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  • भारतीय रेलवे की माल ढुलाई संबंधी आय में वृद्धि और समर्पित माल ढुलाई गलियारों का विकास

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भारतीय रेलवे की माल ढुलाई संबंधी आय में वृद्धि और समर्पित माल ढुलाई गलियारों का विकास

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • रेलवे से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. सी. एम. रमेश) ने 16 दिसंबर, 2025 को 'भारतीय रेलवे की माल ढुलाई संबंधी आय में वृद्धि और समर्पित माल ढुलाई गलियारों (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स) का विकास' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • माल ढुलाई राजस्व में वृद्धि: भारतीय रेलवे की कुल आय का लगभग 65% हिस्सा माल ढुलाई से प्राप्त होता है। इससे यात्रियों के किराए को भी सबसिडी मिलती है। कमिटी ने कहा कि माल ढुलाई राजस्व में वृद्धि विभिन्न जोन्स में अलग-अलग है। जहां पूर्वी-मध्य और दक्षिण-पूर्वी-मध्य जोन्स की आय 2015-16 से दोगुनी हो गई है, वहीं उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी जैसे अन्य जोन्स में वृद्धि सीमित रही है। कमिटी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक जोन के राजस्व लक्ष्यों की गहन निगरानी की जाए और माल ढुलाई को आकर्षित करने के लिए विशिष्ट रणनीतियां बनाई जाएं। कमिटी ने प्रोत्साहन के रूप में जोन-विशिष्ट वस्तुओं पर रियायती किराया देने का सुझाव दिया।

  • उसने यह सुझाव भी दिया कि डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाकर रियल टाइम डायनैमिक डिस्काउंट्स का पता लगाए जाए और ये छूट प्रदान की जाएं। साथ ही कोच और वैगन पर विज्ञापन के माध्यम से गैर-किराया राजस्व बढ़ाने के तरीकों की संभावनाएं तलाशी जाएं।

  • माल ढुलाई की दरों में संशोधन: कमिटी ने गौर किया कि रेलवे ने नवंबर 2018 में आखिरी बार माल ढुलाई दरों में संशोधन किया था और परिचालन लागत में वृद्धि के बावजूद दरें तब से बदली नहीं हैं। कमिटी ने नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए दी जाने वाली रियायती दरों और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए दी जाने वाली रियायती दरों पर भी गौर किया। उसने माल ढुलाई दरों के वार्षिक व्यापक मूल्यांकन का सुझाव दिया जिसमें वस्तु-वार प्रतिस्पर्धा, बाजार की मांग और परिचालन लागत को ध्यान में रखा जाए। उसने माल ढुलाई दरों को सुव्यवस्थित करने का सुझाव दिया ताकि वे सड़क परिवहन के साथ अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।

  • वैगनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना: भारतीय रेलवे लगभग 4.27 लाख वैगनों को संचालित करता है, जिसमें हर साल 30,000 वैगन शामिल होते हैं। कमिटी ने माल की कुशल आवाजाही के लिए वैगनों की समय पर उपलब्धता पर जोर दिया। कमिटी ने कहा कि एनटीपीसी जैसे ग्राहकों को रेक की कमी की चिंता है। उसने सुझाव दिया कि रेलवे निर्भर क्षेत्रों की जानकारी लेकर भविष्य की जरूरतों का आकलन करे और निजी वैगनों के स्वामित्व को बढ़ावा दे।

  • मालगाड़ियों के मार्गों पर भीड़भाड़: 2024-25 में यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देने और चालू कार्यों के कारण मालगाड़ियों की औसत गति 23.8 किमी/घंटा थी। कमिटी ने रेलवे से इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से अपग्रेड करने और कम गति वाले खंडों में क्षमता वृद्धि को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। भीड़भाड़ को कम करने के लिए कमिटी ने अतिरिक्त लाइनों के माध्यम से नेटवर्क का विस्तार करने और उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम अपनाने का सुझाव दिया।

  • फ्रेट टर्मिनल: कमिटी ने कहा कि देश भर में कई रेलवे यार्डों में आधुनिक लोडिंग, अनलोडिंग और स्टोरेज सुविधाओं का अभाव है। कमिटी ने सभी यार्डों में एप्रोच रोड्स, ठोस प्लेटफार्म्स और लीक-प्रूफ छतें बनाने का सुझाव दिया। भारतीय रेलवे द्वारा निजी भागीदारी से शुरू किए जा रहे गति शक्ति कार्गो टर्मिनल को ध्यान में रखते हुए कमिटी ने विभिन्न क्षेत्रों और औद्योगिक केंद्रों के बीच संपर्क सुनिश्चित करने के लिए ऐसे टर्मिनल्स को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।

  • कोयला और फ्लाई ऐश का परिवहन: कोयले से रेलवे को लगभग 50% माल ढुलाई राजस्व प्राप्त होता है। कमिटी ने कहा कि रेलवे में कोयला निकासी परियोजनाओं में निजी कंपनियों को निवेश की अनुमति है। कमिटी ने कोयला परिवहन मार्गों के लिए क्षमता वृद्धि की जरूरत के व्यापक मूल्यांकन का सुझाव दिया। इसके अलावा कमिटी ने गौर किया कि रियायतों के बावजूद एनटीपीसी अपने बिजली संयंत्रों से फ्लाई ऐश के परिवहन के लिए सड़क परिवहन पर निर्भर है। कमिटी ने रेलवे को फ्लाई ऐश परिवहन बढ़ाने के लिए लक्षित रणनीतियां बनाने और केवल पर्यावरण नियमों का पालन करने वाले विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए वैगनों को ही फ्लाई ऐश परिवहन की अनुमति देने का सुझाव दिया।

  • फ्रेट बास्केट का विविधीकरण: कमिटी ने गौर किया कि कोयला और लौह अयस्क से होने वाली वार्षिक राजस्व वृद्धि की गति धीरे-धीरे कम हो रही है। सतत विकास के लिए कमिटी ने ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और ई-कॉमर्स को शामिल करते हुए कमोडिटी बास्केट में विविधता लाने का सुझाव दिया। उसने व्यापक पोर्टफोलियो विश्लेषण का सुझाव दिया ताकि फ्लाई ऐश जैसी उन वस्तुओं की पहचान की जा सके, जिनकी रेलवे में हिस्सेदारी कम है, लेकिन भविष्य में उच्च विकास की क्षमता है।

  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) विकास: कमिटी ने कहा कि डीएफसी मौजूदा नेटवर्क पर भीड़ कम करते हैं और मालगाड़ियों की गति बढ़ाते हैं। 2024-25 में इन कॉरिडोर्स में औसत गति 37 किमी/घंटा थी जो पारंपरिक नेटवर्क से अधिक है। पूंजी की गहनता को ध्यान में रखते हुए कमिटी ने सुझाव दिया कि इन कॉरिडोर्स के लिए निवेश के मुकाबले आर्थिक रिटर्न का मूल्यांकन किया जाए और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक शर्तों के जरिए निजी निवेश आकर्षित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए कमिटी ने नए फीडर मार्गों को विकसित करने और मौजूदा मार्गों को मजबूत करने का सुझाव दिया ताकि औद्योगिक केंद्रों का डीएफसी नेटवर्क के साथ रुकावटों के बिना जुड़ाव हो सके। 

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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