  • विभिन्न राज्यों की अपनी अलग योजना यानी खंडित पहल: कमिटी ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक क्षेत्रीय समस्या है जिसके लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि योजना और प्रवर्तन राज्य स्तर की बजाय वायु क्षेत्र स्तर पर किए जाएं। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) के तहत जारी निर्देशों को कड़ाई से लागू करना, (ii) कार्यान्वयन एजेंसियों की स्पष्ट पहचान, और (iii) निरीक्षण और दंड के माध्यम से अनुपालन में सुधार।

  • वाहन उत्सर्जन: कमिटी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक वाहन उत्सर्जन है। उत्सर्जन को कम करने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) पुराने और डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बंद करके स्वच्छ वाहनों का उपयोग करना, (ii) इलेक्ट्रिक और सीएनजी आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ाना, और (iii) लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करना। कमिटी ने प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों के कड़े प्रवर्तन और स्पष्ट रूप से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई पर भी जोर दिया। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में उच्च लागत को एक प्रमुख बाधा मानते हुए, कमिटी ने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन, खरीद सबसिडी और कर लाभ जैसे वित्तीय प्रोत्साहनों का सुझाव दिया। कमिटी ने यह भी कहा कि हालांकि इथेनॉल मिश्रण से कुछ प्रदूषकों में संभावित कमी आ सकती है, लेकिन इससे NOx (नाइट्रोजन ऑक्साइड) और वाष्पशील उत्सर्जन में वृद्धि भी हो सकती है।

  • धूल, अपशिष्ट और पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण: कमिटी ने कहा कि वायु प्रदूषण के कई कारण हैं। उदाहरण के लिए सड़क की धूल, निर्माण और विध्वंस गतिविधियां, अपशिष्ट जलाना और फसल अवशेष जलाना। उसने सुझाव दिया कि धूल को रोकने के उपाय सख्ती से लागू किए जाएं, जैसे सड़कों की मशीनीकृत सफाई, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन और खुले में अपशिष्ट जलाने पर पूरी तरह रोक। कमिटी ने इन-सीटू प्रबंधन, पेलेटाइजेशन और बायोमास उपयोग जैसी विधियों के लिए वित्तीय और लॉजिस्टिकल सहायता बढ़ाने पर जोर दिया गया। उसने यह भी बताया कि मांग चरम पर होने के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की कमी हो जाती है। साथ ही, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और लंबी अवधि वाली धान की किस्मों को हतोत्साहित करने का सुझाव दिया।

  • उद्योग: कमिटी ने कहा कि एनसीआर के निकट स्थित कुछ थर्मल पावर प्लांटों को SO₂ मानकों का अनुपालन करना आवश्यक है और उनमें फ्लू-गैस डीसल्फराइजेशन जैसे उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियों की कमी है। औद्योगिक उत्सर्जन को कम करने के लिए कमिटी ने कहा कि क्षेत्र में गैर-अनुपालन करने वाली इकाइयां स्वच्छ ईंधन का उपयोग करें, अन्यथा उन्हें व्यवस्थित रूप से बंद कर दिया जाए।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य: कमिटी ने कहा कि वायु प्रदूषण से कुछ विशेष जनसंख्या वर्गों, जैसे बच्चों, बुजुर्गों और डिलीवरी राइडर्स पर असमान रूप से प्रभाव पड़ता है। कमिटी ने स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने, वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को एकीकृत करने और समय पर जन स्वास्थ्य संबंधी सलाह जारी करने का सुझाव दिया। इसके अलावा कमिटी ने निम्नलिखित का भी सुझाव दिया: (i) सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों में एयर प्यूरीफायर लगाना, (ii) कमजोर श्रमिकों के लिए लक्षित सुरक्षा कार्यक्रम शुरू करना और (iii) एयर प्यूरीफायर और हेपा फिल्टर पर जीएसटी को कम करना या समाप्त करना। 

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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