स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
- वाणिज्य से संबंधित स्टैंडिंगं कमिटी (चेयर: सुश्री डोला सेन) ने 7 अगस्त, 2026 को "भारत में व्यापार सुगमता: भविष्य का मार्ग" पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- अनुपालन का बोझ कम करना: कमिटी ने गौर किया कि अनुपालन का बोझ कम करने की पहल के तहत, डीपीआईआईटी ने केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के साथ मिलकर निम्नलिखित कार्य किए हैं: (i) 16,108 अनुपालनों को आसान बनाना, (ii) 4,270 अनुपालनों में दोहराव को हटाना, (iii) 22,287 अनुपालनों को डिजिटल बनाना, और (iv) 4,458 अनुपालनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना। कमिटी ने एक स्टेकहोल्डर की बात पर गौर किया कि एक आम कंपनी को लगभग 1,500 कानूनों का पालन करना पड़ता है, जिनके तहत कुल मिलाकर 69,233 अलग-अलग अनुपालन और 6,618 स्वतंत्र फाइलिंग करनी होती हैं। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) व्यवसायों पर ज़मीनी प्रभावों का आकलन करने के लिए सुधारों का समय-समय पर तीसरे पक्ष से मूल्यांकन कराना, (ii) मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए मनमाने निरीक्षण के बजाय संयुक्त स्थल निरीक्षण ढांचे को अपनाना, (iii) टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) के मानदंडों को आसान और एक जैसे बैंड में व्यवस्थित और समूहबद्ध करना, और (iv) रेगुलेटरी कंप्लायंस पोर्टल में रियल टाइम शिकायत निवारण प्रणाली को शामिल करना।
- मंजूरियों में देरी: कमिटी ने गौर किया कि अलग-अलग नियम और केंद्र व राज्य स्तर पर कई तरह की मंज़ूरियों की वजह से काम में देरी होती है और व्यापार की लागत बढ़ जाती है। कमिटी ने यह भी गौर किया कि 'नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम' (एनएसडब्ल्यूएस) को पूरी तरह से लागू करने का काम अभी बाकी है। समय-सीमा के बारे में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) मंज़ूरी के लिए एनएसडब्ल्यूएस को एकमात्र प्लेटफ़ॉर्म बनाते हुए, बाकी सभी राज्यों को अनिवार्य रूप से और तय समय के भीतर इससे जोड़ना, (ii) क्लीन रिकॉर्ड वाले व्यापार के लिए ऑटोमैटिक रिन्यूअल की सुविधा, और (iii) सरकारी रिफ़ंड और सबसिडी में देरी होने पर मुआवज़ा देना। निर्माण और क्षेत्र विशेष मंज़ूरियों के लिए, कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) निर्माण परमिट के लिए एक ही 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (एनओसी), (ii) छोटी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में आग से सुरक्षा के लिए खुद से सर्टिफ़िकेशन, (iii) नेशनल बिल्डिंग कोड को एक समान अपनाना, (iv) इंस्पेक्शन सर्टिफ़िकेट के लिए राज्यों के बीच आपसी मान्यता समझौते, और (v) सेमीकंडक्टर फ़ैब जैसी सुविधाओं के लिए बिल्डिंग की ऊंचाई की सीमा में ढील।
- बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (बीआरएपी): बीआरएपी का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना, रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाना और सेवा वितरण को बेहतर करना है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) राज्यों द्वारा जमा किए गए कागज़ात पर निर्भर रहने के बजाय, ज़मीनी हकीकत का अनिवार्य थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन ऑडिट करना, (ii) राज्य की मंज़ूरियों के लिए एक ही पैन-आधारित आईडी का इस्तेमाल करना, और (iii) औद्योगिक हब और ग्रामीण इलाकों के बीच कार्यक्षमता के अंतर को कम करने के उपाय करना।
- लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर: कमिटी ने कहा कि परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को अभी भी रेगुलेटरी, प्रक्रिया और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनसे लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ती है और 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (व्यापार सुगमता) पर बुरा असर पड़ता है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) कस्टम्स और दूसरे टैक्स नियमों का पालन आसान बनाना, (ii) लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों को 'यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म' से जोड़ना, (iii) एक जैसी राष्ट्रीय वेयरहाउसिंग नीति बनाना, और (iv) एयर-कार्गो, स्टोरेज और जल्दी खराब होने वाले सामान को संभालने की सुविधाओं का विस्तार करना, खासकर टियर-II/III शहरों में।
- एमएसएमई के लिए ऋण और सार्वजनिक खरीद की सुविधा: कमिटी ने कहा कि एमएसएमई को ऋण और सरकारी खरीद, दोनों ही मामलों में जटिल प्रक्रिया और बहुत अधिक कागज़ी कार्रवाई से गुजरना पड़ता है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) संस्थागत फाइनांस तक पहुंच बढ़ाने के लिए Udyam प्लेटफ़ॉर्म का दायरा बढ़ाना, (ii) ऋण गारंटी और कोलेट्रल फ्री वाले लोन देने के तरीकों को बढ़ाना, (iii) तुरंत वेरिफ़ाइड फ़ाइनांशियल जानकारी पाने के लिए आरबीआई के अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क का इस्तेमाल करना, और (iv) सूक्ष्म और लघु उद्यम ऋण के फोरक्लोज़र/प्री-पेमेंट चार्ज पर आरबीआई द्वारा रोक लगाना।
- ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स: ई-कॉमर्स डार्क स्टोर्स में काम करने की स्थितियों पर कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थिति संहिता, 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को सख्ती से लागू करना, (ii) रैंडम इंस्पेक्शन ऑडिट करना, और (iii) पोर्टेबल आधार-लिंक्ड इंश्योरेंस सिस्टम के लिए सभी डार्क स्टोर्स और डिलीवरी करने वालों का रजिस्ट्रेशन करना। ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, कमिटी ने गुमराह करने वाले विज्ञापनों और डायनामिक प्राइसिंग की सख्ती से जांच करने, और रोज़मर्रा के ई-कॉमर्स विवादों को सुलझाने के लिए ऑटोमेटेड ऑनलाइन सिस्टम बनाने का सुझाव दिया।
- बिजनेस रेडी (B-READY): B-READY विश्व बैंक का एक ग्लोबल बेंचमार्किंग प्रोजेक्ट है जो अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश के माहौल का आकलन करता है। कमिटी ने कहा कि भारत का तीसरा B-READY आकलन सितंबर 2026 के आसपास होना है, और निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) सुधार के प्रयासों को निरंतर और निगरानी में जारी रखना, (ii) विभिन्न मंत्रालयों में रेगुलेटरी अनुपालनों पर नज़र रखने के लिए एक ऑनलाइन B-READY सुधार डैशबोर्ड बनाना, तथा (iii) पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए एक 'सहायता सेल' की स्थापना करना।
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