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अगस्त 2021

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इस अंक की झलकियां

संसद का मानसून सत्र 2021 समाप्त; 20 बिल पारित

जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (राष्ट्रीयकरण) संशोधन बिल, 2021, ट्रिब्यूनल सुधार बिल, 2021 और डिपॉजिट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (संशोधन) बिल, 2021 पारित किए गए। 

संविधान (127वां संशोधन) बिल, 2021 संसद में पारित

बिल संविधान में संशोधन करता है ताकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी सूची तैयार करने की अनुमति दी जा सके। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से सलाह की जरूरत नहीं।

पिछले वर्ष के निम्न तुलनात्मक आधार के चलते 2021-22 की पहली तिमाही में जीडीपी में 20.1% का उछाल
2021-22 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (2011-12 के स्थिर मूल्यों पर) में 20.1% की वृद्धि आई (वर्ष दर वर्ष)। 2020-21 की पहली तिमाही के दौरान जीडीपी में 24.4% का संकुचन आया। 

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन की शुरुआत की

नीति आयोग ने राष्ट्रीय एसेट मुद्रीकरण पाइपलाइन की शुरुआत की जिसका लक्ष्य 2024-25 तक लगभग छह लाख करोड़ रुपए मूल्य के एसेट्स का मुद्रीकरण करना है।

जायकोव-डी (ZyCoV-D) वैक्सीन को आपात उपयोग के लिए मंजूरी मिली

तीसरे फेज के ट्रायल्स के अनुसार, लक्षण वाले आरटी-पीसीआर मामलों में वैक्सीन की एफिशिएंसी 67% है। 12 वर्ष और उससे अधिक के लोगों को इस वैक्सीन की तीन डोज़ लगाई जाएंगी।

रेपो और रिवर्स रेपो रेट्स क्रमशः 4% और 3.35% पर अपरिवर्तनीय

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट को क्रमशः 4% और 3.35% पर अपरिवर्तनीय रखा। कमिटी ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

विभिन्न मुद्दों और योजनाओं के कार्यान्वयन पर कमिटी रिपोर्ट सौंपी गई

इनमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित कई योजनाओं की समीक्षा करने वाली रिपोर्ट्स शामिल हैं। रोजगार पर कोविड-19 महामारी के असर और शिक्षा में लर्निंग में कमियों पर केंद्रित रिपोर्ट्स भी सौंपी गईं।

ट्राई ने दूरसंचार के विभिन्न स्तरों के आधार पर लाइसेंस प्रणाली का सुझाव दिया

ट्राई ने एकीकृत लाइसेंस में अलग से एक्सेस नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन नाम का ऑथराइडेशन लेवल बनाया है ताकि कंपनियां स्वतंत्र रूप से नेटवर्क लेयर में ऑपरेट कर सकें। 

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2021 अधिसूचित

2021 के नियम सिंगल यूज प्लास्टिक की कुछ वस्तुओं को प्रतिबंधित करते हैं (जैसे कटलरी)। प्लास्टिक के कैरी बैग की न्यूनतम मोटाई जोकि पहले 50 माइक्रॉन थीं, इस साल बढ़कर 75 माइक्रॉन और अगले 120 माइक्रॉन्स हो जाएगी। 

सड़क दुर्घटनाओ के लिए जांच और मुआवजे पर ड्राफ्ट संशोधन जारी

सड़क दुर्घटनाओं की त्वरित जांच पर ड्राफ्ट संशोधन जारी किए गए। इसके अंतर्गत ऐसी ड्राफ्ट योजनाएं जारी की गई हैं जो चोट या मृत्यु के लिए जिम्मेदार दुर्घटनाओं का हर्जाना बढ़ाने और दुर्घटना पीड़ितों के लिए फंड बनाने का प्रयास करती हैं। 

भारत में ड्रोन ऑपरेशन को उदार बनाने वाले ड्रोन नियम अधिसूचित

अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स नियम, 2021 का स्थान लेने वाले ड्रोन नियम, 2021 के अंतर्गत भारत में ड्रोन्स के रेगुलेशन और ऑपरेशन को उदार बनाया गया है।

कैबिनेट ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ऑयल पाम को अनुमोदित किया

तेल किसानों को आश्वस्त मूल्य और इनपुट्स पर सहायता दी जाएगी। पूर्वोत्तर और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लिए अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान किया गया है। यह 2037 तक लागू होगा और इसका परिव्यय 11.040 करोड़ रुपए का है।
 

संसद

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

संसद का मानसून सत्र 19 जुलाई, 2021 से 11 अगस्त, 2021 के बीच संचालित किया गया और कुल 17 दिन की बैठकें हुईं।[1]  सत्र को 13 अगस्त, 2021 को समाप्त होना था लेकिन इसे दो दिन पहले ही खत्म कर दिया गया।

सत्र के दौरान संसद में 20 बिल पारित हुए (दो विनियोग विधेयक सहित)। इनमें से 15 बिल सत्र के दौरान पेश किए गए। इन 15 में से चार बिल अध्यादेशों का स्थान लेते हैं। ये हैं ट्रिब्यूनल सुधार बिल, 2021, इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) बिल, 2021, आवश्यक रक्षा सेवा बिल, 2021 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग बिल, 2021। सत्र के दौरान पारित होने वाले अन्य बिल में संविधान (एक सौ सत्ताइसवां संशोधन) बिल, 2021, टैक्सेशन कानून (संशोधन) बिल, 2021, जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (राष्ट्रीयकरण) संशोधन बिल, 2021 और किशोर न्याय संशोधन बिल, 2021 शामिल हैं।

मानसून सत्र 2021-22 के लेजिसलेटिव एजेंडा पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें। सत्र के दौरान संसद के कामकाज पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें।

 

कोविड-19

31 अगस्त, 2021 तक भारत में कोविड-19 के 3.28 करोड़ पुष्ट मामले थे।[2] [3] इनमें से 3.20 करोड़ (97.5%) मरीजों का इलाज हो चुका है/उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है और 4.39 लाख लोगों (1.3%) की मृत्यु हुई है। 31 अगस्त, 2021 तक 49 करोड़ लोगों को वैक्सीन की कम से कम पहली डोज़ मिल गई है जिनमें से 15 करोड़ लोग पूरी तरह से वैक्सीनेटेड हैं।[4] देश और विभिन्न राज्यों में दैनिक मामलों की संख्या के लिए कृपया यहां देखें।  

कोविड-19 के फैलने के साथ केंद्र सरकार ने महामारी की रोकथाम के लिए अनेक नीतिगत फैसलों और इससे प्रभावित नागरिकों और व्यवसायों को मदद देने हेतु वित्तीय उपायों की घोषणा की है। केंद्र और राज्यों द्वारा जारी मुख्य अधिसूचनाओं के विवरण के लिए कृपया यहां देखें। इस संबंध में अगस्त 2021 में मुख्य घोषणाएं इस प्रकार हैं। 

कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए राज्य सरकारों को दिशानिर्देश जारी

Shubham Dutt (shubham@prsindia.org)

जून 2021 में गृह मामलों के मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की थी।[5]  यह दिशानिर्देश पहले 31 अगस्त 2021 तक लागू थे।5  इन दिशानिर्देशों को अब 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया है।[6] दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • प्रतिबंधों में ढिलाई के सिद्धांत: मामलों में गिरावट वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जिला स्तर पर लॉकडाउन के प्रतिबंधों में ढिलाई दे सकते हैं। दिशानिर्देशों में निम्नलिखित के आधार पर ढिलाई को लागू करने का सुझाव दिया गया है: (i) केस पॉजिटिविटी रेट (टेस्ट किए गए सैंपल्स में पॉजिटिव मामलों की संख्या) और (ii) हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे अस्पताल और आईसीयू बेड्स और ऑक्सीजन सप्लाई) की ऑक्यूपेंसी/उपलब्धता।
     
  • निरीक्षण: दिशानिर्देशों में सुझाव दिया गया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश नियमित आधार पर उन जिलों का निरीक्षण करें जहां प्रति दस लाख जनसंख्या में एक्टिव मामलों की संख्या अधिक है। इससे हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की जरूरत का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।
     
  • कोविड-19 का प्रबंधन: दिशानिर्देशों में कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए विभिन्न रणनीतियों का सुझाव दिया गया है जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पर्याप्त टेस्टिंग, (ii) योजनाबद्ध तरीके से वैक्सीनेशन जिसमें प्राथमिकता वाले समूहों के कवरेज पर खास ध्यान दिया जाए, और (iii) क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की अपग्रेडिंग को फॉलो करना। 

जायकोव-डी (ZyCoV-D) वैक्सीन के आपात उपयोग को मंजूरी मिली 

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

भारतीय ड्रग कंट्रोलर जनरल (डीजीसीआई) ने जायकोव-डी (ZyCoV-D) को आपात उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है।[7] इसे जायडस कैडिला ने बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सहयोग से विकसित किया है।7  फेज तीन के क्लिनिकल ट्रायल्स के अनुसार, लक्षण वाले आरटी-पीसीआर मामलों के लिए वैक्सीन की एफिशियंसी 66.6% है। 12 वर्ष और उससे अधिक के लोगों को इस वैक्सीन की तीन डोज़ लगाई जाएंगी।7

कोविड-19 वायरस के जीनोमिक सर्विलांस के लिए दिशानिर्देशों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में संशोधन 

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड-19 वायरस के जीनोमिक सर्विलांस पर दिशानिर्देशों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) में संशोधन किए हैं।[8] शुरुआती दिशानिर्देश दिसंबर 2020 में जारी किए गए थे।[9]  हाल के दिशानिर्देशों में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए तीन घटकीय रणनीति बनाई गई है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग, (ii) समुदाय में नियमित सर्विलांस करना, और (iii) घटना आधारित सर्विलांस। दिशानिर्देशों और सोप की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • नोडल अधिकारी: हर राज्य को राज्य, सेंटिनल साइट्स स्थलों (आरटी-पीसीआर टेस्ट लैब्स, माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पतालों को संदर्भित करता है), जीनोम सीक्वेंसिंग लेबोट्रीज़ और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के बीच गतिविधियों के समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना चाहिए। इन गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सेंटिनल लैब्स से जीनोम सीक्वेंसिंग लैब्स तक सैंपल भेजना, और (ii) राज्य में सेंटिनल लैब्स की पर्याप्त संख्या को चिन्हित करना।
     
  • त्वरित प्रतिक्रिया टीम: प्रत्येक राज्य को एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम गठित करनी होगी। यदि उनके संबंधित राज्यों में कोई म्यूटेशन पाया जाता है तो ये टीमें जांच करेंगी। जांच में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) उस मामले की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जिसमें म्यूटेशन का पता चला है, (ii) जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए व्यक्ति के परिवार के सभी सदस्यों के सैंपल जमा करना, और (iii) एनसीडीसी को दैनिक स्थिति की रिपोर्ट देना। त्वरित प्रतिक्रिया टीम में क्लिनीशियन, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और मेडिकल कॉलेज का एक सदस्य (जैसे सामुदायिक चिकित्सा विभाग) शामिल होगा।
     
  • राज्यों की समीक्षा: राज्यों को अपने अधिकार क्षेत्र में जीनोम सीक्वेंसिंग संबंधी गतिविधियों की नियमित समीक्षा करनी चाहिए। इन गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कुछ कारकों (जैसे भौगोलिक और जनसांख्यिकीय प्रतिनिधित्व) के आधार पर राज्य में पर्याप्त संख्या में सेंटिनल साइट्स की पहचान, (ii) सीक्वेंसिंग के लिए पर्याप्त सैंपल सुनिश्चित करना, और (iii) राज्य के उपलब्ध डेटा की समीक्षा (चिंताजनक वेरिएंट्स जैसे मामलों पर)।

घरेलू अंतरराज्यीय यात्रा के दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org) 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने घरेलू अंतरराज्यीय यात्रा के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए जिनमें यात्रियों, एयरलाइंस, रेलवे, जहाजों और बसों के ऑपरेटरों के लिए एडवाइजरीज़ शामिल हैं।[10] दिशानिर्देश 25 अगस्त, 2021 से लागू हुए। दिशानिर्देशों की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • राज्यों/यूटी के लिए एडवाइजरी: दिशानिर्देश हवाई, रेल, जल या सड़क मार्ग से अंतरराज्यीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाते हैं। हालांकि राज्यों को प्रवेश से पहले नेगेटिव कोविड-19 टेस्ट रिपोर्ट की शर्त लगाने की अनुमति है। इसके अतिरिक्त राज्य कोविन पोर्टल पर पूरी तरह से वैक्सीनेटेड सर्टिफिकेट मिलने पर किसी लक्षण रहित व्यक्ति को इस शर्त से छूट दे सकते हैं। बशर्ते, दूसरी डोज़ को लगे हुए 15 दिन बीत चुके हों।
     
  • हवाईअड्डों/रेलवे स्टेशनों/बस स्टेशनों को एडवाइजरी: दिशानिर्देशों में निम्नलिखित अनिवार्य किए गए हैं: (i) सभी यात्रियों की यात्रा से पहले थर्मल स्क्रीनिंग, (ii) आइसोलेशन रूम/ होल्डिंग रूम (प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ) की उपलब्धता सुनिश्चित करना, और (iii) यह सुनिश्चित करना कि मास्क, फेस शील्ड्स और ग्लव्स का निस्तारण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों के अनुरूप हो।
     
  • यात्रियों के लिए एडवाइजरी: दिशानिर्देशों में यात्रियों के लिए अनिवार्य है कि वे मास्क लगाएं, हाथ को साफ रखें और फिजिकल डिस्टेंस के नियमों का पालन करें। अगर यात्रा के दौरान या उसके बाद किसी यात्री को बुखार आता है तो उसे क्रमशः ट्रैवेल अटेंडेंट (कैबिन क्रू/टीटीई/बस कंडक्टर) या जिला तथा राज्य को जानकारी देनी होगी।

अधिसूचित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर सितंबर तक प्रतिबंध बढ़ाया गया 

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 30 सितंबर, 2021 तक अधिसूचित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध बढ़ा दिया है।[11]  यह प्रतिबंध शुरुआत में मार्च 2020 में लगाया गया था। इससे पहले यह 31 अगस्त, 2021 तक लागू था।[12]  ये प्रतिबंध कार्गो ऑपरेशंस और डीजीसीए द्वारा मंजूर उड़ानों पर लागू नहीं होंगे।

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org

पिछले वर्ष के निम्न तुलनात्मक आधार के चलते 2021-22 की पहली तिमाही में जीडीपी में 20.1% का उछाल

2021-22 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (2011-12 के स्थिर मूल्यों पर) में पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 20.1% का उछाल आया।[13]  उल्लेखनीय है कि 2021-22 की पहली तिमाही में इस उच्च वृद्धि दर की वजह पिछले वर्ष का निम्न आधार है, चूंकि 2020-21 की पहली तिमाही के दौरान जीडीपी में 24.4% का संकुचन हुआ था। 2020-21 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान जीडीपी 1.6% की दर से बढ़ी।

जीडीपी के मुख्य घटकों में निजी उपभोग (वस्तुओं और सेवाओं पर घरेलू व्यय), सरकारी खपत (वस्तुओं और सेवाओं पर सरकारी व्यय), नियत पूंजी निर्माण (निवेश पर व्यय, जैसे निर्माण, मशीनरी) और शुद्ध निर्यात (निर्यात घटा आयात) आते हैं। निजी खपत और सकल नियत पूंजी निर्माण में क्रमशः 19.3% और 55.3% की बढ़ोतरी हुई जबकि सरकारी व्यय में 4.8% का संकुचन आया। जबकि निर्यात में 39.1% की वृद्धि हुई, आयात 60.2% बढ़ गया जोकि शुद्ध निर्यात में गिरावट का संकेत है। 

सभी आर्थिक क्षेत्रों में जीडीपी की वृद्धि सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में मापी जाती है। 2021-22 की पहली तिमाही में सभी क्षेत्रों में वृद्धि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सकारात्मक थी। निर्माण क्षेत्र ने उच्चतम वृद्धि (68.3%) दर्ज की जिसके बाद मैन्यूफैक्चरिंग (49.6%) का स्थान रहा। ध्यान दें कि इन दोनों क्षेत्रों में 2020-21 की पहली तिमाही के दौरान काफी संकुचन दर्ज किया था।

तालिका 1: 2021-22 की पहली तिमाही में विभिन्न क्षेत्रों में जीवीए में वृद्धि (% में, वर्ष दर वर्ष) 

क्षेत्र

ति1
 2020
-21

ति4
 2020
-21

ति1
 2021
-22

कृषि

3.5

3.1

4.5

खनन

-17.2

-5.7

18.6

मैन्यूफैक्चरिंग

-36.0

6.9

49.6

बिजली

-9.9

9.1

14.3

निर्माण

-49.5

14.5

68.3

व्यापार

-48.1

-2.3

34.3

वित्तीय सेवा

-5.0

5.4

3.7

सार्वजनिक सेवा

-10.2

2.3

5.8

जीवीए

-22.4

3.7

18.8

जीडीपी

-24.4

1.6

20.1

नोट: जीवीए स्थिर मूल्यों पर मापी जाती है (2011-12)। 

Sources: Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्रमशः 4% और 3.35% पर अपरिवर्तनीय 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने 2021-22 का तीसरा द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया।[14]  पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) 4% की दर पर बरकरार है। एमपीसी के अन्य फैसलों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) 3.35% पर अपरिवर्तनीय है।
     
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 4.25% पर अपरिवर्तनीय है।
     
  • एमपीसी ने यह भी निर्णय लिया कि जब तक वृद्धि को पुनर्जीवित करने और सतत बनाए रखने के लिए जरूरी हो, तब तक मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखा जाए, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि मुद्रास्फीति आगे चलकर लक्ष्य के भीतर बनी रहे।

पिछले वर्ष के निम्न तुलनात्मक आधार के चलते 2021-22 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में 45% की वृद्धि

भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 2021-22 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 45% की वृद्धि दर्ज की गई।[15]  उल्लेखनीय है कि इस उच्च वृद्धि दर की वजह यह हो सकती है कि पिछले वर्ष का आधार निम्न था। चूंकि देशव्यापी लॉकडाउन के कारण 2020-21 के अप्रैल (-57%), मई (-33%) और जून (-17%) के महीनों में आईआईपी में काफी संकुचन आया था।

2021-22 की पहली तिमाही के हर महीने में खनन, मैन्यूफैक्चरिंग और बिजली उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई (वर्ष दर वर्ष)। 2020-21 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में आईआईपी में 6% की वृद्धि दर्ज की गई।

रेखाचित्र 1: 2021-22 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आईआईपी में वृद्धि   

 image

Sources:  Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

रेखाचित्र 2: 2020-21 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में नकारात्मक आईआईपी वृद्धि 

image
 Sources:  Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

वित्त 

संसद ने 2012 में रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन को अमान्य करने के लिए बिल पारित किया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

संसद ने टैक्सेशन कानून (संशोधन) बिल, 2021 को पारित किया।[16]  बिल इनकम टैक्स एक्ट, 1961 (आईटी एक्ट) और फाइनांस एक्ट, 2012 में संशोधन करता है। 2012 के एक्ट ने आईटी एक्ट में संशोधन किया था ताकि विदेशी कंपनी के शेयरों की बिक्री से अर्जित आय पर पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) आधार पर टैक्स लायबिलिटी को लागू किया जा सके (यानी 28 मई, 2012 से पहले किए गए लेनदेन पर टैक्स लायबिलिटी लागू की जा सके)। बिल टैक्सेशन के लिए पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) आधार को रद्द करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • भारत के बाहर शेयर्स की बिक्री से मिलने वाली आय पर टैक्स: आईटी एक्ट के अंतर्गत गैर निवासियों को भारत में स्थित किसी भी व्यावसायिक कनेक्शन, संपत्ति, एसेट या आय के स्रोत के जरिए या उससे होने वाली आय पर टैक्स का भुगतान करना जरूरी है। 2012 के एक्ट द्वारा किए गए संशोधनों में स्पष्ट था कि अगर कंपनी भारत के बाहर रजिस्टर्ड या निगमित है तो उसके शेयरों को हमेशा भारत में स्थित माना जाएगा, अगर वे भारत में स्थित एसेट्स से अपना काफी अधिक मूल्य प्राप्त करते हैं। परिणाम के तौर पर एक्ट के लागू होने से पहले (यानी 28 मई, 2021) विदेशी कंपनी के शेयर्स को बेचने वाले व्यक्ति भी इस बिक्री से होने वाली आय पर टैक्स देने के लिए उत्तरदायी हो गए थे।
     
  • मौजूदा बिल प्रस्ताव रखता है कि ऐसे लोगों पर टैक्स लायबिलिटी रद्द हो जाएगी, अगर वे निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते है:
    1. अगर व्यक्ति ने इस संबंध में कोई अपील या याचिका दायर की है, तो उसे वापस लेना होगा या इसे वापस लेने की अंडरटेकिंग देनी होगी,
    2. यदि व्यक्ति ने इस संबंध में किसी आर्बिट्रेशन, सुलह या मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू की है या नोटिस दिया है, तो ऐसी कार्यवाही के अंतर्गत नोटिस या दावों को वापस लेना होगा या इसे वापस लेने की अंडरटेकिंग देनी होगी,
    3. व्यक्ति को इस संबंध में किसी भी उपाय या दावे की मांग करने या उसके आग्रह करने के अधिकार को छोड़ने के लिए एक अंडरटेकिंग देनी होगी, जो अन्यथा किसी भी कानून या किसी द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत उपलब्ध हो सकता है, और
    4. अन्य शर्तें, जिन्हें निर्दिष्ट किया जा सकता है।

बिल में प्रावधान है कि अगर संबंधित व्यक्ति इन शर्तों को पूरा करता है तो माना जाएगा कि कोई एसेसमेंट या रीएससमेंट ऑर्डर कभी जारी ही नहीं किए गए थे। इसके अतिरिक्त अगर व्यक्ति इन शर्तों को पूरा करने के बाद रीफंड का पात्र होता है तो उसे बिना किसी ब्याज के वह राशि वापस कर दी जाएगी।

बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें।

संसद ने बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस के अंतरिम भुगतान की मंजूरी के लिए बिल पारित किया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

संसद में डिपॉजिट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (संशोधन) बिल, 2021 पारित किया गया।[17] बिल डिपॉजिट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन एक्ट, 1961 में संशोधन करने का प्रयास करता है। एक्ट के अंतर्गत बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बैंक डिपॉजिट्स और गारंटी क्रेडिट पर इंश्योरेंस देने हेतु कॉरपोरेशन की स्थापना की गई थी। बिल जमाकर्ताओं को समय पर उनकी बीमित जमा राशि का एक्सेस देने का प्रयास करता है, अगर उन्हें अपनी बैंक जमा को एक्सेस करने से रोका जा रहा है।

  • एक्ट के अंतर्गत कॉरपोरेशन किसी बीमित बैंक के जमाकर्ताओं को बीमित जमा राशि चुकाने के लिए उत्तरदायी है। यह उत्तरदायित्व तब उत्पन्न होता है जब बीमित बैंक निम्नलिखित स्थितियों का सामना करता है: (i) लिक्विडेशन, यानी बैंक के बंद होने पर सभी एसेट्स की बिक्री, (ii) योजना के अंतर्गत रीकंस्ट्रक्शन या कोई और व्यवस्था, या (iii) दूसरे बैंक, यानी ट्रांसफरी बैंक द्वारा विलय या अधिग्रहण। कॉरपोरेशन के जमाकर्ताओं को भुगतान करने के बाद लिक्विडेटर या बीमित या ट्रांसफरी बैंक (जैसा भी मामला हो) कॉरपोरेशन को उतनी ही राशि देने के लिए उत्तरदायी हो जाता है। 
     
  • जमाकर्ताओं को अंतरिम भुगतान: बिल कहता है कि कॉरपोरेशन अंतरिम आधार पर जमाकर्ताओं को बीमित जमा राशि चुकाने को उत्तरदायी होगा। यह उत्तरदायित्व उसी दिन से उत्पन्न हो जाएगा जब जमाकर्ताओं को अपनी बैंक जमा को एक्सेस करने से रोका जाता है। यह उत्तरदायित्व तब उत्पन्न होता है जब प्रतिबंध बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के अंतर्गत किसी आदेश या योजना के जरिए लगाए गए हैं। यह तब भी लागू होगा जब ऐसे आदेश या योजना बिल के पहले दिए या शुरू किए गए हैं लेकिन बीमित बैंक का कारोबार उसके लागू होने के समय सस्पेंडेड ही था।
     
  • अंतरिम भुगतान की समय अवधि: बिल में अनिवार्य किया गया है कि जिस तारीख को वह उत्तरदायित्व उत्पन्न होता है, उस तारीख से 90 दिनों के भीतर कॉरपोरेशन को जमाकर्ताओं को बीमित राशि चुकानी होगी। जिस तारीख को कॉरपोरेशन जमाकर्ताओं को भुगतान के लिए उत्तरदायी होती है, उसे अतिरिक्त 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है। यह विस्तार दिया जा सकता है, अगर आरबीआई को ऐसा लगता है कि बीमित बैंक के रीकंस्ट्रक्शन, प्रबंधन, विलय या अधिग्रहण की योजना को अंतिम रूप देने के लिए यह उचित है।

बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें।

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट के अंतर्गत कुछ अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करने वाला बिल संसद में पारित

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)
 
 
संसद ने लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (संशोधन) बिल, 2021 को पारित कर दिया।[18]  बिल लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट, 2008 में संशोधन करता है।[19]  एक्ट लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप्स (एलएलपी) के रेगुलेशन का प्रावधान करता है। एलएलपी परंपरागत पार्टनरशिप फर्म्स का वैकल्पिक कॉरपोरेट निकाय होती हैं। एलएलपी के अंतर्गत पार्टनरशिप की देयता कारोबार में उनके निवेश तक सीमित होती है। बिल की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • कुछ अपराधों को डीक्रिमिनलाइज (गैर आपराधिक) करना: एक्ट में एलएलपीज़ के काम करने के तरीके को निर्दिष्ट किया गया है और यह प्रावधान करता है कि इन शर्तों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जाएगा (दो हजार रुपए से लेकर पांच लाख रुपए के बीच)। इन शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एलएलपी के पार्टनर्स में बदलाव, (ii) रजिस्टर्ड कार्यालय में बदलाव, (iii) स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट और सॉल्वेंसी तथा वार्षिक रिटर्न को फाइल करना, और (iv) एलएलपी और उसके क्रेडिटर्स या पार्टनर्स के बीच समझौता और एलएलपी का रीकंस्ट्रक्शन या विलय। बिल इन प्रावधानों को अपराध से मुक्त करता है और इन पर मौद्रिक जुर्माना लगाता है।
     
  • धोखाधड़ी की सजा: एक्ट के अंतर्गत अगर एक एलएलपी या उसके पार्टनर्स अपने क्रेडिटर्स को धोखा देने के लिए या धोखाधड़ी के किसी अन्य उद्देश्य से कोई कार्य करती है तो जानबूझकर ऐसा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को दो साल तक की कैद होगी और 50,000 रुपए से लेकर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा। बिल कैद की अधिकतम सजा को दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करता है।
     
  • छोटी एलएलपी: बिल में छोटे एलएलपी के गठन का प्रावधान है, जहां (i) पार्टनर्स का योगदान 25 लाख रुपए तक है (इसे पांच करोड़ रुपए तक बढ़ाया जा सकता है), (ii) पिछले वित्तीय वर्ष का टर्नओवर 40 लाख रुपए तक है (इसे 50 करोड़ रुपए तक बढ़ाया जा सकता है)। केंद्र सरकार कुछ एलएलपीज़ को स्टार्ट-अप एलपीज़ के तौर पर अधिसूचित भी कर सकती है।

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जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (राष्ट्रीयकरण) संशोधन बिल, 2021 संसद में पारित

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

संसद ने जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (राष्ट्रीयकरण) संशोधन बिल, 2021 को पारित कर दिया।[20]  बिल जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (राष्ट्रीयकरण) एक्ट, 1972 में संशोधन करता है।[21]  भारत में जनरल इंश्योरेंस बिजनेस करने वाली सभी निजी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करने के लिए इस कानून को लागू किया गया था। बिल इस कानून के अंतर्गत रेगुलेट होने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सरकार की शेयरहोल्डिंग की सीमा: एक्ट में अपेक्षित है कि निम्नलिखित बीमा कंपनियों (i) जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन, (ii) नेशनल इंश्योरेंस, (iii) न्यू इंडिया इंश्योरेंस, (iv) ओरिएंटल इंश्योरेंस और (v) युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस में केंद्र सरकार की शेयरहोल्डिंग की सीमा कम से कम 51% होनी चाहिए। बिल इस प्रावधान को हटाता है।
     
  • जनरल इंश्योरेंस बिजनेस की परिभाषा में परिवर्तन: एक्ट में जनरल इंश्योरेंस बिजनेस की परिभाषा के दायरे में आग, मैरीन या विविध इंश्योरेंस बिजनेस शामिल हैं। लेकिन इसमें कैपिटल रिडेम्पशन और एन्युटी सर्टेन बिजनेस शामिल नहीं। कैपिटल रिडेम्पशन में लाभार्थी समय-समय पर प्रीमियम का भुगतान करता है और उसके बाद बीमाकर्ता एक विशिष्ट तिथि पर राशि का भुगतान करता है। एन्युटी सर्टेन इंश्योरेंस के अंतर्गत बीमाकर्ता लाभार्थी को एक निश्चित अवधि में भुगतान करता है। बिल इस परिभाषा को हटाता है और इसके बजाय बीमा एक्ट, 1938 में दी गई परिभाषा को संदर्भित करता है। बीमा एक्ट के अंतर्गत कैपिटल रिडेम्पशन और एन्युटी सर्टेन जनरल इंश्योरेंस बिजनेस में शामिल हैं।

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संसद ने प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रदान करने वाले बिल को पारित किया

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

संसद ने इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) बिल, 2021 को पारित कर दिया।[22]  यह बिल इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 में संशोधन करता है जो कॉरपोरेट देनदारों की इनसॉल्वेंसी को हल करने के लिए एक समयबद्ध प्रक्रिया (330 दिनों में) प्रदान करती है जिसे कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया (सीआईआरपी) कहते हैं।[23] बिल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईज़) के लिए वैकल्पिक इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया को पेश करता है जिसे प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया (पीआईआरपी) कहा गया है। यह अप्रैल 2021 में जारी किए गए एक अध्यादेश का स्थान लेता है।[24] बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • देनदारों द्वारा पीआईआरपी की शुरुआत: जबकि सीआईआरपी को लेनदार या देनदार दोनों शुरू कर सकते हैं, पीआईआरपी केवल देनदारों के जरिए ही शुरू की जा सकती है। पीआईआरपी के आवेदन के लिए देनदारों को कम से कम 66% फाइनांशियल क्रेडिटर्स (क्रेडिटर्स पर बकाया ऋण के मूल्य में) की मंजूरी लेनी होगी। अपने वित्तीय लेनदारों से मंजूरी प्राप्त करने से पहले देनदार के पास एक बेस रेज़ोल्यूशन प्लान होना चाहिए। पीआईआरपी के दौरान कंपनी का प्रबंधन देनदारों के पास होगा।
     
  • डीफॉल्ट की न्यूनतम राशि: कम से कम एक लाख रुपए का डीफॉल्ट होने की स्थिति में पीआईआरपी शुरू करने के लिए आवेदन किया जा सकता है। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए डीफॉल्ट की न्यूनतम राशि को बढ़ाकर एक करोड़ रुपए तक कर सकती है।
     
  • पीआईआरपी के अंतर्गत कार्रवाई: देनदार को पीआईआरपी के शुरू होने के दो दिनों के भीतर आरपी को बेस रेज़ोल्यूशन प्लान देना होगा। पीआईआरपी के शुरू होने के सात दिनों के भीतर क्रेडिटर्स की कमिटी बनाई जाएगी जोकि बेस रेज़ोल्यूशन प्लान पर विचार करेगी। कमिटी देनदार को यह मौका दे सकती है कि वह इस योजना में संशोधन करे। आरपी दूसरे लोगों से भी रेज़ोल्यूशन प्लान्स मांग सकता है। निम्नलिखित स्थितियों में वैकल्पिक रेज़ोल्यूशन प्लान मांगे जा सकते हैः (i) अगर कमिटी बेस प्लान को मंजूरी नहीं देती, या (ii) वह ऑपरेशनल क्रेडिटर्स (वस्तुओं और सेवाओं के प्रावधान से संबंधित दावे) के ऋण को चुकाने में सक्षम नहीं।
     
  • रेज़ोल्यूशन प्लान को कमिटी द्वारा कम से कम 66% वोटिंग शेयर से मंजूर होना चाहिए। इस प्लान को पीआईआरपी की शुरुआत से 90 दिनों के भीतर कमिटी द्वारा मंजूर किया जाना चाहिए। कमिटी द्वारा मंजूर रेज़ोल्यूशन प्लान की जांच राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल करेगा। अगर कमिटी ने किसी रेज़ोल्यूशन प्लान को मंजूर नहीं किया तो आरपी पीआईआरपी को खत्म करने के लिए आवेदन कर सकता है। अथॉरिटी को प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर या तो प्लान को मंजूरी देनी होगी या पीआईआरपी को समाप्त करने का आदेश देना होगा। पीआईआरपी के समाप्त होने के बाद कॉरपोरेट देनदार का लिक्विडेशन हो जाएगा।

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आईबीसी के कार्यान्वयन पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट सौंपी गई

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

वित्त संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: जयंत सिन्हा) ने ‘इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (आईबीसी) का कार्यान्वयन- कठिनाइयां और समाधान’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[25]  आईबीसी को 2016 में लागू किया गया था और वह कॉरपोरेट देनदारों के इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन के लिए समयबद्ध प्रक्रिया का प्रावधान करती है।[26] कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्न शामिल हैं: 

  • आईबीसी को लागू करना भूमिका: कमिटी ने कहा कि आईबीसी के लागू होने के बाद से 2017 से 2020 के बीच इनसॉल्वेंसी को हल करने में लगने वाला औसत समय 4.3 वर्ष से कम होकर 1.6 वर्ष हो गया है। कमिटी ने गौर किया कि रिकवरी की निम्न दरों और रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया में विलंब से पता चलता है कि संहिता अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई है। जैसे रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया के दौरान 95% से अधिक हेयकट्स (जितना लोन क्रेडिटर्स रिकवर नहीं कर पाए) देखे गए। कमिटी ने सुझाव दिया कि क्रेडिटर्स के अधिकारों को सशक्त किए जाएं और वैश्विक मानदंडों की तुलना में हेयरकट्स की एक सीमा निर्धारित की जाए।
     
  • राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में विलंब: कमिटी ने कहा कि एनसीएलटी में आईबीसी के 13,170 मामले, जिसमें नौ लाख करोड़ रुपए फंसे हुए हैं, लंबित हैं। 71% मामले तो 180 दिनों से लंबित हैं। इस समस्या को हल करने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) आईबीसी से संबंधित मामलों के लिए डेडिकेटेड बेंच बनाई जाएं, (ii) डीफॉल्टर्स के आवेदनों को फाइलिंग के 30 दिनों के अंदर मंजूर किया जाए और और कंपनी के नियंत्रण को रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया को हस्तांतरित किया जाए, और (iii) एनसीएलटी में रिक्त पदों को भरा जाए।
     
  • सभी के लिए पीआईआरपी: कमिटी ने सुझाव दिया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उद्यमों (एमएसएमईज़) के लिए शुरू की गई प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया (पीआईआरपी) का लाभ कॉरपोरेट्स को भी दिया जाए और इसके लिए उपयुक्त समीक्षा की जाए। पीआईआरपी सिर्फ देनदारों द्वारा शुरू की जा सकती है, वह भी असंबंधित वित्तीय लेनदारों की पूर्व मंजूरी के साथ। सीआईआरपी से अलग पीआईआरपी के दौरान देनदार कंपनी का प्रबंधन जारी रख सकता है।
     
  • एमएसएमईज़: कमिटी ने कहा कि एमएसएमईज़ पर कोविड-19 महामारी का नकारात्मक असर हुआ था। कमिटी ने गौर किया कि मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत उन्हें ऑपरेशनल क्रेडिटर्स माना जाता है और सिक्योर्ड क्रेडिटर्स के बाद उनके दावों पर विचार किया जाता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए एमएसएमईज़ के लिए अतिरिक्त संरक्षण की व्यवस्था की जाए।

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राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन की शुरुआत

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

नीति आयोग ने केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के एसेट्स के मुद्रीकरण के लिए एक योजना जारी की है जिसका नाम है, राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी)।[27] एसेट मुद्रीकरण में निजी संस्थाओं को एक अग्रिम या आवर्ती भुगतान पर एक सीमित अवधि के लिए सरकारी स्वामित्व वाले एसेट्स का लाइसेंस या लीज दी जाती है। कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के बाद सरकार को वह एसेट लौटा दिया जाता है। एसेट्स पर सार्वजनिक क्षेत्र का स्वामित्व जारी रहता है। 

पाइपलाइन में 2021-22 और 2024-25 के बीच लगभग छह लाख करोड़ रुपए की कुल मुद्रीकरण क्षमता का अनुमान लगाया गया है। 2021-22 में 0.88 लाख करोड़ रुपए के सांकेतिक मूल्य वाले एसेट्स का 15% मुद्रीकरण किया जाना है। योजना के मुख्य विवरण में शामिल हैं:

क्षेत्र: एनएमपी के अंतर्गत सड़क, रेलवे, बिजली और दूरसंचार जैसे विभिन्न क्षेत्रों के एसेट्स आते हैं। इस सूची में केंद्र सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की केवल ब्राउनफील्ड (मौजूदा) इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स शामिल हैं। राज्य सरकारों के एसेट्स का मिलान वर्तमान में चल रहा है, और इसे नियत समय में एनएमपी में शामिल करने की परिकल्पना की गई है।

तालिका 2: क्षेत्रवार मुद्रीकरण पाइपलाइन (करोड़ रु.में) 

क्षेत्र

मुद्रीकरण का मूल्य

% हिस्सा

सड़क

1,60,200

26.8

रेलवे

1,52,496

25.5

बिजली ट्रांसमिशन

45,200

7.6

बिजली उत्पादन

39,832

6.7

दूरसंचार

35,100

5.9

वेयरहाउसिंग एसेट्स

28,900

4.8

खनन

28,748

4.8

प्राकृतिक गैस पाइपलाइन

24,462

4.1

पेट्रोलियम पाइपलाइन

22,504

3.8

उड्डयन

20,782

3.5

शहरी रियल एस्टेट

15,000

2.5

बंदरगाह

12,829

2.2

स्टेडियम

11,450

1.9

कुल

5,97,503

 

Source: NITI Aayog; PRS.

मुद्रीकरण के मॉडल्स: एनएमपी एसेट मुद्रीकरण के कई मॉडल्स की अनुमति देगा जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) प्रत्यक्ष कॉन्ट्रैक्चुअल दृष्टिकोण जिसमें एक सार्वजनिक इकाई और चिन्हित निजी डेवलपर/निवेशक (सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल शामिल हैं) के बीच रियायत/कॉन्ट्रैक्ट शामिल है, और (ii) पूंजी बाजार या निवेशकों के एक पूल के जरिए लंबी अवधि के फंड जनरेशन के लिए स्ट्रक्चर्ड वित्तपोषण मॉडल (इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट शामिल हैं)।

ड्राफ्ट विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर ऋण लिखत- विदेशी निवेश) नियम, 2021 जारी

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन एक्ट, 1999 के अंतर्गत ड्राफ्ट विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर ऋण लिखत- विदेशी निवेश) नियम, 2021 और ड्राफ्ट विदेशी मुद्रा प्रबंधन (विदेशी निवेश) रेगुलेशन, 2021 को जारी किया।[28],[29] ड्राफ्ट नियम और रेगुलेशंस भारतीय निवासियों द्वारा भारत के बाहर अचल संपत्तियों के निवेश और अधिग्रहण के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को उदार बनाना चाहते हैं। वर्तमान में, इन पहलुओं को विदेशी मुद्रा प्रबंधन (किसी विदेशी सिक्योरिटी का हस्तांतरण या उसे जारी करना) रेगुलेशन, 2004 और विदेशी मुद्रा प्रबंधन (भारत के बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और हस्तांतरण) रेगुलेशन 2015 द्वारा नियंत्रित किया जाता है।[30],[31] ड्राफ्ट नियमों और रेगुलेशंस में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एप्लिकेबिलिटी: ड्राफ्ट नियम और रेगुलेशन भारत में रहने वाले किसी व्यक्ति द्वारा वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि (बोनाफाइड बिजनेस एक्टिविटी) में संलग्न किसी विदेशी संस्था में सीधे या स्टेप-डाउन सहायक के माध्यम से किए गए किसी भी निवेश पर लागू होंगे। वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि में वे शामिल हैं जो भारत और मेजबान देश दोनों में कानूनी रूप से स्वीकार्य हैं। आरबीआई ऐसे विदेशी निवेश के कारण एक वित्तीय वर्ष के दौरान कुल एग्रीगेट आउटफ्लो के लिए एक सीमा तय कर सकता है। यह एक सीमा भी तय कर सकता है जिसके आगे किसी वित्तीय वर्ष में किसी भारतीय इकाई द्वारा वित्तीय प्रतिबद्धता की राशि के लिए पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता होगी।
     
  • सीमित क्षेत्र: 2004 के रेगुलेशंस के अंतर्गत कोई भी भारतीय संस्था रियल एस्टेट व्यवसाय या बैंकिंग व्यवसाय में लगी विदेशी इकाई में कोई प्रत्यक्ष निवेश नहीं कर सकती है। ड्राफ्ट नियम बैंकिंग व्यवसाय को बाहर करने के लिए इस सूची को संशोधित करते हैं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में पेश किए गए उत्पादों को छोड़कर, गैंबलिंग और भारतीय रुपए से जुड़े वित्तीय उत्पादों को इसमें शामिल करते हैं।
     
  • अचल संपत्ति का अधिग्रहण: 2015 के रेगुलेशंस में भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण कर सकता है, जोकि निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है: (i) उपहार, (ii) वारिस, (iii) निवासी विदेशी मुद्रा खाते में विदेशी मुद्रा का परचेज आउट, या (iv) किसी संबंधी के साथ संयुक्त रूप से, जोकि भारत के बाहर रहता हो, बशर्ते   भारत के फंड्स का कोई आउटफ्लो न हो। ड्राफ्ट रेगुलशन भारत के निवासियों को इस बात की अनुमति भी देते हैं कि वे लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के अंतर्गत भेजी गई रकम से खरीद के जरिए भारत से बाहर के निवासी से ऐसे एसेट प्राप्त कर सकते हैं। योजना के अंतर्गत सभी निवासी व्यक्तियों, नाबालिग सहित, को किसी भी अनुमत चालू या पूंजी खाता लेनदेन या दोनों के संयोजन के लिए एक वित्तीय वर्ष में 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक मुक्त रूप से भेजने की अनुमति है। ऐसी संपत्ति को एसेट्स की बिक्री से प्राप्त आय से खरीदा जा सकता है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने ई-रूपी (e-RUPI) लॉन्च किया 

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए वाउचर आधारित भुगतान प्रणाली ई-रूपी (e-RUPI) लॉन्च की।[32]  यह प्री-पेड डिजिटल वाउचर के तौर पर काम करेगा जिसे लाभार्थी एक्सेस कर सकता है, या मैसेज या क्यूआर कोड के रूप में अपने फोन पर हासिल कर सकता है। इस वाउचर को किसी भी सेंटर पर रिडीम किया जा सकता है जो उसे स्वीकार करता हो। ई-रूपी के लिए लाभार्थी का बैंक खाता होना जरूरी नहीं है। वाउचर को एक्सेस करने के लिए लाभार्थी के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट कनेक्शन होना भी जरूरी नहीं है। 

आरबीआई ने वित्तीय समावेश सूचकांक जारी किया

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में वित्तीय समावेश की सीमा का पता लगाने के लिए वित्तीय समावेश सूचकांक (एफआईआई) को पेश किया।[33]  एफआईआई में बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक और पेंशन क्षेत्र के विवरण शामिल हैं। यह 0 और 100 के बीच के एकल मान में वित्तीय समावेशन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्राप्त करता है, जहां 0 पूर्ण वित्तीय बहिष्करण का प्रतिनिधित्व करता है और 100 पूर्ण वित्तीय समावेशन को दर्शाता है। सूचकांक में तीन व्यापक मानदंड शामिल हैं: (i) एक्सेस (35% भार), (ii) उपयोग (45%), और (iii) गुणवत्ता (20%)। एफआईआई का निर्माण किसी आधार वर्ष के बिना किया गया है। मार्च 2017 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए वार्षिक एफआईआई 43.4 था, जबकि मार्च 2021 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए यह 53.9 है। एफआईआई हर साल जुलाई में प्रकाशित किया जाएगा।

शहरी सहकारी बैंकों पर टिप्पणियां आमंत्रित

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों (यूएसबीज़) पर एक्सपर्ट कमिटी (चेयर: एन.एस.विश्वनाथन) की रिपोर्ट को सार्वजनिक टिप्पणियां के लिए जारी किया है।[34]  कमिटी ने यूएसबीज़ के कामकाज, रेगुलेशन और निरीक्षण के लिए सुझाव दिए हैं। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • यूएसबीज़ की श्रेणियां: कमिटी ने कहा कि क्षेत्र की विविधता को देखते हुए एक स्तरीय रेगुलेटरी ढांचे की जरूरत है। उसने यूसीबी को चार स्तरों में वर्गीकृत करने का सुझाव दिया: (i) पहले स्तर में सभी यूनिट यूसीबी, वेतनभोगी यूसीबी (डिपॉजिट साइज पर ध्यान दिए बिना) और 100 करोड़ रुपए तक की जमा वाले अन्य यूसीबी, (ii) दूसरे स्तर में 100 करोड़ रुपए से 1,000 करोड़ रुपए के बीच की जमा वाले यूसीबी शामिल होंगे, (iii) तीसरे स्तर में 1,000 करोड़ रुपए से 10,000 करोड़ रुपए के बीच की जमा वाले यूसीबी शामिल होंगे, और (iv) चौथे स्तर में 10,000 करोड़ रुपए से अधिक की जमा वाले यूसीबी शामिल होंगे।
     
  • अंब्रेला संगठन (यूओ): यूओ संघबद्ध सहकारी समितियों की एक प्रस्तावित शीर्ष संस्था है। जून 2019 में, आरबीआई ने नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड को जमा न लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में एक यूओ स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। यूओ अपने सदस्यों को मानव संसाधन, सूचना प्रौद्योगिकी और वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। यह ट्रेजरी और विदेशी मुद्रा से संबंधित मूल्य वर्धित सेवाएं भी प्रदान करेगा। यूओ में शेयर खरीदकर यूसीबी सदस्य बन सकते हैं। कमिटी ने 300 करोड़ रुपए की न्यूनतम पूंजी के साथ शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक अंब्रेला संगठन (यूओ) स्थापित करने का सुझाव दिया।
     
  • सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क (एसएएफ): एसएएफ में यूसीबी द्वारा सुधारात्मक कार्रवाई शुरू करना और/या आरबीआई द्वारा एसेट क्वालिटी, लाभप्रदता और कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट रेशो (सीआरएआर) से संबंधित वित्तीय सीमाओं के उल्लंघन पर सुपरवाइजरी कार्रवाई शामिल है। कमिटी ने सुझाव दिया कि एसएएफ को केवल एसेट क्वालिटी (नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट रेशियो) और सीआरएआर पर विचार करना चाहिए। एसएएफ का उद्देश्य किसी बैंक के वित्तीय स्ट्रेस के लिए समयबद्ध उपाय खोजना होना चाहिए।

रिपोर्ट पर 30 सितंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।   

सेबी ने प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा की

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (पूंजी जारी करना और प्रकटीकरण की शर्तें) रेगुलेशन, 2018 के अंतर्गत प्रमोटर, प्रमोटर समूह और समूह कंपनियों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा की।[35],[36]  मुख्य परिवर्तन इस प्रकार हैं:

  • प्रमोटर: सेबी ने गौर किया कि हाल के वर्षों में विविध शेयरधारिता और पेशेवर प्रबंधन वाले कई व्यवसाय सूचीबद्ध हो रहे हैं। ऐसे कई व्यवसाय गैर-पारिवारिक स्वामित्व वाले हैं और/या उनके पास एक विशिष्ट पहचान योग्य प्रमोटर समूह नहीं है। 2018 के रेगुलेशन प्रमोटर को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करते हैं: (i) जिसे ऑफर डॉक्यूमेंट में या इश्यूअर की वार्षिक रिटर्न (सिक्योरिटी जारी करने वाली कंपनी) में इस तरह नामित किया गया है, (ii) जिसका इश्यूअर पर नियंत्रण है (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से), या (iii) इश्यूअर के निदेशक मंडल जिनकी सलाह या निर्देशों पर कार्य करने का आदी है। सेबी ने प्रमोटर की अवधारणा को बदलकर 'नियंत्रक व्यक्ति' (पर्सन इन कंट्रोल) या 'शेयरधारकों को नियंत्रित करना' (कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर्स) को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है।
     
  • प्रमोटर्स की शेयरहोल्डिंग का ‘लॉक-इन’: 2018 के फ्रेमवर्क के अंतर्गत, प्रमोटरों के न्यूनतम 20% योगदान को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तारीख या प्रारंभिक पब्लिक ऑफर (आईपीओ) में आबंटन की तारीख से तीन साल के लिए लॉक-इन कर दिया जाता है (इनमें से जो भी बाद में हो)। यह आईपीओ/भविष्य में इश्यू से संबंधित पब्लिक ऑफर में आबंटन की तारीख से 18 महीने तक कम हो जाएगा जिसमें शामिल हैं: (i) केवल बिक्री के लिए एक ऑफर (प्रमोटरों द्वारा अपनी शेयरधारिता को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है), (ii) पूंजीगत व्यय को छोड़कर धन जुटाने के मामले में, या (iii) पूंजीगत व्यय के अलावा अन्य मामलों के लिए बिक्री के नए इश्यू और ऑफर, दोनों। इन मामलों में न्यूनतम प्रमोटर योगदान से अधिक प्रमोटर की हिस्सेदारी एक वर्ष की मौजूदा अवधि के बजाय छह महीने की अवधि के लिए लॉक-इन होगी।
     
  • अन्य लोगों के लिए लॉक-इन: 2018 के फ्रेमवर्क के अंतर्गत प्रमोटर्स के अतिरिक्त दूसरे लोगों की पूंजी आईपीओ आबंटन की तारीख से एक वर्ष के लिए लॉक्ड होती है। यह लॉक-इन अवधि छह महीने हो जाएगी। 

रक्षा

संसद ने आवश्यक रक्षा सेवाओं में हड़ताल, तालाबंदी और कर्मचारियों की छंटनी पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पारित किया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

आवश्यक रक्षा सेवा बिल, 2021 को संसद में पारित किया गया।[37]  बिल जून 2021 में जारी अध्यादेश का स्थान लेता है।[38]  बिल केंद्र सरकार को आवश्यक रक्षा सेवाओं में संलग्न इकाइयों में हड़ताल, तालाबंदी और छंटनी पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आवश्यक रक्षा सेवा: आवश्यक रक्षा सेवाओं में निम्नलिखित में संचालित होने वाली कोई भी सेवा शामिल है: (i) रक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए जरूरी वस्तुओं या उपकरणों का निर्माण करने वाला कोई इस्टैबलिशमेंट या उपक्रम, या (ii) सशस्त्र बलों या उसने जुड़ा हुआ कोई इस्टैबलिशमेंट या रक्षा संबंधी कोई इस्टैबलिशमेंट। इनमें ऐसी सेवाएं भी शामिल हैं, जो अगर रुक जाएं तो ऐसी सेवाओं से संलग्न इस्टैबलिशमेंट या उनके कर्मचारियों की सुरक्षा पर असर होगा। इसके अतिरिक्त सरकार किसी सेवा को आवश्यक रक्षा सेवा घोषित कर सकती है, अगर उसके बंद होने से निम्नलिखित प्रभावित हों: (i) रक्षा उपकरण या वस्तुओं का निर्माण, (ii) ऐसा निर्माण करने वाले औद्योगिक इस्टैबलिशमेंट्स या इकाइयों का संचालन या रखरखाव, या (iii) रक्षा से जुड़े उत्पादों की मरम्मत या रखरखाव।
     
  • हड़तालें: बिल के अंतर्गत हड़ताल का अर्थ है, एक साथ काम करने वाले लोगों के संगठन का काम बंद करना। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सामूहिक रूप से कैजुअल लीव लेना, (ii) लोगों का काम जारी रखने या रोजगार मंजूर करने से एक साथ इनकार करना (ऐसे लोगों की संख्या कुछ भी हो सकती है), (iii) उस काम में ओवरटाइम करने से इनकार करना, जो आवश्यक रक्षा सेवाओं के रखरखाव के लिए जरूरी है, और (iv) ऐसा कोई आचरण जिससे आवश्यक रक्षा सेवाओं में रुकावट आती है, या आने की आशंका है।
     
  • हड़तालों, तालाबंदी और छंटनी पर प्रतिबंध: बिल के अंतर्गत केंद्र सरकार आवश्यक रक्षा सेवाओं से जुड़ी इकाइयों में हड़तालों, तालाबंदी और छंटनियों पर प्रतिबंध लगा सकती है। सरकार निम्नलिखित के हित के लिए जरूरी होने पर ऐसे आदेश दे सकती है: (i) भारत की संप्रभुता और एकता, (ii) किसी राज्य की सुरक्षा, (iii) सार्वजनिक व्यवस्था, (iv) जनता, (v) शालीनता, या (vi) नैतिकता। प्रतिबंध के आदेश छह महीने तक लागू रहेंगे और छह महीने के लिए और बढ़ाए जा सकते हैं। बिजली की कमी या प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाली छंटनी या अस्थायी या कैजुअल कर्मचारियों की छंटनी पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
     
  • प्रतिबंध का आदेश जारी होने के बाद या उसके पहले शुरू की गई हड़ताल और तालाबंदी अवैध होगी। प्रतिबंध के आदेश के बाद छंटनी करना गैर कानूनी होगा।

बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें।

 

विधि और न्याय

संसद ने कुछ अपीलीय निकायों को समाप्त करने और उनके कामकाज को मौजूदा न्यायिक निकायों में हस्तांतरित करने वाला बिल पारित किया

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

ट्रिब्यूनल्स सुधार बिल, 2021 को संसद में पारित किया गया।[39]  बिल ट्रिब्यूनल्स को भंग करने और उनके कार्यों (जैसे अपीलों पर न्यायिक निर्णय लेना) को दूसरे मौजूदा न्यायिक निकायों में ट्रांसफर करने का प्रयास करता है। जिन अपीलीय निकायों को भंग किया गया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के अंतर्गत अपीलीय ट्रिब्यूनल, (ii) ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999, कॉपीराइट एक्ट, 1957 और पेटेंट्स एक्ट, 1970 के अंतर्गत अपीलीय बोर्ड्स, और (iii) एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया एक्ट, 1994 के अंतर्गत एयरपोर्ट अपीलीय ट्रिब्यूनल।

बिल अप्रैल 2021 में जारी एक अध्यादेश का स्थान लेता है।[40]  जुलाई 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने अध्यादेश के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था।[41]  बिल अदालत के फैसले के अनुरूप नहीं है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • फाइनांस एक्ट 2017 में संशोधन: 2017 का फाइनांस एक्ट क्षेत्रों के आधार पर ट्रिब्यूनल्स का विलय करता है।[42]  यह केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह निम्नलिखित के संबंध में नियमों को अधिसूचित करे: (i) सर्च-कम-सिलेक्शन कमिटीज़ का संयोजन, (ii) ट्रिब्यूनल के सदस्यों की क्वालिफिकेशन, और (iii) उनकी सेवा की अवधि और शर्तें (जैसे उन्हें हटाना और वेतन)।39 बिल फाइनांस एक्ट से इन प्रावधानों को हटाता है। सिलेक्शन कमिटीज़ के संयोजन और कार्यकाल संबंधी प्रावधान बिल में शामिल किए गए हैं। केंद्र सरकार सदस्यों की क्वालिफिकेशन और सेवा के अन्य नियमों और शर्तों को अधिसूचित करेगी।39  
     
  • सर्च-कम-सिलेक्शन कमिटी: केंद्रीय और राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल्स में अलग से सर्च-कम-सिलेक्शन कमिटीज़ होंगी। टाई होने पर इन कमिटीज़ के चेयरमैन का सेकेंड कास्टिंग वोट होगा। 
     
  • पात्रता और कार्यकाल: बिल चार वर्ष के कार्यकाल का प्रावधान करता है (जोकि चेयरपर्सन के लिए 70 वर्ष की अधिकतम आयु और सदस्यों के लिए 67 वर्ष की अधिकतम आयु के अधीन होगा)।39 इसके अतिरिक्त यह चेयरपर्सन या सदस्य की नियुक्ति के लिए 50 वर्ष की न्यूनतम आयु की शर्त को निर्दिष्ट करता है। जुलाई 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने चार वर्ष के कार्यकाल को निर्दिष्ट करने वाले, और सदस्यों की नियुक्ति के लिए 50 वर्ष की न्यूनतम आयु की शर्त वाले प्रावधान को निरस्त कर दिया था।41

2021 के अध्यादेश पर पीआरएस के विश्लेषण के लिए कृपया देखें।

 

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

संसद में संविधान (127वां संशोधन) बिल, 2021 पारित

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org)

संसद ने संविधान (एक सौ सत्ताइसवां संशोधन) बिल, 2021 को पारित कर दिया। बिल संविधान में संशोधन करता है और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को इस बात की अनुमति देता है कि वे सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी सूची खुद बना सकते हैं। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक्ट, 1993 के अंतर्गत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की स्थापना की गई थी। संविधान (एक सौ दूसरा संशोधन) एक्ट, 2018 ने एनसीबीसी को संवैधानिक दर्जा दिया है और राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया है कि वह सभी उद्देश्यों के लिए किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची को अधिसूचित करेंगे। 2021 का बिल इसमें संशोधन करता है और प्रावधान करता है कि राष्ट्रपति सिर्फ केंद्र सरकार के उद्देश्य के लिए सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची को अधिसूचित कर सकते हैं। केंद्र सरकार इस केंद्रीय सूची को तैयार करेगी और उसका रखरखाव करेगी। इसके अतिरिक्त बिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अधिकार देता है कि वे सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी अपनी सूची बनाएं। यह सूची कानून के द्वारा बनाई जाएगी और यह केंद्रीय सूची से अलग हो सकती है।
     
  • एनसीबीसी से सलाह: संविधान का अनुच्छेद 338बी केंद्र और राज्य सरकारों के लिए अनिवार्य करता है कि वे सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत मामलों पर एनसीबीसी से सलाह करेंगी। बिल सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची तैयार करने से संबंधित मामलों में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को इस शर्त से छूट देता है।

बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें। 

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, (संशोधन) बिल, 2021 पारित

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) बिल, 2021 संसद में पारित कर दिया गया।[43] बिल संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में संशोधन करता है।[44]

संविधान में राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसूचित जनजातियों (एसटीज़) को निर्दिष्ट कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त वह संसद को एसटी को अधिसूचित करने के लिए इस सूची में परिवर्तन करने की अनुमति देता है। बिल अरुणाचल प्रदेश राज्य द्वारा प्रस्तावित परिवर्तनों को प्रभावी बनाता है।

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विकलांग व्यक्ति अधिकार एक्ट, 2016 के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट जारी

Shubham Dutt (shubham@prsindia.org)

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: रमा देवी) ने ‘विकलांग व्यक्ति अधिकार एक्ट, 2016 के कार्यान्वयन के लिए योजना (सिपडा) का मूल्यांकन’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[45] सिपडा एक अंब्रेला योजना है जोकि केंद्र सरकार द्वारा कार्यान्वित और पूर्ण वित्त पोषित है। यह विकलांग व्यक्ति अधिकार एक्ट, 2016 के विभिन्न घटकों को लागू करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अवरोध मुक्त परिवेश का निर्माण, (ii) सुगम्य भारत अभियान, और (iii) जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • सिपडा के लिए धनराशि का आबंटन: कमिटी ने कहा कि 2016-17 और 2021-22 के दौरान सिपडा के अंतर्गत उप-योजनाओं की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है (छह से 13)। हालांकि इस अवधि में सिपडा के बजटीय आबंटन में सिर्फ करीब 9% की वृद्धि हुई है।
     
  • इसके अतिरिक्त कमिटी ने कहा कि सिपडा को साल में सिर्फ एक बार धनराशि आबंटित की जाती है जिसे अपेक्षित मांग के आधार पर विभिन्न उप-योजनाओं में बांटा जाता है। अगर किसी उप-योजना को कम वित्त पोषण प्रस्ताव मिलते हैं तो उसकी अप्रयुक्त धनराशि को अधिक प्रस्ताव वाली अन्य उप-योजनाओं में ट्रांसफर कर दिया जाता है। एक उप-योजना से दूसरी में धनराशि को ट्रांसफर करने से सिपडा का उद्देश्य कमजोर हो सकता है। सिपडा के अंतर्गत ही सभी उप-योजनाएं विकलांग व्यक्तियों को सशक्त करने में विशिष्ट भूमिका निभाती हैं। इसलिए कमिटी ने विकलांग व्यक्ति सशक्तीकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) से सिफारिश की कि वह सिपडा के लिए एकल आबंटन बनाम उसके अंतर्गत प्रत्येक उप-योजना के लिए अलग से आबंटन के फैसले पर विचार करे।
     
  • विकलांग व्यक्तियों के लिए अवरोध मुक्त परिवेश: अवरोध मुक्त परिवेश का निर्माण उप-योजना विकलांग व्यक्तियों के लिए इंफास्ट्रक्चर तक पहुंच को आसान करने का प्रयास करती है। कमिटी ने कहा कि 2017-18 से सिर्फ 11 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों ने इस योजना के अंतर्गत अनुदान के लिए आवेदन और उसे प्राप्त किया है। कमिटी ने इस संबंध में निम्नलिखित सुझाव दिए हैं: (i) राज्यों द्वारा लंबित प्रस्तावों में तेजी लाना, और (iii) इस उप-योजना के दायरे को दूसरे राज्यों तक बढ़ाना। 
     
  • सुगम्य भारत अभियान: इस अभियान का उद्देश्य कुछ पूर्व चिन्हित इमारतों और स्थानों (जैसे हवाईअड्डे और रेलवे स्टेशन) तक विकलांग व्यक्तियों की सार्वभौमिक पहुंच को सुनिश्चित करना है। कमिटी ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत दिसंबर 2015 में हुई थी। इसके बाद इसके लक्ष्य को जुलाई 2016 से बढ़ाकर जून 2022 कर दिया गया। लेकिन इस अभियान के अंतर्गत चिन्हित 30% इमारतों और 65% वेबसाइट्स को ही विकलांग व्यक्तियों के लिए सुगम बनाया गया है। उसने सुझाव दिया कि बिना किसी और विस्तार के, समय सीमा का पालन किया जाना चाहिए और अगर समय सीमा पूरी नहीं होती तो एक्ट के अंतर्गत सजा दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें। 

विकलांग व्यक्ति अधिकार एक्ट के अंतर्गत कुछ विकलांगताओं की सीमा का आकलन करने के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय ने विकलांग व्यक्ति अधिकार एक्ट, 2016 के अंतर्गत विकलांगताओं की सीमा का आकलन करने के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन किए।[46]  इससे पहले दिशानिर्देशों में प्रावधान था कि रक्त विकारों के कारण होने वाली विकलांगता के मामले में विकलांगता सर्टिफिकेट के लिए, एक वर्ष के न्यूनतम अंतराल पर रोग की आवधिक समीक्षा होगी (80% से अधिक स्कोर के साथ गंभीर विकलांगता वाले रोगियों के लिए)।[47]  संशोधित दिशानिर्देशों में समीक्षा की इस समय सीमा के अंतराल को तीन वर्ष कर दिया गया है। 

कुछ सरकारी संस्थानों को विकलांग व्यक्ति अधिकार एक्ट के प्रावधानों से छूट दी गई

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय ने कुछ सरकारी संस्थानों को विकलांग व्यक्ति अधिकार एक्ट, 2016 के कुछ प्रावधानों से छूट देने के लिए अधिसूचना जारी की है।[48] ये प्रावधान सरकारी रोजगार में विकलांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण और भेदभाव रहित व्यवहार को अनिवार्य करते हैं। अधिसूचनाओं के अंतर्गत छूट इस प्रकार हैं: 

  • एक्ट में सभी सरकारी संस्थानों से यह अपेक्षित है कि वे निर्धारित विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए प्रत्येक पद पर न्यूनतम 4% रिक्तियों को आरक्षित करेंगे।[49] व्यक्ति को निर्धारित विकलांगता है, अगर (i) उसे वह विकलांगता है जिसे एक्ट के अंतर्गत मापने योग्य शर्तों में परिभाषित किया गया है, या (ii) कम से कम 40% विकलांगता को मापने योग्य शर्तों में परिभाषित नहीं किया गया है, जैसा कि प्रमाणित प्राधिकारी द्वारा प्रामाणित है। अधिसूचना निम्नलिखित को सभी पदों पर आरक्षण की शर्त से छूट देती है: (i) भारतीय पुलिस सेवा, (ii) दिल्ली, अंडमान एवं निकाबोर द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, दमन एवं दीव, दादरा और नगर हवेली पुलिस सेवा, (iii) भारतीय रेलवे संरक्षण बल सेवा, और (iv) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के कॉम्बैटेंट पर्सनल।
     
  • इसके अतिरिक्त एक्ट में प्रावधान है कि कोई सरकारी संस्थान रोजगार के मामले में विकलांग व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं कर सकता। अधिसूचना केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कॉम्बैटेंट पर्सनल के सभी पदों को इस प्रावधान से छूट देती है।  

 

स्वास्थ्य

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (संशोधन) बिल, 2021 संसद में पारित

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (संशोधन) बिल, 2021 को संसद में पारित कर दिया गया।[50]  यह बिल राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग एक्ट, 2020 में संशोधन करता है।[51]  2020 का एक्ट भारतीय मेडिकल सेंट्रल काउंसिल एक्ट, 1970 को रद्द करता है।[52]  1970 का एक्ट भारतीय चिकित्सा पद्धतियों (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा) की शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करने के लिए भारतीय मेडिकल सेंट्रल काउंसिल की स्थापना करता है। 

2020 का एक्ट काउंसिल की जगह राष्ट्रीय आयोग की स्थापना करता है। यह आयोग भारतीय चिकित्सा प्रणाली की शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करता है। चूंकि राष्ट्रीय आयोग के गठन में समय लग रहा था, इसलिए 2020 के एक्ट के पारित होने के तुरंत बाद 1970 का एक्ट रद्द नहीं हुआ। सितंबर 2020 में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रावधान के लिए 1970 का एक्ट संशोधित किया गया कि जब तक काउंसिल का पुनर्गठन किया जाए, तब केंद्र सरकार द्वारा गठित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स अस्थायी रूप से उसकी शक्तियों का इस्तेमाल करें।

सेंट्रल काउंसिल का स्थान लेने के लिए 11 जून, 2021 को राष्ट्रीय आयोग का गठन किया गया और उसी तारीख को 1970 का एक्ट रद्द हो गया।50  2021 का बिल निर्दिष्ट करता है कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा इस्तेमाल की गई शक्तियों और उनके द्वारा किए गए कार्यों (1970 के एक्ट के अंतर्गत) को 2020 के एक्ट के अंतर्गत किया गया माना जाएगा और ये जारी रहेंगे।50 

बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें।

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (संशोधन) बिल, 2021 संसद में पारित

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (संशोधन) बिल, 2021 को संसद में पारित कर दिया गया।[53]  यह बिल राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग एक्ट, 2020 में संशोधन करता है। [54]

2020 का एक्ट होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल एक्ट, 1973 को रद्द करता है।[55]  1973 का एक्ट होम्योपैथी की शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करने के लिए होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल की स्थापना करता है। 2020 का एक्ट काउंसिल की जगह राष्ट्रीय आयोग की स्थापना करता है। यह आयोग होम्योपैथी की शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करता है। उल्लेखनीय है कि 1973 के एक्ट को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित तारीख को रद्द किया जाना था।

2020 के एक्ट के पारित होने से पहले 2018 में 1973 के एक्ट में संशोधन किया गया था ताकि सेंट्रल काउंसिल का पुनर्गठन किया जा सके।[56]  संशोधनों में यह निर्दिष्ट किया गया है कि जब तक काउंसिल का पुनर्गठन नहीं हो जाता, केंद्र सरकार द्वारा गठित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स उसकी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकें।56  चूंकि राष्ट्रीय आयोग के गठन में समय लग रहा था और सेंट्रल काउंसिल का पुनर्गठन नहीं किया गया था, बोर्ड ने अपना काम जारी रखा।

सेंट्रल काउंसिल का स्थान लेने के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन 5 जुलाई, 2021 को किया गया और उसी दिन 1973 का एक्ट रद्द हो गया।53  2021 का बिल निर्दिष्ट करता है कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा इस्तेमाल की गई शक्तियों और उनके द्वारा किए गए कार्यों (1973 के एक्ट के अंतर्गत) को 2020 के एक्ट के अंतर्गत किया गया माना जाएगा और ये जारी रहेंगे।53 

बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें।

राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) बिल, 2021 पर रिपोर्ट सौंपी

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

रसायन और उर्वरक संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: कनिमोझी करुणानिधि) ने राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) बिल, 2021 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [57]  बिल राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान एक्ट, 1998 में संशोधन का प्रयास करता है।[58] 1998 के एक्ट के अंतर्गत पंजाब में राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (नाईपर) की स्थापना की गई थी और उसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था।[59]

कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्न शामिल हैं: 

  • गवर्नर्स: 1998 के एक्ट में अपेक्षित है कि नाईपर के गवर्नर बोर्ड में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का कम से कम एक पब्लिक पर्सन या सोशल वर्कर होगा। 2021 के बिल में इस आवश्यकता को हटाने का प्रस्ताव है। कमिटी ने सुझाव दिया है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए। फार्मास्यूटिकल्स विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का कम से कम एक पब्लिक पर्सन या सोशल वर्कर गवर्नर बोर्ड में शामिल हो ताकि सामाजिक समावेश संभव हो।
     
  • काउंसिल में संसद सदस्य: बिल के अंतर्गत सभी संस्थानों की गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए एक काउंसिल की स्थापना का प्रयास किया गया है जिससे फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान का विकास तथा मानकों का रखरखाव सुनिश्चित हो। बिल में प्रस्ताव है कि काउंसिल के सदस्यों के रूप में तीन संसद सदस्यों (एमपी) को शामिल किया जाए। कमिटी ने सुझाव दिया कि काउंसिल में सदस्य के रूप में नामित संसद सदस्यों को मेडिकल या फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों का पूर्व अनुभव होना चाहिए। 
     
  • डायरेक्टर्स की नियुक्ति: बिल में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को यह अधिकार दिया गया है कि वे भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नाईपर के डायरेक्टर को नियुक्त करेंगे। कमिटी ने कहा कि नाईपर इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) के मॉडल पर आधारित है जिसके अंतर्गत काउंसिल भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद डायरेक्टर्स को नियुक्त करती है। कमिटी ने नाईपर के लिए भी ऐसी प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया।
     
  • मंजूरियों में देरी: कमिटी ने कहा कि सात नाईपर स्थापित किए गए हैं लेकिन सिर्फ मोहाली स्थित नाईपर का कैंपस पूरा हुआ है। कमिटी ने कहा कि 2012 से पांच और नाईपर बनाने का प्रस्ताव लंबित है (मदुरै, झालावाड़, नागपुर, नया रायपुर और बेंगलुरू)। कमिटी ने कहा कि वित्त मंत्रालय को नाईपर्स के लिए स्थायी कैंपस बनाने के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी लाने का सुझाव दिया। 

बिल पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें। 

 

परिवहन

इनलैंड वेसेल्स और उनके मूवमेंट को रेगुलेट करने वाला बिल संसद में पारित 

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org) 

इनलैंड वेसेल्स बिल, 2021 को संसद में पारित कर दिया गया।[60]  यह इनलैंड वेसेल्स एक्ट, 1917 का स्थान लेता है।[61]  एक्ट राज्यों द्वारा इनलैंड वेसेल्स यानी अंतर्देशीय जहाजों के परिवहन का रेगुलेशन करता है जिसमें जहाजों का रजिस्ट्रेशन और वस्तुओं एवं यात्रियों की सुरक्षित ढुलाई शामिल है। बिल देश भर में अंतर्देशीय नौपरिवहन के लिए एक समान रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को पेश करने का प्रयास करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • यंत्र चालित (मैकेनिकली प्रोपेल्ड) अंतर्देशीय जहाज: बिल के अनुसार, इस तरह के जहाजों की परिभाषा में शिप, नाव, पाल वाले जहाज, कंटेनर जहाज और फेरीज़ शामिल हैं। केंद्र सरकार इन जहाजों के संबंध में निम्नलिखित निर्दिष्ट करेगी: (i) वर्गीकरण, (ii) डिजाइन, निर्माण और कर्मचारियों के आवास के मानक और (iii) सर्वे का प्रकार और उसकी अवधि। इन जहाजों के निर्माण या उनमें बदलाव के लिए नामित प्राधिकारी से पूर्व मंजूरी लेनी होगी। इस प्राधिकारी का निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। 
     
  • संचालन: अंतर्देशीय जलक्षेत्रों में संचालन के लिए सभी जहाजों के पास सर्वे सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना चाहिए। भारतीय स्वामित्व वाले जहाजों को रजिस्ट्रार ऑफ इनलैंड वेसेल्स में रजिस्टर होना चाहिए (इस रजिस्ट्रार की नियुक्ति राज्य सरकार करेगी)। यह रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देश भर में वैध होगा। सर्वे सर्टिफिकेट राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा, उस प्रारूप में जिसे केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जाएगा। सर्टिफिकेट में इन जहाजों के अंतर्देशीय जल क्षेत्रों का उल्लेख होगा (राज्य इन जल क्षेत्रों का सीमांकन करेंगे)। जहाजों का बीमा भी होना चाहिए, जिसमें जहाज के उपयोग के कारण मृत्यु, चोट या नुकसान की लायबिलिटी कवर होगी (दुर्घटनावश प्रदूषण सहित)। 
     
  • अंतर्देशीय जहाजों का डेटाबेस: केंद्र सरकार अंतर्देशीय जहाजों पर केंद्रीयकृत इलेक्ट्रॉनिक डेटा रिकॉर्ड रखेगी। इन रिकॉर्ड्स में निम्नलिखित पर सूचनाएं शामिल होंगी: (i) जहाजों का रजिस्ट्रेशन, (ii) चालक दल और मैनिंग, और (iii) जारी किए गए सर्टिफिकेट्स। 

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भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2021 संसद में पारित

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2021 को संसद में पारित कर दिया।[62]  यह बिल भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी एक्ट, 2008 में संशोधन करता है। 2008 का एक्ट एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (एयरा) की स्थापना करता है। एयरा भारत के मुख्य एयरपोर्ट्स की एयरोनॉटिकल सेवाओं के लिए टैरिफ और दूसरे शुल्क (जैसे एयरपोर्ट डेवलपमेंट फीस) को रेगुलेट करता है। बिल केंद्र सरकार को इस बात की अनुमति देता है कि वह एयरपोर्ट्स को ग्रुप कर सकती है और उस ग्रुप को मुख्य एयरपोर्ट के तौर पर अधिसूचित कर सकती है। इसका अर्थ यह है कि एयरा इन अधिसूचित हवाई अड्डों पर टैरिफ को रेगुलेट करेगी।

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भारतीय एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के कामकाज पर कमिटी ने रिपोर्ट सौंपी

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: टी.जी.वेंकटेश) ने 2 अगस्त, 2021 को ‘भारतीय एयरपोर्ट्स अथॉरिटी का कामकाज’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[63]  नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय एयरपोर्ट्स अथॉरिटी एक सांविधिक प्राधिकरण है जोकि निम्नलिखित के एकीकृत विकास, विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए जिम्मेदार है: (i) हवाई यातायात सेवा, (ii) यात्री टर्मिनल्स, और (iii) देश में कार्गो सेवा। अथॉरिटी देश के 136 हवाई अड्डों का परिचालन और रखरखाव करती है जिनमें से 110 चालू हैं। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • हवाई यातायात प्रबंधन: कमिटी ने गौर किया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में हवाई यातायात में निरंतर वृद्धि हुई है। उसने कहा कि हवाई अड्डों पर भीड़ को कम करने के लिए एयर नैविगेशन सेवाओं से संबंधित बेहतर कार्य पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। इसलिए कमिटी ने निम्न सुझाव दिए: (i) हाई पावर्ड कमिटी का गठन, ताकि उड़ान के समय, ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए फ्लेक्सिबल एयर स्पेस मैनेजमेंट किया जा सके, (ii) सैन्य हवाई क्षेत्र प्रॉजेक्ट्स के आधुनिकीकरण के नैविगेशन और लैंडिंग से जुड़े हुए पहलुओं को फिल्टर करने के लिए भारतीय वायुसेना के साथ एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाना, और (iii) क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए हेलीकॉप्टर और सीप्लेन ऑपरेशंस हेतु इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना। 
     
  • सहायक अवसंरचना को बढ़ाना: कमिटी ने हवाई अड्डों पर पर्याप्त अवसंरचना के अभाव से संबंधित कई समस्याओं पर गौर किया जैसे जमीन उपलब्ध न होना, हवाई अड्डा ऑपरेटर्स के रेगुलेशंस के पालन में देरी, बड़ी संख्या में संस्थागत मंजूरियां, और हवाई अड्डों से कनेक्टिविटी का अभाव। इन समस्याओं को दूर करने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) कमर्शियल दुकानों, पार्किंग स्पेस और हवाई अड्डों के करीब होटल्स के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करना, (ii) प्रॉजेक्ट्स को समय पर मंजूरी देने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस मैकेनिज्म शुरू करना, और (iii) रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) अवसंरचना कार्यशालाएं आयोजित करना। 

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मैरिटाइम क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने पर रिपोर्ट सौंपी गई

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: टी.जी.वेंकटेश) ने ‘भारत के मैरिटाइम क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्टर को बढ़ावा’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[64]  कमिटी ने भारतीय मैरिटाइम क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा की। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सागरमाला कार्यक्रम: केंद्र सरकार ने 2015 में सागरमाला कार्यक्रम को शुरू किया था। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे में न्यूनतम निवेश के साथ विदेशी और घरेलू व्यापार में लॉजिस्टिक की लागत को कम करना है। कार्यक्रम में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) घरेलू कार्गो के परिवहन की लागत को कम करना, (ii) कंटेनर मूवमेंट को अधिक से अधिक कारगर तरीके से इस्तेमाल करना, और (iii) निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना। कमिटी ने कहा कि 2015 से सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत 802 प्रॉजेक्ट्स (5.5 लाख करोड़ मूल्य के) में से सिर्फ 172 प्रॉजेक्ट्स (88,000 करोड़ रुपए मूल्य के) पूरे हुए हैं। प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने की रफ्तार में सुधार करने के लिए कमिटी ने धनराशि उपयोग को बढ़ाने का सुझाव दिया।
     
  • बंदरगाहों का आधुनिकीकरण: कमिटी ने कहा कि बढ़ते व्यापार के लिहाज से भारतीय बंदरगाहों पर बड़े कार्गो लोड को संभालने की क्षमता कम है। कार्गों को संभालने की क्षमता बढ़ाने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित उपायों का सुझाव दिया: (i) बड़े जहाजों को संभालने के लिए ड्रेजिंग के जरिए भारतीय बंदरगाहों के न्यूनतम ड्राफ्ट (जहाज के सुरक्षित नैविगेशन के लिए पानी की जितनी न्यूनतम गहराई होनी चाहिए) को बढ़ाना, और (ii) मौजूदा बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने के लिए (खास तौर से ड्राई कार्गो के लिए) आधुनिक कार्गो हैंडलिंग तकनीकों को लागू करना।
     
  • जहाजों का मरम्मत उद्योग: कमिटी ने कहा कि 2018-19 में निजी शिपयार्ड्स में 341 जहाजों (706 में से) की मरम्मत की गई। कमिटी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण यार्ड बंद होने से जहाजों के मरम्मत उद्योग पर बहुत बुरा असर पड़ा। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत जहाजनिर्माण (शिपबिल्डिंग) के पुर्जे बनाने वाले देसी निर्माताओं को सहयोग देना, (ii) जहाज मरम्मत उद्योग को मानद निर्यात दर्जा देना, और (iii) जहाज मरम्मत उद्योग में राजस्व और रोजगार के लिए कार्यक्रम तैयार करना।

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ड्रोन नियम, 2021 अधिसूचित

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ड्रोन नियम, 2021 अधिसूचित कर दिए हैं। [65]  ये नियम एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के अंतर्गत प्रकाशित किए गए हैं और अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स (यूएएस) नियम, 2021 का स्थान लेने का प्रयास करते हैं।[66]  एक्ट भारत में नागरिक विमानों के निर्माण, अधिकार, संचालन और बिक्री को रेगुलेट करता है।[67] यूएएस नियम दूर से संचालित होने वाले और स्वायत्त विमानों के स्वामित्व और संचालन को रेगुलेट करते हैं।66 वर्तमान नियम ड्रोन्स के संचालन में मंजूरियों और प्रतिबंधों को कम करने का प्रयास करते हैं। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मैन्यूफैक्चरिंग, आयात और परिचालनगत शर्तें: यूएएस नियमों में अनिवार्य है कि कोई भी व्यक्ति जो मानव रहित विमान प्रणाली का आयात या संचालन करना चाहता है, उसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से मैन्यूफैक्चरिंग और उड़ान योग्यता का सर्टिफिकेट प्राप्त करना होगा। ड्रोन नियम ड्रोन के संचालन या आयात के लिए किसी भी सर्टिफिकेट की आवश्यकता को हटाते हैं। ड्रोन के आयात को विदेश व्यापार महानिदेशक (या केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत कोई अन्य संस्था) द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। 
     
  • ड्रोन्स का हस्तांतरण: यूएएस नियमों में भारत में किसी अन्य व्यक्ति को ड्रोन के हस्तांतरण के लिए महानिदेशक से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य है। 2021 के नियम निर्दिष्ट करते हैं कि ड्रोन मालिक किसी अन्य व्यक्ति को ड्रोन बेचने, पट्टे पर देने, उपहार देने या स्थानांतरित करने के इच्छुक हैं, उन्हें डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर कुछ विवरण (जैसे यूएएस की विशिष्ट पहचान संख्या) प्रदान करने की आवश्यकता होगी। डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म भारत में मानव रहित विमान प्रणाली गतिविधियों के प्रबंधन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिए डीजीसीए द्वारा होस्ट किए गए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को संदर्भित करता है।
     
  • एयरस्पेस का रेगुलेशन: यूएएस नियमों के अंतर्गत जिन क्षेत्रों में ड्रोन चलाने पर प्रतिबंध है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) छह हवाई अड्डों के आस-पास पांच किलोमीटर का घेरा, (ii) सीमा, कूटनीतिक महत्व के नागरिक और सैन्य इंस्टॉलेशंस के आस-पास के विभिन्न क्षेत्र, और (iii) पारिस्थितिकी के लिहाज से अधिसूचित संवेदनशील क्षेत्र। नियम इस सूची को खत्म करते हैं और केंद्र सरकार को भारत में ड्रोन संचालन के लिए मशीन-रीडेबल एयरस्पेस मैप छापने का अधिकार देते हैं। यह नक्शा भारतीय हवाई क्षेत्र को लाल, पीले और हरे रंग वाले क्षेत्रों में बांटेगा। लाल और पीले रंग के क्षेत्रों में ड्रोन संचालन के लिए पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।

साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन के लिए विमानन कर्मचारियों की जांच हेतु ड्राफ्ट रेगुलेशन पर टिप्पणियां आमंत्रित

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन के लिए विमानन कर्मचारियों की जांच हेतु ड्राफ्ट प्रक्रिया जारी की।[68]  ड्राफ्ट रेगुलेशन एयरक्राफ्ट नियम, 1937 के अंतर्गत प्रकाशित किए गए हैं।[69]  नियम सभी तकनीकी और परिचालन विमान चालक दल के सदस्यों को उड़ान से पहले और उसके दौरान मादक पेय, सेडेटिव्स, नशीले पदार्थों या उत्तेजक दवाओं का सेवन करने से रोकते हैं। ड्राफ्ट रेगुलेशंस की मुख्य विशेषताएं हैं:

  • जांच की प्रक्रिया: सभी अनुसूचित वाणिज्यिक विमान ऑपरेटरों और हवाई नेविगेशन सेवा प्रदाताओं को साइकोएक्टिव पदार्थों (जैसे भांग, कोकीन, ओपिओइड आदि) के सेवन के लिए उड़ान चालक दल के सदस्यों और हवाई यातायात नियंत्रकों के बीच रैंडम ड्रग टेस्टिंग करना होगा। जांच में किसी संगठन के कम से कम 5% कर्मचारियों को सालाना कवर होना चाहिए।
     
  • कुछ खास कर्मचारियों के लिए खास प्रावधान: रेगुलेशंस संगठनों के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य करते हैं कि चालक दल के सदस्यों, हवाई यातायात नियंत्रण अधिकारियों, रखरखाव इंजीनियरों, प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों की अनिवार्य रूप से जांच की जाती है: (i) रोजगार से पहले, (ii) उड़ान प्रशिक्षण संगठन में प्रशिक्षु पायलट की भर्ती करने से पहले, और (iii) पुष्ट मामलों का फॉलो-अप करने के लिए।
     
  • पॉजिटिव मामलों में कार्रवाई: रेगुलेशंस दो टेस्ट करना अनिवार्य करते हैं: स्क्रीनिंग टेस्ट और पुष्टि करने के लिए टेस्ट। अगर स्क्रीनिंग टेस्ट का नतीजा पॉजिटिव आता है तो कर्मचारी को तत्काल संवेदनशील ड्यूटी से हटा दिया जाएगा, जब तक कि पुष्टि करने वाली रिपोर्ट न आ जाए। अगर उस पुष्टि रिपोर्ट में भी व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे नशामुक्ति केंद्र में भेजा जाएगा। अगर कर्मचारी साइकोएक्टिव पदार्थ के सेवन के लिए नेगेटिव पाया जाता है तो उसे ड्यूटी पर वापस बुलाया जाएगा। ड्यूटी पर लौटने के बाद फिर से अपराध करने पर तीन वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा। तीसरी बार अपराध करने पर लाइसेंस रद्द हो जाएगा।

ड्राफ्ट रेगुलेशंस पर टिप्पणियां 24 सितंबर, 2021 तक आमंत्रित हैं। 

हिट और रन मामलों में जांच और सेटेलमेंट पर ड्राफ्ट योजनाएं जारी 

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हिट और रन दुर्घटनाओं के पीड़ितों की जांच और क्षतिपूर्ति पर केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में ड्राफ्ट योजनाएं और ड्राफ्ट संशोधन जारी किए।[70],[71],[72]  ड्राफ्ट योजनाओं और संशोधनों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना 

ड्राफ्ट योजना उन मामलों में मुआवजा बढ़ाने का प्रयास करती है जिनका नतीजा गंभीर चोट या मौत होती है।[73] मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:70

  • समितियां: ड्राफ्ट नियमों में योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा करने, प्रचार को प्रोत्साहित करने और दावेदारों के बीच अधिकारों के संबंध में जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार जिला स्तरीय समितियों की स्थापना का प्रस्ताव है। ड्राफ्ट नियम में एक स्थायी समिति स्थापित करने का भी प्रयास किया गया है जो जिला स्तरीय समितियों का मार्गदर्शन कर सके। स्थायी समिति योजना के कामकाज की समीक्षा करेगी और कुशल संवितरण बढ़ाने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए संशोधनों की सिफारिश करेगी।
     
  • मुआवजा: केंद्र सरकार ने निम्नलिखित मामलों में मुआवजे को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है: (i) गंभीर रूप से चोटिल होने पर 12,500 रुपए से 50,000 रुपए, और (ii) मृत्यु होने पर 25,000 रुपए से दो लाख रुपए तक।73  जिला स्तरीय समितियों द्वारा स्वीकृति आदेश के 15 दिनों के भीतर मुआवजे को वितरित किया जाना चाहिए। 

दुर्घटना कोष बनाने के लिए प्रस्तावित योजना

प्रस्तावित कोष सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा, दुर्घटनाओं में इलाज और अन्य उद्देश्यों के माध्यम से सहायता प्रदान करेगा।71  योजना हर्जाना योजना, 1989 को प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव करती है जिसके अंतर्गत हिट एंड रन दुर्घटनाओं के लिए एक कोष द्वारा क्षतिपूर्ति दी जाती है। कोष को एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया जाएगा और भारतीय सामान्य बीमा निगम द्वारा संचालित तीन खाते होंगे (तालिका 3)।

तालिका 3: प्रस्तावित दुर्घटना कोष के अंतर्गत खाते

खाते

वित्त पोषण

बीमित वाहनों से दुर्घटना के पीड़ितों का इलाज

  • बीमा कंपनियों के अंशदान

हिट और रन दुर्घटनाओं के पीड़ितों और गैर बीमाकृत वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं के पीड़ितों का इलाज

  • राष्ट्रीय राजमार्गों के शुल्क
  • बजटीय अनुदान
  • मोटर वाहन एक्ट के अंतर्गत जुर्माना 

हिट और रन मोटर दुर्घटना योजना, 2021 के आधार पर हिट और रन मामलों के पीड़ितों के लिए क्षतिपूर्ति

  • 1989 योजना का बैलेंस
  • बीमा कंपनियों द्वारा जमा किए गए थर्ड-पार्टी प्रीमियम का एक निर्दिष्ट हिस्सा 

Sources: G.S.R. 527 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 2, 2021; PRS. 

बैटरी संचालित वाहनों को पंजीकरण शुल्क से छूट देने वाले संशोधन अधिसूचित

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत बनाए गए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन जारी किए हैं।[74],[75] नियमों में ड्राइवरों के लाइसेंस, और मोटर वाहनों के डिजाइन, रखरखाव और पंजीकरण की शर्तों का विवरण दिया गया है।[76] संशोधन बैटरी से चलने वाले वाहनों (रिचार्जेबल बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन) के मालिकों को निम्नलिखित के लिए शुल्क देने से छूट देते हैं: (i) नया पंजीकरण सर्टिफिकेट, (ii) पंजीकरण सर्टिफिकेट का नवीनीकरण, और (iii) एक नया पंजीकरण चिह्न देना।  

मोटरसाइकिल और कैब किराये पर लेने वाली योजना में कुछ वाहनों को शामिल करने हेतु संशोधन अधिसूचित

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने रेंट अ मोटर कैब और रेंट अ मोटरसाइकिल योजनाओं  में संशोधन अधिसूचित किए हैं।[77],[78]  योजनाएं क्रमशः मोटर-कैब्स और मोटरसाइकिल्स को किराये पर लेने के कारोबार को रेगुलेट करती हैं।[79],[80] योजनाओं में निम्नलिखित के लिए प्रावधान हैं: (i) लाइसेंस देना, (ii) वाहन किराये पर लेने वाले व्यक्तियों के कर्तव्य और जिम्मेदारियां, और (iii) लाइसेंसिंग अधिकारियों की शक्तियां।

योजनाएं उन वाहनों पर लागू होती हैं जिन्हें संचालित करने के लिए परमिट और लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। संशोधनों में योजना के भीतर मोटर-कैब और मोटरसाइकिल की कुछ श्रेणियां शामिल हैं जिन्हें मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत परमिट की शर्तों से छूट दी गई है।[81]  इनमें बैटरी से चलने वाले वाहन, और मेथनॉल और इथेनॉल सहित ईंधन पर चलने वाले वाहन शामिल हैं।

न्यू भारत (बीएच) सीरीज़ के वाहनों की पंजीकरण प्रणाली अधिसूचित

Rajat Asthana (rajat@prsindia.org) 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधनों को अधिसूचित किया है।82,81  1989 के नियम वाहन पंजीकरण के आवेदन और पंजीकरण सर्टिफिकेट जारी करने की शर्तों का विवरण देते हैं।84  2021 के संशोधन लोगों को राष्ट्रीय वाहन पंजीकरण चिह्न, भारत (बीएच)-सीरीज़ पेश करते हैं।[82] संशोधनों की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • पंजीकरण के लिए आवेदन: 1989 के नियम वाहन के पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को कुछ दस्तावेज (जैसे बिक्री और बीमा प्रमाण पत्र) जमा करना अनिवार्य करते हैं। बीएच-सीरीज़ पंजीकरण चिह्न के आवेदकों के लिए, 2021 नियम निर्दिष्ट करते हैं: (i) निजी क्षेत्र में काम करने वाले आवेदकों को वर्किंग सर्टिफिकेट जमा करना होगा, और (ii) सरकारी कर्मचारियों को एक आधिकारिक पहचान पत्र जमा करना होगा।
     
  • नए पंजीकरण चिन्ह से छूट: वाहन के पंजीकरण को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने के लिए, 1989 के नियमों में आवेदकों के लिए अनिवार्य है कि वे उस राज्य का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जमा कराएं जहां वाहन मूल रूप से पंजीकृत था। 2021 के संशोधन बीएच-सीरीज़ के अंतर्गत पंजीकृत वाहनों को इस शर्त से छूट देते हैं। इस छूट का लाभ उठाने के लिए, नियमों में वाहन मालिकों को अपने निवास स्थान के पंजीकरण प्राधिकारी को सूचित करने की आवश्यकता होती है।

सड़क दुर्घटना का इलेक्ट्रॉनिक निरीक्षण और प्रवर्तन

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधनों को अधिसूचित किया।[83]  1989 के नियम चालान जारी करने और उनके भुगतान की प्रक्रिया का विवरण देते हैं।[84]  2021 के संशोधन सड़कों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के प्रावधान पेश करते हैं। [85]  संशोधनों की मुख्य विशेषताएं हैं:

  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाना: 2021 के संशोधन राज्य सरकारों के लिए निम्नलिखित स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरण (जैसे स्पीड कैमरा, सीसीटीवी, स्पीड गन, बॉडी वियरेबल कैमरा) लगाना अनिवार्य करते हैं: (i) राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर उच्च-जोखिम और उच्च-घनत्व वाले गलियारे, और (ii) दस लाख से अधिक आबादी वाले प्रमुख शहरों के महत्वपूर्ण जंक्शन। इसके अतिरिक्त नियम यह अनिवार्य करते हैं कि: (i) लगाए गए उपकरण सामान्य यातायात को बाधित नहीं करना चाहिए, और (ii) चेतावनी संकेतों को मॉनिटर किए गए हिस्सों से पहले स्पष्ट रूप प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
     
  • बॉडी वियरेबल उपकरण: 2021 के नियम संबंधित राज्य सरकारों द्वारा अधिकृत अधिकारियों द्वारा बॉडी वियरेबल कैमरों के उपयोग की अनुमति देते हैं। हालांकि, अपराधी को सूचित किया जाएगा कि उसे बॉडी वियरेबल कैमरा या डैशबोर्ड कैमरा (जिसे पुलिस वाहन के डैशबोर्ड पर रखा जा सकता है) द्वारा रिकॉर्ड किया जा रहा है।
     
  • चालान जारी करना: चालान जारी करने के लिए ऐसे इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरण के फुटेज का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें लोकेशन, तारीख और समय के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्टैंप हो। इसके अलावा, जारी किए गए सभी चालानों के साथ फोटोग्राफिक सबूत, तिथि, समय, अपराध का स्थान और अन्य मानदंड होंगे।

रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए ड्राफ्ट मॉडल कंसेशन समझौता जारी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

रेलवे बोर्ड ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए मॉडल कंसेशन समझौते के ड्राफ्ट जारी किया।[86]  कंसेशन समझौते के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान हैं:

  • समझौते का दायरा: कंसेशनेयर स्टेशन की इमारत, पार्किंग सुविधाओं और पार्सल सुविधाओं का विकास करेगा। इसमें टिकटिंग काउंटर, क्लोकरूम, वेटिंग रूम और जलपान जैसी सुविधाओं का निर्माण करना शामिल होगा। स्टेशन के ऐस्टेट डेवलपमेंट के विकास के लिए भूमि के साथ-साथ हवाई क्षेत्र भी निर्धारित किया जा सकता है। इस ऐस्टेट डेवलपमेंट में सड़कों का निर्माण, बिजली की आपूर्ति, पानी की आपूर्ति और सीवरेज शामिल होंगे। कंसेशनेयर स्टेशन के साथ-साथ स्टेशन ऐस्टेट के संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा।
     
  • वित्तीय शर्तें: अनुबंध में सहमति के अनुसार कंसेशनेयर रेल भूमि विकास प्राधिकरण को कंसेशन शुल्क का भुगतान करेगा। प्राधिकरण यात्रियों से स्टेशन विकास शुल्क वसूल करेगा। इस शुल्क के माध्यम से एकत्रित राजस्व का भुगतान कंसेशनेयर को, उसके द्वारा सहमत छूट लागू करने के बाद किया जाएगा। निम्नलिखित पर कंसेशनेयर का एकल अधिकार होगा: (i) पार्सल हैंडलिंग शुल्क और आगंतुकों से प्लेटफॉर्म टिकट का शुल्क लेना, (ii) प्रॉजेक्ट के एसेट्स के वाणिज्यिक उपयोग, विज्ञापन, को-ब्रांडिंग और पार्किंग से मिलने वाला राजस्व। वाणिज्यिक उपयोग में उप-लाइसेंसधारकों और उनके द्वारा प्रदान की जाने वाले सेवाएं शामिल हैं।
     
  • विवाद निवारण: इस समझौते के पक्षकारों के बीच किसी भी विवाद की स्थिति में विवाद को विवाद समाधान बोर्ड को भेजा जा सकता है। बोर्ड के निर्णय बाध्यकारी होंगे जब तक कि इसे सुलह/मध्यस्थता ट्रिब्यूनल से संशोधित नहीं किया जाता है।

ड्राफ्ट पर 3 सितंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।   

 

पर्यावरण

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

एनसीआर और निकटवर्ती इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग गठित करने वाला बिल संसद में पारित 

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग बिल, 2021 को संसद में पारित कर दिया गया।[87]  बिल अप्रैल 2021 में ऐसे ही प्रावधानों वाले अध्यादेश का स्थान लेता है।[88] ऐसा एक अध्यादेश, जोकि अक्टूबर 2020 में जारी किया गया था, मार्च में लैप्स हो गया था।[89]

बिल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) तथा निकटवर्ती इलाकों में वायु गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं के बेहतर समन्वय, अनुसंधान, उन्हें पहचानने और उनका हल करने के लिए आयोग के गठन का प्रावधान करता है। निकटवर्ती इलाकों में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों के क्षेत्र और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी तथा एनसीआर के क्षेत्र आते हैं जहां प्रदूषण का कोई स्रोत एनसीआर की वायु गुणवत्ता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है। बिल 1998 में एनसीआर में स्थापित पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण अथॉरिटी को भंग करता है। इसकी मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:87

  • आयोग का कामकाज: आयोग के कामकाज में निम्नलिखित शामिल होगा: (i) संबंधित राज्य सरकारों (दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) के कार्यों के बीच समन्वय स्थापित करना, (ii) एनसीआर में वायु प्रदूषण की रोकथाम और उसे नियंत्रित करने की योजनाएं बनाना और उन्हें अमल में लाना, (iii) वायु प्रदूषकों को चिन्हित करने के लिए फ्रेमवर्क प्रदान करना, (iv) तकनीकी संस्थानों के साथ नेटवर्किंग के जरिए अनुसंधान और विकास करना, (v) वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाना और उसका प्रशिक्षण, और (vi) विभिन्न कार्य योजनाएं तैयार करना, जैसे पौधे लगाना और पराली जलाने के मामलों पर ध्यान दिलाना।
  • जुर्माना: बिल के प्रावधानों या आयोग के आदेशों अथवा निर्देशों का उल्लंघन करने पर पांच वर्ष तक की कैद या एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना, या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। बिल ने किसानों (पराली जलाने या कृषि अवशेषों के कुप्रबंधन से वायु प्रदूषण का कारण) को इस जुर्माने के दायरे से बाहर रखा है। हालांकि आयोग पराली जलने से होने वाले प्रदूषण पर किसानों से मुआवजा वसूल सकता है। केंद्र सरकार इस पर्यावरणीय मुआवजे को निर्दिष्ट करेगी। आयोग के सभी आदेशों के खिलाफ अपील की सुनवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा की जाएगी।

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प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2021 अधिसूचित

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2021 को अधिसूचित किया।[90] ड्राफ्ट नियम मार्च 2021 में सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किए गए थे।[91]  2021 नियम प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 में संशोधन करते हैं।[92] नियम प्लास्टिक कचरे को कम करने का प्रावधान करते हैं। प्रमुख संशोधनों में शामिल हैं: 

  • प्लास्टिक की वस्तुओं पर प्रतिबंध: 2021 के नियम 1 जनवरी, 2022 से देश भर में प्लास्टिक की कुछ वस्तुओं के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाते हैं।90  सिंगल यूज प्लास्टिक आइटम वे होते हैं जिन्हें रिसाइकल या डिस्पोजल करने से पहले केवल एक बार इस्तेमाल किया जाता है।90 इनमें निम्नलिखित वस्तुएं शामिल हैं: (i) प्लास्टिक की कटलरी (जैसे चम्मच) (ii) प्लास्टिक की डंडी वाले ईयर बड्स, (iii) गुब्बारों के लिए प्लास्टिक की डंडियां, (iv) प्लास्टिक के झंडे, (v) कैंडी की डंडियां, और (vi) 100 माइक्रॉन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैनर। 
     
  • कैरी बैग की मोटाई: वर्तमान में 2016 के नियमों में निर्दिष्ट किया गया है कि प्लास्टिक कैरी बैग्स की मोटाई कम से कम 50 माइक्रॉन होनी चाहिए।92 2021 के नियम ऐसे बैग की न्यूनतम मोटाई बढ़ाकर 75 माइक्रॉन कर देते हैं और यह 30 सितंबर, 2021 से प्रभावी होगा।90 इसके अलावा 31 दिसंबर, 2022 से यह सीमा बढ़कर 120 माइक्रॉन हो जाएगी।90 2021 के नियमों में यह भी कहा गया है कि बिना बुने प्लास्टिक कैरी बैग की मोटाई कम से कम 60 ग्राम प्रति वर्ग मीटर (जीएसएम) होनी चाहिए।90  बिना बुनाई वाले प्लास्टिक बैग ऐसे बैग होते हैं जिन्हें मशीन द्वारा प्लास्टिक के धागों को एक साथ दबाकर बनाया जाता है। उनका बनावट बुनाई जैसी हो जाती है। 

 

शिक्षा

लद्दाख में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने वाला बिल संसद में पारित

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) बिल, 2021 को संसद में पारित किया गया। यह बिल केंद्रीय विश्वविद्यालय एक्ट, 2009 में संशोधन करता है।[93]  2009 के एक्ट में विभिन्न राज्यों में शिक्षण और अनुसंधान के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना का प्रावधान है। 2021 के बिल में लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रावधान है। 

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स्कूल लॉकडाउन के कारण लर्निंग में आने वाली कमी और स्कूल दोबारा खोलने की योजना पर स्टैंडिंग कमिटी ने रिपोर्ट सौंपी 

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा एवं खेल संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: विनय सहस्रबुद्धे) ने स्कूल लॉकडाउन के कारण लर्निंग में आने वाली कमी तथा स्कूल दोबारा खोलने की योजना’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[94] कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • लर्निंग की कमियों को दूर करना: कमिटी ने कहा कि स्कूल बंद होने का लर्निंग के नतीजों (पढ़ने, लिखने और अर्थमैटिक) पर बुरा असर हुआ। विद्यार्थियों के लर्निंग के नतीजों में आने वाली कमियों को दूर करने हेतु कमिटी ने निम्नलिखित का सुझाव दिया: (i) लर्निंग से जुड़ी कमियों को समझने के लिए लर्निंग के नतीजों का आकलन करना, (ii) विशेषज्ञ के नेतृत्व वाले ब्रिज कोर्स विकसित करना और लर्निंग की कमी को दूर करने के लिए त्वरित शिक्षण कार्यक्रम, (iii) जिनकी लर्निंग पर बुरा असर पड़ा है, उनके लिए व्यक्तिगत कक्षाएं संचालित करना, (iv) माता-पिता की भागीदारी और एक दूसरे के सहयोग से सीखने को प्रोत्साहित करना, और (v) संदेहों को दूर करने के लिए कम्यूनिकेशन चैनल बनाना।
     
  • दोबारा स्कूल खोलने से जुड़े दिशानिर्देश: स्कूलों को खोलने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) विद्यार्थियों, शिक्षकों और संबंधित कर्मचारियों के लिए वैक्सीनेशन शुरू करना, (ii) सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए शिफ्ट्स में क्लास लगाना ताकि कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किया जा सके, (iii) विद्यार्थियों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को फेस मास्क और सैनिटाइजर देना, (iv) यह सुनिश्चित करना कि अंडरटेकिंग जैसे उपायों के जरिए इन्हें कड़ाई से लागू किया जाए, और (v) पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थी दोबारा से दाखिला लें, इसके लिए इनसेंटिव्स देना (जैसे स्टडी मैटीरियल, खाना और डिजिटल डिवाइस)।
     
  • रिमोट लर्निंग: कमिटी ने कहा कि महामारी के बाद भी शिक्षा का डिजिटल माध्यम 'न्यू नॉर्मल' बना रहेगा। उसने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) डिजिटल शिक्षा तक पहुंच को सक्षम करने के लिए इलेक्ट्रिकल (गैर-पारंपरिक स्रोतों सहित), संचार (उपग्रह टीवी और रेडियो), और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाना, (ii) समाज के पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों को सब्सिडी वाले इंटरनेट कनेक्शन और कंटेंट प्री-लोडेड डिवाइस वितरित करना, और (iii) विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति और इंटरैक्टिव लर्निंग की निगरानी के लिए उपकरण विकसित करना (वर्चुअल रिएलिटी और ऑगमेंटेंड रिएलिटी के माध्यम से)। 

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कृषि

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) बिल, 2021 संसद में पारित

नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) बिल, 2021 को संसद में पारित कर दिया गया।[95]  बिल नारियल विकास बोर्ड एक्ट, 1979 में संशोधन करता है। इस एक्ट के अंतर्गत नारियल उद्योग के विकास के लिए नारियल विकास बोर्ड की स्थापना की गई है। यह बिल बोर्ड के संयोजन में संशोधन करने का प्रयास करता है ताकि उसके प्रबंधन और प्रशासन में सुधार किया जा सके। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बोर्ड का कामकाज: एक्ट के अंतर्गत बोर्ड भारत में नारियल और उसके उत्पादों की मार्केटिंग में सुधार हेतु उपायों का सुझाव दे सकता है। बिल इस प्रावधान में यह और जोड़ता है कि बोर्ड भारत के बाहर भी नारियल और नारियल उत्पादों की मार्केटिंग हेतु सुझाव दे सकता है।
  • एक्ट में बोर्ड को इस बात की अनुमति दी गई है कि वह केंद्र एवं राज्य सरकारों की सलाह से उपयुक्त योजनाओं को वित्त पोषित कर सकता है जिससे नारियल का उत्पादन बढ़े और उसकी क्वालिटी में सुधार हो। यह उन क्षेत्रों पर लागू होता है जहां नारियल बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और इस वित्त पोषण का दायरा नारियल उत्पादन करने वाले सभी राज्यों तक बढ़ाता है।
     
  • प्रबंधन में परिवर्तन: एक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार बोर्ड के चेयरमैन को नियुक्त करती है और चेयरमैन चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) के तौर पर भी काम करता है। बिल चेयरमैन और सीईओ के पद को अलग-अलग करता है।

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खाद्यान्न की खरीद, स्टोरेज और वितरण पर रिपोर्ट सौंपी गई

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: सुदीप बंदोपाध्याय) ने ‘भारतीय खाद्य निगम द्वारा खाद्यान्नों की खरीद, स्टोरेज और वितरण’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[96]  भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) राज्य सरकारों की एजेंसियों के साथ मिलकर खाद्यान्नों की खरीद, स्टोरेज और वितरण का काम करता है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • खरीद: कमिटी ने टिप्पणी की कि खाद्यान्नों की खरीद का ज्यादातर काम राज्य एजेंसियां करती हैं। सीधी खरीद में एफसीआई का हिस्सा पांच प्रतिशत से भी कम है। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार और एफसीआई को कारगर खरीद के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने हेतु राज्य सरकारों को मदद देनी चाहिए।
  • विकेंद्रित खरीद: विकेंद्रित खरीद नीति के अंतर्गत राज्य सरकारें विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत वितरण के लिए राज्य के भीतर से स्थानीय स्तर पर खरीदे गए खाद्यान्न का इस्तेमाल करती हैं। किसी राज्य में अगर ज्यादा खरीद होती है तो एफसीआई को खाद्यान्न दे दिए जाते हैं जिनका वह भंडारण कर सकता है या दूसरे राज्यों में बांट सकता है। इस योजना से निम्नलिखित होता है: (i) परिवहन की लागत कम होती है, (ii) गैर परंपरागत राज्यों में खरीद को बढ़ावा मिलता है, और (iii) स्थानीय खाद्यान्नों की खरीद संभव होती है जोकि स्थानीय स्वाद के लिए अधिक उपयुक्त हो सकते हैं।
     
  • कमिटी ने टिप्पणी की कि योजना को लागू हुए 23 वर्ष हो गए हैं। इसके बावजूद इसे गेहूं के मामले में सिर्फ आठ राज्यों और चावल के मामले में सिर्फ 15 राज्यों ने लागू किया है। कमिटी ने कहा कि इस योजना ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की कार्यकुशलता को बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसके जरिए स्थानीय स्वाद के मुताबिक खाद्यान्न आपूर्ति संभव हो पाई है। कमिटी ने सुझाव दिया कि खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग को इस योजना को गैर परंपरागत राज्यों में अपनाने को प्रोत्साहित करना चाहिए। विभाग और एफसीआई को संबंधित राज्य सरकार के सहयोग से इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए कदम उठाने चाहिए।
     
  • स्टोरेज की क्षमता: कमिटी ने कहा कि स्टोरेज क्षमता के अधिकतम उपयोग के लिए कई ऑडिट करने के बावजूद किराए पर स्टोरेज सुविधाओं का खूब उपयोग किया जाता है। इस बीच एफसीआई के स्वामित्व वाले गोदामों का अब भी पूरी तरह उपयोग नहीं किया जाता। कमिटी ने सुझाव दिया कि एफसीआई को गोदामों को किराए पर लेने से पहले अपने गोदामों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। किसी गोदाम को किराए पर तभी लिया जाए, जब ऐसा करना बहुत जरूरी हो ताकि किराया चुकाने पर कम से कम खर्च हो।

रिपोर्ट पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मूल्यांकन पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट 

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

कृषि संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: पी. सी. गद्दीगौदर) ने प्रधानमंत्री फसल बीमा (पीएमएफबीवाई) के मूल्यांकन पर रिपोर्ट सौंपी। पीएमएफबीवाई के अंतर्गत किसानों को उस प्राकृतिक संकट से सुरक्षित रखने के लिए फसल बीमा मिलता है जिनका निवारण नहीं किया जा सकता। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राज्यों की भागीदारी: कमिटी ने कहा कि योजना के दिशानिर्देशों में हाल के संशोधनों के कारण राज्य सरकारें उससे पीछे हट सकती हैं। कमिटी ने ऐसे संशोधनों में परिवर्तन का सुझाव दिया जो: (i) राज्यों को योजना में भागीदारी करने से इस आधार पर प्रतिबंधित करते हैं कि उन्होंने सबसिडी जारी करने में देरी की (एक निश्चित समय सीमा के बाद), और (ii) राज्य सरकारों के लिए अनिवार्य करते हैं कि वे निर्दिष्ट दरों से अधिक प्रीमियम दरों वाले क्षेत्रों/फसलों के लिए पूरी सबसिडी का वहन करें। कमिटी ने आगे कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्य इस योजना से हट गए हैं और उसने राज्यों की भागीदारी बढ़ाने के लिए उपाय करने की सिफारिश की।
     
  • बीमा कंपनियां: कमिटी ने गौर किया कि बीमा कंपनियों के लिए प्रत्येक तहसील में एक चालू कार्यालय होना आवश्यक है। हालांकि कई जिलों में इनका अभाव है। यह कहा गया कि ये कार्यालय किसानों के लिए योजना का लाभ प्राप्त करने में आने वाली समस्याओं को कम करने हेतु महत्वपूर्ण हैं और बीमा पोर्टल पर अपने अधिकारियों के संपर्क विवरण अपलोड करने का सुझाव दिया।
     
  • कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर): कमिटी ने कहा कि यह योजना बीमा कंपनियों को इस बात के लिए बाध्य नहीं करती कि वे अपने मुनाफे का हिस्सा उन जिलों में खर्च करें जहां से मुनाफा कमाया जाता है। कमिटी ने ऐसा करने के लिए एक प्रावधान जोड़ने का सुझाव दिया।
     
  • निपटान (सेटलमेंट) में देरी: कमिटी ने बीमा दावों के निपटान में देरी को योजना के कार्यान्वयन में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना। यह कहा गया कि देरी निम्नलिखित कारणों से हो सकती है: (i) राज्यों द्वारा उपज का डेटा और प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी, (ii) बीमा कंपनियों और राज्यों के बीच उपज संबंधी विवाद, और (iii) किसानों के खाते का विवरण प्राप्त न होना। उसने टेक्नोलॉजी और सभी संस्थागत प्रणालियों के समन्वय का उपयोग करके इन समस्याओं को सुलझाने का सुझाव दिया। उसने बीमा कंपनियों द्वारा दावों के निपटान के लिए एक समय सीमा लागू करने का भी सुझाव दिया।

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प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: पीएमएवाई (जी) पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

ग्रामीण विकास संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: प्रतापराव जाधव) ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रमीण: पीएमएवाई (जी) पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[97] पीएमएवाई (जी) को अप्रैल 2016 में शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य 2022 तक ग्रामीण क्षेत्रों में "सभी को आवास" प्रदान करना था, यानी बिना घर या कच्चे घरों में रहने वाले सभी परिवारों को बुनियादी सुविधाओं वाला पक्का घर देना। कमिटी ने कहा कि चरण 1 और 2, यानी दोनों चरणों को मिलाकर देखें तो केवल 51% घरों को ही 31 अगस्त, 2020 तक पूरा किया गया है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • लाभार्थियों को चुनना: यह देखते हुए कि योजना के लिए निर्धारित कुल 4.3 करोड़ व्यक्तियों में से केवल 2.32 करोड़ लोग ग्राम सभाओं द्वारा सत्यापन के बाद पात्र बन पाए हैं, कमिटी ने लाभार्थियों की पहचान में राजनीति से प्रेरित दृष्टिकोण की आशंका पर गौर किया। इसके अतिरिक्त 1.36 करोड़ पात्र परिवारों को प्रवास और मृत्यु के आधार पर ग्राम सभाओं द्वारा खारिज कर दिया गया है। कमिटी ने कहा कि इन दोनों आधारों पर लाभार्थी सूची से किसी को नहीं हटा जा सकता, क्योंकि: (i) प्रवासी अंततः अपने गांव लौट जाते हैं, और (ii) मृत्यु की स्थिति में स्वामित्व का हस्तांतरण किया जा सकता है।
     
  • लाभार्थियों की उचित पहचान सुनिश्चित करने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) लाभार्थियों की पहचान में ग्राम सभाओं और पंचायतों की भूमिका को कम करना और सत्यापन और प्रमाणीकरण के लिए निजी/गैर-सरकारी निकायों को शामिल करना, (ii) निरीक्षण के लिए एक ब्लॉक विकास अधिकारी को शामिल करना, और (iii) लाभार्थी की मृत्यु के बाद आवासीय इकाई के स्वामित्व को नामित व्यक्ति को हस्तांतरित करना।
  • वित्तीय सहायता: कमिटी ने गौर किया कि कोलेट्रल की शर्त और उच्च ब्याज दरों के कारण घरों के निर्माण के लिए 70,000 रुपए का ऋण प्राप्त करने में लाभार्थियों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त उसने यह भी कहा कि निर्माण के खर्चों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वित्त की आवश्यकता की फिर से जांच की जाए। कमिटी ने मंत्रालय से निम्नलिखित की सिफारिश की: (i) कोलेट्रल की शर्त को कम से कम करने और कम ब्याज दरों के साथ एक बेहतर ऋण उत्पाद प्रदान किया जाए, और (ii) मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों के लिए यूनिट सहायता को दस हजार रुपए (वर्तमान मूल्य सूचकांक के आधार पर) बढ़ाना, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में परिवहन लागत में वृद्धि हुई है।

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कैबिनेट ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ऑयल पाम को मंजूरी दी

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल पाम योजना को मंजूरी दी।[98]  इस योजना का उद्देश्य देश में कच्चे पाम तेल का उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। वर्तमान में भारत की कच्चे पाम तेल की 98% मांग आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। योजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • मूल्य आश्वासन: पाम ऑयल किसान फ्रेश फ्रूट बंच (एफएफबी) का उत्पादन करते हैं जिससे उद्योग द्वारा तेल निकाला जाता है। एफएफबी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे पाम तेल की कीमतों से जुड़ी हुई हैं और इसीलिए इसमें परिवर्तन होता रहता है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को एफएफबी के लिए एक आश्वस्त वायबिलिटी मूल्य प्रदान किया जाएगा। पिछले पांच वर्षों की औसत कीमतों और थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर हर साल वायबिलिटी मूल्य को संशोधित किया जाएगा। उद्योगों के लिए भी अनिवार्य होगा कि वे एफएफबी के लिए न्यूनतम मूल्य का भुगतान करें। यदि यह आश्वस्त मूल्य से कम है, तो अंतर को वायबिलिटी गैप फंडिंग के माध्यम से पूरा किया जाएगा। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण का उपयोग करके इसे किसानों के खाते में जमा किया जाएगा। इसे अपनाने वाली राज्य सरकारों को केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन करना होगा।
     
  • इनपुट्स और पहल: योजना फसलों में इनपुट (जैसे रोपण सामग्री) और अन्य कार्यों के लिए सहायता प्रदान करती है। उदाहरण के लिए पाम ऑयल के लिए रोपण सामग्री के लिए प्रति हेक्टेयर 29,000 रुपए की सहायता प्रदान की जाएगी। 15 हेक्टेयर भूमि के लिए 80 लाख रुपए तक सीड गार्डन उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही पुराने बागानों को फिर से लगाने और पुनर्जीवित करने के लिए किसानों को प्रति पौधा 250 रुपए दिए जाएंगे।
     
  • पूर्वोत्तर और अंडमान क्षेत्र को सहायता: इस योजना में पूर्वोत्तर और अंडमान क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं। उदाहरण के लिए इन क्षेत्रों के किसानों को मूल्य आश्वासन के हिस्से के रूप में कच्चे पाम तेल की कीमत का 2% अतिरिक्त दिया जाएगा। आगे निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए क्षेत्र के उद्योगों को उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर पूंजी सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त टेरेस फार्मिंग करने और बायो फेंसिंग के साथ-साथ एकीकृत खेती को सक्षम करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

यह योजना नवंबर 2037 तक लागू रहेगी। इस योजना का कुल परिव्यय 11,040 करोड़ रुपए है, जिसमें से 8,844 करोड़ रुपए (80%) केंद्र सरकार और बाकी संबंधित राज्य सरकारें देगी।

 

वाणिज्य

निर्यात उत्पाद योजना पर शुल्क और करों की छूट अधिसूचित 

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

विदेश व्यापार महानिदेशालय ने निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट संबंधी योजना के लिए दिशानिर्देशों और दरों को अधिसूचित किया।[99] योजना की प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एप्लिकेबिलिटी: यह योजना 1 जनवरी, 2021 से सभी निर्यातों पर लागू होगी। यह योजना उत्पादों की कुछ श्रेणियों के लिए उपलब्ध नहीं होगी, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अन्य देशों में होने वाले निर्यात, लेकिन भारत के माध्यम से ट्रांस-शिप किए गए, (ii) न्यूनतम निर्यात मूल्य या निर्यात शुल्क के अधीन निर्यात, (iii) 100% निर्यात उन्मुख इकाइयों द्वारा निर्मित/ निर्यात किए गए उत्पाद, और (iv) मुक्त व्यापार क्षेत्रों, निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्रों या विशेष आर्थिक क्षेत्रों में इकाइयों द्वारा निर्मित/निर्यात किए गए उत्पाद।
     
  • लेवी के प्रकार: यह योजना वर्तमान में रीफंड का प्रावधान करती है जिन्हें फिलहाल रीफंड नहीं किया जाता। ये इस प्रकार हैं: (i) केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर निर्यात किए गए उत्पादों पर शुल्क/कर/लेवी जिसमें निर्यात किए गए उत्पादों के उत्पादन में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर संचयी अप्रत्यक्ष कर शामिल हैं, और (ii)  निर्यातित उत्पादों के वितरण के संबंध में अप्रत्यक्ष शुल्क/कर/लेवी। योजना के अंतर्गत उल्लिखित दरों में 8,555 टैरिफ लाइनें (उत्पाद श्रेणियां) शामिल होंगी।
  • रीफंड राशि का कैलकुलेशन: रिफंड राशि फ्रेट ऑन बोर्ड वैल्यू के प्रतिशत के रूप में अधिसूचित दर पर दी जाएगी। कुछ निर्यात उत्पादों पर छूट भी निर्यातित उत्पाद के प्रति इकाई मूल्य की सीमा के अधीन होगी। कुछ निर्यातित वस्तुओं के लिए, प्रति यूनिट छूट राशि की एक निश्चित मात्रा अधिसूचित की जा सकती है। योजना के अंतर्गत छूट हस्तांतरणीय शुल्क क्रेडिट/इलेक्ट्रॉनिक स्क्रिप के रूप में जारी की जाएगी जिसे केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा इलेक्ट्रॉनिक लेज़र में रखा जाएगा। स्क्रिप का उपयोग केवल सीमा शुल्क के भुगतान के लिए किया जा सकता है। 

 

श्रम

बढ़ती बेरोजगारी और नौकरियों के नुकसान पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

Shruti Gupta (shruti@prsindia.org) 

श्रम संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: भर्तृहरि महताब) ने ‘बढ़ती बेरोजगारी पर कोविड-19 का प्रभाव और संगठित एवं असंगठित क्षेत्रों में नौकरियों/आजीविका का नुकसान’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[100]  कमिटी के मुख्य निष्कर्षो और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अनौपचारिक क्षेत्र: कमिटी ने कहा कि भारत में 90% श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं। इन श्रमिकों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) प्रवासी श्रमिक, (ii) कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक, (iii) निर्माण श्रमिक और (iv) फुटपाथी दुकानदार। कमिटी ने कहा कि मौसमी रोजगार और असंगठित क्षेत्रों में नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों की कमी के कारण महामारी में इन श्रमिकों पर सबसे बुरा असर हुआ। कमिटी ने केंद्र और राज्य सरकारों को निम्नलिखित उपाय करने का सुझाव दिया: (i) उद्यमिता के अवसरों को बढ़ावा देना, (ii) परंपरागत मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करना और औद्योगिक क्लस्टर्स को विकसित करना, और (iii) सामाजिक सुरक्षा उपायों को मजबूती देना। 
     
  • महामारी से प्रभावित श्रमिक: कमिटी ने कहा कि शहरी गरीब, महिलाएं और कैजुअल श्रमिक महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उसने प्रत्येक समूह पर इस असर को कम करने के लिए विशिष्ट उपायों का सुझाव दिया। उदाहरण के लिए उसने ऐसी योजनाएं लागू करने का सुझाव दिया जोकि शहरी गरीबों को आश्रय, बिजनेस स्पेस तक पहुंच, संस्थागत ऋण और नकद अनुदान प्रदान करे। उसने यह सुझाव भी दिया कि शहरी इलाकों में रोजगार को उत्पन्न करने के लिए लोक निर्माण (जैसे स्कूल, अस्पताल और आंतरिक सड़कें) के कार्य किए जाएं।
     
  • डेटा की उपलब्धता: कमिटी ने कहा है कि महामारी के असर से निपटने के लिए सटीक और समय पर डेटा उपलब्ध होना चाहिए। उसने कहा कि कई रिपोर्ट्स समय पर जारी नहीं की गईं। जैसे पीरिऑडिक लेबर फोर्स सर्वे को 2018-19 से जारी नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त कमिटी ने कहा कि असंगठित श्रमिकों के व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस को बनाने के काम में देरी हो रही है।
     
  • श्रमिकों को लाभ: कमिटी ने सुझाव दिया कि जिन योजनाओं के लिए स्वैच्छिक आधार पर रजिस्ट्रेशन का प्रावधान है (जैसे प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना), उनके लिए प्रचार अभियान शुरू किए जाएं। इसके अतिरिक्त उसने निम्नलिखित योजनाओं का सुझाव दिया: (i) एक देश एक राशन कार्ड योजना, (ii) रेहड़ी पटरी वाले दुकानदारों के लिए पीएम-स्वनिधि योजना के अंतर्गत ऋण राशि को सीधे नकद अनुदान में परिवर्तित करना, (iii) कुछ रोजगार गारंटी योजनाओं के अंतर्गत कार्य आबंटन और वैधता का विस्तार (आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना)। कमिटी ने स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच को कानूनी अधिकार बनाने का सुझाव दिया।

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असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण के लिए पोर्टल लॉन्च

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

केंद्र सरकार ने असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया।[101],[102] पोर्टल 38 करोड़ असंगठित श्रमिकों को पंजीकृत करने का प्रयास करता है, और इसके जरिए वे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लागू सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। पोर्टल पर पंजीकरण मुफ्त होगा और इसे ऑनलाइन किया जा सकता है। पंजीकृत श्रमिकों को यूनिक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर वाला ई-श्रम कार्ड मिलेगा और वे कार्ड के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण के लिए पोर्टल का प्रबंधन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाएगा। 

पोर्टल पर पंजीकृत प्रत्येक असंगठित श्रमिक दो लाख रुपए के दुर्घटना बीमा का पात्र होगा। यदि कोई पंजीकृत कर्मचारी दुर्घटना का शिकार हो जाता है, तो वह मृत्यु या स्थायी विकलागंता पर दो लाख रुपए और आंशिक विकलांगता पर एक लाख रुपए पाने का पात्र होगा।

व्यापारियों और स्वरोजगार प्राप्त व्यक्तियों को राष्ट्रीय पेंशन योजना के अंतर्गत लाभ हेतु आधार जरूरी

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने व्यापारियों, दुकानदारों और स्वरोजगार प्राप्त व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना, 2019 के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आधार की आवश्यकता के लिए एक अधिसूचना जारी की।[103]  योजना के अंतर्गत 60 वर्ष का होने के बाद लाभार्थी प्रति माह 3,000 रुपए की न्यूनतम पेंशन के हकदार है। 

अधिसूचना में व्यक्तियों को योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आधार होने का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा या आधार प्रमाणीकरण कराना होगा। लाभ के इच्छुक लोगों, जिनके पास आधार नंबर नहीं है (हालांकि आधार प्राप्त करने का हकदार है), को आधार के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन के बाद जब तक उसे आधार नहीं मिल जाता, उसे योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए अपने पैन कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक या दूसरे डॉक्यूमेंट्स के साथ अपनी आधार नामांकन पहचान पर्ची पेश करनी होगी। 

ऐसे मामलों में जहां फिंगरप्रिंट क्वालिटी के खराब होने, असफल बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या किसी अन्य वजह से प्रमाणीकरण विफल हो जाता है, प्रमाणीकरण के लिए कुछ उपाय किए जाएंगे। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) फिंगरप्रिंट स्कैनर के साथ आईरिस स्कैनर प्रदान करना, (ii) ऑफलाइन प्रमाणीकरण प्रणाली जैसे आधार वन-टाइम पासवर्ड या टाइम-आधारित वन-टाइम पासवर्ड, और (iii) क्विक रिस्पांस (क्यूआर) कोड रीडर्स जोकि फिजिकल आधार लेटर्स पर छपे क्यूआर कोड के जरिए उसका सत्यापन करता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र लाभार्थी आधार न होने के कारण योजना के लाभों से वंचित न रहे, मंत्रालय अपवादों से निपटने की व्यवस्था करेगा। इसमें निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) पहचान के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर लाभ प्रदान करना, और (ii) विकलांग व्यक्तियों और वरिष्ठ नागरिकों के नामांकन के लिए विशेष व्यवस्था करना।[104]

 

जल संसाधन

Tushar Chakrabarty (tushar@prsindia.org)

बाढ़ प्रबंधन पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट 

जल संसाधन संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: संजय जैसवाल) ने ‘देश में बाढ़ प्रबंधन और चीन, पाकिस्तान एवं भूटान के साथ संधि/समझौते के विशेष संदर्भ के साथ जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जल संधियां’ विषय पर को अपनी रिपोर्ट सौंपी।[105]  कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • समवर्ती सूची के अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण: कमिटी ने कहा कि संविधान के अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण का काम संबंधित राज्य के क्षेत्राधिकार में आता है। चूंकि अधिकतर नदियां कई राज्यों में बहती हैं, इसलिए किसी एक राज्य के बाढ़ नियंत्रण उपायों का असर कई राज्यों पर पड़ता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को संविधान की समवर्ती सूची में रखने पर आम सहमति कायम करनी चाहिए।
     
  • राष्ट्रीय एकीकृत बाढ़ प्रबंधन समूह: कमिटी ने सुझाव दिया कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय एकीकृत बाढ़ प्रबंधन समूह की स्थापना की जाए जो बाढ़ नियंत्रण के लिए जिम्मेदार व्यापक निकाय होगा। समूह में सदस्य के रूप में राज्यों के संबंधित मंत्री शामिल हो सकते हैं जो साल में कम से कम एक बार बैठक जरूर करें। यह निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होना चाहिए: (i) बाढ़ की रोकथाम और शमन के लिए रणनीतियां बनाना, और (ii) बाढ़ के प्रबंधन की निगरानी करना, जिसमें राज्यों या स्थानीय सरकारों द्वारा नियंत्रित पहलु तथा अंतरराष्ट्रीय लिंकेज के अंतर्गत आने वाले पहलू शामिल हैं।

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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस

Shashank Srivastava (shashank@prsindia.org) 

रीटेल आउटलेट्स और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशनशिप के आबंटन पर कमिटी की रिपोर्ट

पेट्रोल एवं प्राकृतिक गैस संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: रमेश बिधूड़ी) ने ‘रीटेल आउटलेट्स और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशनशिप का आबंटन’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[106]  कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • आबंटन की प्रक्रिया: वर्तमान में तेल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसीज़) ऑनलाइन आवेदनों के जरिए अपने रीटेल आउटलेट्स के लिए डीलरों का चयन करती हैं। कमिटी ने कहा कि इस आबंटन प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए अदालतों में कई कानूनी मामले दायर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त इसके लिए न तो कोई फीडबैक व्यवस्था है, और न ही ऐसा कोई अध्ययन किया गया है जिससे इस प्रक्रिया के प्रभाव का पता चले। उसने सुझाव दिया कि मंत्रालय को एक फीडबैक प्रणाली विकसित करनी चाहिए और आबंटन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक स्टडी करनी चाहिए। इन मामलों को खत्म या उनकी संख्या को कम करने के लिए एक आसान और पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए।
     
  • कमिटी ने गौर किया कि 2018 के बाद से अनुमोदित 29,501 रीटेल आउटलेट्स में से सिर्फ एक तिहाई को कमीशन किया गया है। उसने कहा कि प्रत्येक लोकेशन की जटिलता और और प्रशासन की तरफ से अनुमोदन में देरी ने आबंटन प्रक्रिया को थकाऊ और बोझिल बनाया है। कमिटी ने मंत्रालय को सुझाव दिया कि राज्य सरकारों के लिए ड्राफ्ट दिशानिर्देश प्रस्तावित करे और अनुमोदन मिलने में देरी न लगे, इसके लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम बनाया जाए।
     
  • कमिटी ने कहा कि रीटेल आउटलेट्स और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशनशिप्स के आबंटन के दिशानिर्देशों में एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों में आरक्षण दिया गया है। उसने दिशानिर्देशों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के समावेश का सुझाव दिया।
     
  • विपणन अनुशासन दिशानिर्देश (मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइन्स (एमडीजी): रीटेल आउटलेट्स में आचार नीति और ग्राहक सेवा का स्तर बढ़ाने के लिए 1982 से एमडीजी को लागू किया गया है। इन दिशानिर्देशों में कई दंडनीय प्रावधानों को निर्धारित किया गया है, जैसे सेल्स/सप्लाई को निरस्त करना, जुर्माना लगाना और कदाचार करने पर डिस्ट्रिब्यूशनशिप की समाप्ति। कमिटी ने कुछ ऐसे मामलों पर गौर किया जब तेल मार्केटिंग कंपनियां ने ज्यादा सजा देकर एमडीजीज़ को लागू करने के लिए जोर-जबरदस्ती का इस्तेमाल किया। उसने सुझाव दिया कि देश भर में सजा देने का तरीका भी सुसंगत होना चाहिए।

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ऊर्जा

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

भारत में ज्वारीय ऊर्जा विकास पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

ऊर्जा संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: राजीव रंजन सिंह) ने ‘भारत में ज्वारीय ऊर्जा विकास’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[107]  ज्वारीय ऊर्जा यानी टाइडल एनर्जी का मतलब है, समुद्री ज्वार की गति से पैदा होने वाली ऊर्जा। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ज्वारीय ऊर्जा की क्षमता का मूल्यांकन: कमिटी ने कहा कि समुद्री ऊर्जा के तीन प्रकार हैं: (i) तरंग, (ii) ज्वार, और (iii) समुद्री-तापीय। ज्वारीय और तरंग ऊर्जा की सैद्धांतिक क्षमता क्रमशः 12.5 गिगावॉट और 41.3 गिगावॉट है। समुद्री-तापीय ऊर्जा की क्षमता का अनुमान अब तक नहीं लगाया गया है। कमिटी के अनुसार, उपरोक्त क्षमता का मतलब व्यावहारिक रूप से दोहन योग्य क्षमता नहीं है। इसलिए कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को ज्वारीय, तरंग और समुद्री ऊर्जा की दोहन योग्य क्षमता का फिर से मूल्यांकन करना चाहिए।
  • ज्वारीय ऊर्जा संयंत्र की लागत: कमिटी ने कहा कि उच्च लागत के कारण ज्वारीय ऊर्जा के निम्नलिखित दो संयंत्र बंद हो गए: (i) पश्चिम बंगाल में 37.5 मेगावॉट का संयंत्र (जिसकी लागत 63.5 करोड़ रुपए प्रति मेगावॉट थी), और (ii) गुजारत में 50 मेगावॉट का संयंत्र (जिसकी लागत 15 करोड़ रुपए प्रति मेगावॉट थी)। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को ज्वारीय ऊर्जा की मौजूदा लागत का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए ताकि लंबे समय में उसके आर्थिक महत्व और लाभ को निर्धारित किया जा सके।
     
  • पायलट ज्वारीय ऊर्जा प्रॉजेक्ट को लगाना: भारत में 2022 के अक्षय ऊर्जा लक्ष्य (175 गिगावॉट) में ज्वारीय ऊर्जा शामिल नहीं है। हालांकि कमिटी के अनुसार, नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के सबमिशन में कहा गया है कि 2030 के लक्ष्य में अक्षय ऊर्जा के सभी स्रोत पात्र होंगे। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को पायलट ज्वारीय ऊर्जा प्रॉजेक्ट लगाना चाहिए। इस प्रॉजेक्ट को कच्छ की खाड़ी में लागत प्रभावी स्थान पर लगाया जाना चाहिए।

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कोयला ब्लॉक्स के विकास पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

ऊर्जा संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: राजीव रंजन सिंह) ने ‘बिजली क्षेत्र की कंपनियों को आबंटित कोयला ब्लॉक्स का विकास’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कोयले का आयात: कमिटी ने कहा कि प्रचुर मात्रा में कोयला भंडार होने के बावजूद भारत बड़ी मात्रा में कोयले का आयात करता है। उसने गौर किया कि आयात का एक प्रमुख कारण कोयले की बेहतर गुणवत्ता है। इसके अतिरिक्त कुछ थर्मल पावर प्लांट्स को आयातित कोयले का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जबकि कुछ अन्य को सम्मिश्रण उद्देश्यों के लिए इसकी जरूरत होती है।
     
  • कमिटी ने सुझाव दिया कि कोयले के आयात को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना चाहिए। ऐसा स्वदेशी कोयले की गुणवत्ता को बढ़ाकर और पावर प्लांट्स में बॉयलरों के डिजाइन को संशोधित करके उन्हें स्वदेशी कोयले के अनुकूल बनाने के जरिए किया जा सकता है।
     
  • थर्मल पावर प्लांट्स का भविष्य: कमिटी ने कहा कि इस दशक में कोयला बिजली का मुख्य स्रोत बना रहेगा। यह गौर किया कि 2029-30 तक भारत की स्थापित थर्मल पावर क्षमता में 30% की वृद्धि हो सकती है (2020-21 में 205 मेगावाट से 2029-30 तक 267 मेगावाट)। यह भी देखा गया कि वर्तमान में, थर्मल पावर प्लांट अपनी क्षमता के लगभग आधे पर चल रहे हैं। हालांकि, भविष्य में उनका क्षमता उपयोग बढ़ाया जा सकता है जिससे कोयले की जरूरत बढ़ सकती है। उसने सुझाव दिया कि उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके थर्मल पावर प्लांट्स से उत्सर्जन को कम किया जाना चाहिए।

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ऊर्जा क्षेत्र की बिजली परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट 

ऊर्जा संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: राजीव रंजन सिंह) ने 5 अगस्त, 2021 को ‘ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों द्वारा बिजली परियोजनाओं के कार्यान्वयन/पूरा करने में विलंब’ विषय पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[108]  कमिटी ने निम्नलिखित मुद्दों पर गौर किया: (i) 13 में से 12 हाईड्रो प्रॉजेक्ट्स, (ii) 34 में से 30 थर्मल प्रॉजेक्ट्स, (iii) 42 में से 18 ट्रांसमिशन प्रॉजेक्ट्स, और (iv) 26 में से एक रीन्यूएबल प्रॉजेक्ट्स के कार्यान्वयन में देरी हुई थी। इस देरी से समय के साथ-साथ लागत भी बढ़ गई। उदाहरण के लिए 12 हाइड्रो प्रॉजेक्ट्स के कार्यान्वयन में देरी से 100 वर्षों से ज्यादा का कुल समय बढ़ गया और लागत 31,530 करोड़ रुपए बढ़ गई। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कॉन्ट्रैक्ट संबंधी विवाद: कमिटी ने गौर किया कि भूमि अधिग्रहण और कॉन्ट्रैक्ट संबंधी विवादों के कारण मुख्यतया बिजली परियोजनाओं में देरी होती है। कमिटी ने कहा कि यह समस्या इसलिए उठती है क्योंकि परियोजनाओं का लागत अनुमान और लागत प्रबंधन खराब है और धनराशि भी पर्याप्त नहीं है।

कमिटी ने सुझाव दिया कि कॉन्ट्रैक्ट देने के चरण में प्रॉजेक्ट डेवलपर और कॉन्ट्रैक्टर को पूरा ध्यान देना चाहिए और कॉन्ट्रैक्ट के नियम एवं शर्तों पर सावधानी से विचार-विमर्श करना चाहिए। डॉक्यूमेंट्स में कॉन्ट्रैक्ट के हर स्तर पर कड़े नियम और सजा के साथ उपयुक्त उपायों का जिक्र होना चाहिए। थर्मल पावर प्रॉजेक्ट्स को ऋण देने के लिए बैंकों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण की उप क्षेत्रीय सीमा को तय करना चाहिए।

  • बिजली परियोजनाओं की समीक्षा और निगरानी तंत्र: कमिटी ने कहा कि नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) परियोजनाओं की समीक्षा के लिए तीन स्तरीय परियोजना प्रबंधन प्रणाली पर निर्भर करता है। इस प्रणाली में एनटीपीसी के इंजीनियरिंग प्रबंधन, कॉन्ट्रैक्ट प्रबंधन और निर्माण प्रबंधन नियंत्रण केंद्र एकीकृत किए गए हैं। केंद्रीय बिजली अथॉरिटी और ऊर्जा मंत्रालय बिजली परियोजनाओं की आवर्ती समीक्षा भी करते हैं। कमिटी ने कहा कि उचित निगरानी तंत्र की कमी से परियोजनाओं में विलंब होता है और समय एवं लागत बढ़ जाते हैं।

कमिटी ने सुझाव दिया कि नियमित समीक्षा बैठकों के अतिरिक्त सभी प्रॉजेक्ट साइट्स पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आधारित परियोजना प्रबंधन, निगरानी और फॉलोअप प्रणाली शुरू की जानी चाहिए। सभी स्टेकहोल्डर्स (जैसे सप्लायर्स, प्रॉजेक्ट डेवलपर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स) से इस प्रणाली की ऑनलाइन कनेक्टिविटी होनी चाहिए

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ड्राफ्ट बिजली (हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस के जरिए अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा) नियम, 2021 पर टिप्पणियां आमंत्रित

ऊर्जा मंत्रालय ने ड्राफ्ट बिजली (हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस के जरिए अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा) नियम, 2021 पर टिप्पणियां आमंत्रित कीं।[109]  ड्राफ्ट नियम बिजली उपभोक्ताओं के लिए अक्षय ऊर्जा (सौर, पवन और वेस्ट टू एनर्जी जैसे स्रोतों से) के ओपन एक्सेस के लिए एक रूपरेखा का प्रस्ताव करते हैं। ओपन एक्सेस का मतलब है कि उपभोक्ता को स्थानीय क्षेत्र के एकाधिकार वाली यूटिलिटी के अलावा, अपनी पसंद की यूटिलिटी से बिजली खरीदने की अनुमति देना। इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत केवल मांग करने वाले या 100 किलोवाट या उससे अधिक के स्वीकृत लोड वाले उपभोक्ता ही पात्र होंगे। नियमों की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • नोडल एजेंसी: केंद्र सरकार एक नोडल एजेंसी को अधिसूचित करेगी, जो अक्षय ऊर्जा के ओपन एक्सेस के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के रूप में काम करेगी। अल्पावधि के लिए, उपयुक्त लोड डिस्पैच सेंटर को नोडल एजेंसी के रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए। मध्यम और लंबी अवधि के लिए राज्य या केंद्रीय यूटिलिटी को नोडल एजेंसी के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। किसी भी पात्र व्यक्ति को ओपन एक्सेस के लिए नोडल एजेंसी को आवेदन करना होगा।
     
  • मांग का प्रबंधन: हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस के कैप्टिव उपभोक्ताओं के लिए विद्युत आपूर्ति की कोई सीमा नहीं होगी। हालांकि ड्राफ्ट नियम एक वितरण लाइसेंसधारी के लिए मांग में बहुत अधिक भिन्नता से बचने हेतु एक तंत्र प्रदान करने की सलाह देते हैं (जैसे कि न्यूनतम समय जिसके लिए उपभोक्ता को ओपन एक्सेस के माध्यम से खपत की गई बिजली की मात्रा में परिवर्तन नहीं करना चाहिए)।
     
  • क्रॉस सबसिडी का सरचार्ज: हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए यह सरचार्ज उन वर्षों के लिए निर्धारित सरचार्ज के 50% से अधिक नहीं बढ़ाया जाएगा, जिसमें ओपन एक्सेस दिया गया था। यह सीमा उत्पादन संयंत्र के चालू होने की तारीख से 12 वर्षों के लिए लागू होगी बशर्ते कि उत्पादन संयंत्र अक्षय स्रोतों से ऊर्जा का उत्पादन करता हो। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट्स से ओपन एक्सेस वाले उपभोक्ताओं पर कोई क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज लागू नहीं होगा

ड्राफ्ट नियमों पर 15 सितंबर, 2021 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

बिजली (देर से भुगतान पर सरचार्ज) नियम, 2021 पर प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली (देर से भुगतान पर सरचार्ज) संशोधन नियम, 2021 के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[110]  ड्राफ्ट नियमों में बिजली (देर से भुगतान पर सरचार्ज) नियम, 2021 में संशोधन का प्रस्ताव है।[111]  

2021 के नियम एक उत्पादन कंपनी या एक ट्रेडिंग लाइसेंसधारी या ट्रांसमिशन कंपनी को वितरण लाइसेंसधारियों के ओवरड्यू पेमेंट्स पर देर से भुगतान करने पर सरचार्ज लगाने का प्रावधान करते हैं। 2021 के नियम वितरण लाइसेंसधारी द्वारा पहले विलंबित भुगतान सरचार्ज और फिर मासिक शुल्क (सबसे लंबे ओवरड्यू बिल से शुरू) के लिए किसी भी भुगतान के समायोजन का प्रावधान करते हैं।111 

  • भुगतानों का समायोजन: ड्राफ्ट नियमों में प्रस्ताव है कि वितरण लाइसेंसधारी द्वारा भुगतान पहले सबसे पुरानी खरीद के लिए किया जाना चाहिए और फिर बाद की खरीद के लिए भुगतान किया जाना चाहिए।110 यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी नई खरीद के भुगतान से पहले सभी पुराने भुगतान किए गए हैं।110
  • चूक (डीफॉल्ट) के मामले में बिजली बेचने की स्वतंत्रता: इसके अतिरिक्त ड्राफ्ट नियमों में प्रस्ताव है कि वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा भुगतान में चूक की स्थिति में एक उत्पादन कंपनी किसी अन्य लाइसेंसधारी या पावर एक्सचेंज को बिजली बेच सकती है। यह लागू होगा, अगर वितरण लाइसेंसी जिसके साथ उत्पादन कंपनी का पीपीए हुआ है, समझौते के अनुसार देय तिथि के सात महीने के बाद बकाया राशि (देर से भुगतान पर सरचार्ज सहित) नहीं चुकाती। ऐसे मामलों में उत्पादन कंपनी नियत शुल्क और कैपिसिटी शुल्क के लिए वितरण लाइसेंसधारी पर दावा बरकरार रखेगी। ऐसे दावों के लिए उत्पादन कंपनी को 15 दिन का नोटिस देना होगा।110 

ट्रांसमिशन परियोजनाओं और ट्रांसमिशन सेवाओं के संबंध में दिशानिर्देश जारी

ऊर्जा मंत्रालय ने निम्नलिखित के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं: (i) ट्रांसमिशन परियोजनाओं के विकास में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना, और (ii) ट्रांसमिशन सेवाओं के लिए शुल्क-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली।[112]  ट्रांसमिशन परियोजनाओं के विकास के लिए दिशानिर्देशों की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:112

  • योजनाएं बनाना: दिशानिर्देश भारत में एक मजबूत और एकीकृत बिजली प्रणाली विकसित करने के लिए केंद्रीय अधिकारियों द्वारा तैयार की जाने वाली कुछ योजनाओं को निर्दिष्ट करते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) केंद्रीय बिजली अथॉरिटी (सीईए) द्वारा 15 साल के लिए पर्सपेक्टिव प्लान, (ii) सीईए द्वारा पांच साल के लिए शॉर्ट टर्म प्लान, और (iii) केंद्रीय ट्रांसमिशन यूटिलिटी का नेटवर्क प्लान। एक बार इन योजनाओं के तैयार हो जाने के बाद सरकार द्वारा सभी ट्रांसमिशन परियोजनाओं को प्रतिस्पर्धी बोली (इस कवरेज से छूट प्राप्त को छोड़कर) के लिए इस योजना के अंतर्गत कवर किया जाएगा। यह सभी अंतरराज्यीय और परस्पर राज्यों के बीच की परियोजनाओं पर लागू होगा।
     
  • प्रॉजेक्ट डेवलपर्स का चयन: प्रॉजेक्ट डेवलपर्स की पहचान टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी ई-रिवर्स बिडिंग प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। ई-रिवर्स बिडिंग प्रक्रिया उस प्रक्रिया को कहते हैं जहां एक विक्रेता उस कीमत के लिए बोली लगाता है जिस पर वह अपना माल बेचने को तैयार होता है। सभी परियोजनाओं को बिल्ड, ओन, ऑपरेट और ट्रांसफर मोड पर प्रदान किया जाएगा। (i) अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन परियोजनाएं 35 वर्ष की होंगी, और (ii) परस्पर राज्यों की परियोजनाएं 35 वर्ष की हो सकती हैं या जैसा कि दीर्घकालिक ट्रांसमिशन ग्राहक या बिडिंग प्रक्रिया के कोऑर्डिनेटर द्वारा निर्धारित किया गया हो।

ट्रांसमिशन सेवाओं की खरीद के लिए दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • ट्रांसमिशन सेवाओं के लिए बोली का मूल्यांकन: ट्रांसमिशन सेवाओं की खरीद दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से होगी। पहले चरण में, दूसरे चरण (ई-रिवर्स बिडिंग प्रक्रिया) के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए वार्षिक ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर बोलियों का मूल्यांकन किया जाएगा। ई-रिवर्स बिडिंग प्रक्रिया में, बोलीदाताओं को प्रचलित न्यूनतम बोली से कम से कम 0.25% कम बोली लगानी होगी।
     
  • बोली का मूल्यांकन करने वाली समिति: सीईए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणालियों के लिए बोलियों के मूल्यांकन के लिए एक मूल्यांकन समिति का गठन करेगा। समिति में निम्न शामिल होंगे: (i) सीईए का कम से कम एक प्रतिनिधि, (ii) क्षेत्रीय बिजली समितियों के कम से कम दो प्रतिनिधि, और (iii) एक स्वतंत्र सदस्य। राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी या राज्य सरकार परस्पर राज्यों की ट्रांसमिशन सेवाओं के लिए मूल्यांकन समिति का गठन करेगी।

मौजूदा बिजली मीटरों को प्री-पेड स्मार्ट मीटर से बदलने की समय सीमा अधिसूचित

बिजली मंत्रालय ने मौजूदा बिजली मीटरों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर से बदलने की समय सीमा अधिसूचित की।[113]  प्री-पेड स्मार्ट मीटर प्री-पेमेंट सुविधा के साथ तकनीकी रूप से उन्नत मीटर (स्वचालित मीटर रीडिंग जैसी सुविधाओं के साथ) होते हैं। इसका मतलब है कि उपभोक्ता बिजली का उपयोग करने के लिए अग्रिम भुगतान करता है। अग्रिम भुगतान को शेष राशि के रूप में मीटर में लोड किया जाता है, जिसे उपभोक्ता के बिजली के उपयोग के आधार पर काट लिया जाता है। इस नई समय सीमा की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • उपभोक्ताओं के लिए समय सीमा: ऊर्जा मंत्रालय ने निर्दिष्ट किया है कि कुछ उपभोक्ताओं के मौजूदा मीटर को दिसंबर 2023 तक प्रीपेड स्मार्ट मीटर से बदल दिया जाना चाहिए। इन उपभोक्ताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सभी केंद्र शासित प्रदेशों के सभी उपभोक्ता, (ii) शहरी क्षेत्रों में 50% उपभोक्ताओं से अधिक और 2019-20 में 25% से अधिक तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) नुकसान वाले बिजली के सभी डिवीजन, (iii) ब्लॉक स्तर और उससे ऊपर के सभी सरकारी कार्यालय, और (iv) सभी औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता। एटी एंड सी हानियां एक डिस्कॉम द्वारा खरीदी गई बिजली का वह अनुपात होता है, जिसके लिए उसे कुछ तकनीकी और वाणिज्यिक कारणों (जैसे बिजली की चोरी और बिलों का खराब संग्रह) से कोई भुगतान नहीं किया गया। संबंधित राज्य रेगुलेटरी आयोग अधिसूचना के माध्यम से समय सीमा को दो बार बढ़ा सकता है। एक्सटेंशन एक बार में छह महीने से अधिक के लिए नहीं होना चाहिए। 

अन्य सभी क्षेत्रों में, प्रीपेड मीटर मार्च 2025 तक लागू किए जाने चाहिए। कम्यूनिकेशन नेटवर्क के अभाव वाले क्षेत्रों में, संबंधित राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोग प्री-पेड मीटर के कार्यान्वयन की अनुमति दे सकता है।

  • फीडर्स और डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर्स के लिए समय सीमा: सभी फीडर और डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (डीटी) स्वचालित मीटर रीडिंग (एएमआर) वाले मीटर देंगे या उन्हें उन्नत मीटर इंफ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) के अंतर्गत कवर किया जाना चाहिए। एएमआर स्मार्ट मीटर में सुविधा को कहते हैं जो मीटर की स्वचालित रीडिंग को सक्षम बनाता है। एएमआई आमतौर पर पारंपरिक मीटर का डिजिटल संस्करण होता है।

दिसंबर 2022 तक सभी फीडरों की मीटरिंग की जानी चाहिए। दिसंबर 2023 तक निम्नलिखित डीटी को मीटर किया जाना जरूरी है: (i) शहरी क्षेत्रों में 50% से अधिक उपभोक्ताओं और 2019-20 में 15% से अधिक एटी एंड सी हानियां के साथ बिजली डिवीजनों के डीटी, और (ii) 2019-20 में 25% से अधिक एटी एंड सी हानियों के साथ अन्य सभी बिजली प्रभागों में डीटी। मार्च 2025 तक अन्य सभी डीटी को मीटर किया जाना चाहिए। 25 किलो वोल्ट-एम्पीयर से कम लोड वाले डीटी और उच्च वोल्टेज वितरण प्रणाली को समय-सीमा के पालन से छूट दी जा सकती है। 

 

संचार

ट्राई ने दूरसंचार की लेयर्स पर आधारित लाइसेंस व्यवस्था पर सुझाव जारी किए

Omir Kumar (omir@prsindia.org)

भारतीय दूरसंचार रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) ने डिफरेंशियल लाइसेंसिंग के माध्यम से दूरसंचार के विभिन्न स्तरों को अलग करने पर अपने सुझाव जारी किए।[114],[115]  ऐसा लाइसेंसिंग प्रणाली से निम्नलिखित की उम्मीद की जाती है: (i) निवेश को बढ़ावा देना, व्यापार करने में आसानी, और क्षेत्र में नवाचार, और (ii) दूरसंचार संसाधनों के साझाकरण और इष्टतम उपयोग को सक्षम करना। मौजूदा फ्रेमवर्क के अंतर्गत देश में सभी प्रकार की दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने के लिए एक एकीकृत लाइसेंस जारी किया जाता है। एक लाइसेंसधारी एकीकृत लाइसेंस के अंतर्गत दी जाने वाली सेवाओं (जैसे एक्सेस, इंटरनेट, या उपग्रह संचार) को चुन सकता है। एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था बुनियादी ढांचे, नेटवर्क, सेवा और एप्लिकेशन जैसे दूरसंचार के विभिन्न लेयर्स के बीच अंतर पैदा नहीं करती है। हाल के वर्षों में निम्नलिखित लाइसेंस पेश किए गए हैं जो एक निश्चित सीमा तक सेग्रेगेशन करते हैं: (i) इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता लाइसेंस, और (ii) सेवा स्तर पर वर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटर (वीएनओ) लाइसेंस। ट्राई ने कहा कि इनमें से किसी भी लाइसेंस के अंतर्गत नेटवर्क लेयर को अलग करने का कोई प्रावधान नहीं है। डिफरेंशियल लाइसेंसिंग पर ट्राई की प्रमुख सिफारिशों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • नेटवर्क लेयर्स को अलग-अलग करना: एकीकृत लाइसेंस के भीतर एक्सेस नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन नामक एक अलग ऑथराइजेशन स्तर प्रदान किया जाना चाहिए। एक्सेस नेटवर्क प्रोवाइडर्स सर्विस डिलीवरी ऑपरेटरों को थोक आधार पर नेटवर्क सेवाएं प्रदान करेंगे। उन्हें एकीकृत लाइसेंस के अंतर्गत उपभोक्ताओं को सीधे सेवाएं प्रदान करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि ऐसे नेटवर्क प्रदाता उपभोक्ताओं को सीधे सेवाएं देने के लिए वीएनओ लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं।
     
  • इन संस्थाओं को नीलामी के माध्यम से स्पेक्ट्रम प्राप्त करने और स्पेक्ट्रम व्यापार में प्रवेश करने की अनुमति होगी। उन्हें दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ अपने संसाधनों को साझा करने की भी अनुमति होगी। यदि एकीकृत लाइसेंस के अंतर्गत एक्सेस सर्विस ऑथराइजेशन वाला लाइसेंसधारी एक अलग नेटवर्क लेयर और सर्विस लेयर व्यवस्था में माइग्रेट करना चाहता है, तो इसकी अनुमति दी जाएगी। नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन पर लागू लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम शुल्क वही होंगे जो एक्सेस सेवा ऑथराइजेशन के लिए हैं। 
     
  • वीएनओ के लिए फ्रेमवर्क: एक पारदर्शी, निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से वीएनओ को थोक सेवाएं प्रदान करने के लिए एक्सेस नेटवर्क प्रोवाइडर्स और एकीकृत लाइसेंसधारियों हेतु एक ढांचा निर्धारित किया जाना चाहिए।

ट्राई ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए सुझाव जारी किए

Saket Surya (saket@prsindia.org)

ट्राई ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और ब्रॉडबैंड स्पीड बढ़ाने संबंधी रोडमैप पर अपने सुझाव जारी किए हैं।[116]  उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति 2018 का लक्ष्य 2022 तक सभी के लिए ब्रॉडबैंड का प्रावधान करना है।[117]  इस नीति के मद्देनजर दूरसंचार विभाग ने इस विषय पर ट्राई के सुझाव मांगे थे। ट्राई के प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं:

  • ब्रॉडबैंड की परिभाषा: वर्तमान में भारत में एक ब्रॉडबैंड कनेक्शन को एक व्यक्तिगत ग्राहक के लिए न्यूनतम डाउनलोड गति 0.512 एमबीपीएस (मेगाबिट प्रति सेकंड) के रूप में परिभाषित किया गया है। ट्राई ने इसे बढ़ाकर दो एमबीपीएस करने का सुझाव दिया है।
     
  • सेवा प्रदाताओं को इनसेंटिव्स: ट्राई ने सुझाव दिया कि दूरसंचार लाइसेंसधारियों को फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड (ग्राहक परिसर, यानी एक निश्चित स्थान के लिए प्रदान) के विकास में तेजी लाने के लिए इनसेंटिव प्रदान किया जाना चाहिए। इनसेंटिव कम से कम पांच वर्षों के लिए लाइसेंस शुल्क में कुछ छूट के रूप में होना चाहिए। ट्राई ने सुझाव दिया कि इनसेंटिव प्राप्त करने के लिए फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड ग्राहकों में शुद्ध वृद्धि को आधार बनाया जाए। ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने में रुचि रखने वाले केबल ऑपरेटरों को लास्ट माइल लिंकेज नेटवर्क स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के रूप में पंजीकृत केबल ऑपरेटरों के लिए ब्याज छूट योजना पर विचार किया जाना चाहिए।
     
  • सबस्क्राइबर्स को इनसेंटिव्स: फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सेवाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक पायलट प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना पर विचार किया जाना चाहिए। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में एक फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सबस्क्राइबर (पर्याप्त फिक्स्ड लाइन क्षमता लेकिन कम मांग के साथ) को मासिक सदस्यता शुल्क का 50%, अधिकतम 200 रुपए की प्रतिपूर्ति की जानी चाहिए।
     
  • स्पीड को बढ़ाना: मोबाइल ब्रॉडबैंड की स्पीड बढ़ाने हेतु सेलुलर नेटवर्क की बैकहॉलिंग कनेक्टिविटी (उच्च क्षमता वाली लाइनें) के लिए उपयोग किए जाने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम को सेवा प्रदाताओं को मांग पर और समयबद्ध तरीके से सौंपा जाना चाहिए।
     
  • राइट ऑफ वे: ट्राई के अनुसार, ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की मुख्य चुनौतियों में से एक है- राइट ऑफ वे की अनुमतियां। कमिटी ने सुझाव दिया कि राइट ऑफ वे अनुमति हेतु राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना तैयार की जानी चाहिए। सड़क मार्ग, रेल, गैस और पानी की पाइपलाइनों में कॉमन डक्ट्स बनाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

 

इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

स्टार्टअप एक्सेरेटर को सहयोग देने के लिए समृद्ध योजना प्रारंभ

इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने उत्पाद, नवाचार विकास और वृद्धि के लिए एमईआईटीवाई के स्टार्ट-अप एक्सीलेरेटर (समृद्ध) नाम से एक नई योजना शुरू की।[118]  यह योजना उत्पाद-आधारित सॉफ़्टवेयर स्टार्टअप्स को बड़े पैमाने पर मदद करने वाले स्टार्टअप एक्सेलेरेटर को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। एक्सेलेरेटर ऐसी संस्थाएं हैं जो शिक्षा, परामर्श और वित्तपोषण के माध्यम से शुरुआती चरण के स्टार्टअप का सहयोग करती हैं। इस योजना के अंतर्गत तीन वर्षों में कुल वित्तीय परिव्यय 99 करोड़ रुपए होने की उम्मीद है। योजना की मुख्य विशेषताएं हैं:

  • वित्तीय सहयोग: एक एक्सेलेरेटर को प्रति स्टार्टअप दो लाख रुपए का बजट दिया जाएगा और वह एक समूह में पांच से 10 स्टार्टअप को सहयोग देगा। इसके अतिरिक्त एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब (एमएसएच) एक स्टार्टअप में 40 लाख रुपए तक का निवेश करेगा, जो एक्सेलेरेटर के समूह का हिस्सा है (इक्विटी के बदले)। एमएसएच मंत्रालय की एक नोडल एजेंसी है और योजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी होगी। उस स्टार्टअप में एक्सेलेरेटर या निवेशक को भी उतना ही निवेश करना होगा।
     
  • चयन की प्रक्रिया: निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करने पर एक्सेलेरेटर योजना के अंतर्गत सहयोग के पात्र होंगे: (i) उसे इन्क्यूबेशन के कारोबार में तीन वर्ष से अधिक का अनुभव हो और उसने 50 स्टार्टअप्स से अधिक को सहयोग दिया हो जिसमें से कम से कम 10 को नॉन-पब्लिक निवेश प्राप्त हुआ हो, या (ii) योजना के अंतर्गत लक्षित गतिविधियों में लगे स्टार्टअप्स के कम से कम तीन समूहों को चलाने का उसके पास अनुभव होना चाहिए। एक्सेलेरेटर को निम्नलिखित के संबंध में क्षमताओं का प्रदर्शन करना चाहिए: (i) घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव में स्टार्टअप्स का सहयोग करना, (ii) उन्हें निवेशकों से जुड़ने में मदद करना, और (iii) डीप-टेक सॉफ्टवेयर प्रॉडक्ट स्टार्टअप्स में तेजी लाने के लिए कार्यक्रम चलाना।
     
  • सेवाएं प्रदान करना: एक्सेलेरेटर को स्टार्टअप्स को विशिष्ट सेवाएं प्रदान करनी होंगी जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बाजार अनुसंधान और प्रॉडक्ट पोजीशनिंग के लिए विशेषज्ञ सहायता, (ii) टेक वर्टिकल पर आधारित विशेषज्ञों के माध्यम से मेंटरशिप, (iii) बौद्धिक संपदा और निगमन जैसे मामलों पर कानूनी सहायता, और (iv) निवेशकों के साथ डील क्लोज करने में सहायता।
 

[1]  Vital Stats, Parliament functioning in Monsoon Session 2021, August 11, https://prsindia.org/files/parliament/session_track/2021/vital_stats/Vital%20Stats_Monsoon%20Session%202021.pdf.

[2] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on September 1, 2021, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[3] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on August 1, 2021, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[4] “Cumulative Coverage Report of COVID-19 Vaccination”, Ministry of Health and Family Welfare, August 31, 2021, https://www.mohfw.gov.in/pdf/CummulativeCovidVaccinationReport30August2021.pdf.  

[5] Order No 40-3/2020-DM-I (A), Ministry of Home Affairs, July 28, 2021, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrder_extendexistingorder_28072021.pdf. 

[6] Order No. 40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, August 28, 2021, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrderextendthevalidity_28082021.pdf.

[7] DBT-BIRAC supported ZyCoV-D developed by Zydus Cadila Receives Emergency Use Authorization, Press Information Bureau, Ministry of Science and Technology, August 20, 2021.

[8] Genomic Surveillance for SARS-CoV-2 in India, July 15, 2021, https://www.mohfw.gov.in/pdf/INSACOGGuidanceDocumentdated15July2021final.pdf. 

[9] Standard Operating Procedure for epidemiological surveillance and response in the context of new variant of SARS-CoV-2 virus detected in United Kingdom, Ministry of Health and Family Welfare, December 22, 2020, https://www.mohfw.gov.in/pdf/SOPforSurveillanceandrespo nseforthenewSARSCov2variant.pdf.

[10] Guidelines for domestic travel (flight/train/ship/bus inter-state travel) in supersession of guidelines issued on 24.05.2020, Ministry of Health and Family Welfare, August 25, 2021, https://www.mohfw.gov.in/pdf/Guidelinesfordomestictravelflighttrainshipbusinterstatetravel.pdf.

[11] No. 4/1/2020-IR, Director General of Civil Aviation, August 29, 2021, https://twitter.com/DGCAIndia/status/1431862315729645569/photo/1. 

[12] No. 4/1/2020-IR, Director General of Civil Aviation, August 29, 2021, https://twitter.com/DGCAIndia/status/1421016706432995333/photo/1. 

[13] Estimates of Gross Domestic Product for the First Quarter (April-June) 2021-2022, National Statistical Office, Ministry of Statistics & Programme Implementation, August 31, 2021, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2021/aug/doc202183111.pdf. 

[14] Monetary Policy Statement, 2021-22, Resolution of the Monetary Policy Committee, Reserve Bank of India, August 6, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR6443CF5BB35A0BD4F06BA210A9564B448D5.PDF. 

[15] Quick estimates of Index of Industrial Production and use-based index for the month of June, 2021, Ministry of Statistics and Programme Implementation, August 12, 2021, http://mospi.nic.in/sites/default/files/iipjun21.pdf. 

[16] The Taxation Laws (Amendment) Bill, 2021, Ministry of Finance, August 9, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/120C_2021_ls_Eng.pdf.

[17] The Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (Amendment) Bill, 2021, Ministry of Finance, August 9, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/RSBillTexts/PassedRajyaSabha/deposit%20rs%20pass-04082021-E.pdf.

[18] The Limited Liability Partnership (Amendment) Bill, 2021, Rajya Sabha, August 4, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/RSBillTexts/PassedRajyaSabha/LLP%20rs%20pass-04082021-E.pdf. 

[19] The Limited Liability Partnership Act, 2008, Ministry of Corporate Affairs, as accessed on August 25, 2021, https://mca.gov.in/content/mca/global/en/acts-rules/ebooks/acts.html?act=NDkwMg. 

[20] The General Insurance Business (Nationalisation) Amendment Bill, 2021, Rajya Sabha, August 4, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/RSBillTexts/PassedRajyaSabha/deposit%20rs%20pass-04082021-E.pdf. 

[21] The General Insurance Business (Nationalisation) Act, 1972, Legislative Department, Ministry of Law and Justice, https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1972-57.pdf.  

[22] The Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2021, Lok Sabha, July 28, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/104-C_2021_LS_Eng.pdf. 

[23] The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016, Insolvency and Bankruptcy Board of India, May 28, 2016, https://ibbi.gov.in//uploads/legalframwork/af0143991dbbd963f47def187e86517f.pdf.  

[24] The Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Ordinance, 2021, Insolvency and Bankruptcy Board of India, April 4, 2021, https://ibbi.gov.in//uploads/legalframwork/04af067c22275dd1538ab2b1383b0050.pdf. 

[25] Report No. 32: Implementation of Insolvency and Bankruptcy Code- Pitfalls and Solutions, Standing Committee on Finance, August 3, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Finance/17_Finance_32.pdf. 

[26] Insolvency and Bankruptcy Code, 2016, Ministry of Corporate Affairs, https://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/TheInsolvencyandBankruptcyofIndia.pdf.

[27] “Finance Minister launches the National Monetisation Pipeline”, Press Information Bureau, NITI Aayog, August 23, 2021. 

[28] Draft Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments - Overseas Investment) Rules, 2021, Reserve Bank of India, August 9, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Content/PDFs/FEMRULES750E1F9F46AE48DB8ED6AE6673BC88DC.PDF. 

[29] Foreign Exchange Management (Overseas Investment) Regulations, 2021, Reserve Bank of India, August 9, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Content/PDFs/FEMREGULATIONSDB0E98FD6EA0450C832E8CF5BB83E7B2.PDF. 

[30] Foreign Exchange Management (Transfer or Issue of Any Foreign Security) (Amendment) Regulations, 2004, Reserve Bank of India, July 7, 2004, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/60901.pdf. 

[31] Foreign Exchange Management (Acquisition and transfer of immovable property outside India) Regulations, 2015, Reserve Bank of India, January 21, 2016, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/FEMA7R96F2D8FDA254469C84C3F52330C771AF.PDF. 

[32] “Know all about e-RUPI, the new digital payment instrument”, Press Information Bureau, Ministry of Finance, August 23, 2021, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1743056. 

[33] “Reserve Bank of India introduces the Financial Inclusion Index”, Press Releases, Reserve Bank of India, August 17, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR7033B7A01D0DF9D459D9FF992B53A5538C1.PDF. 

[34] Report of the Expert Committee on Urban Co-Operative Banks, Reserve Bank of India, August 23, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs//PublicationReport/Pdfs/EXPERTCOMMITTEEUCBS4CC84D84A3E64484B7ADD2D1DCB11D3D.PDF. 

[35] SEBI Board Meeting, Securities and Exchange Board of India, August 6, 2021, https://www.sebi.gov.in/media/press-releases/aug-2021/sebi-board-meeting_51707.html. 

[36] Securities and Exchange Board of India (Issue of Capital and Disclosure Requirements) Regulations, 2018, Securities and Exchange Board of India, September 11, 2018, https://www.sebi.gov.in/legal/regulations/may-2021/securities-and-exchange-board-of-india-issue-of-capital-and-disclosure-requirements-regulations-2018-last-amended-on-may-05-2021-_41542.html. 

[37] The Essential Defence Services Bill, 2021, Ministry of Defence, August 5, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/101C_LS_Eng_2021.pdf.

[38] The Essential Defence Services Ordinance, 2021, Gazette of India, Ministry of Law and Justice, June 30, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228004.pdf

[39] The Tribunals Reforms Act, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228989.pdf. 

[40] The Tribunals Reforms (Rationalisation and Conditions of Service) Ordinance, 2021, April 4, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/226364.pdf. 

[41] Madras Bar Association vs Union of India, W.P.(C) No. 502 of 2021, Supreme Court of India, July 14, 2021, https://main.sci.gov.in/supremecourt/2021/10688/10688_2021_36_1501_28573_Judgement_14-Jul-2021.pdf.

[42] The Finance Act, 2017, Ministry of Law and Justice, March 31, 2017, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2017/175141.pdf. 

[43] The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Amendment) Bill, 2021, Ministry of Tribal Affairs, August 9, 2021, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2021/Constitution%20ST%20Order%20Amendment%20Bill,%202021%20Bill%20Text.pdf. 

[44] The Constitution (Scheduled Tribes) Order, 1950, Ministry of Tribal Affairs, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2021/The%20Constitution%20(Scheduled%20Tribes)%20Order%20(Amendment)%20Act,%202021.pdf. 

[45] Report no. 23, Standing Committee on Social Justice and Empowerment: ‘Assessment of Scheme for Implementation of the Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (SIPDA)’, Lok Sabha, August 6, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Social%20Justice%20&%20Empowerment/17_Social_Justice_And_Empowerment_23.pdf.  

[46] S.O. 3123(E), Ministry of Social Justice and Empowerment, Gazette of India, August 3, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228751.pdf.  

[47] S.O. 76(E), Ministry of Social Justice and Empowerment, Gazette of India, January 4, 2018, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_25_54_00002_201649_1517807328299&type=notification&filename=Guidelines%20notification_04.01.2018.pdf.

[48] S.O. 3366(E) and S.O. 3367(E), Ministry of Social Justice and Empowerment, Gazette of India, August 18, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229096.pdf.    

[49] The Rights of Persons with Disabilities Act, 2016, https://legislative.gov.in/sites/default/files/A2016-49_1.pdf. 

[50] The National Commission for Indian System of Medicine (Amendment) Bill, 2021, August 19, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229153.pdf. 

[51] The National Commission for Indian System of Medicine Act, 2020, September 21, 2020, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/221863.pdf. 

[52] The Indian Medicine Central Council Act, 1970, https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1970-48_0.pdf. 

[53] The National Commission for Homoeopathy (Amendment) Act, 2021, August 19, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229156.pdf. 

[54] The National Commission for Homoeopathy Act, 2020, September 21, 2020, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/221864.pdf. 

[55] The Homoeopathy Central Council Act, 1973, https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1973-59.pdf. 

[56] The Homoeopathy Central Council (Amendment) Act, 2018, August 13, 2018, https://egazette.nic.in/writereaddata/2018/188510.pdf 

[57] Report No. 23: The National Institute of Pharmaceutical Education and Research (Amendment) Bill, 2021, Standing Committee on Chemicals and Fertilisers, August 4, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Chemicals%20&%20Fertilizers/17_Chemicals_And_Fertilizers_23.pdf. 

[58] The National Institute of Pharmaceutical Education and Research (Amendment) Bill, 2021, Ministry of Health and Family Welfare, http://164.100.47.4/billstexts/lsbilltexts/asintroduced/24_2007.pdf. 

[59] The National Institute of Pharmaceutical Education and Research Act, 1998, Ministry of Health and Family Welfare, https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1998-13.pdf. 

[60]The Inland Vessels Bill, 2021, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, July 22, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/99_ 2021_LS_Eng.pdf. 

[61]The Inland Vessels Act, 1917, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1917-01.pdf.

[62] The Airports Economic Regulatory Authority of India (Amendment) Bill, 2021, Ministry of Civil Aviation, August 4, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/PassedLoksabha/77-C_2021_LS_ENG.pdf.

[63] Report no 297 on functioning of Airports Authority of India, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, August 2, 2021, https://rajyasabha.nic.in/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/20/148/297_2021_8_11.pdf.  

[64] Report No. 300, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture ‘Promotion of Infrastructure in India's Maritime Sector, Rajya Sabha, August 4, 2021, https://rajyasabha.nic.in/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/20/148/300_2021_8_13.pdf. 

[65] G.S.R. 589 (E), Gazette of India, Ministry of Civil Aviation, August 25, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229221.pdf.

[66] Unmanned Aircraft System Rules, 2021, Ministry of Civil Aviation, March 12, 2021, https://www.dgca.gov.in/digigov-portal/?page=jsp/dgca/InventoryList/RegulationGuidance/Rules/The%20Unmanned%20Aircraft%20System%20Rules/UAS%20Rules,%202021.pdf.

[67] The Aircraft Act, 1934, Ministry of Civil Aviation, https://legislative.gov.in/sites/default/files/A1934-22_0.pdf.

[68] Draft Civil Aviation Requirements: Procedure for examination of the aviation personnel for consumption of Psychoactive Substances, Directorate General of Civil Aviation, August 25, 2021, https://www.dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=150615658.

[69] The Aircraft Rules, 1937, Ministry of Civil Aviation, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_36_0_00013_193422_1523351174422&type=rule&filename=Aircraft%20Rules%201937.pdf.

[70] G.S.R. 526 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 2, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228706.pdf/. 

[71] G.S.R. 527 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 2, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228713.pdf. 

[72] G.S.R. 528 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 2, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228725.pdf. 

[73] “Draft Rules published to fast track Hit&Run Accident investigations and settlement of claims with enhanced compensation”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, August 4, 2021. 

[74] G.S.R. 525 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 2, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228692.pdf. 

[75] Motor Vehicles Act, 1988, Ministry of Road Transport and Highways, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1798/1/AAA1988___59.pdf. 

[76] Central Motor Vehicles Rules, 1989, Ministry of Road Transport and Highways, https://morth.nic.in/sites/default/files/CMVR-chapter5_1.pdf. 

[77] S.O. 3202 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 5, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228832.pdf.  

[78] S.O. 3220 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 5, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228901.pdf. 

[79] Rent a Cab Scheme, 1989, Ministry of Road Transport and Highways, https://www.cbic.gov.in/resources//htdocs-servicetax/st-profiles/rentcab.pdf. 

[80] Rent a Motor Cycle Scheme, 1997, Ministry of Road Transport and Highways, https://himachal.nic.in/WriteReadData/l892s/3_l892s/the_rent_a_motor_cycle_scheme_1997-96609884.pdf. 

[81] Motor Vehicles Act, 1988, Ministry of Road Transport and Highways, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1798/1/AAA1988___59.pdf. 

[82] G.S.R. 594 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 26, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229283.pdf.

[83] Motor Vehicles Act, 1988, Ministry of Road Transport and Highways, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1798/1/AAA1988___59.pdf 

[84] Central Motor Vehicles Rules, 1989, Ministry of Road Transport and Highways, https://morth.nic.in/sites/default/files/CMVR-chapter5_1.pdf.

[85] G.S.R. 575 (E), Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, August 11, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229080.pdf.   

[86] “Draft Document for discussion on re-development of Railway Station”, Railway Board, Ministry of Railways, August 27, 2021, https://indianrailways.gov.in/railwayboard/uploads/directorate/Station_Development/2021/Draft%20MCA%2027_08_21.pdf. 

[87] The Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Act, 2021, August 13, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228982.pdf. 

[88] The Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Ordinance, 2020, April 13, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/226580.pdf.  

[89] The Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Ordinance, 2020, October 28, 2020, https://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/222804.pdf

[90] G.S.R. 571 (E), Ministry of Environment, Forest and Climate Change, August 12, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228947.pdf. 

[91] G.S.R. 169 (E), Ministry of Environment, Forest and Climate Change, March 11, 2021, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/225824.pdf. 

[92] G.S.R. 320 (E), Ministry of Environment, Forest and Climate Change, March 18, 2016, https://cpcb.nic.in/displaypdf.php?id=cGxhc3RpY3dhc3RlL1BXTV9HYXpldHRlLnBkZg.  

[93] The Central Universities (Amendment) Bill, 2021, Ministry of Education, August 9, 2021,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/119_2021_LS-ENG.pdf.

[94] “Report No. 328, Plans for Bridging the Learning Gap caused due to School Lockdown as well as Review of online and offline Instructions and Examinations and Plans for re-opening of Schools”, Standing Committee on Education, Women, Children, Youth, and Sport, August 6, 2021, https://rajyasabha.nic.in/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/16/144/328_2021_8_15.pdf. 

[95] The Coconut Development Board (Amendment) Bill, 2021, Ministry of Agriculture and Farmers Welfare, July 29, 2021, http://164.100.47.4/BillsTexts/RSBillTexts/asintroduced/coconut%20as%20int-E.pdf. 

[96] Report No. 13, Standing Committee on Food, Consumer Affairs and Public Distribution: ‘Procurement, Storage and Distribution of Foodgrains by Food Corporation of India’, Lok Sabha, August 9, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Food,%20Consumer%20Affairs%20&%20Public%20Distribution/17_Food_Consumer_Affairs_And_Public_Distribution_13.pdf.

[97] Report no 16 on Pradhan Mantri Awaas Yojana – Gramin: PMAY (G), Standing Committee on Rural Development, August 5, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Rural%20Development/17_Rural_Development_16.pdf.   

[98] “Cabinet approves implementation of National Mission on Edible Oils – Oil Palm”, Press Information Bureau, Ministry of Agriculture and Farmers’ Welfare, August 18, 2021.

[99] Notification No: 19/2015-20, Department of Commerce, Ministry of Commerce and Industry, August 17, 2021, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2021/aug/doc202181701.pdf. 

[100] Report No. 25: Impact of COVID-19 on rising unemployment and loss of jobs and livelihoods in organised and unorganised sectors, Standing Committee on Labour, August 3, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Labour/17_Labour_25.pdf.

[101] “Registration of Unorganized Workers begins across the Country as Government of India launches the e-Shram Portal”, Press Information Bureau, August 26, 2021, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1749294. 

[102] e-Shram, Ministry of Labour and Employment, https://eshram.gov.in/. 

[103] S.O. 3219(E), Ministry of Labour and Employment, Gazette of India, August 3, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/228913.pdf.

[104] Office Memorandum No. D-26011/04/2017-DBT, Cabinet Secretariat (Direct Benefit Transfer Mission), Government of India, December 19, 2017, https://dbtbharat.gov.in/data/om/Aadhaar_Exception_Handling_OM_19122017.pdf.

[105] Flood Management in the Country including International Water Treaties in the field of Water Resource Management with particular reference to Treaty/Agreement entered into with China, Pakistan and Bhutan, Standing Committee on Water Resources, August 5, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Water%20Resources/17_Water_Resources_12.pdf. 

[106] Eighth report on allotment of retail outlets and LPG distributorships, Standing Committee on Petroleum and Natural Gas, August 6, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Petroleum%20&%20Natural%20Gas/17_Petroleum_And_Natural_Gas_8.pdf.   

[107] Report No. 20 – Tidal Power Development in India, Standing Committee on Energy 2020-21, August 5, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Energy/17_Energy_20.pdf.

[108] Report No. 19 – Delay in Execution/Completion of Power Projects by Power Sector Companies, Standing Committee on Energy, August 5, 2021, http://164.100.47.193/lsscommittee/Energy/17_Energy_19.pdf. 

[109] Draft Electricity (Promoting renewable energy through Green Energy Open Access) Rules, 2021, Ministry of Power, August 16, 2021, https://powermin.gov.in/sites/default/files/webform/notices/Seeking_comments_on_Draft_Electricity_Promoting_renewable_energy_through_Green_Energy_Open_Access%20_Rules_2021.pdf. 

[110] Draft Electricity (Late Payment Surcharge) Amendment Rules, 2021, Ministry of Power, August 19, 2021, https://powermin.gov.in/sites/default/files/webform/notices/Seeking_comments_on_Draft_Electricity_Late_Payment_Surcharge_Amendment_Rules_2021.pdf. 

[111] The Electricity (Late Payment Surcharge) Rules, 2021, Ministry of Power, February 22, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/225360.pdf. 

[112] Guidelines for Encouraging Competition in Development of Transmission Projects, Ministry of Power, August 10, 2021, https://powermin.gov.in/sites/default/files/webform/notices/Guidelines.pdf. 

[113] F. No. 23/35/2019-R&R, Ministry of Power, August 17, 2021, https://egazette.nic.in/WriteReadData/2021/229126.pdf. 

[114] Recommendations on Enabling Unbundling of Different Layers Through Differential Licensing, Telecom Regulatory Authority of India, August 19, 2021, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/Recommendation_19082021_0.pdf.

[115] TRAI releases Recommendations on 'Enabling Unbundling of Different Layers Through Differential Licensing, Telecom Regulatory Authority of India, August 19, 2021, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/PR_No.36of2021.pdff

[116] “Recommendations on Roadmap to Promote Broadband Connectivity and Enhanced Broadband Speed”, Telecom Regulatory Authority of India, August 31, 2021, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/Recommendations_31082021_0.pdf. 

[117] National Digital Communications Policy 2018, Ministry of Electronics and Information Technology,  https://dot.gov.in/sites/default/files/EnglishPolicy-NDCP.pdf. 

[118] “SAMRIDH Scheme Document”, Ministry of Electronics and Information Technology, August 31, 2021, https://www.meity.gov.in/writereaddata/files/SAMRIDH%20Scheme%20Document.pdf. 

 

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