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राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग के प्रदर्शन की समीक्षा

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • वित्त संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री भर्तृहरि महताब) ने 2 दिसंबर, 2025 को 'राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के प्रदर्शन की समीक्षा' पर अपनी रिपोर्ट पेश की। एनएससी ने जुलाई 2006 में कार्य करना शुरू किया था। एनएससी के प्रमुख कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सांख्यिकी प्रणालियों के लिए नीतियों, प्राथमिकताओं और मानकों का विकास, (ii) मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना, और (iii) सांख्यिकी से संबंधित मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देना। कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) को वैधानिक प्राधिकार: रंगराजन आयोग (2000) ने आधिकारिक सांख्यिकी के लिए एक वैधानिक निकाय के गठन का सुझाव दिया था। हालांकि एनएससी की स्थापना एक सरकारी प्रस्ताव के माध्यम से की गई थी। कमिटी ने निजी डेटा प्रोवाइडर्स की बढ़ती भूमिका पर भी गौर किया। उसने कहा कि कई डेटा प्रोड्यूसर्स के होने की वजह से उनके सांख्यिकीय अनुमानों और एनएससी के अनुमानों में अंतर होता है। इससे स्टेकहोल्डर्स का विश्वास कमजोर होता है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) सभी सांख्यिकीय गतिविधियों के लिए एनएनसी को नोडल और स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित किया जाए, और उसे पूर्ण वैधानिक दर्जा दिया जाए, (ii) एक स्थायी तकनीकी समिति का गठन किया जाए, जोकि सामाजिक आर्थिक संकेतकों की परिभाषाओं और कार्य पद्धतियों को एक समान बनाए और डेटा सोर्सेज़ के बीच समन्वय करे। इस समिति में निजी सांख्यिकीय एजेंसियों, शिक्षाविदों और उद्योग के विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व हो, और (iii) डेटा कलेक्शन, सैंपलिंग और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल्स पर राष्ट्रीय मानक संरचना का विकास किया जाए। एनएससी को सरकारी और निजी क्षेत्र के डेटा प्रोड्यूसर्स, दोनों के लिए सांख्यिकीय मानकों और कार्यप्रणालियों को निर्धारित और समन्वित करना चाहिए।

  • ऑडिटिंग: राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (एनएससी) को नियमित सांख्यिकीय ऑडिट करने का दायित्व सौंपा गया है। कमिटी ने कहा कि इसमें सिर्फ एक ही उल्लेखनीय कार्य किया है- 2011 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का ऑडिट। कमिटी ने एक स्टैटिस्टिकल ऑडिट फंक्शन की स्थापना करने और ऐसे दिशानिर्देश तैयार करने का सुझाव दिया जोकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कमिटी ने ऑडिट रिपोर्ट को प्रकाशित करने का सुझाव भी दिया। इन रिपोर्ट्स से कमियों का पता चलेगा, समाधान खोजे जा सकेंगे और उनके कार्यान्वयन को ट्रैक किया जा सकेगा।

  • जीडीपी अनुमानों में अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों को शामिल करना: कमिटी ने जीडीपी आंकड़ों की शुद्धता का सुझाव दिया ताकि इसमें सभी आर्थिक गतिविधियों, विशेष रूप से अनौपचारिक या असंगठित क्षेत्र की गतिविधियों को शामिल किया जा सके।

  • सांख्यिकीय गतिविधियों के बीच ओवरलैपिंग: कमिटी ने कहा कि एक ही विषय पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के आंकड़ों में विरोधाभास होता है, जिसका कारण यह है कि उनके डेटा सैंपल, कलेक्शन और प्रोसेसिंग में अंतर है। इससे परिणामों और निष्कर्षों को लेकर भ्रम पैदा होता है। कमिटी ने सभी सांख्यिकीय गतिविधियों और प्रकाशनों को जल्द से जल्द समन्वित करने का सुझाव दिया।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाना: कमिटी ने कहा कि एआई को अपनाने के लिए क्षमता निर्माण करना जरूरी है। उसने एआई को अपनाने के लिए एक व्यापक रणनीति का सुझाव दिया। कमिटी ने कहा कि इसके लिए उपयोग संबंधी स्पष्ट दिशानिर्देश, नैतिक मानक और निगरानी तंत्र की आवश्यकता होगी। इसमें कर्मचारियों का कौशल विकास भी शामिल होगा।

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना: कमिटी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठक और चर्चाओं के बावजूद अनुसंधान और उसे नीतिगत कार्यान्वयन में बदलने के बीच बहुत बड़ा अंतर है। कमिटी ने सुझाव दिया कि मंत्रालय औपचारिक समझौता ज्ञापनों और संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को क्रियान्वित करने के लिए एक व्यापक योजना को लागू करे। संयुक्त अनुसंधान, वैश्विक डेटा मानकों का उपयोग और नियमित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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