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अक्टूबर 2021

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इस अंक की झलकियां

संसद की स्टैंडिंग कमिटी ने 2021-22 में समीक्षा के लिए विषयों को चिन्हित किया

इस वर्ष के कुछ विषयों में भारत में ई-कॉमर्स को प्रोत्साहन और रेगुलेशन, नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा से संबंधित मामले, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं और कच्चे तेल की आयात नीति शामिल हैं।

रेपो और रिवर्स रेपो रेट्स क्रमशः 4% और 3.35% पर परिवर्तनीय

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट को क्रमशः 4% और 3.35% पर अपरिवर्तनीय रखा। कमिटी ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

2021-22 की दूसरी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति 5.1%

सीपीआई मुद्रास्फीति जुलाई 2021 में 5.6% से सितंबर 2021 में 4.4% हो गई। खाद्य स्फीति जुलाई में 4.0% से गिरकर सितंबर में 0.7% हो गई। इस अवधि के दौरान डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 11.6% से गिरकर 10.7% हो गई। 

सर्वोच्च न्यायालय ने पेगासेस के कथित इस्तेमाल की जांच के लिए समिति बनाई

सर्वोच्च न्यायालय ने इन आरोपों की जांच के लिए एक समिति बनाई कि केंद्र सरकार ने नागरिकों की जासूसी के लिए पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया था। उसने केंद्र सरकार को अपनी समिति बनाने की अनुमति नहीं दी।

एयर इंडिया में सरकार की इक्विटी शेयरहोल्डिंग की पूरी बिक्री को मंजूरी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने एयर इंडिया में भारत सरकार की 100% इक्विटी शेयरहोल्डिंग की बिक्री के लिए टाटा संस की बोली को मंजूरी दे दी।

आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू

मिशन बीमारियों का जल्द पता लगाने, डायग्नॉस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने और मौजूदा अनुसंधान संस्थानों के विस्तार के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।

कुछ राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के क्षेत्राधिकार में परिवर्तन अधिसूचित

गृह मामलों के मंत्रालय ने कुछ राज्यों में बीएसएफ के क्षेत्राधिकार में परिवर्तनों को अधिसूचित किया है। जिन क्षेत्रों में बीएसएफ कुछ कानूनों के तहत शक्तियों (जैसे तलाशी और गिरफ्तारी) का प्रयोग कर सकता है, उन्हें बदल दिया गया था। 

जन्म और मृत्यु पंजीकरण में संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

प्रस्तावित संशोधनों के तहत जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय डेटाबेस बनाए जाएंगे, और मेडिकल संस्थानों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने यहां होने वाली मौतों की वजहों को प्रामाणित करें। 

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) के कार्यान्वन को मंजूरी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए कार्यान्वयन, निगरानी और समर्थन तंत्र के लिए संस्थागत ढांचे सहित पीएम गतिशक्ति एनएमपी को मंजूरी दी।

सरकार ने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कार्यों को सात पीएसयूज़ में हस्तांतरित किया
केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर, 2021 से ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) को भंग कर दिया और इसका कामकाज सार्वजनिक क्षेत्र की सात नई इकाइयों को हस्तांतरित कर दिया।

फिशरीज़ विभाग ने ड्राफ्ट भारतीय मरीन फिशरीज़ बिल, 2021 को जारी किया

ड्राफ्ट बिल के अनुसार, मोटरीकृत भारतीय फिशिंग जहाज को फिशिंग और फिशिंग से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने के लिए लाइसेंस लेना होगा। विदेशी जहाज भारत के मैरीटाइम जोन्स में फिशिंग या उससे संबंधित काम नहीं कर सकते।

विदेशी मामलों की स्टैंडिंग कमिटी ने दो रिपोर्ट्स सैंपी

विदेशी मामलों की स्टैंडिंग कमिटी ने भारत और द्विपक्षीय निवेश संधियों, तथा भारत और अंतरराष्ट्रीय कानून पर दो रिपोर्ट्स सौपी।
 

संसद

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org)

स्टैंडिंग कमिटीज़ ने 2021-22 में समीक्षा हेतु विषयों को चिन्हित किया

संसद के 24 विभागों से संबंधित 10 स्टैंडिंग कमिटियों ने 2021-22 के दौरान समीक्षा के लिए विषयों को चिन्हित किया। इन कमिटियों द्वारा चिन्हित विषयों को अनुलग्नक में सूचीबद्ध किया गया है।

 

कोविड-19

31 अक्टूबर, 2021 तक भारत में कोविड-19 के 3.4 करोड़ पुष्ट मामले थे।[1]  इनमें से 3.3 करोड़ (98%) मरीजों का इलाज हो चुका है/उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है और 4.6 लाख लोगों (1.3%) की मृत्यु हुई है। 31 अक्टूबर, 2021 तक 73 करोड़ लोगों को वैक्सीन की कम से कम पहली डोज़ मिल गई है जिनमें से 33 करोड़ लोग पूरी तरह से वैक्सीनेटेड हैं।[2] देश और विभिन्न राज्यों में दैनिक मामलों की संख्या के लिए कृपया यहां देखें।  

कोविड-19 के फैलने के साथ केंद्र सरकार ने महामारी की रोकथाम के लिए अनेक नीतिगत फैसलों और इससे प्रभावित नागरिकों और व्यवसायों को मदद देने हेतु वित्तीय उपायों की घोषणा की है। केंद्र और राज्यों द्वारा जारी मुख्य अधिसूचनाओं के विवरण के लिए कृपया यहां देखें। इस संबंध में सितंबर 2021 में मुख्य घोषणाएं इस प्रकार हैं।

सरकार ने भारत आने वाले विदेशियों को वीज़ा देना फिर शुरू किया

Shubham Dutt (shubham@prsindia.org)

गृह मंत्रालय ने भारत आने वाले विदेशियों को नए सिरे से टूरिस्ट वीज़ा देने का फैसला किया है।[3]  15 अक्टूबर, 2021 से मंत्रालय ने चार्टर्ड फ्लाइट्स से भारत आने वाले विदेशियों को पर्यटन वीजा प्राप्त करने की अनुमति दी है। चार्टर्ड विमान के अलावा अन्य उड़ानों से भारत में प्रवेश करने वाले विदेशियों के लिए 15 नवंबर, 2021 से नए पर्यटक वीजा उपलब्ध होंगे।

पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण विदेशियों को दिए गए सभी वीजा निलंबित कर दिए गए थे। बाद में अक्टूबर 2020 में विदेशियों को देश में प्रवेश और ठहरने के लिए पर्यटक वीजा को छोड़कर सभी प्रकार के भारतीय वीजा (जैसे बिजनेस वीजा या मेडिकल वीजा) का लाभ उठाने की अनुमति दी गई।[4]

भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं।[5] 25 अक्टूबर, 2021 से सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आगमन पर हवाईअड्डे से निकलने से पहले कोविड-19 टेस्ट करना होगा। इसके अतिरिक्त उन्हें कम से कम सात दिनों के लिए होम क्वारंटाइन में रहना होगा।5  

ये शर्तें कुछ देशों से आने वाले पूरी तरह से वैक्सीनेटेड यात्रियों पर लागू नहीं होंगी (अंतिम डोज़ की तारीख से 15 दिन बीत चुके हों)।5  ये देश वे हैं जो पूरी तरह से वैक्सीनेटेड भारतीयों को क्वारंटाइन मुक्त प्रवेश की अनुमति दे रहे हैं या जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त या डब्ल्यूएचओ मान्यता प्राप्त वैक्सीन्स को मान्यता देने का समझौता किया है। हालांकि ऐसे यात्रियों को आगमन के बाद 14 दिनों तक अपने स्वास्थ्य की स्वयं निगरानी करनी होगी। इन देशों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) युनाइडेट किंगडम, (ii) जर्मनी, (iii) फ्रांस, (iv) बेल्जियम, और (v) उक्रेन।[6]

इससे पहले दिशानिर्देशों में यह अपेक्षित था कि भारत आने वाले यात्री नेगेटिव आरटी-पीसीआर टेस्ट (बोर्डिंग से 72 घंटे पहले कराया गया) के साथ सेल्फ डेक्लरेशन फॉर्म जमा कराएं। [7]  

त्यौहारी मौसम में कोविड-19 के प्रबंधन हेतु राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी दिशानिर्देश नवंबर अंत तक बढ़ाए गए

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

गृह मामलों के मंत्रालय ने त्यौहारी मौसम के दौरान कोविड-19 की रोकथाम के लिए जारी आदेशों को 30 नवंबर, 2021 तक के लिए बढ़ा दिया है।[8],[9]  आदेश पहले 31 अक्टूबर, 2021 तक लागू थे। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह अपेक्षित था कि वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित रोकथाम उपायों को लागू करेंगे। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सामूहिक जमावड़ों पर प्रतिबंध: दिशानिर्देशों में 5% से उससे अधिक की पॉजिटिविटी दर वाले जिलों और कंटेनमेंट जोन्स में सामूहिक जमावड़ों पर प्रतिबंध है। बाकी सभी जिलों में ऐसे जमावड़ों (i) के लिए पहले अनुमति लेनी होगी, (ii) में लोग कम संख्या में होने चाहिए (स्थानीय संदर्भों के हिसाब से संख्या तय की जाएगी)। इसके अतिरिक्त शारीरिक दूरी के नियमों के पालन पर नजर रखने के लिए क्लोस्ड सर्किट कैमरे का उपयोग किया जा सकता है। अगर मास्क का प्रयोग नहीं किया गया और शारीरिक दूरी के नियमों का उल्लंघन किया गया तो दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
     
  • निगरानी: दिशानिर्देशों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खतरों के शुरुआती संकेतों को चिन्हित करने के लिए रोजाना सभी जिलों में केस ट्राजेक्टरीज़ की निगरानी करें। इसके अतिरिक्त राज्यों को सभी पॉजिटिव मामलों के टेस्ट सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वायरस के म्यूटेशन की आशंका पर नजर रखी जा सके। जीनोम सीक्वेंसिंग जेनेटिक्स के अध्ययन को कहा जाता है। कोविड-19 के संदर्भ में जीनोम सीक्वेसिंग से वायरस के नए वेरिएंट की मौजूदा स्थिति को समझने में मदद मिलती है और नए वेरिएंट का जल्द पता लगाने के लिए सर्विलांस मैकेनिज्म तैयार किया जा सकता है।
     
  • कंटेनमेंट के उपाय जारी रखना: दिशानिर्देशों में कोविड-19 की रोकथाम के लिए विभिन्न रणनीतियों का पालन जारी रखने का सुझाव दिया गया है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पर्याप्त टेस्टिंग, खासकर संवेदनशील आबादी की, और ग्रामीण एवं अर्ध शहरी क्षेत्रों में, (ii) प्रभावी तरीके से कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग करना, (iii) वयस्कों में वैक्सीनेशन को बढ़ाना और दूसरी डोज़ वाले पात्र लाभार्थियों के कवरेज को प्राथमिकता देना, और (iv) जिले के मामलों के आधार पर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना।

 

पीएम केयर्स बाल योजना के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए

Payoja Ahluwalia (payoja@prsindia.org) 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पीएम केयर्स बाल योजना के लिए दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया।[10]  योजना उन बच्चों की व्यापक देखभाल सुनिश्चित करने का प्रयास करती है जिन्होंने कोविड-19 महामारी में अपने माता-पिता को खो दिया है। योजना के अंतर्गत बच्चों की देखभाल तब तक की जाएगी, जब तक वे 23 साल के नहीं हो जाते। योजना की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पात्रता: कोविड-19 महामारी में अपने माता-पिता, दोनो को, सर्वाइविंग पेरेंट या लीगल गार्जियन को गंवाने वाले बच्चे इस योजना में नामांकन के लिए पात्र होंगे। महामारी के दौरान पेरेंट की मृत्यु जिस तारीख को हुई हो, उस दिन ऐसे बच्चों की उम्र 18 वर्ष से कम होनी चाहिए। इस उद्देश्य के लिए महामारी की अवधि 11 मार्च, 2020 से 31 दिसंबर, 2021 के बीच की है।
     
  • बच्चों को मदद: योजना के तहत बच्चों की चार तरीकों से मदद की जाती है- शिक्षा, वित्तीय मदद, स्वास्थ्य बीमा और बोर्डिंग। इसमें निम्नलिखित शामिल है: (i) बच्चे का उसके परिजनों के साथ पुनर्वास करना या फॉस्टर केयर या चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट में रखना, (ii) 18 वर्ष की आयु होने पर दस लाख रुपए का एक कोष बनाना, अगले पांच वर्षों के लिए बच्चों को मासिक वजीफा देना, (iii) आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सभी बच्चों को लाभार्थियों के रूप में नामांकित करना, और (iv) स्कूल पूर्व शिक्षा के लिए आंगनवाड़ी सेवाएं प्रदान करना, नजदीकी माध्यमिक स्कूल में प्रवेश या उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण हेतु सहायता।[11]
     
  • कार्यान्वयन तंत्र: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय राज्य और जिला नोडल एजेंसियों के समन्वय से इस योजना को लागू करेगा। राज्य सरकार के विभाग, जो अपने-अपने राज्य की बाल संरक्षण सेवा योजना चलाते हैं, राज्य स्तर पर नोडल एजेंसी होंगे। योजना को कार्यान्वित करने के लिए जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट नोडल प्राधिकारी होंगे।  

सहायक ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना मार्च 2022 तक के लिए बढ़ाई गई 

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

जून 2020 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने सहायक ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की थी।[12]  इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार का लक्ष्य स्ट्रेस्ड एमएसएमई के प्रमोटरों को इक्विटी के रूप में निवेश के लिए ऋण पर 20,000 करोड़ रुपए का गारंटी कवर प्रदान करना है। मूल नियमों के अनुसार, योजना मार्च 2021 तक लागू थी जिसे आगे सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया था।[13]  अब योजना को मार्च 2022 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।[14]  

इस योजना के अंतर्गत स्ट्रेस्ड एमएसएमई (जो 30 अप्रैल, 2020 तक नॉन परफॉर्मिंग एसेट बन गए हैं) के प्रमोटरों को उनकी हिस्सेदारी (इक्विटी जमा ऋण) के 15% या 75 लाख रुपए, जो भी कम हो, के बराबर क्रेडिट दिया जाता है। लिक्विडिटी बढ़ाने और ऋण-इक्विटी अनुपात बरकरार रखने के लिए प्रमोटर इस राशि को एमएसएमई में इक्विटी के रूप में डालेंगे। मूलधन के पुनर्भुगतान पर सात वर्ष की मोहलत की जाएगी। चुकौती की अधिकतम अवधि 10 वर्ष होगी। इस योजना को सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के माध्यम से लागू किया जा रहा है।

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्रमशः 4% और 3.35% पर अपरिवर्तनीय

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने अपना द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी कर दिया है।[15]  कमिटी ने फैसला किया है कि पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) 4% की दर पर बरकरार है। कमिटी के अन्य फैसलों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) 3.35% पर अपरिवर्तनीय है।
     
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 4.25% पर अपरिवर्तनीय है।
     
  • एमपीसी ने यह भी निर्णय लिया कि वृद्धि को पुनर्जीवित करने और उसे सतत बनाए रखने के लिए मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखा जाए। 

2021-22 की दूसरी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति 5.1% पर

वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) की तुलना में 2021-22 में इसी अवधि के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष 2012) 5.1% थी।[16]  2020-21 की दूसरी तिमाही में यह 6.9% और 2021-22 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 5.6% थी और यह उन दोनों अवधियों की मुद्रास्फीति से कम है।

खाद्य स्फीति जुलाई 2021 में 4.0% से कम होकर सितंबर 2021 में 0.7% हो गई। 2021-22 की दूसरी तिमाही में इसका औसत 2.6% है। यह 2021-22 में इसी अवधि के दौरान 9.7% और 2021-22 की पहली तिमाही में 4.0% की खाद्य स्फीति से कम है।

2021-22 की दूसरी तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) (आधार वर्ष 2011-12) 11.2% था।[17]  2020-21 की दूसरी तिमाही में 0.5% की डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फाति के मुकाबले यह काफी ज्यादा है लेकिन 2021-22 की पहली तिमाही में 12% की दर कुछ कम।

रेखाचित्र 1: 2021-22 की दूसरी तिमाही में मासिक मुद्रास्फीति (% परिवर्तन, वर्ष दर वर्ष)

 image    

स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय; पीआरएस।

 

वित्त 

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

पेट्रोलियम क्षेत्र के पीएसयूज़ में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी

वित्त मंत्रालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर ऋण इंस्ट्रूमेंट्स) नियम, 2019 में संशोधनों को अधिसूचित किया है।[18]  2019 के नियम पेट्रोलियम रीफाइनिंग करने वाले पीएसयूज़ (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) के लिए ऑटोमैटिक रूट से 49% तक के विदेशी निवेश की अनुमति देते हैं।[19]  संशोधन उन पीएसयूज़ के लिए ऑटोमैटिक रूट से 100% विदेशी निवेश की अनुमति देते हैं जिन्हें केंद्र सरकार से रणनीतिक विनिवेश के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। ऑटोमैटिक रूट के अंतर्गत भारत के बाहर के किसी निवासी को निवेश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक या केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होती।

आरबीआई ने एनबीएफसीज़ के लिए स्तर आधारित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जारी किया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए स्तर-आधारित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जारी किया।[20]  आरबीआई ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में कई एनबीएफसी व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसलिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को बदलते जोखिम प्रोफाइल के अनुरूप करने की जरूरत है। फ्रेमवर्क में एनबीएफसी के रेगुलेशंस के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है जिसमें पूंजी संबंधी शर्तें और गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स शामिल हैं। दिशानिर्देश 1 अक्टूबर, 2022 से प्रभावी होंगे। फ्रेमवर्क की प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:  

  • स्तर-आधारित वर्गीकरण: एनबीएफसी को उनके आकार, गतिविधि और संभावित जोखिम के आधार पर चार स्तरों में विभाजित किया गया है।

 तालिका 1: एनबीएफसीज़ का वर्गीकरण

लेयर

एनबीएफसी

बेस लेयर

1,000 करोड़ रुपए से कम की एसेट साइज वाली नॉन डिपॉजिट टेंकिंग एनबीएफसी

मिडिल लेयर

सभी डिपॉजिट टेकिंग एनबीएफसी, कम से कम 1,000 करोड़ रुपए के एसेट साइज वाले नॉन डिपॉजिट टेकिंग एनबीएफसी शामिल

अपर लेयर

आरबीआई द्वारा वारंटिंग एनहांस्ड रेगुलेटरी शर्त के तौर पर चिन्हित एनबीएफसी

टॉप लेयर

संभावित प्रणालीगत जोखिम में वृद्धि करने वाले एनबीएफसी

स्रोत: आरबीआई; पीआरएस.

  • सरकारी स्वामित्व वाले एनबीएफसी को निचले या मध्यम स्तर पर रखा जाएगा। मध्यम और ऊपरी स्तर वाले एनबीएफसी को पूंजी और परिसंपत्तियों के प्रावधान जैसे विभिन्न मानदंडों के लिए कड़े नियमों का पालन करना होता है।   
     
  • रेगुलेटरी मानदंड: फ्रेमवर्क निवेश और क्रेडिट कंपनियों, सूक्ष्म वित्त संस्थानों, और फैक्टर्स (बिल डिस्काउंटिंग में लगे) के रूप में पंजीकृत एनबीएफसी के रेगुलेटरी न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (एनओएफ) को 31 मार्च, 2027 तक बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर देता है। वर्तमान में निवेश और क्रेडिट कंपनियों को एनओएफ दो करोड़ रुपए पर बनाए रखना होता है जबकि सूक्ष्म वित्त संस्थानों (उत्तर पूर्व क्षेत्र को छोड़कर) और फैक्टर्स को एनओएफ को पांच करोड़ रुपए पर बनाए रखना होता है।  
     
  • एनपीए को वर्गीकृत करने की समय सीमा वर्तमान में बेस लेयर के एनबीएफसी के लिए 180 दिनों की है। संशोधित फ्रेमवर्क में प्रावधान है कि सभी एनबीएफसी को 90 दिनों से अधिक समय से बकाया ऋणों को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत करना होगा। ऐसी एनबीएफसी के लिए यह वर्गीकरण 31 मार्च, 2026 तक चरणों में लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रारंभिक पब्लिक ऑफर के वित्तपोषण के लिए प्रति उधारकर्ता के लिए एक करोड़ रुपए की सीमा होगी, जिसमें एनबीएफसी अधिक कंज़रवेटिव सीमाएं तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे। यह सीमा 1 अप्रैल, 2022 से प्रभावी होगी।

आईएफएससी अथॉरिटी ने इंश्योरेंस, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज़ से संबंधित विभिन्न  रेगुलेशंस अधिसूचित किए

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) अथॉरिटी ने इंश्योरेंस व्यवसाय, इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज़ और कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज़ के पंजीकरण के संबंध में रेगुलेशंस जारी किए हैं। रेगुलेशंस की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज़: आईएफएससी अथॉरिटी (कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज़) रेगुलेशन, 2021 में कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज़ के पंजीकरण और रेगुलेशन का प्रावधान है।[21]  जिन इंटरमीडियरीज़ को आईएफएससी में ऑपरेट करने के लिए पंजीकरण की जरूरत पड़ेगी, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ब्रोकर डीलर्स (किसी भी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग राइट्स वाले व्यक्ति), (ii) इनवेस्टमेंट बैंकर, औऱ (iii) क्लीयरिंग सदस्य (किसी भी मान्यता प्राप्त क्लीयरिंग कॉरपोरेशन में क्लियरिंग और सेटेलमेंट राइट्स वाले व्यक्ति)। रेगुलेशंस में विभिन्न श्रेणियों के इंटरमीडियरीज़ के पंजीकरण के मानदंडों (जैसे नेट वर्थ की जरूरतें) और जिम्मेदारियों को निर्दिष्ट किया गया है।
     
  • इंश्योरेंस व्यवसाय: आईएफएससी अथॉरिटी (बीमा व्यवसाय का पंजीकरण) रेगुलेशन 2021 में एक आईएफएससी में इंश्योरर्स और रीइंश्योरर्स के पंजीकरण और ऑपरेशन की प्रक्रिया को निर्दिष्ट किया गया है।[22]  रेगुलेशंस आईएफएससी में निम्न श्रेणी के बीमा व्यवसाय करने की अनुमति देते हैं: (i) जीवन बीमा, (ii) सामान्य बीमा, (iii) स्वास्थ्य बीमा, और (iv) रीइंश्योरेंस।   
     
  • इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज़: आईएफएससी अथॉरिटी (इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज़) रेगुलेशन, 2021 में आईएफएससी में इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज़ के पंजीकरण और ऑपरेशन का प्रावधान है।[23]  इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज़ के रूप में कार्य करने के लिए पंजीकरण हेतु दो श्रेणियों में आवेदन किया जा सकता है: (i) बीमा वितरक और (ii) बीमा दावा सेवा प्रदाता। विनियम निर्दिष्ट करते हैं कि इंश्योरेंस इंटरमीडियरी के व्यवसाय में एक वित्तीय वर्ष में पारिश्रमिक की 50% से अधिक राशि एक ग्राहक से नहीं आनी चाहिए।

वित्तीय संस्थानों के लिए ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी

भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी वित्तीय संस्थानों के लिए ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें बेसल III कैपिटल फ्रेमवर्क और रिसोर्स रेज़िंग के नियमों पर प्रूडेंशियल रेगुलेशंस सहित विभिन्न पहलू शामिल हैं।[24]  ये निर्देश एक्जिम बैंक, नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट, नेशनल हाउसिंग बैंक और स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया पर लागू होंगे। बेसल III कैपिटल स्टैंडर्ड्स पूंजी की गुणवत्ता और स्तर को बढ़ाने का प्रयास करते हैं ताकि वित्तीय संस्थान नुकसान को बेहतर ढंग से झेल सकें।  

ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में इन वित्तीय संस्थानों से अपेक्षित है कि वे 1 अप्रैल, 2022 से कुल रिस्क वेटेड एसेट्स (आरडब्ल्यूएज़) की 9% न्यूनतम कुल पूंजी को बरकरार रखेंगे। आरडब्ल्यूए न्यूनतम पूंजी को निर्धारित करने के लिए बैंकों के एसेट्स को उनके रिस्क प्रोफाइल के अनुसार वर्गीकृत करते हैं जिन्हें बैंकों को बरकरार रखना होता है। इसके अतिरिक्त इन वित्तीय संस्थानों को आरडब्ल्यूए का 2.5 प्रतिशत कैपिटल कंज़रवेशन बफर (सीसीबी) को बरकरार रखना होता है। सीसीबी एक अतिरिक्त पूंजी होती है जिसे नुकसान की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है।  

ड्राफ्ट निर्देशों पर टिप्पणियां 30 नवंबर, 2021 तक सौंपी जा सकती हैं।

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक खरीद और प्रॉजेक्ट मैनेजमेंट पर निर्देश जारी किए

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक खरीद और प्रॉजेक्ट मैनेजमेंट में सुधार का प्रयास करने वाले निर्देशों को जारी किया।[25],[26]  निर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ठेकेदार का चयन: परियोजना को लागू करने की रफ्तार और दक्षता में सुधार के लिए ठेकेदारों के चयन के वैकल्पिक तरीकों की अनुमति दी गई है। कुछ मामलों में, गुणवत्ता एवं लागत-आधारित चयन के तहत प्रस्ताव के मूल्यांकन के दौरान गुणवत्ता मानकों को महत्व दिया जा सकता है। इसे पारंपरिक एल वन (सबसे कम बोली लगाने वाले) प्रणाली के विकल्प के रूप में पेश किया गया है।
     
  • एकल बोली को मंजूर करना: निर्देशों के अनुसार, कुछ खरीद करने वाली संस्थाएं मानती हैं कि एकल बोली को आकर्षित करने वाले टेंडर्स स्वीकार्य नहीं हैं। इससे टेंडर फिर निकाला जाता है जिसमें खर्चा आता है और प्रॉजेक्ट को लागू करने में देरी होती है। ऐसे मामलों में जब केवल एक ही बोली मिलती हो, तो प्रक्रिया को वैध माना जाना चाहिए यदि: (i) खरीद को संतोषजनक ढंग से प्रचारित किया गया था और बोली जमा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, (ii) योग्यता मानदंड अनुचित रूप से प्रतिबंधित नहीं थे, और (iii) कीमतें (खरीदी जा रही वस्तुओं की) बाजार मूल्यों की तुलना में उचित हैं।
     
  • रुके हुए ठेके: जब कोई ठेकेदार काम बीच में ही छोड़ देता है/ काम बंद कर देता है, तो नए ठेकेदार को नियुक्त करने में काफी समय लगता है। खरीद करने वाली संस्थाओं को ऐसे ठेकों से निपटने के तरीके तलाशने चाहिए। हालांकि, एकल/सीमित टेंडर (एकल या सीमित आपूर्तिकर्ताओं के लिए खुला) जारी करने के लिए, काम का कम से कम 20% उस ठेकेदार द्वारा बिल किया जाना चाहिए जिसने काम छोड़ दिया है।
     
  • ठेकेदारों का भुगतान: ठेकेदारों को भुगतान में देरी से प्रॉजेक्ट को लागू करने में देरी, लागत में वृद्धि और विवाद होते हैं। इससे बचने के लिए, बिल जमा करने के 10 कार्य दिवसों के भीतर 75% देय भुगतान कर दिया जाना चाहिए। शेष भुगतान बिल जमा करने के 28 कार्य दिवसों के भीतर किया जा सकता है। 

सार्वजनिक खरीद के लिए मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट्स जारी

वित्त मंत्रालय ने माल और नॉन-कंसल्टेंसी सेवाओं की खरीद के लिए मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट्स जारी किए हैं।[27],[28],[29]  इन दस्तावेजों का उद्देश्य सरकारी टेंडर्स की संरचना को युक्तिसंगत और सरल बनाना है। डॉक्यूमेंट्स की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • कुछ सप्लायर्स को वरीयता: खरीद करने वाली संस्था सरकारी टेंडर्स में योग्य बोलीदाताओं की निम्नलिखित श्रेणियों को वरीयता देगी: (i) स्थानीय आपूर्तिकर्ता जिनके सामान या सेवाओं में कम से कम 50% स्थानीय सामग्री (भारत में मूल्य वर्धित मूल्य) हो, (ii) सूक्ष्म और लघु उद्यम और (iii) स्टार्ट-अप। उन देशों की संस्थाएं जो भारतीय कंपनियों को अपने सरकारी टेंडर्स में भाग लेने की अनुमति नहीं देती हैं, उन्हें पारस्परिक आधार पर बोली लगाने से रोका जा सकता है।
     
  • प्रतिबंधित देश: भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश का कोई भी बोलीदाता टेंडर्स के लिए बोली लगाने के लिए तभी पात्र होगा जब बोलीदाता उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के साथ पंजीकृत हो। यह उन देशों पर लागू नहीं होगा जहां भारत ने ऋण प्रदान किया है या जहां वह विकास परियोजनाओं में लगा हुआ है।

सेबी ने ईसीजी म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए डिस्क्लोज़र नियमों पर टिप्पणियां मांगी

सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस आधारित (ईएसजी) म्यूचुअल फंड योजनाओं के प्रकटीकरण मानदंडों पर एक परामर्श पत्र जारी किया है।[30] म्यूचुअल फंड निवेशकों से स्टॉक और बॉन्ड जैसी वित्तीय संपत्तियों में निवेश करने के लिए फंड जुटाते हैं। ईएसजी आधारित म्यूचुअल फंड योजनाएं पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव पर काम करने वाली कंपनियों में निवेश करती हैं। सेबी ने गौर किया कि जबकि सभी म्यूचुअल फंड योजनाएं प्रकटीकरण मानदंडों के अधीन हैं, ईएसजी योजनाओं के मामले में प्रकटीकरण और अधिक महत्व रखते हैं ताकि वे ईएसजी पर अपना ध्यान बनाए रखें। सेबी ने जिन पहलुओं पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं, उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

  • एसेट आबंटन: सेबी ने उल्लेख किया कि मौजूदा मानदंडों के अनुसार, ईएसजी आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं को ईएसजी थीम के बाद सिक्योरिटीज़ में अपनी कुल संपत्ति का न्यूनतम 80% निवेश करना होता है। यह प्रस्ताव रखा गया है कि बची हुई संपत्तियों को इस तरह से निवेश किया जाना चाहिए जो ईएसजी थीम के बिल्कुल विपरीत न हों।
     
  • प्रकटीकरण (डिस्क्लोजर्स): सेबी ने निम्नलिखित के संबंध में अतिरिक्त प्रकटीकरण की मांग की है: (i) ईएसजी फोकस की प्रकृति और सीमा, (ii) निवेश रणनीति, (iii) निवेश के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया, (iv) अनोखे जोखिम जो सस्टेनेबिलिटी पर योजना के फोकस से उत्पन्न हो सकते हैं, और (v) एएमसी द्वारा ईएसजी योजनाओं के लिए किए जाने वाले काम, जैसे निगरानी और मूल्यांकन और तथा पोर्टफोलियो डिस्क्लोजर। सेबी ने टिप्पणियां आमंत्रित की हैं कि क्या ये खुलासे पर्याप्त हैं, या यदि कोई अतिरिक्त प्रकटीकरण अनिवार्य होना चाहिए।
     
  • निवेश नीति: सेबी ने प्रस्ताव रखा है कि  एएमसी की जिम्मेदार निवेश नीति के लिए यह आवश्यक होना चाहिए कि: (i) 1 अक्टूबर, 2022 से, एएमसी केवल उन्हीं सिक्योरिटीज़ में निवेश करेगी जिनमें बिजेनस रिस्पांसिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (बीआरएसआर) डिस्क्लोजर है, (ii) योजनाओं में मौजूदा निवेश जहां 30 सितंबर, 2023 तक कोई बीआरएसआर प्रकटीकरण इस शर्त से मुक्त नहीं होगा। बीआरएसआर प्रकटीकरण ईएसजी मापदंडों पर कंपनी के फोकस के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

16 नवंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

सेबी ने आईपीओ के बुक बिल्डिंग मेथड पर परामर्श पत्र जारी किया

सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के बुक बिल्डिंग मेथड पर एक परामर्श पत्र जारी किया।[31] इस पद्धति के तहत, जब कोई आईपीओ खुला होता है, तो निवेशकों से विभिन्न कीमतों पर बोलियां एकत्र की जाती हैं। बोलियां एक फ्लोर प्राइज़ की रेंज और एक अपर/कैप प्राइज़ के बीच लगाई जाती हैं। बोली बंद होने के बाद ऑफर की कीमत निर्धारित की जाती है। सेबी ने निम्नलिखित पहलुओं पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं:

  • प्राइज़ बैंड: सेबी ने देखा कि इश्यूअर कंपनी द्वारा दिए गए प्राइज़ बैंड अक्सर बहुत नैरो होते हैं। यह निष्पक्ष और पारदर्शी प्राइज़ डिस्कवरी खोज तंत्र को कमजोर करता है। सेबी के अंतर्गत प्राथमिक बाजार सलाहकार समिति (पीएमएसी) ने बुक बिल्डिंग प्रक्रिया को अपनाने वाले सभी पब्लिक इश्यूज़ के लिए 5% के न्यूनतम प्राइज़ बैंड का सुझाव दिया है। इस पर टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं: (i) क्या पब्लिक इश्यूज़ में न्यूनतम प्राइज़ बैंड होना चाहिए, और (ii) न्यूनतम प्राइज़ बैंड क्या होना चाहिए।
     
  • पब्लिक इश्यूज़ में निवेशकों को वर्गीकृत किया जाता है: (i) योग्य संस्थागत खरीदार (म्यूचुअल फंड, बैंक, वित्तीय संस्थान), (ii) एनआईआई (उच्च निवल मूल्य वाले व्यक्ति), और (iii) खुदरा व्यक्तिगत निवेशक। सेबी ने कहा कि कुछ बड़े एनआईआई आईपीओ आवंटन में छोटे एनआईआई को बाहर कर रहे हैं। पीएमएसी ने ऐसे एनआईआई के लिए निर्धारित आईपीओ में एक तिहाई हिस्सा आरक्षित करने का सुझाव दिया जिनका एप्लीकेशन साइज दो लाख रुपए से 10 लाख रुपए के बीच है। शेष आवंटन 10 लाख रुपए से अधिक के आवेदनों के लिए होगा। इस पर टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं: (i) क्या एनआईआई को दो उपश्रेणियों में विभाजित किया जाना चाहिए, और (ii) वह भाग जो ऐसी श्रेणियों के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए।

 

विधि एवं न्याय

Shubham Dutt (shubham@prsindia.org)

सर्वोच्च न्यायालय ने पेगासेस स्पाईवेयर के कथित उपयोग की जांच करने के लिए तकनीकी समिति बनाई

सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच करने के लिए एक तकनीकी समिति का गठन किया है कि केंद्र सरकार ने अनाधिकृत तरीके से अपने नागरिकों की जासूसी करने के लिए पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया।[32]  स्पाइवेयर एक प्रकार का दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर है जिसे उपयोगकर्ता की सहमति के बिना कंप्यूटिंग डिवाइस में लगाया जाता है। ऐसा सॉफ्टवेयर गुप्त रूप से उपयोगकर्ता के बारे में जानकारी एकत्र करता है और इसे तीसरे पक्ष को देता है। अदालत के समक्ष दायर रिट याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार ने एक इजरायली टेक्नोलॉजी फर्म द्वारा निर्मित पेगासस नामक स्पाइवेयर का दुरुपयोग किया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उनके डिवाइस पेगासस से इंफेक्टेड हैं, जो उनके निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करता है।

तकनीकी समिति के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित की जांच शामिल है: (i) क्या भारतीय नागरिकों के डिवाइस पर पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया था, और यदि हां, तो इसके उपयोग से प्रभावित व्यक्तियों का विवरण, (ii) 2019 में भारतीय नागरिकों के खिलाफ पेगासस के उपयोग की पहली रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए और (iii) क्या इस तरह के स्पाइवेयर को केंद्र या राज्य सरकारों या उनकी किसी एजेंसी द्वारा भारतीय नागरिकों के खिलाफ हासिल या इस्तेमाल किया गया था, और यदि हां, तो कौन सा कानून, नियम या दिशानिर्देश ऐसे उपयोग को अधिकृत करते हैं। इसके अतिरिक्त समिति को इस संबंध में सुझाव देने को कहा गया है कि: (i) मौजूदा कानूनों में संशोधन या निगरानी के लिए एक नया कानूनी ढांचा लागू करना ताकि निजता पर हमलों को रोका जा सके और देश की साइबर सुरक्षा में सुधार किया जा सके, (ii) नागरिकों के लिए एक ऐसी व्यवस्था कि वे अपने डिवाइस की अवैध निगरानी का संदेह होने पर शिकायत दर्ज करा सकें, और (iii) साइबर सुरक्षा कमजोरियों का आकलन करने और साइबर हमलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी की स्थापना करना।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तकनीकी समिति में तीन सदस्य शामिल हैं जो साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, नेटवर्क और हार्डवेयर के विशेषज्ञ हैं। तकनीकी समिति के कामकाज की देखरेख सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.वी. रवींद्रन करेंगे और दो विशेषज्ञों द्वारा उन्हें सहायता प्रदान की जाएगी।

 

नागरिक उड्डयन

एयर इंडिया में सरकार की इक्विटी शेयरहोल्डिंग की पूरी बिक्री को मंजूरी  

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीईए) ने एयर इंडिया में भारत सरकार की 100% इक्विटी शेयरहोल्डिंग की बिक्री के लिए टैलेस प्राइवेट लिमिटेड (टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड की सहायक कंपनी) की बोली को मंजूरी दे दी।[33]  विजेता बोली (18,000 करोड़ रुपए) एयर इंडिया के 100% शेयरों के लिए है, और इसके साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस (एईएक्सएल) और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल हैं। लेन-देन में नॉन-कोर एसेट्स जैसे जमीन और बिल्डिंग (14,718 करोड़ रुपए मूल्य) शामिल नहीं हैं, जिसे सरकार की एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) को हस्तांतरित किया जाएगा। बोली का आरक्षित मूल्य (न्यूनतम मूल्य) 12,906 करोड़ रुपए था। लेनदेन दिसंबर 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है।  

एयर इंडिया पर जनवरी 2020 तक लगभग 60,000 करोड़ रुपए का कर्ज था।[34]  इसमें से टाटा संस एयर इंडिया के कर्ज का एक हिस्सा लेगी, जबकि बाकी का एआईएएचएल को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।34   2012 से, सरकार ने एयरलाइन में 30,500 करोड़ रुपए का निवेश किया है। 34  

तालिका 2: एयर इंडिया में सरकार की इक्विटी शेयरहोल्डिंग की पूरी बिक्री का विवरण

वर्ष 

घटनाक्रम

जून 2017

सीसीईए से सैद्धांतिक मंजूरी के साथ बिक्री की प्रक्रिया शुरू

मार्च 2018

एअर इंडिया में 76% शेयरहोल्डिंग की बिक्री के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया गया; कोई बोली प्राप्त नहीं हुई

जनवरी 2020

प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया; प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण और एयर इंडिया के 100% शेयरों की बिक्री का प्रस्ताव रखा गया; सात एक्सप्रेशन ऑफ इंटेंट भाव प्राप्त हुए 

मार्च 2021

प्रस्ताव के लिए अनुरोध और शेयर परचेज़ एग्रीमेंट जारी किया गया 

अक्टूबर 2021

टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड की सहायक कंपनी द्वारा प्रस्तुत बोली को सीसीईए का अनुमोदन

स्रोत: प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो; पीआरएस

कृषि उड़ान 2.0 योजना प्रारंभ 

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कृषि उड़ान 2.0 योजना जारी की।[35]  मूल योजना की घोषणा फरवरी 2020 में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर कृषि उत्पादों के परिवहन में किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी। [36]

संशोधित योजना, जिसे एएआई कार्गो लॉजिस्टिक्स एंड एलाइड सर्विसेज कंपनी लिमिटेड (भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की सहायक कंपनी) के सहयोग से तैयार किया गया था, का उद्देश्य कृषि-उत्पाद की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना और प्रोत्साहित करना है। इसे पूर्वोत्तर और आदिवासी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए देश भर के 53 हवाई अड्डों पर लागू किया जाएगा। मंत्रालय का लक्ष्य इस योजना को छह महीने के लिए शुरू करना और परिणामों के आधार पर संशोधन पेश करना है। संशोधित योजना की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं: 

  • हवाई परिवहन को प्रोत्साहन: चुनिंदा हवाई अड्डों पर भारतीय मालवाहकों के लिए लैंडिंग, पार्किंग, नौवहन शुल्क की पूर्ण छूट।
     
  • रियायतें: राज्यों को एयरलाइन टर्मिनल शुल्क (कार्गो को संभालने के लिए शुल्क) पर बिक्री कर को घटाकर 1% करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जैसा कि उड़ान फ्लाइट्स में बढ़ाया गया है।
     
  • ई-कुशल का विकास: सभी हितधारकों को सूचनाओं के प्रसार की सुविधा के लिए ई-कुशल (कृषि उड़ान फॉर सस्टेनेबल होलिस्टिक एग्री-लॉजिस्टिक्स) प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। यह एकल मंच होगा जो प्रासंगिक जानकारी प्रदान करेगा और योजना के समन्वय, निगरानी और मूल्यांकन में भी सहायता करेगा।

सिविल हेलीकॉप्टर संचालन में सहयोग के लिए राज्यों को दिशानिर्देश जारी  

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org) 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्यों के लिए सिविल हेलीकॉप्टर संचालन को सहयोग देने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिनका नाम 'हेली दिशा' है।[37]  हेलीकॉप्टरों के संचालन, रखरखाव और नेविगेशन से संबंधित मुद्दों को नागरिक उड्डयन शर्तें रेगुलेट करती हैं जिन्हें नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) जारी करता है।[38]  हेली दिशानिर्देश नागरिक उड्डयन शर्तों के अनुरूप अच्छी कार्य पद्धतियां हैं। उल्लेखनीय है कि हवाईअड्डों के बाहर, नागरिक प्रशासन हेलीकॉप्टर संचालन के लिए सुरक्षा शर्तों के प्रावधानों के लिए जिम्मेदार है। एक हवाई अड्डा ऐसी कोई सीमित जमीन या जल क्षेत्र होता है जिसका उपयोग विमान के उतरने या रवानगी के लिए किया जाता है।41  दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:40 

  • हेलीपैड ऑपरेशंस: हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों को हेलीपैड के मालिक को किसी विशेष हेलीकॉप्टर लैंडिंग साइट के इस्तेमाल के लिए अग्रिम अनुरोध प्रस्तुत करना होगा। जिला प्रशासन को केवल निर्धारित हेलीकॉप्टर संचालन के बारे में सूचित करने की आवश्यकता है, उसके अनुमोदन की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि लैंडिंग क्षेत्र सार्वजनिक क्षेत्र या प्रतिष्ठान में है, तो उस प्रतिष्ठान के संरक्षक का अनापत्ति प्रमाणपत्र देना होगा।
     
  • सुरक्षा संबंधी कार्य: सामान्य तौर पर, 35 मीटर×35 मीटर के आकार का हेलीपैड सभी छोटे और मध्यम आकार के हेलीकॉप्टरों के लिए पर्याप्त होता है। हेलीपैड में निम्नलिखित नैविगेशन उपकरण होने चाहिए: (i) उड़ान के समय आसान पहचान हेतु निर्दिष्ट आयामों के लिए सफेद रंग में चिन्हित 'H' का निशान, और (ii) सुरक्षित लैंडिंग के लिए हवा की दिशा का संकेत देने वाला एक विंडसॉक या झंडा। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि 50 मीटर×50 मीटर की जगह के भीतर ऐसी सभी वस्तुओं को हटा दिया जाए जो तितर-बितर हो सकती हैं, और यह कि हेलीपैड सभी प्राकृतिक और भौतिक बाधाओं जैसे पेड़ों, इमारतों और बिजली लाइनों से मुक्त हो। उपरोक्त के अलावा, भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय, अग्निशमन सेवाएं और चिकित्सा सहायता सुरक्षित हेलीपैड संचालन के लिए आवश्यक हैं। 

विकलांग लोगों की हवाई यात्रा को आसान बनाने के लिए ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 'नागरिक उड्डयन क्षेत्र में विकलांग व्यक्तियों के लिए सुगमता मानकों और सुविधाओं का प्रावधान' का ड्राफ्ट जारी किया, जिसमें यह सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश शामिल हैं कि विकलांग लोग आसानी से यात्रा कर सकें।[39] दिशानिर्देश निम्नलिखित पर लागू होंगे: (i) सभी भारतीय एयरलाइंस/करियर, (ii) सभी विदेशी एयरलाइंस/करियर, (iii) सभी एयरपोर्ट ऑपरेटर, और (iv) विमानन सुरक्षा समूह। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

  • हवाईअड्डा ऑपरेटर: दिशानिर्देशों में विजुअली इंपेयर्ड यात्रियों की सहायता के लिए हवाईअड्डा ऑपरेटर को टैक्टाइल गाइडिंग और वॉर्निंग टाइल्स के साथ पाथवेज़ देने होंगे। प्रस्तावित सुगम मार्ग के साथ गाइडिंग टाइलें लगाई जानी चाहिए। वार्निंग टाइल्स का उपयोग वॉकवे की दिशा में बदलाव को इंगित करने और बाधाओं से बचने के लिए किया जाता है। हवाईअड्डा ऑपरेटर द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाओं में शामिल हैं: (i) टर्मिनल बिल्डिंग और पिक अप/ड्रॉप ऑफ जोन के पास निर्दिष्ट साइनेज के साथ आरक्षित पार्किंग, (ii) प्रस्थान और बैगेज क्लेम एरिया के पास निर्दिष्ट ऊंचाई के हेल्पडेस्क, (iii) प्रत्येक बोर्डिंग गेट के पास बैठने के लिए कम से कम तीन निर्दिष्ट स्थान, और (iv) कई भाषाओं में हवाईअड्डे के टेक्टाइल और ऑडियो मानचित्र।
     
  • एयरलाइंस: एयरलाइंस को सुगमता संबंधी निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करनी होंगी: (i) जिन यात्रियों को सहायता की जरूरत है, उनके लिए वेबसाइट पर पूर्व सूचना और विशेष सेवा के विकल्प, (ii) व्हीलचेयर और एयरक्राफ्ट तक व्हीलचेयर अनुकूल पहुंच, और (iii) विकलांग ग्राहकों की सहायता के लिए सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना।
     
  • सुरक्षा और निकासी: दिशानिर्देश सुरक्षा एजेंसियों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (सोप्स) को निर्दिष्ट करते हैं। सोप्स निम्नलिखित के लिए प्रावधान करते हैं: (i) मोबिलिटी उपकरणों (जैसे व्हीलचेयर) का उपयोग करने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग, (ii) प्रोस्थेटिक्स वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग, और (iii) चिकित्सा उपकरणों (जैसे श्रवण यंत्र) के साथ यात्रियों की स्क्रीनिंग। इसके अतिरिक्त हवाईअड्डा ऑपरेटर विशेष जरूरत वाले व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की सुविधा के लिए जिम्मेदार होंगे। दिशानिर्देश विजुअल, हियरिंग, मोबिलिटी और स्पीच इंपेयरमेंट वाले व्यक्तियों की निकासी के लिए भी सोप्स निर्धारित करते हैं।

ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर 9 नवंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

स्वास्थ्य

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू 

आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू किया गया था।[40]  यह मिशन अगले चार से पांच वर्षों के भीतर पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश करने का प्रयास करता है। मिशन के तीन प्रमुख पहलू हैं:43 

  • डायग्नॉस्टिक और उपचार की सुविधाएं: मिशन का उद्देश्य स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्रों के माध्यम से रोगों का शीघ्र पता लगाना है। ऐसे केंद्र चिकित्सा परामर्श, परीक्षण सुविधाएं और दवा भी निःशुल्क प्रदान करेंगे। इसके अतिरिक्त 600 जिलों में 35,000 नए क्रिटिकल केयर बेड जोड़े जाएंगे, और 125 जिलों में रेफरल सुविधाएं (मरीजों को एक स्वास्थ्य केंद्र से दूसरे में स्थानांतरित करना) प्रदान की जाएंगी।
     
  • डायग्नॉस्टिक नेटवर्क्स का विकास: 730 जिलों में एकीकृत जन स्वास्थ्य लेबोरेट्रीज़ बनाई जाएंगी। तीन हजार प्रखंडों में प्रखंड स्तरीय जन स्वास्थ्य इकाइयां बनाई जाएंगी। रोग नियंत्रण के लिए पांच क्षेत्रीय राष्ट्रीय केंद्रों, 20 महानगरीय इकाइयों और 15 बायो-सेफ्टी स्तर की लेबोरेट्रीज़ का उपयोग करके डायग्नॉस्टिक केंद्रों के नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।
     
  • मौजूदा अनुसंधान संस्थानों का विस्तार: इसके अंतर्गत (i) मौजूदा 80 वायरल डायग्नॉस्टिक और रिसर्च लैब्स को मजबूत किया जाएगा, (ii) 15 बायो-सेफ्टी स्तर के लैब्स को चालू किया जाएगा, और (iii) चार नए राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान और एक वन हेल्थ संस्थान स्थापित किए जाएंगे।

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) नियम, 2021 अधिसूचित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) नियम, 2021 को अधिसूचित किया है।[41]  मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 को 2021 में संशोधित किया गया है।[42] 2021 के नियम, संशोधन एक्ट के कुछ पहलुओं का विवरण प्रदान करते हैं (जैसे असामान्य भ्रूण यानी फीटल अबनॉर्मिलिटी को डायग्नोज करने के लिए मेडिकल बोर्ड क्या करेगा)। 2021 के नियमों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

  • मेडिकल बोर्ड के कार्य: 2021 के संशोधन एक्ट में गर्भपात की पात्रता अवधि 20 हफ्ते से बढ़ाकर 24 हफ्ते की गई है।45  यह अधिकतम अवधि असामान्य भ्रूण के कारण गर्भपात पर लागू नहीं होगी।45 एक राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड गर्भपात को मंजूरी देने के लिए इस अबनॉर्मिलिटी को डायग्नोज करेगा।45

2021 के नियमों में बोर्ड के कार्यों का प्रावधान है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) असामान्य भ्रूण के कारण गर्भपात का अनुरोध करने वाली महिलाओं की रिपोर्ट की जांच करना, (ii) अनुरोध की तारीख से तीन दिनों के भीतर गर्भपात के अनुरोध पर निर्णय लेना, और (iii) यह सुनिश्चित करना कि अनुरोध के पांच दिनों के भीतर गर्भपात की प्रक्रिया सुरक्षित रूप से संचालित की जाती है।

  • 20-24 हफ्ते के बीच गर्भपात के लिए पात्र महिलाएं: 2021 का संशोधन एक्ट गर्भपात की अनुमति देने के लिए कुछ शर्तों (जैसे गर्भवती महिला के जीवन या शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम) का प्रावधान करता है। इसके अतिरिक्त यह केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह 20-24 सप्ताह के बीच गर्भपात कराने वाली महिलाओं की पात्रता पर नियमों को अधिसूचित करे। 2021 के नियम निर्दिष्ट करते हैं कि जो महिलाएं 20-24 हफ्ते के बीच गर्भपात कराने के लिए पात्र हैं, वे इस प्रकार हैं: (i) यौन उत्पीड़न या बलात्कार या अनाचार की शिकार, (ii) नाबालिग, (iii) मानसिक रूप से बीमार महिलाएं, और (iv) गर्भावस्था के दौरान विधवा या तलाकशुदा महिलाएं।44

2021 के संशोधन बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें।

 

गृह मामले

Shubham Dutt (shubham@prsindia.org)

मंत्रालय ने कुछ राज्यों में सीमा सुरक्षा बल के क्षेत्राधिकार में बदलावों को अधिसूचित किया

गृह मंत्रालय ने कुछ राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के क्षेत्राधिकार में बदलाव को अधिसूचित किया है।[43]  सीमा सुरक्षा बल एक्ट, 1968 के तहत केंद्र सरकार बीएसएफ अधिकारियों को भारत की सीमाओं से सटे निर्दिष्ट क्षेत्रों के भीतर कुछ शक्तियों का प्रयोग करने की अनुमति दे सकती है। ऐसी शक्तियों में कुछ कानूनों के तहत किसी अपराध को रोकने या अपराधी को पकड़ने के लिए तलाशी लेने, जब्त करने या गिरफ्तार करने की शक्ति शामिल है।[44]

अधिसूचित परिवर्तन पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) एक्ट, 1920, पासपोर्ट एक्ट, 1967 और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत बीएसएफ अधिकारियों को दी गई शक्तियों से संबंधित हैं।[45],[46],[47]  तालिका 3 और 4 में अधिसूचित बदलावों को स्पष्ट किया गया है। 

तालिका 3: राज्यों में बदलाव, जहां बीएसएफ सिर्फ निर्दिष्ट क्षेत्रों में ही अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है 

राज्य

निर्दिष्ट क्षेत्र

पूर्व

संशोधित

गुजरात

सीमा से 80 किलोमीटर 

सीमा से 50 किलोमीटर 

असम, पंजाब और पश्चिम बंगाल

सीमा से 15 किलोमीटर 

सीमा से 50 किलोमीटर 

स्रोत: गृह मामलों का मंत्रालय; पीआरएस

तालिका 4: राज्य/यूटी में परिवर्तन, जहां बीएसएफ अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है

अधिसूचना के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियां +

राज्य/यूटी

पूर्व

संशोधित

पासपोर्ट के बिना भारत में प्रवेश करने वाले लोगों की गिरफ्तारी

मणिपुर, त्रिपुरा, जम्मू एवं कश्मीर*

 

मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख 

 (i) वैध पासपोर्ट के बिना भारत छोड़ने, या (ii) दूसरे व्यक्ति के पासपोर्ट के इस्तेमाल के संदेह वाले व्यक्तियों की गिरफ्तारी, तलाशी और कब्जा 

मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, जम्मू एवं कश्मीर#

पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध करने वाले व्यक्तियों की वारंट के बिना गिरफ्तारी; हथियारों की बरामदगी

मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय

नोट: + बीएसएफ अधिकारियों को प्राप्त शक्तियों के उदाहरण; पूरी सूची नहीं। *1969 में, मणिपुर और त्रिपुरा यूटी और कश्मीर एवं कश्मीर राज्य (जेएंडके).  #जेएंडके राज्य

स्रोत: संबंधित एक्ट्स; गृह मामलों का मंत्रालय; पीआरएस

जन्म और मृत्यु पंजीकरण एक्ट में संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

गृह मामलों के मंत्रालय ने (ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार जनरल, भारत के जरिए) जन्म और मृत्यु पंजीकरण एक्ट, 1969 में संशोधनों को प्रस्तावित किया है।[48]  एक्ट में यह अनिवार्य किया गया है कि भारत में जिस स्थान पर जन्म और मृत्यु हुई है, वहां उसका पंजीकरण कराया जाएगा। मुख्य प्रस्तावित संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पंजीकृत जन्म और मृत्यु का डेटाबेस: प्रस्तावित संशोधनों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत जन्म और मृत्यु के डेटाबेस को बनाए रखने के लिए रजिस्ट्रार जनरल (केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त) की आवश्यकता होती है। डेटाबेस का उपयोग केंद्र सरकार के अनुमोदन से जनसंख्या रजिस्टर, मतदाता सूची और अन्य राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस (जैसे राशन कार्ड, पासपोर्ट, आधार और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए) को अपडेट करने के लिए किया जा सकता है। इसी तरह, मुख्य रजिस्ट्रार (राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त) को राष्ट्रीय डेटाबेस के साथ एकीकृत करने के लिए राज्य स्तर पर नागरिक पंजीकरण रिकॉर्ड का एक एकीकृत डेटाबेस बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
     
  • मेडिकल संस्थानों को मृत्यु के कारण को प्रामाणित करना चाहिए: एक्ट के अंतर्गत राज्य सरकार किसी भी क्षेत्र के व्यक्तियों से  मृत्यु का कारण बताने वाला प्रमाणपत्र मांग सकती है, जोकि उस इलाके में उपलब्ध स्वास्थ्य केंद्र से मिले। प्रस्तावित संशोधनों में सभी मेडिकल संस्थानों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह अपने यहां होने वाली मृत्यु को प्रामाणित करे और निकटतम रिश्तेदार को इसकी एक प्रति प्रदान करे।
     
  • जन्म एवं मृत्यु संबंधी रजिस्टर से जन्म की तारीख और स्थान के सबूत निकालना: एक्ट के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति जन्म और मृत्यु के रजिस्टर की किसी प्रविष्टि की प्रति हासिल कर सकता है। इस प्रति को जन्म और मृत्यु के सबूत के रूप में स्वीकार किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन के अंतर्गत संशोधन के दिन या उसके बाद पैदा हुए व्यक्ति के जन्म की तारीख और स्थान को साबित करने के लिए ऐसी प्रतियों के उपयोग की अनुमति है। इस तरह के प्रमाण का उपयोग शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, पासपोर्ट जारी करने और विवाह के पंजीकरण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

प्रस्तावित संशोधनों पर 27 नवंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

वाणिज्य

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) के कार्यान्वयन को मंजूरी 

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी (सड़क, रेलवे, जलमार्ग जैसे परिवहन के कई साधन शामिल) देने के लिए कार्यान्वयन, निगरानी और समर्थन तंत्र के लिए संस्थागत ढांचे सहित पीएम गतिशक्ति एनएमपी को मंजूरी दी।[49]  इस योजना का उद्देश्य एकीकृत योजना और परियोजनाओं के लागू करने के जरिए मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से जुड़े मसलों को हल करना है। इससे लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी।  

कार्यान्वयन ढांचे में शामिल हैं: (i) सेक्रेटरीज़ का एंपावर्ड ग्रुप (कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में), जोकि लॉजिस्टिकल दक्षता सुनिश्चित करने के साथ-साथ योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा और निगरानी करेगा, (ii) नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालयों के नेटवर्क प्लानिंग विंग के प्रमुख शामिल हैं) जोकि एंपावर्ड ग्रुप की सहायता करेगा, और (iii) तकनीकी सहायता इकाई (इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के डोमेन विशेषज्ञों वाली), जोकि नेटवर्क के समग्र एकीकरण और अनुकूलन को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होगी। 

 

विदेशी मामले

स्टैंडिंग कमिटी ने भारत और द्विपक्षीय निवेश संधियों पर रिपोर्ट सौंपी

Shubham Dutt (shubham@prsindia.org)

विदेशी मामलों संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: पी.पी. चौधरी) ने ‘भारत और द्वीपक्षीय निवेश संधियां’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[50]  द्विपक्षीय निवेश संधियां (बीआईटीज़) दो देशों के बीच पारस्परिक समझौते होते हैं जोकि दो देशों के बीच विदेशी निवेश के तरीके से संबंधित न्यूनतम गारंटी निर्धारित करते हैं, जैसे विदेशी निवेशकों और भारतीय कंपनियों के साथ एक जैसा व्यवहार करना, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार निष्पक्ष और समानतापूर्ण बर्ताव करना और संपत्ति की जब्ती से सुरक्षा, यानी किसी देश की उसके क्षेत्र में विदेशी निवेश को अधिग्रहित करने की क्षमता को सीमित करना। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बीआईटीज़ का दर्जा: कमिटी ने कहा कि 2015 तक भारत ने 83 देशों के साथ बीआईटी पर हस्ताक्षर किए थे (इनमें से 74 प्रभावी हैं) जिन पर 1993 के भारतीय मॉडल बीआईटी के आधार पर समझौता किया गया था। 2015 में भारत ने अपने मॉडल बीआईटी में संशोधन किया था। कमिटी ने कहा कि तब से, भारत ने (i) सिर्फ चार देशों के साथ नए बीआईटी/निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और 37 देशों/ब्लॉक्स के साथ बातचीत चल रही है, तथा (ii) 77 देशों के साथ पुराने बीआईटीज़ को रद्द किया गया है (यानी सिर्फ छह देशों के साथ पुराने बीआईटी प्रभावी हैं)।
     
  • कमिटी ने गौर किया कि 2015 के बाद से भारत ने जिन बीआईटीज़/निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और जिन पर बातचीत चल रही है, उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। उसने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) उन देशों के साथ बीआईटीज़ पर हस्ताक्षर करना जिनके साथ भारत पहले ऐसी संधियां कर चुका है, (ii) प्राथमिकता वाले चिन्हित क्षेत्रों में चुनींदा बीआईटीज़ करना, और (iii) विदेश मंत्रालय द्वारा दूसरे मंत्रालयों/विभागों के सहयोग से संधि वार्ता को जल्द पूरा करना। उसने मॉडल बीआईटी की नियमित समीक्षा और उसमें उपयुक्त संशोधन का भी सुझाव दिया।  
     
  • बीआईटी के अंतर्गत आर्बिट्रेशन: बीआईटीज़ निवेशकों और जिस देश में निवेश किया गया है, उस देश के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एक प्रक्रिया प्रदान करते हैं। विवादों को सुलझाने का सबसे पसंदीदा तरीका आर्बिट्रेशन है जिसमें दोनों पक्ष इस बात पर सहमत होते हैं कि अदालत में जाने की बजाय उनके विवाद पर एक तटस्थ व्यक्ति (आर्बिट्रेटर) फैसला दे। कमिटी ने कहा कि अब तक बीआईटीज़ के तहत भारत के खिलाफ सिर्फ एक मामले पर फैसला आया है जोकि भारत के खिलाफ था। इस फैसले के परिणामस्वरूप भारत सरकार को काफी बड़ी रकम चुकानी पड़ी। भविष्य में ऐसे नुकसान से बचने के लिए कमिटी ने यह सुझाव दिया कि आर्बिट्रेशन से पहले सलाह-मशविरे या बातचीत के जरिए विवाद को समय रहते सुलझाया जाए।
     
  • स्थानीय विशेषज्ञता विकसित करना: कमिटी ने देसी वकीलों (और लॉ फर्मों) के पैनल विकसित करने का सुझाव दिया (i) जिनमें निवेश संबंधी आर्बिट्रेशन में भारत का प्रतिनिधित्व करने की जरूरी विशेषज्ञता हो, और (ii) बीआईटीज़ की अच्छी ड्राफ्टिंग को सुनिश्चित करने के लिए निवेश संधि कानून का अनुभव हो। 

रिपोर्ट पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

भारत और अंतरराष्ट्रीय कानून पर स्टैंडिंग कमिटी ने रिपोर्ट सौंपी

Shashank Srivastava (shubham@prsindia.org)

विदेशी मामलों संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: पी.पी. चौधरी) ने 'भारत और अंतरराष्ट्रीय कानून, विदेशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां, शरण संबंधी मुद्दे, अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा और वित्तीय अपराध सहित' विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[51] कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय कानून को लागू करना: कमिटी ने कहा कि भारत द्विविधता (डुअलिज्म) के सिद्धांत का पालन करता है (यानी घरेलू स्तर पर अंतरराष्ट्रीय कानून सीधे लागू नहीं होते हैं, और उन्हें संसद के कानून के जरिए लागू किया जाना चाहिए)। उसने कहा कि कई मौकों पर सर्वोच्च न्यायालय इस सिद्धांत को नहीं मानता। राज्य के विभिन्न संस्थानों के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए कमिटी ने सुझाव दिया कि विदेश मंत्रालय उन मामलों में संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित करे जिनमें घरेलू कानून में कोई वैक्यूम है। इसके अतिरिक्त उसने संबंधित मंत्रालयों के साथ वर्किंग ग्रुप बनाने का सुझाव दिया ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून में भारत की क्षमता और विशेषज्ञता को मजबूत किया जा सके।
     
  • प्रत्यर्पण संधियां: अनुरोध पर किसी ऐसे व्यक्ति के समर्पण की प्रक्रिया को प्रत्यर्पण कहा जाता है जिस पर अपराध करने का आरोप है और किसी एक देश में उस पर मुकदमा चलाया जा रहा है, और वह दूसरे देश में रहता है। भारत ने 50 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां की हैं और 11 देशों के साथ प्रत्यर्पण व्यवस्थाएं की हैं। कमिटी ने उन देशों में शरण लेने वाले अपराधियों के प्रत्यर्पण में देरी पर गौर किया जिनके साथ भारत ने प्रत्यर्पण संधियां या व्यवस्थाएं की हैं। इसके अतिरिक्त यह भी देखा गया कि अपराधी ऐसे देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि न होने का लाभ उठाते हैं जहां वे निवेश के माध्यम से नागरिकता या निवास प्राप्त कर सकते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि ऐसे देशों की पहचान की जाए और प्राथमिकता के आधार पर उनके साथ प्रत्यर्पण संधियां की जाएं।
     
  • कमिटी ने कहा कि भारत ने 40 देशों के साथ परस्पर कानूनी सहायता संधियों (एमएलएटीज़) पर हस्ताक्षर किए हैं। एमएलएटीज़ के अंतर्गत कई मामलों में सहायता के लिए अनुरोध किए जा सकते हैं, जैसे व्यक्तियों को चिन्हित करना और उन्हें खोजना, सबूत जमा करना और बयान लेना। कमिटी ने गौर किया कि विभिन्न देशों के साथ ऐसे 845 अनुरोध लंबित हैं। उसने निम्नलिखित सुझाव दिए (i) ऐसे अनुरोधों के लंबित होने के कारणों को चिन्हित करने के लिए टास्क फोर्स बनाना और समाधानों का सुझाव देना, और (ii) प्राथमिकता के आधार पर अन्य देशों के साथ अधिक एमएलएटीज़ करना।

रिपोर्ट पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें। 

 

रक्षा

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

सरकार ने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) का काम सात पीएसयूज़ में हस्तांतरित किया

केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर, 2021 से ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) को भंग कर दिया और उसके संचालन के काम को सात नई सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) में हस्तांतरित कर दिया।[52] कार्यात्मक स्वायत्तता, दक्षता बढ़ाने और विकास क्षमता और नवाचार को स्पष्ट करने के लिए यह कदम उठाया गया है।[53] ओएफबी हथियारों, गोला-बारूद और रक्षा उपकरणों का निर्माण करता था। यह रक्षा मंत्रालय में रक्षा निर्माण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित होता था।

तालिका 5: नए पीएसयूज़ की सूची और उनके कार्य 

पीएसयू

कार्य

म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड

गोला बारूद और विस्फोटकों की मैन्यूफैक्चरिंग

आर्मर्ड वेहिकल निगम लिमिटेड 

वाहनों की मैन्यूफैक्चरिंग

एडवांस्ड वेपेन्स एंड एक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड

हथियारों और उपकरणों की मैन्यूफैक्चरिंग

ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड

ट्रूप्स और कंफर्ट आइटम्स की मैन्यूफैक्चरिंग 

यंत्र इंडिया लिमिटेड

मिलिट्री ग्रेड कंपोनेंट्स और एंसिलरी उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग 

इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड

ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स (जैसे टैकों के उपकरण) की मैन्यूफैक्चरिंग 

ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड

पैराशूट्स की मैन्यूफैक्चरिंग 

स्रोत: रक्षा निर्माण विभाग, रक्षा मंत्रालय; पीआरएस  

ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड की सभी संपत्तियों और देनदारियों को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सात सार्वजनिक उपक्रमों और ऑर्डनेंस निदेशालय (समन्वय और सेवा) को हस्तांतरित कर दिया गया है। कुछ गैर-उत्पादन इकाइयों, जैसे अस्पतालों, के प्रबंधन और नियंत्रण के साथ ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड की अतिरिक्त भूमि को ऑर्डनेंस निदेशालय को हस्तांतरित कर दिया गया है।  

 

कृषि

फिशरीज़ विभाग ने ड्राफ्ट भारतीय मरीन फिशरीज़ बिल, 2021 जारी किया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

फिशरीज़ विभाग ने ड्राफ्ट भारतीय मरीन फिशरीज़ बिल, 2021 को जारी किया।[54] ड्राफ्ट बिल मत्स्य संसाधनों के सतत विकास का प्रावधान करता है। यह पारंपरिक और लघु स्तर के मछुआरों की जीविका और सामाजिक-आर्थिक कल्याण को बढ़ावा देने का भी प्रयास करता है। मसौदा बिल की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • लाइसेंसिंग: बिल के अंतर्गत कोई भी जहाज वैध लाइसेंस के बिना मछली पकड़ने या मछली पकड़ने से संबंधित गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकता। यह हाई सी, यानी किसी भी देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (भारतीय समुद्र तट के 200 समुद्री मील से परे) के बाहर अंतरराष्ट्रीय जल में मछली पकड़ने पर भी लागू होगा। मछली पकड़ने वाले गैर-मोटर चालित जहाजों को लाइसेंस की शर्त से छूट दी गई है। लाइसेंस राज्य सरकारों के लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाएगा।
     
  • एप्लिकेबिलिटी: बिल मछली पकड़ने वाले भारतीय जहाजों पर लागू होगा। मछली पकड़ने के भारतीय जहाज को ऐसे जहाज के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका स्वामित्व किसी भारतीय नागरिक के पास है और वह मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 या किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत है। मछली पकड़ने के अन्य सभी जहाज विदेशी मछली पकड़ने वाले जहाजों की परिभाषा के अंतर्गत आएंगे।
     
  • फिशिंग से संबंधित गतिविधियां: ड्राफ्ट बिल के अंतर्गत फिशिंग संबंधी गतिविधियों में मछलियों की लैंडिंग, पैकेजिंग या मार्केटिंग शामिल हैं।
     
  • विदेशी फिशिंग जहाज पर प्रतिबंध: विदेशी फिशिंग जहाजों को भारत के समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने या मछली पकड़ने से संबंधित गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए (अर्थात, समुद्र तट से 200 समुद्री मील के भीतर कोई भी क्षेत्र)। ऐसे क्षेत्रों से गुजरने वाले विदेशी फिशिंग जहाजों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
     
  • मरीन फिशरीज़ पर परामर्श समिति: केंद्र सरकार मरीन फिशरीज़ पर एक परामर्श समिति का गठन करेगी जो निम्नलिखित पर सलाह देगी: (i) मरीन फिशरीज़ का विकास और प्रबंधन, (ii) मछुआरों का कल्याण, और (iii) बिल का कार्यान्वयन।
     
  • मरीन फिशरीज़ पर राष्ट्रीय नीति: केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के परामर्श के बाद, मरीन फिशरीज़ पर राष्ट्रीय नीति तैयार और अधिसूचित करेगी। यह नीति मरीन फिशरीज़ के विकास के लिए व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित करेगी।

सभी खाद्य तेलों और तिलहनों पर स्टॉक सीमा 31 मार्च, 2022 तक लागू

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने अनिवार्य वस्तु एक्ट, 1955 के अंतर्गत 31 मार्च, 2022 तक सभी खाद्य तेलों और तिलहनों पर स्टॉक सीमा लागू करने का आदेश जारी किया है।[55] हालांकि, स्टॉक की सीमा निम्नलिखित पर लागू नहीं होगी: (i) खाद्य तेलों और तिलहनों का कोई भी स्टॉक जो निर्यात के लिए है, और (ii) आयातक, अगर उनके खाद्य तेलों और तिलहनों के स्टॉक का एक हिस्सा आयात से प्राप्त किया गया है।

यदि किसी एंटिटी के पास खाद्य तेलों और तिलहनों का कुल स्टॉक निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उसे खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर इसकी घोषणा करनी होगी। इस तरह के स्टॉक को राज्य सरकार द्वारा इसकी अधिसूचना के 30 दिनों के भीतर निर्धारित स्टॉक सीमा के भीतर लाया जाना चाहिए।

कैबिनेट ने अक्टूबर 2021-मार्च 2022 के दौरान पीएंडके उर्वरकों की सबसिडी दरों को मंजूरी दी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अक्टूबर 2021-मार्च 2022 की अवधि में फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी दरों को मंजूरी दी है।[56] पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के तहत, उर्वरक निर्माताओं और आयातकों को पीएंडके उर्वरकों की बिक्री के लिए उनमें पोषण तत्वों के आधार पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। 2021-22 के लिए मौजूदा सब्सिडी दरें, जिन्हें शुरुआत में मई-अक्टूबर 2021 की अवधि के लिए अनुमोदित किया गया था, को मार्च 2022 तक बढ़ा दिया गया है।[57]

उल्लेखनीय है कि 2021-22 के लिए स्वीकृत सब्सिडी दर फॉस्फेट (तालिका 5) के लिए 2020-21 की सब्सिडी दर से काफी अधिक है।[58]   डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और अन्य पीएंडके उर्वरकों के कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज वृद्धि की वजह से इसे बढ़ाया गया था। [59]

तालिका 6: 2021-22 में पीएंडके उर्वरकों के लिए पोषण आधारित सबसिडी (रुपए प्रति किलो में) 

पोषक तत्व

2020-21*

2021-22

परिवर्तन (%)

नाइट्रोजन (एन)

18.789

18.789

-

फॉस्फेट (पी) 

14.888

45.323

204%

पोटाश (के)

10.116

10.116

-

सल्फर (एस)

2.374

2.374

-

नोट: *2020-21 की दरों को 20 मई, 2021 तक बढ़ा दिया गया था।

स्रोत: रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय; पीआरएस 

 

परिवहन

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org) 

वाहनों की स्क्रैपिंग, पंजीकरण और सुरक्षा से संबंधित मोटर वाहन नियमों में संशोधन अधिसूचित  

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधनों को अधिसूचित किया।[60],[61]  1988 का एक्ट केंद्र सरकार को मोटर वाहनों के पंजीकरण के संबंध में नियम बनाने का अधिकार देता है।[62]  1989 के नियम मोटर वाहनों के पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज और शुल्क निर्धारित करते हैं।[63] परिवर्तनों और ड्राफ्ट संशोधनों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वाहन स्क्रैपिंग को बढ़ावा: नए वाहनों के  पंजीकरण के लिए, जो डिपॉजिट सर्टिफिकेट जमा करने के लिए किए जाते हैं, 2021 के नियम निम्नलिखित प्रस्तावित करते हैं: (i) वाहन पंजीकरण शुल्क की छूट, और (ii) 1 अप्रैल, 2022 से मोटर वाहन टैक्स में रियायत। मोटर वाहन टैक्स में रियायत वाहन की श्रेणी के साथ बदलती है। डिपॉजिट सर्टिफिकेट वाहन के स्वामित्व को पंजीकृत मालिक से वाहन स्क्रैपिंग के लिए पंजीकृत स्क्रैपर को स्थानांतरित करने को मान्यता देता है।[64] 
     
  • पुराने वाहनों के इस्तेमाल के लिए डिसइंसेंटिव्स: 1988 के एक्ट में सभी मोटर वाहनों के संचालन से पहले एक वैध फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण प्रमाणपत्र होना आवश्यक है।65 1989 के नियमों में ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने और नवीनीकरण के लिए एक सामान्य शुल्क निर्धारित किया गया है।66 2021 के नियम कुछ श्रेणियों के वाहनों के लिए अलग पंजीकरण शुल्क (नया पंजीकरण या पंजीकरण का नवीनीकरण) पेश करते हैं, और मौजूदा पंजीकरण शुल्क बढ़ाते हैं। इनमें से कुछ परिवर्तन नीचे तालिका 7 में दिखाए गए हैं।

तालिका 7: वाहन पंजीकरण शुल्क

वाहन की श्रेणी

1989 नियम

2021 नियम (नए)

2021 नियम (नवीनीकरण)

मोटर वाहन

60

300

1,000

हल्का मोटर वाहन

200

600

5,000

हेवी गुड्स/ यात्री वाहन

600

1,000

1,000

स्रोत: केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989; पीआरएस

  • इसके अतिरिक्त 2021 के नियम 15 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए फिटनेस टेस्ट कराने, और फिटनेस प्रमाणपत्र देने और उसके नवीनीकरण के लिए शुल्क संबंधी आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करते हैं (देखें तालिका 8)। वाहन की टेस्टिंग दो प्रकार की होती है- मैनुअल और ऑटोमेटेड।

तालिका 8: 15 साल पुराने वाहनों के फिटनेस टेस्ट और फिटनेस सर्टिफिकेट का शुल्क (रुपए)

वाहन की श्रेणी

मैनुअल टेस्टिंग 

ऑटोमेटड टेस्टिंग 

फिटनेस सर्टिफिकेशन (परिवहन वाहन) 

मोटरसाइकिल

400

500

1,000

तिपहिया या चौपहिया

800

1,000

3,500

लाइट मोटर वाहन

800

1,000

7,500

मीडिया गुड्स/यात्री वाहन

800

1,000

10,000

हेवी गुड्स/ यात्री वाहन

1,000

1,500

12,500

*नोट: फिटनेस प्रमाणपत्र देने और उसके नवीनीकरण के लिए शुल्क समान है।

स्रोत: केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989; पीआरएस

  • नेक व्यक्ति को बढ़ावा देना: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नेक व्यक्तियों (गुड समैरिटन) को पुरस्कार देने की योजना के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।[65]  गुड समैरिटन ऐसे नेक व्यक्ति होते हैं जो बिना किसी इनाम की उम्मीद के सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को तत्काल सहायता प्रदान करते हैं।63 मोटर वाहन एक्ट 1988 में प्रावधान है कि अगर आपातकालीन सहायता देते समय सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को कोई चोट लग जाती है, या उसकी मृत्यु हो जाती है तो नेक व्यक्ति पर कोई सिविल या क्रिमिनल केस नहीं चलाया जाएगा।68 
     
  • यह योजना किसी भी सड़क दुर्घटना को कवर करेगी जिसमें मोटर वाहन शामिल हो, जिसके कारण उपचार के दौरान पीड़ित की निर्दिष्ट स्थितियां हों और इन्हें अस्पताल द्वारा प्रमाणित किया जाए। प्रत्येक घटना के लिए, प्रत्येक नेक व्यक्ति को कुछ शर्तों के अधीन पांच हजार रुपए का नकद पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाणपत्र दिया जाएगा। घटना-आधारित प्रोत्साहन के अलावा वर्ष के चयनित दस नेक व्यक्तियों को एक-एक लाख रुपए से सम्मानित किया जाएगा।68  यह योजना 15 अक्टूबर, 2021 से 31 मार्च, 2026 के बीच चालू रहेगी। 
     
  • पीछे बैठने वाले (पीलियन राइडर) बच्चों के लिए सुरक्षा उपाय: 1988 का एक्ट केंद्र सरकार को चार साल से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा के लिए हेडगियर के मानकों और उपायों को निर्धारित करने का अधिकार देता है।65  2021 के ड्राफ्ट नियमों में कहा गया है कि एक बच्चे (चार साल से कम उम्र के) को मोटरसाइकिल पर पीछे की सीट पर ले जाते समय कुछ सुरक्षात्मक उपाय किए जाएंगे।[66]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) 40 किमी प्रति घंटे की गति सीमा तय करना, (ii) बच्चे के लिए निर्धारित मानकों के सेफ्टी हार्नेस और क्रैश हेलमेट की आवश्यकता। ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां 20 नवंबर, 2021 तक आमंत्रित की गई हैं।

लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना और संचालन के लिए मॉडल कॉन्ट्रैक्ट मंजूर 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) की स्थापना और संचालन में सार्वजनिक निजी भागीदारी के लिए एक मॉडल कन्सेशनेयर समझौते को मंजूरी दी है।[67] एमएमएलपी माल ढुलाई और वितरण के केंद्र हैं, जिनमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी (सड़क, रेल, समुद्र या वायु) होती है।[68]  भारतमाला परियोजना भारतीय राजमार्ग क्षेत्र के लिए एक अंब्रैला कार्यक्रम है, जो माल और लोगों की आवाजाही को अनुकूलित करने पर केंद्रित है।[69] 

पहले चरण में योजना का लक्ष्य 35 एमएमएलपी विकसित करना है।[70] इस समझौते में दो पक्ष हैं- कन्सेशनेयर और सरकारी अथॉरिटी। कन्सेशनेयर परियोजना के डिजाइन, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण, संचालन और रखरखाव का कार्य करेगा। सरकारी अथॉरिटी परियोजना से प्रभावित लोगों को मंजूरी प्राप्त करने, पुनर्वास और पुनर्स्थापना में सहायता प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी कि दस साल तक एमएमएलपी के 100 किमी के दायरे में कोई प्रतिस्पर्धी केंद्र का निर्माण नहीं किया गया है। मॉडल समझौते की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कानून में परिवर्तन: समझौते में पार्टियों को कन्सेशनेयर की समझौता-पूर्व वित्तीय स्थिति की सुरक्षा करना अपेक्षित होता है। यदि कानून में परिवर्तन से कन्सेशनेयर की लागत में बदलाव होता है (एक निर्दिष्ट राशि से अधिक), तो समझौता कन्सेशनेयर की वित्तीय स्थिति को बहाल करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है।
     
  • विनिर्देशों और तकनीकी अपग्रेडेशन में परिवर्तन: सरकारी अथॉरिटी समय-समय पर एमएमएलपी के लिए तकनीकी सुधार या नए विनिर्देश पेश कर सकती है। हालांकि, इससे कन्सेशनेयर की परिचालन और रखरखाव की लागत में परिवर्तन होता है, तो कन्सेशनेयर के शुल्क को उसकी वित्तीय स्थिति की सुरक्षा के लिए संशोधित किया जाएगा।
     
  • विवाद निवारण: मॉडल समझौता विवाद समाधान के तंत्र प्रदान करता है। अत्यधिक प्रयास के आधार पर विवाद को हल करने में सफलता न मिलने के बाद निम्नलिखित तंत्र का क्रमिक रूप से पालन किया जाएगा: (i) एक स्वतंत्र विशेषज्ञ द्वारा मध्यस्थता, (ii) विवाद निपटान बोर्ड, (iii) सुलह समिति, और (iv) सोसायटी फॉर एफोर्डेबल रेज़ोल्यूशन ऑफ डिस्प्यूट्स की तरफ से आर्बिट्रेशन। यदि कन्सेशनेयर और सरकारी अथॉरिटी के बीच विवादों को सुलझाने की शक्तियों वाले एक वैधानिक ट्रिब्यूनल या आयोग की स्थापना की जाती है, तो इस स्थापना के बाद उत्पन्न होने वाले सभी विवादों पर आर्बिट्रेशन नहीं होगा, वे ट्रिब्यूनल या आयोग के समक्ष पेश किए जाएंगे।

 

पर्यावरण

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम्स के इस्तेमाल को रेगुलेट करने के लिए पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 में संशोधन

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आरओ आधारित वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम्स के उपयोग को रेगुलेट करने के लिए पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 में संशोधन किया।[71],[72]  संशोधन प्रकाशन की तारीख से 18 महीने के बाद प्रभावी होंगे। प्रमुख संशोधन इस प्रकार हैं:74 

  • घरेलू वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम्स: 25 लीटर प्रति घंटे तक की क्षमता वाले वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम को घरेलू वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम के रूप में परिभाषित किया गया है। ऐसी प्रणालियों को बेचने के इच्छुक सभी निर्माताओं को भारतीय मानक ब्यूरो से सर्टिफिकेशन प्राप्त करना होगा।
     
  • घरेलू वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम्स से अलग प्रणाली: ऐसे प्यूरिफिकेशन सिस्टम्स के सभी यूजर्स को संबंधित एसपीसीबी या पीसीसी में पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। इस तरह के सिस्टम के सभी मौजूदा यूजर्स को छह महीने के भीतर काम करने की सहमति के लिए आवेदन करना होगा।

जल आपूर्ति में शामिल सभी एंटिटीज़ को अपने उपभोक्ताओं को पानी के स्रोतों और गुणवत्ता के बारे में सूचित करना चाहिए। यह बिलिंग इंस्ट्रूमेंट्स (जैसे पानी के बिल) और मास मीडिया (जैसे अखबार के विज्ञापनों) के माध्यम से किया जाना चाहिए।

घरेलू वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम्स के लिए संशोधनों के कार्यान्वयन की निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा की जाएगी। अन्य प्रणालियों के लिए, संबंधित एसपीसीबी या पीसीसी संशोधनों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा और अनुपालन रिपोर्ट सीपीसीबी को प्रस्तुत की जानी चाहिए।74 

वन (संरक्षण) एक्ट, 1980 में प्रस्तावित संशोधनो पर टिप्पणियां आमंत्रित  

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन (संरक्षण) एक्ट, 1980 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित कीं।[73]  एक्ट में वनों के संरक्षण और संबंधित मामलों का प्रावधान है।[74] वर्तमान में, एक्ट निम्नलिखित पर लागू होता है: (i) किसी भी कानून के तहत वन घोषित किए गए क्षेत्र, भले उस पर किसी का स्वामित्व हो, (ii) वे सभी क्षेत्र जो वन के शब्दकोश अर्थ के अनुरूप हैं, और (iii) विशेषज्ञ समिति द्वारा वन के रूप में चिन्हित क्षेत्र।76,77

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पाया कि 1980 के एक्ट की एप्लिकेबिलिटी को लेकर कई वर्षों से चिंताएं जाहिर की जा रही हैं। उदाहरण के लिए, कुछ मंत्रालयों (जैसे रेल मंत्रालय) का दावा है कि उन्होंने विशेष रूप से गैर-वानिकी गतिविधियों (जैसे रेल लाइनों और सड़कों के निर्माण) के लिए एक्ट के लागू होने से पहले भूमि का अधिग्रहण किया था। इन वर्षों के दौरान इनमें से कुछ जगहों की जमीन पर कई योजनाओं के तहत पेड़ लगाए गए थे। इस प्रकार इन मंत्रालयों को अब गैर-वानिकी गतिविधियों के संचालन के लिए एक्ट के तहत अनुमोदन लेने की जरूरत है। संशोधन इस तरह की चिंताओं को हल करने के लिए 1980 के एक्ट की एप्लिकेबिलिटी के दायरे में संशोधन करना चाहते हैं। प्रमुख प्रस्तावित संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • 1980 के एक्ट के दायरे से कुछ जमीनों को छूट देना: संशोधनों में कुछ जमीन को 1980 के एक्ट के दायरे से छूट देने का प्रयास किया गया है, जिसमें शामिल हैं: (i) 25 अक्टूबर, 1980 से पहले गैर-वानिकी गतिविधियों के लिए अधिग्रहित भूमि, (ii) 12 दिसंबर, 1996 के बाद वृक्षारोपण वाली कोई भी गैर-वन भूमि, (iii) सड़कों या रेल लाइनों के साथ जंगल के माध्यम से पहुंच को सक्षम करने के लिए 0.05 हेक्टेयर, और (iv) 250 वर्ग मीटर तक के कुछ निर्माण (जैसे आवासीय इकाई) के लिए निजी व्यक्तियों को एकमुश्त छूट।
     
  • सीमा क्षेत्रों में केंद्र सरकार को किसी मंजूरी की जरूरत नहीं: वर्तमान में राज्यों को केंद्र सरकार की पूर्वानुमति के बिना किसी भी गैर-वानिकी उद्देश्य (जैसे चाय और औषधीय पौधों की खेती) के लिए वन भूमि के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाती। इसके लिए पूर्व अनुमोदन की जरूरत होती है।77,[75]  संशोधनों में प्रस्तावित है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को ऐसे पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।
     
  • सजा: वर्तमान में बिना पूर्वानुमति के गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि का कोई भी उपयोग 15 दिनों तक के कारावास के साथ दंडनीय है।77  संशोधन कारावास की अवधि को एक वर्ष तक बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इस तरह के अपराध गैर-जमानती होंगे और पहले से किए गए नुकसान के लिए दंडात्मक मुआवजा देना होगा। 76

 

महिला एवं बाल विकास

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 में ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 में संशोधन के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[76],[77]  किशोर न्याय एक्ट, 2015 के तहत 2016 के नियमों को अधिसूचित किया गया है। कानून से संघर्षरत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जुविनाइल कहा जाता है।[78]   2015 का एक्ट बच्चों के अनुकूल दृष्टिकोण के माध्यम से बुनियादी जरूरतों को लक्ष्य करके किशोरों (जुविनाइल्स) को सुरक्षा प्रदान करता है।81

2021 में निम्नलिखित की जिम्मेदारी को सौंपने के लिए 2015 के एक्ट में संशोधन किया गया: (i) चाइल्ड केयर संस्थानों की देखरेख, और (ii) अदालतों से बच्चे को गोद लेने के आदेश जारी करने की जिम्मेदारी जिला मजिस्ट्रेट्स (डीएम) और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट्स (एडीएम) को देना।[79]  ड्राफ्ट संशोधन 2015 के एक्ट में इन परिवर्तनों को प्रभावी बनाते हैं।[80]  ड्राफ्ट संशोधनों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • चाइल्ड केयर संस्थान: 2016 के नियम चाइल्ड केयर संस्थानों के पंजीकरण के तरीके को निर्धारित करते हैं। कोई भी एजेंसी जो चाइल्ड केयर संस्थान स्थापित करना चाहती है, उसे राज्य सरकार को आवेदन करना होगा। राज्य सरकार तब आवेदन को संबंधित डीएम को संदर्भित करेगी। ड्राफ्ट संशोधनों में यह अनिवार्य किया गया है कि डीएम (एडीएम भी) राज्य सरकार से अनुरोध प्राप्त करने के 30 दिनों के भीतर जिले में चाइल्ड केयर संस्थान की जरूरत की समीक्षा करे। एजेंसी की विश्वसनीयता और पृष्ठभूमि को सत्यापित करने के बाद डीएम जिले में चाइल्ड केयर संस्थान की जरूरत के बारे में राज्य सरकार को सिफारिश करेगा। 
     
  • डीएम के कार्य: ड्राफ्ट संशोधन मौजूदा बाल देखभाल संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी राज्य सरकार से डीएम को हस्तांतरित करते हैं। इन कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) 18 वर्ष की आयु के बाद चाइल्ड केयर संस्थानों को निकलने वाले बच्चों के लिए रोजगार और पुनर्एकीकरण कार्यक्रम की तैयारी, और (ii) चाइल्ड केयर संस्थानों को बंद करना जो अपराध करते पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, संशोधन डीएम को निम्नलिखित के संबंध में अधिकार देने का प्रयास करते हैं: (i) राज्य किशोर न्याय कोष से धनराशि की मांग करना, और (ii) परिणामोन्मुखी परियोजनाओं को लागू करने के लिए एक जिला स्तरीय फंड बनाना।

ड्राफ्ट संशोधनों पर 11 नवंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

ऊर्जा

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी

ऊर्जा मंत्रालय ने केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा) दिशानिर्देश, 2021 जारी किए।[81] दिशानिर्देशों के उद्देश्यों में शामिल हैं: (i) सुरक्षित साइबर इकोसिस्टम बनाना, (ii) रेगुलेटरी ढांचे को मजबूत करना, और (iii) रिमोट ऑपरेशंस और सेवाओं को सुरक्षित करना। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • साइबर सुरक्षा नीति: सभी जिम्मेदार संस्थाओं को साइबर सुरक्षा नीति तैयार करनी चाहिए। जिम्मेदार संस्थाओं में बिजली यूटिलिटीज़ (उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण), लोड डिस्पैच केंद्र, पावर ट्रेड एक्सचेंज, क्षेत्रीय बिजली समितियां और रेगुलेटरी आयोग शामिल हैं। क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा नीति की सालाना समीक्षा की जानी चाहिए। दिशानिर्देश नीति तैयार करने के लिए कुछ मूलभूत सिद्धांतों को निर्दिष्ट करते हैं जिनमें शामिल हैं: (i) इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) सिस्टम से ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी सिस्टम को अलग करना, जो इंटरनेट से जुड़े होते हैं, (ii) ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी सिस्टम्स के बीच कम्यूनिकेशन के लिए सुरक्षित चैनल, और (iii) इंटरनेट से जुड़े आईटी सिस्टम से डेटा डाउनलोड करने या अपलोड करने में शामिल उपकरणों की वर्नेबिलिटी के लिए स्कैनिंग।
     
  • साइबर सुरक्षा की शर्तें: सभी जिम्मेदार संस्थाओं को एक सूचना सुरक्षा प्रभाग बनाना होगा। सुरक्षा प्रभाग का नेतृत्व एक मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ) करेंगे। सभी सुरक्षा प्रभागों को संचालन और आईटी प्रणालियों में व्यवहार संबंधी विसंगतियों की पहचान करने के लिए पहचान और रोकथाम प्रणालियों को तैनात करना चाहिए। इसके अतिरिक्त सुरक्षा प्रभागों को कुछ प्राधिकरणों (जैसे भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम) द्वारा जारी दिशानिर्देशों पर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
     
  • लीगेसी प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना: सभी जिम्मेदार संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिजली व्यवस्था में आईटी टेक्नोलॉजीज़ अपग्रेड होने लायक हैं। जिन उपकरणों का एंड ऑफ लाइफ है या जो मूल उपकरण निर्माता के सपोर्ट के बिना हैं, उनकी पहचान की जानी चाहिए। ऐसे उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए संबंधित इकाई के निदेशक मंडल को एक रिप्लेसमेंट योजना का प्रस्ताव दिया जाना चाहिए।

वितरण कंपनियों में एनर्जी ऑडिट के तरीके और अंतराल संबंधी रेगुलेशंस अधिसूचित 

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) में एनर्जी ऑडिट करने के तरीके और अंतराल को निर्दिष्ट करने के लिए रेगुलेशंस को अधिसूचित किया।[82]  एनर्जी ऑडिट का अर्थ है, ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए किसी इमारत में ऊर्जा खपत का विश्लेषण करना। रेगुलेशंस की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एनर्जी ऑडिट और एनर्जी एकाउंटिंग का तरीका: एनर्जी ऑडिट और एनर्जी अकाउंटिंग करने के लिए निम्नलिखित का सत्यापन होना चाहिए: (i) डिस्कॉम में ऊर्जा वितरण का मौजूदा पैटर्न, और (ii) नेटवर्क में एप्लिकेबल वोल्टेज स्तरों पर ऊर्जा प्रवाह की एकाउंटिंग। एनर्जी एकाउंटिंग एक वितरण नेटवर्क में विभिन्न वोल्टेज पर सभी ऊर्जा प्रवाह के एकाउंटिंग को कहा जाता है।

एक मान्यता प्राप्त एनर्जी ऑडिटर को संबंधित डिस्कॉम के परामर्श से ऊर्जा ऑडिट का दायरा विकसित करना चाहिए। ऑडिटर को ऑडिट के दायरे में प्राप्त और वितरित ऊर्जा पर डेटा एकत्र करना चाहिए। डेटा का विश्लेषण और उसकी प्रोसेसिंग निम्नलिखित के लिए की जानी चाहिए: (i) एकत्रित डेटा की तुलना में मॉनिटर किए गए डेटा की संगति, और (ii) एनर्जी एकाउंटिंग की सुविधा और दक्षता में सुधार के लिए सुझाव।

  • एनर्जी ऑडिट्स के अंतराल: डिस्कॉम को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक एनर्जी ऑडिट करना चाहिए। इसके अतिरिक्त सभी डिस्कॉम को नियमों के शुरू होने की तारीख से छह महीने के भीतर एनर्जी ऑडिट करना होगा। रेगुलेशंस के शुरू होने के बाद स्थापित डिस्कॉम के लिए, नामित उपभोक्ता के रूप में अधिसूचित होने की तारीख से पहले वित्तीय वर्ष के बाद ऑडिट किया जाना चाहिए।
     
  • नोडल अधिकारी: सभी डिस्कॉम को मुख्य इंजीनियर या उससे ऊपर के रैंक के पूर्णकालिक कर्मचारी को नोडल अधिकारी के रूप में नामित करना चाहिए, जो ब्यूरो को एनर्जी ऑडिट और एनर्जी एकाउंटिंग की रिपोर्ट देने के लिए जिम्मेदार होगा।

ऊर्जा मंत्रालय ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ऊर्जा संरक्षण एक्ट, 2001 में संशोधनों का प्रस्ताव दिया

ऊर्जा मंत्रालय ने ऊर्जा संरक्षण एक्ट, 2001 में संशोधन का प्रस्ताव किया है।[83],[84] एक्ट भारत में ऊर्जा के कुशल उपयोग के लिए प्रावधान करता है। प्रस्तावित संशोधन निम्नलिखित का प्रयास करते हैं: (i) अंतिम उपयोग वाले क्षेत्रों (जैसे उद्योग, भवन और परिवहन) में अक्षय ऊर्जा की मांग को बढ़ाना, (ii) फॉसिल फ्यूल आधारित ऊर्जा खपत को कम करना, और (iii) वातावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करना। सभी प्रतिष्ठानों को अक्षय स्रोतों से ऊर्जा के एक निश्चित हिस्से का उपभोग करना होगा। उन्हें स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा (कार्बन सेविंग सर्टिफिकेट के रूप में)।

ट्रांसमिशन सिस्टम को विकसित करने और अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क को रिकवर करने के नियम अधिसूचित

ऊर्जा मंत्रालय ने ट्रांसमिशन सिस्टम को विकसित करने और अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क को रिकवर करने के नियम अधिसूचित किए हैं।[85]  नियमों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विकास की योजना: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को विद्युत प्रणाली के विकास के लिए अगले पांच वर्षों के लिए रोलिंग आधार पर वार्षिक अल्पकालिक योजनाएं तैयार करनी होगी। इसके अतिरिक्त सीईए को विद्युत प्रणाली के साथ-साथ ट्रांसमिशन प्रणाली के लिए परस्पेक्टिव योजनाएं तैयार करनी होगी। विद्युत प्रणाली के लिए परस्पेक्टिव योजनाएं प्रत्येक वैकल्पिक वर्ष में अगले दस वर्षों के लिए रोलिंग आधार पर तैयार की जानी चाहिए।

सीईए द्वारा तैयार की गई योजनाओं और पूरे भारत में उत्पादन क्षमता के साथ-साथ मांग की स्थिति के आधार पर, केंद्रीय ट्रांसमिशन यूटिलिटी को अगले पांच वर्षों के लिए अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए वार्षिक योजना तैयार करनी होगी।

  • जनरल नेटवर्क एक्सेस: जनरल नेटवर्क एक्सेस निर्दिष्ट अंतरराज्यीय ग्राहक के अनुरोध के अनुसार अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम तक गैर-भेदभावपूर्ण पहुंच को कहा जाता है। एक निर्दिष्ट अंतरराज्यीय ग्राहक अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम के उपयोगकर्ता को कहा जाता है। नियम निर्दिष्ट करते हैं कि जनरल नेटवर्क एक्सेस एक विशिष्ट क्षमता और अवधि के लिए प्रदान किया जाएगा।

केंद्रीय बिजली रेगुलेटरी आयोग (सीईआरसी) जनरल नेटवर्क एक्सेस की प्रक्रिया को रेगुलेट करेगा।

  • अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क: जनरल नेटवर्क एक्सेस की मांग करने वाली किसी भी इकाई को सीईआरसी द्वारा निर्दिष्ट एकमुश्त शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त सभी निर्दिष्ट अंतरराज्यीय ग्राहकों को मासिक ट्रांसमिशन शुल्क के रूप में लागू टैरिफ का भुगतान करना होगा। लंबी अवधि तक पहुंच वाले मौजूदा अंतरराज्यीय ग्राहकों के लिए एकमुश्त शुल्क लागू नहीं होगा।
     
  • स्वीकृत सामान्य नेटवर्क क्षमता या बिजली की निकासी या बिजली के इंजेक्शन, जो भी अधिक हो, के लिए मासिक शुल्क का भुगतान किया जाना चाहिए। स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली की निकासी या इंजेक्शन से उस दर पर शुल्क लिया जाएगा, जो सामान्य दर से कम से कम 25% अधिक है। केंद्रीय ट्रांसमिशन यूटिलिटी ट्रांसमिशन शुल्क के बिलिंग, संग्रह और संवितरण के लिए जिम्मेदार होगी।

कानून में बदलाव के कारण लागत की समय पर रिकवरी के लिए नियम अधिसूचित

ऊर्जा मंत्रालय ने कानून में बदलाव के कारण लागत की समय पर वसूली के लिए नियमों को अधिसूचित किया है।[86]  नियम सभी उत्पादन और ट्रांसमिशन कंपनियों पर लागू होते हैं। कानून में बदलाव से तात्पर्य किसी कानून के अधिनियमन या संशोधन या निरसन से है, जिससे बिजली की दरों में बदलाव होता है। नियमों की मुख्य विशेषताएं हैं:

  • प्रभाव से संबंधित नोटिस: नियम निर्दिष्ट करते हैं कि कानून में किसी भी बदलाव के मामले में, प्रभावित पक्ष (एक उत्पादक या एक ट्रांसमिशन कंपनी) को टैरिफ पर बदलाव के प्रभाव के बारे में अन्य पार्टी (जैसे वितरण कंपनियों) को तीन सप्ताह का अग्रिम नोटिस देना होगा। प्रभावित पक्ष को दूसरे पक्ष को टैरिफ पर प्रभाव (जैसे कि समायोजित या वसूल किए जाने वाले शुल्क) की गणना करके देनी होगी। यह या तो कानून में बदलाव की तारीख से 30 दिनों के भीतर या नोटिस अवधि की समाप्ति की तारीख, जो भी बाद में हो, के भीतर किया जाना चाहिए।
     
  • प्रभाव की मंजूरी के लिए समय अवधि: प्रभावित पक्ष को कानून में बदलाव के प्रभाव के 30 दिनों के भीतर सभी प्रासंगिक दस्तावेजों को केंद्रीय या राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोग (जैसा लागू हो) के साथ साझा करना होगा। संबंधित आयोग को दस्तावेजों की प्राप्ति की तारीख से 60 दिनों के भीतर गणना को सत्यापित करना चाहिए और प्रभाव को समायोजित करना चाहिए।

टैरिफ पर प्रभाव को टैरिफ के हिस्से के रूप में मासिक बिल में समायोजित या वसूल किया जाना चाहिए। यह एकमुश्त शुल्क या मासिक शुल्क या प्रति यूनिट आधार या ऐसे शुल्कों के संयोजन के रूप में किया जा सकता है।89

मस्ट-रन पावर प्लांट्स से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने वाले नियम अधिसूचित

ऊर्जा मंत्रालय ने अनिवार्य रूप से चलने वाले बिजली संयंत्रों (मस्ट रन पावर प्लांट्स) से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नियमों को अधिसूचित किया।[87] नियमों की मुख्य विशेषताएं हैं:

  • मस्ट रन पावर प्लांट्स: नियम निर्दिष्ट करते हैं कि कुछ बिजली संयंत्र (जैसे पवन, सौर और जलविद्युत) जिन्होंने किसी भी व्यक्ति से बिजली बेचने का समझौता किया है, उन्हें अनिवार्य रूप से चलने वाला बिजली संयंत्र (मस्ट-रन पावर प्लांट) माना जाएगा। इस तरह के संयंत्र को किसी भी व्यावसायिक कारणों के लिए कटौती या रेगुलेशन के अधीन नहीं किया जाएगा (जैसे सस्ती बिजली की खरीद को प्राथमिकता)। हालांकि ग्रिड सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे संयंत्रों से बिजली की कटौती और रेगुलेशन किया जा सकता है।
     
  • कटौती के लिए मुआवजा: तकनीकी बाधा या ग्रिड सुरक्षा के कारण किसी संयंत्र से बिजली की कटौती के लिए खरीदार (उपभोग के लिए बिजली खरीदने वाली संस्थाएं) को संयंत्र को पहले से सूचित करना होगा। बिजली की किसी भी कटौती के मामले में खरीदार को संयंत्र को मुआवजा देना होगा। मुआवजे की दर बिजली खरीद समझौते के अनुसार होनी चाहिए।

संयंत्र को बिजली एक्सचेंज में अनिर्धारित बिजली बेचनी होगी। एक्सचेंज में बिजली की बिक्री से प्राप्त राशि को लागू खर्चों में कटौती के बाद खरीदार द्वारा भुगतान किए जाने वाले मुआवजे से समायोजित किया जाना चाहिए। किसी भी अतिरिक्त राशि की वसूली बाद के महीनों में की जानी चाहिए।

  • मध्यस्थ खरीदार: मध्यस्थ खरीदार एक मान्यता प्राप्त इकाई को कहा जाता है जो उत्पादक से बिजली खरीदता है और इसे वितरण कंपनियों को बेचता है। नियम निर्दिष्ट करते हैं कि ऐसे सभी खरीदारों को व्यापारी माना जाएगा। ऐसे खरीदार पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से बिजली खरीद सकते हैं। यदि मध्यस्थ खरीदार कई उत्पादकों से बिजली खरीदता है, तो इन उत्पादकों की बोलियों का भारित औसत वितरण कंपनियों को बिजली की बिक्री के लिए अंतिम बोली दर होगा। मध्यस्थ खरीदार को केवल ट्रेडिंग मार्जिन बनाए रखने की अनुमति है।

ट्रांसमिशन प्लानिंग के लिए क्षेत्रीय बिजली समितियों को भंग किया गया

ऊर्जा मंत्रालय ने पांच क्षेत्रों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और उत्तर-पूर्व) के लिए क्षेत्रीय बिजली समितियों (ट्रांसमिशन प्लानिंग) को भंग कर दिया।[88]  अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली के विकास के लिए 2019 में समितियों का गठन किया गया था। 

अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली से संबंधित मामलों के लिए क्षेत्रीय बिजली समितियों से परामर्श किया जाएगा।91  वर्तमान में, पांच क्षेत्रीय बिजली समितियां हैं, जो संबंधित क्षेत्र में बिजली ग्रिड के एकीकृत और सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 2005 में स्थापित की गई थीं।[89]

 

टेक्सटाइल्स

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org) 

सात पीएम मेगा इंटिग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क्स शुरू किए गए

केंद्र सरकार ने सात पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) पार्कों की स्थापना को मंजूरी दे दी है।[90]  पार्कों का उद्देश्य कपड़ा उद्योग की संपूर्ण मूल्य-श्रृंखला के लिए एकीकृत, बड़े पैमाने पर और आधुनिक औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधा विकसित करना है।93  पार्कों में मैन्यूफैक्चरिंग, उपयोगिताओं, लॉजिस्टिक्स और वाणिज्यिक विकास के लिए समर्पित क्षेत्र होंगे।[91]  2021-22 से 2027-28 तक इस योजना का बजटीय परिव्यय 4,445 करोड़ रुपए है।93  योजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • विकास हेतु पूंजीगत मदद: यह योजना ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड पीएम मित्र पार्कों के विकास के लिए परियोजना लागत का 30% प्रदान करती है। प्रत्येक ग्रीनफील्ड पार्क अधिकतम 500 करोड़ रुपए की मदद के लिए पात्र है, जबकि प्रत्येक ब्राउनफील्ड पार्क अधिकतम 200 करोड़ रुपए की मदद के लिए पात्र है। यह मदद विकसित कारखाना स्थलों, इन्क्यूबेशन केंद्रों, सड़कों, बिजली, पानी, वर्कर्स हॉस्टल, गोदाम और चिकित्सा केंद्रों जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए है।
     
  • प्रतिस्पर्धात्मक इंसेंटिव सहयोग: यह योजना निर्माण इकाइयों को जल्दी स्थापित करने के लिए प्रति पार्क 300 करोड़ रुपए के इंसेंटिव देने का प्रावधान करती है। मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर कुल बिक्री कारोबार का 3% तक इंसेंटिव दिया जा सकता है। योजना के लाभ तब तक उपलब्ध रहेंगे जब तक पीएम मित्र पार्क के लिए प्रदान धनराशि समाप्त नहीं हो जाती। यह सहायता केवल उन मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए उपलब्ध है जो कपड़े के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का लाभ नहीं उठा रही हैं। पीएलआई योजना का उद्देश्य इंसेटिव के माध्यम से, कुछ मानव निर्मित फाइबर एपेरल और फैब्रिक्स, और टेक्निकल टेक्सटाइल उत्पादों के दस खंडों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।[92]
  • पार्कों की लोकेशन: राज्य सरकारों से अनुरोध किया जाएगा कि वे पीएम मित्र पार्क की स्थापना के लिए अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करें। पात्र होने के लिए, राज्य सरकारों के पास कम से कम एक हजार एकड़ की भूमि होनी चाहिए जो एक साथ एक जगह पर हो और जो किसी भी भार से मुक्त हो। इन साइटों को कनेक्टिविटी, बिजली और पानी के बुनियादी ढांचे, अपशिष्ट जल निपटान प्रणाली, श्रम कानूनों और सिंगल विंडो मंजूरी जैसे मापदंडों के आधार पर अंक दिए जाएंगे।

खनन

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

व्यक्तियों को कंपोजिट लाइसेंस देने के लिए ब्लॉकों का प्रस्ताव करने वाले खनन नियमों के संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित 

खान मंत्रालय ने खनिज (खनिज सामग्री के प्रमाण) नियम, 2015 और खनिज (नीलामी) नियम, 2015 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[93],[94],[95] ये नियम क्रमशः खनिजों की खोज और खनन लाइसेंस प्रदान करने के तरीकों का प्रावधान करते हैं। संशोधनों का उद्देश्य इच्छुक व्यक्तियों को प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस-कम-खनन लीज़ (कंपोजिट लाइसेंस) प्रदान करने के लिए ब्लॉक प्रस्तावित करने में सक्षम बनाना है। मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:

  • कंपोजिट लाइसेंस के प्रस्ताव: खनिज सामग्री के प्रमाण नियमों के अनुसार, नीलामी के माध्यम से प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस-कम-खनन लीज़ (कंपोजिट लाइसेंस) प्रदान करने के लिए एक क्षेत्र को अधिसूचित किया जा सकता है यदि: (i) एक निर्दिष्ट टोही सर्वेक्षण (आगे की खोज के योग्य खनिज क्षेत्रों की पहचान) पूरा किया गया है, या (ii) उपलब्ध भू-विज्ञान डेटा के आधार पर खनिज क्षमता की पहचान की गई है लेकिन संसाधन अभी तक स्थापित नहीं किए गए हैं।97,[96] प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है कि एक कंपोजिट लाइसेंस प्राप्त करने का इच्छुक व्यक्ति नीलामी के लिए उपयुक्त ब्लॉक प्रस्तावित कर सकता है जहां खनिज क्षमता उपलब्ध भूविज्ञान डेटा के आधार पर स्थापित किया गया है। व्यक्ति क्षेत्र के लिए उपलब्ध भू-विज्ञान डेटा के साथ राज्य सरकार को एक प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा।
     
  • खनिज क्षमता का आकलन करने वाली समिति: इच्छुक व्यक्तियों के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा चिन्हित क्षेत्रों की खनिज क्षमता का आकलन करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) राज्य के प्रमुख सचिव या सचिव, खनन और भूवैज्ञानिक विभाग (अध्यक्ष के रूप में), (ii) भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के उप महानिदेशक (सदस्य के रूप में), और (iii) निदेशक राज्य के खनन एवं भूवैज्ञानिक विभाग (सदस्य सचिव के रूप में)।
     
  • बोली की सिक्योरिटी राशि में ढिलाई: यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तावित क्षेत्र को नीलामी के लिए रखा जाता है, तो उस व्यक्ति को बोली की सिक्योरिटी राशि का 50% जमा करना होगा।96  वर्तमान में, बोली की सिक्योरिटी राशि अनुमानित संसाधन के मूल्य का 0.25% या 50 करोड़ रुपए है (इनमें से जो भी कम हो)।99  कुछ खनिजों (जैसे पुखराज और पन्ना) के लिए, जिनकी खनन क्षमता की पहचान की गई है लेकिन संसाधन मूल्य का अनुमान संभव नहीं है, सिक्योरिटी राशि 50 लाख रुपए है।99

 

शिक्षा

Payoja Ahluwalia (payoja@prsindia.org)

निपुण भारत मिशन को लागू करने के लिए कमिटी बनाई गई

स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने नेशनल इनीशिएटिव फॉर प्रोफिसिएंसी इन रीडिंग विद अंडस्टैंडिंग एंड न्यूमरैसी (निपुण) भारत मिशन के कार्यान्वयन के लिए एक राष्ट्रीय स्टीयरिंग कमिटी (एनएससी) की स्थापना की है।[97] निपुण भारत मिशन का लक्ष्य कक्षा तीन तक प्रत्येक बच्चे के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता में सार्वभौमिक दक्षता हासिल करना है।100 एनएससी नीतिगत मुद्दों पर मिशन का मार्गदर्शन करने और मिशन के लिए निर्धारित लक्ष्यों को 2026-27 तक हासिल करने के लिए जिम्मेदार होगा। 100  कमिटी की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री करेंगे।

चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम अधिसूचित 

शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के तहत चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) को अधिसूचित किया है।[98] एनईपी के अनुसार, 2030 से शिक्षकों को सिर्फ आईटीईपी के माध्यम से संलग्न किया जाएगा। इसे शुरू में पूरे भारत में 50 बहु-विषयक संस्थानों में पायलट मोड में पेश किया जाएगा। आईटीईपी शैक्षणिक वर्ष 2022-23 से शुरू होगा।

आईटीईपी के पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि एक विद्यार्थी को इतिहास और विज्ञान जैसे विशेष विषयों के साथ शिक्षा में डिग्री प्राप्त करने की अनुमति मिलेगी। आईटीईपी के लिए प्रवेश नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से किया जाएगा।

भर्ती के लिए पीएच.डी. डिग्री की अनिवार्यता को स्थगित किया गया 

यूजीसी (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा में मानकों के रखरखाव के लिए अन्य उपाय) रेगुलेशन, 2018 में विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती के लिए पीएच.डी. डिग्री होना अनिवार्य योग्यता है। [99] यह रेगुलेशन 1 जुलाई, 2021 से प्रभावी होना था। इस समय सीमा को बढ़ाकर 1 जुलाई, 2023 कर दिया गया है।[100] 

 

संचार

Omir Kumar (omirt@prsindia.org)

भारतीय टेलीग्राफ राइट ऑफ वे (संशोधन) नियम, 2021 अधिसूचित

संचार मंत्रालय ने भारतीय टेलीग्राफ राइट ऑफ वे (संशोधन) नियम, 2021 को अधिसूचित किया है।[101],[102]  2021 नियम भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 के तहत जारी भारतीय टेलीग्राफ राइट ऑफ वे नियम, 2016 में संशोधन करते हैं।[103]  एक्ट दूरसंचार क्षेत्र को रेगुलेट करता है। 2016 के नियम ऑप्टिकल फाइबर और मोबाइल टावरों सहित भूमिगत और भूमिगत टेलीग्राफ इंफ्रास्ट्रक्चर को बिछाने को रेगुलेट करते हैं। 2021 के नियमों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

  • भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर बिछाने की फीस: 2016 के नियमों में प्रावधान है कि निम्नलिखित के अतिरिक्त भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर बिछाने के लिए लाइसेंसधारी से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा: (i) आवेदन की जांच के लिए प्रशासनिक खर्चों को पूरा करना, और (ii) मरम्मत से जुड़े शुल्क का भुगतान। 2021 के नियम इस प्रावधान में इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना, काम करना, मरम्मत करना, हस्तांतरित या स्थानांतरित करना शामिल करते हैं।
     
  • मुआवजा: 2021 के नियम कहते हैं कि ऐसे मामलों में जहां एक सरकारी प्राधिकरण द्वारा प्रबंधित अचल संपत्ति पर ओवरग्राउंड टेलीग्राफ लाइन स्थापित की जाती है, लाइसेंसधारी द्वारा अचल संपत्ति के मूल्य के लिए एकमुश्त मुआवजा देय होगा, जोकि स्थापित प्रति किलोमीटर टेलीग्राफ लाइन पर 1,000 रुपए से अधिक नहीं होगा। 

ट्राई ने केबल टीवी सेवाओं में प्रतिस्पर्धा के मुद्दों पर टिप्पणियां आमंत्रित की

भारतीय दूरसंचार रेगुलेटरी प्राधिकरण (ट्राई) ने "केबल टीवी सेवाओं में बाजार संरचना/प्रतिस्पर्धा" पर एक परामर्श पत्र जारी किया।[104] फरवरी 2021 में, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने ट्राई से अनुरोध किया था कि 2013 में जारी इस विषय पर अपनी सिफारिशों पर फिर से विचार करे।107 मंत्रालय ने कहा था कि: (i) अंतिम सिफारिशों के बाद से काफी समय बीत चुका है, और (ii) नई तकनीक के आने से केबल टीवी के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। 

ट्राई ने उल्लेख किया कि आज बाजार में, टेलीविजन सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं के लिए कई वितरण प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं। इनमें शामिल हैं: (i) मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) और उनसे जुड़े स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) के माध्यम से केबल टीवी सेवाएं, (ii) डायरेक्ट टू होम सर्विसेज (डीटीएच), और (iii) आईपीटीवी सेवाएं (इंटरनेट पर टेलीविजन सेवाएं)। पंजीकृत एमएसओ की संख्या जनवरी 2015 में 160 से बढ़कर सितंबर 2021 में 1,733 हो गई है।107 इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर पर चार डीटीएच ऑपरेटर्स काम कर रहे हैं।107 इसलिए सिंगल सर्विस प्रोवाइडर का एकाधिकार नहीं हो सकता।107  हालांकि, यह भी कहा गया कि एमएसओ के बीच प्रतिस्पर्धा का स्तर पूरे देश में एक समान नहीं है। कुछ राज्यों में केबल टीवी बाजार में एक या दो एमएसओ का दबदबा है।

यह देखा गया कि डीटीएच सेवाएं विकल्प प्रदान करती हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। केबल टीवी ऑपरेटर ब्रॉडबैंड और वॉयस सेवाएं भी प्रदान कर सकते हैं जो डीटीएच ऑपरेटर नहीं कर सकते। इसने आगे देखा कि केबल टीवी के भीतर प्रतिस्पर्धा आवश्यक है क्योंकि वे राज्य/क्षेत्रीय आधार पर काम करते हैं जबकि डीटीएच सेवाएं राष्ट्रीय आधार पर संचालित होती हैं। केबल टीवी ऑपरेटर किसी विशेष क्षेत्र में मांग के लिए आपूर्ति किए जाने वाले विशिष्ट चैनलों का चयन कर सकते हैं, जबकि डीटीएच सेवाएं राष्ट्रीय आधार पर संचालित होती हैं और पूरे देश में एक ही चैनल प्रसारित करती हैं।

इस पृष्ठभूमि में ट्राई ने निम्नलिखित प्रमुख मामलों पर विचार मांगे हैं: (i) केबल टीवी सेवाओं में बाजार के प्रभुत्व को रेगुलेट करने की आवश्यकता, (ii) ऑपरेटरों की बाजार शक्ति को मापने के लिए प्रासंगिक बाजार की परिभाषा, (iii) प्रभुत्वशाली एमएसओ की बाजार हिस्सेदारी को कम करने के लिए रेगुलेटरी दखल, (iv) एलसीओ को रेगुलेट करने की आवश्यकता, और (v) क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के बंटवारे और विलय और अधिग्रहण के लिए मानदंड।

22 नवंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

अनुलग्नक

विभिन्न संसदीय स्टैंडिंग कमिटीज़ द्वारा वर्ष 2021-22 के दौरान समीक्षा के लिए चिन्हित विषयों को तालिका 9 में दिया गया है।

तालिका 9: 2021-22 के दौरान समीक्षा के लिए चिन्हित विषय

कोयला और स्टील

कोयला मंत्रालय

  1. भूमि अधिग्रहण और कोयला/लिग्नाइट खनन क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्स्थापन के मुद्दे
  2. कोयला क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास
  3. भारत के एनर्जी मिक्स में कोयले का भविष्य
  4. कोयला खान कामगार कल्याण कार्यक्रम की समीक्षा
  5. कोयला खानों में सुरक्षा
  6. कोयला और लिग्नाइट का उत्पादन – इरादे और योजना
  7. कोयला/लिग्नाइट क्षेत्र में दक्षता विकास
  8. कोयला नियंत्रक कार्यालय का प्रदर्शन
  9. देश में अवैध कोयला खनन और कोयले की चोरी को रोकने के लिए इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी और सतर्कता गतिविधियों का कार्यान्वयन
  10. कोयला/लिग्नाइट कंपनियों द्वारा पर्यावरणीय मानदंडों का अनुपालन
  11. कोयले का आयात - रुझान और आत्मनिर्भरता का मुद्दा
  12. बंदरगाहों पर कोयला का हैंडलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

खान मंत्रालय

  1. उत्तर पूर्वी राज्यों में खनिजों की खोज और क्षेत्र के विकास पर इसका समग्र प्रभाव
  2. देश में एल्युमिनियम और कॉपर उद्योगों का विकास
  3. देश में लौह अयस्क, मैंगनीज और बॉक्साइट के अवैध खनन को रोकने के उपाय
  4. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की संगठनात्मक संरचना और प्रदर्शन - एक समीक्षा
  5. भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) की संगठनात्मक संरचना और प्रदर्शन - एक समीक्षा
  6. खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण और वन मंजूरी प्रक्रिया को तेज और सरल बनाना
  7. खनन गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के कारण प्रदूषण को कम करने के उपाय
  8. खनिजों और धातुओं में आत्मनिर्भरता

स्टील मंत्रालय

  1. स्टील नीति की समीक्षा और स्टील क्षेत्र के विकास पर इसका प्रभाव
  2. सेकेंडरी स्टील क्षेत्र की सहायता करने वाले प्रमुख नीतिगत परिवर्तन
  3. स्टील संयंत्रों द्वारा ऊर्जा दक्षता का प्रबंधन और लौह अयस्क खनन से संबंधित पर्यावरणीय मुद्दे
  4. देश में मैंगनीज अयस्क उद्योग का विकास
  5. स्टील क्षेत्र में दक्षता विकास
  6. स्टील के उपयोग को बढ़ावा देना
  7. स्टील पीएसयू की ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं की स्थिति
  8. बंदरगाहों पर लौह अयस्क का हैंडलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

वाणिज्य

  1. एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना का कार्यान्वयन
  2. उत्तर पूर्वी क्षेत्र का औद्योगीकरण
  3. भारत में ई-कॉमर्स का प्रचार और रेगुलेशन
  4. भारतीय चाय उद्योग का प्रदर्शन
  5. निर्यात संवर्धन परिषदों का प्रदर्शन

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

  1. वैक्सीन विकास, वितरण प्रबंधन और महामारी कोविड -19 मंत्रालय
  2. आयुष्मान भारत का क्रियान्वयन
  3. समकालीन दौर में मानसिक स्वास्थ्य
  4. चिकित्सा उपकरण: रेगुलेशन और नियंत्रण
  5. कैंसर उपचार की वहनीयता

आयुष मंत्रालय

  1. आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली: चुनौतियां और संभावनाएं
  2. राष्ट्रीय आयुष मिशन की समीक्षा

गृह मामले

  1. पुलिस- प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण और सुधार
  2. जेल- स्थितियां, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुधार
  3. राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया समन्वय और आतंकवाद का मुकाबला
  4. केंद्र शासित प्रदेशों: (i) जम्मू और कश्मीर और लद्दाख, और (ii) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रशासन, विकास और लोक कल्याण
  5. सीमा प्रबंधन - तटीय सुरक्षा
  6. आपदा प्रबंधन
  7. दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते अपराध

इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

  1. प्रसार भारती संगठन के कामकाज की समीक्षा
  2. मीडिया कवरेज में नैतिक मानदंड
  3. भारतीय फिल्म उद्योग: समस्याएं और चुनौतियां
  4. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के कामकाज की समीक्षा
  5. दूरदर्शन चैनलों के कामकाज और आउटरीच की समीक्षा
  6. आउटरीच और कम्यूनिकेशन ब्यूरो (बीओसी) के कामकाज की समीक्षा 
  7. सामुदायिक रेडियो स्टेशन: विकास, अवसर और चुनौतियां 

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय

  1. नागरिकों की डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी
  2. डेटा सुरक्षा के लिए डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सुरक्षा उपाय
  3. यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के कामकाज की समीक्षा
  4. नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और डिजिटल स्पेस में महिला सुरक्षा पर विशेष जोर देने सहित सोशल/ऑनलाइन न्यूज मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना
  5. मेक इन इंडिया के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स/आईटी हार्डवेयर/दूरसंचार उपकरण मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देना और आयात में कमी के उपाय
  6. कोविड -19 महामारी के मद्देनजर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय की टेक्नोलॉजी संबंधी पहल
  7. भारत में साइबर सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा
  8. सीएससी-एसपीवी के कामकाज की समीक्षा
  9. इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के कामकाज की समीक्षा

डाक विभाग

  1. डाक विभाग में रियल एस्टेट प्रबंधन
  2. डाक विभाग - पहल और चुनौतियां
  3. पूर्वोत्तर क्षेत्र में डाक सेवाओं की समीक्षा

दूरसंचार विभाग

  1. बीएसएनएल और एमटीएनएल के कामकाज की समीक्षा और उनके प्रदर्शन को बढ़ाने की योजना
  2. ट्राई के कामकाज की समीक्षा
  3. पूर्वोत्‍तर और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष बल देते हुए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) के अंतर्गत योजनाओं के प्रदर्शन की समीक्षा
  4. दूरसंचार सेवाओं/इंटरनेट का सस्पेंशन और उसका प्रभाव
  5. टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (टीएसपी) सहित दूरसंचार क्षेत्र के सामने आने वाले मुद्दे
  6. उभरती और परस्पर एक जगह मिलने वाली प्रौद्योगिकियों, संस्थाओं और कार्यपद्धतियों की चुनौतियों की अंतरक्षेत्रीय समीक्षा
  7. भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 के कामकाज की समीक्षा

श्रम

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय

  1. खान कामगारों की कार्य स्थितियां और कल्याण, तथा खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के कामकाज का आकलन
  2. सरकारी/पीएसयू कार्यालयों/प्रतिष्ठानों में बारहमासी प्रकृति की नौकरियों के लिए कॉन्ट्रैक्ट/कैजुअल/सैनिटेशन कर्मचारियों की तैनाती
  3. बागान श्रमिकों का कल्याण
  4. ईपीएफ पेंशन योजना के विशेष संदर्भ में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की कार्यप्रणाली
  5. कर्मचारी राज्य बीमा निगम - ईएसआई योजना के तहत एप्लिकेबिलिटी और लाभ और कॉर्पस फंड का प्रबंधन
  6. केंद्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड का कार्य
  7. केंद्र प्रायोजित योजनाओं का कार्यान्वयन
  8. बाल श्रम पर राष्ट्रीय नीति - एक आकलन
  9. बंधुआ मजदूरों की पहचान और पुनर्वास
  10. अनुसूचित रोजगार क्षेत्र में निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का कार्यान्वयन
  11. असंगठित/अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के उपाय जिनमें योजना श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर, मछुआरे और आईटी और दूरसंचार क्षेत्रों जैसे बीपीओ/कॉल सेंटर के कामगार शामिल हैं
  12. विशेष रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में प्रवासी कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों और वापसी करने वाले श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए उपाय

टेक्सटाइल मंत्रालय

  1. जूट उद्योग का विकास और संवर्धन
  2. टेक्सटाइल क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग और अपग्रेडेशन की तुलना में कौशल विकास
  3. टेक्सटाइल मंत्रालय की कल्याण योजनाएं- एक मूल्यांकन
  4. भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की चुनौतियां/अवसर
  5. कपास क्षेत्र का विकास
  6. रेशम उद्योग के विकास और संवर्धन के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड की योजनाएं/कार्यक्रम
  7. हथकरघा क्षेत्र की स्थिति/प्रदर्शन
  8. पावरलूम क्षेत्र की स्थिति और सुधार
  9. हथकरघा और हस्तशिल्प की मार्केटिंग एजेंसियों का प्रदर्शन
  10. मानव निर्मित फाइबर का विकास
  11. राष्ट्रीय टेक्सटाइल निगम का कार्य

दक्षता विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

  1. प्रधानमंत्री दक्षता विकास योजना
  2. राष्ट्रीय दक्षता योग्यता ढांचा - एक आकलन
  3. प्रशिक्षण महानिदेशालय की कार्यप्रणाली
  4. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) की कार्यप्रणाली
  5. राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) का कार्यान्वयन
  6. स्किल एक्विजिशन एंड नॉलेज अवेयरनेस फॉर लाइवलीहुड प्रमोशन (संकल्प) प्रॉजेक्ट का कार्यान्वयन

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस

  1. प्राकृतिक गैस सहित पेट्रोलियम उत्पादों का मूल्य निर्धारण, मार्केटिंग और आपूर्ति
  2. तेल पीएसयूज़ से जुड़े मुकदमे
  3. तेल पीएसयूज़ में खरीद प्रक्रियाओं में अनुबंध प्रबंधन और पारदर्शिता
  4. हाइड्रोकार्बन संसाधनों और इलेक्ट्रिक वाहनों के विशिष्ट संदर्भ के साथ ऊर्जा सुरक्षा
  5. तेल रिफाइनरीज़ - एक समीक्षा
  6. तेल पीएसयूज़ की सीएसआर गतिविधियां
  7. पीएनजी और सीएनजी सहित राष्ट्रीय गैस ग्रिड
  8. वित्तीय प्रदर्शन और अन्य क्षेत्रों में निवेश के विशिष्ट संदर्भ के साथ तेल पीएसयूज़ के प्रदर्शन की समीक्षा
  9. तेल पीएसयूज़ की मानव संसाधन नीति
  10. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा
  11. पेट्रोलियम क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग
  12. एलएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा
  13. ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत
  14. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी/चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में ओएमसी की भूमिका
  15. सीबीजी (सैटैट) के कार्यान्वयन की समीक्षा
  16. कच्चे तेल के आयात पर नीति
  17. 'आत्मनिर्भर भारत' के अंतर्गत पेट्रोलियम क्षेत्र में तेल पीएसयूज़ की पहल

ग्रामीण विकास

ग्रामीण विकास विभाग

  1. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन
  2. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)
  3. दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम)
  4. दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के अंतर्गत 'मेक इन इंडिया' के दृष्टिकोण को साकार करना
  5. ऑडिट के प्रावधान के प्रभावी उपयोग के माध्यम से विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी - एक समग्र समीक्षा
  6. गांवों में गरीबों और निराश्रितों पर राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) का प्रभाव
  7. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा) का आलोचनात्मक मूल्यांकन
  8. प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के कार्यान्वयन की समीक्षा
  9. सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के अंतर्गत आदर्श ग्रामों का निर्माण
  10. ग्रामीण आबादी के वित्तीय समावेशन में बैंकों की भूमिका
  11. ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों के बीच कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) निधि की स्थिति और उपयोग।

भूसंसाधन विभाग

  1. डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) का कार्यान्वयन

पंचायती राज मंत्रालय

  1. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए)
  2. ग्राम पंचायतों का डिजिटलीकरण
  3. स्वामित्व (सर्वे ऑफ विलेज आबादी एंड मैपिंग विद इंपावरिश्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरियाज़) योजना

परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति

  1. सिविल एविएशन क्षेत्र में सुरक्षा से संबंधित मुद्दे
  2. सिविल एविएशन क्षेत्र में सुरक्षा से संबंधित मुद्दे
  3. देश में केंद्रीय पुस्तकालयों की कार्यप्रणाली
  4. ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों की सुरक्षा के लिए रेगुलेटरी ढांचे का निर्माण
  5. सागरमाला परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई प्रगति
  6. केंद्रीय सड़क एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (सीआरआईएफ) कार्यों की समीक्षा
  7. देश में पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
  8. विदेशी बाजारों में भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देना - विदेशी पर्यटक कार्यालयों और भारतीय दूतावासों की भूमिका

जल संसाधन

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग

  1. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, विकास तथा प्रदूषण का प्रबंधन और उपशमन, परियोजना के डिलिवरबल्स और समयसीमा के साथ-साथ राज्य सरकारों के प्रदर्शन के विशेष संदर्भ के साथ
  2. भूजल: एक मूल्यवान, किंतु घटते संसाधन
  3. दिल्ली तक अपर यमुना नदी सफाई परियोजना और दिल्ली में नदी तल प्रबंधन की समीक्षा
  4. पूर्वोत्तर जल प्रबंधन प्राधिकरण के कामकाज की समीक्षा - प्राधिकरण के तहत अधिदेश, कार्य योजना और परियोजना गतिविधियों की समीक्षा
  5. कावेरी नदी और दक्षिण भारत की अन्य प्रमुख नदियों में प्रदूषण का संरक्षण और उपशमन
  6. वैपकोस लिमिटेड की भूमिका और कामकाज की समीक्षा
  7. देश में हिमनद प्रबंधन - हिमनदों/हिमनद झीलों की निगरानी, जिसमें हिमनदीय झीलों का फटना भी शामिल है, जिससे हिमालय क्षेत्र में अचानक बाढ़ आ जाती है
  8. बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों के विशेष संदर्भ के साथ देश में बाढ़ प्रबंधन
  9. भारत में जल उपयोग दक्षता

पेय जल और सैनिटेशन विभाग

  1. 'स्वच्छ भारत मिशन के प्रदर्शन की समीक्षा- स्वच्छ भारत मिशन और ओडीएफ 2.0 के लिए तैयारी' के अंतर्गत सैनिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता और स्थिरता
  2. 'जल जीवन मिशन' के प्रदर्शन की समीक्षा
  3. पर्वतीय क्षेत्रों के विशेष संदर्भ के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता
  4. तटीय क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति – डीसैलिनैशन प्लांट्स की स्थापना

स्रोत: बुलेटिन II के विभिन्न प्रकाश, , लोकसभा; पीआरएस

[1] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on November 1, 2021, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[2] “Cumulative Coverage Report of COVID-19 Vaccination”, Ministry of Health and Family Welfare, November 1, 2021, https://www.mohfw.gov.in/pdf/CummulativeCovidVaccinationReport31october2021.pdf.    

[3] “Ministry of Home Affairs (MHA) to begin granting fresh Tourist Visas to foreigners coming to India through chartered flights with effect from October 15”, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, October 7, 2021.

[4] “Graded relaxation in visa and travel restrictions”, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, October 22, 2020.

[5] Guidelines for international arrivals, October 20, 2021, https://www.mohfw.gov.in/pdf/GuidelinesforInternationalArrival20thOctober2021.pdf.

[6] Category A list of countries, Ministry of Health and Family Welfare, October 20, 2021, https://www.mohfw.gov.in/pdf/ListofCountriestobereferredtoincontextofGuidelinesforinternationalarrivalsdated20thOctober2021.pdf. 

[7] Guidelines for international arrivals, Ministry of Health and Family Welfare, February 17, 2021, https://www.mohfw.gov.in/pdf/Guidelinesforinternationalarrivals17022021.pdf. 

[8] Order No 40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, September 28, 2021, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrderdt_28092021.pdf.

[9] Order No 40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, October 28, 2021, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrderdt28102021.pdf.

[10]PM CARES for Children Scheme Guidelines, Ministry of Women and Child Development, October 7, 2021,  https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2021/oct/doc202110711.pdf. 

[11]“PM CARES for Children Scheme -Brief”, Press Release, Ministry of Women and Child Development, October 7, 2021, https://wcd.nic.in/sites/default/files/PM-cares.pdf. 

[12] “Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEs) launches another funding scheme to help the distressed MSME sector”, Press Information Bureau, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, June 24, 2020. 

[13] “Credit Guarantee Scheme for Subordinate Debt (CGSSD) extended up to 30.09.2021”, Press Information Bureau, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, April 1, 2021.

[14] “Credit Guarantee Scheme for Subordinate Debt (CGSSD) extended up to 30.03.2022”, Press Information Bureau, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, October 4, 2021.

[15] Monetary Policy Statement, 2021-22, Reserve Bank of India, October 8, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR10028284903836D245FBA78B07929792711B.PDF. 

[16] “CONSUMER PRICE INDEX NUMBERS ON BASE 2012=100 FOR RURAL, URBAN AND COMBINED FOR THE MONTH OF SEPTEMBER 2021”, Press Information Bureau, Ministry of Statistics and Programme Implementation, October 12, 2021. 

[17] “Index Numbers of Wholesale Price in India for the month of September, 2021(Base Year: 2011-12)”, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, October 14, 2021.

[18] S.O. 4091(E), Ministry of Finance, October 5, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230180.pdf.  

[19] S.O. 3732(E), Ministry of Finance, October 17, 2019, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/213332.pdf. 

[20] Scale Based Regulation (SBR): A Revised Regulatory Framework for NBFCs, Reserve Bank of India, October 22, 2021,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT1127AD09AD866884557BD4DEEA150ACC91A.PDF. 

[21] CG-GJ-E-21102021-230572, International Financial Services Centres Authority Capital Market Intermediaries) Regulations, 2021, INTERNATIONAL FINANCIAL SERVICES CENTRES AUTHORITY, October 20, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230572.pdf.  

[22] CG-GJ-E-21102021-230583, International Financial Services Centres Authority (Registration of Insurance Business) Regulations, 2021, INTERNATIONAL FINANCIAL SERVICES CENTRES AUTHORITY, October 20, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230583.pdf. 

[23] CG-GJ-E-20102021-230559, International Financial Services Centres Authority (Insurance Intermediary) Regulations, 2021, INTERNATIONAL FINANCIAL SERVICES CENTRES AUTHORITY, October 20, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230559.pdf. 

[24] Reserve Bank of India (Prudential Regulations on Basel III Capital Framework, Exposure Norms, Significant Investments, Classification, Valuation and Operation of Investment Portfolio Norms and Resource Raising Norms for All India Financial Institutions) Directions, 2021, Reserve Bank of India, October 22, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/content/pdfs/MasterDirectionAllIFI22102021.pdf.  

[25] “Finance Secretary Dr T.V. Somanathan releases guidelines for reforms in Public Procurement and Project Management”, Press Information Bureau, Ministry of Finance, October 29, 2021.

[26] General Instructions on Procurement and Project Management, Ministry of Finance, October 29, 2021, https://doe.gov.in/sites/default/files/General%20Instructions%20on%20Procurement%20and%20Project%20Management.pdf. 

[27] “Finance Secretary Dr T.V. Somanathan releases Model Tender Documents (MTDs) for Procurement of Goods and non-Consultancy Services”, Press Information Bureau, Ministry of Finance, October 29, 2021.

[28] Model Tender Document for Procurement of Goods, Ministry of Finance, October 29, 2021, https://doe.gov.in/sites/default/files/Model%20Tender%20Document%20for%20Procurement%20of%20Goods_0.pdf. 

[29] Model Tender Document for Procurement of Non Consultancy Services, Ministry of Finance, October 29, 2021, https://doe.gov.in/sites/default/files/Model%20Tender%20Document%20for%20Procurement%20of%20Non%20Consultancy%20Services.pdf.  

[30] Consultation paper on introducing disclosure norms for ESG Mutual Fund schemes, Securities and Exchange Board of India, October 26, 2021, https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/oct-2021/consultation-paper-on-introducing-disclosure-norms-for-esg-mutual-fund-schemes_53500.html. 

[31] Consultation Paper, Review of Price Band and Book Building Framework for public issues, Securities and Exchange Board of India, October 4, 2021, https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/oct-2021/consultation-paper-on-review-of-price-band-and-book-building-framework-for-public-issues-_53100.html. 

[32] Manohar Lal Sharma vs. Union of India and Ors., Writ Petition (Criminal) No. 314 of 2021, Supreme Court of India, October 27, 2021, https://main.sci.gov.in/pdf/LU/27102021_082008.pdf.

[33] “Government Approves Air India Disinvestment; Tatasons’ SPV – Talace Pvt Ltd - Wins Bid for Air India”, Press Information Bureau, Ministry of Finance, October 8, 2021.

[34] Preliminary Information Memorandum (PIM) For Strategic Disinvestment of Air India issued, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, January 27, 2020.

[35] “Union Civil Aviation Minister Shri Jyotiraditya Scindia releases Krishi UDAN 2.0”, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, October 27, 2021.

[36] ““KISAN RAIL” AND “KRISHI UDAAN” to be launched”, Press Information Bureau, Ministry of Finance, February 10, 2020.

[37] Heli Disha: Administrative Guidance Material for Civil Helicopter Operations, Ministry of Civil Aviation, October 2021, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/GM-CIVIL-HELICOPTER-E-Book.pdf.

[38] The Aircraft Rules, 1937, Ministry of Civil Aviation, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_36_0_00013_193422_1523351174422&type=rule&filename=Aircraft%20Rules%201937.pdf.

[39]Draft Accessibility Standards and Provision of facilities for Persons with Disabilities (Divyangjan) in Civil Aviation Sector , Ministry of Civil Aviation, October 26, 2021, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Accessibility-Standards-and-Provision-of-facilities-for-Persons-with-Disabilities.pdf. 

[40] “PM launches PM Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission”, Press Information Bureau, Prime Minister’s Office, October 25, 2021.

[41] The Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Rules, 2021, Ministry of Health and Family Welfare, October 12, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230390.pdf. 

[42] The Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Act, 2021, Ministry of Law and Justice, March 25, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/226130.pdf

[43] S.O. 4196(E), S.O. 4197(E) and S.O. 4198(E), Ministry of Home Affairs, Gazette of India, October 11, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230337.pdf.

[44] Section 139(1), The Border Security Force Act, 1968, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1561/1/a1968-47.pdf. 

[45] S.O. 3996(E), Ministry of Home Affairs, Gazette of India, September 22, 1969, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_5_23_00003_196847_1517807319062&type=rule&filename=bsf_rules_final1.pdf.

[46] S.O. 1318(E), Ministry of Home Affairs, Gazette of India, June 11, 2012, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2012/E_1098_2012_010.pdf.

[47] S.O. 1686(E), Ministry of Home Affairs, Gazette of India, July 3, 2014, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2014/160138.pdf.

[48] Proposed Amendments to the Registration of Births and Deaths Act, 1969 – Inviting suggestions/comments from general public, Ministry of Home Affairs, October 27, 2021, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/RBDComments_27102021.pdf.

[49] “Cabinet approval sets the implementation of PM GatiShakti National Master Plan (NMP) in motion”, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, October 21, 2021.

[50] Report no. 10, Standing Committee on External Affairs: ‘India and Bilateral Investment Treaties’, Lok Sabha, September 10, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/External%20Affairs/17_External_Affairs_10.pdf.  

[51] Report no. 9, Standing Committee on External Affairs: ‘India and International Law including extradition treaties with foreign countries, asylum issues, international cyber-security and issues of financial crimes’, Lok Sabha, September 10, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/External%20Affairs/17_External_Affairs_9.pdf. 

[52] CG-DL-E-01102021-230101, Department of Defence Production, Ministry of Defence, October 1, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230101.pdf.

[53] “Seven new defence companies, carved out of OFB, dedicated to the Nation on the occasion of Vijayadashami”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, October 15, 2021.

[54] Draft Indian Marine Fisheries Bill, 2021, Department of Fisheries, Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying, October 22, 2021, https://dof.gov.in/sites/default/files/2021-10/Draft_Indian_Marine_Fisheries_Bill_2021.pdf.

[55] “CG-DL-E-08102021-230263”, Gazette of India, Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, October 8, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230263.pdf.

[56] “Cabinet approves Nutrient Based Subsidy (NBS) rates for Phosphatic & Potassic (P&K) Fertilisers for the year 2021-22 (from 1st October, 2021 to 31st March, 2022)”, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, October 12, 2021.

[57] Office Memorandum No. 23011/1/2021-P&K, Department of Fertilizers, Ministry of Chemicals and Fertilizers, May 20, 2021, https://fert.nic.in/sites/default/files/What-is-new/NBS-Notification.pdf.

[58] “Cabinet approves fixation of Nutrient Based Subsidy (NBS) rates for Phosphatic and Potassic (P&K) fertilizers for the year 2020-21”, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, April 22, 2020.

[59] “Notification on enhancing subsidy rates for DAP and other P & K fertilisers for upcoming Kharif season issued today”, Press Information Bureau, Ministry of Chemicals and Fertilizers, May 20, 2021.

[60] G.S.R. 714 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, October 4, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230145.pdf.   

[61] G.S.R. 720 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, October 5, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230189.pdf.

[62] Motor Vehicles Act, 1988, Ministry of Road Transport and Highways, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1798/1/AAA1988___59.pdf.

[63] Central Motor Vehicles Rules, 1989, Ministry of Road Transport and Highways, https://morth.nic.in/sites/default/files/CMVR-chapter3_1.pdf.

[64] Motor Vehicles (Registration and Functions of Vehicle Scrapping Facility) Rules, 2021 , Ministry of Road Transport and Highways, September 23, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229931.pdf.

[65] RT-25035/27/2021-RS, Ministry of Road Transport and Highways, October 4, 2021, https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/Scheme_for_grant_of_awards_to_Goods_Samaritan_0001.pdf.

[66] G.S.R. 758 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, October 21, 2021

https://morth.nic.in/sites/default/files/notifications_document/Draft%20GSR%20758%20%28E%29%20dated%2021st%20October%202021%20helmet%20for%20child.pdf.

[67] Model concessionaire Agreement for Public Private Partnership in "Setting up and Operating Multi-modal Logistics Parks being developed under the Bharatmala Pariyojana", Ministry of Road Transport and Highways, October 7, 2021, https://morth.nic.in/sites/default/files/MCA_for_MMLP.pdf.

[68] Concept Note: Logistics Efficiency Enhancement Program (LEEP): Development of Multimodal Logistics Parks, Ministry of Road Transport and Highways,

[69] Bharatmala Pariyojana, https://www.india.gov.in/spotlight/bharatmala-pariyojana-stepping-stone-towards-new-india.

[70] “35 Multi-Modal Logistics Parks (MMLP) Projects to be developed under Public Private Partnership (PPP) across the country”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, July 22, 2021.

[71] The Environment (Protection) 115 Amendment Rules, 2021, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, October 4, 2021, https://moef.gov.in/wp-content/uploads/2021/10/Environment-Protection-115-Amendment-Rules-2021.pdf. 

[72] The Environment (Protection) Rules, 1986, Ministry of Environment and Forests, November 19, 1986, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_MP_74_308_00003_00003_1543231806694&type=rule&filename=ep_rules_1986.pdf. 

[73] Consultation Paper on Proposed amendments in the Forest (Conservation) Act, 1980, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, October 2021, https://moef.gov.in/wp-content/uploads/2021/10/Public-Consultation-Paper-2.10.21.pdf.   

[74] The Forest (Conservation) Act, 1980, December 27, 1980, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1760/1/forestAA1980.pdf.   

[75] The Forest (Conservation) Amendment Rules, 2014, Ministry of Environment and Forest, March 14, 2014, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_16_18_00008_198069_1517807325332&type=rule&filename=1.pdf. 

[76] “Ministry of Women and Child Development seeks comments/suggestions on Amendments to Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Model Rules, 2016”, Press Information Bureau, Ministry of Women and Child Development, October 28, 2021. 

[77] Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Model Rules, 2016, Ministry of Women and Child Development,  https://wcd.nic.in/sites/default/files/171861.pdf.

[78] Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015, Ministry of Women and Child Development, http://cara.nic.in/PDF/JJ%20act%202015.pdf.

[79] Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Amendment Act, 2021, Ministry of Women and Child Development, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228833.pdf.

[80] Draft amendments to Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Model Rules, 2016, https://wcd.nic.in/sites/default/files/Attachment-%20Working%20Draft%20on%20JJ%20Model%20Rules%202016-%20forwarding%20for%20comments%2027102021_0.pdf

[81] CEA (Cyber Security in Power Sector) Guidelines, 2021, Ministry of Power, https://cea.nic.in/wp-content/uploads/notification/2021/10/Guidelines_on_Cyber_Security_in_Power_Sector_2021-1.pdf. 

[82] Notification No. 18/1/BEE/DISCOM/2021, Bureau of Energy Efficiency, October 6, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230245.pdf.

[83] “To Promote Clean Energy Consumption, Power Ministry proposes Amendment to Energy Conservation Act, 2001”, Press Information Bureau, Ministry of Power, October 30, 2021.

[84] The Energy Conservation Act, 2021, Ministry of Power, September 29, 2001, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/2003/1/200152.pdf.

[85] The Electricity (Transmission System Planning, Development and Recovery of Inter-State Transmission Charges) Rules, 2021, Ministry of Power, October 1, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230130.pdf. 

[86] The Electricity (Timely Recovery of Costs due to Change in Law) Rules, 2021, October 22, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230629.pdf. 

[87] G.S.R. 752(E), Ministry of Power, October 22, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230629.pdf. 

[88] Dissolution of five "Regional Power Committees (Transmission Planning), Ministry of Power, October 20, 2021, https://powermin.gov.in/sites/default/files/webform/notices/Dissolution_of_five_Regional_Power_Committees_Transmission_Planning_RPCTPs.pdf. 

[89] Regional Power Committees, Central Electricity Authority, as accessed on October 25, 2021, https://cercind.gov.in/regional_power_comm.html. 

[90] F.No.20/1/2019-SITP, Gazette of India, October 20, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230585.pdf.

[91] “Government has approved setting up of 7 Mega Integrated Textile Region and Apparel (PM MITRA) Parks with a total outlay of Rs. 4,445 crore in a period of 5 years”, Press Information Bureau, Ministry of Textile, October 6, 2021. 

[92] F. No. 12015/03/2020-IT, Gazette of India, September 24, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229974.pdf.

[93] Amendment of the Minerals (Evidence of Mineral Contents) Rules, 2015 and the Mineral (Auction) Rules, 2015 for facilitating identification of mineral blocks for auction for grant of Composite Licence, Ministry of Mines, October 7, 2021, https://www.mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/Noticedated07102021.pdf.

[94] The Minerals (Evidence of Mineral Contents) Rules, 2015, Ministry of Mines, April 17, 2015, https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/Minerals(EvidenceofContents)Rules,2015.pdf. 

[95] The Mineral (Auction) Rules, 2015, Ministry of Mines, May 20, 2015, https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/Mineral%20(Auction)%20Rules,%202015.pdf. 

[96] The Minerals (Evidence of Mineral Contents) Amendment Rules, 2021, Ministry of Mines, June 18, 2021, https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/the%20Minerals%20EOMR%20Amendment%20Rules%202021.pdf. 

[97] “Government sets up National Steering Committee for implementation of the NIPUN Bharat Mission”, Press Information Bureau, Ministry of Education, October 25, 2021. 

[98] “Ministry of Education notifies Four Year Integrated Teacher Education Programme”, Press Information Bureau, Ministry of Education, October 27, 2021.

[99] No. F.1-2/2017(EC/PS)., Gazette of India, July 18, 2018, https://www.ugc.ac.in/pdfnews/4033931_UGC-Regulation_min_Qualification_Jul2018.pdf. 

[100] No. F.9-1/2010(PS/MISC) Pt. Vol.I., Gazette of India, October 11, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/230355.pdf. 

[101] G.S.R. 749(E), Gazette of India, Ministry of Communications, October 21, 2021, https://dot.gov.in/sites/default/files/Gazette%20Notification%20dated%2021-10-2021-IT%20RoW%20%28Amendment%29%20Rules%2C%202021.pdf.

[102] Indian Telegraph Act, 1885, https://dot.gov.in/act-rules-content/2442.

[103] G.S.R. 1070(E), Gazette of India, Ministry of Communications, November 15, 2016, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2016/172637.pdf.

[104] “Consultation Paper on “Market Structure/Competition in cable TV services”, The Telecom Regulatory Authority of India, October 25, 2021, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/CP_25102021_0.pdf. 

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